Nutrition in Plants
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परिचय, पौधों में पोषण का तरीका
पोषण (Nutrition)
- परिभाषा: सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया।
- महत्व: वृद्धि, मरम्मत और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए आवश्यक।
पोषण के तरीके
पौधों में मुख्य रूप से दो प्रकार के पोषण होते हैं:
1. स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition)
- 'स्व' (Auto) का अर्थ है 'स्वयं' और 'पोषी' (Trophic) का अर्थ है 'पोषण'।
- परिभाषा: वे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
- उदाहरण: हरे पौधे, शैवाल।
- विशेषता: ये जीव किसी अन्य जीव पर भोजन के लिए निर्भर नहीं करते।
2. विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
- 'विषम' (Hetero) का अर्थ है 'अन्य' या 'भिन्न'।
- परिभाषा: वे जीव जो भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर करते हैं।
- उदाहरण: मनुष्य, गाय, शेर।
- निर्भरता: ये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वपोषियों पर निर्भर करते हैं।
- शाकाहारी: पौधों को खाते हैं (जैसे गाय)।
- मांसाहारी: अन्य जानवरों को खाते हैं (जैसे शेर)।
- सर्वाहारी: पौधे और जानवर दोनों को खाते हैं (जैसे मनुष्य)।
स्वपोषी और विषमपोषी का महत्व
- स्वपोषी (हरे पौधे) पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं क्योंकि वे भोजन का उत्पादन करते हैं।
- विषमपोषी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वपोषियों पर निर्भर करते हैं, जिससे खाद्य श्रृंखला बनती है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्वपोषी और विषमपोषी दोनों ही पृथ्वी पर जीवन के संतुलन के लिए आवश्यक हैं।
पौधे ही एकमात्र ऐसे जीव हैं जो सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं।
प्रकाश संश्लेषण - पौधों में भोजन बनाने की प्रक्रिया, कार्बोहाइड्रेट के अलावा पौधों के भोजन का संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis): पौधों में भोजन बनाने की प्रक्रिया
- परिभाषा: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल का उपयोग करके अपना भोजन (कार्बोहाइड्रेट) बनाते हैं।
- स्थान: मुख्य रूप से पत्तियों में होता है, जहाँ क्लोरोफिल मौजूद होता है।
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक सामग्री (Raw Materials)
- सूर्य का प्रकाश (Sunlight):
- ऊर्जा का मुख्य स्रोत।
- पत्तियों में मौजूद क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित करता है।
- जल (Water):
- पौधे जड़ों द्वारा मिट्टी से जल और खनिज लवण अवशोषित करते हैं।
- मूल रोम (Root Hairs) जल अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र बढ़ाते हैं।
- तना (Stem) जल को पत्तियों तक पहुंचाता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide - CO₂):
- वायुमंडल से प्राप्त होता है।
- पत्तियों की सतह पर मौजूद छोटे छिद्रों, जिन्हें रंध्र (Stomata) कहते हैं, के माध्यम से पत्तियों में प्रवेश करता है।
- रंध्र द्वार कोशिकाओं (Guard Cells) द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो उनके खुलने और बंद होने को नियंत्रित करती हैं।
- क्लोरोफिल (Chlorophyll):
- पत्तियों में मौजूद हरा वर्णक।
- सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को पकड़ने के लिए आवश्यक।
- क्लोरोफिल के कारण ही पत्तियां हरी दिखाई देती हैं।
प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया (Step-by-Step Explanation)
- ऊर्जा का अवशोषण: क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित करता है।
- कच्चे माल का उपयोग: अवशोषित ऊर्जा का उपयोग जल और कार्बन डाइऑक्साइड को प्रतिक्रिया करने के लिए किया जाता है।
- भोजन का निर्माण: जल और कार्बन डाइऑक्साइड मिलकर ग्लूकोज (एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट) बनाते हैं, जो पौधे का भोजन है।
- ऑक्सीजन का उत्सर्जन: इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन एक उप-उत्पाद के रूप में मुक्त होती है, जिसे पौधे रंध्रों के माध्यम से वायुमंडल में छोड़ते हैं।
प्रकाश संश्लेषण का समीकरण
$$6CO_2 + 6H_2O \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल}} C_6H_{12}O_6 + 6O_2$$ (कार्बन डाइऑक्साइड + जल \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल}} ग्लूकोज + ऑक्सीजन)
प्रकाश संश्लेषण का महत्व
- भोजन उत्पादन: सभी जीवों के लिए भोजन का प्राथमिक स्रोत।
- ऑक्सीजन उत्पादन: वायुमंडल में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखता है, जो श्वसन के लिए आवश्यक है।
कार्बोहाइड्रेट के अलावा पौधों के भोजन का संश्लेषण
पौधे केवल कार्बोहाइड्रेट ही नहीं, बल्कि अन्य पोषक तत्व भी संश्लेषित करते हैं, जैसे प्रोटीन और विटामिन।
नाइट्रोजन का महत्व
- प्रोटीन निर्माण: प्रोटीन नाइट्रोजन युक्त पदार्थ होते हैं। पौधों को प्रोटीन और अन्य नाइट्रोजन युक्त यौगिक बनाने के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है।
- विटामिन निर्माण: कुछ विटामिनों के संश्लेषण के लिए भी नाइट्रोजन आवश्यक है।
पौधे नाइट्रोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
- मिट्टी से: पौधे सीधे वायुमंडल से गैसीय नाइट्रोजन का उपयोग नहीं कर सकते। उन्हें इसे घुलनशील रूप में चाहिए।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation): मिट्टी में कुछ बैक्टीरिया (जैसे राइजोबियम) वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट जैसे उपयोगी यौगिकों में परिवर्तित करते हैं।
- उर्वरक (Fertilizers):
- किसान मिट्टी में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक मिलाते हैं ताकि पौधों को पर्याप्त नाइट्रोजन मिल सके।
गैर-हरी पत्तियां और शैवाल में प्रकाश संश्लेषण
- गैर-हरी पत्तियां: लाल, भूरी या अन्य रंग की पत्तियों में भी क्लोरोफिल होता है, लेकिन अन्य वर्णक (जैसे कैरोटीनॉयड) क्लोरोफिल के हरे रंग को ढक लेते हैं। ये पत्तियां भी प्रकाश संश्लेषण करती हैं।
- शैवाल (Algae): तालाबों या रुके हुए पानी में पाए जाने वाले शैवाल हरे होते हैं क्योंकि उनमें क्लोरोफिल होता है। वे भी प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
रंध्र (Stomata): पत्तियों की सतह पर मौजूद छोटे छिद्र जिनके माध्यम से गैसों का आदान-प्रदान (कार्बन डाइऑक्साइड अंदर, ऑक्सीजन बाहर) होता है।
पौधे ग्लूकोज को स्टार्च के रूप में संग्रहित करते हैं।
पौधों में पोषण के अन्य तरीके
पौधों में पोषण के अन्य तरीके (Other Modes of Nutrition in Plants)
सभी पौधे स्वपोषी नहीं होते। कुछ पौधे भोजन के लिए अन्य विधियों का उपयोग करते हैं।
1. परजीवी पोषण (Parasitic Nutrition)
- परिभाषा: कुछ पौधे भोजन के लिए अन्य पौधों पर निर्भर करते हैं। ये 'परजीवी' कहलाते हैं और जिस पौधे से भोजन प्राप्त करते हैं, उसे 'पोषक' (Host) कहते हैं।
- विशेषता: परजीवी पौधे में क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए वे अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते।
- उदाहरण: अमरबेल (Cuscuta)।
- यह एक पीला, धागे जैसा पौधा है जो पोषक पौधे के तने के चारों ओर लिपट जाता है।
- यह पोषक पौधे से पोषक तत्व अवशोषित करता है, जिससे पोषक पौधे की वृद्धि रुक सकती है या वह कमजोर हो सकता है।
2. कीटभक्षी पोषण (Insectivorous Nutrition)
- परिभाषा: कुछ पौधे कीटों को पकड़कर उनसे पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। इन्हें 'कीटभक्षी पौधे' कहते हैं।
- विशेषता: ये पौधे उन क्षेत्रों में उगते हैं जहाँ की मिट्टी में नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों की कमी होती है। ये हरे होते हैं और प्रकाश संश्लेषण करते हैं, लेकिन नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए कीटों का भक्षण करते हैं। इसलिए इन्हें आंशिक विषमपोषी भी कहा जाता है।
- उदाहरण: घटपर्णी (Pitcher Plant), वीनस फ्लाईट्रैप (Venus Flytrap)।
- घटपर्णी: इसकी पत्ती एक घड़े जैसी संरचना में रूपांतरित हो जाती है। घड़े के अंदर नीचे की ओर झुके हुए बाल होते हैं। जब कोई कीट घड़े में गिरता है, तो वह इन बालों में फंस जाता है और पौधे द्वारा स्रावित पाचक रसों द्वारा पचा लिया जाता है।
कीटभक्षी पौधे हरे होते हैं और प्रकाश संश्लेषण करते हैं, लेकिन वे नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए कीटों का भक्षण करते हैं।
पोषक (Host): वह जीव जिस पर परजीवी निर्भर करता है और जिससे भोजन प्राप्त करता है।
मृतोपजीवी, गतिविधि 1.2
मृतोपजीवी पोषण (Saprotrophic Nutrition)
- परिभाषा: पोषण का वह तरीका जिसमें जीव मृत और सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।
- प्रक्रिया: ये जीव मृत पदार्थों पर पाचक रस स्रावित करते हैं, उन्हें सरल पदार्थों में तोड़ते हैं, और फिर उन पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं।
- विशेषता: इनमें क्लोरोफिल नहीं होता और ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते।
- उदाहरण: कवक (Fungi) जैसे मशरूम, खमीर और ब्रेड मोल्ड।
- आपने बारिश के मौसम में सड़ी हुई लकड़ी या नम रोटी पर मशरूम या फफूंद (मोल्ड) उगते हुए देखा होगा।
- महत्व: ये प्रकृति में अपमार्जक (Scavengers) के रूप में कार्य करते हैं, मृत कार्बनिक पदार्थों को विघटित करके पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस लौटाते हैं।
सहजीवी पोषण (Symbiotic Nutrition)
- परिभाषा: पोषण का वह तरीका जिसमें दो भिन्न जीव एक साथ रहते हैं और एक-दूसरे को लाभ पहुंचाते हैं। इस संबंध को सहजीविता (Symbiosis) कहते हैं।
- विशेषता: दोनों जीव एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हैं (जैसे भोजन, आश्रय, जल)।
- उदाहरण 1: लाइकेन (Lichens)।
- लाइकेन एक शैवाल (Alga) और एक कवक (Fungus) के बीच का सहजीवी संबंध है।
- शैवाल: इसमें क्लोरोफिल होता है और यह प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाता है।
- कवक: शैवाल को आश्रय, जल और खनिज लवण प्रदान करता है।
- दोनों एक-दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते।
- उदाहरण 2: राइजोबियम बैक्टीरिया और फलीदार पौधे (Leguminous Plants)।
- राइजोबियम बैक्टीरिया फलीदार पौधों (जैसे मटर, चना, सेम) की जड़ों की गांठों में रहते हैं।
- राइजोबियम: वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूप (नाइट्रेट) में परिवर्तित करता है (नाइट्रोजन स्थिरीकरण)।
- पौधा: बैक्टीरिया को भोजन और आश्रय प्रदान करता है।
- यह संबंध मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है।
मृतोपजीवी प्रकृति में 'सफाईकर्मी' का काम करते हैं, मृत जीवों को विघटित करके पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं।
सहजीविता (Symbiosis): दो जीवों के बीच का संबंध जिसमें दोनों को लाभ होता है।
मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति कैसे होती है
मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति (Replenishment of Nutrients in Soil)
पौधे लगातार मिट्टी से पोषक तत्व अवशोषित करते हैं, जिससे मिट्टी में उनकी कमी हो जाती है। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए इन पोषक तत्वों की पूर्ति आवश्यक है।
पोषक तत्वों की कमी क्यों होती है?
- पौधे अपनी वृद्धि, पत्तियों, फूलों और फलों के उत्पादन के लिए मिट्टी से खनिज पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम) लेते हैं।
- बार-बार फसल उगाने से मिट्टी में इन पोषक तत्वों की मात्रा कम हो जाती है।
मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति के तरीके
A. प्राकृतिक तरीके (Natural Methods):
- अपघटन (Decomposition):
- जब पौधे और जानवर मर जाते हैं, तो अपघटक (Decomposers) जैसे बैक्टीरिया और कवक उनके मृत शरीर को सरल पदार्थों में तोड़ देते हैं।
- यह प्रक्रिया ह्यूमस (Humus) बनाती है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है और मिट्टी में मिल जाता है, जिससे मिट्टी उपजाऊ बनती है।
- उदाहरण: पत्तियों का खाद में बदलना।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation):
- पौधे सीधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन का उपयोग नहीं कर सकते।
- राइजोबियम बैक्टीरिया फलीदार पौधों (जैसे मटर, चना, सेम) की जड़ों की गांठों में रहते हैं।
- ये बैक्टीरिया वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों द्वारा उपयोग किए जा सकने वाले घुलनशील यौगिकों (नाइट्रेट) में परिवर्तित करते हैं।
- यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है।
B. मानवीय हस्तक्षेप (Human Interventions):
- खाद (Manure):
- यह जैविक पदार्थ है जो पौधों और जानवरों के अपशिष्ट (जैसे गोबर, फसल अवशेष) के अपघटन से बनता है।
- यह मिट्टी की संरचना में सुधार करता है और धीरे-धीरे पोषक तत्व प्रदान करता है।
- यह एक प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीका है।
- उर्वरक (Fertilizers):
- ये मानव निर्मित रसायन होते हैं जिनमें विशिष्ट पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटेशियम (K)) होते हैं।
- ये खाद की तुलना में तेजी से काम करते हैं और पौधों को तुरंत बढ़ावा देते हैं।
- सावधानी: अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और जल प्रदूषण हो सकता है। किसानों को इनका सावधानी से उपयोग करना चाहिए।
- फसल चक्र (Crop Rotation):
- एक ही खेत में लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी में विशिष्ट पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
- फसल चक्र में, किसान विभिन्न प्रकार की फसलें बारी-बारी से उगाते हैं (जैसे एक मौसम में गेहूं और अगले में फलीदार पौधे)।
- यह मिट्टी को पोषक तत्वों की भरपाई करने का समय देता है और विभिन्न पोषक तत्वों का उपयोग और पूर्ति सुनिश्चित करता है।
- फलीदार पौधे उगाना (Growing Leguminous Plants):
- फलीदार फसलें (जैसे दालें, सेम) उगाना मिट्टी में नाइट्रोजन वापस जोड़ने का एक सामान्य कृषि अभ्यास है।
- इन पौधों में राइजोबियम बैक्टीरिया के साथ सहजीवी संबंध होता है, जो मिट्टी को प्राकृतिक रूप से समृद्ध करता है।
किसानों द्वारा निर्णय
- किसान मिट्टी की स्थिति, उपलब्ध समय और फसल के प्रकार के आधार पर खाद, उर्वरक या दोनों का उपयोग करने का निर्णय लेते हैं।
- प्राकृतिक और मानवीय तरीकों का संयोजन दीर्घकालिक मिट्टी के स्वास्थ्य और उत्पादकता के लिए सबसे अच्छा है।
नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फसल चक्र बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण विषय हैं।
राइजोबियम बैक्टीरिया वायुमंडलीय नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदलता है, जो पौधों के लिए उपयोगी है।