निर्देशांक ज्यामिति
यह अध्याय छात्रों को निर्देशांक ज्यामिति के मूलभूत सिद्धांतों से परिचित कराता है। इसमें कार्तीय पद्धति, निर्देशांक तल में बिंदुओं की स्थिति का निर्धारण, दो बिंदुओं के बीच की दूरी ज्ञात करना, रेखा की ढाल या प्रवणता और रेखा के समीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। यह अध्याय छात्रों को ज्यामितीय समस्याओं को बीजगणितीय रूप से हल करने की क्षमता प्रदान करता है, जो उच्च गणित के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
तल पर वस्तुओं की स्थिति का निर्धारण
किसी तल पर किसी वस्तु की स्थिति को निर्धारित करने के लिए हमें दो संदर्भ रेखाओं की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण: फुटबॉल मैदान में खिलाड़ियों की स्थिति या सिनेमा हॉल में सीटों की स्थिति।
- इन संदर्भ रेखाओं के सापेक्ष दूरी और दिशा का उपयोग करके किसी भी बिंदु की सटीक स्थिति बताई जा सकती है।
- यह प्रणाली हमें जटिल स्थानों को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद करती है।
किसी वस्तु की स्थिति बताने के लिए कम से कम दो परस्पर लंबवत संदर्भ रेखाओं की आवश्यकता होती है।
कार्तीय पद्धति का परिचय
गणितज्ञ रेने दकार्ते ने एक तल में किसी बिंदु की स्थिति निर्धारित करने के लिए एक पद्धति विकसित की, जिसे उनके सम्मान में कार्तीय पद्धति कहा जाता है।
- इस पद्धति में, दो परस्पर लंबवत रेखाएँ खींची जाती हैं।
- एक क्षैतिज रेखा (x-अक्ष) और एक ऊर्ध्वाधर रेखा (y-अक्ष)।
- ये रेखाएँ एक-दूसरे को जिस बिंदु पर काटती हैं, उसे मूलबिंदु (Origin) कहते हैं।
- मूलबिंदु से दूरियों को धनात्मक या ऋणात्मक मानों से दर्शाया जाता है।
कार्तीय पद्धति: एक तल में किसी बिंदु की स्थिति को दो परस्पर लंबवत रेखाओं (अक्षों) के सापेक्ष निर्धारित करने की विधि।
निर्देशांक ज्यामिति और कार्तीय तल
निर्देशांक ज्यामिति गणित की वह शाखा है जो ज्यामिति की समस्याओं को बीजगणितीय तरीकों से हल करती है।
- निर्देशांक अक्ष: क्षैतिज रेखा को x-अक्ष (XX') और ऊर्ध्वाधर रेखा को y-अक्ष (YY') कहते हैं।
- मूलबिंदु (Origin): वह बिंदु जहाँ x-अक्ष और y-अक्ष एक-दूसरे को काटते हैं। इसे O से दर्शाया जाता है।
- धनात्मक और ऋणात्मक दिशाएँ:
- x-अक्ष पर मूलबिंदु के दाईं ओर धनात्मक और बाईं ओर ऋणात्मक।
- y-अक्ष पर मूलबिंदु के ऊपर धनात्मक और नीचे ऋणात्मक।
- चतुर्थांश (Quadrants): दोनों अक्ष तल को चार भागों में विभाजित करते हैं, जिन्हें चतुर्थांश कहते हैं। इन्हें वामावर्त (एंटी-क्लॉकवाइज) दिशा में I, II, III और IV के रूप में गिना जाता है।
- प्रथम चतुर्थांश (I): (+, +) — x धनात्मक, y धनात्मक।
- द्वितीय चतुर्थांश (II): (-, +) — x ऋणात्मक, y धनात्मक।
- तृतीय चतुर्थांश (III): (-, -) — x ऋणात्मक, y ऋणात्मक।
- चतुर्थ चतुर्थांश (IV): (+, -) — x धनात्मक, y ऋणात्मक।
- कार्तीय तल / निर्देशांक तल / xy-तल: वह तल जिसमें निर्देशांक अक्ष और चतुर्थांश शामिल होते हैं।
निर्देशांक ज्यामिति: गणित की वह शाखा जो ज्यामिति की समस्याओं को हल करने के लिए बीजगणितीय तरीकों का उपयोग करती है।
मूलबिंदु के निर्देशांक हमेशा (0, 0) होते हैं।
निर्देशांक समतल में बिंदु की स्थिति
किसी बिंदु की स्थिति को उसके निर्देशांकों (Coordinates) के एक युग्म से दर्शाया जाता है, जिसे (x, y) के रूप में लिखा जाता है।
- x-निर्देशांक (भुज / Abscissa): यह बिंदु की y-अक्ष से लंबवत दूरी होती है। इसे x-अक्ष पर मापा जाता है।
- धनात्मक x-अक्ष की दिशा में धनात्मक।
- ऋणात्मक x-अक्ष की दिशा में ऋणात्मक।
- y-निर्देशांक (कोटि / Ordinate): यह बिंदु की x-अक्ष से लंबवत दूरी होती है। इसे y-अक्ष पर मापा जाता है।
- धनात्मक y-अक्ष की दिशा में धनात्मक।
- ऋणात्मक y-अक्ष की दिशा में ऋणात्मक।
- निर्देशांक लिखने का क्रम: हमेशा पहले x-निर्देशांक और फिर y-निर्देशांक लिखा जाता है, जैसे (x, y)।
बिंदु को आलेखित करना:
- x-निर्देशांक के अनुसार मूलबिंदु से x-अक्ष पर चलें (दाएं/बाएं)।
- y-निर्देशांक के अनुसार उस बिंदु से y-अक्ष के समांतर चलें (ऊपर/नीचे)।
उदाहरण: बिंदु P(4, 3) को आलेखित करने के लिए:
- मूलबिंदु से x-अक्ष पर 4 इकाई दाईं ओर चलें।
- उस बिंदु से y-अक्ष के समांतर 3 इकाई ऊपर चलें।
हमेशा x-निर्देशांक पहले और y-निर्देशांक बाद में लिखें। (y, x) लिखना एक सामान्य गलती है।
किसी बिंदु के चतुर्थांश का निर्धारण उसके निर्देशांकों के चिह्नों से होता है। इसे याद रखना महत्वपूर्ण है।
अक्षों पर स्थित बिंदु
यदि कोई बिंदु किसी अक्ष पर स्थित है, तो उसके निर्देशांक में एक मान शून्य होगा।
- x-अक्ष पर बिंदु: यदि कोई बिंदु x-अक्ष पर स्थित है, तो उसकी y-अक्ष से लंबवत दूरी (x-निर्देशांक) होगी, लेकिन x-अक्ष से लंबवत दूरी (y-निर्देशांक) शून्य होगी।
- अतः, x-अक्ष पर स्थित किसी बिंदु के निर्देशांक (x, 0) के रूप के होते हैं।
- उदाहरण: (4, 0), (-2, 0)।
- y-अक्ष पर बिंदु: यदि कोई बिंदु y-अक्ष पर स्थित है, तो उसकी x-अक्ष से लंबवत दूरी (y-निर्देशांक) होगी, लेकिन y-अक्ष से लंबवत दूरी (x-निर्देशांक) शून्य होगी।
- अतः, y-अक्ष पर स्थित किसी बिंदु के निर्देशांक (0, y) के रूप के होते हैं।
- उदाहरण: (0, 5), (0, -3)।
- मूलबिंदु: मूलबिंदु दोनों अक्षों पर स्थित होता है, इसलिए इसके निर्देशांक (0, 0) होते हैं।
x-अक्ष पर y-निर्देशांक हमेशा 0 होता है। y-अक्ष पर x-निर्देशांक हमेशा 0 होता है।
अक्षों के समांतर बिंदुओं के बीच की दूरी
यदि दो बिंदु x-अक्ष के समांतर या y-अक्ष के समांतर किसी रेखा पर स्थित हों, तो उनके बीच की दूरी ज्ञात करना आसान होता है।
1. x-अक्ष के समांतर रेखा पर स्थित बिंदु:
- यदि दो बिंदु
\(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_1)\) x-अक्ष के समांतर रेखा पर स्थित हैं (अर्थात उनके y-निर्देशांक समान हैं)।
- उनके बीच की दूरी \(AB = |x_2 - x_1|\) होती है।
- उदाहरण: \(C(2, 2)\) और \(D(6, 2)\) के बीच की दूरी \(CD = |6 - 2| = 4\) इकाई।
2. y-अक्ष के समांतर रेखा पर स्थित बिंदु:
- यदि दो बिंदु \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_1, y_2)\) y-अक्ष के समांतर रेखा पर स्थित हैं (अर्थात उनके x-निर्देशांक समान हैं)।
- उनके बीच की दूरी \(AB = |y_2 - y_1|\) होती है।
- उदाहरण: \(A(1, 1)\) और \(B(1, 4)\) के बीच की दूरी \(AB = |4 - 1| = 3\) इकाई।
महत्वपूर्ण: दूरी हमेशा धनात्मक होती है, इसलिए हम निरपेक्ष मान (absolute value) का उपयोग करते हैं।
दूरी हमेशा धनात्मक होती है। इसलिए \(|x_2 - x_1|\) या \(|y_2 - y_1|\) का उपयोग करें।
दो बिंदुओं के बीच की दूरी का सूत्र
जब दो बिंदु न तो x-अक्ष के समांतर और न ही y-अक्ष के समांतर किसी रेखा पर स्थित हों, तो उनके बीच की दूरी ज्ञात करने के लिए दूरी सूत्र (Distance Formula) का उपयोग किया जाता है।
माना दो बिंदु \(P(x_1, y_1)\) और \(Q(x_2, y_2)\) हैं।
इनके बीच की दूरी \(PQ\) को ज्ञात करने के लिए, हम एक समकोण त्रिभुज बनाते हैं।
- बिंदु \(P\) से x-अक्ष के समांतर एक रेखा खींचें।
- बिंदु \(Q\) से y-अक्ष के समांतर एक रेखा खींचें।
- ये दोनों रेखाएँ एक बिंदु \(R(x_2, y_1)\) पर प्रतिच्छेद करती हैं, जिससे \(\triangle PRQ\) एक समकोण त्रिभुज बनता है।
समकोण \(\triangle PRQ\) में, पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार: \(PQ^2 = PR^2 + QR^2\)
जहाँ:
- \(PR = |x_2 - x_1|\) (x-निर्देशांकों का अंतर)
- \(QR = |y_2 - y_1|\) (y-निर्देशांकों का अंतर)
अतः, दूरी सूत्र है: \(PQ = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}\)
महत्वपूर्ण बिंदु:
- \((x_2 - x_1)^2 = (x_1 - x_2)^2\) और \((y_2 - y_1)^2 = (y_1 - y_2)^2\) होता है, इसलिए बिंदुओं का क्रम मायने नहीं रखता।
- दूरी हमेशा धनात्मक होती है, इसलिए वर्गमूल का धनात्मक मान लिया जाता है।
- मूलबिंदु \((0,0)\) से किसी बिंदु \((x,y)\) की दूरी \(= \sqrt{x^2 + y^2}\) होती है।
दूरी सूत्र: दो बिंदुओं \(P(x_1, y_1)\) और \(Q(x_2, y_2)\) के बीच की दूरी \(PQ = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}\)
दूरी सूत्र का उपयोग करके समदूरस्थ बिंदुओं से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। ऐसे प्रश्नों में \(PA = PB\) या \(PA^2 = PB^2\) का उपयोग करें।
रेखा की ढाल या प्रवणता
किसी रेखा की ढाल (या प्रवणता) यह बताती है कि रेखा कितनी तेजी से ऊपर या नीचे जा रही है। यह y-निर्देशांक में परिवर्तन और x-निर्देशांक में परिवर्तन का अनुपात है।
माना दो बिंदु \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_2)\) हैं।
रेखाखंड \(AB\) की ढाल \(m\) इस प्रकार परिभाषित की जाती है: \(m = \frac{\text{y-निर्देशांक में परिवर्तन}}{\text{x-निर्देशांक में परिवर्तन}} = \frac{y_2 - y_1}{x_2 - x_1}\)
ढाल के गुणधर्म:
- धनात्मक ढाल: यदि रेखा ऊपर की ओर बढ़ती है (बाएं से दाएं), तो ढाल धनात्मक होती है। \(y_2 - y_1\) और \(x_2 - x_1\) दोनों का चिह्न समान होता है।
- ऋणात्मक ढाल: यदि रेखा नीचे की ओर गिरती है (बाएं से दाएं), तो ढाल ऋणात्मक होती है। \(y_2 - y_1\) और \(x_2 - x_1\) का चिह्न विपरीत होता है।
- शून्य ढाल: यदि रेखा क्षैतिज है (x-अक्ष के समांतर), तो \(y_2 - y_1 = 0\) होता है, इसलिए ढाल \(m = 0\) होती है।
- अपरिभाषित ढाल: यदि रेखा ऊर्ध्वाधर है (y-अक्ष के समांतर), तो \(x_2 - x_1 = 0\) होता है। शून्य से विभाजन अपरिभाषित होता है, इसलिए ढाल अपरिभाषित होती है।
ढाल और कोण (tanθ):
- यदि कोई रेखा x-अक्ष की धनात्मक दिशा के साथ \(\theta\) कोण बनाती है, तो रेखा की ढाल \(m = \tan\theta\) होती है।
- \(m = \frac{y_2 - y_1}{x_2 - x_1}\) को समकोण त्रिभुज में \(\frac{\text{लंब}}{\text{आधार}}\)
के रूप में देखा जा सकता है, जो \(\tan\theta\) के बराबर है।
रेखा की प्रवणता: किसी रेखा के किन्हीं भी दो बिंदुओं से ज्ञात की गई प्रवणता हमेशा समान होती है।
ढाल सूत्र: दो बिंदुओं \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_2)\) से गुजरने वाली रेखा की ढाल \(m = \frac{y_2 - y_1}{x_2 - x_1}\)
x-अक्ष के समांतर रेखा की ढाल 0 होती है। y-अक्ष के समांतर रेखा की ढाल अपरिभाषित होती है।
रेखा का समीकरण (ढाल-अंतःखंड रूप)
किसी सरल रेखा का समीकरण उसके ढाल और y-अक्ष पर काटे गए अंतःखंड के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
अंतःखंड (Intercept):
- x-अंतःखंड: वह दूरी जहाँ रेखा x-अक्ष को काटती है, मूलबिंदु से उस बिंदु तक।
- y-अंतःखंड: वह दूरी जहाँ रेखा y-अक्ष को काटती है, मूलबिंदु से उस बिंदु तक।
ढाल-अंतःखंड रूप (Slope-Intercept Form):
- एक रेखा जिसका ढाल \(m\) है और जो y-अक्ष पर \(c\) अंतःखंड काटती है, उसका समीकरण इस प्रकार होता है:
\(y = mx + c\)
व्युत्पत्ति:
- माना रेखा का ढाल \(m\) है और y-अक्ष पर अंतःखंड \(c\) है।
- इसका अर्थ है कि रेखा बिंदु \(A(0, c)\) से गुजरती है।
- माना \(P(x, y)\) रेखा पर कोई अन्य बिंदु है।
- बिंदुओं \(A(0, c)\) और \(P(x, y)\) के बीच की ढाल \(m\) होगी:
\(m = \frac{y - c}{x - 0}\) \(m = \frac{y - c}{x}\)
- \(mx = y - c\)
- \(y = mx + c\)
यह समीकरण उस रेखा को दर्शाता है जिसकी ढाल \(m\) और y-अक्ष पर अंतःखंड \(c\) है।
रेखा का समीकरण (ढाल-अंतःखंड रूप): \(y = mx + c\) जहाँ \(m\) रेखा की ढाल है और \(c\) y-अक्ष पर अंतःखंड है।
किसी भी रैखिक समीकरण को \(y = mx + c\) रूप में बदलकर उसकी ढाल और y-अंतःखंड आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।