Metals and Non-Metals
ఈ అధ్యాయం లోహాలు మరియు అలోహాల యొక్క భౌతిక మరియు రసాయన ధర్మాలను వివరిస్తుంది. లోహాల మెరిసే స్వభావం, సున్నితత్వం (malleability), సాగే గుణం (ductility), ఉష్ణ మరియు విద్యుత్ వాహకత్వం వంటి లక్షణాలను నేర్చుకుంటారు. అలోహాల ధర్మాలు, లోహాలు గాలి, నీరు, ఆమ్లాలతో ఎలా చర్య జరుపుతాయి, క్రియాశీలత శ్రేణి, అయానిక సమ్మేళనాల లక్షణాలు, లోహ సంగ్రహణ పద్ధతులు మరియు తుప్పు పట్టడం నివారణ పద్ధతుల గురించి కూడా ఈ అధ్యాయం వివరిస్తుంది. ఈ జ్ఞానం రోజువారీ జీవితంలో లోహాల ఉపయోగాలు మరియు వాటి ప్రాముఖ్యతను అర్థం చేసుకోవడానికి సహాయపడుతుంది.
धातुओं के भौतिक गुण
धातुएँ वे तत्व हैं जो इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनात्मक आयन बनाते हैं।
- चमक (Lustre):
- धातुएँ अपनी शुद्ध अवस्था में चमकीली सतह रखती हैं, जिसे धात्विक चमक (metallic lustre) कहते हैं।
- उदाहरण: सोना, चाँदी, तांबा।
- यह गुण आभूषण बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- कठोरता (Hardness):
- धातुएँ आमतौर पर कठोर होती हैं।
- कठोरता धातु से धातु में भिन्न होती है।
- अपवाद: सोडियम (Na), पोटेशियम (K), लिथियम (Li) इतनी नरम होती हैं कि उन्हें चाकू से काटा जा सकता है।
- आघातवर्धनीयता (Malleability):
- धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें पतली चादरों में पीटा जा सकता है, आघातवर्धनीयता कहलाता है।
- सोना (Au) और चाँदी (Ag) सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।
- उदाहरण: एल्यूमीनियम फॉइल, लोहे की चादरें।
- तन्यता (Ductility):
- धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें पतले तारों में खींचा जा सकता है, तन्यता कहलाता है।
- सोना सबसे अधिक तन्य धातु है। 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किमी लंबा तार बनाया जा सकता है।
- उदाहरण: तांबे के तार, एल्यूमीनियम के तार।
- ऊष्मा और विद्युत चालकता (Conductivity of Heat and Electricity):
- धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक होती हैं।
- चाँदी (Ag) और तांबा (Cu) ऊष्मा और विद्युत के सबसे अच्छे चालक हैं।
- लेड (Pb) और मरकरी (Hg) ऊष्मा के कुचालक हैं।
- विद्युत तारों को बनाने के लिए तांबे का उपयोग किया जाता है।
- घनत्व (Density):
- धातुओं का घनत्व आमतौर पर उच्च होता है।
- अपवाद: सोडियम और पोटेशियम का घनत्व कम होता है और वे पानी पर तैरते हैं।
- गलनांक और क्वथनांक (Melting and Boiling Points):
- धातुओं के गलनांक और क्वथनांक आमतौर पर उच्च होते हैं।
- अपवाद: गैलियम (Ga) और सीज़ियम (Cs) का गलनांक बहुत कम होता है, वे हथेली पर रखने पर पिघल जाते हैं। सोडियम और पोटेशियम का गलनांक भी कम होता है।
- ध्वानिक (Sonorous):
- धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर ध्वनि उत्पन्न करती हैं। इस गुण को ध्वानिकता कहते हैं।
- उदाहरण: स्कूल की घंटी धातु की बनी होती है।
- भौतिक अवस्था (Physical State):
- अधिकांश धातुएँ कमरे के तापमान पर ठोस होती हैं।
- अपवाद: मरकरी (Hg) एकमात्र धातु है जो कमरे के तापमान पर तरल अवस्था में पाई जाती है।
सोडियम और पोटेशियम को चाकू से काटा जा सकता है। गैलियम और सीज़ियम हथेली पर पिघल जाते हैं। मरकरी कमरे के तापमान पर तरल है। ये सभी धातुओं के भौतिक गुणों के अपवाद हैं।
धातुओं के भौतिक गुणों के अपवादों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) में पूछे जाते हैं।
अधातुओं के भौतिक गुण
अधातुएँ वे तत्व हैं जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणात्मक आयन बनाते हैं।
- चमक (Lustre):
- अधातुओं में आमतौर पर चमक नहीं होती। वे सुस्त (dull) दिखती हैं।
- अपवाद: आयोडीन (I2) एक अधातु है जिसमें चमक होती है।
- कठोरता (Hardness):
- अधातुएँ आमतौर पर नरम होती हैं।
- अपवाद: कार्बन का अपरूप हीरा (diamond) सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है।
- आघातवर्धनीयता और तन्यता (Malleability and Ductility):
- अधातुएँ आघातवर्धनीय या तन्य नहीं होती हैं। वे भंगुर (brittle) होती हैं और पीटने या खींचने पर टूट जाती हैं।
- ऊष्मा और विद्युत चालकता (Conductivity of Heat and Electricity):
- अधातुएँ आमतौर पर ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं।
- अपवाद: कार्बन का अपरूप ग्रेफाइट (graphite) विद्युत का सुचालक है।
- घनत्व (Density):
- अधातुओं का घनत्व आमतौर पर कम होता है।
- गलनांक और क्वथनांक (Melting and Boiling Points):
- अधातुओं के गलनांक और क्वथनांक आमतौर पर कम होते हैं।
- अपवाद: हीरा का गलनांक बहुत अधिक होता है।
- ध्वानिक (Sonorous):
- अधातुएँ ध्वानिक नहीं होती हैं।
- भौतिक अवस्था (Physical State):
- अधातुएँ ठोस, तरल या गैसीय अवस्था में पाई जा सकती हैं।
- उदाहरण: कार्बन, सल्फर (ठोस); ब्रोमीन (तरल); ऑक्सीजन, हाइड्रोजन (गैसीय)।
| गुणधर्म | धातुएँ | अधातुएँ | |:-----------------|:-------------------------------------|:----------------------------------------| | चमक | चमकीली सतह (धात्विक चमक) | सुस्त (dull), अपवाद: आयोडीन | | कठोरता | कठोर, अपवाद: Na, K, Li नरम | नरम, अपवाद: हीरा (सबसे कठोर) | | आघातवर्धनीयता | आघातवर्धनीय (चादरों में पीटा जा सकता है) | आघातवर्धनीय नहीं (भंगुर) | | तन्यता | तन्य (तारों में खींचा जा सकता है) | तन्य नहीं (भंगुर) | | चालकता | ऊष्मा और विद्युत की सुचालक | ऊष्मा और विद्युत की कुचालक, अपवाद: ग्रेफाइट | | घनत्व | उच्च | कम | | गलनांक/क्वथनांक | उच्च, अपवाद: Ga, Cs कम | कम, अपवाद: हीरा उच्च | | ध्वानिक | ध्वानिक (ध्वनि उत्पन्न करती हैं) | ध्वानिक नहीं | | भौतिक अवस्था | ठोस, अपवाद: Hg तरल | ठोस, तरल या गैसीय |
आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीली होती है। हीरा (कार्बन का अपरूप) सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। ग्रेफाइट (कार्बन का अपरूप) विद्युत का सुचालक है।
धातुओं के रासायनिक गुण
धातुएँ विभिन्न पदार्थों के साथ अभिक्रिया करके अलग-अलग उत्पाद बनाती हैं।
3.1. हवा में दहन (Burning in Air)
- धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
- धातु + ऑक्सीजन $\rightarrow$ धातु ऑक्साइड
- उदाहरण: $2\text{Mg(s)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow 2\text{MgO(s)}$ (मैग्नीशियम चमकदार सफेद लौ के साथ जलता है)
- अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
- उदाहरण: $\text{MgO(s)} + \text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{Mg(OH)}_2\text{(aq)}$ (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, क्षारीय)
- कुछ धातु ऑक्साइड उभयधर्मी (amphoteric) प्रकृति के होते हैं, जो अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं।
- उदाहरण: एल्यूमीनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$) और जिंक ऑक्साइड ($\text{ZnO}$)।
- $\text{Al}_2\text{O}_3\text{(s)} + 6\text{HCl(aq)} \rightarrow 2\text{AlCl}_3\text{(aq)} + 3\text{H}_2\text{O(l)}$
- $\text{Al}_2\text{O}_3\text{(s)} + 2\text{NaOH(aq)} \rightarrow 2\text{NaAlO}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{O(l)}$ (सोडियम एल्यूमिनेट)
- विभिन्न धातुओं की ऑक्सीजन के प्रति अभिक्रियाशीलता:
- सोडियम (Na) और पोटेशियम (K): बहुत अभिक्रियाशील। हवा में खुले रखने पर आग पकड़ लेते हैं। इन्हें केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है ताकि हवा और नमी से संपर्क न हो।
- मैग्नीशियम (Mg), एल्यूमीनियम (Al), जिंक (Zn), लेड (Pb): हवा के संपर्क में आने पर इनकी सतह पर ऑक्साइड की पतली परत बन जाती है, जो आगे ऑक्सीकरण को रोकती है।
- आयरन (Fe): गर्म करने पर नहीं जलता, लेकिन लौह चूर्ण (iron filings) गर्म करने पर तेजी से जलता है।
- तांबा (Cu): गर्म करने पर नहीं जलता, लेकिन गर्म करने पर इसकी सतह पर काले रंग की कॉपर ऑक्साइड की परत बन जाती है।
- सोना (Au) और चाँदी (Ag): उच्च तापमान पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते।
3.2. पानी के साथ अभिक्रिया (Reaction with Water)
- धातुएँ पानी के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड या धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
- धातु + पानी $\rightarrow$ धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन
- धातु ऑक्साइड + पानी $\rightarrow$ धातु हाइड्रॉक्साइड
- विभिन्न धातुओं की पानी के प्रति अभिक्रियाशीलता:
- सोडियम (Na) और पोटेशियम (K): ठंडे पानी के साथ तेजी से अभिक्रिया करते हैं और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं, जो ऊष्मा के कारण आग पकड़ लेती है।
- $2\text{Na(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow 2\text{NaOH(aq)} + \text{H}_2\text{(g)} + \text{ऊष्मा}$
- $2\text{K(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow 2\text{KOH(aq)} + \text{H}_2\text{(g)} + \text{ऊष्मा}$
- कैल्शियम (Ca): ठंडे पानी के साथ कम तेजी से अभिक्रिया करता है। उत्पन्न हाइड्रोजन गैस कैल्शियम की सतह पर चिपक जाती है, जिससे कैल्शियम तैरने लगता है।
- $\text{Ca(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{(g)}$
- मैग्नीशियम (Mg): ठंडे पानी के साथ अभिक्रिया नहीं करता, लेकिन गर्म पानी के साथ अभिक्रिया करता है और मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाता है। हाइड्रोजन गैस के बुलबुले मैग्नीशियम की सतह पर चिपक जाते हैं, जिससे यह तैरने लगता है।
- $\text{Mg(s)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{Mg(OH)}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{(g)}$
- एल्यूमीनियम (Al), आयरन (Fe), जिंक (Zn): न तो ठंडे पानी और न ही गर्म पानी के साथ अभिक्रिया करते हैं। ये भाप (steam) के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
- $2\text{Al(s)} + 3\text{H}_2\text{O(g) (भाप)} \rightarrow \text{Al}_2\text{O}_3\text{(s)} + 3\text{H}_2\text{(g)}$
- $3\text{Fe(s)} + 4\text{H}_2\text{O(g) (भाप)} \rightarrow \text{Fe}_3\text{O}_4\text{(s)} + 4\text{H}_2\text{(g)}$
- लेड (Pb), तांबा (Cu), सोना (Au), चाँदी (Ag): पानी के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करते।
3.3. अम्लों के साथ अभिक्रिया (Reaction with Acids)
- धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
- धातु + तनु अम्ल $\rightarrow$ लवण + हाइड्रोजन गैस
- उदाहरण: $\text{Zn(s)} + 2\text{HCl(aq)} \rightarrow \text{ZnCl}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{(g)}$
- विभिन्न धातुओं की अम्लों के प्रति अभिक्रियाशीलता:
- अभिक्रियाशीलता श्रृंखला में हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित करती हैं।
- अभिक्रियाशीलता श्रृंखला में हाइड्रोजन से नीचे की धातुएँ (जैसे Cu, Ag, Au, Pt) तनु अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करतीं।
- नाइट्रिक अम्ल (HNO3) के साथ अभिक्रिया: नाइट्रिक अम्ल एक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह हाइड्रोजन गैस को ऑक्सीकृत करके पानी में बदल देता है। इसलिए, जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करती हैं, तो हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं होती है।
- अपवाद: मैग्नीशियम (Mg) और मैंगनीज (Mn) बहुत तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।
3.4. अन्य धातु लवणों के विलयनों के साथ अभिक्रिया (Reaction with Salt Solutions of Other Metals)
- एक अधिक अभिक्रियाशील धातु एक कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है।
- धातु A + धातु B का लवण विलयन $\rightarrow$ धातु A का लवण विलयन + धातु B
- उदाहरण: $\text{Fe(s)} + \text{CuSO}_4\text{(aq)} \rightarrow \text{FeSO}_4\text{(aq)} + \text{Cu(s)}$
- यहाँ आयरन (Fe) तांबे (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह तांबे को उसके सल्फेट विलयन से विस्थापित कर देता है।
- यह अभिक्रिया अभिक्रियाशीलता श्रृंखला के आधार पर होती है।
सोडियम और पोटेशियम को केरोसिन में रखा जाता है। एल्यूमीनियम और जिंक ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं। मैग्नीशियम और मैंगनीज तनु नाइट्रिक अम्ल से हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।
रासायनिक अभिक्रियाओं को संतुलित करना और उत्पादों को पहचानना महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से अपवादों पर ध्यान दें।
अभिक्रियाशीलता श्रृंखला (Reactivity Series)
अभिक्रियाशीलता श्रृंखला धातुओं की उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित सूची है।
- यह श्रृंखला धातुओं की रासायनिक अभिक्रियाओं को समझने में मदद करती है।
- श्रृंखला में ऊपर की धातुएँ अधिक अभिक्रियाशील होती हैं और नीचे की धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर सकती हैं।
| धातु | प्रतीक | अभिक्रियाशीलता | |:----------|:-------|:---------------| | पोटेशियम | K | सबसे अधिक | | सोडियम | Na | | | कैल्शियम | Ca | | | मैग्नीशियम | Mg | | | एल्यूमीनियम | Al | | | जिंक | Zn | | | आयरन | Fe | | | लेड | Pb | | | हाइड्रोजन | H | (संदर्भ) | | तांबा | Cu | | | मरकरी | Hg | | | चाँदी | Ag | | | सोना | Au | सबसे कम |
- याद रखने का तरीका (Mnemonics):
- Kedar Nath Ca Mali Aloo Zara Feeke Pakata Hai Cu Hoga Aap Aur Pitenge
- Kashi Nath Ca Mali Aloo Zara Feeke Pakata Hai Cu Hoga Aap Aur Pitenge
- अभिक्रियाशीलता श्रृंखला के अनुप्रयोग:
- कौन सी धातु पानी या अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करेगी।
- कौन सी धातु दूसरे धातु लवण के विलयन से धातु को विस्थापित करेगी।
- धातुओं के निष्कर्षण की विधि का निर्धारण।
अभिक्रियाशीलता श्रृंखला को याद रखना रासायनिक अभिक्रियाओं के परिणामों की भविष्यवाणी करने के लिए महत्वपूर्ण है।
धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं: आयनिक यौगिकों का निर्माण
धातुएँ और अधातुएँ इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण द्वारा अभिक्रिया करती हैं, जिससे आयनिक यौगिक बनते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और स्थिरता:
- परमाणु अपने बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (अष्टक) प्राप्त करके स्थिर होना चाहते हैं, जैसे उत्कृष्ट गैसें (हीलियम, नियॉन, आर्गन)।
- धातुएँ अपने बाह्यतम कोश से इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनात्मक आयन (धनायन) बनाती हैं।
- अधातुएँ अपने बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणात्मक आयन (ऋणायन) बनाती हैं।
- आयनिक बंधन (Ionic Bond):
- धातुओं से अधातुओं में इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनने वाले बंधन को आयनिक बंधन या वैद्युत संयोजी बंधन (electrovalent bond) कहते हैं।
- आयनिक बंधन से बने यौगिकों को आयनिक यौगिक कहते हैं।
- सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण:
- सोडियम (Na): परमाणु संख्या 11, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1। यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर $\text{Na}^+$ आयन बनाता है।
- $\text{Na} \rightarrow \text{Na}^+ + \text{e}^-$
- (2, 8, 1) (2, 8)
- क्लोरीन (Cl): परमाणु संख्या 17, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7। यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके $\text{Cl}^-$ आयन बनाता है।
- $\text{Cl} + \text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^-$
- (2, 8, 7) (2, 8, 8)
- $\text{Na}^+$ और $\text{Cl}^-$ आयन स्थिर वैद्युत आकर्षण बल द्वारा एक साथ बंधकर सोडियम क्लोराइड (NaCl) बनाते हैं।
- मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl2) का निर्माण:
- मैग्नीशियम (Mg): परमाणु संख्या 12, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2। यह दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर $\text{Mg}^{2+}$ आयन बनाता है।
- $\text{Mg} \rightarrow \text{Mg}^{2+} + 2\text{e}^-$
- (2, 8, 2) (2, 8)
- क्लोरीन (Cl): परमाणु संख्या 17, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7। प्रत्येक क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके $\text{Cl}^-$ आयन बनाता है।
- $2\text{Cl} + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cl}^-$
- (2, 8, 7) (2, 8, 8)
- एक $\text{Mg}^{2+}$ आयन और दो $\text{Cl}^-$ आयन मिलकर मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl2) बनाते हैं।
- इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना (Electron Dot Structure):
- परमाणु के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों को बिंदुओं या क्रॉस द्वारा दर्शाया जाता है।
- उदाहरण: $\text{Na} \cdot + \cdot \ddot{\text{Cl}} : \rightarrow \text{Na}^+ [:\ddot{\text{Cl}}:]^-$
आयनिक यौगिक: वे यौगिक जो धातुओं से अधातुओं में इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनते हैं और जिनमें आयनिक बंधन होता है।
आयनिक यौगिकों के निर्माण को इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाओं का उपयोग करके समझाना अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है।
आयनिक यौगिकों के गुण
आयनिक यौगिकों के विशिष्ट गुण होते हैं जो उनके आयनिक बंधन के कारण होते हैं।
- भौतिक प्रकृति (Physical Nature):
- आयनिक यौगिक ठोस और कुछ हद तक कठोर होते हैं।
- धनात्मक और ऋणात्मक आयनों के बीच प्रबल आकर्षण बल के कारण ये कठोर होते हैं।
- ये आमतौर पर भंगुर (brittle) होते हैं और दबाव डालने पर टुकड़ों में टूट जाते हैं।
- गलनांक और क्वथनांक (Melting and Boiling Points):
- आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होते हैं।
- इसका कारण आयनों के बीच प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए काफी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- घुलनशीलता (Solubility):
- आयनिक यौगिक आमतौर पर पानी में घुलनशील होते हैं।
- ये केरोसिन, पेट्रोल जैसे कार्बनिक विलायकों में अघुलनशील होते हैं।
- विद्युत चालकता (Conduction of Electricity):
- ठोस अवस्था में: आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का संचालन नहीं करते हैं।
- ठोस अवस्था में आयनों की कठोर संरचना के कारण उनकी गति संभव नहीं होती है।
- गलित अवस्था में (Molten State): आयनिक यौगिक गलित अवस्था में विद्युत का संचालन करते हैं।
- गलित अवस्था में, आयन स्वतंत्र रूप से गति करने में सक्षम होते हैं और विद्युत प्रवाह कर सकते हैं।
- जलीय विलयन में (Aqueous Solution): आयनिक यौगिकों के जलीय विलयन विद्युत का संचालन करते हैं।
- पानी में घुलने पर आयनिक यौगिक आयनों में टूट जाते हैं, और ये आयन विद्युत प्रवाह के लिए जिम्मेदार होते हैं।
आयनिक यौगिकों के उच्च गलनांक और क्वथनांक उनके प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बलों के कारण होते हैं। वे ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं लेकिन गलित अवस्था और जलीय विलयन में सुचालक होते हैं।
धातुओं की प्राप्ति (Occurrence of Metals) और निष्कर्षण (Extraction)
पृथ्वी की पपड़ी धातुओं का मुख्य स्रोत है। समुद्री जल में भी कुछ घुलनशील लवण होते हैं।
7.1. खनिज (Minerals) और अयस्क (Ores)
- खनिज: वे तत्व या यौगिक जो पृथ्वी की पपड़ी में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, खनिज कहलाते हैं।
- अयस्क: वे खनिज जिनसे धातुओं को लाभप्रद रूप से निकाला जा सकता है, अयस्क कहलाते हैं।
- सभी अयस्क खनिज होते हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते।
7.2. अयस्कों का संवर्धन (Enrichment of Ores)
- अयस्कों में आमतौर पर मिट्टी, रेत जैसी अशुद्धियाँ होती हैं, जिन्हें गैंग (gangue) कहते हैं।
- धातु के निष्कर्षण से पहले इन गैंग कणों को हटाना आवश्यक है। इस प्रक्रिया को अयस्कों का संवर्धन या ड्रेसिंग कहते हैं।
- अयस्क के प्रकार और गैंग की प्रकृति के आधार पर विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है।
7.3. अभिक्रियाशीलता श्रृंखला के आधार पर धातुओं का निष्कर्षण
धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है, और प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग निष्कर्षण विधियाँ हैं।
7.3.1. अभिक्रियाशीलता श्रृंखला में निम्न धातुएँ (Metals Low in the Activity Series)
- ये धातुएँ बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं और अक्सर मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं (जैसे सोना, चाँदी, प्लैटिनम)।
- इनके सल्फाइड अयस्कों को केवल गर्म करके धातु में अपचयित किया जा सकता है।
- मरकरी (Hg) का निष्कर्षण:
- अयस्क: सिनाबार (cinnabar), $\text{HgS}$
- $\text{2HgS(s)} + 3\text{O}_2\text{(g)} \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} 2\text{HgO(s)} + 2\text{SO}_2\text{(g)}$ (भर्जन/roasting)
- $\text{2HgO(s)} \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} 2\text{Hg(l)} + \text{O}_2\text{(g)}$ (अपचयन)
- तांबा (Cu) का निष्कर्षण:
- अयस्क: कॉपर सल्फाइड (copper sulphide), $\text{Cu}_2\text{S}$
- $\text{2Cu}_2\text{S(s)} + 3\text{O}_2\text{(g)} \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} 2\text{Cu}_2\text{O(s)} + 2\text{SO}_2\text{(g)}$
- $\text{2Cu}_2\text{O(s)} + \text{Cu}_2\text{S(s)} \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} 6\text{Cu(s)} + \text{SO}_2\text{(g)}$
7.3.2. अभिक्रियाशीलता श्रृंखला के मध्य की धातुएँ (Metals in the Middle of the Activity Series)
- ये धातुएँ मध्यम अभिक्रियाशील होती हैं (जैसे जिंक, आयरन, लेड, तांबा)।
- ये आमतौर पर पृथ्वी की पपड़ी में ऑक्साइड, सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पाई जाती हैं।
- सल्फाइड और कार्बोनेट अयस्कों को पहले ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है, क्योंकि ऑक्साइड से धातु प्राप्त करना आसान होता है।
- भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्कों को हवा की अधिकता में प्रबलता से गर्म करके ऑक्साइड में परिवर्तित करना।
- $\text{2ZnS(s)} + 3\text{O}_2\text{(g)} \xrightarrow{\text{भर्जन}} 2\text{ZnO(s)} + 2\text{SO}_2\text{(g)}$
- निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्कों को सीमित हवा में प्रबलता से गर्म करके ऑक्साइड में परिवर्तित करना।
- $\text{ZnCO}_3\text{(s)} \xrightarrow{\text{निस्तापन}} \text{ZnO(s)} + \text{CO}_2\text{(g)}$
- ऑक्साइड का अपचयन: धातु ऑक्साइड को कार्बन (कोक) जैसे अपचायक का उपयोग करके धातु में अपचयित किया जाता है।
- $\text{ZnO(s)} + \text{C(s)} \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} \text{Zn(s)} + \text{CO(g)}$
- विस्थापन अभिक्रियाओं का उपयोग: अधिक अभिक्रियाशील धातुओं का उपयोग कम अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइड को अपचयित करने के लिए भी किया जा सकता है।
- उदाहरण: मैंगनीज डाइऑक्साइड को एल्यूमीनियम पाउडर के साथ गर्म करने पर।
- $\text{3MnO}_2\text{(s)} + 4\text{Al(s)} \rightarrow 3\text{Mn(l)} + 2\text{Al}_2\text{O}_3\text{(s)} + \text{ऊष्मा}$
- थर्माइट अभिक्रिया (Thermite Reaction): आयरन (III) ऑक्साइड ($\text{Fe}_2\text{O}_3$) की एल्यूमीनियम के साथ अभिक्रिया का उपयोग रेलवे पटरियों या टूटे हुए मशीन पुर्जों को जोड़ने के लिए किया जाता है। यह अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।
- $\text{Fe}_2\text{O}_3\text{(s)} + 2\text{Al(s)} \rightarrow 2\text{Fe(l)} + \text{Al}_2\text{O}_3\text{(s)} + \text{ऊष्मा}$
7.3.3. अभिक्रियाशीलता श्रृंखला के शीर्ष पर धातुएँ (Metals at the Top of the Activity Series)
- ये धातुएँ बहुत अभिक्रियाशील होती हैं (जैसे पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम)।
- इनके यौगिकों से कार्बन द्वारा अपचयन संभव नहीं है, क्योंकि इन धातुओं की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता कार्बन से अधिक होती है।
- इन धातुओं को विद्युत अपघटनी अपचयन (electrolytic reduction) द्वारा प्राप्त किया जाता है।
- सोडियम (Na) का निष्कर्षण: गलित सोडियम क्लोराइड (NaCl) का विद्युत अपघटन।
- कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड) पर: $\text{Na}^+ + \text{e}^- \rightarrow \text{Na}$ (धातु जमा होती है)
- एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) पर: $2\text{Cl}^- \rightarrow \text{Cl}_2 + 2\text{e}^-$
- एल्यूमीनियम (Al) का निष्कर्षण: गलित एल्यूमीनियम ऑक्साइड ($\text{Al}_2\text{O}_3$) का विद्युत अपघटन।
गैंग (Gangue): अयस्कों में मौजूद अवांछित अशुद्धियाँ जैसे मिट्टी, रेत। भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्कों को हवा की अधिकता में गर्म करना। निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट अयस्कों को सीमित हवा में गर्म करना।
थर्माइट अभिक्रिया रेलवे पटरियों को जोड़ने में उपयोग की जाती है और यह एक ऊष्माक्षेपी विस्थापन अभिक्रिया है।
धातुओं का शोधन (Refining of Metals)
निष्कर्षण प्रक्रियाओं से प्राप्त धातुएँ अक्सर अशुद्ध होती हैं। इन अशुद्धियों को हटाने और शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को शोधन (refining) कहते हैं।
- विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining):
- यह तांबा, जिंक, टिन, निकेल, चाँदी, सोना जैसी कई धातुओं के शोधन के लिए सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है।
- सेटअप:
- एनोड: अशुद्ध धातु (मोटी छड़)।
- कैथोड: शुद्ध धातु की पतली पट्टी।
- विद्युत अपघट्य: धातु लवण का विलयन (जिस धातु का शोधन करना है)।
- प्रक्रिया:
- जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो एनोड से अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है।
- विद्युत अपघट्य से शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है।
- घुलनशील अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं।
- अघुलनशील अशुद्धियाँ एनोड के नीचे बैठ जाती हैं, जिन्हें एनोड मड (anode mud) कहते हैं।
- उदाहरण: तांबे का विद्युत अपघटनी शोधन
- एनोड: अशुद्ध तांबा
- कैथोड: शुद्ध तांबे की पट्टी
- विद्युत अपघट्य: अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन
- एनोड पर: $\text{Cu} \rightarrow \text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^-$
- कैथोड पर: $\text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu}$
एनोड मड (Anode Mud): विद्युत अपघटनी शोधन के दौरान एनोड के नीचे जमा होने वाली अघुलनशील अशुद्धियाँ।
विद्युत अपघटनी शोधन का आरेख (diagram) और एनोड, कैथोड, विद्युत अपघट्य तथा अभिक्रियाओं का वर्णन अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है।
संक्षारण (Corrosion) और उसकी रोकथाम (Prevention)
संक्षारण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो धातुओं को उनके पर्यावरण के साथ रासायनिक या वैद्युत रासायनिक अभिक्रिया द्वारा धीरे-धीरे नष्ट करती है।
9.1. संक्षारण
- जब कोई धातु अपने आस-पास के पदार्थों जैसे नमी, अम्ल या हवा के संपर्क में आती है, तो वह धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।
- लोहे का जंग लगना (Rusting of Iron):
- जब लोहे की वस्तुएँ हवा (ऑक्सीजन) और नमी (पानी) के संपर्क में आती हैं, तो उनकी सतह पर लाल-भूरे रंग की परत बन जाती है, जिसे जंग (rust) कहते हैं।
- जंग का रासायनिक सूत्र: $\text{Fe}_2\text{O}_3 \cdot \text{xH}_2\text{O}$ (हाइड्रेटेड आयरन (III) ऑक्साइड)
- जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और पानी दोनों आवश्यक हैं।
- तांबे का संक्षारण:
- तांबा हवा में नम कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके अपनी चमकदार भूरी सतह खो देता है और उस पर हरे रंग की कॉपर कार्बोनेट की परत चढ़ जाती है।
- $2\text{Cu} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 + \text{O}_2 \rightarrow \text{Cu(OH)}_2 \cdot \text{CuCO}_3$ (बेसिक कॉपर कार्बोनेट)
- चाँदी का संक्षारण:
- चाँदी हवा में मौजूद हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) के साथ अभिक्रिया करके काले रंग की सिल्वर सल्फाइड की परत बनाती है।
9.2. संक्षारण की रोकथाम (Prevention of Corrosion)
संक्षारण से धातुओं को बचाने के कई तरीके हैं:
- पेंटिंग (Painting): लोहे की वस्तुओं पर पेंट की परत चढ़ाने से हवा और नमी से संपर्क टूट जाता है।
- तेल लगाना/ग्रीसिंग (Oiling/Greasing): मशीन के पुर्जों पर तेल या ग्रीस लगाने से जंग लगने से बचाव होता है।
- गैल्वेनाइजेशन (Galvanisation): लोहे या स्टील की वस्तुओं पर जिंक (Zn) की पतली परत चढ़ाना।
- जिंक लोहे से अधिक अभिक्रियाशील होता है और खुद ऑक्सीकृत होकर लोहे को बचाता है।
- यदि जिंक की परत टूट भी जाए, तो भी जिंक लोहे को बचाता रहता है (बलिदानी सुरक्षा)।
- क्रोम प्लेटिंग (Chrome Plating): कुछ धातुओं पर क्रोमियम की परत चढ़ाना। यह चमकदार होती है और जंग नहीं लगती।
- एनोडाइजिंग (Anodising): एल्यूमीनियम पर ऑक्साइड की मोटी परत बनाने की प्रक्रिया। यह परत एल्यूमीनियम को आगे संक्षारण से बचाती है।
- मिश्र धातु बनाना (Making Alloys): धातुओं को मिश्र धातुओं में बदलकर उनके गुणों में सुधार किया जा सकता है, जिससे वे संक्षारण प्रतिरोधी बन जाती हैं।
9.3. मिश्र धातुएँ (Alloys)
- मिश्र धातु एक समांगी मिश्रण है जो दो या दो से अधिक धातुओं या एक धातु और एक अधातु को मिलाकर बनाया जाता है।
- मिश्र धातुएँ शुद्ध धातुओं की तुलना में बेहतर गुण प्रदर्शित करती हैं (जैसे अधिक कठोरता, अधिक संक्षारण प्रतिरोध, कम गलनांक)।
- उदाहरण:
- स्टील (Steel): आयरन + कार्बन (कठोर, मजबूत)
- स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel): आयरन + क्रोमियम + निकेल (कठोर, जंग नहीं लगता)
- पीतल (Brass): तांबा + जिंक (आघातवर्धनीय, मजबूत, संक्षारण प्रतिरोधी)
- कांसा (Bronze): तांबा + टिन (बहुत मजबूत, अत्यधिक संक्षारण प्रतिरोधी)
- सोल्डर (Solder): लेड + टिन (कम गलनांक, विद्युत तारों को जोड़ने के लिए उपयोग)
- अमलगम (Amalgam): यदि किसी मिश्र धातु में एक धातु मरकरी हो, तो उसे अमलगम कहते हैं।
- सोने की शुद्धता: शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है, जो बहुत नरम होता है। आभूषण बनाने के लिए इसे तांबे या चाँदी के साथ मिलाकर 22 कैरेट सोना बनाया जाता है (22 भाग सोना, 2 भाग तांबा/चाँदी)।
जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और पानी दोनों आवश्यक हैं। गैल्वेनाइजेशन में लोहे पर जिंक की परत चढ़ाई जाती है। मिश्र धातुएँ शुद्ध धातुओं की तुलना में बेहतर गुण दिखाती हैं।
संक्षारण: धातुओं का उनके पर्यावरण के साथ अभिक्रिया द्वारा धीरे-धीरे नष्ट होना। मिश्र धातु: दो या दो से अधिक धातुओं या एक धातु और एक अधातु का समांगी मिश्रण। अमलगम: मरकरी युक्त मिश्र धातु।