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AP · Class 10 · 🧮 Maths · Chapter 7

Co-Ordinate Geometry

దూర సూత్రంవిభజన సూత్రంమధ్యబిందువు సూత్రంకార్టీసియన్ నిరూపకాలుఅక్షాలుమూలబిందువు

నిరూపక జ్యామితి అనేది జ్యామితి సమస్యలను బీజగణిత పద్ధతులను ఉపయోగించి పరిష్కరించడానికి సహాయపడే గణిత శాఖ. ఈ అధ్యాయంలో, మీరు కార్టీసియన్ తలంలో రెండు బిందువుల మధ్య దూరాన్ని కనుగొనడం, ఒక రేఖాఖండాన్ని ఇచ్చిన నిష్పత్తిలో విభజించే బిందువుల నిరూపకాలను కనుగొనడం మరియు మధ్యబిందువు సూత్రాన్ని ఉపయోగించడం నేర్చుకుంటారు. ఈ భావనలు నిజ జీవిత పరిస్థితులలో, ముఖ్యంగా నావిగేషన్ మరియు ఇంజనీరింగ్‌లో చాలా ఉపయోగకరంగా ఉంటాయి.

निर्देशांक ज्यामिति का परिचय

निर्देशांक ज्यामिति गणित की वह शाखा है जो ज्यामिति की समस्याओं को हल करने के लिए बीजगणित का उपयोग करती है। यह हमें ज्यामितीय आकृतियों का अध्ययन करने और बिंदुओं, रेखाओं और वक्रों के बीच संबंधों को बीजगणितीय रूप से व्यक्त करने में मदद करती है।

कार्तीय तल (Cartesian Plane)

  • क्षैतिज रेखा को x-अक्ष कहते हैं।
  • ऊर्ध्वाधर रेखा को y-अक्ष कहते हैं।
  • दोनों अक्ष जिस बिंदु पर प्रतिच्छेद करते हैं, उसे मूलबिंदु (Origin) कहते हैं, जिसके निर्देशांक \((0,0)\) होते हैं।
  • एक बिंदु के निर्देशांक \((x, y)\) के रूप में लिखे जाते हैं, जहाँ:
  • \(x\) को भुज (Abscissa) कहते हैं (y-अक्ष से दूरी)।
  • \(y\) को कोटि (Ordinate) कहते हैं (x-अक्ष से दूरी)।

चतुर्थांश (Quadrants)

कार्तीय तल को चार चतुर्थांशों में विभाजित किया गया है:

  • प्रथम चतुर्थांश (I): \((+, +)\) - \(x > 0, y > 0\)
  • द्वितीय चतुर्थांश (II): \((-, +)\) - \(x < 0, y > 0\)
  • तृतीय चतुर्थांश (III): \((-, -)\) - \(x < 0, y < 0\)
  • चतुर्थ चतुर्थांश (IV): \((+, -)\) - \(x > 0, y < 0\)

| चतुर्थांश | x-निर्देशांक | y-निर्देशांक | |---|---|---| | I | धनात्मक (+) | धनात्मक (+) | | II | ऋणात्मक (-) | धनात्मक (+) | | III | ऋणात्मक (-) | ऋणात्मक (-) | | IV | धनात्मक (+) | ऋणात्मक (-) |

ముఖ్యమైనది

किसी भी बिंदु के निर्देशांक हमेशा पहले x-निर्देशांक और फिर y-निर्देशांक के रूप में लिखे जाते हैं, जैसे \((x, y)\)।

दूरी सूत्र (Distance Formula)

दो बिंदुओं \(P(x_1, y_1)\) और \(Q(x_2, y_2)\) के बीच की दूरी \(PQ\) को ज्ञात करने के लिए दूरी सूत्र का उपयोग किया जाता है। यह पाइथागोरस प्रमेय पर आधारित है।

दूरी सूत्र का व्युत्पत्ति (Derivation of Distance Formula)

माना कार्तीय तल में दो बिंदु \(P(x_1, y_1)\) और \(Q(x_2, y_2)\) हैं।

  • x-अक्ष पर \(P\) से \(PR\) और \(Q\) से \(QS\) लंब खींचिए।
  • \(P\) से \(QS\) पर \(PT\) लंब खींचिए।
  • अब, \(PT\) की लंबाई \(RS\) के बराबर है।
  • \(RS = OS - OR = x_2 - x_1\)
  • \(QT\) की लंबाई \(QS - TS\) के बराबर है।
  • \(TS = PR = y_1\)
  • \(QT = QS - TS = y_2 - y_1\)
  • समकोण त्रिभुज \(\triangle PTQ\) में, पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार:
  • \(PQ^2 = PT^2 + QT^2\)
  • \(PQ^2 = (x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2\)
  • \(PQ = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}\)

मूलबिंदु से दूरी (Distance from Origin)

यदि एक बिंदु \(P(x, y)\) है, तो मूलबिंदु \(O(0,0)\) से उसकी दूरी होगी:

  • \(OP = \sqrt{(x - 0)^2 + (y - 0)^2}\)
  • \(OP = \sqrt{x^2 + y^2}\)

संरेखीय बिंदु (Collinear Points)

तीन या अधिक बिंदु संरेखीय कहलाते हैं यदि वे एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों।

  • यदि तीन बिंदु \(A, B, C\) संरेखीय हैं, तो \(AB + BC = AC\) या \(BC + CA = AB\) या \(CA + AB = BC\) होगा।
  • अर्थात्, किन्हीं दो दूरियों का योग तीसरी दूरी के बराबर होगा।
🧮సూత్రం

दूरी सूत्र: दो बिंदुओं \((x_1, y_1)\) और \((x_2, y_2)\) के बीच की दूरी \(d\) है: \(d = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}\)

💡సూచన

दूरी सूत्र में \((x_1 - x_2)^2\) और \((x_2 - x_1)^2\) एक ही परिणाम देते हैं क्योंकि वर्ग करने पर ऋणात्मक चिन्ह समाप्त हो जाता है।

दूरी सूत्र से संबंधित समस्याएं

दूरी सूत्र का उपयोग विभिन्न ज्यामितीय समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है, जैसे:

त्रिभुजों के प्रकार ज्ञात करना

  • समबाहु त्रिभुज: तीनों भुजाओं की लंबाई बराबर होती है। \(AB = BC = CA\)
  • समद्विबाहु त्रिभुज: किन्हीं दो भुजाओं की लंबाई बराबर होती है। \(AB = BC \text{ या } BC = CA \text{ या } CA = AB\)
  • विषमबाहु त्रिभुज: तीनों भुजाओं की लंबाई अलग-अलग होती है। \(AB \neq BC \neq CA\)
  • समकोण त्रिभुज: पाइथागोरस प्रमेय का पालन करता है (सबसे लंबी भुजा का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है)। \(AB^2 + BC^2 = AC^2\) (यदि \(AC\) सबसे लंबी भुजा है)

चतुर्भुजों के प्रकार ज्ञात करना

दूरी सूत्र का उपयोग करके चतुर्भुज की भुजाओं और विकर्णों की लंबाई ज्ञात करके उसके प्रकार का निर्धारण किया जा सकता है।

| चतुर्भुज का प्रकार | भुजाओं की स्थिति | विकर्णों की स्थिति | |---|---|---| | वर्ग | सभी भुजाएँ बराबर \(AB=BC=CD=DA\) | विकर्ण बराबर \(AC=BD\) और एक दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं | | समचतुर्भुज | सभी भुजाएँ बराबर \(AB=BC=CD=DA\) | विकर्ण बराबर नहीं \(AC \neq BD\) और एक दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं | | आयत | सम्मुख भुजाएँ बराबर \(AB=CD, BC=DA\) | विकर्ण बराबर \(AC=BD\) और एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं | | समांतर चतुर्भुज | सम्मुख भुजाएँ बराबर \(AB=CD, BC=DA\) | विकर्ण बराबर नहीं \(AC \neq BD\) और एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं |

x-अक्ष या y-अक्ष पर समदूरस्थ बिंदु ज्ञात करना

  • x-अक्ष पर बिंदु: \((x, 0)\) के रूप में होता है।
  • y-अक्ष पर बिंदु: \((0, y)\) के रूप में होता है।
  • यदि एक बिंदु दो अन्य बिंदुओं से समदूरस्थ है, तो उन दूरियों को बराबर करके समीकरण बनाया जाता है और हल किया जाता है।
🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

चतुर्भुज के प्रकार निर्धारित करते समय, केवल भुजाओं की लंबाई की जांच करना पर्याप्त नहीं है। विकर्णों की लंबाई की जांच करना भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, वर्ग और समचतुर्भुज दोनों की सभी भुजाएँ बराबर होती हैं।

विभाजन सूत्र (Section Formula)

विभाजन सूत्र का उपयोग एक रेखाखंड को एक दिए गए अनुपात में विभाजित करने वाले बिंदु के निर्देशांक ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

आंतरिक विभाजन (Internal Division)

यदि बिंदु \(P(x, y)\) एक रेखाखंड को, जिसके अंतबिंदु \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_2)\) हैं, आंतरिक रूप से \(m_1 : m_2\) के अनुपात में विभाजित करता है, तो \(P\) के निर्देशांक इस प्रकार दिए जाते हैं:

विभाजन सूत्र का व्युत्पत्ति (Derivation of Section Formula)

माना बिंदु \(P(x,y)\) रेखाखंड \(AB\) को \(m_1:m_2\) के अनुपात में विभाजित करता है, जहाँ \(A(x_1,y_1)\) और \(B(x_2,y_2)\) हैं।

  • \(AR, PS, BT\) को x-अक्ष पर लंब खींचिए।
  • \(AQ\) और \(PC\) को x-अक्ष के समानांतर खींचिए।
  • \(\triangle PAQ\) और \(\triangle BPC\) समरूप त्रिभुज हैं (AA समरूपता कसौटी से)।
  • इसलिए, संगत भुजाओं का अनुपात बराबर होगा:
  • \(\frac{PA}{PB} = \frac{AQ}{PC} = \frac{PQ}{BC}\)
  • हमें दिया गया है \(\frac{PA}{PB} = \frac{m_1}{m_2}\)
  • \(AQ = RS = OS - OR = x - x_1\)
  • \(PC = ST = OT - OS = x_2 - x\)
  • \(PQ = PS - QS = PS - AR = y - y_1\)
  • \(BC = BT - CT = BT - PS = y_2 - y\)
  • अब, \(\frac{m_1}{m_2} = \frac{x - x_1}{x_2 - x}\)
  • \(m_1(x_2 - x) = m_2(x - x_1)\)
  • \(m_1x_2 - m_1x = m_2x - m_2x_1\)
  • \(m_1x_2 + m_2x_1 = m_2x + m_1x\)
  • \(m_1x_2 + m_2x_1 = x(m_1 + m_2)\)
  • \(x = \frac{m_1x_2 + m_2x_1}{m_1 + m_2}\)
  • इसी प्रकार, \(\frac{m_1}{m_2} = \frac{y - y_1}{y_2 - y}\)
  • \(m_1(y_2 - y) = m_2(y - y_1)\)
  • \(m_1y_2 - m_1y = m_2y - m_2y_1\)
  • \(m_1y_2 + m_2y_1 = m_2y + m_1y\)
  • \(m_1y_2 + m_2y_1 = y(m_1 + m_2)\)
  • \(y = \frac{m_1y_2 + m_2y_1}{m_1 + m_2}\)

मध्यबिंदु सूत्र (Midpoint Formula)

यदि बिंदु \(P\) एक रेखाखंड \(AB\) का मध्यबिंदु है, तो यह रेखाखंड को \(1:1\) के अनुपात में विभाजित करता है (अर्थात् \(m_1 = 1, m_2 = 1\))। इस स्थिति में, मध्यबिंदु \(P(x, y)\) के निर्देशांक होंगे:

  • \(x = \frac{1 \cdot x_2 + 1 \cdot x_1}{1 + 1} = \frac{x_1 + x_2}{2}\)
  • \(y = \frac{1 \cdot y_2 + 1 \cdot y_1}{1 + 1} = \frac{y_1 + y_2}{2}\)
🧮సూత్రం

विभाजन सूत्र (आंतरिक विभाजन): बिंदु \(P(x, y)\) जो \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_2)\) को \(m_1 : m_2\) के अनुपात में विभाजित करता है, उसके निर्देशांक हैं: \(P(x, y) = \left( \frac{m_1x_2 + m_2x_1}{m_1 + m_2}, \frac{m_1y_2 + m_2y_1}{m_1 + m_2} \right)\)

🧮సూత్రం

मध्यबिंदु सूत्र: बिंदु \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_2)\) के मध्यबिंदु \(M(x, y)\) के निर्देशांक हैं: \(M(x, y) = \left( \frac{x_1 + x_2}{2}, \frac{y_1 + y_2}{2} \right)\)

विभाजन सूत्र से संबंधित समस्याएं

विभाजन सूत्र का उपयोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है:

अनुपात ज्ञात करना

  • यदि एक बिंदु \(P(x,y)\) एक रेखाखंड \(AB\) को विभाजित करता है, और \(A(x_1, y_1)\) तथा \(B(x_2, y_2)\) दिए गए हैं, तो अनुपात \(m_1:m_2\) ज्ञात करने के लिए विभाजन सूत्र का उपयोग किया जाता है।
  • अक्सर अनुपात को \(k:1\) माना जाता है, जिससे गणना आसान हो जाती है। यदि \(k\) धनात्मक आता है, तो विभाजन आंतरिक है; यदि ऋणात्मक आता है, तो विभाजन बाह्य है।

त्रि-विभाजन बिंदु (Points of Trisection)

  • एक रेखाखंड के त्रि-विभाजन बिंदु वे बिंदु होते हैं जो रेखाखंड को तीन बराबर भागों में विभाजित करते हैं।
  • यदि \(P\) और \(Q\) रेखाखंड \(AB\) के त्रि-विभाजन बिंदु हैं, तो \(AP = PQ = QB\) होता है।
  • पहला त्रि-विभाजन बिंदु \(P\): यह \(AB\) को \(1:2\) के अनुपात में विभाजित करता है।
  • दूसरा त्रि-विभाजन बिंदु \(Q\): यह \(AB\) को \(2:1\) के अनुपात में विभाजित करता है।
  • वैकल्पिक रूप से, \(Q\) बिंदु \(PB\) का मध्यबिंदु हो सकता है, या \(P\) बिंदु \(AQ\) का मध्यबिंदु हो सकता है।

अक्षों द्वारा विभाजन (Division by Axes)

  • x-अक्ष द्वारा विभाजन: यदि x-अक्ष एक रेखाखंड को विभाजित करता है, तो विभाजन बिंदु \((x, 0)\) के रूप में होगा। इस स्थिति में, विभाजन सूत्र में \(y\)-निर्देशांक को शून्य के बराबर करके अनुपात ज्ञात किया जाता है।
  • y-अक्ष द्वारा विभाजन: यदि y-अक्ष एक रेखाखंड को विभाजित करता है, तो विभाजन बिंदु \((0, y)\) के रूप में होगा। इस स्थिति में, विभाजन सूत्र में \(x\)-निर्देशांक को शून्य के बराबर करके अनुपात ज्ञात किया जाता है।
గుర్తుంచుకోండి

जब अनुपात \(k:1\) के रूप में लेते हैं, तो यदि \(k\) का मान ऋणात्मक आता है, तो इसका अर्थ है कि विभाजन बाह्य है। हालांकि, कक्षा 10 में मुख्य रूप से आंतरिक विभाजन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

मध्यबिंदु सूत्र से संबंधित समस्याएं

मध्यबिंदु सूत्र विभाजन सूत्र का एक विशेष मामला है जहाँ अनुपात \(1:1\) होता है। इसका उपयोग विभिन्न ज्यामितीय समस्याओं में किया जाता है:

वृत्त का केंद्र और व्यास (Centre and Diameter of a Circle)

  • एक वृत्त का केंद्र उसके व्यास का मध्यबिंदु होता है।
  • यदि व्यास के अंतबिंदु \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_2)\) दिए गए हैं, तो केंद्र के निर्देशांक मध्यबिंदु सूत्र का उपयोग करके ज्ञात किए जा सकते हैं।
  • यदि केंद्र और एक अंतबिंदु दिया गया है, तो दूसरे अंतबिंदु को \((x, y)\) मानकर मध्यबिंदु सूत्र से हल किया जा सकता है।

चतुर्भुजों के गुण (Properties of Quadrilaterals)

  • समांतर चतुर्भुज (Parallelogram): एक चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज होता है यदि उसके विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। इसका मतलब है कि दोनों विकर्णों का मध्यबिंदु समान होता है।
  • विकर्ण \(AC\) का मध्यबिंदु = विकर्ण \(BD\) का मध्यबिंदु।
  • यह गुण वर्ग, आयत और समचतुर्भुज पर भी लागू होता है, क्योंकि ये सभी समांतर चतुर्भुज के विशेष मामले हैं।

रेखाखंड को समान भागों में विभाजित करना

  • यदि एक रेखाखंड को \(n\) समान भागों में विभाजित करना है, तो \(n-1\) विभाजन बिंदु होंगे।
  • उदाहरण के लिए, चार समान भागों में विभाजित करने के लिए तीन बिंदु \(P, Q, R\) होंगे।
  • \(Q\) रेखाखंड \(AB\) का मध्यबिंदु होगा।
  • \(P\) रेखाखंड \(AQ\) का मध्यबिंदु होगा।
  • \(R\) रेखाखंड \(QB\) का मध्यबिंदु होगा।

त्रिभुज का केंद्रक (Centroid of a Triangle)

  • त्रिभुज का केंद्रक माध्यिकाओं का प्रतिच्छेदन बिंदु होता है।
  • यदि त्रिभुज के शीर्ष \(A(x_1, y_1), B(x_2, y_2)\) और \(C(x_3, y_3)\) हैं, तो केंद्रक \(G(x, y)\) के निर्देशांक हैं:
  • \(G(x, y) = \left( \frac{x_1 + x_2 + x_3}{3}, \frac{y_1 + y_2 + y_3}{3} \right)\)
  • यह सूत्र विभाजन सूत्र से व्युत्पन्न किया जा सकता है, क्योंकि केंद्रक माध्यिका को \(2:1\) के अनुपात में विभाजित करता है।

चतुर्भुज का क्षेत्रफल (Area of Quadrilateral)

  • यदि चतुर्भुज के शीर्ष \((x_1, y_1), (x_2, y_2), (x_3, y_3)\) और \((x_4, y_4)\) क्रम में दिए गए हैं, तो इसका क्षेत्रफल ज्ञात करने का एक तरीका इसे दो त्रिभुजों में विभाजित करना और त्रिभुज के क्षेत्रफल सूत्र का उपयोग करना है।
  • समचतुर्भुज का क्षेत्रफल: यदि \(d_1\) और \(d_2\) विकर्णों की लंबाई हैं, तो क्षेत्रफल \(= \frac{1}{2} d_1 d_2\) होता है। दूरी सूत्र का उपयोग करके विकर्णों की लंबाई ज्ञात की जा सकती है।
💡సూచన

समांतर चतुर्भुज, आयत, वर्ग और समचतुर्भुज की समस्याओं में, विकर्णों के मध्यबिंदु को बराबर करके अज्ञात निर्देशांक ज्ञात करना एक सामान्य तरीका है।

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