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ऊष्मा और ताप
Chhattisgarh · Class 10 · 🔬 Science · Chapter 3

ऊष्मा और ताप

तापमान के पैमानेऊष्मा संचरण के तरीकेऊष्मीय प्रसारविशिष्ट ऊष्मागुप्त ऊष्मा

अध्याय 'ऊष्मा और ताप' हमारे दैनिक जीवन में गर्म और ठंडे की अवधारणा से शुरू होता है, और तापमान को मापने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। यह सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन जैसे विभिन्न तापमान पैमानों और उनके बीच रूपांतरण को समझाता है। अध्याय ऊष्मा को ऊर्जा के रूप में परिभाषित करता है और चालन, संवहन और विकिरण जैसे ऊष्मा संचरण के तरीकों पर चर्चा करता है। यह ऊष्मा के प्रभावों जैसे तापमान में वृद्धि, ऊष्मीय प्रसार (ठोस, द्रव और गैसों में) और भौतिक अवस्था में परिवर्तन (गुप्त ऊष्मा सहित) को भी विस्तार से बताता है। यह अध्याय छात्रों को ऊष्मा और ताप के मूलभूत सिद्धांतों को समझने में मदद करता है, जो विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ऊष्मा और ताप का परिचय तथा तापमान की आवश्यकता

हमारे दैनिक जीवन में 'गर्म' और 'ठंडा' शब्द बहुत महत्वपूर्ण हैं।

  • तापमान किसी वस्तु की गर्माहट या ठंडक की मात्रा का वस्तुपरक मापन है।
  • केवल छूकर, देखकर या महसूस करके किसी वस्तु के तापमान का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। हमारी संवेदनशीलता सीमित और अविश्वसनीय होती है।
  • उदाहरण: गुनगुना पानी, गर्म पानी की तुलना में ठंडा और ठंडे पानी की तुलना में गर्म लगता है।
  • आवश्यकता: वैज्ञानिक और व्यावहारिक कार्यों के लिए सटीक तापमान मापन आवश्यक है, जैसे चिकित्सा, मौसम विज्ञान और औद्योगिक प्रक्रियाएं।
  • तापमान की तुलना: जब दो वस्तुओं के तापमान की तुलना की जाती है, तो अधिक तापमान वाली वस्तु 'गर्म' और कम तापमान वाली वस्तु 'ठंडी' कहलाती है।
महत्त्वपूर्ण

तापमान एक ही मापक के दो मूल्य हैं, एक छोटा तो दूसरा बड़ा। सभी वस्तुएँ गर्म या ठंडी होती हैं, बस उनकी मात्रा भिन्न होती है।

तापमान का मापन और विभिन्न पैमाने

तापमान मापने के लिए हमें ऐसे पदार्थों की आवश्यकता होती है जिनमें तापमान के साथ स्पष्ट परिवर्तन होता है।

तापमापी यंत्र (थर्मामीटर) के लिए आवश्यक बातें:

  1. पदार्थ का गुण: ऐसा गुण जो तापमान पर निर्भर हो और जिसका परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे (जैसे पारे का आयतन, हवा का दाब)।
  2. समानुपातिक परिवर्तन: इस गुण के परिवर्तन को समान रूप से दर्शाने वाला पदार्थ।
  3. मापदंड: एक सर्वमान्य मापदंड जो गुण के निश्चित बदलाव को तापमान के निश्चित घट-बढ़ से जोड़ता हो।

तापमान मापने के प्रचलित पैमाने:

  1. सेल्सियस (°C):
  • पानी का हिमांक (न्यूनतम ताप): \(0^\circ C\)
  • पानी का क्वथनांक (उच्चतम ताप): \(100^\circ C\)
  • अंतराल: \(100\) समान भाग।
  1. फारेनहाइट (°F):
  • पानी का हिमांक (न्यूनतम ताप): \(32^\circ F\)
  • पानी का क्वथनांक (उच्चतम ताप): \(212^\circ F\)
  • अंतराल: \(180\) समान भाग।
  1. केल्विन (K):
  • पानी का हिमांक (न्यूनतम ताप): \(273.15\ K\) (लगभग \(273\ K\))
  • पानी का क्वथनांक (उच्चतम ताप): \(373.15\ K\) (लगभग \(373\ K\))
  • अंतराल: \(100\) समान भाग।
  • परम शून्य तापमान (Absolute Zero): \(0\ K\) या \(-273.15^\circ C\)। यह न्यूनतम संभव तापमान है।

तापमान पैमानों में संबंध: किसी भी दो पैमानों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए सामान्य सूत्र: $$ \frac{\text{पैमाना}_1 - \text{निम्नतम बिंदु}_1}{\text{उच्चतम बिंदु}_1 - \text{निम्नतम बिंदु}_1} = \frac{\text{पैमाना}_2 - \text{निम्नतम बिंदु}_2}{\text{उच्चतम बिंदु}_2 - \text{निम्नतम बिंदु}_2} $$

  • सेल्सियस और फारेनहाइट के बीच संबंध:

$$ \frac{F - 32}{212 - 32} = \frac{C - 0}{100 - 0} $$ $$ \frac{F - 32}{180} = \frac{C}{100} $$ $$ \frac{F - 32}{9} = \frac{C}{5} $$ या \( C = \frac{5}{9} (F - 32) \) या \( F = \frac{9}{5} C + 32 \)

  • सेल्सियस और केल्विन के बीच संबंध:

$$ \frac{K - 273}{373 - 273} = \frac{C - 0}{100 - 0} $$ $$ \frac{K - 273}{100} = \frac{C}{100} $$ $$ K - 273 = C $$ या \( K = C + 273 \)

थर्मोस्कोप: गैलीलियो द्वारा 1593 में बनाया गया पहला उपकरण। यह तापमान में बदलाव को तरल पदार्थ के उतार-चढ़ाव से दर्शाता है, इसमें पैमाना नहीं होता।

मानव शरीर का सामान्य तापमान:

  • \(37^\circ C\)
  • \(98.6^\circ F\)
  • \(310\ K\)
महत्त्वपूर्ण

तापमान मापने के लिए पदार्थ के ऐसे गुण का उपयोग किया जाता है जो तापमान के साथ नियमित रूप से बदलता है, जैसे आयतन।

🧮सूत्र

$$ \frac{F - 32}{9} = \frac{C}{5} $$ $$ K = C + 273 $$

ऊष्मा की अवधारणा और कैलोरिक सिद्धांत

ऊष्मा (Heat):

  • ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है जो तापांतर के कारण एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित होती है।
  • यह ऊर्जा का वह प्रकार है जिसके कारण हमें वस्तु की गर्माहट का आभास होता है।
  • ऊष्मा का प्रवाह सदैव उच्च ताप से निम्न ताप की ओर होता है।
  • ऊष्मा बढ़ाने पर वस्तु का तापमान बढ़ता है और ऊष्मा घटाने पर तापमान कम होता है।

कैलोरिक सिद्धांत (भ्रम):

  • पहले माना जाता था कि ऊष्मा एक अदृश्य, भारहीन तरल पदार्थ है जिसे 'कैलोरिक' कहते हैं।
  • माना जाता था कि गर्म वस्तु में कैलोरिक अधिक होती है और ठंडी वस्तु में कम।
  • जब दो अलग-अलग तापमान वाली वस्तुओं को संपर्क में लाया जाता था, तो कैलोरिक गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु में तब तक प्रवाहित होती थी जब तक दोनों में इसका स्तर समान न हो जाए।
  • भ्रम का टूटना: बेंजामिन थोम्सन (काउंट रमफोर्ड) और बाद में जूल के प्रयोगों ने सिद्ध किया कि ऊष्मा कोई पदार्थ नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक रूप है।
  • रमफोर्ड ने तोपों में छेद करने के दौरान उत्पन्न गर्मी का अध्ययन किया और पाया कि घर्षण से असीमित गर्मी पैदा की जा सकती है, जिससे धातु के द्रव्यमान पर कोई असर नहीं पड़ता। यह कैलोरिक सिद्धांत के विपरीत था।
  • जूल ने यांत्रिक ऊर्जा और ऊष्मीय ऊर्जा की समतुल्यता को दर्शाया।

ऊष्मीय ऊर्जा के मात्रक:

  • C.G.S. पद्धति: कैलोरी (cal)
  • 1 कैलोरी: 1 ग्राम पानी के तापमान को \(14.5^\circ C\) से \(15.5^\circ C\) तक बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा।
  • 1 किलोकैलोरी: \(1000\) कैलोरी।
  • SI मात्रक: जूल (J)
  • ऊष्मा ऊर्जा का ही एक स्वरूप है, इसलिए इसका SI मात्रक जूल है।
  • संबंध: \(1\ कैलोरी = 4.18\ जूल\)
  • 1 किलोकैलोरी: \(4.18 \times 10^3\ जूल\)
📖परिभाषा

ऊष्मा: ऊर्जा का वह रूप जो तापांतर के कारण एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित होता है।

महत्त्वपूर्ण

ऊष्मा का प्रवाह सदैव उच्च ताप से निम्न ताप की ओर होता है।

ऊष्मा संचरण की विधियाँ: चालन

ऊष्मा का संचरण (Heat Transfer):

  • तापांतर के कारण ऊष्मा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरण।
  • ऊष्मा संचरण के लिए हमेशा माध्यम की आवश्यकता नहीं होती (जैसे विकिरण)।

चालन (Conduction):

  • परिभाषा: चालन के द्वारा ऊष्मा पदार्थ के कणों द्वारा अपना स्थान छोड़े बिना ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरित होती है।
  • प्रक्रिया: जब पदार्थ के एक सिरे को गर्म किया जाता है, तो उस भाग के कणों की कंपन ऊर्जा बढ़ जाती है। ये कंपन ऊर्जा अपने पड़ोसी कणों को स्थानांतरित करते हैं, और यह प्रक्रिया पूरे पदार्थ में फैल जाती है।
  • माध्यम: यह विधि मुख्य रूप से ठोस पदार्थों में होती है, जहाँ कण एक-दूसरे के करीब होते हैं और अपनी स्थिति नहीं बदलते।
  • उदाहरण: धातु की छड़ के एक सिरे को गर्म करने पर दूसरा सिरा भी गर्म हो जाता है।

ऊष्मीय चालकता के आधार पर पदार्थ के प्रकार:

  1. चालक (Conductors):
  • जो पदार्थ ऊष्मा का संचरण सरलता से होने देते हैं।
  • उदाहरण: धातुएँ (लोहा, एल्युमीनियम, तांबा), जल।
  1. कुचालक (Bad Conductors):
  • जो पदार्थ ऊष्मा का संचरण सरलता से नहीं होने देते।
  • उदाहरण: लकड़ी, कांच, हवा।
  1. ऊष्मारोधी पदार्थ (Insulators):
  • जिनकी चालकता लगभग शून्य होती है और वे ऊष्मा का संचरण बिल्कुल नहीं होने देते।
  • उदाहरण: एबोनाइट, एस्बेस्टोस, ऊन, थर्माकोल।

दैनिक जीवन में अनुप्रयोग:

  • खाना पकाने के बर्तन धातुओं के बने होते हैं (अच्छे चालक)।
  • बर्तनों के हैंडल लकड़ी या प्लास्टिक के बने होते हैं (कुचालक)।
  • गर्म कपड़ों में हवा फंसी होती है जो ऊष्मा की कुचालक होती है, जिससे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती।
📖परिभाषा

चालन: ऊष्मा संचरण की वह विधि जिसमें पदार्थ के कण अपना स्थान छोड़े बिना ऊर्जा स्थानांतरित करते हैं।

महत्त्वपूर्ण

ठोस पदार्थों में ऊष्मा का संचरण केवल चालन द्वारा ही संभव है।

ऊष्मा संचरण की विधियाँ: संवहन

संवहन (Convection):

  • परिभाषा: संवहन ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें पदार्थ के कण स्वयं गति करके ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं।
  • प्रक्रिया: जब किसी द्रव या गैस को गर्म किया जाता है, तो गर्म भाग के कण हल्के होकर ऊपर उठते हैं और उनका स्थान ठंडा, भारी भाग ले लेता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक पूरे द्रव या गैस का तापमान समान न हो जाए। इस प्रकार बनने वाली धाराओं को संवहन धाराएँ कहते हैं।
  • माध्यम: यह विधि केवल द्रवों और गैसों में संभव है, क्योंकि इनके कण गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। ठोसों में संवहन नहीं होता।
  • उदाहरण: पानी को गर्म करना, वायुमंडल में हवा का संचलन (समुद्री समीर, स्थलीय समीर)।

दैनिक जीवन में अनुप्रयोग:

  • समुद्री समीर (दिन में): दिन के समय रेत पानी की तुलना में जल्दी गर्म होती है। रेत के ऊपर की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, और समुद्र से ठंडी हवा उसकी जगह लेने आती है।
  • स्थलीय समीर (रात में): रात के समय रेत पानी की तुलना में जल्दी ठंडी होती है। नदी का पानी अपेक्षाकृत गर्म रहता है। नदी के ऊपर की गर्म हवा ऊपर उठती है, और रेत के ऊपर से ठंडी हवा उसकी जगह लेने आती है।
  • रूम हीटर कमरे में हवा को गर्म करने के लिए संवहन का उपयोग करते हैं।
  • रेफ्रिजरेटर में फ्रीजर ऊपर रखा जाता है ताकि ठंडी हवा नीचे आ सके और गर्म हवा ऊपर जा सके।
📖परिभाषा

संवहन: ऊष्मा संचरण की वह विधि जिसमें माध्यम के कण स्वयं गति करके ऊष्मा का स्थानांतरण करते हैं।

🚧ग़लत धारणा

याद रखें, ठोस पदार्थों में संवहन द्वारा ऊष्मा का संचरण नहीं हो सकता क्योंकि उनके कण गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते।

ऊष्मा संचरण की विधियाँ: विकिरण

विकिरण (Radiation):

  • परिभाषा: विकिरण ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें ऊष्मा का स्थानांतरण विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में होता है और इसके लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
  • प्रक्रिया: गर्म वस्तुएँ विद्युत चुम्बकीय तरंगों (जैसे अवरक्त विकिरण) के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करती हैं। ये तरंगें प्रकाश की चाल से सरल रेखा में संचरित होती हैं। जब ये तरंगें किसी वस्तु पर पड़ती हैं, तो वे अवशोषित होकर उसे गर्म करती हैं।
  • माध्यम: विकिरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। यह निर्वात (vacuum) में भी संचरित हो सकता है।
  • उदाहरण: सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का पहुंचना, आग के पास खड़े होने पर गर्मी महसूस होना।

विकिरण के गुण:

  • प्रकाश की चाल से चलता है।
  • सरल रेखा में संचरित होता है।
  • सभी दिशाओं में समान रूप से फैलता है।

उत्सर्जन और अवशोषण:

  • अच्छे अवशोषक: जो वस्तुएँ ऊष्मा का अच्छा अवशोषण करती हैं, वे ऊष्मा की अच्छी उत्सर्जक भी होती हैं।
  • रंग और सतह का प्रभाव: गहरे रंग की वस्तुएँ (विशेषकर काली) ऊष्मा की अच्छी अवशोषक और उत्सर्जक होती हैं, जबकि हल्के/चमकीले रंग की वस्तुएँ ऊष्मा की खराब अवशोषक और अच्छी परावर्तक होती हैं।

दैनिक जीवन में अनुप्रयोग:

  • गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े पहनना (कम ऊष्मा अवशोषित करते हैं)।
  • सर्दियों में गहरे रंग के कपड़े पहनना (अधिक ऊष्मा अवशोषित करते हैं)।
  • सोलर कुकर की भीतरी सतह काली होती है ताकि अधिक ऊष्मा अवशोषित हो सके।
  • चाय या कॉफी को गर्म रखने के लिए चमकीले थर्मस फ्लास्क का उपयोग किया जाता है (विकिरण को परावर्तित करते हैं)।
📖परिभाषा

विकिरण: ऊष्मा संचरण की वह विधि जिसमें ऊष्मा विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में बिना किसी माध्यम के स्थानांतरित होती है।

महत्त्वपूर्ण

सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा विकिरण द्वारा ही पहुँचती है, क्योंकि अंतरिक्ष में कोई माध्यम नहीं है।

ठोसों में ऊष्मीय प्रसार

ऊष्मा के प्रभाव: ऊष्मा देने पर पदार्थ में कई परिवर्तन होते हैं:

  1. तापमान में वृद्धि: सबसे सामान्य प्रभाव।
  2. ऊष्मीय प्रसार: पदार्थ के आकार या आयतन में वृद्धि।
  3. भौतिक अवस्था में परिवर्तन: ठोस से द्रव, द्रव से गैस आदि।

ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion):

  • सामान्यतः, किसी पदार्थ को ऊष्मा देने पर उसका आयतन बढ़ता है और ऊष्मा निकालने पर आयतन घटता है।
  • यह ठोस, द्रव और गैस तीनों में होता है, लेकिन इनकी मात्रा भिन्न होती है (गैसों में सबसे अधिक, ठोसों में सबसे कम)।

ठोस पदार्थों में ऊष्मीय प्रसार के प्रकार:

  1. रेखीय प्रसार (Linear Expansion):
  • परिभाषा: जब किसी ठोस वस्तु की लंबाई में वृद्धि होती है।
  • रेखीय प्रसार गुणांक (\(\alpha\)): किसी वस्तु की इकाई लंबाई की छड़ में \(1^\circ C\) ताप बढ़ने पर होने वाला प्रसार।
  • सूत्र: \( \alpha = \frac{\Delta L}{L \times \Delta T} \)
  • \( \Delta L \) = लंबाई में वृद्धि
  • \( L \) = प्रारंभिक लंबाई
  • \( \Delta T \) = ताप में वृद्धि
  • मात्रक: प्रति डिग्री सेल्सियस (\(^\circ C^{-1}\)) या प्रति केल्विन (\(K^{-1}\))
  • उदाहरण: लोहे की छड़ को गर्म करने पर उसकी लंबाई बढ़ना।
  1. क्षेत्रीय प्रसार (Superficial Expansion):
  • परिभाषा: जब किसी ठोस वस्तु के क्षेत्रफल में वृद्धि होती है।
  • क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (\(\beta\)): वस्तु के एकांक क्षेत्रफल का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने पर होने वाला प्रसार।
  • सूत्र: \( \beta = \frac{\Delta A}{A \times \Delta T} \)
  • \( \Delta A \) = क्षेत्रफल में वृद्धि
  • \( A \) = प्रारंभिक क्षेत्रफल
  • \( \Delta T \) = ताप में वृद्धि
  • मात्रक: प्रति डिग्री सेल्सियस (\(^\circ C^{-1}\))
  • संबंध: \( \beta = 2\alpha \)
  1. आयतन प्रसार (Volume Expansion):
  • परिभाषा: जब किसी ठोस वस्तु के आयतन में वृद्धि होती है।
  • आयतन प्रसार गुणांक (\(\gamma\)): वस्तु के एकांक आयतन का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने पर होने वाला प्रसार।
  • सूत्र: \( \gamma = \frac{\Delta V}{V \times \Delta T} \)
  • \( \Delta V \) = आयतन में वृद्धि
  • \( V \) = प्रारंभिक आयतन
  • \( \Delta T \) = ताप में वृद्धि
  • मात्रक: प्रति डिग्री सेल्सियस (\(^\circ C^{-1}\))
  • संबंध: \( \gamma = 3\alpha \)

प्रसार गुणांकों में अनुपात: ठोसों में रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांकों का अनुपात \( \alpha : \beta : \gamma = 1 : 2 : 3 \) होता है।

दैनिक जीवन में अनुप्रयोग:

  • बिजली और टेलीफोन के तारों को गर्मियों में फैलने और सर्दियों में सिकुड़ने के लिए ढीला बांधा जाता है।
  • कंक्रीट की सड़कों और रेलवे ट्रैक में ब्लॉक्स के बीच खाली जगह छोड़ी जाती है ताकि प्रसार होने पर वे चटकें नहीं।
  • कांच के बर्तन में उबलता पानी डालने पर वह चटक सकता है क्योंकि अंदर का हिस्सा तेजी से फैलता है जबकि बाहर का नहीं।
🧮सूत्र

$$ \alpha = \frac{\Delta L}{L \Delta T} \quad \beta = \frac{\Delta A}{A \Delta T} \quad \gamma = \frac{\Delta V}{V \Delta T} $$ $$ \alpha : \beta : \gamma = 1 : 2 : 3 $$

💡सुझाव

ठोसों में रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांकों का अनुपात \(1:2:3\) अक्सर पूछा जाता है।

द्रवों और गैसों में ऊष्मीय प्रसार

द्रव पदार्थों में ऊष्मीय प्रसार:

  • द्रवों का अपना कोई निश्चित आकार नहीं होता, वे बर्तन का आकार ले लेते हैं।
  • जब द्रव को बर्तन में रखकर गर्म किया जाता है, तो पहले बर्तन फैलता है, फिर द्रव।
  • द्रवों में केवल आयतन प्रसार संभव है।
  • द्रवों के आयतन प्रसार के प्रकार:
  1. आभासी प्रसार (Apparent Expansion):
  • यह वह प्रसार है जो हमें सीधे प्रेक्षण से दिखाई देता है। इसमें बर्तन के प्रसार को ध्यान में नहीं रखा जाता।
  • उदाहरण: फ्लास्क में द्रव का तल A से C तक बढ़ना (चित्र-12)।
  1. वास्तविक प्रसार (Real Expansion):
  • यह द्रव का वास्तविक प्रसार होता है, जिसमें बर्तन के प्रसार को भी शामिल किया जाता है।
  • वास्तविक प्रसार = आभासी प्रसार + बर्तन का प्रसार
  • उदाहरण: फ्लास्क में द्रव का तल B से C तक बढ़ना (चित्र-12)।
  • पानी का असंगत प्रसार (Anomalous Expansion of Water):
  • अन्य द्रवों के विपरीत, पानी \(0^\circ C\) से \(4^\circ C\) के बीच गर्म करने पर सिकुड़ता है (आयतन घटता है) और \(4^\circ C\) पर इसका आयतन न्यूनतम तथा घनत्व अधिकतम होता है।
  • \(4^\circ C\) के बाद गर्म करने पर यह सामान्य द्रवों की तरह फैलता है।
  • महत्व: ठंडे प्रदेशों में जलीय जीवन को बचाने में मदद करता है। तालाबों की ऊपरी सतह जमने पर भी निचला पानी \(4^\circ C\) पर रहता है।

गैसों में ऊष्मीय प्रसार:

  • गैसों का प्रसार ठोसों और द्रवों की तुलना में बहुत अधिक होता है।
  • गैसों में भी द्रवों की तरह केवल आयतन प्रसार संभव है।
  • गैसों के प्रसार के प्रकार:
  1. नियत दाब पर आयतन प्रसार (Volume Expansion at Constant Pressure):
  • यदि दाब नियत रखा जाए और गैस का ताप बढ़ाया जाए, तो गैस का आयतन बढ़ता है।
  • आयतन प्रसार गुणांक (\(\gamma_p\)): \( \gamma_p = \frac{\Delta V}{V \Delta T} \)
  • उदाहरण: गर्म करने पर गुब्बारे का फूलना।
  1. नियत आयतन पर दाब प्रसार (Pressure Expansion at Constant Volume):
  • यदि आयतन नियत रखा जाए और गैस का ताप बढ़ाया जाए, तो गैस का दाब बढ़ता है।
  • दाब प्रसार गुणांक (\(\beta_v\)): \( \beta_v = \frac{\Delta P}{P \Delta T} \)
  • उदाहरण: प्रेशर कुकर में सीटी बजना (अंदर दाब बढ़ने के कारण)।

प्रश्न: गैसों और द्रवों में केवल आयतन प्रसार ही क्यों संभव है?

  • उत्तर: क्योंकि द्रवों और गैसों का कोई निश्चित आकार नहीं होता। वे जिस बर्तन में रखे जाते हैं, उसी का आकार ले लेते हैं। अतः उनमें केवल आयतन में ही वृद्धि या कमी हो सकती है, लंबाई या क्षेत्रफल में नहीं।
महत्त्वपूर्ण

पानी का असंगत प्रसार: \(0^\circ C\) से \(4^\circ C\) तक गर्म करने पर पानी सिकुड़ता है, \(4^\circ C\) पर अधिकतम घनत्व होता है।

याद रखें

गैसों का प्रसार ठोसों व द्रवों की तुलना में बहुत अधिक होता है।

अवस्था परिवर्तन और गुप्त ऊष्मा

भौतिक अवस्था में परिवर्तन:

  • ऊष्मा मिलने या निकलने पर पदार्थ अपनी भौतिक अवस्था बदल सकता है (ठोस, द्रव, गैस)।
  • गलनांक (Melting Point): वह तापमान जिस पर कोई ठोस द्रव में बदलता है।
  • क्वथनांक (Boiling Point): वह तापमान जिस पर कोई द्रव गैस में बदलता है।

गुप्त ऊष्मा (Latent Heat):

  • परिभाषा: वह ऊष्मा जो पदार्थ की भौतिक अवस्था बदलने के लिए आवश्यक होती है, लेकिन उसके तापमान में कोई वृद्धि नहीं करती। यह ऊष्मा पदार्थ के अणुओं के बीच के बंधों को तोड़ने या बनाने में उपयोग होती है।
  • अवस्था परिवर्तन के दौरान, पदार्थ का तापमान स्थिर रहता है।
  • प्रकार:
  1. गलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion, \(L_f\)):
  • एकांक द्रव्यमान के ठोस को उसके गलनांक पर द्रव अवस्था में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा।
  • मात्रक: कैलोरी/ग्राम या किलोकैलोरी/किलोग्राम, जूल/किलोग्राम।
  • बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा: \(80\) किलोकैलोरी/किलोग्राम या \(3.34 \times 10^5\) जूल/किलोग्राम।
  • सूत्र: \( Q = mL_f \) (जहाँ \(m\) द्रव्यमान है)
  1. वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Vaporization, \(L_v\)):
  • एकांक द्रव्यमान के द्रव को उसके क्वथनांक पर पूरी तरह गैस में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा।
  • मात्रक: कैलोरी/ग्राम या किलोकैलोरी/किलोग्राम, जूल/किलोग्राम।
  • पानी के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा: \(540\) कैलोरी/ग्राम या \(2.26 \times 10^6\) जूल/किलोग्राम।
  • सूत्र: \( Q = mL_v \)

तापमान-ऊष्मा ग्राफ (अवस्था परिवर्तन):

  • जब ठोस को गर्म किया जाता है, तो तापमान बढ़ता है।
  • गलनांक पर, तापमान स्थिर हो जाता है जबकि ठोस द्रव में बदलता है (गलन की गुप्त ऊष्मा)।
  • पूरा ठोस द्रव में बदलने के बाद, तापमान फिर से बढ़ता है।
  • क्वथनांक पर, तापमान फिर से स्थिर हो जाता है जबकि द्रव गैस में बदलता है (वाष्पन की गुप्त ऊष्मा)।
  • पूरा द्रव गैस में बदलने के बाद, तापमान फिर से बढ़ता है।
📖परिभाषा

गुप्त ऊष्मा: वह ऊष्मा जो पदार्थ की अवस्था बदलने में उपयोग होती है, बिना तापमान बढ़ाए।

महत्त्वपूर्ण

अवस्था परिवर्तन के दौरान पदार्थ का तापमान स्थिर रहता है।

विशिष्ट ऊष्मा धारिता

विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat, \(S\)):

  • परिभाषा: किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान में \(1^\circ C\) (या \(1\ K\)) ताप की वृद्धि करने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा।
  • यह पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है।
  • सूत्र: \( Q = mS\Delta T \)
  • \( Q \) = दी गई/ली गई ऊष्मा
  • \( m \) = पदार्थ का द्रव्यमान
  • \( S \) = विशिष्ट ऊष्मा
  • \( \Delta T \) = तापमान में परिवर्तन
  • मात्रक: जूल प्रति किलोग्राम डिग्री सेल्सियस (\(J/kg^\circ C\)) या कैलोरी प्रति ग्राम डिग्री सेल्सियस (\(cal/g^\circ C\))
  • महत्व: जिन पदार्थों की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होती है, वे देर से गर्म होते हैं और देर से ठंडे होते हैं (जैसे पानी)। जिनकी विशिष्ट ऊष्मा कम होती है, वे जल्दी गर्म और ठंडे होते हैं (जैसे धातुएँ)।

ऊष्मा धारिता (Heat Capacity, \(C\)):

  • परिभाषा: किसी वस्तु के संपूर्ण द्रव्यमान का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा।
  • यह वस्तु के द्रव्यमान और उसकी विशिष्ट ऊष्मा पर निर्भर करती है।
  • सूत्र: \( C = mS \)
  • मात्रक: जूल प्रति डिग्री सेल्सियस (\(J/^\circ C\))

मिश्रण का साम्य ताप (Equilibrium Temperature of Mixture):

  • जब विभिन्न तापमान वाली वस्तुओं को मिलाया जाता है, तो ऊष्मा का आदान-प्रदान तब तक होता है जब तक उनका तापमान समान न हो जाए (साम्य अवस्था)।
  • ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार: गर्म वस्तु द्वारा दी गई ऊष्मा = ठंडी वस्तु द्वारा ली गई ऊष्मा।
  • यदि दो पदार्थों को मिलाया जाए:
  • पदार्थ 1: द्रव्यमान \(m_1\), विशिष्ट ऊष्मा \(S_1\), प्रारंभिक ताप \(T_1\)
  • पदार्थ 2: द्रव्यमान \(m_2\), विशिष्ट ऊष्मा \(S_2\), प्रारंभिक ताप \(T_2\)
  • मिश्रण का साम्य ताप \(T_{mix}\) हो, तो:

$$ m_1 S_1 (T_1 - T_{mix}) = m_2 S_2 (T_{mix} - T_2) $$

  • यदि विशिष्ट ऊष्मा समान हो (जैसे पानी को पानी में मिलाना): \( S_1 = S_2 = S \)

$$ m_1 S (T_1 - T_{mix}) = m_2 S (T_{mix} - T_2) $$ $$ m_1 (T_1 - T_{mix}) = m_2 (T_{mix} - T_2) $$ $$ m_1 T_1 - m_1 T_{mix} = m_2 T_{mix} - m_2 T_2 $$ $$ m_1 T_1 + m_2 T_2 = m_2 T_{mix} + m_1 T_{mix} $$ $$ m_1 T_1 + m_2 T_2 = T_{mix} (m_1 + m_2) $$ $$ T_{mix} = \frac{m_1 T_1 + m_2 T_2}{m_1 + m_2} $$

📖परिभाषा

विशिष्ट ऊष्मा: एकांक द्रव्यमान के पदार्थ का ताप \(1^\circ C\) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा।

🧮सूत्र

$$ Q = mS\Delta T $$ $$ T_{mix} = \frac{m_1 T_1 + m_2 T_2}{m_1 + m_2} \quad \text{(यदि } S_1=S_2 \text{)} $$

महत्त्वपूर्ण

पानी की विशिष्ट ऊष्मा बहुत अधिक होती है, इसलिए यह धीरे-धीरे गर्म होता है और धीरे-धीरे ठंडा होता है।

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