स्वास्थ्य एवं स्वच्छता
यह अध्याय छात्रों को अच्छे स्वास्थ्य के महत्व, संतुलित आहार की आवश्यकता, व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता के तरीकों और विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपायों से परिचित कराता है। इसमें विटामिन और खनिज लवणों की कमी से होने वाले रोगों, टीकाकरण के महत्व और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के बारे में जानकारी दी गई है। यह छात्रों को अपने और अपने परिवेश के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करता है।
स्वास्थ्य एवं स्वच्छता: परिचय और कारक
एक स्वस्थ व्यक्ति वह होता है जो शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ हो।
- उत्तम स्वास्थ्य के लिए आवश्यक:
- शारीरिक अंगों और उनकी कार्यप्रणाली की जानकारी।
- स्वच्छ परिवेश।
- शरीर की स्वच्छता का ध्यान।
- अच्छी आदतें।
- संतुलित आहार।
- संतुलित जीवन शैली।
- स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक:
- आंतरिक कारक: ये शरीर के भीतर से उत्पन्न होते हैं।
- शरीर के अंगों (जैसे हृदय, फेफड़े, वृक्क) का सही ढंग से कार्य न करना।
- आनुवंशिक बीमारियाँ।
- बाह्य कारक: ये बाहरी वातावरण से संबंधित होते हैं।
- असंतुलित भोजन।
- रोग फैलाने वाले सूक्ष्म जीव (जीवाणु, विषाणु)।
- बुरी आदतें (धूम्रपान, शराब)।
- पर्यावरणीय प्रदूषण (वायु, जल, ध्वनि)।
- स्वच्छता का अभाव हमें अस्वस्थ कर सकता है।
- हमारा व्यक्तिगत स्वास्थ्य हमारे समुदाय के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
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स्वस्थ व्यक्ति: वह व्यक्ति जो शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से पूरी तरह ठीक हो।
स्वास्थ्य केवल बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्ण कल्याण की स्थिति है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन
- भोजन: हम दिन भर जो कुछ भी खाते हैं।
- संतुलित भोजन: ऐसा भोजन जिसमें शरीर की वृद्धि और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सभी पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण, विटामिन, रेशेदार खाद्य पदार्थ और जल) उचित मात्रा में हों।
- कोई भी पोषक तत्व आवश्यकता से अधिक या कम नहीं होना चाहिए।
- पोषक तत्वों का वर्गीकरण (शरीर की आवश्यकताओं के आधार पर):
- कार्बोहाइड्रेट: ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ।
- उदाहरण: चावल, गेहूँ, केला, गन्ना, अंगूर, आलू।
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- वसा: ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ (कार्बोहाइड्रेट से अधिक ऊर्जा)।
- उदाहरण: दूध, तेल, बीज, घी, आइसक्रीम, नारियल, मक्खन।
- प्रोटीन: शरीर निर्माण करने वाले खाद्य पदार्थ।
- उदाहरण: मांस, अंडा, मूंगफली, मछली, दूध।
- [IMAGE: protein_rich_food_sources_fig117b]
- खनिज लवण एवं विटामिन: शरीर की प्रतिरक्षा करने वाले खाद्य पदार्थ (रोगों से बचाते हैं)।
- उदाहरण: आम, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, मूंगफली।
- [IMAGE: foods_rich_in_iron_fig36]
- अन्य आवश्यक घटक:
- रेशेदार खाद्य पदार्थ (रूक्षांश): भोजन को पचाने और मल त्याग में सहायता करते हैं।
- जल: शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, पोषक तत्वों का परिवहन करता है और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।
- [IMAGE: water_for_drinking_fig1116]
- हीनताजन्य रोग: यदि भोजन में कोई विशेष पोषक तत्व लंबे समय तक पर्याप्त मात्रा में न लिया जाए, तो उसकी कमी से होने वाले रोग या विकृतियाँ।
- महत्वपूर्ण बिंदु:
- प्रत्येक आयु वर्ग और कार्य करने वाले व्यक्तियों को अलग-अलग प्रकार के भोजन की आवश्यकता होती है।
- केवल भरपेट भोजन करना ही पर्याप्त नहीं है, उसमें सभी पोषक तत्वों का होना आवश्यक है।
पोषक तत्वों की जाँच:
- स्टार्च परीक्षण:
- खाद्य पदार्थ पर आयोडीन घोल की कुछ बूँदें डालें।
- यदि रंग नीला-काला हो जाए, तो स्टार्च मौजूद है।
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- प्रोटीन परीक्षण:
- खाद्य पदार्थ का चूर्ण बनाकर पानी में घोलें।
- इसमें कॉपर सल्फेट घोल (नीला) और कास्टिक सोडा घोल (पीला) की कुछ बूँदें डालें।
- यदि रंग बैंगनी (वायलेट) हो जाए, तो प्रोटीन मौजूद है।
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संतुलित भोजन की परिभाषा और विभिन्न पोषक तत्वों के कार्य अक्सर पूछे जाते हैं। उदाहरणों के साथ याद रखें।
यह न समझें कि अधिक भोजन हमेशा संतुलित होता है। पोषक तत्वों की सही मात्रा महत्वपूर्ण है।
विटामिन और खनिज लवणों की कमी से होने वाले रोग / विकार
विटामिन और खनिज लवण हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनकी कमी से कई हीनताजन्य रोग हो सकते हैं।
| विटामिन / खनिज | कमी से होने वाला रोग | लक्षण | प्राप्ति के स्रोत | |:---------------|:--------------------|:------------------------------------|:-----------------------------------------------------------------| | विटामिन A | रतौंधी | कमजोर दृष्टि, रात में कम दिखाई देना, अंधापन | मछली का तेल, गाजर, कुम्हड़ा | | विटामिन B₁ | बेरी-बेरी | दुर्बल पेशियाँ, काम करने हेतु ऊर्जा में कमी | हरी पत्तेदार सब्जियाँ, चना, टमाटर, सोयाबीन, नारियल, अण्डा | | विटामिन C | स्कर्वी | मसूढ़ों से रक्त निकलना, घाव भरने में अधिक समय लगना | खट्टे फल, नींबू, आंवला, मिर्ची | | विटामिन D | रिकेट्स | हड्डियों का मुलायम व टेड़ा-मेढ़ा हो जाना | मक्खन, अंडा, मछली, सूर्य प्रकाश | | कैल्सियम | अस्थियाँ कमजोर होना और दंतक्षय | कमजोर अस्थियाँ, दंतक्षय | दूध, दही, केला | | आयोडीन | घेंघा (गॉयटर) | गर्दन की ग्रंथि का फूल जाना, बच्चों में मानसिक विकलांगता | आयोडीनयुक्त नमक | | लोहा | अरक्तता (एनीमिया) | कमजोरी | पालक, मक्का |
- विटामिन और खनिज लवणों की कमी से होने वाले रोगों को अभावजन्य रोग कहते हैं।
- इन रोगों से बचने के लिए संतुलित आहार लेना अत्यंत आवश्यक है।
विटामिन और खनिज लवणों की कमी से होने वाले रोगों की सूची, उनके लक्षण और स्रोत बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं। इस तालिका को अच्छी तरह याद करें।
सूर्य का प्रकाश विटामिन D का प्राकृतिक स्रोत है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण
- स्वास्थ्य परीक्षण:
- शरीर में होने वाली बीमारियों का समय पर पता लगाने के लिए।
- समय पर उपचार कर बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए।
- नियमित स्वास्थ्य परीक्षण से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है।
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- टीकाकरण (Vaccination):
- बीमारियों को नियंत्रित करने की एक महत्वपूर्ण चिकित्सा विधि।
- बच्चों को टीके के रूप में निष्क्रिय या कमजोर रोगाणु दिए जाते हैं।
- ये रोगाणु शरीर में प्रवेश कर प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करते हैं।
- शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ बनाता है।
- भविष्य में जब असली रोगाणु हमला करते हैं, तो शरीर पहले से तैयार होता है और बीमारी से लड़कर उसे हरा देता है।
- उदाहरण: बी.सी.जी. (BCG), डी.पी.टी. (DPT), पोलियो की खुराक, खसरे का टीका।
- ये टीके शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता उत्पन्न करते हैं और जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं।
टीकाकरण सूची (उदाहरण):
| बच्चे की उम्र | टीके का विवरण | रोग का नाम | |:--------------|:---------------|:------------| | जन्म लेते ही | बी.सी.जी. का टीका | टी.बी. | | डेढ़ महीने में | डी.पी.टी. का टीका एवं पोलियो खुराक - 1 | काली खाँसी, टैटनस, पोलियो | | ढाई महीने में | डी.पी.टी. का टीका एवं पोलियो खुराक - 2 | डिफ्थीरिया, काली खाँसी, टैटनस, पोलियो | | साढ़े तीन महीने में | डी.पी.टी. का टीका एवं पोलियो खुराक - 3 | डिफ्थीरिया, काली खाँसी, टैटनस, पोलियो | | नौंवे महीने में | खसरे का टीका | छोटी माता, खसरा | | डेढ़ साल में | बूस्टर टीका - 1 | पोलियो | | पाँच साल में | बूस्टर टीका - 2 | पोलियो |
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टीकाकरण: एक प्रक्रिया जिसमें शरीर को किसी विशेष बीमारी के प्रति प्रतिरक्षा विकसित करने के लिए टीका दिया जाता है।
टीकाकरण केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि वयस्कों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं सामुदायिक स्वास्थ्य
- व्यक्तिगत स्वास्थ्य: अपने आप को स्वच्छ रखते हुए निरोग बने रहना।
- व्यक्तिगत स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए आवश्यक आदतें:
- नियमित प्रातः शौच।
- नियमित स्नान।
- उचित व्यायाम और पर्याप्त नींद।
- दाँतों एवं मसूढ़ों की नियमित सफाई।
- आँखों, नाक एवं कानों की उचित देखभाल और सफाई।
- बालों की उचित देखभाल एवं सफाई।
- नाखूनों को काटना एवं नियमित सफाई।
- खाना खाने के पहले तथा शौच के बाद हाथों की साबुन/ताजी छनी हुई राख से धुलाई।
- सामुदायिक स्वास्थ्य: पूरे समुदाय के स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखना।
- सामुदायिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए आवश्यक बातें:
- कूड़ेदान में कचरा डालना।
- आस-पास पानी के ठहराव को रोकना (मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए)।
- सार्वजनिक शौचालय का उचित प्रयोग।
- सड़क एवं दीवार पर न थूकना।
- प्रतिरोधक टीके लगवाना।
- उचित मल व्यवस्थापन (खुले में शौच न करना)।
- प्रदूषण को रोकना (वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण)।
- स्वास्थ्य शिक्षा का प्रचार-प्रसार।
- चिकित्सा की उचित व्यवस्था करना।
- बुरी आदतें और उनका स्वास्थ्य पर प्रभाव:
- असंतुलित भोजन, नशीले पदार्थों का सेवन (शराब, तम्बाकू)।
- स्वच्छता का ध्यान न रखना।
- पर्यावरणीय प्रदूषण।
- ये आदतें विभिन्न रोगों और विकृतियों को जन्म दे सकती हैं, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को कमजोर कर सकती हैं।
- फाइलेरिया (Elephantiasis) जैसे रोग दूषित वातावरण और मच्छरों के कारण फैलते हैं। [IMAGE: filariasis_affected_leg_fig41]
- साँप-सीढ़ी खेल से स्वच्छता की सीख:
- यह खेल बच्चों को स्वच्छता से जुड़ी अच्छी आदतों (सीढ़ी) और बुरी आदतों/गंदगी (साँप) के परिणामों के बारे में सिखाता है।
- अच्छी आदतें अपनाने से खेल में आगे बढ़ते हैं, जबकि बुरी आदतें पीछे धकेल देती हैं।
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- जल जनित रोग: गंदा पानी पीने से पेचिश, हैजा, टाइफाइड जैसे रोग हो सकते हैं। इसलिए स्वच्छ और सुरक्षित पानी पीना चाहिए।
व्यक्तिगत स्वच्छता सामुदायिक स्वास्थ्य का आधार है। यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छ रहेगा, तो समुदाय भी स्वस्थ रहेगा।
व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वास्थ्य के बीच अंतर और उन्हें बनाए रखने के लिए आवश्यक कदमों पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।