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AP · Class 6 · 📘 Social · Chapter 2

Globe – A model of the Earth

గ్లోబ్అక్షాంశాలు మరియు రేఖాంశాలుభూమి కదలికలు (భ్రమణం మరియు పరిభ్రమణం)సూర్యగ్రహణం మరియు చంద్రగ్రహణంఅర్ధగోళాలు

ఈ అధ్యాయం భూమి యొక్క నమూనా అయిన గ్లోబ్ గురించి వివరిస్తుంది. అక్షాంశాలు మరియు రేఖాంశాలు వంటి ఊహాత్మక రేఖల ప్రాముఖ్యతను, అలాగే భూమి యొక్క భ్రమణం మరియు పరిభ్రమణం వల్ల కలిగే పగలు, రాత్రి మరియు రుతువుల మార్పులను తెలియజేస్తుంది. సూర్యగ్రహణం మరియు చంద్రగ్రహణం ఎలా సంభవిస్తాయో కూడా ఈ అధ్యాయం వివరిస్తుంది. ఈ అంశాలు భూమిపై భౌగోళిక స్థానాలను అర్థం చేసుకోవడానికి మరియు కాలక్రమేణా మార్పులను తెలుసుకోవడానికి చాలా ముఖ్యమైనవి.

ग्लोब: पृथ्वी का एक मॉडल

ग्लोब पृथ्वी का एक छोटा, वास्तविक मॉडल है।

  • ग्लोब की विशेषताएँ:
  • यह पृथ्वी का सही आकार और आकृति दर्शाता है।
  • महाद्वीपों, महासागरों और देशों को उनके सही आकार और स्थान पर दिखाता है।
  • इसे झुकी हुई अवस्था में एक धुरी पर घुमाया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी घूमती है।
  • अक्ष (Axis):
  • यह एक काल्पनिक रेखा है जो ग्लोब पर उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती है और जिसके चारों ओर ग्लोब घूमता है।
  • पृथ्वी भी अपनी अक्ष पर घूमती है। पृथ्वी की अक्ष वास्तव में झुकी हुई है।
  • ग्लोब के प्रकार:
  • विभिन्न आकार और प्रकार के ग्लोब उपलब्ध हैं: बड़े, छोटे, पॉकेट ग्लोब, गुब्बारे जैसे ग्लोब।
  • कुछ ग्लोब स्थिर नहीं होते बल्कि एक धुरी पर घूमते हैं।
  • उपयोगिता:
  • पृथ्वी के आकार, महाद्वीपों और महासागरों के वितरण को समझने में मदद करता है।
  • अक्षांश और देशांतर जैसी काल्पनिक रेखाओं को समझने का आधार प्रदान करता है।
📖నిర్వచనం

ग्लोब: पृथ्वी का एक लघु रूप में वास्तविक प्रतिरूप

ముఖ్యమైనది

पृथ्वी अपनी अक्ष पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है। यह झुकाव ही पृथ्वी पर ऋतुओं के परिवर्तन का मुख्य कारण है।

अक्षांश: महत्वपूर्ण समानांतर रेखाएँ

अक्षांश पूर्व से पश्चिम की ओर खींची गई काल्पनिक रेखाएँ हैं जो पृथ्वी पर किसी स्थान की उत्तरी या दक्षिणी स्थिति को दर्शाती हैं। इन्हें समानांतर रेखाएँ (Parallels) भी कहते हैं क्योंकि ये एक-दूसरे के समानांतर होती हैं और कभी नहीं मिलतीं।

  • भूमध्य रेखा (Equator):
  • यह 0 डिग्री अक्षांश पर स्थित है।
  • पृथ्वी को उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) और दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में विभाजित करती है।
  • यह सबसे लंबी अक्षांश रेखा है।
  • महत्वपूर्ण अक्षांश रेखाएँ:
  • कर्क रेखा (Tropic of Cancer): 23.5° उत्तरी अक्षांश पर स्थित।
  • मकर रेखा (Tropic of Capricorn): 23.5° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित।
  • आर्कटिक वृत्त (Arctic Circle): 66.5° उत्तरी अक्षांश पर स्थित।
  • अंटार्कटिक वृत्त (Antarctic Circle): 66.5° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित।
  • उत्तरी ध्रुव (North Pole): 90° उत्तरी अक्षांश पर स्थित।
  • दक्षिणी ध्रुव (South Pole): 90° दक्षिणी अक्षांश पर स्थित।
  • अक्षांश की विशेषताएँ:
  • सभी अक्षांश रेखाएँ वृत्ताकार होती हैं।
  • भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर वृत्त का आकार छोटा होता जाता है।
  • ये रेखाएँ एक-दूसरे के समानांतर होती हैं और कभी नहीं मिलतीं।
  • इनका उपयोग ताप कटिबंधों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
📖నిర్వచనం

अक्षांश: भूमध्य रेखा से किसी स्थान की कोणीय दूरी, जिसे डिग्री में उत्तर या दक्षिण में मापा जाता है।

💡సూచన

अक्षांश रेखाओं के डिग्री मान और उनकी दिशा (उत्तर/दक्षिण) को याद रखना महत्वपूर्ण है। ये अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं।

देशांतर: महत्वपूर्ण याम्योत्तर रेखाएँ

देशांतर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची गई काल्पनिक रेखाएँ हैं जो पृथ्वी पर किसी स्थान की पूर्वी या पश्चिमी स्थिति को दर्शाती हैं। इन्हें याम्योत्तर (Meridians) भी कहते हैं।

  • प्रधान याम्योत्तर (Prime Meridian):
  • यह 0 डिग्री देशांतर पर स्थित है।
  • यह लंदन के पास ग्रीनविच से होकर गुजरती है, इसलिए इसे ग्रीनविच याम्योत्तर भी कहते हैं।
  • यह पृथ्वी को पूर्वी गोलार्ध (Eastern Hemisphere) और पश्चिमी गोलार्ध (Western Hemisphere) में विभाजित करती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line):
  • यह 180 डिग्री देशांतर पर स्थित है।
  • यह एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा है जो कुछ भूमि क्षेत्रों से बचने के लिए मुड़ती है।
  • इस रेखा को पार करने पर एक दिन का अंतर आता है। पूर्व की ओर जाने पर एक दिन जोड़ा जाता है, और पश्चिम की ओर जाने पर एक दिन घटाया जाता है।
  • देशांतर की विशेषताएँ:
  • सभी देशांतर रेखाएँ अर्ध-वृत्ताकार होती हैं जो ध्रुवों पर मिलती हैं।
  • इनके बीच की दूरी भूमध्य रेखा पर अधिकतम होती है और ध्रुवों की ओर घटती जाती है, जहाँ वे शून्य हो जाती हैं।
  • इनका उपयोग समय क्षेत्रों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
  • अक्षांश और देशांतर का उपयोग:
  • किसी भी स्थान की सटीक स्थिति निर्धारित करने के लिए अक्षांश और देशांतर दोनों का उपयोग किया जाता है।
  • उदाहरण: दिल्ली 28.7° N अक्षांश और 77.2° E देशांतर पर स्थित है।
📖నిర్వచనం

देशांतर: प्रधान याम्योत्तर से किसी स्थान की कोणीय दूरी, जिसे डिग्री में पूर्व या पश्चिम में मापा जाता है।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को प्रधान याम्योत्तर से भ्रमित करते हैं। याद रखें, प्रधान याम्योत्तर 0° देशांतर है और समय का आधार है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 180° देशांतर है और तिथि परिवर्तन का आधार है।

पृथ्वी के ताप कटिबंध

पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश की मात्रा के आधार पर विभिन्न ताप कटिबंध (Heat Zones) हैं। ये कटिबंध अक्षांश रेखाओं द्वारा परिभाषित होते हैं।

  • उष्ण कटिबंध (Torrid Zone):
  • विस्तार: कर्क रेखा (23.5° N) और मकर रेखा (23.5° S) के बीच का क्षेत्र।
  • विशेषताएँ:
  • यहाँ वर्ष में कम से कम एक बार सूर्य की किरणें सीधी (ऊर्ध्वाधर) पड़ती हैं।
  • यह सबसे गर्म कटिबंध है।
  • यहाँ दिन और रात की अवधि में बहुत कम अंतर होता है।
  • समशीतोष्ण कटिबंध (Temperate Zones):
  • उत्तरी समशीतोष्ण कटिबंध: कर्क रेखा (23.5° N) और आर्कटिक वृत्त (66.5° N) के बीच।
  • दक्षिणी समशीतोष्ण कटिबंध: मकर रेखा (23.5° S) और अंटार्कटिक वृत्त (66.5° S) के बीच।
  • विशेषताएँ:
  • यहाँ सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं।
  • यहाँ मध्यम तापमान होता है, न बहुत गर्म न बहुत ठंडा।
  • यहाँ स्पष्ट ऋतु परिवर्तन होता है।
  • शीत कटिबंध (Frigid Zones):
  • उत्तरी शीत कटिबंध: आर्कटिक वृत्त (66.5° N) और उत्तरी ध्रुव (90° N) के बीच।
  • दक्षिणी शीत कटिबंध: अंटार्कटिक वृत्त (66.5° S) और दक्षिणी ध्रुव (90° S) के बीच।
  • विशेषताएँ:
  • यहाँ सूर्य की किरणें अत्यधिक तिरछी पड़ती हैं।
  • यह सबसे ठंडा कटिबंध है।
  • यहाँ 6 महीने दिन और 6 महीने रात हो सकती है।
  • सूर्य के प्रकाश का प्रभाव:
  • सूर्य की किरणें जितनी सीधी पड़ती हैं, उतनी ही अधिक गर्मी होती है।
  • किरणें जितनी तिरछी पड़ती हैं, उतनी ही कम गर्मी होती है।
ముఖ్యమైనది

ताप कटिबंधों का निर्धारण सूर्य के प्रकाश के आपतन कोण पर निर्भर करता है।

पृथ्वी की गतियाँ: घूर्णन और परिक्रमण

पृथ्वी दो प्रकार की गतियाँ करती है: घूर्णन (Rotation) और परिक्रमण (Revolution)।

पृथ्वी का घूर्णन (Earth's Rotation)

  • परिभाषा: पृथ्वी का अपनी अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमना।
  • अवधि: लगभग 24 घंटे (एक दिन)।
  • परिणाम:
  • दिन और रात का होना: पृथ्वी का जो भाग सूर्य के सामने होता है, वहाँ दिन होता है, और जो भाग पीछे होता है, वहाँ रात होती है।
  • प्रकाश वृत्त (Circle of Illumination): वह काल्पनिक रेखा जो दिन और रात को विभाजित करती है।
  • सूर्य, चंद्रमा और तारों का पूर्व से पश्चिम की ओर गति करता हुआ प्रतीत होना
  • ज्वार-भाटा (Tides) पर प्रभाव।

पृथ्वी का परिक्रमण (Earth's Revolution)

  • परिभाषा: पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर एक निश्चित कक्षा (Orbit) में घूमना।
  • अवधि: लगभग 365.25 दिन (एक वर्ष)।
  • कक्षा का आकार: पृथ्वी की कक्षा दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) होती है।
  • परिणाम:
  • ऋतुओं का परिवर्तन: पृथ्वी की झुकी हुई अक्ष और सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के कारण ऋतुएँ बदलती हैं।
  • दिन और रात की अवधि में परिवर्तन: वर्ष के विभिन्न समयों पर दिन और रात की लंबाई बदलती रहती है।
  • लीप वर्ष (Leap Year): हर चार साल में एक अतिरिक्त दिन (29 फरवरी) जोड़ा जाता है, क्योंकि पृथ्वी को एक परिक्रमण पूरा करने में 365 दिन और 6 घंटे लगते हैं। ये 6 घंटे 4 साल में मिलकर एक पूरा दिन बनाते हैं।

संक्रांति और विषुव (Solstices and Equinoxes)

  • ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice):
  • तिथि: 21 जून।
  • विशेषता: उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं। दक्षिणी गोलार्ध में इसका विपरीत होता है।
  • शीत संक्रांति (Winter Solstice):
  • तिथि: 22 दिसंबर।
  • विशेषता: दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। सूर्य की किरणें मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं। उत्तरी गोलार्ध में इसका विपरीत होता है।
  • वसंत विषुव (Spring Equinox):
  • तिथि: 21 मार्च।
  • विशेषता: पूरी पृथ्वी पर दिन और रात बराबर होते हैं। सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर सीधी पड़ती हैं।
  • शरद विषुव (Autumnal Equinox):
  • तिथि: 23 सितंबर।
  • विशेषता: पूरी पृथ्वी पर दिन और रात बराबर होते हैं। सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर सीधी पड़ती हैं।
గుర్తుంచుకోండి

पृथ्वी का अपनी अक्ष पर झुकाव ही ऋतु परिवर्तन का मुख्य कारण है। यदि पृथ्वी झुकी हुई न होती, तो पूरे वर्ष एक ही ऋतु रहती।

💡సూచన

संक्रांति और विषुव की तिथियाँ और उनके प्रभाव (जैसे सबसे लंबा दिन/रात, दिन-रात बराबर) अक्सर पूछे जाते हैं। इन तिथियों को याद रखें।

ग्रहण: सौर और चंद्र

ग्रहण एक खगोलीय घटना है जब एक खगोलीय पिंड दूसरे खगोलीय पिंड की छाया में आ जाता है।

सौर ग्रहण (Solar Eclipse)

  • कब होता है: जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है।
  • क्रम: सूर्य → चंद्रमा → पृथ्वी।
  • परिणाम: चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है, और पृथ्वी से देखने पर सूर्य का कुछ या पूरा भाग ढका हुआ दिखाई देता है।
  • प्रकार:
  • पूर्ण सौर ग्रहण: जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेता है।
  • आंशिक सौर ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ढकता है।
  • वलयाकार सौर ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य के केंद्र को ढकता है, लेकिन किनारों पर एक 'अग्नि वलय' दिखाई देता है।
  • कब संभव: केवल अमावस्या (New Moon) के दिन।
  • सावधानी: सौर ग्रहण को सीधे न देखें, यह आँखों के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेष चश्मे या उपकरणों का उपयोग करें।

चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse)

  • कब होता है: जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।
  • क्रम: सूर्य → पृथ्वी → चंद्रमा।
  • परिणाम: पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, और पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा का कुछ या पूरा भाग ढका हुआ या लाल रंग का दिखाई देता है।
  • प्रकार:
  • पूर्ण चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है।
  • आंशिक चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया के केवल एक हिस्से में प्रवेश करता है।
  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया (penumbra) में होता है, जिससे वह थोड़ा धुंधला दिखाई देता है।
  • कब संभव: केवल पूर्णिमा (Full Moon) के दिन।
  • सुरक्षा: चंद्र ग्रहण को सीधे देखना सुरक्षित होता है।
ముఖ్యమైనది

ग्रहण तभी होते हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में हों।

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