अम्ल, क्षारक एवं लवण
यह अध्याय छात्रों को अम्ल, क्षारक और लवण के गुणों, पहचान और दैनिक जीवन में उनके महत्व से परिचित कराता है। इसमें प्राकृतिक और रासायनिक सूचकों, धातुओं और अधातुओं के साथ अभिक्रियाओं, उदासीनीकरण अभिक्रिया, आयनीकरण, pH स्केल और अम्ल वर्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। यह अध्याय छात्रों को रासायनिक अभिक्रियाओं और उनके प्रभावों को समझने में मदद करता है।
प्राकृतिक स्रोतों में अम्ल एवं क्षारक
हमारे दैनिक जीवन में कई पदार्थ ऐसे होते हैं जिनमें प्राकृतिक रूप से अम्ल या क्षारक पाए जाते हैं। इनकी पहचान उनके विशिष्ट गुणों से की जाती है।
- अम्ल (Acids): वे पदार्थ जो स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।
- क्षारक (Bases): वे पदार्थ जो स्वाद में कड़वे होते हैं और लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। ये स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं।
- क्षार (Alkali): वे क्षारक जो जल में घुलनशील होते हैं, उन्हें क्षार कहते हैं। सभी क्षार क्षारक होते हैं, लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते।
कुछ सामान्य प्राकृतिक अम्ल और क्षारक:
| क्र. | प्राकृतिक स्रोत | अम्ल | क्र. | प्राकृतिक स्रोत | क्षारक | |----|----------------|----------------|----|--------------------|------------------------| | 1 | इमली | टार्टरिक अम्ल | 5 | चूना | कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड | | 2 | सेब | मैलिक अम्ल | 6 | खाने का सोडा | सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट | | 3 | सिरका | ऐसीटिक अम्ल | 7 | प्रति अम्ल (antacid)| मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड | | 4 | टमाटर | ऑक्सैलिक अम्ल | 8 | कपड़े धोने का सोडा | सोडियम कार्बोनेट |
याद रखें:
- अम्ल H⁺ आयन देते हैं।
- क्षारक OH⁻ आयन देते हैं।
- क्षार जल में घुलनशील क्षारक होते हैं।
क्षार और क्षारक में अंतर:
- क्षारक (Base): वे पदार्थ जो पानी में घुलने पर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) देते हैं या जो अम्लों को उदासीन करते हैं।
- क्षार (Alkali): वे क्षारक जो पानी में पूरी तरह से घुलनशील होते हैं। उदाहरण: NaOH, KOH।
- सभी क्षार क्षारक होते हैं, लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते।
अम्ल-क्षारक सूचक एवं उनकी पहचान
सूचक ऐसे पदार्थ होते हैं जो अम्ल और क्षारक के संपर्क में आने पर अपने रंग या गंध में परिवर्तन करके उनकी उपस्थिति दर्शाते हैं।
सूचकों के प्रकार:
- प्राकृतिक सूचक:
- ये प्रकृति में पाए जाते हैं।
- उदाहरण: लिटमस, हल्दी, गुड़हल का रस, लाल पत्ता गोभी का रस।
- लिटमस: लाइकेन से प्राप्त होता है। उदासीन विलयन में बैंगनी रंग का होता है।
- अम्लीय माध्यम में: नीला लिटमस → लाल
- क्षारीय माध्यम में: लाल लिटमस → नीला
- हल्दी:
- अम्लीय/उदासीन माध्यम में: पीला
- क्षारीय माध्यम में: लाल-भूरा
- गुड़हल का फूल:
- अम्लीय माध्यम में: गहरा गुलाबी (मैजेंटा)
- क्षारीय माध्यम में: हरा
- संश्लेषित सूचक (मानव निर्मित):
- ये रासायनिक पदार्थों से बनाए जाते हैं।
- उदाहरण: फीनॉलफ्थेलिन, मेथिल ऑरेंज, मेथिल रेड।
- फीनॉलफ्थेलिन:
- अम्लीय माध्यम में: रंगहीन
- क्षारीय माध्यम में: गुलाबी
- मेथिल ऑरेंज:
- अम्लीय माध्यम में: लाल
- क्षारीय माध्यम में: पीला
- घ्राण/गंधीय सूचक (Olfactory Indicators):
- ये पदार्थ अम्ल या क्षारक के संपर्क में आने पर अपनी गंध में परिवर्तन करते हैं।
- उदाहरण: प्याज, वैनिला एसेंस, लौंग का तेल।
- प्याज:
- अम्लीय माध्यम में: गंध बरकरार रहती है।
- क्षारीय माध्यम में: गंध गायब हो जाती है।
- वैनिला एसेंस:
- अम्लीय माध्यम में: गंध बरकरार रहती है।
- क्षारीय माध्यम में: गंध गायब हो जाती है।
- लौंग का तेल:
- अम्लीय माध्यम में: गंध बरकरार रहती है।
- क्षारीय माध्यम में: गंध गायब हो जाती है।
सारणी-2: अम्ल व क्षार से सूचकों का रंग परिवर्तन
| सूचक | सूचक का वास्तविक रंग | तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में रंग | तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड में रंग | |---------------------------|---------------------|---------------------------------|---------------------------------| | फीनॉलफ्थेलिन | रंगहीन | रंगहीन | गुलाबी | | मेथिल ऑरेंज | नारंगी | लाल | पीला | | लाल गुलाब / गुड़हल के फूल का रस | लाल | गहरा गुलाबी | हरा |
क्रियाकलाप 1 का निष्कर्ष: विभिन्न सूचक अम्ल और क्षारक की उपस्थिति में अलग-अलग रंग परिवर्तन दिखाते हैं।
क्रियाकलाप 2 का निष्कर्ष: घ्राण सूचक अम्ल और क्षारक की उपस्थिति में अपनी गंध में परिवर्तन करते हैं। यह दृष्टिबाधित छात्रों के लिए उपयोगी है।
परीक्षा में अक्सर प्राकृतिक और संश्लेषित सूचकों के नाम और उनके रंग परिवर्तन पूछे जाते हैं। घ्राण सूचकों का उपयोग दृष्टिबाधित छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
क्या आप जानते हैं? लिटमस विलयन रंजकों का मिश्रण होता है जो लाइकेन (lichen) से प्राप्त किया जाता है। यह एक प्राकृतिक सूचक के रूप में प्रयुक्त होता है। उदासीन विलयन में इसका रंग बैंगनी होता है।
धातुओं के साथ अम्ल एवं क्षारक की अभिक्रिया
1. धातुओं के साथ अम्ल की अभिक्रिया:
- सामान्यतः, अम्ल धातुओं से अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
- सामान्य समीकरण: अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस
- उदाहरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की जिंक धातु से अभिक्रिया:
\(2 ext{HCl}( ext{aq}) + ext{Zn}( ext{s}) ightarrow ext{ZnCl}_2( ext{aq}) + ext{H}_2( ext{g})\) (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + जिंक → जिंक क्लोराइड + हाइड्रोजन)
- हाइड्रोजन गैस का परीक्षण: जलती हुई माचिस की तीली या मोमबत्ती को गैस के पास लाने पर 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है।
2. धातुओं के साथ क्षारक की अभिक्रिया:
- कुछ धातुएँ क्षारों के साथ भी अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।
- उदाहरण: सोडियम हाइड्रॉक्साइड की जिंक धातु से अभिक्रिया:
\(2 ext{NaOH}( ext{aq}) + ext{Zn}( ext{s}) \xrightarrow{ ext{गर्म}} ext{Na}_2 ext{ZnO}_2( ext{aq}) + ext{H}_2( ext{g})\) (सोडियम हाइड्रॉक्साइड + जिंक → सोडियम जिंकेट + हाइड्रोजन)
- महत्वपूर्ण बिंदु: सभी धातुएँ क्षारों के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं। यह अभिक्रिया केवल कुछ सक्रिय धातुओं जैसे जिंक, एल्यूमीनियम आदि के साथ होती है।
क्रियाकलाप 3 का निष्कर्ष: दानेदार जिंक की तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया से हाइड्रोजन गैस निकलती है, जिसे 'पॉप' ध्वनि से पहचाना जा सकता है।
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करती हैं, लेकिन सभी धातुएँ क्षारों से अभिक्रिया नहीं करतीं।
धातु कार्बोनेट व हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अम्ल की अभिक्रिया
अम्ल, धातु कार्बोनेट और धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके लवण, कार्बन डाइऑक्साइड गैस और जल बनाते हैं।
सामान्य समीकरण:
- धातु कार्बोनेट + अम्ल → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
- धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट + अम्ल → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
उदाहरण:
- सोडियम कार्बोनेट की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया:
\( ext{Na}_2 ext{CO}_3( ext{s}) + 2 ext{HCl}( ext{aq}) ightarrow 2 ext{NaCl}( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) + ext{CO}_2( ext{g})\)
- सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया:
\( ext{NaHCO}_3( ext{s}) + ext{HCl}( ext{aq}) ightarrow ext{NaCl}( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) + ext{CO}_2( ext{g})\)
कार्बन डाइऑक्साइड गैस का परीक्षण:
- उत्पन्न \( ext{CO}_2\) गैस को चूने के पानी (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड विलयन) से प्रवाहित करने पर चूने का पानी दूधिया हो जाता है।
\( ext{Ca(OH)}_2( ext{aq}) + ext{CO}_2( ext{g}) ightarrow ext{CaCO}_3( ext{s}) \downarrow + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\) (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट (श्वेत अवक्षेप) + जल)
- यदि अधिक मात्रा में \( ext{CO}_2\) गैस प्रवाहित की जाए, तो दूधियापन गायब हो जाता है क्योंकि अविलेय कैल्सियम कार्बोनेट, विलेय कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट में बदल जाता है।
\( ext{CaCO}_3( ext{s}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) + ext{CO}_2( ext{g}) ightarrow ext{Ca(HCO}_3)_2( ext{aq})\) (कैल्सियम कार्बोनेट + जल + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट)
क्रियाकलाप 4 का निष्कर्ष: धातु कार्बोनेट और हाइड्रोजनकार्बोनेट अम्लों से अभिक्रिया करके \( ext{CO}_2\) गैस उत्पन्न करते हैं, जिसे चूने के पानी के दूधिया होने से पहचाना जा सकता है।
यह अभिक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है। रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना और उत्पादों को याद रखना आवश्यक है।
अधात्विक ऑक्साइड के साथ क्षारक की अभिक्रिया
अधात्विक ऑक्साइड प्रकृति में अम्लीय होते हैं। इसलिए, वे क्षारों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। यह अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया के समान है।
सामान्य समीकरण: अधात्विक ऑक्साइड + क्षारक → लवण + जल
उदाहरण:
- कार्बन डाइऑक्साइड (अधात्विक ऑक्साइड) की कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (क्षारक) से अभिक्रिया:
\( ext{CO}_2( ext{g}) + ext{Ca(OH)}_2( ext{aq}) ightarrow ext{CaCO}_3( ext{s}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\) (कार्बन डाइऑक्साइड + कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट + जल)
- सल्फर डाइऑक्साइड (अधात्विक ऑक्साइड) की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षारक) से अभिक्रिया:
\( ext{SO}_2( ext{g}) + 2 ext{NaOH}( ext{aq}) ightarrow ext{Na}_2 ext{SO}_3( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\) (सल्फर डाइऑक्साइड + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → सोडियम सल्फाइट + जल)
निष्कर्ष: अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
धात्विक ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय प्रकृति के होते हैं, जबकि अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
उदासीनीकरण अभिक्रिया
अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करके एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं और लवण तथा जल बनाते हैं। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
सामान्य समीकरण: अम्ल + क्षारक → लवण + जल
उदाहरण:
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया:
\( ext{HCl}( ext{aq}) + ext{NaOH}( ext{aq}) ightarrow ext{NaCl}( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\) (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → सोडियम क्लोराइड + जल)
- नाइट्रिक अम्ल और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया:
\( ext{HNO}_3( ext{aq}) + ext{KOH}( ext{aq}) ightarrow ext{KNO}_3( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\) (नाइट्रिक अम्ल + पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड → पोटैशियम नाइट्रेट + जल)
क्रियाकलाप 5 का निष्कर्ष:
- फीनॉलफ्थेलिन सूचक का उपयोग करके उदासीनीकरण अभिक्रिया को देखा जा सकता है।
- जब अम्ल में क्षारक मिलाया जाता है, तो विलयन धीरे-धीरे उदासीन होता जाता है।
- उदासीन बिंदु पर, फीनॉलफ्थेलिन रंगहीन रहता है।
- जैसे ही एक अतिरिक्त बूँद क्षारक की डाली जाती है, विलयन गुलाबी हो जाता है, जो क्षारीय प्रकृति को दर्शाता है।
- यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है, अर्थात इसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है।
उदासीनीकरण का सिद्धांत:
- अम्ल \( ext{H}^+\) आयन देते हैं और क्षारक \( ext{OH}^-\) आयन देते हैं।
- उदासीनीकरण अभिक्रिया में, \( ext{H}^+\) आयन और \( ext{OH}^-\) आयन मिलकर जल \( ext{H}_2 ext{O}\) बनाते हैं।
\( ext{H}^+( ext{aq}) + ext{OH}^-( ext{aq}) ightarrow ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\)
- शेष आयन (अम्ल का ऋणायन और क्षारक का धनायन) मिलकर लवण बनाते हैं।
उदासीनीकरण (Neutralization): वह अभिक्रिया जिसमें अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है। इसमें अम्ल और क्षारक एक-दूसरे के गुणों को उदासीन कर देते हैं।
उदासीनीकरण अभिक्रिया का समीकरण और इसके उदाहरण अक्सर पूछे जाते हैं। फीनॉलफ्थेलिन के रंग परिवर्तन के साथ इस अभिक्रिया को समझाना महत्वपूर्ण है।
अम्ल एवं क्षारक का आयनीकरण (आरेनिअस सिद्धांत)
आरेनिअस सिद्धांत (Arrhenius Theory):
- स्वीडन के वैज्ञानिक आरेनिअस ने 1884 में अम्ल और क्षारक के गुणों को उनके आयनीकरण के आधार पर समझाया।
- अम्ल: वे पदार्थ जो जलीय विलयन में \( ext{H}^+\) आयन (हाइड्रोजन आयन) उत्पन्न करते हैं।
- उदाहरण: \( ext{HCl}( ext{aq}) ightarrow ext{H}^+( ext{aq}) + ext{Cl}^-( ext{aq})\)
- \( ext{H}_2 ext{SO}_4( ext{aq}) ightarrow 2 ext{H}^+( ext{aq}) + ext{SO}_4^{2-}( ext{aq})\)
- क्षारक: वे पदार्थ जो जलीय विलयन में \( ext{OH}^-\) आयन (हाइड्रॉक्साइड आयन) उत्पन्न करते हैं।
- उदाहरण: \( ext{NaOH}( ext{aq}) ightarrow ext{Na}^+( ext{aq}) + ext{OH}^-( ext{aq})\)
- \( ext{Ca(OH)}_2( ext{aq}) ightarrow ext{Ca}^{2+}( ext{aq}) + 2 ext{OH}^-( ext{aq})\)
विद्युत चालन और आयनीकरण (क्रियाकलाप 6):
- अम्ल और क्षारक के जलीय विलयन विद्युत का चालन करते हैं।
- इसका कारण यह है कि अम्ल और क्षारक जल में आयनित होकर \( ext{H}^+\) और \( ext{OH}^-\) आयन उत्पन्न करते हैं।
- ये आयन विलयन में विद्युत धारा के प्रवाह के लिए उत्तरदायी होते हैं।
क्या सभी हाइड्रोजन युक्त यौगिक अम्ल हैं? (क्रियाकलाप 7):
- नहीं, सभी हाइड्रोजन युक्त यौगिक अम्ल नहीं होते।
- उदाहरण: ग्लूकोज \(( ext{C}_6 ext{H}_{12} ext{O}_6)\) और अल्कोहल \(( ext{C}_2 ext{H}_5 ext{OH})\) में हाइड्रोजन होता है, लेकिन ये जलीय विलयन में \( ext{H}^+\) आयन उत्पन्न नहीं करते और इसलिए अम्लीय गुण प्रदर्शित नहीं करते। ये विद्युत का चालन भी नहीं करते।
- अम्ल वही होते हैं जो जलीय विलयन में \( ext{H}^+\) आयन मुक्त करते हैं।
क्या अम्ल केवल जलीय विलयन में ही आयन उत्पन्न करते हैं? (क्रियाकलाप 8):
- नहीं, अम्ल केवल जल की उपस्थिति में ही अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।
- शुष्क \( ext{HCl}\) गैस अम्लीय गुण (जैसे लिटमस का रंग बदलना) प्रदर्शित नहीं करती क्योंकि जल की अनुपस्थिति में यह \( ext{H}^+\) आयन उत्पन्न नहीं करती।
- जब \( ext{HCl}\) गैस जल के संपर्क में आती है, तो यह आयनित होकर \( ext{H}^+\) और \( ext{Cl}^-\) आयन बनाती है, और तभी अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित करती है।
\( ext{HCl}( ext{g}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) ightarrow ext{H}_3 ext{O}^+( ext{aq}) + ext{Cl}^-( ext{aq})\) (हाइड्रोनियम आयन)
- \( ext{H}^+\) आयन स्वतंत्र रूप से नहीं रह सकते, वे जल के अणु के साथ मिलकर हाइड्रोनियम आयन \(( ext{H}_3 ext{O}^+)\) बनाते हैं।
अम्ल और क्षारक की प्रबलता:
- अम्ल या क्षारक की प्रबलता उनके आयनीकरण की मात्रा पर निर्भर करती है।
- प्रबल अम्ल/क्षारक: वे अम्ल/क्षारक जो जलीय विलयन में लगभग पूर्णतः आयनित हो जाते हैं।
- उदाहरण (अम्ल): \( ext{HCl}, ext{H}_2 ext{SO}_4, ext{HNO}_3\)
- उदाहरण (क्षारक): \( ext{NaOH}, ext{KOH}\)
- दुर्बल अम्ल/क्षारक: वे अम्ल/क्षारक जो जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होते हैं।
- उदाहरण (अम्ल): \( ext{CH}_3 ext{COOH}\) (एसिटिक अम्ल), \( ext{H}_2 ext{CO}_3\) (कार्बोनिक अम्ल)
- उदाहरण (क्षारक): \( ext{NH}_4 ext{OH}\) (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड), \( ext{Mg(OH)}_2\) (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड)
स्वान्ते ऑगस्ट आरेनिअस (Svante August Arrhenius) (1859-1927):
- स्वीडन के वैज्ञानिक थे, जिन्होंने जलीय विलयनों में आयनिक पदार्थों की विद्युत चालकता को समझाया।
- उन्होंने सुझाव दिया कि आयनिक पदार्थ जलीय विलयन में अपने अवयवी आयनों में विभक्त हो जाते हैं तथा यही आयन विद्युत का चालन करते हैं।
- उन्होंने अम्ल और क्षार के गुणों को \( ext{H}^+\) आयन तथा \( ext{OH}^-\) आयन के बनने के आधार पर समझाया।
- उन्हें सन् 1903 में नोबल पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया।
अम्ल को जल में मिलाते समय हमेशा अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में। ऐसा करने से अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है जो खतरनाक हो सकती है।
अम्ल एवं क्षारक की प्रबलता
किसी विलयन में \( ext{H}^+\) या \( ext{OH}^-\) आयनों की सांद्रता यह निर्धारित करती है कि वह विलयन कितना अम्लीय या क्षारीय है। इसे मापने के लिए pH स्केल का उपयोग किया जाता है।
pH स्केल:
- डेनमार्क के वैज्ञानिक सॉरेन्सन ने 1909 में pH स्केल प्रस्तुत किया।
- 'pH' में 'p' का अर्थ 'potenz' (शक्ति) है, जो हाइड्रोजन आयन की शक्ति को दर्शाता है।
- pH स्केल 0 (अत्यधिक अम्लीय) से 14 (अत्यधिक क्षारीय) तक के मानों को दर्शाता है।
- pH = \(-\log[ ext{H}^+]\), जहाँ \([ ext{H}^+]\) हाइड्रोजन आयन की सांद्रता है।
pH मान और विलयन की प्रकृति:
- pH < 7: विलयन अम्लीय होता है। \( ext{H}^+\) आयनों की सांद्रता \( ext{OH}^-\) आयनों की सांद्रता से अधिक होती है।
- pH = 7: विलयन उदासीन होता है। \( ext{H}^+\) आयनों की सांद्रता \( ext{OH}^-\) आयनों की सांद्रता के बराबर होती है। (शुद्ध जल का pH 7 होता है)
- pH > 7: विलयन क्षारीय होता है। \( ext{OH}^-\) आयनों की सांद्रता \( ext{H}^+\) आयनों की सांद्रता से अधिक होती है।
सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator):
- यह कई सूचकों का मिश्रण होता है।
- यह विलयन में \( ext{H}^+\) आयनों की विभिन्न सांद्रताओं को विभिन्न रंगों से प्रदर्शित करता है।
- इसका उपयोग किसी विलयन की अम्लीयता या क्षारीयता की प्रबलता ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
\( ext{H}^+\) और \( ext{OH}^-\) आयनों का संबंध:
- शुद्ध जल का आंशिक आयनीकरण होता है: \( ext{H}_2 ext{O} ightleftharpoons ext{H}^+ + ext{OH}^-\) ।
- इसलिए, प्रत्येक जलीय विलयन में कुछ मात्रा में \( ext{H}^+\) और \( ext{OH}^-\) आयन हमेशा उपस्थित रहते हैं।
- \( ext{H}^+\) और \( ext{OH}^-\) आयनों की संख्या में व्युत्क्रम संबंध होता है: यदि \( ext{H}^+\) आयन अधिक हैं तो \( ext{OH}^-\) आयन कम होंगे और इसके विपरीत।
- सारणी - 4: \( ext{H}^+\) एवं \( ext{OH}^-\) आयन सान्द्रण तथा pH मान (25°C पर)
| pH मान | \( ext{H}^+\) mol/L | \( ext{OH}^-\) mol/L | |--------|-------------------|-------------------| | 0 | \(10^0\) | \(10^{-14}\) | | 1 | \(10^{-1}\) | \(10^{-13}\) | | 2 | \(10^{-2}\) | \(10^{-12}\) | | 3 | \(10^{-3}\) | \(10^{-11}\) | | 4 | \(10^{-4}\) | \(10^{-10}\) | | 5 | \(10^{-5}\) | \(10^{-9}\) | | 6 | \(10^{-6}\) | \(10^{-8}\) | | 7 | \(10^{-7}\) | \(10^{-7}\) | | 8 | \(10^{-8}\) | \(10^{-6}\) | | 9 | \(10^{-9}\) | \(10^{-5}\) | | 10 | \(10^{-10}\) | \(10^{-4}\) | | 11 | \(10^{-11}\) | \(10^{-3}\) | | 12 | \(10^{-12}\) | \(10^{-2}\) | | 13 | \(10^{-13}\) | \(10^{-1}\) | | 14 | \(10^{-14}\) | \(10^0\) |
- अम्लता का बढ़ता क्रम: pH 7 से 0 की ओर।
- क्षारीयता का बढ़ता क्रम: pH 7 से 14 की ओर।
क्रियाकलाप 9 का निष्कर्ष: विभिन्न विलयनों के pH मान ज्ञात करके उनकी अम्लीय, क्षारीय या उदासीन प्रकृति को निर्धारित किया जा सकता है।
pH की परिभाषा: \( ext{pH} = -\log_{10}[ ext{H}^+]\) जहाँ \([ ext{H}^+]\) हाइड्रोजन आयन की मोलर सांद्रता है।
pH स्केल पर मानों के आधार पर विलयन की प्रकृति (अम्लीय, क्षारीय, उदासीन) और \( ext{H}^+\), \( ext{OH}^-\) आयनों की सांद्रता के संबंध को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। सार्वत्रिक सूचक के रंग और pH मान का मिलान अक्सर पूछा जाता है।
दैनिक जीवन में pH का महत्व
pH का हमारे दैनिक जीवन और जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका है।
- पाचन की प्रक्रिया और pH:
- हमारे आमाशय में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) स्रावित होता है, जिसका pH लगभग 1.5 से 3.5 होता है।
- यह अम्ल भोजन के पाचन में सहायता करता है और हानिकारक जीवाणुओं को मारता है।
- अपच की स्थिति में, आमाशय अधिक अम्ल स्रावित करता है, जिससे जलन और दर्द होता है।
- इसे उदासीन करने के लिए प्रतिअम्ल (Antacids) जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड \(( ext{Mg(OH)}_2)\) का उपयोग किया जाता है, जो एक दुर्बल क्षारक है।
- रक्त का pH और जैविक प्रक्रियाएँ:
- हमारे रक्त का pH मान 6.8 से 7.8 के बीच होता है।
- यह सीमा जैविक प्रक्रियाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सीमा से बाहर pH होने पर शरीर के एंजाइम और प्रोटीन ठीक से काम नहीं कर पाते, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
- उदाहरण के लिए, अम्लीय माध्यम में हीमोग्लोबिन की संरचना बदल जाती है और वह ऑक्सीजन का वहन ठीक से नहीं कर पाता।
- लार का pH और दंत क्षय:
- हमारे मुँह की लार का pH सामान्यतः 6.5 से 7.5 के बीच होता है।
- भोजन के बाद, मुँह में बचे हुए भोजन के कणों पर बैक्टीरिया क्रिया करके अम्ल उत्पन्न करते हैं।
- यदि लार का pH 5.5 से कम हो जाता है (अर्थात अधिक अम्लीय हो जाता है), तो दाँतों का इनैमल (कैल्सियम फॉस्फेट से बना, जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है) संक्षारित होने लगता है, जिसे दंत क्षय कहते हैं।
- इससे बचने के लिए, हमें क्षारीय दंतमंजन का उपयोग करना चाहिए, जो अम्ल को उदासीन कर देता है।
- pH और पौधों व जंतुओं की आत्मरक्षा:
- कई पौधे और जंतु आत्मरक्षा के लिए अम्ल या क्षारक का उपयोग करते हैं।
- मधुमक्खी का डंक: मधुमक्खी के डंक में फार्मिक अम्ल (मेथेनोइक अम्ल) होता है, जिससे दर्द और जलन होती है। इसे उदासीन करने के लिए बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक का उपयोग किया जा सकता है।
- नेटल का पौधा (बिच्छु पौधा): इसके पत्तों में चुभने वाले रोम होते हैं जो छूने पर मेथेनोइक अम्ल छोड़ते हैं, जिससे जलन होती है। इसका इलाज डॉक पौधे की पत्ती रगड़कर किया जा सकता है, जो क्षारीय होती है।
- मिट्टी का pH और फसल का उत्पादन:
- पौधों की वृद्धि के लिए एक विशिष्ट pH परास वाली मिट्टी की आवश्यकता होती है।
- अधिकांश पौधों के लिए, मिट्टी का आदर्श pH 5 से 8 के बीच होता है।
- यदि मिट्टी बहुत अम्लीय हो, तो किसान उसमें चूना (कैल्सियम ऑक्साइड) या बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) जैसे क्षारीय पदार्थ मिलाते हैं।
- यदि मिट्टी बहुत क्षारीय हो, तो उसमें जैविक खाद या जिप्सम जैसे अम्लीय पदार्थ मिलाए जाते हैं।
- उदाहरण: हाइड्रेजिया का फूल मिट्टी की अम्लीयता के अनुसार रंग बदलता है (अम्लीय में नीला, क्षारीय में गुलाबी)।
दैनिक जीवन में pH के महत्व से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। प्रत्येक उदाहरण में pH के प्रभाव और उसके उपचार को याद रखना महत्वपूर्ण है।
लवण की परिभाषा एवं निर्माण
लवण (Salts):
- लवण वे आयनिक यौगिक होते हैं जो अम्ल और क्षारक की उदासीनीकरण अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनते हैं।
- इनमें एक धनात्मक आयन (धनायन) और एक ऋणात्मक आयन (ऋणायन) होता है।
- लवण विद्युत उदासीन होते हैं क्योंकि उनमें धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों की संख्या बराबर होती है।
लवणों का निर्माण:
- उदासीनीकरण अभिक्रिया द्वारा: यह लवण बनाने का सबसे सामान्य तरीका है।
- अम्ल + क्षारक → लवण + जल
- उदाहरण: \( ext{HCl}( ext{aq}) + ext{NaOH}( ext{aq}) ightarrow ext{NaCl}( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\)
- \( ext{HNO}_3( ext{aq}) + ext{KOH}( ext{aq}) ightarrow ext{KNO}_3( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\)
- \( ext{H}_2 ext{SO}_4( ext{aq}) + 2 ext{KOH}( ext{aq}) ightarrow ext{K}_2 ext{SO}_4( ext{aq}) + 2 ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\)
- धातु की अम्ल से अभिक्रिया द्वारा:
- धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
- उदाहरण: \( ext{Zn}( ext{s}) + 2 ext{HCl}( ext{aq}) ightarrow ext{ZnCl}_2( ext{aq}) + ext{H}_2( ext{g})\)
- धातु कार्बोनेट/हाइड्रोजनकार्बोनेट की अम्ल से अभिक्रिया द्वारा:
- धातु कार्बोनेट + अम्ल → लवण + \( ext{CO}_2\) + जल
- उदाहरण: \( ext{Na}_2 ext{CO}_3( ext{s}) + 2 ext{HCl}( ext{aq}) ightarrow 2 ext{NaCl}( ext{aq}) + ext{CO}_2( ext{g}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l})\)
क्या सभी लवण उदासीन होते हैं? (क्रियाकलाप 9 और सारणी 5):
- नहीं, सभी लवण उदासीन नहीं होते। लवणों के जलीय विलयन अम्लीय, क्षारीय या उदासीन हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे किस प्रकार के अम्ल और क्षारक से बने हैं।
- प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक → उदासीन लवण
- उदाहरण: \( ext{NaCl}\) (सोडियम क्लोराइड), \( ext{KNO}_3\) (पोटैशियम नाइट्रेट)
- इनके विलयन का pH लगभग 7 होता है।
- प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक → अम्लीय लवण
- उदाहरण: \( ext{NH}_4 ext{Cl}\) (अमोनियम क्लोराइड), \( ext{CuSO}_4\) (कॉपर सल्फेट)
- इनके विलयन का pH 7 से कम होता है।
- दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक → क्षारीय लवण
- उदाहरण: \( ext{Na}_2 ext{CO}_3\) (सोडियम कार्बोनेट), \( ext{NaHCO}_3\) (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट)
- इनके विलयन का pH 7 से अधिक होता है।
- दुर्बल अम्ल + दुर्बल क्षारक → उदासीन या लगभग उदासीन लवण
- उदाहरण: \( ext{CH}_3 ext{COONH}_4\) (अमोनियम ऐसीटेट)
- इनके विलयन का pH लगभग 7 होता है, लेकिन यह अम्ल और क्षारक की सापेक्षिक प्रबलता पर निर्भर करता है।
सारणी-5: लवणों की प्रकृति
| लवण का सूत्र | क्षारीय मूलक का स्रोत | स्रोत की प्रकृति | अम्लीय मूलक का स्रोत | स्रोत की प्रकृति | लवण की प्रकृति | |--------------|-----------------------|------------------|----------------------|------------------|---------------| | \( ext{NaCl}\) | \( ext{NaOH}\) | प्रबल | \( ext{HCl}\) | प्रबल | उदासीन | | \( ext{CuSO}_4\) | \( ext{Cu(OH)}_2\) | दुर्बल | \( ext{H}_2 ext{SO}_4\) | प्रबल | अम्लीय | | \( ext{NaHCO}_3\) | \( ext{NaOH}\) | प्रबल | \( ext{H}_2 ext{CO}_3\) | दुर्बल | क्षारीय | | \( ext{CH}_3 ext{COONH}_4\)| \( ext{NH}_4 ext{OH}\) | दुर्बल | \( ext{CH}_3 ext{COOH}\) | दुर्बल | उदासीन | | \( ext{NH}_4 ext{Cl}\) | \( ext{NH}_4 ext{OH}\) | दुर्बल | \( ext{HCl}\) | प्रबल | अम्लीय | | \( ext{KNO}_3\) | \( ext{KOH}\) | प्रबल | \( ext{HNO}_3\) | प्रबल | उदासीन |
लवणों की प्रकृति निर्धारित करने के लिए, हमें यह देखना होगा कि वे किस प्रकार के अम्ल और क्षारक से बने हैं। प्रबल अम्ल और प्रबल क्षारक से बना लवण उदासीन होता है।
अम्लीय एवं क्षारीय मूलक
लवणों में दो भाग होते हैं: एक धनात्मक भाग और एक ऋणात्मक भाग।
- क्षारीय मूलक (Basic Radical):
- लवण का धनात्मक भाग जो क्षारक से आता है।
- उदाहरण: \( ext{NaCl}\) में \( ext{Na}^+\) (सोडियम हाइड्रॉक्साइड \( ext{NaOH}\) से आता है)।
- \( ext{KNO}_3\) में \( ext{K}^+\) (पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड \( ext{KOH}\) से आता है)।
- \( ext{NH}_4 ext{Cl}\) में \( ext{NH}_4^+\) (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड \( ext{NH}_4 ext{OH}\) से आता है)।
- अम्लीय मूलक (Acid Radical):
- लवण का ऋणात्मक भाग जो अम्ल से आता है।
- उदाहरण: \( ext{NaCl}\) में \( ext{Cl}^-\) (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल \( ext{HCl}\) से आता है)।
- \( ext{KNO}_3\) में \( ext{NO}_3^-\) (नाइट्रिक अम्ल \( ext{HNO}_3\) से आता है)।
- \( ext{CuSO}_4\) में \( ext{SO}_4^{2-}\) (सल्फ्यूरिक अम्ल \( ext{H}_2 ext{SO}_4\) से आता है)।
उदाहरण: पोटैशियम नाइट्रेट \(( ext{KNO}_3)\) में \( ext{K}^+\) क्षारीय मूलक है और \( ext{NO}_3^-\) अम्लीय मूलक है।
क्षारीय मूलक: लवण का धनायन भाग, जो क्षारक से प्राप्त होता है। अम्लीय मूलक: लवण का ऋणायन भाग, जो अम्ल से प्राप्त होता है।
अम्ल वर्षा: कारण, अभिक्रियाएँ एवं प्रभाव
अम्ल वर्षा (Acid Rain):
- सामान्यतः वर्षा के जल का pH मान लगभग 7 होता है (शुद्ध जल)।
- हालांकि, वायुमंडल में उपस्थित कुछ गैसों के कारण वर्षा जल का pH मान कम हो जाता है।
- जब वर्षा के जल का pH मान 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्ल वर्षा कहते हैं।
अम्ल वर्षा के कारण:
- मुख्य कारण: जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) के दहन से उत्पन्न होने वाली गैसें।
- कार्बन डाइऑक्साइड \(( ext{CO}_2)\)
- सल्फर डाइऑक्साइड \(( ext{SO}_2)\)
- नाइट्रोजन के ऑक्साइड \(( ext{NO}_x)\)
- अन्य कारण: ज्वालामुखी विस्फोट, वनस्पतियों का सड़ना आदि से भी ये गैसें निकलती हैं।
रासायनिक अभिक्रियाएँ:
- ये गैसें वायुमंडल में जलवाष्प के साथ अभिक्रिया करके अम्ल बनाती हैं:
- कार्बन डाइऑक्साइड से:
\( ext{CO}_2( ext{g}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) ightarrow ext{H}_2 ext{CO}_3( ext{aq})\) (कार्बोनिक अम्ल)
- सल्फर डाइऑक्साइड से:
\(2 ext{SO}_2( ext{g}) + ext{O}_2( ext{g}) ightarrow 2 ext{SO}_3( ext{g})\) \( ext{SO}_3( ext{g}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) ightarrow ext{H}_2 ext{SO}_4( ext{aq})\) (सल्फ्यूरिक अम्ल)
- नाइट्रोजन के ऑक्साइड से:
\(2 ext{NO}_2( ext{g}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) ightarrow ext{HNO}_3( ext{aq}) + ext{HNO}_2( ext{aq})\) (नाइट्रिक अम्ल और नाइट्रस अम्ल) (या सरलीकृत रूप से: \(3 ext{NO}_2( ext{g}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) ightarrow 2 ext{HNO}_3( ext{aq}) + ext{NO}( ext{g})\))
अम्ल वर्षा के प्रभाव:
- वनस्पतियों पर: पौधों की पत्तियों को नुकसान पहुँचाती है, प्रकाश संश्लेषण को बाधित करती है, मिट्टी की उर्वरता को कम करती है।
- जलीय जीवन पर: झीलों और नदियों के pH को कम करती है, जिससे जलीय जीवों (मछली, पौधे) के लिए जीवन मुश्किल हो जाता है।
- इमारतों और स्मारकों पर: संगमरमर (कैल्सियम कार्बोनेट) से बनी इमारतों (जैसे ताजमहल) को संक्षारित करती है।
\( ext{CaCO}_3( ext{s}) + ext{H}_2 ext{SO}_4( ext{aq}) ightarrow ext{CaSO}_4( ext{aq}) + ext{H}_2 ext{O}( ext{l}) + ext{CO}_2( ext{g})\)
- मानव स्वास्थ्य पर: श्वसन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है।
- मिट्टी पर: मिट्टी की अम्लीयता बढ़ाती है, जिससे कुछ पोषक तत्व पौधों के लिए अनुपलब्ध हो जाते हैं।
अम्ल वर्षा का मुख्य कारण मानवजनित गतिविधियाँ हैं, विशेषकर जीवाश्म ईंधन का दहन।
अम्ल वर्षा के कारण, रासायनिक अभिक्रियाएँ और इसके प्रभावों पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। संबंधित रासायनिक समीकरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।