सजीवों की संरचना तथा कार्य
अध्याय 'सजीवों की संरचना तथा कार्य' पौधों के विभिन्न अंगों जैसे जड़, तना, पत्ती, फूल और फल की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। इसमें बीजों की संरचना, एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री बीजों के बीच अंतर, और जड़ों के प्रकार (रेशेदार और मूसला जड़) को समझाया गया है। छात्र जड़ों, तनों और पत्तियों के रूपांतरणों के बारे में भी सीखते हैं, जो उन्हें विशिष्ट कार्यों जैसे भोजन संग्रह या सहारा प्रदान करने में मदद करते हैं। यह अध्याय प्रकाश संश्लेषण और फूलों के प्रजनन अंगों जैसे महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं को भी कवर करता है, जो छात्रों को पौधों के जीवन चक्र की गहरी समझ प्रदान करता है।
पौधे के विभिन्न अंग एवं उनके कार्य
पौधे, जीवधारियों की तरह ही, विभिन्न प्रकार की क्रियाएँ करते हैं। इन क्रियाओं को करने के लिए पौधों में विशिष्ट अंग होते हैं।
- पौधे के मुख्य अंग: जड़, तना, पत्ती, फूल, फल और बीज।
- ये सभी अंग मिलकर पौधे को जीवित रखते हैं और उसके विकास में मदद करते हैं।
- जड़ तंत्र: यह पौधे का वह भाग है जो प्रायः जमीन के भीतर होता है।
- प्ररोह तंत्र: यह जमीन के ऊपर वाला भाग है, जिसमें तना, शाखाएँ, पत्तियाँ, फूल और फल शामिल होते हैं।
- पौधे के जीवन की शुरुआत बीज से होती है।
[IMAGE: cg_c6_science_ch08_chapter_hero] इस चित्र में पौधे के विभिन्न अंगों को उनके कार्यों सहित दर्शाया गया है।
पौधे के सभी अंग मिलकर एक इकाई के रूप में कार्य करते हैं, जिससे पौधा जीवित रहता है और वृद्धि करता है।
बीजों की रचना
बीज पौधे का वह भाग है जिससे नया पौधा जन्म लेता है। बीजों को उनके बीजपत्रों की संख्या के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
- एकबीजपत्री बीज:
- इनमें केवल एक बीजपत्र होता है।
- यह बीजपत्र भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।
- उदाहरण: गेहूँ, धान, मक्का।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t2_scene1] में एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री बीजों को दर्शाया गया है।
- द्विबीजपत्री बीज:
- इनमें दो बीजपत्र होते हैं।
- ये बीजपत्र भ्रूण के विकास के लिए भोजन संग्रहित करते हैं।
- उदाहरण: मटर, चना, अरहर।
बीज अंकुरण की प्रक्रिया:
- मूलांकुर: बीज से निकलने वाला सफेद भाग जो भूमि की ओर वृद्धि करता है। यह विकसित होकर जड़ बनाता है। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t2_scene2]
- प्रांकुर: बीज का हरा भाग जो मिट्टी से ऊपर की ओर वृद्धि करता है। यह विकसित होकर प्ररोह (तना, पत्तियाँ, फूल, फल एवं बीज) बनाता है। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t2_scene3]
इस प्रकार, पौधों में दो मुख्य तंत्र होते हैं:
- जड़ तंत्र: भूमि के अंदर।
- प्ररोह तंत्र: भूमि के बाहर।
[IMAGE: cg_c6_science_ch08_t2_scene4] यह चित्र जड़ तंत्र और प्ररोह तंत्र को स्पष्ट करता है।
बीजपत्र भ्रूण को शुरुआती पोषण प्रदान करते हैं जब तक कि पौधा अपना भोजन स्वयं बनाना शुरू न कर दे।
जड़ तंत्र
जड़ तंत्र पौधे का वह भाग है जो सामान्यतः भूमि के भीतर होता है और मूलांकुर से विकसित होता है।
जड़ों के प्रकार: पौधों में जड़ तंत्र दो मुख्य प्रकार का होता है:
- रेशेदार जड़ (Fibrous Root):
- एकबीजपत्री पौधों में पाई जाती हैं (जैसे गेहूँ, मक्का)।
- मूलांकुर की वृद्धि कुछ लंबाई के बाद रुक जाती है।
- तने के आधार से अनेक शाखाएँ रेशों की तरह निकलती हैं।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t3_scene1] में रेशेदार जड़ को दर्शाया गया है।
- मूसला जड़ (Tap Root):
- द्विबीजपत्री पौधों में पाई जाती हैं (जैसे चना, मटर)।
- मूलांकुर की वृद्धि लगातार होती रहती है और उससे पार्श्व शाखाएँ निकलती रहती हैं।
- एक मुख्य मोटी जड़ बनती है।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t3_scene1] में मूसला जड़ को दर्शाया गया है।
जड़ों के कार्य:
- स्थिरीकरण: जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं, जिससे पौधे भूमि में सीधे खड़े रहते हैं। पौधे को जड़ से उखाड़ते समय ताकत लगानी पड़ती है।
- अवशोषण: जड़ें मिट्टी से पानी और खनिज लवणों को खींचकर पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाती हैं। इस क्रिया को अवशोषण कहते हैं।
- [IMAGE: plant_water_absorption_fig111] यह चित्र जड़ों द्वारा पानी के अवशोषण को दर्शाता है।
- क्रियाकलाप 5 में लाल स्याही वाले पानी का पत्तियों तक पहुँचना इसी अवशोषण क्रिया का प्रमाण है।
- भोजन संग्रहण: कुछ पौधों में जड़ें भोजन का संग्रहण भी करती हैं (जैसे गाजर, मूली, शकरकंद)। यह जड़ों का रूपांतरण है।
[IMAGE: cg_c6_science_ch08_t3_scene3] विभिन्न पौधों की जड़ों का अवलोकन करके उनके कार्यों को समझा जा सकता है।
रेशेदार जड़ और मूसला जड़ के बीच अंतर बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। उदाहरणों सहित याद रखें।
प्ररोह तंत्र
प्ररोह तंत्र पौधे का वह भाग है जो भूमि के ऊपर होता है। इसमें तना, पत्तियाँ, फूल, फल एवं बीज शामिल होते हैं।
तना:
- तना पौधे का मुख्य भाग है जो ज़मीन के ऊपर बढ़ता है और पौधे को सीधा खड़ा रखने में मदद करता है।
- पर्वसंधि (Node): तने पर वे विशेष स्थान जहाँ से पत्तियाँ, शाखाएँ या फूल निकलते हैं। ये अक्सर फूली हुई गांठों के रूप में दिखाई देती हैं।
- पर्व (Internode): दो लगातार पर्वसंधियों के बीच के तने के हिस्से को पर्व कहते हैं।
- उदाहरण: मक्का, बाँस और गन्ने में पर्वसंधियाँ और पर्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t4_scene1], [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t4_scene2]
तने के कार्य:
- सहारा: तने पौधे को सीधा खड़ा रखने में सहायता करते हैं।
- धारण करना: तने पर टहनियाँ, पत्तियाँ, फूल व फल लगे होते हैं।
- परिवहन (जल व खनिज): तना, जड़ों द्वारा अवशोषित पानी व खनिज लवणों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है। [IMAGE: transportation_in_plants_fig621]
- परिवहन (भोजन): तना, पत्तियों में बनने वाले भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
पर्वसंधि और पर्व तने की पहचान हैं, जो जड़ों में नहीं पाए जाते।
पत्ती की संरचना तथा कार्य
पत्ती पौधे का महत्वपूर्ण अंग है, जो प्रायः हरे रंग की होती है।
पत्ती की संरचना:
- रंग: पत्तियों का हरा रंग क्लोरोफिल नामक पदार्थ के कारण होता है।
- आकृति, रंग, किनारा, सतह, अग्रभाग: विभिन्न पौधों की पत्तियों में ये गुण भिन्न-भिन्न होते हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t5_scene2]
- शिरा विन्यास: पत्तियों पर शिराओं (veins) का एक जाल होता है जो पानी और भोजन के परिवहन में मदद करता है।
पत्तियों के कार्य:
- प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis):
- यह वह प्रक्रिया है जिसमें पत्तियाँ क्लोरोफिल की सहायता से सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड (हवा से) और पानी (जड़ों से) का उपयोग करके अपना भोजन (शर्करा/स्टार्च) बनाती हैं।
- इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन भी उप-उत्पाद के रूप में निकलती है।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t5_scene3] प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को दर्शाता है।
- आवश्यक तत्व: सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड, पानी।
- उत्पाद: भोजन (ग्लूकोज/स्टार्च) और ऑक्सीजन।
- वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पत्तियों की सतह से पानी का वाष्प के रूप में बाहर निकलना। यह पौधे में पानी के खिंचाव को बनाए रखने में मदद करता है।
प्रकाश संश्लेषण का महत्व:
- भोजन का स्रोत: पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जो पूरे खाद्य-तंत्र का आधार है। मानव और जंतु दोनों प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर हैं।
- ऑक्सीजन उत्पादन: पृथ्वी पर अधिकांश ऑक्सीजन पौधों के प्रकाश संश्लेषण से आती है, जो सभी सजीवों के श्वसन के लिए आवश्यक है।
- कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण: पौधे वायुमंडल से CO₂ खींचकर पृथ्वी का तापमान संतुलित रखने में मदद करते हैं।
[IMAGE: cg_c6_science_ch08_t5_scene4] यह चित्र पत्तियों के जीवनदायक महत्व को दर्शाता है।
क्लोरोफिल के कारण ही पत्तियाँ हरे रंग की होती हैं और प्रकाश संश्लेषण कर पाती हैं।
फूल
फूल पौधे का प्रजनन अंग है। विभिन्न प्रकार के फूलों की संरचना में भिन्नता हो सकती है, लेकिन उनके मूल भाग समान होते हैं।
फूल के मुख्य भाग:
- बाह्य दल (Calyx):
- फूल का सबसे बाहर वाला हरा भाग।
- खिलने से पहले फूल की सुरक्षा करता है।
- दल (Corolla):
- रंगीन पंखुड़ियाँ जो बाह्य दलों के बाद दिखाई देती हैं।
- कीट-पतंगों को परागण के लिए आकर्षित करती हैं।
- पुंकेसर (Stamen):
- फूल का नर भाग।
- इसमें एक तंतु (filament) और एक फूले हुए सिरे वाला परागकोश (anther) होता है।
- परागकोश में छोटे-छोटे परागकण (pollen grains) भरे होते हैं।
- स्त्रीकेसर (Pistil):
- फूल का मादा भाग।
- यह फूल के मध्य में सुराही जैसी आकृति का अंग होता है।
- मुख्य भाग:
- अंडाशय (Ovary): स्त्रीकेसर का फूला हुआ निचला भाग, जिसमें बीजांड होते हैं।
- वर्तिका (Style): अंडाशय के ऊपर सुराही की गर्दन जैसी संरचना।
- वर्तिकाग्र (Stigma): वर्तिका का सबसे ऊपर वाला भाग, जो परागकणों को ग्रहण करता है।
[IMAGE: types_of_flowers_based_on_reproductive_organs_fig622] जनन अंगों के आधार पर पुष्पों के प्रकार को दर्शाता है।
फूलों के प्रकार (जनन अंगों के आधार पर):
- द्विलिंगी फूल (Bisexual Flower): ऐसे फूल जिनमें स्त्रीकेसर और पुंकेसर दोनों एक ही फूल में पाए जाते हैं (जैसे गुड़हल, सरसों)।
- एकलिंगी फूल (Unisexual Flower): ऐसे फूल जिनमें केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर पाया जाता है (जैसे मक्का, पपीता)।
[IMAGE: cg_c6_science_ch08_t6_scene1] यह बीज से पौधे के जन्म की प्रक्रिया को दर्शाता है।
परागण (Pollination): परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण कहलाता है। यह प्रजनन की पहली सीढ़ी है।
फल
फल, फूल के अंडाशय से विकसित होते हैं।
- परागण और निषेचन के बाद, फूल का अंडाशय बड़ा होकर फल में बदल जाता है।
- फल के अंदर बीज होते हैं।
- कार्य:
- फल बीजों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- जानवरों द्वारा खाए जाने पर बीजों को दूर-दूर तक फैलाने में मदद करते हैं, जिससे पौधे की प्रजाति का फैलाव होता है।
- उदाहरण: आम, इमली, बेर, पपीता आदि।
[IMAGE: cg_c6_science_ch08_t7_scene4] यह फल के विकास की प्रक्रिया को दर्शाता है।
बीज नए पौधे को जन्म देते हैं और उनमें शिशु पौधे के लिए भोजन संग्रहित होता है।
पौधों में रूपान्तरण
जब पौधे के किसी अंग को सामान्य कार्य के अलावा अन्य कार्य भी करने पड़ते हैं, तो वे अपने मूल स्वरूप और कार्य में बदलाव कर लेते हैं। ऐसे अंगों को रूपांतरित अंग कहते हैं। ये रूपांतरण पौधे को जीवित रहने और पनपने में मदद करते हैं।
जड़ों के रूपांतरण: जड़ें सामान्यतः पानी और खनिज लवणों का अवशोषण करती हैं और पौधे को सहारा देती हैं, लेकिन कुछ पौधों में ये अतिरिक्त कार्य भी करती हैं।
- भोजन संग्रहण के लिए रूपांतरण:
- कुछ जड़ें भोजन का संग्रह करती हैं, जिससे वे मोटी और मांसल हो जाती हैं।
- उदाहरण: गाजर, मूली, शलजम, शकरकंद। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t8_scene3] में इन जड़ों को दर्शाया गया है।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t8_scene2] में जड़ों के रूपांतरण के उदाहरण दिए गए हैं।
- सहारा देने के लिए रूपांतरण:
- स्तंभ जड़ें (Prop Roots): बरगद के पेड़ में शाखाओं से नीचे की ओर लटकती हुई जड़ें निकलती हैं, जो जमीन में घुसकर शाखाओं को अतिरिक्त सहारा देती हैं।
- अवस्तंभ जड़ें (Stilt Roots): गन्ना, मक्का, केवड़ा में तने के निचले भाग से जड़ें निकलती हैं जो पौधे को सहारा प्रदान करती हैं।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t8_scene2] में बरगद और मक्के की जड़ों को दर्शाया गया है।
रूपांतरण का महत्व:
- अतिरिक्त सहारा: तेज़ हवाओं या भारीपन से पौधे को टूटने से बचाना।
- भोजन का संग्रहण: प्रतिकूल परिस्थितियों में पौधे के लिए भोजन का भंडार।
- पर्यावरणीय अनुकूलन: पौधे को विभिन्न पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाना।
रूपांतरित जड़ों के उदाहरण और उनके कार्य अक्सर पूछे जाते हैं। गाजर, मूली, बरगद, गन्ना के उदाहरण याद रखें।
तनों के रूपांतरण
कुछ पौधों में तने अपने सामान्य कार्यों (सहारा, परिवहन) के अलावा विशेष कार्य करने के लिए रूपांतरित हो जाते हैं।
- भोजन संग्रहण के लिए भूमिगत तने:
- ये तने जमीन के अंदर पाए जाते हैं, लेकिन इनमें पर्वसंधियाँ, पर्व, शल्कपत्र व कलिकाएँ पाई जाती हैं, जो जड़ों में नहीं होतीं।
- ये भोजन का संग्रह करते हैं।
- उदाहरण: आलू (कंद), अदरक (प्रकंद), अरबी (घनकंद), प्याज (शल्ककंद)।
- आलू में पाए जाने वाले गड्ढे (आँख) वास्तव में कलिकाएँ होती हैं, जिनसे नया पौधा उग सकता है।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t9_scene1] में तने के रूपांतरण को दर्शाया गया है।
- सहारे के लिए प्रतान (Tendrils):
- कुछ कमजोर तने वाले पौधों में, तने के कुछ भाग पतले, कुंडलित धागे जैसी संरचनाओं में रूपांतरित हो जाते हैं जिन्हें प्रतान कहते हैं।
- ये प्रतान किसी सहारे से लिपटकर तने को ऊपर चढ़ने में सहायता करते हैं।
- उदाहरण: लौकी, ककड़ी, अंगूर। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t9_scene1] में लौकी की बेल के प्रतान दिखाए गए हैं।
- जल संग्रहण और प्रकाश संश्लेषण के लिए रूपांतरण:
- उदाहरण: नागफनी (कैक्टस)।
- इसका तना हरा, मोटा व गूदेदार होता है और पानी का संग्रहण करता है।
- यह तना प्रकाश संश्लेषण का कार्य भी करता है, क्योंकि इसकी पत्तियाँ काँटों में रूपांतरित हो जाती हैं।
महत्व: ये रूपांतरण पौधों को प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने और भोजन, पानी या सहारे की आवश्यकता को पूरा करने में मदद करते हैं।
आलू, अदरक, प्याज को अक्सर जड़ मान लिया जाता है, लेकिन इनमें पर्वसंधि और कलिकाएँ होने के कारण ये रूपांतरित तने हैं।
पत्तियों का रूपांतरण
जड़ों तथा तनों की भांति पत्तियाँ भी कुछ विशेष कार्य के लिए रूपांतरित होती हैं।
- सहारे के लिए प्रतान:
- कुछ पौधों में पत्ती का अंतिम भाग या पूरा पत्ता प्रतान के रूप में रूपांतरित हो जाता है।
- ये प्रतान कमजोर तने वाले पौधों को ऊपर चढ़ने में सहायता प्रदान करते हैं।
- उदाहरण: मटर का पौधा। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t10_scene2] में मटर के प्रतान दिखाए गए हैं।
- सुरक्षा और वाष्पोत्सर्जन कम करने के लिए काँटे (Spines):
- कुछ पौधों में पत्तियाँ नुकीले काँटों में बदल जाती हैं।
- कार्य:
- पौधों को शाकाहारी जानवरों से सुरक्षा प्रदान करना।
- वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी के नुकसान को कम करना, विशेषकर शुष्क वातावरण में।
- उदाहरण: नागफनी (Opuntia)।
- नागफनी में पत्तियाँ काँटों में रूपांतरित होती हैं और हरा मांसल भाग रूपांतरित तना होता है जो पानी का संग्रहण करता है। [IMAGE: cg_c6_science_ch08_t10_scene3]
महत्व: पत्तियों के रूपांतरण पौधे को विशेष पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाते हैं और उनके अस्तित्व को सुनिश्चित करते हैं।
मटर में प्रतान पत्ती का रूपांतरण है, जबकि लौकी/ककड़ी में प्रतान तने का रूपांतरण है। इस अंतर को याद रखें।