चुंबकत्व
अध्याय 'चुंबकत्व' छात्रों को चुंबक के मूलभूत सिद्धांतों से परिचित कराता है। इसमें चुंबक की खोज, प्राकृतिक और कृत्रिम चुंबकों के प्रकार, चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ, चुंबक के गुण जैसे आकर्षण-प्रतिकर्षण, ध्रुवों का युग्म में होना, चुंबकीय प्रेरण, और चुंबकत्व का नष्ट होना शामिल है। यह अध्याय पृथ्वी के चुंबकत्व और दैनिक जीवन में चुंबक के विभिन्न उपयोगों पर भी प्रकाश डालता है, जिससे छात्रों को वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने और उन्हें वास्तविक दुनिया से जोड़ने में मदद मिलती है।
चुंबकत्व
चुंबकत्व वह गुण है जिसके कारण कोई पदार्थ लोहे और लोहे से बनी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
- चुंबक की खोज:
- लगभग 2000 वर्ष पूर्व एशिया माइनर (वर्तमान तुर्की) के मैग्नेशिया गाँव में मैग्नस नामक चरवाहे ने की।
- उसने देखा कि उसकी छड़ी के लोहे के सिरे और जूतों की कीलें एक काले पत्थर से चिपक रही थीं।
- इस पत्थर को बाद में मैग्नेटाइट कहा गया, जो लोहे का अयस्क है।
- लोड-स्टोन (Lodestone):
- मैग्नेटाइट का प्राकृतिक रूप, जिसे धागे से लटकाने पर यह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
- इसलिए इसे "लीडिंग-स्टोन" या "लोड-स्टोन" (दिशा सूचक पत्थर) कहा गया।
- चीन के लोगों ने 12वीं शताब्दी में इसका उपयोग दिशा ज्ञान के लिए किया।
- चुंबक: वह पदार्थ जो लोहे और लोहे से बनी वस्तुओं को आकर्षित करता है।
- चुंबकत्व: चुंबक का वह गुण जिसके कारण वह चुंबकीय पदार्थों को आकर्षित करता है।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_t1_scene1] मैग्नस और रहस्यमयी पत्थर की कहानी।
मैग्नेटाइट (Fe₃O₄) एक प्राकृतिक चुंबक है।
प्राकृतिक एवं कृत्रिम चुंबक
चुंबकों को उनके स्रोत के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
प्राकृतिक चुंबक
- परिभाषा: वे चुंबक जो प्रकृति में स्वतंत्र रूप से पाए जाते हैं।
- उदाहरण: मैग्नेटाइट (लौह अयस्क), कुछ अन्य चट्टानें, अयस्क, उल्कापिंड।
- विशेषताएँ:
- चुंबकत्व कम होता है।
- अधिक शक्तिशाली नहीं होते।
- आकार अनियमित होता है।
- कम टिकाऊ और भंगुर होते हैं।
- प्रायोगिक कार्यों के लिए कम उपयोगी।
कृत्रिम चुंबक
- परिभाषा: वे चुंबक जिन्हें कृत्रिम विधियों द्वारा बनाया जाता है।
- निर्माण: स्टील, कोबाल्ट-स्टील, निकैल-स्टील, या ऐलुमिनियम-निकैल-कोबाल्ट मिश्रधातु (एल्निको) से बनाए जाते हैं। आजकल फैराइट का भी उपयोग होता है।
- विशेषताएँ:
- चुंबकत्व अधिक और शक्तिशाली होता है।
- आकार और आकृति निश्चित होती है।
- दीर्घकाल तक चुंबकत्व बना रहता है (स्थायी चुंबक)।
- विभिन्न उपयोगों के लिए सुविधाजनक।
- आकृति के आधार पर कृत्रिम चुंबकों के प्रकार:
- दंड चुंबक (Bar Magnet): आयताकार या बेलनाकार छड़ की आकृति के।
- नाल चुंबक (Horse-shoe Magnet): घोड़े के नाल के आकार में मुड़ा हुआ।
- यू-आकार का चुंबक (U-shaped Magnet): दंड चुंबक को 'U' आकार में मोड़ने पर।
- गोलांत चुंबक (Spherical Magnet): पतला छड़ चुंबक जिसके सिरे गोलाकार होते हैं।
- चुंबकीय सुई (Magnetic Needle): पतली, चपटी स्टील की पट्टी जो बीच में चौड़ी और सिरों पर नुकीली होती है, एक कील पर स्वतंत्रतापूर्वक घूमती है।
- चुंबकीय कम्पास (Magnetic Compass): डिबिया में बंद छोटी चुंबकीय सुई, दिशा ज्ञान के लिए उपयोग।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_chapter_hero] विभिन्न प्रकार के चुंबक।
कृत्रिम चुंबक प्राकृतिक चुंबकों से अधिक शक्तिशाली, टिकाऊ और उपयोगी होते हैं।
चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ
पदार्थों को चुंबक के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
चुंबकीय पदार्थ
- परिभाषा: वे पदार्थ जो चुंबक द्वारा आकर्षित होते हैं और जिन्हें चुंबक बनाया जा सकता है।
- उदाहरण: लोहा, कोबाल्ट, निकैल और इनकी मिश्र धातुएँ (जैसे स्टील)।
- पहचान क्रियाकलाप:
- विभिन्न वस्तुएँ (लोहे की कील, ब्लेड) लें।
- एक शक्तिशाली चुंबक को बारी-बारी से प्रत्येक वस्तु के पास लाएँ।
- जो वस्तुएँ चुंबक से चिपक जाएँ, वे चुंबकीय पदार्थ हैं।
अचुंबकीय पदार्थ
- परिभाषा: वे पदार्थ जो न तो चुंबक द्वारा आकर्षित होते हैं और न ही जिन्हें कृत्रिम विधियों द्वारा चुंबक बनाया जा सकता है।
- उदाहरण: ताँबा, ऐलुमिनियम, सल्फर, कार्बन, रुई, लकड़ी, कागज, रबर, काँच, प्लास्टिक।
- पहचान क्रियाकलाप:
- विभिन्न वस्तुएँ (प्लास्टिक स्ट्रॉ, लकड़ी का गुटका, रबर बैंड) लें।
- एक शक्तिशाली चुंबक को बारी-बारी से प्रत्येक वस्तु के पास लाएँ।
- जो वस्तुएँ चुंबक से न चिपकें, वे अचुंबकीय पदार्थ हैं।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_t3_scene3] चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों की पहचान का क्रियाकलाप। [IMAGE: objects_attracted_by_a_magnet_figp54] चुंबक द्वारा आकर्षित वस्तुएँ। [IMAGE: non_magnetic_substance_sheeps_fur_fig136] अचुंबकीय पदार्थ: भेड़ की ऊन।
परीक्षा में चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों के उदाहरण अक्सर पूछे जाते हैं। कम से कम तीन-चार उदाहरण याद रखें।
चुंबक के गुण
चुंबक कई विशिष्ट गुण प्रदर्शित करता है जो इसे अन्य पदार्थों से अलग करते हैं:
- आकर्षण का गुण:
- चुंबक चुंबकीय पदार्थों (लोहा, निकैल, कोबाल्ट) को अपनी ओर आकर्षित करता है।
- यह आकर्षण बल चुंबक के ध्रुवों पर सर्वाधिक होता है और मध्य में सबसे कम।
- चुंबकीय ध्रुव: चुंबक के सिरे जहाँ आकर्षण शक्ति सबसे अधिक होती है। प्रत्येक चुंबक में दो ध्रुव होते हैं - उत्तरी ध्रुव (N) और दक्षिणी ध्रुव (S)।
[IMAGE: iron_filings_on_a_bar_magnet_fig73] छड़ चुंबक पर लोहे का बुरादा। [IMAGE: magnet_attracting_iron_nails_fig56] चुंबक द्वारा लोहे की कीलों को आकर्षित करना।
- दैशिक गुण (Directional Property):
- जब एक चुंबक को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाया जाता है (उसके गुरुत्व केंद्र से), तो वह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ही ठहरता है।
- जो सिरा उत्तर दिशा में ठहरता है, वह उत्तरी ध्रुव (N-pole) कहलाता है।
- जो सिरा दक्षिण दिशा में ठहरता है, वह दक्षिणी ध्रुव (S-pole) कहलाता है।
- यह गुण दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है (जैसे कम्पास में)।
[IMAGE: freely_suspended_lodestone_fig113d] स्वतंत्र रूप से लटके हुए लोडस्टोन का दैशिक गुण।
- आकर्षण और प्रतिकर्षण का गुण (Interaction between Poles):
- समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं (N-N या S-S)।
- असमान ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं (N-S)।
- यह चुंबकत्व का एक महत्वपूर्ण नियम है।
[IMAGE: magnetic_attraction_and_repulsion_fig113c] चुंबकीय आकर्षण और प्रतिकर्षण।
- ध्रुवों का युग्म में होना (Poles always exist in pairs):
- चुंबक के ध्रुवों को कभी भी अलग नहीं किया जा सकता।
- यदि किसी चुंबक को कितने भी टुकड़ों में काटा जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा अपने आप में एक पूर्ण चुंबक बन जाता है, जिसमें हमेशा एक उत्तरी ध्रुव और एक दक्षिणी ध्रुव होता है।
- यह दर्शाता है कि चुंबकत्व पदार्थ के आणविक स्तर तक मौजूद होता है।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_t4_scene2] हर टुकड़ा एक पूर्ण चुंबक। [IMAGE: cg_c6_science_ch13_t4_scene3] परमाणु स्तर पर चुंबकत्व।
प्रतिकर्षण ही चुंबकत्व की सही पहचान है, क्योंकि चुंबक चुंबकीय पदार्थ को आकर्षित भी करता है और विपरीत ध्रुव को भी। लेकिन प्रतिकर्षण केवल समान ध्रुवों के बीच ही होता है।
चुंबकीय प्रेरण
चुंबकीय प्रेरण वह प्रक्रिया है जिसमें एक चुंबकीय पदार्थ को चुंबक के समीप रखने पर उसमें अस्थायी चुंबकत्व उत्पन्न हो जाता है। चुंबक हटा लेने पर यह चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
- प्रेरक चुंबक: वह चुंबक जिसके कारण प्रेरण की क्रिया होती है।
- प्रेरण के नियम:
- प्रेरक चुंबक के समीप वाले सिरे पर विजातीय ध्रुव (विपरीत ध्रुव) उत्पन्न होता है, और दूर वाले सिरे पर सजातीय ध्रुव (समान ध्रुव) उत्पन्न होता है।
- प्रेरित चुंबकत्व की मात्रा प्रेरक चुंबक की शक्ति पर निर्भर करती है।
- प्रेरित चुंबकत्व की मात्रा चुंबक के ध्रुव के समीप अधिक और दूर रहने पर कम होती है।
- कीलों की श्रृंखला का प्रयोग:
- एक शक्तिशाली चुंबक से एक कील चिपकाएँ।
- इस कील के स्वतंत्र सिरे से दूसरी कील चिपकाएँ, फिर तीसरी, इस प्रकार कीलों की एक श्रृंखला बन जाएगी।
- यह दर्शाता है कि प्रत्येक कील अस्थायी रूप से चुंबकित हो गई है (प्रेरण के कारण)।
- चुंबक हटाने पर सभी कीलें गिर जाती हैं, क्योंकि उनका अस्थायी चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_t5_scene1] कीलों की श्रृंखला — चुंबकीय प्रेरण का प्रयोग। [IMAGE: cg_c6_science_ch13_t5_scene2] चुंबकीय प्रेरण के 3 नियम।
- चुंबकीय क्षेत्र: चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ तक उसके चुंबकत्व का प्रभाव महसूस किया जा सकता है।
चुंबकीय प्रेरण द्वारा उत्पन्न चुंबकत्व अस्थायी होता है।
चुंबकीय पदार्थ को चुंबक बनाना
चुंबकीय पदार्थों (जैसे लोहा, स्टील) को कृत्रिम विधियों द्वारा चुंबक बनाया जा सकता है। एक सामान्य विधि है रगड़ विधि।
- रगड़ विधि द्वारा चुंबक बनाना:
- एक नरम लोहे की पट्टी (या सुई) को लकड़ी के टेबल पर रखें।
- एक शक्तिशाली चुंबक का एक ध्रुव (जैसे उत्तरी ध्रुव) लें।
- चुंबक के उस ध्रुव को लोहे की पट्टी के एक सिरे पर रखें।
- चुंबक को पट्टी के दूसरे सिरे तक एक ही दिशा में रगड़ते हुए ले जाएँ।
- पट्टी के सिरे से चुंबक को हवा में उठाकर वापस प्रारंभिक बिंदु पर लाएँ।
- इस प्रक्रिया को कई बार (लगभग 30-40 बार) दोहराएँ।
- महत्वपूर्ण: रगड़ने वाले चुंबक का ध्रुव और रगड़ने की दिशा बदलनी नहीं चाहिए।
- परीक्षण: चुंबकित हुई पट्टी को लोहे के बुरादे के पास लाएँ या किसी कम्पास सुई के पास लाएँ। यदि वह चुंबकित हो गई है, तो वह बुरादे को आकर्षित करेगी और कम्पास सुई को विक्षेपित करेगी।
- ध्रुवों का निर्धारण: जिस सिरे से रगड़ना शुरू किया था, वह रगड़ने वाले चुंबक के विपरीत ध्रुव वाला ध्रुव बन जाता है। (जैसे यदि N-ध्रुव से रगड़ा तो वह सिरा S-ध्रुव बनेगा, और दूसरा सिरा N-ध्रुव बनेगा)।
- कारण (डोमेन का संरेखण): चुंबकीय पदार्थों में छोटे-छोटे चुंबकीय क्षेत्र होते हैं जिन्हें डोमेन कहते हैं। सामान्य अवस्था में ये डोमेन अव्यवस्थित होते हैं। जब चुंबक से रगड़ा जाता है, तो ये डोमेन एक ही दिशा में संरेखित हो जाते हैं, जिससे पदार्थ में शुद्ध चुंबकत्व उत्पन्न होता है।
[IMAGE: making_a_needle_into_a_magnet_fig1211] सुई को चुंबक बनाने की प्रक्रिया। [IMAGE: cg_c6_science_ch13_t6_scene4] रगड़ से चुंबकत्व क्यों आता है — डोमेन का संरेखण।
चुंबक बनाते समय रगड़ने की दिशा या ध्रुव बदलने से चुंबकत्व उत्पन्न नहीं होगा या अनियमित होगा।
अचुंबकीय माध्यम के पार चुंबक का प्रभाव
चुंबक का प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों (जैसे लकड़ी, कागज, काँच, प्लास्टिक) के आर-पार भी बना रहता है।
- क्रियाकलाप:
- एक ड्राइंग पेपर पर लोहे का बुरादा फैलाएँ।
- पेपर के नीचे एक चुंबक रखें और उसे घुमाएँ। लोहे का बुरादा चुंबक के साथ घूमेगा।
- अब चुंबक और लोहे के बुरादे के बीच लकड़ी का टुकड़ा, काँच की शीट या कोई अन्य अचुंबकीय पदार्थ रखें।
- चुंबक को फिर से घुमाएँ। आप देखेंगे कि लोहे का बुरादा अभी भी चुंबक के साथ घूमता है।
- निष्कर्ष: यह दर्शाता है कि अचुंबकीय माध्यम चुंबकीय क्षेत्र को अवरुद्ध नहीं करते हैं, और चुंबक का प्रभाव उनके पार भी काम करता है।
[IMAGE: motion_caused_by_a_magnet_fig510] चुंबक द्वारा गति (अचुंबकीय माध्यम के पार)। [IMAGE: cg_c6_science_ch13_t7_scene2] क्रियाकलाप 8: ड्राइंग पेपर पर लोहे का बुरादा।
चुंबकीय बल रेखाएँ अचुंबकीय पदार्थों से गुजर सकती हैं।
चुंबकत्व का नष्ट होना और रखरखाव
चुंबक का चुंबकत्व कई कारणों से नष्ट या कमजोर हो सकता है। इसलिए, चुंबकों का उचित रखरखाव आवश्यक है।
चुंबकत्व नष्ट होने के कारण:
- पीटने या पटकने से: चुंबक को बार-बार पीटने या ऊँचाई से गिराने पर उसके भीतर के आणविक चुंबक (डोमेन) अव्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे चुंबकत्व नष्ट हो जाता है।
- गर्म करने से: चुंबक को अत्यधिक गर्म करने पर उसके कणों की व्यवस्था बिगड़ जाती है, और वह अपना चुंबकीय गुण खो देता है।
- समान ध्रुवों को पास-पास रखने से: यदि दो चुंबकों के समान ध्रुवों को लंबे समय तक एक साथ रखा जाए, तो उनके बीच प्रतिकर्षण बल के कारण उनका चुंबकत्व धीरे-धीरे कम हो जाता है।
- गलत रखरखाव से: यदि चुंबक का सही ढंग से रखरखाव न किया जाए, तो भी उसका चुंबकत्व धीरे-धीरे कम हो जाता है।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_t8_scene1] चुंबकत्व नष्ट होने के कारण।
चुंबकों का रखरखाव (चुंबकीय रक्षक):
- चुंबक के चुंबकत्व को सुरक्षित रखने के लिए चुंबकीय रक्षकों (Magnetic Protectors) का उपयोग किया जाता है।
- ये रक्षक नरम लोहे की पट्टियाँ होती हैं।
- नाल चुंबक के लिए: नाल चुंबक के दोनों ध्रुवों पर एक नरम लोहे की पट्टी लगा दी जाती है। यह पट्टी चुंबकीय बल रेखाओं के लिए एक बंद परिपथ बनाती है, जिससे चुंबकत्व सुरक्षित रहता है।
- छड़ चुंबकों के लिए: दो छड़ चुंबकों को इस प्रकार रखा जाता है कि उनके असमान ध्रुव पास-पास हों। उनके बीच लकड़ी का एक टुकड़ा रखा जाता है और सिरों पर नरम लोहे की पट्टियाँ (रक्षक) लगा दी जाती हैं।
- महत्व: चुंबकीय रक्षक चुंबक के आंतरिक आणविक चुंबकों की व्यवस्था को बनाए रखते हैं, जिससे उनका चुंबकत्व लंबे समय तक बना रहता है।
[IMAGE: magnetic_protectors_fig1310] चुंबकीय रक्षक। [IMAGE: cg_c6_science_ch13_t8_scene3] सही रखरखाव का महत्व।
चुंबकत्व नष्ट होने के कारण और चुंबकीय रक्षकों का उपयोग अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
पृथ्वी एक चुंबक के रूप में
पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है। यही कारण है कि स्वतंत्रतापूर्वक लटका हुआ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
- पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र: पृथ्वी के अंदर एक विशाल चुंबक होने की कल्पना की जा सकती है।
- ध्रुवों की स्थिति:
- पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित है।
- पृथ्वी का चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव भौगोलिक उत्तरी ध्रुव के पास स्थित है।
- भौगोलिक अक्ष और चुंबकीय अक्ष:
- भौगोलिक अक्ष: वह काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर और दक्षिण ध्रुवों को मिलाती है (पृथ्वी का घूर्णन अक्ष)।
- चुंबकीय अक्ष: वह काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी के चुंबकीय उत्तर और दक्षिण ध्रुवों को मिलाती है।
- इन दोनों अक्षों के बीच लगभग 17° का कोण होता है।
- दैशिक गुण का कारण:
- स्वतंत्रतापूर्वक लटके चुंबक का उत्तरी ध्रुव पृथ्वी के चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव की ओर आकर्षित होता है (जो भौगोलिक उत्तर की ओर है)।
- इसी प्रकार, चुंबक का दक्षिणी ध्रुव पृथ्वी के चुंबकीय उत्तरी ध्रुव की ओर आकर्षित होता है (जो भौगोलिक दक्षिण की ओर है)।
- इस आकर्षण के कारण चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर होता है।
- प्राकृतिक चुंबकत्व का प्रमाण:
- यदि किसी लोहे की छड़ को कुछ दिनों के लिए भूमि में उत्तर-दक्षिण दिशा में गाड़ दिया जाए, तो वह हल्की चुंबकित हो जाती है।
- जीवों द्वारा उपयोग:
- मनुष्य पृथ्वी के चुंबकत्व का सीधे अनुभव नहीं करते, लेकिन प्रवासी पक्षी, समुद्री कछुए जैसे जीव मार्ग ढूंढने के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_t9_scene3] चुंबकीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव। [IMAGE: cg_c6_science_ch13_t9_scene4] पृथ्वी के चुंबकत्व का उपयोग।
पृथ्वी का चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव भौगोलिक उत्तरी ध्रुव के पास है और चुंबकीय उत्तरी ध्रुव भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव के पास है।
चुंबक के उपयोग
चुंबक का उपयोग हमारे दैनिक जीवन और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है:
- घरेलू और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण:
- बुलेटिन बोर्ड, चुंबकीय खिलौने, फ्रिज के स्टिकर्स।
- विद्युत घंटी, टेलीफोन, लाउडस्पीकर, टेलीविजन।
- विद्युत जनित्र (जनरेटर या डायनमो)।
- चिकित्सा क्षेत्र में:
- आँख में गए लोहे के कणों को निकालने के लिए विद्युत चुंबक का उपयोग।
[IMAGE: cg_c6_science_ch13_t10_scene2] चिकित्सा और उद्योग में चुंबक।
- उद्योग और खनन में:
- कई धातुओं के अयस्कों में से लौह अयस्क को अलग करने के लिए।
- लोहे की भारी वस्तुओं (जैसे छड़ें) को उठाने के लिए क्रेन में विद्युत चुंबक का उपयोग।
- दिशा ज्ञान (नेविगेशन):
- चुंबकीय कम्पास का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग नाविकों, हवाई जहाज और जलपोत चालकों द्वारा दिशा का पता लगाने के लिए।
- अन्य उपयोग:
- क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड, ऑडियो/वीडियो टेप और कंप्यूटर हार्ड डिस्क में डेटा स्टोर करने के लिए चुंबकीय पट्टियों का उपयोग।
- कुछ दरवाजों और बक्सों में चुंबकीय कुंडी (लॉकिंग सिस्टम)।
चुंबक के कम से कम चार-पाँच उपयोग याद रखें, यह अक्सर छोटे उत्तर वाले प्रश्नों में पूछा जाता है।