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AP · Class 10 · 🧮 Maths · Chapter 2

Polynomials

బహుపది శూన్యాలుశూన్యాలు మరియు గుణకాల మధ్య సంబంధంవర్గ బహుపదులుఘన బహుపదులుభాగాహార అల్గోరిథం

ఈ అధ్యాయం బహుపదుల గురించి లోతైన అవగాహనను అందిస్తుంది. విద్యార్థులు బహుపదుల శూన్యాలను కనుగొనడం, శూన్యాలకు మరియు గుణకాలకు మధ్య సంబంధాన్ని ధృవీకరించడం నేర్చుకుంటారు. రేఖీయ, వర్గ, ఘన బహుపదుల భాగాహార అల్గోరిథంను అర్థం చేసుకుంటారు. ఈ భావనలు బీజగణితంలో చాలా ముఖ్యమైనవి మరియు తదుపరి తరగతులలో సంక్లిష్ట సమస్యలను పరిష్కరించడానికి పునాదిని ఏర్పరుస్తాయి.

बहुपद का परिचय और प्रकार

एक बहुपद \(P(x)\) एक बीजीय व्यंजक है जिसमें चर की घात हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है।

  • बहुपद का मानक रूप: \(a_nx^n + a_{n-1}x^{n-1} + \dots + a_1x + a_0\), जहाँ \(a_n \neq 0\) और \(a_0, a_1, \dots, a_n\) वास्तविक संख्याएँ हैं।
  • बहुपद की घात: चर की सबसे बड़ी घात
  • उदाहरण: \(5x^3 - 2x^2 + 7x - 1\) की घात 3 है।
  • गुणांक: चर के साथ गुणा की गई संख्याएँ।
  • उदाहरण: \(5x^3 - 2x^2 + 7x - 1\) में, \(x^3\) का गुणांक 5 है, \(x^2\) का गुणांक -2 है, \(x\) का गुणांक 7 है, और अचर पद -1 है।

बहुपद के प्रकार (घात के आधार पर):

  • रैखिक बहुपद: घात 1।
  • रूप: \(ax + b\), जहाँ \(a \neq 0\)।
  • उदाहरण: \(2x + 3\), \(y - 5\)।
  • द्विघात बहुपद: घात 2।
  • रूप: \(ax^2 + bx + c\), जहाँ \(a \neq 0\)।
  • उदाहरण: \(x^2 - 4x + 4\), \(3y^2 + 2y\)।
  • त्रिघात बहुपद: घात 3।
  • रूप: \(ax^3 + bx^2 + cx + d\), जहाँ \(a \neq 0\)।
  • उदाहरण: \(x^3 - 3x^2 + x + 1\), \(2z^3 + 5\).

बहुपद के शून्यक:

  • चर के वे मान जिनके लिए बहुपद का मान शून्य हो जाता है।
  • यदि \(P(k) = 0\) है, तो \(k\) बहुपद \(P(x)\) का एक शून्यक है।
  • एक बहुपद की अधिकतम शून्यकों की संख्या उसकी घात के बराबर होती है।
  • रैखिक बहुपद में अधिकतम एक शून्यक
  • द्विघात बहुपद में अधिकतम दो शून्यक
  • त्रिघात बहुपद में अधिकतम तीन शून्यक
ముఖ్యమైనది

याद रखें: \(x^{-1}\), \(\sqrt{x}\), \(\frac{1}{x}\) वाले व्यंजक बहुपद नहीं होते क्योंकि चर की घात पूर्ण संख्या नहीं होती।

📖నిర్వచనం

शून्यक (Zeroes): बहुपद के शून्यक वे \(x\) मान होते हैं जहाँ बहुपद का मान शून्य होता है। इन्हें बहुपद के मूल (roots) भी कहा जाता है।

बहुपद के शून्यकों का ज्यामितीय अर्थ

एक बहुपद \(P(x)\) के शून्यक वे \(x\) निर्देशांक होते हैं जहाँ \(y = P(x)\) का ग्राफ x-अक्ष को काटता या स्पर्श करता है।

  • रैखिक बहुपद (\(ax + b\)):
  • ग्राफ एक सीधी रेखा होती है।
  • यह x-अक्ष को ठीक एक बिंदु पर काटता है।
  • अतः, रैखिक बहुपद का ठीक एक शून्यक होता है।
  • शून्यक: \(x = -b/a\)
  • द्विघात बहुपद (\(ax^2 + bx + c\)):
  • ग्राफ एक परवलय (parabola) होता है।
  • यह x-अक्ष को अधिकतम दो बिंदुओं पर काट सकता है।
  • संभावित स्थितियाँ:
  1. दो अलग-अलग शून्यक: परवलय x-अक्ष को दो अलग-अलग बिंदुओं पर काटता है।
  2. एक शून्यक (दो संपाती शून्यक): परवलय x-अक्ष को एक बिंदु पर स्पर्श करता है।
  3. कोई शून्यक नहीं: परवलय x-अक्ष को बिल्कुल नहीं काटता है (या तो पूरी तरह ऊपर या पूरी तरह नीचे होता है)।
  • त्रिघात बहुपद (\(ax^3 + bx^2 + cx + d\)):
  • ग्राफ x-अक्ष को अधिकतम तीन बिंदुओं पर काट सकता है।
  • अतः, त्रिघात बहुपद के अधिकतम तीन शून्यक होते हैं।

शून्यकों की संख्या ज्ञात करना (ग्राफ से):

  1. \(y = P(x)\) का ग्राफ देखें।
  2. गिनें कि ग्राफ x-अक्ष को कितने बिंदुओं पर काटता या स्पर्श करता है।
  3. उन बिंदुओं की संख्या ही बहुपद के शून्यकों की संख्या होती है।
💡సూచన

बोर्ड परीक्षा में अक्सर ग्राफ देखकर शून्यकों की संख्या बताने वाले प्रश्न आते हैं। यह बहुत आसान स्कोरिंग टॉपिक है।

द्विघात बहुपद के शून्यक और गुणांकों के बीच संबंध

एक द्विघात बहुपद \(ax^2 + bx + c\) के लिए, जहाँ \(a \neq 0\), यदि \(\alpha\) और \(\beta\) इसके शून्यक हैं, तो:

  • शून्यकों का योग: \(\alpha + \beta = -\frac{b}{a} = -\frac{\text{x का गुणांक}}{\text{x}^2 \text{ का गुणांक}}

\)

  • शून्यकों का गुणनफल: \(\alpha \beta = \frac{c}{a} = \frac{\text{अचर पद}}{\text{x}^2 \text{ का गुणांक}}

\)

शून्यक दिए होने पर द्विघात बहुपद बनाना: यदि शून्यक \(\alpha\) और \(\beta\) दिए गए हैं, तो द्विघात बहुपद को इस प्रकार लिखा जा सकता है: \(P(x) = k[x^2 - (\alpha + \beta)x + \alpha \beta]\), जहाँ \(k\) कोई वास्तविक संख्या है। या \(P(x) = k[x^2 - (\text{शून्यकों का योग})x + (\text{शून्यकों का गुणनफल})]\)

उदाहरण: यदि शून्यक 2 और -3 हैं, तो:

  • शून्यकों का योग \(= 2 + (-3) = -1\)
  • शून्यकों का गुणनफल \(= 2 \times (-3) = -6\)
  • बहुपद \(= k[x^2 - (-1)x + (-6)] = k[x^2 + x - 6]\)
  • यदि \(k=1\), तो बहुपद \(x^2 + x - 6\) है।
🧮సూత్రం

द्विघात बहुपद के लिए संबंध:

  • \(\alpha + \beta = -b/a\)
  • \(\alpha \beta = c/a\)

बहुपद बनाने का सूत्र: \(P(x) = k[x^2 - (\alpha + \beta)x + \alpha \beta]\)

त्रिघात बहुपद के शून्यक और गुणांकों के बीच संबंध

एक त्रिघात बहुपद \(ax^3 + bx^2 + cx + d\) के लिए, जहाँ \(a \neq 0\), यदि \(\alpha, \beta, \gamma\) इसके शून्यक हैं, तो:

  • शून्यकों का योग: \(\alpha + \beta + \gamma = -\frac{b}{a} = -\frac{\text{x}^2 \text{ का गुणांक}}{\text{x}^3 \text{ का गुणांक}}

\)

  • शून्यकों के गुणनफल का योग (दो-दो करके): \(\alpha \beta + \beta \gamma + \gamma \alpha = \frac{c}{a} = \frac{\text{x का गुणांक}}{\text{x}^3 \text{ का गुणांक}}

\)

  • शून्यकों का गुणनफल: \(\alpha \beta \gamma = -\frac{d}{a} = -\frac{\text{अचर पद}}{\text{x}^3 \text{ का गुणांक}}

\)

शून्यक दिए होने पर त्रिघात बहुपद बनाना: यदि शून्यक \(\alpha, \beta, \gamma\) दिए गए हैं, तो त्रिघात बहुपद को इस प्रकार लिखा जा सकता है: \(P(x) = k[x^3 - (\alpha + \beta + \gamma)x^2 + (\alpha \beta + \beta \gamma + \gamma \alpha)x - \alpha \beta \gamma]\), जहाँ \(k\) कोई वास्तविक संख्या है।

उदाहरण: यदि शून्यकों का योग = 2, दो-दो करके गुणनफल का योग = -7, और गुणनफल = -14 है, तो बहुपद है: \(P(x) = k[x^3 - (2)x^2 + (-7)x - (-14)] = k[x^3 - 2x^2 - 7x + 14]\)

  • यदि \(k=1\), तो बहुपद \(x^3 - 2x^2 - 7x + 14\) है।
🧮సూత్రం

त्रिघात बहुपद के लिए संबंध:

  • \(\alpha + \beta + \gamma = -b/a\)
  • \(\alpha \beta + \beta \gamma + \gamma \alpha = c/a\)
  • \(\alpha \beta \gamma = -d/a\)

बहुपद बनाने का सूत्र: \(P(x) = k[x^3 - (\alpha + \beta + \gamma)x^2 + (\alpha \beta + \beta \gamma + \gamma \alpha)x - \alpha \beta \gamma]\)

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

त्रिघात बहुपद के शून्यकों और गुणांकों के बीच संबंध में चिन्हों का ध्यान रखें: \(-b/a\), \(c/a\), \(-d/a\)। अक्सर छात्र इन्हें भूल जाते हैं।

बहुपदों के लिए विभाजन एल्गोरिथम

यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथम की तरह ही, बहुपदों के लिए भी एक विभाजन एल्गोरिथम है।

प्रमेय: यदि \(P(x)\) और \(G(x)\) कोई दो बहुपद हैं, जहाँ \(G(x) \neq 0\), तो हम ऐसे बहुपद \(Q(x)\) (भागफल) और \(R(x)\) (शेषफल) ज्ञात कर सकते हैं कि: \(P(x) = G(x) \times Q(x) + R(x)\) जहाँ \(R(x) = 0\) या \(\text{deg } R(x) < \text{deg } G(x)\).

  • \(P(x)\) = भाज्य (Dividend)
  • \(G(x)\) = भाजक (Divisor)
  • \(Q(x)\) = भागफल (Quotient)
  • \(R(x)\) = शेषफल (Remainder)

विभाजन प्रक्रिया के चरण:

  1. भाज्य और भाजक को उनकी घातों के घटते क्रम में व्यवस्थित करें।
  2. भाज्य के पहले पद को भाजक के पहले पद से विभाजित करके भागफल का पहला पद प्राप्त करें।
  3. भागफल के इस पद को पूरे भाजक से गुणा करें और परिणाम को भाज्य से घटाएँ।
  4. घटाने के बाद प्राप्त बहुपद को नया भाज्य मानें और प्रक्रिया तब तक दोहराएँ जब तक शेषफल की घात भाजक की घात से कम न हो जाए या शेषफल शून्य न हो जाए।

महत्वपूर्ण निष्कर्ष:

  • यदि \(R(x) = 0\) है, तो \(G(x)\) बहुपद \(P(x)\) का एक गुणनखंड है।
  • यदि \(\alpha\) बहुपद \(P(x)\) का एक शून्यक है, तो \((x - \alpha)\) बहुपद \(P(x)\) का एक गुणनखंड है।
  • यदि किसी बहुपद के कुछ शून्यक दिए गए हैं, तो उन शून्यकों से बनने वाले गुणनखंडों के गुणनफल से बहुपद को विभाजित करके अन्य शून्यक ज्ञात किए जा सकते हैं।
🧮సూత్రం

विभाजन एल्गोरिथम: \(P(x) = G(x) \times Q(x) + R(x)\) जहाँ \(R(x) = 0\) या \(\text{deg } R(x) < \text{deg } G(x)\)

💡సూచన

इस खंड से 3-5 अंकों के प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, खासकर जब आपको अन्य शून्यक ज्ञात करने हों। विभाजन प्रक्रिया में सावधानी बरतें।

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