ऊर्जाः स्वरूप एवं स्रोत
अध्याय 'ऊर्जाः स्वरूप एवं स्रोत' छात्रों को ऊर्जा की अवधारणा, उसके विभिन्न प्रकारों (स्थितिज और गतिज ऊर्जा) और दैनिक जीवन में उनके उपयोग से परिचित कराता है। यह अध्याय ऊर्जा रूपांतरण के सिद्धांतों, ऊर्जा के पारंपरिक और वैकल्पिक स्रोतों जैसे जीवाश्म ईंधन, जलविद्युत, बायोमास, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, समुद्री ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और नाभिकीय ऊर्जा पर विस्तार से चर्चा करता है। छात्र ऊर्जा संरक्षण के नियम और छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण (क्रेडा) के उद्देश्यों को भी सीखते हैं, जो उन्हें ऊर्जा के महत्व और उसके विवेकपूर्ण उपयोग को समझने में मदद करता है।
ऊर्जा की अवधारणा और ऐतिहासिक विकास
ऊर्जा वह क्षमता है जिससे कोई कार्य किया जा सकता है। कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- ऊर्जा शब्द का उद्भव:
- लगभग 200 वर्ष पूर्व ब्रिटिश वैज्ञानिक थॉमस यंग ने 'ऊर्जा' शब्द का प्रयोग किया।
- यह यूनानी वाक्य 'अंदर कार्य' से प्रेरित था, जिसका अर्थ है कि ऊर्जा के अंदर कार्य छिपा है।
- ऊर्जा का ऐतिहासिक विकास:
- प्राचीन काल: मनुष्य मुख्य रूप से अपने शरीर की रासायनिक ऊर्जा का उपयोग करता था।
- पालतू जानवरों का उपयोग: बाद में जानवरों की ऊर्जा का उपयोग कृषि और परिवहन के लिए किया जाने लगा।
- जल और पवन ऊर्जा: नदियों और पानी के बहाव से जहाज चलाना सीखा गया।
- आग का उपयोग: लकड़ी और वसा को ईंधन के रूप में उपयोग करके आग की ऊर्जा का उपयोग शुरू हुआ।
- गर्मी, प्रकाश, खाना पकाने और धातुओं, कांच, मिट्टी के बर्तन बनाने में सहायक।
- 1700 ई. - स्टीम इंजन का आविष्कार:
- ईंधन की रासायनिक ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में बदलने का पहला महत्वपूर्ण कदम।
- कारखानों में मशीनों, जहाजों और रेलगाड़ियों को चलाने में उपयोग।
- लकड़ी की जगह कोयले का उपयोग ईंधन के रूप में।
- 1800 ई. - विद्युत ऊर्जा का विकास:
- जलाऊ ईंधन की रासायनिक ऊर्जा से चुम्बकों के ध्रुवों के बीच तार के पहिए चलाकर विद्युत धारा उत्पन्न की गई।
- विद्युत करंट का उपयोग टेलीग्राफ और टेलीफोन में।
- दुनिया के सारे मोटर विद्युत ऊर्जा से चलते हैं।
- 1800 के आसपास - तेल का उपयोग:
- तेल के कुएँ खोदना सीखा गया, जिससे इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सका।
- 1800 के अंत में पेट्रोल से चलने वाले इंजन बने, जिनका उपयोग कारों, ट्रकों, बसों, जहाजों, हवाईजहाजों में होता है।
- तेल का उपयोग घरों को गर्म करने और विद्युत पैदा करने में भी।
- आधुनिक ऊर्जा स्रोत:
- आण्विक ऊर्जा, पानी और हवा के बहाव की धाराएँ, ज्वार-भाटा, भू-तापीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा।
- यह अध्याय इन्हीं विभिन्न ऊर्जा स्रोतों और उनके प्रकारों पर केंद्रित है।
ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित किया जा सकता है।
ऊर्जा के विभिन्न प्रकार और स्वरूप
ऊर्जा कई रूपों में मौजूद है और इसे मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांटा जा सकता है: स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा।
ऊर्जा के स्वरूप
- रासायनिक ऊर्जा: परमाणुओं और अणुओं के बंधों में संग्रहित ऊर्जा।
- उदाहरण: जैव-भार, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कोयला।
- तापीय ऊर्जा: पदार्थ की आंतरिक ऊर्जा, परमाणुओं और अणुओं के कंपन और गति के कारण।
- उदाहरण: भू-तापीय ऊर्जा।
- नाभिकीय ऊर्जा: परमाणु के नाभिक में संग्रहित ऊर्जा जो अणुओं को एक साथ बांधे रखती है।
- उदाहरण: यूरेनियम परमाणु का नाभिक।
- संग्रहित यांत्रिक ऊर्जा: वस्तुओं में बल के प्रयोग के परिणामस्वरूप संग्रहित ऊर्जा।
- उदाहरण: संपीडित स्प्रिंग, तने हुए रबर बैंड।
- गुरुत्वीय ऊर्जा: किसी वस्तु की स्थिति या स्थान के कारण ऊर्जा।
- उदाहरण: जल-विद्युत बांध के जलाशय में संग्रहित पानी।
- विकिरण ऊर्जा: विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा जो अनुप्रस्थ तरंगों में गति करती है।
- उदाहरण: दृश्य-प्रकाश, एक्स-रे, गामा-किरणें, रेडियो किरणें, सूर्य की ऊर्जा।
- गति ऊर्जा (यांत्रिक गति): किसी वस्तु या पदार्थ की एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति के कारण ऊर्जा।
- उदाहरण: पवन, जल-विद्युत।
- विद्युत ऊर्जा: इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा।
- उदाहरण: बिजली का चमकना, घरों में विद्युत आपूर्ति।
- ध्वनि ऊर्जा: ऊर्जा का अनुदैर्ध्य तरंगों (संपीडन एवं विरलन) में पदार्थों में होकर गमन करना।
- उदाहरण: संगीत, बातचीत।
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
- संग्रहित ऊर्जा या स्थिति की ऊर्जा।
- किसी वस्तु में उसकी स्थिति या विन्यास के कारण निहित ऊर्जा।
- उदाहरण:
- ऊँचाई पर रखा पत्थर।
- खींचा हुआ धनुष।
- संपीडित स्प्रिंग।
- बांध में रुका हुआ पानी।
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
- कण में गति के कारण ऊर्जा।
- किसी वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा।
- उदाहरण:
- चलती हुई कार।
- गिरता हुआ पत्थर।
- बहता पानी।
- पवन ऊर्जा।
महत्वपूर्ण अंतर:
- स्थितिज ऊर्जा: वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है।
- गतिज ऊर्जा: वस्तु की गति पर निर्भर करती है।
- एक वस्तु में दोनों प्रकार की ऊर्जाएँ एक साथ हो सकती हैं (जैसे उड़ता हुआ हवाई जहाज)।
सभी प्रकार की ऊर्जाओं को अंततः स्थितिज या गतिज ऊर्जा के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा
गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा ऊर्जा के दो मूलभूत रूप हैं।
गतिज ऊर्जा
- परिभाषा: किसी वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं।
- विशेषताएँ:
- गतिशील वस्तुएँ कार्य कर सकती हैं।
- वस्तु की गति जितनी अधिक होगी, उसकी गतिज ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी।
- समान गति से चलती हुई भारी वस्तु में हल्की वस्तु की अपेक्षा अधिक गतिज ऊर्जा होती है।
- उदाहरण:
- हवा का तेज़ झोंका पेड़ों को गिरा सकता है।
- बहता पानी जहाज को ढकेल सकता है।
- गुलेल से फेंका गया पत्थर दीवार में गड्ढा कर सकता है।
- चलती हुई कार, उड़ता हुआ पक्षी।
स्थितिज ऊर्जा
- परिभाषा: किसी वस्तु में उसकी स्थिति या विन्यास के कारण निहित ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
- विशेषताएँ:
- स्थिर वस्तु भी कार्य कर सकती है, यदि उसकी स्थिति में परिवर्तन हो।
- वस्तु की ऊँचाई जितनी अधिक होगी, उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी।
- उदाहरण:
- पहाड़ी के सिरे पर रखा पत्थर: इसमें स्थितिज ऊर्जा होती है, जो लुढ़कने पर गतिज ऊर्जा में बदल जाती है और कार्य करती है।
- बांध में संग्रहित पानी: इसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होती है, जो टरबाइन घुमाने पर गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
- खींचा हुआ रबर बैंड या धनुष: इसमें प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा होती है।
गतिज और स्थितिज ऊर्जा का संबंध
- ये दोनों ऊर्जाएँ एक-दूसरे में रूपांतरित हो सकती हैं।
- उदाहरण:
- जब पहाड़ी से पत्थर लुढ़कता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
- जब कोई वस्तु ऊपर फेंकी जाती है, तो उसकी गतिज ऊर्जा धीरे-धीरे स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है, और उच्चतम बिंदु पर गतिज ऊर्जा न्यूनतम (शून्य) और स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है। नीचे आते समय स्थितिज ऊर्जा पुनः गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
सारांश:
- गतिज ऊर्जा: गति के कारण।
- स्थितिज ऊर्जा: स्थिति या विन्यास के कारण।
बोर्ड परीक्षाओं में गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा के उदाहरणों और उनके रूपांतरण पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
ऊर्जा रूपांतरण और उसके उदाहरण
ऊर्जा रूपांतरण वह प्रक्रिया है जिसमें ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल उसका रूप बदला जा सकता है।
ऊर्जा रूपांतरण के सामान्य उदाहरण
- पटाखे का फूटना: रासायनिक ऊर्जा \(\rightarrow\) प्रकाशीय ऊर्जा + ध्वनि ऊर्जा + उष्मीय ऊर्जा + गतिज ऊर्जा।
- टॉर्च का जलना: रासायनिक ऊर्जा (बैटरी) \(\rightarrow\) विद्युत ऊर्जा \(\rightarrow\) प्रकाश ऊर्जा + उष्मीय ऊर्जा।
- पेट्रोल इंजन: रासायनिक ऊर्जा (पेट्रोल) \(\rightarrow\) उष्मीय ऊर्जा \(\rightarrow\) गतिज ऊर्जा (वाहन की गति)।
- डाइनामाइट का विस्फोट: रासायनिक ऊर्जा \(\rightarrow\) ध्वनि ऊर्जा + उष्मीय ऊर्जा + गतिज ऊर्जा।
- खींचा हुआ रबर बैंड छोड़ना: स्थितिज ऊर्जा \(\rightarrow\) गतिज ऊर्जा।
- तबला बजाना: यांत्रिक ऊर्जा \(\rightarrow\) ध्वनि ऊर्जा।
विद्युत उपकरणों में ऊर्जा रूपांतरण
विद्युत उपकरण विद्युत ऊर्जा को अन्य उपयोगी ऊर्जा रूपों में परिवर्तित करते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ ऊर्जा अनुपयोगी रूप में व्यय भी होती है।
| विद्युत उपकरण | विद्युत ऊर्जा के उपयोगी रूपांतरण | विद्युत ऊर्जा का व्यय (अनुपयोगी रूप) | |---|---|---| | टी.वी. | प्रकाश व ध्वनि ऊर्जा | ऊष्मीय ऊर्जा (टी.वी. व वातावरण में) | | हेयर ड्रायर | वायु की ऊष्मीय और गतिज ऊर्जा | ध्वनि ऊर्जा | | ओवन | भोजन में ऊष्मीय ऊर्जा | बर्तनों में ऊष्मीय ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा | | पंखा | गतिज ऊर्जा | ध्वनि ऊर्जा |
ऊर्जा रूपांतरण की दक्षता
- प्रत्येक रूपांतरण में कुछ ऊर्जा अनुपयोगी रूप में व्यय होती है, आमतौर पर ऊष्मा के रूप में।
- उदाहरण:
- टंगस्टन बल्ब: 90% ऊष्मीय ऊर्जा, 10% प्रकाशीय ऊर्जा। (कम कुशल)
- CFLs: 30% ऊष्मीय ऊर्जा, 70% प्रकाशीय ऊर्जा। (अधिक कुशल)
- LEDs: 05% ऊष्मीय ऊर्जा, 95% प्रकाशीय ऊर्जा। (सर्वाधिक कुशल)
ऊर्जा संरक्षण का नियम
- यह नियम बताता है कि ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
- ब्रह्मांड में ऊर्जा का कुल परिमाण स्थिर रहता है, यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती रहती है।
- यह नियम सभी भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं पर लागू होता है।
छात्र अक्सर ऊर्जा संरक्षण के नियम को ऊर्जा रूपांतरण के साथ भ्रमित करते हैं। याद रखें, ऊर्जा रूपांतरण में ऊर्जा का रूप बदलता है, जबकि संरक्षण का नियम कुल ऊर्जा की स्थिरता बताता है।
ऊष्मीय ऊर्जा का स्थानान्तरण
ऊष्मीय ऊर्जा का स्थानान्तरण हमेशा गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर होता है। यह तीन मुख्य तरीकों से होता है:
1. चालन (Conduction)
- परिभाषा: ऊष्मा का स्थानान्तरण अणुओं के सीधे संपर्क और कंपन के माध्यम से होता है, बिना पदार्थ के कणों के वास्तविक संचलन के।
- माध्यम: मुख्य रूप से ठोस पदार्थों में होता है।
- उदाहरण:
- धातु की छड़ के एक सिरे को गर्म करने पर दूसरा सिरा भी गर्म हो जाता है।
- गर्म चाय के कप को छूने पर हाथ का गर्म होना।
2. संवहन (Convection)
- परिभाषा: ऊष्मा का स्थानान्तरण पदार्थ के कणों के वास्तविक संचलन द्वारा होता है।
- माध्यम: तरल पदार्थ (द्रव और गैस) में होता है।
- प्रक्रिया: गर्म कण हल्के होकर ऊपर उठते हैं और ठंडे कण नीचे आकर गर्म होते हैं, जिससे एक संवहन धारा बनती है।
- उदाहरण:
- पानी का उबलना (नीचे से गर्म होकर ऊपर उठना)।
- कमरे में हीटर से हवा का गर्म होना।
- समुद्री हवाएँ (लैंड ब्रीज और सी ब्रीज)।
3. विकिरण (Radiation)
- परिभाषा: ऊष्मा का स्थानान्तरण विद्युत चुम्बकीय तरंगों (जैसे अवरक्त विकिरण) के रूप में होता है, जिसके लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
- माध्यम: निर्वात सहित किसी भी माध्यम में हो सकता है।
- विशेषता: यह सबसे तेज़ विधि है।
- उदाहरण:
- सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का पहुँचना।
- आग के पास खड़े होने पर गर्मी महसूस होना।
- गर्म वस्तु से निकलने वाली ऊष्मा।
ऊष्मीय ऊर्जा के व्यय को नियंत्रित करना
- ऊष्मा स्थानान्तरण के सिद्धांतों को समझकर हम ऊर्जा के व्यय को नियंत्रित कर सकते हैं।
- उदाहरण:
- गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े पहनना (विकिरण कम अवशोषित)।
- सर्दियों में गहरे रंग के कपड़े पहनना (विकिरण अधिक अवशोषित)।
- थर्मस फ्लास्क का उपयोग (चालन, संवहन और विकिरण तीनों को कम करना)।
- घरों में इन्सुलेशन का उपयोग (ऊष्मा हानि को कम करना)।
ऊष्मा का स्थानान्तरण हमेशा उच्च तापमान वाले क्षेत्र से निम्न तापमान वाले क्षेत्र की ओर होता है।
ऊर्जा के स्त्रोत और विद्युत उत्पादन
ऊर्जा के स्रोत वे पदार्थ या प्रणालियाँ हैं जिनसे हम उपयोगी ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इन्हें मुख्य रूप से पारंपरिक (अनवीकरणीय) और वैकल्पिक (नवीकरणीय) स्रोतों में वर्गीकृत किया जाता है।
ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत (Traditional/Non-Renewable Sources)
ये स्रोत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं।
1. जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels)
- उदाहरण: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस (रसोई गैस, केरोसीन, डीज़ल)।
- उपयोग:
- सीधे ईंधन के रूप में (वाहनों, स्टोव में)।
- विद्युत उत्पादन के लिए (तापीय विद्युत संयंत्र)।
- तापीय विद्युत संयंत्र की कार्यप्रणाली:
- जीवाश्म ईंधन का दहन करके जल को उबाला जाता है।
- उत्पन्न भाप टरबाइन को घुमाती है।
- टरबाइन जनरेटर को चलाता है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
- ऊर्जा रूपांतरण: रासायनिक ऊर्जा (ईंधन) \(\rightarrow\) ऊष्मीय ऊर्जा \(\rightarrow\) यांत्रिक ऊर्जा (टरबाइन) \(\rightarrow\) विद्युत ऊर्जा।
- हानियाँ:
- सीमित उपलब्धता: अनवीकरणीय स्रोत।
- दक्षता: केवल 40% तक कुशल, शेष ऊर्जा व्यय होती है।
- पर्यावरणीय प्रदूषण:
- दहन से कार्बन, नाइट्रोजन, सल्फर के ऑक्साइड मुक्त होते हैं।
- ये अम्लीय ऑक्साइड अम्लीय वर्षा का कारण बनते हैं, जो जल और स्मारकों को हानि पहुँचाते हैं।
- कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीनहाउस गैस है, जो ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करती है।
2. जल-विद्युत संयंत्र (Hydroelectric Power Plants)
- परिभाषा: बहते जल की गतिज ऊर्जा या ऊँचाई पर स्थित जल की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग करके विद्युत उत्पन्न करना।
- कार्यप्रणाली:
- नदियों पर ऊँचे बाँध बनाकर जलाशयों में जल एकत्रित किया जाता है।
- संचित जल को बाँध के ऊपरी भाग से पाइपों द्वारा टरबाइन के ब्लेडों पर गिराया जाता है।
- जल की स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलकर टरबाइन को घुमाती है।
- टरबाइन जनरेटर को चलाता है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
- लाभ:
- नवीकरणीय स्रोत: वर्षा के कारण जलाशय पुनः भर जाते हैं।
- स्वच्छ ऊर्जा: कोई प्रदूषण नहीं।
- बहुउद्देशीय: सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में भी सहायक।
- हानियाँ:
- पर्यावरणीय प्रभाव:
- खेती योग्य भूमि और मानव आवास डूब जाते हैं।
- पारिस्थितिक तंत्र नष्ट हो जाते हैं।
- बड़े पैमाने पर विस्थापन।
- उच्च प्रारंभिक लागत।
3. जैव मात्रा (बायो गैस) (Biomass/Biogas)
- परिभाषा: गोबर, कृषि अपशिष्ट, पादप अपशिष्ट और मल जैसे जैविक पदार्थों को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटित करके प्राप्त गैस।
- बायो गैस संयंत्र की कार्यप्रणाली:
- गोबर और जल का गाढ़ा घोल (स्लरी) बनाया जाता है।
- इसे संपाचित्र (डाइजेस्टर) में डाला जाता है, जहाँ ऑक्सीजन नहीं होती।
- अवायवीय सूक्ष्मजीव गोबर का अपघटन करते हैं।
- उत्पन्न बायो गैस (मीथेन, कार्बन-डाई-ऑक्साइड, हाइड्रोजन, हाइड्रोजन सल्फाइड का मिश्रण) को ऊपर की टंकी में संचित किया जाता है।
- इसे पाइपों द्वारा बाहर निकाला जाता है।
- बायो गैस की संरचना: लगभग 75% मीथेन गैस।
- लाभ:
- स्वच्छ ईंधन: धुँआ रहित जलता है, कोई राख नहीं बचती।
- नवीकरणीय स्रोत: जैविक अपशिष्ट से लगातार प्राप्त।
- खाद का उत्पादन: अपघटन के बाद बची स्लरी उत्कृष्ट खाद होती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी: खाना पकाने और प्रकाश के लिए।
- हानियाँ:
- बड़े पैमाने पर उत्पादन मुश्किल।
- तापमान पर निर्भरता।
4. पवन ऊर्जा (Wind Energy)
- परिभाषा: पवनों की गतिज ऊर्जा का उपयोग करके यांत्रिक कार्य करना या विद्युत उत्पन्न करना।
- पवन ऊर्जा का स्रोत: सूर्य के विकिरणों द्वारा भूखंडों और जलाशयों के असमान तप्त होने के कारण वायु में गति उत्पन्न होती है।
- कार्यप्रणाली:
- पवन चक्कियों की पंखुड़ियाँ पवन की गतिज ऊर्जा से घूमती हैं।
- यह घूर्णी गति शाफ्ट के माध्यम से जनरेटर के टरबाइन को चलाती है।
- जनरेटर विद्युत उत्पन्न करता है।
- विद्युत को ट्रांसफार्मर द्वारा उच्च विभव पर परिवर्तित कर ग्रिड में संचारित किया जाता है।
- पवन ऊर्जा फार्म: विशाल क्षेत्र में बहुत सारी पवन चक्कियाँ लगाई जाती हैं।
- लाभ:
- नवीकरणीय स्रोत: पवन एक अक्षय स्रोत है।
- स्वच्छ ऊर्जा: कोई प्रदूषण नहीं।
- कम परिचालन लागत।
- हानियाँ:
- अनियमितता: हर समय पवन उपलब्ध नहीं होती।
- उच्च प्रारंभिक लागत: पवन ऊर्जा फार्म स्थापित करने में।
- पर्यावरणीय प्रभाव: पक्षियों के लिए खतरा, ध्वनि प्रदूषण, दृश्य प्रदूषण।
- विशाल भूमि क्षेत्र की आवश्यकता।
जीवाश्म ईंधन, जल-विद्युत और बायो गैस की कार्यप्रणाली, लाभ और हानियों पर अक्सर तुलनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। आरेख बनाने का अभ्यास करें।
ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत (Alternative/Renewable Sources)
ये स्रोत प्रकृति में असीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और इनका उपयोग पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचाता है।
1. सौर ऊर्जा (Solar Energy)
- परिभाषा: सूर्य से प्राप्त प्रकाश और ऊष्मा ऊर्जा।
- लाभ:
- अक्षय और प्रचुर: भारत जैसे देश में वर्ष के अधिकांश दिन उपलब्ध।
- स्वच्छ ऊर्जा: कोई प्रदूषण नहीं।
- दूरस्थ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त: जहाँ ग्रिड कनेक्टिविटी नहीं है।
सौर तापन युक्तियाँ (Solar Heating Devices)
- वे युक्तियाँ जो सौर ऊर्जा का अधिकाधिक संग्रह करती हैं।
- उदाहरण: सोलर कुकर, सौर जल तापक।
सोलर कुकर (Solar Cooker)
- कार्यप्रणाली:
- यह एक रोधी धातु या लकड़ी के बक्से का बना होता है, जिसकी भीतरी सतह काले रंग से पोती होती है (ऊष्मा के अच्छे अवशोषक)।
- भोजन को काले रंग के धातु पात्रों में रखकर बक्से के अंदर रखा जाता है।
- बक्से को काँच की शीट से ढका जाता है (ग्रीनहाउस प्रभाव)।
- एक परावर्तक दर्पण सूर्य के प्रकाश को कुकर पर केंद्रित करता है।
- काँच का ढक्कन सूर्य की ऊष्मा किरणों को अंदर आने देता है लेकिन उन्हें बाहर जाने से रोकता है, जिससे बक्से के अंदर का तापमान 2-3 घंटे में 100°C से अधिक बढ़ जाता है।
- लाभ:
- ईंधन की बचत।
- प्रदूषण रहित।
- पोषक तत्वों का संरक्षण।
- हानियाँ:
- रात में या बादल वाले दिनों में उपयोग नहीं किया जा सकता।
- खाना पकाने में अधिक समय लगता है।
- सभी प्रकार के भोजन नहीं पकाए जा सकते।
सौर सेल (Solar Cell)
- परिभाषा: एक युक्ति जो सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करती है (फोटोवोल्टेइक प्रभाव)।
- विशेषताएँ:
- एक सौर सेल 0.5-1.0 V तक वोल्टता और लगभग 0.7 W विद्युत उत्पन्न कर सकता है।
- सौर पैनल: बहुत अधिक संख्या में सौर सेलों को संयोजित करके बनाया जाता है, जिससे पर्याप्त विद्युत प्राप्त होती है।
- लाभ:
- कोई गतिमान पुर्जा नहीं, रखरखाव सस्ता।
- दूरस्थ और अगम्य स्थानों में स्थापित किया जा सकता है।
- प्रदूषण रहित।
- हानियाँ:
- उच्च लागत: सिलिकॉन और सिल्वर के उपयोग के कारण।
- सीमित दक्षता: अभी भी कम है।
- रात में या बादल वाले दिनों में काम नहीं करता।
- उपयोग: मानव-निर्मित उपग्रह, अंतरिक्ष अन्वेषक युक्तियाँ (मार्स ऑर्बिटर), रेडियो/बेतार संचार तंत्र, ट्रैफिक सिग्नल, परिकलक (कैलकुलेटर), खिलौने।
2. समुद्रों से ऊर्जा (Energy from Oceans)
(अ) ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy)
- परिभाषा: चंद्रमा के गुरुत्वीय खिंचाव के कारण सागरों में जल स्तर के चढ़ने (ज्वार) और गिरने (भाटा) से प्राप्त ऊर्जा।
- कार्यप्रणाली: सागर के संकीर्ण क्षेत्रों पर बाँध बनाकर, बाँध के द्वार पर स्थापित टरबाइन द्वारा विद्युत उत्पादन।
- लाभ: नवीकरणीय, प्रदूषण रहित।
- हानियाँ: सीमित स्थान, उच्च लागत, पारिस्थितिक प्रभाव।
(ब) तरंग ऊर्जा (Wave Energy)
- परिभाषा: समुद्र तट के निकट विशाल तरंगों की गतिज ऊर्जा।
- कार्यप्रणाली: तरंगों की गतिज ऊर्जा का उपयोग टरबाइन घुमाकर विद्युत उत्पन्न करने में।
- लाभ: नवीकरणीय, प्रदूषण रहित।
- हानियाँ: अनियमित, उच्च रखरखाव लागत।
(स) महासागरीय तापीय ऊर्जा (Ocean Thermal Energy)
- परिभाषा: समुद्रों के पृष्ठ (गर्म) और गहराई (ठंडा) के जल के तापमान अंतर का उपयोग।
- कार्यप्रणाली (OTEC संयंत्र):
- पृष्ठ के गर्म जल का उपयोग अमोनिया जैसे वाष्पशील तरल को उबालने के लिए।
- उत्पन्न वाष्प टरबाइन को घुमाती है।
- गहराई के ठंडे जल का उपयोग वाष्प को संघनित करने के लिए।
- लाभ: नवीकरणीय, प्रदूषण रहित।
- हानियाँ: दक्षता कम, उच्च प्रारंभिक लागत, विशिष्ट भौगोलिक स्थिति की आवश्यकता।
3. भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy)
- परिभाषा: पृथ्वी के भीतर छिपी ऊष्मा ऊर्जा।
- स्रोत: भूपर्पटी में गहराइयों पर तप्त क्षेत्रों में पिघली चट्टानें (मैग्मा) जो ऊपर धकेल दी जाती हैं।
- कार्यप्रणाली:
- भूमिगत जल इन तप्त स्थलों (हॉट स्पॉट) के संपर्क में आता है और भाप उत्पन्न होती है।
- यह भाप कभी-कभी गरम चश्मों या ऊष्ण स्रोतों के रूप में बाहर निकलती है।
- पाइप डालकर इस उच्च दाब वाली भाप को बाहर निकाला जाता है।
- यह भाप विद्युत जनरेटर की टरबाइन को घुमाती है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
- लाभ:
- नवीकरणीय, प्रदूषण रहित।
- विद्युत उत्पादन की लागत अधिक नहीं।
- हानियाँ:
- ऐसे क्षेत्र बहुत कम हैं जहाँ इसका दोहन व्यावहारिक है।
- सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन।
- उदाहरण: न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका में संयंत्र।
4. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)
- परिभाषा: परमाणु के नाभिक में संग्रहित ऊर्जा।
- स्रोत: प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जो नाभिक को बांधे रखते हैं।
- प्राप्ति के तरीके:
- नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission):
- परिभाषा: एक भारी परमाणु (जैसे यूरेनियम-235, प्लूटोनियम, थोरियम) के नाभिक को निम्न ऊर्जा न्यूट्रॉन से बमबारी कराकर हल्के नाभिकों में तोड़ना।
- ऊर्जा मुक्ति: इस प्रक्रिया में विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है, क्योंकि उत्पादों का द्रव्यमान मूल नाभिक से कम होता है (द्रव्यमान क्षति ऊर्जा में बदल जाती है, \(E=mc^2\))।
- उदाहरण: यूरेनियम के एक परमाणु के विखंडन से कोयले के कार्बन परमाणु के दहन से 1 करोड़ गुना अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
- श्रृंखला अभिक्रिया:
- अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया: उत्पन्न न्यूट्रॉन अन्य परमाणुओं का विखंडन करते हैं, जिससे तीव्र गति से ऊर्जा मुक्त होती है (परमाणु बम)।
- नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया: नाभिकीय रिएक्टर में, प्रत्येक विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉनों में से केवल एक को ही आगे विखंडन करने दिया जाता है, जिससे ऊर्जा नियंत्रित दर पर मुक्त होती है (विद्युत उत्पादन)।
- नाभिकीय रिएक्टर: नियंत्रित विखंडन का उपयोग भाप बनाकर विद्युत उत्पन्न करने में।
- नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion):
- परिभाषा: दो हल्के नाभिकों (जैसे हाइड्रोजन या उसके समस्थानिक) को जोड़कर एक भारी नाभिक (जैसे हीलियम) बनाना।
- ऊर्जा मुक्ति: इसमें भी विशाल मात्रा में ऊर्जा निकलती है, क्योंकि उत्पादों का द्रव्यमान मूल नाभिकों के योग से कम होता है।
- उदाहरण: सूर्य और अन्य तारों की ऊर्जा का स्रोत।
- आवश्यक शर्तें: मिलियन कोटि केल्विन ताप और मिलियन कोटि पास्कल दाब की आवश्यकता।
- लाभ:
- U-235 की छोटी मात्रा से अत्यधिक ऊर्जा।
- अभिक्रिया में ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं।
- कम कार्बन उत्सर्जन (प्रत्यक्ष रूप से)।
- हानियाँ:
- रेडियोधर्मी अपशिष्ट: हानिकारक और दीर्घकालिक भंडारण/निपटान की समस्या।
- दुर्घटना का खतरा: आकस्मिक विकिरण रिसाव (चेरनोबिल, फुकुशिमा)।
- उच्च प्रारंभिक लागत।
- यूरेनियम की सीमित उपलब्धता।
- परमाणु हथियारों के प्रसार का जोखिम।
सौर सेल बनाने के लिए सिलिकॉन का उपयोग किया जाता है।
नाभिकीय विखंडन और संलयन के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। विखंडन में भारी नाभिक टूटता है, संलयन में हल्के नाभिक जुड़ते हैं।
क्रेडा (CREDA) और ऊर्जा संरक्षण के उपाय
ऊर्जा की बढ़ती मांग और पारंपरिक स्रोतों की सीमितता के कारण ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग महत्वपूर्ण हो गया है।
क्रेडा (CREDA)
- पूर्ण रूप: छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण।
- परिचय: छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग का एक उपक्रम।
- क्रेडा के उद्देश्य:
- ऊर्जा संरक्षण: ऊर्जा स्रोतों का उचित उपयोग करके ऊर्जा की बचत करना।
- गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाना: पारंपरिक स्रोतों की खपत कम करना।
- पर्यावरण-हितैषी ऊर्जा को बढ़ावा देना: सौर ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा, वायु ऊर्जा के उपयोग के लिए प्रेरित करना।
- छत्तीसगढ़ ऊर्जा शिक्षा पार्क (रायपुर):
- परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के कार्यशील मॉडल प्रदर्शित करता है।
- उदाहरण: जलशक्ति, वायु शक्ति, सौर ऊर्जा शक्ति (सोलर कार, सोलर हट, सोलर बोट), बायोगैस प्लांट।
दैनिक जीवन में ऊर्जा के सदुपयोग के उपाय
ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी नीतियों का हिस्सा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है।
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि पर आधारित उपकरणों को बढ़ावा देना।
- कुशल उपकरण: भोजन पकाने के लिए प्रेशर कुकर का उपयोग करना (ईंधन और समय की बचत)।
- सौर उपकरणों का उपयोग: सोलर कुकर, सौर जल तापक, सौर पैनल आदि का उपयोग करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में जैव गैस: ईंधन के रूप में जैव गैस के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
- परिवहन में दक्षता:
- छोटी दूरियों के लिए साइकिल का उपयोग करना।
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना।
- वाहनों का नियमित रखरखाव।
- विद्युत उपकरणों का विवेकपूर्ण उपयोग:
- आवश्यकता न होने पर लाइट, पंखे बंद करना।
- कम ऊर्जा खपत वाले उपकरण (जैसे LED बल्ब) का उपयोग करना।
- रेफ्रिजरेटर का दरवाजा अनावश्यक रूप से खुला न छोड़ना।
- इमारतों का डिजाइन: प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन का अधिकतम उपयोग करना।
ऊर्जा संरक्षण का महत्व
- पर्यावरण संरक्षण: जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करके प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करना।
- संसाधनों का संरक्षण: अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए बचाना।
- आर्थिक लाभ: ऊर्जा की बचत से व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर धन की बचत।
- ऊर्जा सुरक्षा: बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करना।
क्रेडा के उद्देश्य और ऊर्जा संरक्षण के उपायों पर आधारित प्रश्न बोर्ड परीक्षाओं में महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें बिंदुवार याद रखें।