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AP · Class 9 · 📘 Physical_Science · Chapter 5

Gravitation

గురుత్వాకర్షణ నియమంస్వేచ్ఛా పతనంద్రవ్యరాశి మరియు బరువుత్రస్ట్ మరియు పీడనంఉత్ప్లవత మరియు ఆర్కిమెడిస్ సూత్రం

ఈ అధ్యాయం గురుత్వాకర్షణ ప్రాథమిక సూత్రాలను వివరిస్తుంది. విశ్వ గురుత్వాకర్షణ నియమం, స్వేచ్ఛా పతనం, ద్రవ్యరాశి మరియు బరువు మధ్య వ్యత్యాసం, త్రస్ట్ మరియు పీడనం, మరియు ద్రవాలలో ఉత్ప్లవత వంటి కీలక భావనలను విద్యార్థులు నేర్చుకుంటారు. ఆర్కిమెడిస్ సూత్రం మరియు దాని అనువర్తనాలు కూడా చర్చించబడ్డాయి. ఈ భావనలు రోజువారీ జీవితంలో వస్తువుల కదలికలు మరియు ప్రవర్తనను అర్థం చేసుకోవడానికి చాలా ముఖ్యమైనవి.

गुरुत्वाकर्षण का सार्वभौमिक नियम

गुरुत्वाकर्षण वह बल है जिसके द्वारा ब्रह्मांड में प्रत्येक वस्तु दूसरी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है।

  • न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वभौमिक नियम:
  • ब्रह्मांड में प्रत्येक पिंड प्रत्येक दूसरे पिंड को एक बल से आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  • यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।
  • गणितीय निरूपण:
  • दो पिंडों के द्रव्यमान \(m_1\) और \(m_2\) हैं।
  • उनके केंद्रों के बीच की दूरी \(d\) है।
  • गुरुत्वाकर्षण बल \(F\) है।
  • \(F \propto m_1 m_2\)
  • \(F \propto \frac{1}{d^2}\)
  • दोनों को मिलाने पर: \(F \propto \frac{m_1 m_2}{d^2}\)
  • समानुपाती स्थिरांक \(G\) का उपयोग करके: \(F = G \frac{m_1 m_2}{d^2}\)
  • सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (G):
  • यह एक समानुपाती स्थिरांक है जिसे सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक कहा जाता है।
  • इसका मान पूरे ब्रह्मांड में स्थिर रहता है, चाहे माध्यम कुछ भी हो।
  • SI इकाई: न्यूटन मीटर वर्ग प्रति किलोग्राम वर्ग (\(Nm^2kg^{-2}\))
  • मान: \(G = 6.673 \times 10^{-11} Nm^2kg^{-2}\)
  • सार्वभौमिक नियम क्यों?
  • यह नियम सभी पिंडों पर लागू होता है, चाहे वे छोटे हों या बड़े, चाहे वे स्थलीय हों या खगोलीय।
  • यह पृथ्वी को बांधने वाले बल, चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाले बल, ग्रहों को सूर्य के चारों ओर घूमने वाले बल और ज्वार-भाटा के लिए जिम्मेदार बल की व्याख्या करता है।
  • गुरुत्वाकर्षण बल और न्यूटन का तीसरा नियम:
  • गुरुत्वाकर्षण बल न्यूटन के गति के तीसरे नियम का पालन करता है।
  • अर्थात, यदि पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है, तो वस्तु भी पृथ्वी को समान परिमाण के बल से विपरीत दिशा में आकर्षित करती है।
  • हालांकि, पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक होने के कारण, उस पर उत्पन्न त्वरण नगण्य होता है।
🧮సూత్రం

गुरुत्वाकर्षण बल: \(F = G \frac{m_1 m_2}{d^2}\)

ముఖ్యమైనది

गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक (G) का मान माध्यम पर निर्भर नहीं करता है।

मुक्त पतन और गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g)

  • मुक्त पतन (Free Fall):
  • जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गिरती है, तो उसे मुक्त पतन में कहा जाता है।
  • मुक्त पतन के दौरान, हवा के प्रतिरोध को नगण्य माना जाता है।
  • ऐसी स्थिति में, सभी वस्तुएँ, चाहे वे भारी हों या हल्की, एक ही त्वरण से गिरती हैं
  • गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g):
  • मुक्त पतन में किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण कहते हैं।
  • इसे 'g' से दर्शाया जाता है।
  • SI इकाई: मीटर प्रति सेकंड वर्ग (\(m/s^2\))
  • 'g' और 'G' के बीच संबंध:
  • न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, बल \(F = ma\)। मुक्त पतन में \(a = g\), तो \(F = mg\)।
  • गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के अनुसार, पृथ्वी (द्रव्यमान \(M\)) और वस्तु (द्रव्यमान \(m\)) के बीच बल \(F = G \frac{Mm}{R^2}\), जहाँ \(R\) पृथ्वी की त्रिज्या है (यदि वस्तु पृथ्वी की सतह पर या उसके पास है)।
  • दोनों समीकरणों को बराबर करने पर:

\(mg = G \frac{Mm}{R^2}\) \(g = \frac{GM}{R^2}\)

  • 'g' के मान की गणना:
  • \(G = 6.673 \times 10^{-11} Nm^2kg^{-2}\)
  • पृथ्वी का द्रव्यमान (\(M\)) \(= 6 \times 10^{24} kg\)
  • पृथ्वी की त्रिज्या (\(R\)) \(= 6.4 \times 10^6 m\)
  • इन मानों को सूत्र में रखने पर:

\(g = \frac{(6.673 \times 10^{-11} Nm^2kg^{-2}) \times (6 \times 10^{24} kg)}{(6.4 \times 10^6 m)^2}\) \(g \approx 9.8 m/s^2\)

  • 'g' के मान में भिन्नता:
  • 'g' का मान पृथ्वी की सतह पर स्थान के अनुसार थोड़ा भिन्न होता है।
  • यह ध्रुवों पर अधिकतम और भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है क्योंकि पृथ्वी पूर्ण गोलाकार नहीं है (ध्रुवों पर चपटी)।
  • पृथ्वी की सतह से ऊंचाई बढ़ने पर 'g' का मान घटता है।
  • 'g' का मान वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
🧮సూత్రం

गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण: \(g = \frac{GM}{R^2}\)

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर 'G' और 'g' के बीच भ्रमित हो जाते हैं। याद रखें, G एक सार्वभौमिक स्थिरांक है, जबकि g एक त्वरण है जिसका मान स्थान के अनुसार बदलता रहता है

द्रव्यमान और भार

  • द्रव्यमान (Mass):
  • किसी वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं।
  • यह वस्तु की जड़ता का माप है।
  • यह एक अदिश राशि है (केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं)।
  • SI इकाई: किलोग्राम (kg)।
  • द्रव्यमान स्थान के साथ नहीं बदलता है। यह पृथ्वी पर, चंद्रमा पर या अंतरिक्ष में हर जगह समान रहता है।
  • भार (Weight):
  • किसी वस्तु पर पृथ्वी द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल उसका भार कहलाता है।
  • यह वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर आकर्षित करती है।
  • भार \(W = mg\), जहाँ \(m\) वस्तु का द्रव्यमान और \(g\) गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है।
  • यह एक सदिश राशि है (परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, दिशा हमेशा पृथ्वी के केंद्र की ओर)।
  • SI इकाई: न्यूटन (N)।
  • भार स्थान के साथ बदलता रहता है क्योंकि 'g' का मान स्थान के साथ बदलता है।
  • द्रव्यमान और भार में अंतर (तालिका):

| विशेषता | द्रव्यमान (Mass) | भार (Weight) | |:-----------|:-------------------------------------------------|:-----------------------------------------------| | परिभाषा | वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा | वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल | | प्रकृति | जड़ता का माप | बल का माप | | राशि | अदिश राशि | सदिश राशि | | SI इकाई | किलोग्राम (kg) | न्यूटन (N) | | परिवर्तन | स्थान के साथ नहीं बदलता | स्थान के साथ बदलता है (g पर निर्भर) | | शून्य | कभी शून्य नहीं हो सकता | अंतरिक्ष में शून्य हो सकता है (भारहीनता) |

  • किसी वस्तु का चंद्रमा पर भार:
  • चंद्रमा का द्रव्यमान और त्रिज्या पृथ्वी की तुलना में कम है, इसलिए चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (\(g_m\)) पृथ्वी की तुलना में कम होता है।
  • \(g_m \approx \frac{1}{6} g_e\) (जहाँ \(g_e\) पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण है)।
  • इसलिए, चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार का लगभग \(1/6\) गुना होता है।
  • \(W_m = mg_m = m (\frac{1}{6} g_e) = \frac{1}{6} (mg_e) = \frac{1}{6} W_e\)
  • यही कारण है कि अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर हल्के महसूस करते हैं और ऊंची छलांग लगा सकते हैं।
🧮సూత్రం

भार: \(W = mg\) चंद्रमा पर भार: \(W_m = \frac{1}{6} W_e\)

గుర్తుంచుకోండి

आपका द्रव्यमान हमेशा समान रहता है, लेकिन आपका भार स्थान के अनुसार बदल सकता है

प्रणोद और दाब

  • प्रणोद (Thrust):
  • किसी सतह पर लंबवत लगने वाले बल को प्रणोद कहते हैं।
  • यह एक सदिश राशि है।
  • SI इकाई: न्यूटन (N)।
  • उदाहरण: दीवार में कील ठोकना, रेत पर खड़े होना।
  • दाब (Pressure):
  • प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले प्रणोद को दाब कहते हैं।
  • दाब \(P = \frac{F}{A}\), जहाँ \(F\) प्रणोद और \(A\) क्षेत्रफल है जिस पर बल लग रहा है।
  • यह एक अदिश राशि है।
  • SI इकाई: न्यूटन प्रति मीटर वर्ग (\(N/m^2\)) या पास्कल (Pa)।
  • दाब क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात, क्षेत्रफल जितना कम होगा, दाब उतना ही अधिक होगा (समान बल के लिए)।
  • दाब के अनुप्रयोग:
  • नुकीली कीलें आसानी से लकड़ी में घुस जाती हैं क्योंकि उनका क्षेत्रफल कम होता है, जिससे अधिक दाब उत्पन्न होता है।
  • तेज चाकू वस्तुओं को आसानी से काटता है।
  • स्कूल बैग की पट्टियां चौड़ी होती हैं ताकि कंधे पर दाब कम पड़े।
  • ट्रैक्टर के टायर चौड़े होते हैं ताकि जमीन पर दाब कम पड़े और वे नरम जमीन में न धंसें।
  • इमारतों की नींव चौड़ी बनाई जाती है ताकि जमीन पर दाब कम हो।
  • द्रवों में दाब:
  • द्रव और गैसें दोनों ही तरल पदार्थ कहलाती हैं क्योंकि वे बह सकती हैं।
  • ठोसों की तरह, तरल पदार्थ भी अपने भार के कारण दाब डालते हैं।
  • तरल पदार्थ सभी दिशाओं में दाब डालते हैं - नीचे की ओर, बगल में और ऊपर की ओर भी।
  • किसी तरल में गहराई बढ़ने पर दाब बढ़ता है।
📖నిర్వచనం

प्रणोद (Thrust): किसी सतह पर लंबवत लगने वाला बल।

🧮సూత్రం

दाब: \(P = \frac{\text{प्रणोद}}{\text{क्षेत्रफल}} = \frac{F}{A}\)

💡సూచన

प्रणोद और दाब के दैनिक जीवन के अनुप्रयोगों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर उदाहरणों के साथ पूछे जाते हैं।

उत्प्लावन बल और आर्किमिडीज का सिद्धांत

  • उत्प्लावन बल (Buoyancy):
  • जब किसी वस्तु को किसी तरल पदार्थ (द्रव या गैस) में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो तरल पदार्थ उस पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है। इस बल को उत्प्लावन बल या उत्क्षेप कहते हैं।
  • उत्प्लावन बल के कारण वस्तुएँ तरल पदार्थ में हल्की महसूस होती हैं।
  • उत्प्लावन बल तरल पदार्थ के घनत्व और विस्थापित तरल पदार्थ के आयतन पर निर्भर करता है।
  • यह वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
  • आर्किमिडीज का सिद्धांत (Archimedes' Principle):
  • जब किसी वस्तु को किसी तरल पदार्थ में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है जो वस्तु द्वारा विस्थापित तरल पदार्थ के भार के बराबर होता है
  • अनुप्रयोग:
  • जहाजों और पनडुब्बियों के डिजाइन में उपयोग किया जाता है। जहाज पानी में तैरते हैं क्योंकि वे अपने भार के बराबर पानी विस्थापित करते हैं, जिससे उत्प्लावन बल उनके भार के बराबर हो जाता है।
  • लैक्टोमीटर (दूध की शुद्धता मापने के लिए) और हाइड्रोमीटर (तरल पदार्थों का घनत्व मापने के लिए) इसी सिद्धांत पर आधारित हैं।
  • वस्तुएँ क्यों तैरती हैं या डूबती हैं:
  • किसी वस्तु का तैरना या डूबना उसके घनत्व पर निर्भर करता है।
  • घनत्व (Density): द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन (\(D = \frac{M}{V}\))।
  • तैरना: यदि वस्तु का घनत्व तरल पदार्थ के घनत्व से कम है, तो वस्तु तैरेगी।
  • उदाहरण: लकड़ी पानी पर तैरती है क्योंकि लकड़ी का घनत्व पानी से कम होता है।
  • डूबना: यदि वस्तु का घनत्व तरल पदार्थ के घनत्व से अधिक है, तो वस्तु डूबेगी।
  • उदाहरण: लोहे की कील पानी में डूब जाती है क्योंकि लोहे का घनत्व पानी से अधिक होता है।
  • आंशिक रूप से डूबकर तैरना: यदि वस्तु का घनत्व तरल पदार्थ के घनत्व के बराबर है, तो वस्तु तरल पदार्थ में आंशिक रूप से डूबकर तैरेगी।
  • लोहे की कील डूबती है, जहाज तैरता है - क्यों?
  • लोहे की कील का घनत्व पानी से अधिक होता है, इसलिए वह डूब जाती है।
  • जहाज लोहे और स्टील से बना होता है, लेकिन उसका आकार ऐसा होता है कि वह बहुत अधिक पानी विस्थापित करता है
  • विस्थापित पानी का भार जहाज के कुल भार के बराबर होता है, जिससे उत्प्लावन बल जहाज के भार को संतुलित कर देता है और वह तैरता रहता है। जहाज का औसत घनत्व पानी के घनत्व से कम हो जाता है।
📖నిర్వచనం

उत्प्लावन बल (Buoyancy): किसी तरल पदार्थ में डूबी हुई वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला बल।

ముఖ్యమైనది

आर्किमिडीज का सिद्धांत: उत्प्लावन बल = विस्थापित तरल पदार्थ का भार

💡సూచన

वस्तुओं के तैरने या डूबने के कारणों को घनत्व के संदर्भ में समझाना सीखें। यह एक बहुत ही सामान्य बोर्ड परीक्षा प्रश्न है।

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