प्रकाश
अध्याय 'प्रकाश' छात्रों को प्रकाश की मूल अवधारणाओं से परिचित कराता है। इसमें प्रकाश के प्राकृतिक और कृत्रिम स्रोतों, प्रकाश के सीधी रेखा में चलने के सिद्धांत, छाया के निर्माण (प्रच्छाया और उपच्छाया), चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या, और प्रकाश के परावर्तन जैसी घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह अध्याय छात्रों को दैनिक जीवन में प्रकाश के महत्व और उसके व्यवहार को समझने में मदद करता है।
प्रकाश के स्रोत
प्रकाश के स्रोत वे वस्तुएँ हैं जो स्वयं प्रकाश उत्पन्न करती हैं। इनके बिना हम वस्तुओं को नहीं देख सकते।
- प्रकाश स्रोत के प्रकार:
- प्राकृतिक स्रोत: वे स्रोत जो प्रकृति में स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं और मानव हस्तक्षेप के बिना प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
- उदाहरण: सूर्य, तारे, जुगनू (कीट), कुछ समुद्री जीव (बायोलुमिनिसेंस)।
- मानव निर्मित (कृत्रिम) स्रोत: वे स्रोत जिन्हें मनुष्यों ने अपनी आवश्यकताओं के लिए बनाया है।
- उदाहरण: मोमबत्ती, लालटेन, टॉर्च, विद्युत बल्ब, ट्यूबलाइट, दीपक।
- प्रकाश का महत्व:
- वस्तुओं को देखने के लिए प्रकाश अनिवार्य है।
- जब प्रकाश किसी वस्तु से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचता है, तभी हम उस वस्तु को देख पाते हैं।
- प्रकाश की चाल:
- वायु या निर्वात में प्रकाश की चाल लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड (3 x 10^8 मीटर प्रति सेकंड) होती है।
- यह गति इतनी तीव्र है कि हम बल्ब जलाने और उसके प्रकाश को दीवार तक पहुँचने के बीच के समय को नोट नहीं कर पाते।
- सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश को पहुँचने में लगभग 8 मिनट का समय लगता है।
- पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी वस्तुएँ:
- पारदर्शी वस्तुएँ: वे वस्तुएँ जिनसे प्रकाश आसानी से आर-पार निकल जाता है। उदाहरण: काँच, शुद्ध जल, वायु।
- अपारदर्शी वस्तुएँ: वे वस्तुएँ जिनसे प्रकाश बिल्कुल भी आर-पार नहीं निकल पाता। उदाहरण: लकड़ी, पत्थर, धातु, दीवार।
- पारभासी वस्तुएँ: वे वस्तुएँ जिनसे प्रकाश आंशिक रूप से आर-पार निकल पाता है। उदाहरण: घिसा हुआ काँच, तेलयुक्त कागज, बादल।
[IMAGE: cg_c6_science_ch12_t1_scene1] [IMAGE: cg_c6_science_ch12_t1_scene2]
प्रकाश की चाल ब्रह्मांड में सबसे अधिक होती है। यह लगभग \(3 \times 10^8\) मीटर प्रति सेकंड है।
प्रकाश स्रोत: वे वस्तुएँ जो स्वयं प्रकाश उत्पन्न करती हैं।
क्या प्रकाश सीधी रेखा में चलता है ?
प्रकाश का सीधी रेखा में गमन करना एक मूलभूत गुण है जिसे प्रकाश का ऋजुरेखीय संचरण कहते हैं।
- प्रयोग द्वारा पुष्टि:
- क्रियाकलाप 2 (माचिस की डिब्बियों का प्रयोग):
- जब तीन माचिस की डिब्बियों के छेद एक सीधी रेखा में होते हैं, तो मोमबत्ती की लौ दिखाई देती है।
- यदि छेद सीधी रेखा में न हों, तो मोमबत्ती की लौ दिखाई नहीं देती।
- निष्कर्ष: यह सिद्ध करता है कि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है।
- पिनहोल कैमरा:
- पिनहोल कैमरा प्रकाश के सीधी रेखा में चलने के सिद्धांत पर कार्य करता है।
- इसमें एक छोटे छिद्र (पिनहोल) से प्रकाश अंदर आता है और पर्दे पर वस्तु का उल्टा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
- प्रकाश के सीधी रेखा में चलने के कारण ही प्रतिबिंब उल्टा बनता है।
- प्रकाश की चाल का महत्व:
- प्रकाश की अत्यधिक चाल (लगभग 3 लाख किमी/सेकंड) के कारण ही हमें लगता है कि प्रकाश तुरंत पहुँच जाता है।
- सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश को पहुँचने में 8 मिनट लगते हैं, यह दूरी प्रकाश की चाल से तय होती है।
[IMAGE: light_travels_in_a_straight_line_fig516]
प्रकाश का ऋजुरेखीय संचरण: प्रकाश का सीधी रेखा में गमन करना।
प्रकाश के सीधी रेखा में चलने के सिद्धांत पर आधारित उपकरणों के उदाहरण याद रखें, जैसे पिनहोल कैमरा।
छाया का बनना
छाया तब बनती है जब प्रकाश के मार्ग में कोई अपारदर्शी वस्तु आ जाती है।
- छाया बनने की शर्तें:
- प्रकाश का स्रोत: प्रकाश उत्पन्न करने वाली कोई वस्तु।
- अपारदर्शी वस्तु: प्रकाश के मार्ग को रोकने वाली वस्तु।
- पर्दा या सतह: जिस पर छाया बने।
- छाया की विशेषताएँ:
- छाया हमेशा अपारदर्शी वस्तु के पीछे बनती है।
- छाया का आकार और स्थिति प्रकाश स्रोत की स्थिति और वस्तु की दूरी पर निर्भर करती है।
- छाया हमेशा काली होती है, चाहे वस्तु का रंग कुछ भी हो, क्योंकि यह प्रकाश की अनुपस्थिति का क्षेत्र है।
- छाया वस्तु की आकृति का आभासी रूप होती है, न कि उसकी वास्तविक छवि।
- छाया की लंबाई में परिवर्तन (क्रियाकलाप 5 - छड़ का प्रयोग):
- सुबह और शाम: सूर्य क्षितिज के पास होता है, प्रकाश किरणें तिरछी आती हैं, इसलिए छाया लंबी बनती है।
- दोपहर: सूर्य सिर के ठीक ऊपर होता है, प्रकाश किरणें सीधी आती हैं, इसलिए छाया सबसे छोटी बनती है।
- निष्कर्ष: छाया की लंबाई और स्थिति प्रकाश स्रोत की स्थिति पर निर्भर करती है।
[IMAGE: shadow_formation_figp51] [IMAGE: cg_c6_science_ch12_t3_scene2] [IMAGE: cg_c6_science_ch12_t3_scene3]
छाया का रंग हमेशा काला होता है, क्योंकि यह प्रकाश की अनुपस्थिति का क्षेत्र है।
छाया वस्तु का प्रतिबिंब नहीं होती, बल्कि यह प्रकाश के मार्ग में अवरोध के कारण बनने वाला अंधेरे का क्षेत्र है।
प्रच्छाया और उपच्छाया
जब प्रकाश का स्रोत बड़ा होता है या वस्तु प्रकाश स्रोत के बहुत करीब होती है, तो छाया के दो भाग बनते हैं: प्रच्छाया और उपच्छाया।
- प्रच्छाया (Umbra):
- यह छाया का केंद्रीय, सबसे गहरा और सबसे काला भाग होता है।
- इस क्षेत्र में प्रकाश स्रोत से कोई भी प्रकाश किरण नहीं पहुँच पाती।
- यह वस्तु की स्पष्ट और पूर्ण छाया होती है।
- उपच्छाया (Penumbra):
- यह छाया का बाहरी, हल्का और धुंधला भाग होता है।
- इस क्षेत्र में प्रकाश स्रोत के कुछ भागों से प्रकाश पहुँच पाता है, जबकि कुछ भागों से नहीं।
- यह प्रच्छाया के चारों ओर बनती है।
- प्रच्छाया और उपच्छाया का बनना:
- यह घटना तब अधिक स्पष्ट होती है जब प्रकाश स्रोत बिंदु स्रोत न होकर विस्तृत स्रोत होता है।
- बड़े प्रकाश स्रोत से आने वाली किरणें वस्तु के किनारों से मुड़कर आंशिक रूप से कुछ क्षेत्रों तक पहुँचती हैं, जिससे उपच्छाया बनती है।
[IMAGE: cg_c6_science_ch12_chapter_hero] (छाया निर्माण खंड में प्रच्छाया और उपच्छाया का उदाहरण देखें)
प्रच्छाया: छाया का वह केंद्रीय, गहरा भाग जहाँ प्रकाश बिल्कुल नहीं पहुँचता। उपच्छाया: छाया का वह बाहरी, धुंधला भाग जहाँ प्रकाश आंशिक रूप से पहुँचता है।
ग्रहण
ग्रहण खगोलीय घटनाएँ हैं जो तब होती हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, जिससे एक खगोलीय पिंड दूसरे की छाया में आ जाता है।
- चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse):
- कब होता है: पूर्णिमा की रात को।
- स्थिति: जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं और पृथ्वी बीच में होती है।
- प्रक्रिया: पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का कुछ या पूरा भाग अदृश्य हो जाता है।
- प्रकार:
- पूर्ण चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की प्रच्छाया में आ जाता है।
- खंड चंद्र ग्रहण (आंशिक): जब चंद्रमा का केवल कुछ भाग पृथ्वी की प्रच्छाया में आता है या वह उपच्छाया से गुजरता है।
- देखना: चंद्र ग्रहण को नंगी आँखों से देखना सुरक्षित होता है।
- प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता: चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा के सापेक्ष लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। इसलिए, हर पूर्णिमा को सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में नहीं आ पाते।
- सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse):
- कब होता है: अमावस्या के दिन को।
- स्थिति: जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होते हैं और चंद्रमा बीच में होता है।
- प्रक्रिया: चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे पृथ्वी के कुछ भागों से सूर्य दिखाई नहीं देता।
- प्रकार:
- पूर्ण सूर्य ग्रहण: जब पृथ्वी का कोई क्षेत्र चंद्रमा की प्रच्छाया में आता है और सूर्य पूरी तरह ढक जाता है।
- खंड सूर्य ग्रहण (आंशिक): जब पृथ्वी का कोई क्षेत्र चंद्रमा की उपच्छाया में आता है और सूर्य आंशिक रूप से ढक जाता है।
- देखना: सूर्य ग्रहण को सीधे आँखों से देखना अत्यंत हानिकारक हो सकता है और स्थायी अंधापन भी हो सकता है। इसे देखने के लिए विशेष ग्रहण चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्टर का उपयोग करना चाहिए।
[IMAGE: solar_eclipse_fig55] [IMAGE: cg_c6_science_ch12_t5_scene2] [IMAGE: cg_c6_science_ch12_t5_scene4]
सूर्य ग्रहण को सीधे आँखों से देखना रेटिना को गंभीर क्षति पहुँचा सकता है। हमेशा सुरक्षित विधियों का उपयोग करें।
चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को और सूर्य ग्रहण अमावस्या को होता है।
प्रकाश का परावर्तन
प्रकाश का परावर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश किरणें किसी चमकदार सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाती हैं।
- परावर्तन की घटना:
- जब प्रकाश किसी चमकदार सतह (जैसे दर्पण) पर पड़ता है, तो उसकी दिशा बदल जाती है।
- इसी दिशा परिवर्तन के कारण हम दर्पण में अपना चेहरा देख पाते हैं।
- स्थिर जल की सतह भी दर्पण की तरह कार्य करती है और प्रकाश को परावर्तित करती है, जिससे हमें उसमें प्रतिबिंब दिखाई देते हैं।
- परावर्तन के नियम (कक्षा 6 के स्तर पर):
- नियम 1: आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
- नियम 2: आपतन कोण (i) हमेशा परावर्तन कोण (r) के बराबर होता है (\( \angle i = \angle r \) )।
- परावर्तन के लिए आवश्यक सतह:
- सतह चमकीली और चिकनी होनी चाहिए।
- उदाहरण: समतल दर्पण, पॉलिश की हुई धातु की सतह, शांत जल की सतह।
- क्रियाकलाप 6 (झिर्री वाले दर्पण का प्रयोग):
- झिर्री से आने वाली प्रकाश की किरणें समतल दर्पण से टकराकर अपनी दिशा बदल देती हैं।
- यह दर्शाता है कि चमकदार सतहें प्रकाश को परावर्तित करती हैं।
[IMAGE: reflection_of_light_fig614] [IMAGE: angles_in_light_reflection_fig82]
प्रकाश का परावर्तन: प्रकाश का किसी चमकदार सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाना।
समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिंब आभासी, सीधा और पार्श्व परिवर्तित होता है (बायाँ भाग दायाँ और दायाँ भाग बायाँ दिखाई देता है)।