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SOUND

ధ్వని ఉత్పత్తిధ్వని ప్రచారంసంపీడనాలు మరియు విరళీకరణలుతరంగదైర్ఘ్యం, పౌనఃపున్యం, కంపన పరిమితిధ్వని పరావర్తనంప్రతిధ్వని

ధ్వని అనేది మన దైనందిన జీవితంలో ఒక ముఖ్యమైన భాగం. ఈ అధ్యాయం ధ్వని ఎలా ఉత్పత్తి అవుతుంది, వివిధ మాధ్యమాల ద్వారా ఎలా ప్రయాణిస్తుంది, దాని లక్షణాలు (తరంగదైర్ఘ్యం, పౌనఃపున్యం, కంపన పరిమితి), ధ్వని పరావర్తనం, ప్రతిధ్వని, అనురణనం మరియు శ్రవణ పరిధి వంటి కీలక భావనలను వివరిస్తుంది. అల్ట్రాసౌండ్ యొక్క అనువర్తనాలను కూడా ఇది చర్చిస్తుంది. ఈ భావనలను అర్థం చేసుకోవడం భౌతిక శాస్త్రం యొక్క ప్రాథమిక సూత్రాలను గ్రహించడానికి మరియు చుట్టూ ఉన్న ప్రపంచాన్ని అర్థం చేసుకోవడానికి చాలా ముఖ్యం.

ध्वनि का उत्पादन (Production of Sound)

ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो हमारे कानों में सुनने की संवेदना पैदा करती है।

  • ध्वनि का स्रोत: ध्वनि हमेशा कंपन करने वाली वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है।
  • उदाहरण:
  • ट्यूनिंग फोर्क को रबर पैड पर मारने से कंपन होता है और ध्वनि उत्पन्न होती है।
  • मनुष्य की आवाज स्वर रज्जु (vocal cords) के कंपन से उत्पन्न होती है।
  • खींचा हुआ रबर बैंड खींचने पर कंपन करता है और ध्वनि उत्पन्न करता है।
  • स्कूल की घंटी बजने पर कंपन करती है।
  • कंपन (Vibration): किसी वस्तु की तेज आगे-पीछे की गति को कंपन कहते हैं।
  • ऊर्जा रूपांतरण: ध्वनि उत्पन्न करने के लिए यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग किया जाता है, जो ध्वनि ऊर्जा में परिवर्तित होती है। ऊर्जा संरक्षण का नियम यहाँ भी लागू होता है।

गतिविधि 9.1 और 9.2 से निष्कर्ष:

  • कंपन करने वाली वस्तुएं ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
  • कंपन को देखा या महसूस किया जा सकता है (जैसे ट्यूनिंग फोर्क को छूने पर या पानी की सतह पर तरंगें)।
  • कंपन करने वाली वस्तु के संपर्क में आने पर अन्य वस्तुएं भी हिलती हैं (जैसे ट्यूनिंग फोर्क से टेबल टेनिस बॉल का हिलना)।
ముఖ్యమైనది

ध्वनि हमेशा कंपन करने वाली वस्तु द्वारा उत्पन्न होती है। बिना कंपन के ध्वनि उत्पन्न नहीं हो सकती।

ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound)

ध्वनि को संचरण के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है। यह निर्वात में यात्रा नहीं कर सकती।

  • माध्यम (Medium): वह पदार्थ या माध्यम जिसके माध्यम से ध्वनि संचरित होती है। यह ठोस, तरल या गैस हो सकता है।
  • संचरण की प्रक्रिया:
  1. जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम के कणों को कंपन कराती है।
  2. कंपन करने वाली वस्तु के संपर्क में आने वाला कण अपनी संतुलन स्थिति से विस्थापित होता है।
  3. यह कण अपने पड़ोसी कण पर बल लगाता है, जिससे पड़ोसी कण भी विस्थापित हो जाता है।
  4. पहला कण अपनी मूल स्थिति में लौट आता है।
  5. यह प्रक्रिया माध्यम में तब तक जारी रहती है जब तक ध्वनि हमारे कान तक नहीं पहुँच जाती।
  • महत्वपूर्ण बिंदु: माध्यम के कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते; वे केवल अपनी माध्य स्थिति के इर्द-गिर्द दोलन करते हैं। विक्षोभ (disturbance) आगे बढ़ता है, कण नहीं।
  • यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves): ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें हैं क्योंकि उन्हें संचरण के लिए एक भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है।
  • संपीडन और विरलन (Compressions and Rarefactions):
  • जब कंपन करने वाली वस्तु आगे बढ़ती है, तो वह अपने सामने की हवा को धकेलती और संपीड़ित करती है, जिससे उच्च दाब का क्षेत्र बनता है जिसे संपीडन (C) कहते हैं।
  • जब वस्तु पीछे हटती है, तो वह कम दाब का क्षेत्र बनाती है जिसे विरलन (R) कहते हैं।
  • वस्तु के तेजी से आगे-पीछे हिलने से संपीडन और विरलन की एक श्रृंखला बनती है, जो माध्यम से ध्वनि तरंग के रूप में फैलती है।
  • घनत्व भिन्नता: ध्वनि का संचरण माध्यम में घनत्व या दाब भिन्नता के संचरण के रूप में देखा जा सकता है। संपीडन में कणों का घनत्व अधिक होता है, जबकि विरलन में कम होता है।
📖నిర్వచనం

संपीडन (Compression): माध्यम में उच्च दाब और उच्च घनत्व का क्षेत्र। विरलन (Rarefaction): माध्यम में कम दाब और कम घनत्व का क्षेत्र।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर सोचते हैं कि ध्वनि संचरण में माध्यम के कण स्रोत से श्रोता तक यात्रा करते हैं। यह गलत है। केवल ऊर्जा (विक्षोभ) यात्रा करती है, कण अपनी माध्य स्थिति के इर्द-गिर्द दोलन करते हैं।

ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें हैं (Sound Waves are Longitudinal Waves)

  • अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves): वे तरंगें जिनमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर दोलन करते हैं।
  • ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें हैं क्योंकि माध्यम के कण (हवा के अणु) संपीडन और विरलन बनाते हुए ध्वनि के संचरण की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं।
  • उदाहरण: स्लिंकी में बनने वाली तरंगें। जब स्लिंकी को धक्का दिया जाता है, तो संपीडन और विरलन बनते हैं जो स्लिंकी की लंबाई के साथ यात्रा करते हैं, और स्लिंकी के कुंडल (कण) तरंग की दिशा के समानांतर दोलन करते हैं।
  • अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves): वे तरंगें जिनमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत दोलन करते हैं।
  • उदाहरण: पानी की सतह पर बनने वाली तरंगें, प्रकाश तरंगें।
  • नोट: प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है, लेकिन यह यांत्रिक तरंग नहीं है क्योंकि इसे संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
🔑కీలక అంశం

ध्वनि तरंग की विशेषताएँ (Characteristics of a Sound Wave)

एक ध्वनि तरंग को उसकी आवृत्ति (frequency), आयाम (amplitude) और गति (speed) द्वारा वर्णित किया जा सकता है।

1. तरंग दैर्ध्य (Wavelength, \(\lambda\))

  • परिभाषा: दो लगातार संपीडनों (C) या दो लगातार विरलनों (R) के बीच की दूरी को तरंग दैर्ध्य कहते हैं।
  • प्रतीक: \(\lambda\) (ग्रीक अक्षर लैम्डा)।
  • SI इकाई: मीटर (m)।

2. आवृत्ति (Frequency, \(\nu\))

  • परिभाषा: प्रति इकाई समय में होने वाले पूर्ण दोलनों (एक संपीडन और एक विरलन का एक चक्र) की संख्या।
  • प्रतीक: \(\nu\) (ग्रीक अक्षर नू)।
  • SI इकाई: हर्ट्ज़ (Hz)।
  • पिच (Pitch): मस्तिष्क द्वारा ध्वनि की आवृत्ति की व्याख्या को पिच कहते हैं।
  • उच्च आवृत्ति = उच्च पिच (तीखी ध्वनि)
  • कम आवृत्ति = कम पिच (गंभीर ध्वनि)
  • उदाहरण: एक बच्चे की आवाज की पिच एक वयस्क पुरुष की आवाज की तुलना में अधिक होती है।

3. समय अवधि (Time Period, T)

  • परिभाषा: एक पूर्ण दोलन को पूरा करने में लगने वाला समय।
  • प्रतीक: T।
  • SI इकाई: सेकंड (s)।
  • संबंध: आवृत्ति और समय अवधि एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं: \(\nu = \frac{1}{T}\).

4. आयाम (Amplitude, A)

  • परिभाषा: माध्यम में माध्य मान के दोनों ओर अधिकतम विक्षोभ का परिमाण।
  • प्रतीक: A।
  • इकाई: माध्यम के घनत्व या दाब की इकाई (जैसे Pa)।
  • प्रबलता (Loudness): ध्वनि की प्रबलता या मृदुता मुख्य रूप से उसके आयाम द्वारा निर्धारित होती है।
  • बड़ा आयाम = अधिक प्रबल ध्वनि (अधिक ऊर्जा)
  • छोटा आयाम = कम प्रबल ध्वनि (कम ऊर्जा)
  • ऊर्जा: प्रबल ध्वनि में अधिक ऊर्जा होती है और वह अधिक दूरी तक यात्रा कर सकती है।

5. ध्वनि की गुणवत्ता या टिम्बर (Quality or Timbre)

  • परिभाषा: यह वह विशेषता है जो हमें समान पिच और प्रबलता वाली दो ध्वनियों के बीच अंतर करने में सक्षम बनाती है।
  • टोन (Tone): एकल आवृत्ति की ध्वनि।
  • नोट (Note): कई आवृत्तियों के मिश्रण से उत्पन्न ध्वनि जो सुनने में सुखद होती है।
  • शोर (Noise): सुनने में अप्रिय ध्वनि।

6. ध्वनि की गति (Speed of Sound, v)

  • परिभाषा: प्रति इकाई समय में ध्वनि तरंग द्वारा तय की गई दूरी।
  • सूत्र: \(v = \frac{\text{दूरी}}{\text{समय}} = \frac{\lambda}{T}\)
  • संबंध: चूंकि \(\nu = \frac{1}{T}\), इसलिए \(v = \lambda \nu\).
  • महत्वपूर्ण: एक दिए गए माध्यम में समान भौतिक परिस्थितियों में ध्वनि की गति सभी आवृत्तियों के लिए लगभग समान रहती है।
🧮సూత్రం

ध्वनि की गति का सूत्र: \(v = \lambda \nu\) जहाँ:

  • \(v\) = ध्वनि की गति (m/s)
  • \(\lambda\) = तरंग दैर्ध्य (m)
  • \(\nu\) = आवृत्ति (Hz)
💡సూచన

पिच और प्रबलता के बीच अंतर को याद रखें। पिच आवृत्ति से संबंधित है, जबकि प्रबलता आयाम से संबंधित है।

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की गति (Speed of Sound in Different Media)

  • ध्वनि एक परिमित गति से संचरित होती है। प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत अधिक होती है (जैसे बिजली चमकने के बाद गड़गड़ाहट सुनाई देना)।
  • माध्यम पर निर्भरता: ध्वनि की गति मुख्य रूप से माध्यम के प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है।
  • अवस्था के अनुसार गति:
  • ठोस में ध्वनि की गति > तरल में ध्वनि की गति > गैस में ध्वनि की गति।
  • कारण: ठोसों में कण एक-दूसरे के बहुत करीब होते हैं और दृढ़ता से बंधे होते हैं, जिससे कंपन ऊर्जा का संचरण अधिक कुशलता से होता है।
  • तापमान पर निर्भरता: माध्यम का तापमान बढ़ने पर ध्वनि की गति बढ़ती है।
  • उदाहरण: हवा में ध्वनि की गति \(0^\circ C\) पर \(331 \text{ m/s}\) और \(22^\circ C\) पर \(344 \text{ m/s}\) होती है।
ముఖ్యమైనది

ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती क्योंकि वहाँ कोई माध्यम नहीं होता।

ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)

प्रकाश की तरह, ध्वनि भी ठोस या तरल सतहों से परावर्तित होती है और परावर्तन के नियमों का पालन करती है।

  • परावर्तन के नियम:
  1. आपतित ध्वनि, परावर्तित ध्वनि और आपतन बिंदु पर परावर्तक सतह पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं
  2. आपतन कोण (angle of incidence) हमेशा परावर्तन कोण (angle of reflection) के बराबर होता है।
  • आवश्यकताएँ: ध्वनि के प्रभावी परावर्तन के लिए एक बड़ी आकार की बाधा (चिकनी या खुरदरी) की आवश्यकता होती है।
  • अनुप्रयोग: ध्वनि के परावर्तन का उपयोग कई उपकरणों और घटनाओं में होता है, जैसे प्रतिध्वनि, सोनार आदि।
💡సూచన

ध्वनि के परावर्तन के नियम प्रकाश के परावर्तन के नियमों के समान हैं। याद रखें कि अभिलंब हमेशा सतह के लंबवत होता है।

प्रतिध्वनि (Echo)

  • परिभाषा: जब हम किसी उपयुक्त परावर्तक वस्तु (जैसे ऊंची इमारत या पहाड़) के पास चिल्लाते या ताली बजाते हैं, तो हमें वही ध्वनि थोड़ी देर बाद फिर से सुनाई देती है। इस परावर्तित ध्वनि को प्रतिध्वनि कहते हैं।
  • स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने की शर्तें:
  1. समय अंतराल: मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच का समय अंतराल कम से कम 0.1 सेकंड होना चाहिए। यह इसलिए है क्योंकि हमारे मस्तिष्क में ध्वनि की संवेदना लगभग 0.1 सेकंड तक बनी रहती है (श्रवण की दृढ़ता)।
  2. न्यूनतम दूरी: यदि हवा में ध्वनि की गति \(344 \text{ m/s}\) है, तो ध्वनि को परावर्तक सतह तक जाने और वापस आने में \(0.1 \text{ s}\) लगना चाहिए।
  • तय की गई कुल दूरी = गति \(\times\) समय = \(344 \text{ m/s} \times 0.1 \text{ s} = 34.4 \text{ m}\).
  • चूंकि ध्वनि जाती और वापस आती है, इसलिए स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की न्यूनतम दूरी इस कुल दूरी की आधी होनी चाहिए।
  • न्यूनतम दूरी = \(\frac{34.4 \text{ m}}{2} = 17.2 \text{ m}\).
  • यह न्यूनतम दूरी तापमान के साथ बदलती है क्योंकि ध्वनि की गति तापमान पर निर्भर करती है।
  • बहु-प्रतिध्वनि (Multiple Echoes): ध्वनि के लगातार परावर्तन के कारण एक से अधिक बार प्रतिध्वनि सुनाई दे सकती है।
  • उदाहरण: गड़गड़ाहट की आवाज बादलों और जमीन से ध्वनि के लगातार परावर्तन के कारण होती है।
🧮సూత్రం

प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी: \(d = \frac{v \times t}{2}\) जहाँ:

  • \(d\) = स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की दूरी
  • \(v\) = ध्वनि की गति
  • \(t\) = श्रवण की दृढ़ता का समय (0.1 s)

अनुरणन (Reverberation)

  • परिभाषा: एक बड़े हॉल में उत्पन्न ध्वनि दीवारों से बार-बार परावर्तन के कारण तब तक बनी रहती है जब तक कि वह इतनी कम न हो जाए कि सुनाई न दे। ध्वनि के इस बने रहने को अनुरणन कहते हैं।
  • प्रभाव: अत्यधिक अनुरणन अवांछनीय होता है क्योंकि यह ध्वनि को अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला बना देता है।
  • अनुरणन कम करने के उपाय:
  • ऑडिटोरियम की छत और दीवारों को ध्वनि-अवशोषक सामग्री (जैसे संपीड़ित फाइबरबोर्ड, खुरदरा प्लास्टर, या पर्दे) से ढका जाता है।
  • सीटों की सामग्री भी ध्वनि अवशोषित करने वाले गुणों के आधार पर चुनी जाती है।
🔑కీలక అంశం

ध्वनि के बहु-परावर्तन के उपयोग (Uses of Multiple Reflection of Sound)

ध्वनि के बहु-परावर्तन का उपयोग कई व्यावहारिक अनुप्रयोगों में किया जाता है:

  1. मेगाफोन और हॉर्न (Megaphones and Horns):
  • ये उपकरण ध्वनि को सभी दिशाओं में फैलने से रोकने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
  • एक शंक्वाकार उद्घाटन वाली ट्यूब ध्वनि तरंगों को लगातार परावर्तित करके अधिकांश ध्वनि को आगे की दिशा में दर्शकों की ओर निर्देशित करती है।
  • उदाहरण: तुरही, शहनाई।
  1. स्टेथोस्कोप (Stethoscope):
  • एक चिकित्सा उपकरण जिसका उपयोग शरीर के भीतर उत्पन्न ध्वनियों (मुख्य रूप से हृदय या फेफड़ों) को सुनने के लिए किया जाता है।
  • रोगी के दिल की धड़कन की ध्वनि बहु-परावर्तन द्वारा डॉक्टर के कानों तक पहुँचती है।
  1. कॉन्सर्ट हॉल और सिनेमा हॉल की छतें (Ceilings of Concert Halls and Cinema Halls):
  • इनकी छतें अक्सर घुमावदार बनाई जाती हैं ताकि परावर्तन के बाद ध्वनि हॉल के सभी कोनों तक पहुँच सके।
  • कभी-कभी मंच के पीछे एक घुमावदार साउंडबोर्ड लगाया जाता है ताकि ध्वनि परावर्तित होकर हॉल की चौड़ाई में समान रूप से फैल जाए।
గుర్తుంచుకోండి

बहु-परावर्तन का सिद्धांत ध्वनि को एक विशिष्ट दिशा में केंद्रित करने या पूरे स्थान में समान रूप से वितरित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

श्रवण की सीमा (Range of Hearing)

  • श्रव्य ध्वनि (Audible Sound): मानव कान के लिए श्रव्य ध्वनि की सीमा लगभग 20 Hz से 20000 Hz (20 kHz) तक होती है।
  • छोटे बच्चे और कुछ जानवर (जैसे कुत्ते) 25 kHz तक की आवृत्तियों को सुन सकते हैं।
  • जैसे-जैसे लोग बड़े होते हैं, उनके कान उच्च आवृत्तियों के प्रति कम संवेदनशील हो जाते हैं।
  • इन्फ्रासाउंड (Infrasound):
  • परिभाषा: 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि।
  • उदाहरण: पेंडुलम के कंपन, गैंडे (5 Hz तक), व्हेल और हाथी इन्फ्रासाउंड उत्पन्न करते हैं।
  • अनुप्रयोग: भूकंप से पहले कम आवृत्ति वाला इन्फ्रासाउंड उत्पन्न होता है, जो जानवरों को सचेत कर सकता है।
  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound):
  • परिभाषा: 20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि।
  • उदाहरण: डॉल्फ़िन, चमगादड़ और पोरपोइज़ अल्ट्रासाउंड उत्पन्न करते हैं। कुछ पतंगे चमगादड़ों के अल्ट्रासाउंड को सुन सकते हैं। चूहे भी अल्ट्रासाउंड उत्पन्न करते हैं।
ముఖ్యమైనది

मानव कान की श्रवण सीमा \(20 \text{ Hz}\) से \(20000 \text{ Hz}\) है। इससे कम आवृत्ति की ध्वनि को इन्फ्रासाउंड और इससे अधिक आवृत्ति की ध्वनि को अल्ट्रासाउंड कहते हैं।

अल्ट्रासाउंड के अनुप्रयोग (Applications of Ultrasound)

अल्ट्रासाउंड उच्च आवृत्ति की तरंगें होती हैं जो बाधाओं की उपस्थिति में भी अच्छी तरह से परिभाषित पथों के साथ यात्रा कर सकती हैं। इनका उपयोग उद्योगों और चिकित्सा उद्देश्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

  1. सफाई (Cleaning):
  • कठिन-से-पहुँचने वाले स्थानों (जैसे सर्पिल ट्यूब, विषम आकार के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक घटक) की सफाई के लिए उपयोग किया जाता है।
  • वस्तुओं को सफाई घोल में रखा जाता है और अल्ट्रासोनिक तरंगें भेजी जाती हैं। उच्च आवृत्ति के कारण, धूल, ग्रीस और गंदगी के कण अलग हो जाते हैं और वस्तुएं अच्छी तरह से साफ हो जाती हैं।
  1. धातु ब्लॉकों में दोषों का पता लगाना (Detecting Flaws in Metal Blocks):
  • इमारतों, पुलों, मशीनों और वैज्ञानिक उपकरणों जैसी बड़ी संरचनाओं के निर्माण में उपयोग किया जाता है।
  • धातु ब्लॉकों के अंदर की दरारें या छेद, जो बाहर से अदृश्य होते हैं, संरचना की ताकत को कम करते हैं।
  • अल्ट्रासोनिक तरंगों को धातु ब्लॉक से गुजारा जाता है, और डिटेक्टरों का उपयोग संचरित तरंगों का पता लगाने के लिए किया जाता है। यदि कोई छोटा सा दोष भी होता है, तो अल्ट्रासाउंड वापस परावर्तित हो जाता है, जिससे दोष की उपस्थिति का पता चलता है।
  • सामान्य ध्वनि तरंगों का उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि वे दोषपूर्ण स्थान के कोनों के चारों ओर मुड़ जाएंगी और डिटेक्टर में प्रवेश कर जाएंगी।
  1. इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography):
  • हृदय के विभिन्न भागों से अल्ट्रासोनिक तरंगों को परावर्तित करके हृदय की छवि बनाने की तकनीक।
  1. अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography):
  • मानव शरीर के आंतरिक अंगों (जैसे यकृत, पित्ताशय, गर्भाशय, गुर्दे) की छवियां प्राप्त करने के लिए अल्ट्रासोनिक तरंगों का उपयोग करने वाला एक उपकरण।
  • यह डॉक्टरों को पित्ताशय और गुर्दे में पथरी या विभिन्न अंगों में ट्यूमर जैसी असामान्यताओं का पता लगाने में मदद करता है।
  • गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की जांच के लिए भी उपयोग किया जाता है ताकि जन्मजात दोषों और विकास संबंधी असामान्यताओं का पता लगाया जा सके।
  • अल्ट्रासोनिक तरंगें शरीर के ऊतकों से यात्रा करती हैं और ऊतक घनत्व में परिवर्तन वाले क्षेत्र से परावर्तित होती हैं। इन तरंगों को फिर विद्युत संकेतों में परिवर्तित किया जाता है जो अंग की छवियां उत्पन्न करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  1. गुर्दे की पथरी तोड़ना (Breaking Kidney Stones):
  • गुर्दे में बनी छोटी 'पथरी' को महीन दानों में तोड़ने के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग किया जा सकता है। ये दाने बाद में मूत्र के साथ बाहर निकल जाते हैं।
గుర్తుంచుకోండి

अल्ट्रासाउंड की उच्च आवृत्ति और छोटी तरंग दैर्ध्य उन्हें बाधाओं के बावजूद अच्छी तरह से परिभाषित पथों में यात्रा करने और चिकित्सा और औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोग करने में सक्षम बनाती है।

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