पदार्थ की प्रकृति
अध्याय 'पदार्थ की प्रकृति' छात्रों को विभिन्न प्रकार के पदार्थों और उनके गुणों से परिचित कराता है। इसमें ठोस, द्रव और गैस की अवस्थाओं, उनके आकार, स्थान घेरने और भार जैसे गुणों पर चर्चा की गई है। छात्र जल में पदार्थों की विलेयता, चुंबक के प्रति आकर्षण, पारदर्शिता, ऊष्मा और विद्युत चालकता, और विसरण जैसे महत्वपूर्ण गुणों के बारे में सीखते हैं। यह अध्याय दैनिक जीवन में पदार्थों के उपयोग और उनके गुणों के आधार पर उनके वर्गीकरण को समझने में मदद करता है।
विभिन्न वस्तुएँ किससे बनी हैं?
हमारे चारों ओर की सभी चीजें वस्तुएँ कहलाती हैं। ये वस्तुएँ एक या एक से अधिक पदार्थों से बनी होती हैं।
- वस्तु: कोई भी ऐसी चीज जिसका कोई आकार हो और जिसे हम देख या छू सकें।
- उदाहरण: कुर्सी, मेज़, किताब, साइकिल, मोबाइल फ़ोन।
- पदार्थ: वह मूल सामग्री जिससे वस्तुएँ बनती हैं।
- उदाहरण: लकड़ी, लोहा, प्लास्टिक, कागज़, काँच, रबर, सीमेंट, रेत।
वस्तु और पदार्थ में अंतर:
- एक वस्तु कई पदार्थों से:
- एक कुर्सी लकड़ी, प्लास्टिक या लोहे से बन सकती है।
- एक साइकिल धातु, रबर और प्लास्टिक से बनी होती है।
- घर बनाने में सीमेंट, रेत, ईंट, लोहा आदि का उपयोग होता है।
- एक पदार्थ से कई वस्तुएँ:
- लकड़ी से मेज़, कुर्सी, दरवाज़ा, अलमारी आदि बन सकते हैं।
- प्लास्टिक से बोतल, खिलौने, बाल्टी, पेन आदि बन सकते हैं।
उदाहरण:
| क्र. | वस्तु का नाम | निर्माण में लगने वाले पदार्थ | |---|---|---| | 1. | सोडावाटर | नमक, शक्कर, पानी एवं कार्बन डाइऑक्साइड | | 2. | पेन | प्लास्टिक, धातु, स्याही | | 3. | बस्ता | कपड़ा, प्लास्टिक, धातु (ज़िप) | | 4. | पुस्तक | कागज़, स्याही, धागा/गोंद | | 5. | हवा से भरा फुग्गा | रबर, हवा |
निष्कर्ष: वस्तुएँ विभिन्न पदार्थों के संयोजन से बनती हैं, और एक ही पदार्थ से कई अलग-अलग वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।
पदार्थ की अवस्थाएँ: प्रकृति में पदार्थ मुख्य रूप से तीन अवस्थाओं में पाए जाते हैं: ठोस, द्रव और गैस।
पदार्थ किस प्रकार समान हैं? (देखना, स्पर्श करना, महसूस करना)
पदार्थों को उनकी अवस्था के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, लेकिन कुछ गुण तीनों अवस्थाओं में समान होते हैं, जबकि कुछ भिन्न।
1. देखना, स्पर्श करना और महसूस करना:
- ठोस:
- देख सकते हैं: हाँ (जैसे पत्थर, किताब)
- स्पर्श कर सकते हैं: हाँ
- महसूस कर सकते हैं: हाँ
- द्रव:
- देख सकते हैं: हाँ (जैसे पानी, दूध)
- स्पर्श कर सकते हैं: हाँ
- महसूस कर सकते हैं: हाँ
- गैस:
- देख सकते हैं: नहीं (जैसे हवा)
- स्पर्श कर सकते हैं: नहीं
- महसूस कर सकते हैं: हाँ (जैसे हवा चलने पर, गुब्बारे में हवा भरने पर)
निष्कर्ष: ठोस और द्रव को देखा, स्पर्श किया और महसूस किया जा सकता है। गैस को देखा या स्पर्श नहीं किया जा सकता, लेकिन महसूस किया जा सकता है।
हवा की उपस्थिति का आभास हवा के बहने पर होता है।
ठोस, द्रव व गैसों का आकार
पदार्थ की तीनों अवस्थाओं का आकार भिन्न-भिन्न होता है:
- ठोस:
- निश्चित आकार होता है।
- उदाहरण: पत्थर, ईंट। इन्हें कहीं भी रखने पर इनका आकार नहीं बदलता।
- कण एक-दूसरे के बहुत करीब और निश्चित स्थिति में होते हैं।
- द्रव:
- निश्चित आकार नहीं होता।
- ये जिस बर्तन में रखे जाते हैं, उसी का आकार ले लेते हैं।
- उदाहरण: पानी, दूध। पानी को गिलास में डालने पर वह गिलास का आकार ले लेता है, बोतल में डालने पर बोतल का। मेज़ पर उड़ेलने पर फैल जाता है।
- कण ठोस की तुलना में थोड़े दूर होते हैं और एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं।
- द्रव बहते हैं।
- गैस:
- निश्चित आकार नहीं होता।
- ये उपलब्ध पूरे स्थान को घेर लेती हैं।
- उदाहरण: हवा।
- कण बहुत दूर-दूर होते हैं और तेजी से गति करते हैं।
- गैसें भी बहती हैं।
क्रियाकलाप 1 (पत्थर और पानी):
- पत्थर को टेबल पर रखने पर उसका आकार नहीं बदलता $\rightarrow$ ठोस का आकार निश्चित।
- पानी को विभिन्न आकार के बर्तनों में डालने पर वह उन्हीं का आकार ले लेता है $\rightarrow$ द्रव का आकार परिवर्तनशील।
- पानी को टेबल पर उड़ेलने पर वह बह जाता है $\rightarrow$ द्रव बहते हैं।
निष्कर्ष: ठोस का आकार निश्चित होता है, जबकि द्रव और गैस का आकार परिवर्तनशील होता है और वे बहते हैं।
ठोस, द्रव व गैसों द्वारा स्थान घेरना
पदार्थ का एक मूलभूत गुण है कि वह स्थान घेरता है। यह गुण तीनों अवस्थाओं में पाया जाता है।
- ठोस:
- निश्चित स्थान घेरते हैं।
- उदाहरण: किताबें बस्ते में स्थान घेरती हैं, एक कुर्सी कमरे में जगह घेरती है।
- द्रव:
- निश्चित आयतन घेरते हैं, भले ही उनका आकार निश्चित न हो।
- उदाहरण: बाल्टी में रखा पानी बाल्टी के अंदर का स्थान घेरता है, एक गिलास पानी गिलास के अंदर की जगह घेरता है।
- गैस:
- स्थान घेरती हैं, भले ही वे अदृश्य हों।
- उदाहरण: गुब्बारे में हवा भरने पर वह फूल जाता है क्योंकि हवा अंदर जगह घेरती है।
क्रियाकलाप 2 (गैसों द्वारा स्थान घेरना):
- पानी से भरी बाल्टी में उल्टी बोतल डुबोकर रखें ताकि वह पानी से भरी रहे।
- रबर की नली से बोतल में हवा फूँकने पर, हवा बुलबुलों के रूप में बोतल में प्रवेश करती है।
- बोतल में पानी का तल नीचे उतरता है।
निष्कर्ष: यह दर्शाता है कि हवा (गैस) स्थान घेरती है।
सभी पदार्थ, चाहे वे ठोस हों, द्रव हों या गैस, स्थान घेरते हैं।
ठोस, द्रव व गैसों में भार
पदार्थ का एक और मूलभूत गुण है कि उसमें भार होता है।
- ठोस:
- भार होता है।
- उदाहरण: एक बड़ा पत्थर छोटे पत्थर की तुलना में अधिक भारी होता है।
- द्रव:
- भार होता है।
- उदाहरण: पानी से पूरी भरी बाल्टी आधी भरी बाल्टी की तुलना में अधिक भारी होती है।
- गैस:
- भार होता है।
- उदाहरण: हवा में भी भार होता है।
क्रियाकलाप 3 (रेत का भार):
- दो समान बीकर लें, एक को रेत से पूरा भरें और दूसरे को आधा।
- पूरा भरा बीकर अधिक भारी प्रतीत होता है।
निष्कर्ष: किसी वस्तु में जितना अधिक पदार्थ होता है, वह उतनी ही अधिक भारी होती है।
क्रियाकलाप 4 (हवा का भार):
- दो फुग्गे फुलाकर एक तुला के दोनों सिरों पर बाँधें ताकि वह संतुलित हो जाए।
- एक फुग्गे की हवा धीरे से निकालें।
- जैसे-जैसे हवा बाहर निकलती है, दूसरा फुग्गा नीचे झुकता जाता है।
निष्कर्ष: फुग्गे से हवा निकलने के कारण वह हल्का हो जाता है, जिससे सिद्ध होता है कि हवा में भी भार होता है।
ठोस, द्रव और गैस के गुणों का सारांश:
| क्र. | गुण | ठोस | द्रव | गैस | |---|---|---|---|---| | 1. | बहना | बहते नहीं हैं। | बहते हैं। | बहती है। | | 2. | आकार | निश्चित होता है। | परिवर्तनशील होता है। | परिवर्तनशील होता है। | | 3. | स्थान घेरना | स्थान घेरते हैं। | स्थान घेरते हैं। | स्थान घेरती है। | | 4. | भार | भार होता है। | भार होता है। | भार होता है। |
समान गुण:
- सभी पदार्थ स्थान घेरते हैं।
- सभी पदार्थों में भार होता है।
पदार्थों की अवस्थाओं की परिभाषाएँ:
- ठोस: ऐसे पदार्थ जो स्थान घेरते हैं, जिनका निश्चित आकार तथा भार होता है और जो बहते नहीं हैं।
- द्रव: ऐसे पदार्थ जो स्थान घेरते हैं, जिनमें निश्चित भार होता है, कोई निश्चित आकार नहीं होता और जो बहते हैं।
- गैस: ऐसे पदार्थ जो निश्चित स्थान नहीं घेरते, जिनका आकार निश्चित नहीं होता, परंतु निश्चित भार होता है और जो बहते हैं।
पदार्थ: कोई भी वस्तु जिसमें द्रव्यमान हो और जो स्थान घेरती हो, पदार्थ कहलाती है।
क्या पदार्थों की अवस्थाएँ बदली जा सकती हैं?
पदार्थों की अवस्थाएँ तापमान में परिवर्तन करके बदली जा सकती हैं।
- ठोस $\leftrightarrow$ द्रव:
- गलन (Melting): ठोस को गर्म करने पर द्रव में बदलना। (जैसे बर्फ का पानी बनना)
- जमना (Freezing): द्रव को ठंडा करने पर ठोस में बदलना। (जैसे पानी का बर्फ बनना)
- द्रव $\leftrightarrow$ गैस:
- वाष्पीकरण (Evaporation): द्रव को गर्म करने पर गैस में बदलना। (जैसे पानी का भाप बनना)
- संघनन (Condensation): गैस को ठंडा करने पर द्रव में बदलना। (जैसे भाप का पानी बनना)
उदाहरण: पानी की अवस्थाएँ:
- साधारण ताप पर: पानी (द्रव अवस्था)
- अधिक ठंडा करने पर: बर्फ (ठोस अवस्था) $\rightarrow$ जमना
- गर्म करने पर: भाप (गैसीय अवस्था) $\rightarrow$ उबलना/वाष्पीकरण
क्रियाकलाप 5 (मोमबत्ती की अवस्थाएँ):
- मोमबत्ती जलाने पर, ठोस मोम पिघलकर द्रव बनता है और फिर वाष्प बनकर जलता है।
- मोमबत्ती बुझाने पर, सफेद धुआँ (मोम की वाष्प) ऊपर उठता है।
- इस धुएँ के पास जलती तीली ले जाने पर मोमबत्ती पुनः जल उठती है।
निष्कर्ष: यह दर्शाता है कि मोम ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में पाया जाता है, और ये अवस्थाएँ एक-दूसरे में परिवर्तित हो सकती हैं।
तापमान में परिवर्तन करके पदार्थ की अवस्था बदली जा सकती है।
जल में विलेयता (घुलनशीलता)
जल एक सार्वभौमिक विलायक (universal solvent) है, क्योंकि यह कई पदार्थों को अपने अंदर घोल सकता है।
- विलेय पदार्थ (Soluble substances): वे पदार्थ जो जल में पूरी तरह घुल जाते हैं और अदृश्य हो जाते हैं।
- उदाहरण: शक्कर, नमक, नीला थोथा।
- अविलेय पदार्थ (Insoluble substances): वे पदार्थ जो जल में नहीं घुलते।
- उदाहरण: रेत, चाॅक चूर्ण, कोयला।
परिभाषाएँ:
- विलेय (Solute): वह पदार्थ जो विलायक में घुलता है।
- विलायक (Solvent): वह द्रव जिसमें विलेय घुलता है।
- विलयन (Solution): विलेय के विलायक में घुलने से बना मिश्रण।
क्रियाकलाप 6 (ठोस की घुलनशीलता):
- काँच के गिलासों में पानी लेकर उनमें शक्कर, रेत, नमक, चाॅक चूर्ण डालकर हिलाएँ।
- अवलोकन करने पर: शक्कर और नमक घुल जाते हैं (विलेय), रेत और चाॅक नहीं घुलते (अविलेय)।
द्रवों की जल में विलेयता (मिश्रणीयता):
- मिश्रणीय द्रव (Miscible liquids): वे द्रव जो पानी में पूरी तरह घुल जाते हैं।
- उदाहरण: दूध, नींबू का रस।
- अमिश्रणीय द्रव (Immiscible liquids): वे द्रव जो पानी में नहीं घुलते और अलग परत बना लेते हैं।
- उदाहरण: मिट्टी का तेल, नारियल का तेल।
क्रियाकलाप 7 (द्रव की घुलनशीलता):
- काँच के गिलासों में पानी लेकर उनमें दूध, मिट्टी का तेल, नींबू का रस, नारियल का तेल डालकर हिलाएँ।
- अवलोकन करने पर: दूध और नींबू का रस घुल जाते हैं (मिश्रणीय), मिट्टी का तेल और नारियल का तेल नहीं घुलते (अमिश्रणीय)।
गैसों की जल में विलेयता:
- कुछ गैसें पानी में घुल जाती हैं (जैसे अमोनिया)।
- कुछ गैसें पानी में नहीं घुलतीं (जैसे हाइड्रोजन, नाइट्रोजन)।
- कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऑक्सीजन गैसें पानी में बहुत कम मात्रा में घुलती हैं।
- पानी में घुली हुई ऑक्सीजन ही मछलियों के जीवन का आधार है।
महत्व: पदार्थों की जल में विलेयता का गुण हमारे दैनिक जीवन (जैसे पेय पदार्थ बनाना), उद्योगों और प्रकृति (जैसे जलीय जीवन, पौधों द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण) में महत्वपूर्ण है।
जल को सार्वभौमिक विलायक कहा जाता है क्योंकि यह अधिकांश पदार्थों को घोलने की क्षमता रखता है।
चुंबक के प्रति आकर्षण
कुछ पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, जबकि कुछ नहीं।
- चुंबकीय पदार्थ (Magnetic substances): वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं।
- उदाहरण: लोहा, निकल, कोबाल्ट।
- लोहे की कीलें, आलपिन, कैंची, सेफ्टी पिन आदि।
- अचुंबकीय पदार्थ (Non-magnetic substances): वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होते।
- उदाहरण: लकड़ी, प्लास्टिक, काँच, ऐलुमिनियम, ताँबा, सोना।
- लकड़ी की तीली, प्लास्टिक के बटन, पेंसिल, ऐलुमिनियम का तार आदि।
क्रियाकलाप 8 (चुंबकीय आकर्षण):
- लोहे की कील, प्लास्टिक के बटन, लकड़ी की तीली, आलपिन को एक कागज़ पर फैलाएँ।
- इनके ऊपर चुंबक घुमाने पर, लोहे की कीलें और आलपिन चुंबक से चिपक जाती हैं।
निष्कर्ष: लोहे से बनी वस्तुएँ चुंबक की ओर आकर्षित होती हैं, जबकि लकड़ी और प्लास्टिक जैसी वस्तुएँ नहीं।
चुंबकीय पदार्थ: वे पदार्थ जो चुंबक द्वारा आकर्षित होते हैं। अचुंबकीय पदार्थ: वे पदार्थ जो चुंबक द्वारा आकर्षित नहीं होते हैं।
पारदर्शिता
पारदर्शिता वह गुण है जो बताता है कि कोई पदार्थ प्रकाश को अपने आर-पार कितनी आसानी से जाने देता है।
- पारदर्शी पदार्थ (Transparent substances):
- वे पदार्थ जिनके आर-पार स्पष्ट देखा जा सकता है।
- प्रकाश इनसे पूरी तरह गुजर जाता है।
- उदाहरण: काँच, शुद्ध पानी, हवा, साफ प्लास्टिक।
- अपारदर्शी पदार्थ (Opaque substances):
- वे पदार्थ जिनके आर-पार बिल्कुल नहीं देखा जा सकता।
- प्रकाश इनसे बिल्कुल नहीं गुजर पाता।
- उदाहरण: लकड़ी, पत्थर, दीवार, गत्ता, किताब, धातु।
- पारभासी पदार्थ (Translucent substances):
- वे पदार्थ जिनके आर-पार धुँधला दिखाई देता है।
- प्रकाश इनसे आंशिक रूप से गुजरता है।
- उदाहरण: तेल लगा कागज़, घिसा हुआ काँच, कुछ प्लास्टिक, बटर पेपर।
क्रियाकलाप 9 (पारदर्शिता की जाँच):
- अपनी पुस्तक में लिखे शब्दों पर काँच का खाली गिलास, पानी से भरा गिलास, पत्थर, तेल लगा सफेद कागज़ रखकर आर-पार देखें।
- अवलोकन करने पर:
- काँच का खाली गिलास/पानी से भरा गिलास: स्पष्ट दिखाई देता है (पारदर्शी)।
- पत्थर: दिखाई नहीं देता (अपारदर्शी)।
- तेल लगा सफेद कागज़: धुँधला दिखाई देता है (पारभासी)।
दैनिक जीवन में महत्व:
- पारदर्शी: खिड़कियों, चश्मों, वाहनों की विंडशील्ड में उपयोग।
- अपारदर्शी: दीवारों, दरवाजों, गोपनीयता और सुरक्षा के लिए उपयोग।
- पारभासी: बाथरूम की खिड़कियों, लैंप शेड्स में उपयोग।
पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी पदार्थों के कम से कम दो-दो उदाहरण याद रखें। यह अक्सर छोटे प्रश्नों में पूछा जाता है।
ऊष्मा चालकता
ऊष्मा चालकता पदार्थ का वह गुण है जिससे पता चलता है कि वह ऊष्मा को अपने अंदर से कितनी आसानी से गुजरने देता है।
- ऊष्मा के सुचालक (Good conductors of heat):
- वे पदार्थ जिनमें ऊष्मा एक सिरे से दूसरे सिरे तक आसानी से चली जाती है।
- उदाहरण: सभी धातुएँ (लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, चाँदी)।
- रसोई के बर्तन (तवा, कड़ाही) धातुओं के बने होते हैं ताकि भोजन जल्दी गर्म हो।
- ऊष्मा के कुचालक (Bad conductors of heat / Insulators):
- वे पदार्थ जिनमें ऊष्मा का चालन नहीं होता या बहुत कम होता है।
- उदाहरण: लकड़ी, प्लास्टिक, बैकेलाइट, काँच, वायु।
- रसोई के बर्तनों के हैंडल लकड़ी या प्लास्टिक के बने होते हैं ताकि हाथ न जलें।
क्रियाकलाप 10 (ऊष्मा चालकता):
- गर्म पानी में लकड़ी की छड़ और धातु का चम्मच डालें।
- 2 मिनट बाद दोनों के पानी के बाहर वाले सिरे को छूने पर, धातु का चम्मच गर्म होता है जबकि लकड़ी की छड़ ठंडी रहती है।
निष्कर्ष: धातुएँ ऊष्मा की सुचालक हैं, जबकि लकड़ी ऊष्मा की कुचालक है।
दैनिक जीवन में अनुप्रयोग:
- सर्दियों में कपड़े: सर्दियों में कई पतले कपड़े पहनने पर परतों के बीच की हवा (ऊष्मा की कुचालक) शरीर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देती, जिससे शरीर गर्म रहता है।
- थर्मस बोतल: थर्मस की दीवारों के बीच खाली स्थान (निर्वात या वायु) होता है जो ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देता, जिससे चाय/पानी घंटों गर्म या ठंडा रहता है।
वायु ऊष्मा की कुचालक है।
विद्युत चालकता और विद्युत परिपथ
विद्युत चालकता पदार्थ का वह गुण है जिससे पता चलता है कि वह विद्युत धारा को अपने अंदर से कितनी आसानी से गुजरने देता है।
- विद्युत के सुचालक (Good conductors of electricity):
- वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
- उदाहरण: सभी धातुएँ (ताँबा, ऐलुमिनियम, लोहा), ग्रेफाइट, लवण मिश्रित जल।
- विद्युत तार धातुओं (जैसे ताँबा) के बने होते हैं।
- विद्युत के कुचालक (Bad conductors of electricity / Insulators):
- वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती। इन्हें विद्युत रोधक भी कहते हैं।
- उदाहरण: प्लास्टिक, रबर, लकड़ी, कागज़, कपड़ा, शुद्ध जल।
- विद्युत तारों पर प्लास्टिक का आवरण होता है ताकि हमें करंट न लगे।
क्रियाकलाप 11 (विद्युत चालकता):
- एक साधारण विद्युत परिपथ बनाएँ जिसमें टॉर्च का सेल, तार और बल्ब जुड़ा हो।
- बल्ब जल उठता है $\rightarrow$ तार की धातु विद्युत की सुचालक है।
- बल्ब और सेल के बीच कागज़ का टुकड़ा रखने पर बल्ब नहीं जलता $\rightarrow$ कागज़ विद्युत का कुचालक है।
- इसी प्रकार लकड़ी, कपड़ा (कुचालक) और धातु का सिक्का (सुचालक) रखकर प्रयोग दोहराएँ।
विद्युत सेल:
- विद्युत सेल विद्युत का स्रोत होता है।
- इसमें दो टर्मिनल होते हैं: धनात्मक सिरा (+) (धातु की टोपी) और ऋणात्मक सिरा (-) (धातु की डिस्क)।
- सेल के अंदर रासायनिक पदार्थों से विद्युत उत्पन्न होती है।
विद्युत परिपथ:
- विद्युत सेल के दो टर्मिनल के बीच विद्युत प्रवाह के संपूर्ण पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं।
- विद्युत धारा की दिशा सेल के (+) टर्मिनल से (-) टर्मिनल की ओर होती है।
सुरक्षा सुझाव:
- शुद्ध जल विद्युत का कुचालक होता है, लेकिन लवणों के घुले होने के कारण साधारण पानी सुचालक हो जाता है।
- इसलिए गीले हाथों से विद्युत उपकरणों को नहीं छूना चाहिए।
छात्र अक्सर शुद्ध जल और साधारण जल में अंतर भूल जाते हैं। याद रखें, शुद्ध जल कुचालक है, जबकि साधारण जल (जिसमें लवण घुले होते हैं) सुचालक है।
विसरण
विसरण (Diffusion): किसी गैस या द्रव में किसी अन्य पदार्थ (ठोस, द्रव या गैस) के समान रूप से फैल जाने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को विसरण कहते हैं।
- यह प्रक्रिया कणों की अपनी आंतरिक गतिज ऊर्जा के कारण होती है।
- कण उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर तब तक गति करते हैं, जब तक कि वे पूरे उपलब्ध स्थान में समान रूप से वितरित न हो जाएँ।
- विसरण ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में होता है, लेकिन गैसों में सबसे तेजी से होता है।
- तापमान बढ़ने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे विसरण की दर भी बढ़ जाती है।
क्रियाकलाप 12 (स्याही का जल में विसरण):
- एक गिलास पानी में नीली स्याही की 1-2 बूँदें डालें और स्थिर रहने दें।
- नीली स्याही धीरे-धीरे पूरे पानी में फैलकर उसे नीला कर देती है।
निष्कर्ष: यह नीली स्याही के कणों के पानी में विसरण के कारण होता है।
दैनिक जीवन में उदाहरण:
- कमरे में अगरबत्ती जलाने पर उसकी सुगंध पूरे कमरे में फैल जाती है।
- इत्र की गंध दूर तक फैल जाती है।
- खाना पकने की गंध का हमारे पास पहुँचना।
- पानी में चीनी या नमक का घुलना।
- कचरे के ढेर से निकलती दुर्गंध का दूर से ही अनुभव होना।
विसरण की दर गैसों में सर्वाधिक और ठोसों में सबसे कम होती है।