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अधातुओं का रसायन
Chhattisgarh · Class 10 · 🔬 Science · Chapter 11

अधातुओं का रसायन

अधातुओं के भौतिक गुणअपररूपताआवर्त सारणी में अधातुओं का स्थानअधातुओं की रासायनिक अभिक्रियाएँहाइड्रोजन के गुण और उपयोगनाइट्रोजन के गुण और उपयोग

यह अध्याय अधातुओं के रसायन विज्ञान का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें अधातुओं के भौतिक गुण जैसे अवस्था, कठोरता, विद्युत चालकता और अपररूपता पर चर्चा की गई है। आवर्त सारणी में अधातुओं की स्थिति, उनकी विद्युत ऋणात्मकता और धातुओं तथा अन्य अधातुओं के साथ उनकी अभिक्रियाओं को समझाया गया है। हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसी महत्वपूर्ण अधातुओं के प्रयोगशाला निर्माण, रासायनिक गुण और औद्योगिक उपयोगों को भी विस्तार से बताया गया है। यह अध्याय छात्रों को अधातुओं की प्रकृति और हमारे दैनिक जीवन में उनके महत्व को समझने में मदद करता है।

अधातुओं का परिचय

अधातुएँ वे तत्व हैं जो धातुओं के विपरीत गुण दर्शाते हैं। ये आवर्त सारणी के दाईं ओर स्थित होते हैं।

  • परिभाषा: वे तत्व जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाते हैं या सहसंयोजी बंध बनाते हैं, अधातु कहलाते हैं।
  • महत्व: जीवन के लिए आवश्यक कई तत्व (जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन, हाइड्रोजन) अधातुएँ हैं।
  • उदाहरण: हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O), नाइट्रोजन (N), कार्बन (C), सल्फर (S), फॉस्फोरस (P), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I), हीलियम (He), नियॉन (Ne) आदि।
महत्त्वपूर्ण

पानी (H₂O) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना है, दोनों अधातुएँ हैं। जीवन के लिए आवश्यक गैस ऑक्सीजन भी एक अधातु है।

अधातुओं के भौतिक गुण

अधातुओं के भौतिक गुण धातुओं से भिन्न होते हैं।

  • भौतिक अवस्था:
  • ये ठोस, द्रव या गैस तीनों अवस्थाओं में पाए जाते हैं।
  • गैस: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, क्लोरीन, हीलियम आदि।
  • द्रव: ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु है
  • ठोस: कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस, आयोडीन आदि।
  • कठोरता: सामान्यतः नरम होते हैं, लेकिन कार्बन का अपररूप हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है
  • चमक: इनमें धात्विक चमक नहीं होती है (अपवाद: आयोडीन और ग्रेफाइट में चमक होती है)।
  • आघातवर्धनीयता और तन्यता: अधातुएँ आघातवर्धनीय और तन्य नहीं होती हैं। ठोस अधातुएँ भंगुर होती हैं (पीटने पर टूट जाती हैं)।
  • विद्युत चालकता: कार्बन के अपररूप ग्रेफाइट को छोड़कर अन्य सभी अधातुएँ विद्युत की कुचालक होती हैं।
  • ऊष्मा चालकता: कार्बन के अपररूप हीरे को छोड़कर अन्य सभी अधातुएँ ऊष्मा की कुचालक होती हैं।
  • ध्वनि: ये धात्विक ध्वनि उत्पन्न नहीं करती हैं।
  • गलनांक और क्वथनांक: धातुओं की तुलना में इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं।

अपररूपता (Allotropy)

  • परिभाषा: जब कोई तत्व एक ही भौतिक अवस्था में एक से अधिक रूपों में पाया जाता है, तो इस गुण को अपररूपता कहते हैं और उसके विभिन्न रूपों को अपररूप कहते हैं।
  • कारण: अपररूपों में परमाणुओं के बीच परस्पर आबंध भिन्न होता है, जिससे उनके भौतिक गुण भिन्न होते हैं।
  • रासायनिक गुण: अपररूपों के परमाणु समान होने के कारण उनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
  • उदाहरण:
  • कार्बन: हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन।
  • ऑक्सीजन: O₂ (ऑक्सीजन), O₃ (ओजोन)।
  • सल्फर: रोम्बिक सल्फर, मोनोक्लिनिक सल्फर।
  • फॉस्फोरस: श्वेत फॉस्फोरस, लाल फॉस्फोरस, काला फॉस्फोरस।
💡सुझाव

अपररूपता और उसके उदाहरण बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं। कार्बन के अपररूपों (हीरा, ग्रेफाइट) के गुणों में अंतर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

आवर्त सारणी में अधातुओं का स्थान एवं उपधातुएँ

आवर्त सारणी में तत्वों को उनके गुणों के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।

  • अधातुओं का स्थान:
  • आवर्त सारणी में अधातुएँ दाईं ओर ऊपरी भाग में स्थित होती हैं।
  • समूह 14 से समूह 18 तक (हाइड्रोजन को छोड़कर) अधातुएँ पाई जाती हैं।
  • हाइड्रोजन समूह 1 में है, लेकिन यह एक अधातु है।
  • समूह 17 को हैलोजन समूह कहते हैं (F, Cl, Br, I, At)। ये अत्यधिक क्रियाशील अधातुएँ हैं।
  • समूह 18 को उत्कृष्ट गैसें या अक्रिय गैसें कहते हैं (He, Ne, Ar, Kr, Xe, Rn)। इनके बाह्यतम कोश पूर्ण होते हैं, इसलिए ये सामान्यतः अभिक्रिया नहीं करतीं।
  • धात्विक गुणों में प्रवृत्ति:
  • आवर्त में (बाएँ से दाएँ): धात्विक गुण कम होते जाते हैं, और अधात्विक गुण बढ़ते जाते हैं।
  • समूह में (ऊपर से नीचे): धात्विक गुण बढ़ते जाते हैं, और अधात्विक गुण कम होते जाते हैं।
  • उपधातुएँ (Metalloids):
  • परिभाषा: वे तत्व जो धातुओं और अधातुओं दोनों के गुण दर्शाते हैं, उपधातुएँ या अर्ध-धातुएँ कहलाते हैं।
  • स्थान: ये आवर्त सारणी में धातुओं और अधातुओं के बीच एक टेढ़ी-मेढ़ी विकर्ण रेखा पर स्थित होते हैं।
  • उदाहरण: बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), टेल्यूरियम (Te), पोलोनियम (Po)।
  • गुण: ये सभी ठोस होते हैं। बोरॉन और सिलिकॉन अशुद्धियों की उपस्थिति में विद्युत चालकता दर्शाते हैं (अर्धचालक)।
याद रखें

आवर्त सारणी में हाइड्रोजन एक अपवाद है। यह समूह 1 में धातुओं के साथ रखा गया है, लेकिन यह एक अधातु है।

अधातुओं की खोज का इतिहास

अधातुओं की खोज का इतिहास धातुओं से भिन्न रहा है, विशेषकर गैसीय अधातुओं का।

  • प्राचीन काल में ज्ञात अधातुएँ:
  • कार्बन: हीरा और ग्रेफाइट के रूप में प्राचीन काल से ज्ञात था। लेवोजिएर ने 1789 में सिद्ध किया कि ये कार्बन के ही रूप हैं।
  • सल्फर: प्राचीन काल से ज्ञात था। लेवोजिएर ने इसे एक तत्व के रूप में पहचाना।
  • मध्यकाल में खोज:
  • फॉस्फोरस: 1669 में हेनिंग ब्रांड ने खोजा।
  • गैसीय अधातुओं की देर से खोज के कारण:
  • गैसीय पदार्थों के बारे में जानकारी का अभाव।
  • गैसों को प्राप्त करने और एकत्रित करने की विधियों का विकास न होना।
  • हैल्स ने 18वीं शताब्दी के मध्य में 'गैस यांत्रिकी ट्रफ' का निर्माण किया, जिससे गैसों को एकत्रित करना संभव हुआ।
  • प्रमुख गैसीय अधातुओं की खोज:
  • हाइड्रोजन: रॉबर्ट बॉयल ने ज्वलनशील गैस के रूप में देखा (1671)। हेनरी कैवेंडिश ने 1776 में इसे एक अलग तत्व के रूप में पहचाना और इसके गुणों का अध्ययन किया। लवाइजिए ने इसे 'हाइड्रोजन' नाम दिया।
  • नाइट्रोजन: ब्लैक ने देखा कि वायु का एक घटक दहन में सहायक नहीं है। उनके शिष्य डेनियल रदरफोर्ड ने 1772 में इसे एक अलग गैस के रूप में पहचाना।
  • ऑक्सीजन: जोसेफ प्रीस्टले (1774) और कार्ल शीले (1772) ने स्वतंत्र रूप से खोजा। लवाइजिए ने इसे 'ऑक्सीजन' नाम दिया।
  • हैलोजन: शीले ने फ्लुओरीन (1771) और क्लोरीन (1774) की खोज की।
  • उत्कृष्ट गैसों की खोज:
  • ये प्रकृति में अल्प मात्रा में और अक्रिय होने के कारण इनकी खोज में समय लगा।
  • आर्गन: कैवेंडिश ने 1785 में वायु में एक अज्ञात गैस देखी। रैम्से और रैले ने 1894 में इसे अलग किया और 'आर्गन' नाम दिया।
  • अन्य उत्कृष्ट गैसें: रैम्से ने ही हीलियम, नियॉन, क्रिप्टॉन, जीनॉन की भी खोज की।
महत्त्वपूर्ण

हेनरी कैवेंडिश को हाइड्रोजन की खोज का श्रेय दिया जाता है, जबकि डेनियल रदरफोर्ड को नाइट्रोजन की खोज का।

अधातुओं के रासायनिक गुण एवं विद्युत ऋणात्मकता

अधातुओं के रासायनिक गुण उनकी इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति से निर्धारित होते हैं।

  • विद्युत ऋणात्मकता:
  • अधातुओं में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति होती है, इसलिए वे विद्युत ऋणात्मक होती हैं।
  • इनकी विद्युत ऋणात्मकता धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है।
  • प्रवृत्ति: आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है, और समूह में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है।
  • फ्लुओरीन (F) सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है (मान ~4.0)।
  • रासायनिक आबंध:
  • समूह 18 के तत्वों को छोड़कर, अन्य अधातुएँ रासायनिक अभिक्रियाओं में ऋणायन बनाती हैं या सहसंयोजी बंध बनाती हैं

अधातु और धातु के बीच अभिक्रिया

  • उत्पाद: धातु और अधातु आपस में अभिक्रिया कर आयनिक यौगिक बनाते हैं।
  • प्रक्रिया: धातु का ऑक्सीकरण होता है (इलेक्ट्रॉन त्यागती है) और अधातु का अपचयन होता है (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है)।
  • उदाहरण:
  • मैग्नीशियम और ऑक्सीजन: \(2Mg(s) + O_2(g) \rightarrow 2MgO(s)\)
  • सोडियम और क्लोरीन: \(2Na(s) + Cl_2(g) \rightarrow 2NaCl(s)\)
  • आयरन और सल्फर: \(Fe(s) + S(s) \rightarrow FeS(s)\)

अधातुओं की आपस में अभिक्रिया

  • उत्पाद: अधातुएँ आपस में अभिक्रिया कर सहसंयोजी यौगिक बनाती हैं।
  • उदाहरण:
  • क्लोरीन से अभिक्रिया (क्लोराइड निर्माण):
  • कार्बन और क्लोरीन: \(C(s) + 2Cl_2(g) \rightarrow CCl_4(l)\)
  • हाइड्रोजन और क्लोरीन: \(H_2(g) + Cl_2(g) \rightarrow 2HCl(g)\)
  • फॉस्फोरस और क्लोरीन: \(P_4(s) + 6Cl_2(g) \rightarrow 4PCl_3(l)\) (फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड)
  • ऑक्सीजन से अभिक्रिया (ऑक्साइड निर्माण):
  • कार्बन और ऑक्सीजन: \(C(s) + O_2(g) \rightarrow CO_2(g)\)
  • सल्फर और ऑक्सीजन: \(S(s) + O_2(g) \rightarrow SO_2(g)\)
  • फॉस्फोरस और ऑक्सीजन: \(P_4(s) + 5O_2(g) \rightarrow P_4O_{10}(s)\)
  • यौगिकों के सूत्र: कम विद्युत ऋणात्मक अधातु पहले और अधिक विद्युत ऋणात्मक अधातु बाद में लिखी जाती है (जैसे \(CO_2\) में C पहले, O बाद में)।

अधातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति

  • सामान्य प्रवृत्ति: अधिकतर अधातु ऑक्साइडों के जलीय विलयन अम्लीय होते हैं।
  • उदाहरण:
  • सल्फर डाइऑक्साइड: \(SO_2(g) + H_2O(l) \rightarrow H_2SO_3(aq)\) (सल्फ्यूरस अम्ल)
  • कार्बन डाइऑक्साइड: \(CO_2(g) + H_2O(l) \rightarrow H_2CO_3(aq)\) (कार्बनिक अम्ल)
  • अपवाद: सभी अधातु ऑक्साइड अम्लीय नहीं होते हैं। जल (H₂O) हाइड्रोजन का ऑक्साइड है और इसकी प्रकृति उदासीन होती है। नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसे कुछ ऑक्साइड भी उदासीन होते हैं।
📖परिभाषा

विद्युत ऋणात्मकता: किसी परमाणु की साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति को विद्युत ऋणात्मकता कहते हैं।

💡सुझाव

अधातु ऑक्साइडों की अम्लीय प्रकृति को लिटमस परीक्षण द्वारा दर्शाया जा सकता है। लाल लिटमस नीला नहीं होता, नीला लिटमस लाल हो जाता है

हाइड्रोजन: गुण और खोज

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का पहला तत्व है और ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

  • खोज: हेनरी कैवेंडिश (1776) ने इसे एक ज्वलनशील गैस के रूप में पहचाना। लवाइजिए ने इसे 'हाइड्रोजन' नाम दिया (अर्थ: जल बनाने वाला)।
  • उपस्थिति: ब्रह्मांड में 93% हाइड्रोजन है। पृथ्वी पर यह मुख्यतः यौगिकों (जैसे जल, अम्ल, हाइड्रोकार्बन) के रूप में पाया जाता है। वायुमंडल में यह द्विपरमाणुक गैस (H₂) के रूप में बहुत कम मात्रा में होता है।
  • भौतिक गुण:
  • रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन गैस।
  • अत्यंत ज्वलनशील।
  • सबसे हल्की गैस।
  • समस्थानिक: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं:
  • प्रोटियम (¹H): सबसे आम, कोई न्यूट्रॉन नहीं।
  • ड्यूटीरियम (²H या D): भारी हाइड्रोजन, एक न्यूट्रॉन।
  • ट्राइटियम (³H या T): रेडियोधर्मी, दो न्यूट्रॉन।
  • आवर्त सारणी में स्थान: हाइड्रोजन में एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह एक इलेक्ट्रॉन खोकर H⁺ आयन (समूह 1 के समान) या एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर H⁻ आयन (समूह 17 के समान) बना सकता है। आधुनिक आवर्त सारणी में इसे समूह 1 के शीर्ष पर रखा गया है।

हाइड्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि

  • विधि: दानेदार जिंक की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या क्षार से अभिक्रिया द्वारा।
  • अभिक्रियाएँ:
  • जिंक और तनु HCl: \(Zn(s) + 2HCl(aq) \rightarrow ZnCl_2(aq) + H_2(g)\)
  • जिंक और NaOH: \(Zn(s) + 2NaOH(aq) \rightarrow Na_2ZnO_2(aq) + H_2(g)\) (सोडियम जिंकेट)
  • सावधानियाँ: हाइड्रोजन गैस हवा के साथ मिलकर विस्फोटक मिश्रण बनाती है। परीक्षण के लिए जलती माचिस की तीली परखनली के मुँह के पास ले जाएँ, अंदर नहीं।

हाइड्रोजन के रासायनिक गुण

  1. धातुओं के साथ अभिक्रिया: धातुओं से अभिक्रिया कर धात्विक हाइड्राइड बनाती है।
  • \(2Na + H_2 \rightarrow 2NaH\)
  • \(Mg + H_2 \rightarrow MgH_2\)
  1. हैलोजन से अभिक्रिया: हैलोजन से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन हैलाइड बनाती है।
  • \(H_2(g) + X_2(g) \rightarrow 2HX(g)\) (जहाँ X = F, Cl, Br, I)
  1. अपचयन अभिक्रिया: गर्म धात्विक ऑक्साइड को संगत धातु में अपचयित करती है।
  • \(CuO(s) + H_2(g) \xrightarrow{200^\circ C} Cu(s) + H_2O(g)\)
  • \(Fe_3O_4(s) + 4H_2(g) \rightarrow 3Fe(s) + 4H_2O(g)\)

हाइड्रोजन के उपयोग

  1. धातुकर्म: टंग्स्टन और मॉलिब्डेनम जैसी धातुओं को उनके ऑक्साइड से प्राप्त करने में।
  2. औद्योगिक उत्पादन: अमोनिया (हैबर प्रक्रम), हाइड्रोजन क्लोराइड, मेथेनॉल आदि के निर्माण में।
  3. हाइड्रोजनीकरण: वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण द्वारा वनस्पति घी (वसा) बनाने में।
  4. ईंधन: ईंधन सेल में विद्युत ऊर्जा उत्पादन के लिए। रॉकेट ईंधन में द्रव हाइड्रोजन का उपयोग।
  5. वेल्डिंग: ऑक्सी-हाइड्रोजन ज्वाला का उपयोग धातुओं की वेल्डिंग और कटिंग में।
महत्त्वपूर्ण

हाइड्रोजनीकरण एक महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रक्रिया है जहाँ असंतृप्त वनस्पति तेलों को संतृप्त वसा में बदला जाता है।

नाइट्रोजन: गुण और खोज

नाइट्रोजन वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है।

  • खोज: डेनियल रदरफोर्ड (1772) ने इसे 'फिक्स्ड एयर' के रूप में पहचाना। लवाइजिए ने इसे 'नाइट्रोजन' नाम दिया।
  • उपस्थिति: वायुमंडल का लगभग 78% नाइट्रोजन गैस (N₂) है
  • परमाणु संरचना: परमाणु संख्या 7, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 5।
  • भौतिक गुण:
  • रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन गैस।
  • जल में बहुत कम घुलनशील।
  • अत्यंत अक्रिय (कम क्रियाशील) गैस, क्योंकि इसके दो परमाणु त्रिबंध (N≡N) द्वारा जुड़े होते हैं, जिसे तोड़ने के लिए उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

नाइट्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि

  • विधि: अमोनियम क्लोराइड और सोडियम नाइट्राइट के जलीय विलयन को गर्म करके।
  • अभिक्रिया: \(NH_4Cl(aq) + NaNO_2(aq) \xrightarrow{ऊष्मा} NaCl(aq) + 2H_2O(l) + N_2(g)\)

नाइट्रोजन के रासायनिक गुण

  1. ऑक्सीजन से अभिक्रिया: अत्यधिक उच्च ताप (2000 K) पर ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) बनाती है।
  • \(N_2(g) + O_2(g) \xrightarrow{2000 K} 2NO(g)\)
  1. धातुओं से अभिक्रिया: उच्च ताप पर धातुओं से अभिक्रिया कर धात्विक नाइट्राइड बनाती है।
  • \(6Li + N_2 \xrightarrow{ताप} 2Li_3N\) (लिथियम नाइट्राइड)
  1. हाइड्रोजन से अभिक्रिया (हैबर प्रक्रम):
  • उत्पाद: अमोनिया (NH₃)।
  • अभिक्रिया: \(N_2(g) + 3H_2(g) \xrightleftharpoons[Fe \text{ उत्प्रेरक}, Mo \text{ उत्साहक}]{450-500^\circ C, 200 atm} 2NH_3(g)\)
  • उत्प्रेरक: आयरन (Fe) अभिक्रिया की दर बढ़ाता है।
  • उत्साहक: मॉलिब्डेनम (Mo) उत्प्रेरक की क्रियाशीलता बढ़ाता है।

नाइट्रोजन के उपयोग

  1. जैविक यौगिक: प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल आदि जैसे जीवों और वनस्पतियों में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण यौगिकों का घटक।
  2. औद्योगिक निर्माण: अमोनिया, नाइट्रिक अम्ल, यूरिया (उर्वरक) आदि के निर्माण में।
  3. अक्रिय वातावरण: डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों (जैसे चिप्स के पैकेट) में ऑक्सीकरण को रोकने के लिए अक्रिय वातावरण बनाने में।
  4. प्रशीतक: द्रव नाइट्रोजन का उपयोग ऊतक, रक्त नमूने आदि को ठंडा कर परिरक्षित करने में (निम्न ताप परिरक्षण)।
💡सुझाव

हैबर प्रक्रम अमोनिया के औद्योगिक उत्पादन की एक महत्वपूर्ण विधि है और इसकी अभिक्रिया की परिस्थितियाँ (तापमान, दाब, उत्प्रेरक) अक्सर पूछी जाती हैं।

ऑक्सीजन: गुण और अपररूप

ऑक्सीजन भूपर्पटी पर सर्वाधिक बहुलता में पाया जाने वाला तत्व है और जीवन के लिए अनिवार्य है।

  • खोज: जोसेफ प्रीस्टले (1774) और कार्ल शीले (1772) ने स्वतंत्र रूप से खोजा। लवाइजिए ने इसे 'ऑक्सीजन' नाम दिया (अर्थ: अम्ल बनाने वाला)।
  • उपस्थिति: भूपर्पटी पर सर्वाधिक (लगभग 46%)। वायुमंडल में लगभग 21% ऑक्सीजन गैस (O₂) है। जल (H₂O) का भी घटक।
  • परमाणु संरचना: परमाणु क्रमांक 8, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 6।
  • अपररूप: ऑक्सीजन के दो अपररूप हैं:
  • ऑक्सीजन (O₂): द्विपरमाणुक अणु, सामान्य रूप।
  • ओजोन (O₃): त्रिपरमाणुक अणु, समतापमंडल में पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है।
  • भौतिक गुण:
  • रंगहीन, गंधहीन गैस।
  • जल में थोड़ी घुलनशील (जलीय जीवों के लिए महत्वपूर्ण)।
  • स्वयं ज्वलनशील नहीं है, लेकिन दहन में सहायक है।
  • फ्लुओरीन के बाद सबसे अधिक विद्युत ऋणी तत्व।

ऑक्सीजन बनाने की प्रयोगशाला विधि

  • विधि: पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) को गर्म करके।
  • अभिक्रिया: \(2KMnO_4(s) \xrightarrow{ऊष्मा} K_2MnO_4(s) + MnO_2(s) + O_2(g)\)
  • एकत्रीकरण: ऑक्सीजन गैस को पानी के अधो-विस्थापन द्वारा एकत्रित किया जाता है क्योंकि यह जल में कम घुलनशील है।

ऑक्सीजन के रासायनिक गुण

  1. धातुओं और अधातुओं से अभिक्रिया: धातुओं और अधातुओं से अभिक्रिया कर ऑक्साइड बनाती है।
  • धातुओं से: \(4Na + O_2 \rightarrow 2Na_2O\)
  • अधातुओं से: \(N_2 + O_2 \rightarrow 2NO\) (उच्च ताप पर)
  1. हाइड्रोजन से अभिक्रिया: हाइड्रोजन के साथ विद्युत स्फुलिंग करने पर जल बनाती है।
  • \(2H_2 + O_2 \xrightarrow{विद्युत स्फुलिंग} 2H_2O\)
  1. यौगिकों से अभिक्रिया: अमोनिया से अभिक्रिया कर नाइट्रोजन और जल बनाती है।
  • \(4NH_3 + 3O_2 \rightarrow 2N_2 + 6H_2O\)
  1. हाइड्रोजन क्लोराइड से अभिक्रिया: कॉपर क्लोराइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में HCl को ऑक्सीकृत कर क्लोरीन गैस बनाती है।
  • \(4HCl + O_2 \xrightarrow{उत्प्रेरक, 400^\circ C} 2H_2O + 2Cl_2\)

ऑक्सीजन के उपयोग

  1. श्वसन और दहन: सभी सजीवों के श्वसन और दहन क्रियाओं के लिए अनिवार्य।
  2. जैविक यौगिक: प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट जैसे जीवन के आधारभूत यौगिकों का घटक।
  3. औद्योगिक उत्पादन: नाइट्रिक अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल, ओजोन आदि के निर्माण में।
  4. ईंधन: द्रव ऑक्सीजन रॉकेट ईंधन के एक घटक के रूप में।
  5. वेल्डिंग और कटिंग: ऑक्सी-हाइड्रोजन ज्वाला और ऑक्सी-एसिटिलीन ज्वाला का उपयोग धातुओं की वेल्डिंग और कटिंग में।
  6. चिकित्सा: अस्पतालों में कृत्रिम श्वसन के लिए।
याद रखें

ऑक्सीजन स्वयं नहीं जलती, लेकिन जलने में सहायक होती है। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है जो इसे हाइड्रोजन जैसी ज्वलनशील गैसों से अलग करता है।

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