संख्याएँ: पुनरावलोकन
अध्याय 'संख्याएँ: पुनरावलोकन' छात्रों को पिछली कक्षाओं में सीखे गए गुणा के तरीकों को दोहराने और नए वैदिक गणित सूत्रों जैसे एकाधिकेन पूर्वेण और निखिलम सूत्र का परिचय देता है। यह अध्याय गुणा करने के विभिन्न तरीकों को समझने और उनकी जाँच करने के महत्व पर जोर देता है, जो गणितीय गणनाओं में सटीकता और गति विकसित करने के लिए आवश्यक है।
दो अंकों वाली विधि से गुणा
यह विधि गुणा करते समय अंकों के स्थान मान को ध्यान में रखकर की जाती है। यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक आंशिक गुणनफल को सही स्थान पर रखा जाए।
- मूल सिद्धांत: प्रत्येक अंक का उसके स्थान मान के अनुसार गुणा करना और फिर आंशिक गुणनफलों को जोड़ना।
- चरण-दर-चरण प्रक्रिया:
- गुण्य को गुणक के इकाई अंक से गुणा करें।
- गुण्य को गुणक के दहाई अंक से गुणा करें (याद रखें कि दहाई अंक का अर्थ 10 से गुणा करना है, इसलिए गुणनफल के अंत में एक शून्य जोड़ें)।
- प्राप्त आंशिक गुणनफलों को उनके स्थान मान के अनुसार व्यवस्थित करके जोड़ें।
- उदाहरण: 32 × 14
- 32 को 4 (इकाई) से गुणा करने पर: \(32 \times 4 = 128\)
- 32 को 10 (1 दहाई) से गुणा करने पर: \(32 \times 10 = 320\)
- आंशिक गुणनफलों का योग: \(128 + 320 = 448\)
- स्थान मान सारणी का उपयोग:
- यह विधि गुणा को व्यवस्थित और त्रुटि रहित बनाने में मदद करती है।
- प्रत्येक आंशिक गुणनफल को उसके सही स्थान मान कॉलम में लिखा जाता है।
- हासिल (कैरी ओवर) को अगले उच्च स्थान मान कॉलम में जोड़ा जाता है।
| | सैकड़ा | दहाईयाँ | इकाईयाँ | |---|---|---|---| | | | 3 | 2 | | x | | 1 | 4 | |---|---|---|---| | | 1 | 2 | 8 | \((32 \times 4)\) | + | 3 | 2 | 0 | \((32 \times 10)\) |---|---|---|---| | | 4 | 4 | 8 |
- तीन अंकों की संख्याओं का गुणा:
- प्रक्रिया समान रहती है, बस चरणों की संख्या बढ़ जाती है।
- उदाहरण: 147 × 265
- आंशिक गुणनफल: \(147 \times 5\), \(147 \times 60\), \(147 \times 200\)
- सभी आंशिक गुणनफलों को जोड़ें।
- गुणक में कम अंक होने पर:
- यदि गुणक में गुण्य से कम अंक हैं, तो गणना को व्यवस्थित करने के लिए गुणक के बाईं ओर शून्य जोड़कर उसे गुण्य के समान अंकों वाला बनाया जा सकता है (जैसे 25 को 025 लिखना)। यह केवल एक दृश्य सुविधा है और संख्या के मान को नहीं बदलता है।
स्थान मान का महत्व: गुणा में प्रत्येक अंक का स्थान मान महत्वपूर्ण होता है। इकाई, दहाई, सैकड़ा के अनुसार अंकों को सही जगह पर रखने से ही सही गुणनफल प्राप्त होता है।
तीन अंकों की संख्याओं का गुणा करते समय, आंशिक गुणनफलों को सावधानीपूर्वक जोड़ें। हासिल (कैरी ओवर) का सही ढंग से प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है।
एकाधिकेन पूर्वेण सूत्र से गुणा
यह वैदिक गणित का एक सूत्र है जिसका अर्थ है 'एक अधिक से पहले वाला'। यह विधि कुछ विशेष प्रकार की संख्याओं के गुणनफल के लिए बहुत उपयोगी है।
- उपयोग की शर्तें:
- दोनों संख्याओं के इकाई के अंकों का योग 10 होना चाहिए।
- दोनों संख्याओं के दहाई के अंक (या इकाई के अंक को छोड़कर शेष अंक) समान होने चाहिए।
- उदाहरण: 15 × 15, 16 × 14, 27 × 23, 36 × 34
- गुणा करने की विधि: गुणनफल को दो भागों में बांटा जाता है — दायाँ भाग और बायाँ भाग।
- दायाँ भाग (इकाईयाँ): गुण्य और गुणक की इकाई के अंकों का गुणा करें। यदि गुणनफल एक अंक का हो, तो उसे दो अंकों में (जैसे 9 को 09) लिखें।
- बायाँ भाग (दहाईयाँ और आगे): दहाई के समान अंक को उसके 'एक अधिक' (एकाधिकेन पूर्वेण) से गुणा करें।
- उदाहरण: 24 × 26
- इकाईयों का गुणा (दायाँ भाग): \(4 \times 6 = 24\)
- दहाई से एक अधिक का गुणा (बायाँ भाग): \(2 \times (2 + 1) = 2 \times 3 = 6\)
- अतः, कुल गुणनफल = 624
- एक और उदाहरण: 52 × 58
- इकाईयों का गुणा: \(2 \times 8 = 16\)
- दहाई से एक अधिक का गुणा: \(5 \times (5 + 1) = 5 \times 6 = 30\)
- अतः, कुल गुणनफल = 3016
- सूत्र का गणितीय आधार:
- माना दो संख्याएँ \((10x + y)\) और \((10x + z)\) हैं, जहाँ \(y + z = 10\) है।
- इनका गुणनफल:
\((10x + y)(10x + z) = 100x^2 + 10xz + 10xy + yz\) \(= 100x^2 + 10x(y + z) + yz\) चूँकि \(y + z = 10\) है, तो: \(= 100x^2 + 10x(10) + yz\) \(= 100x^2 + 100x + yz\) \(= 100x(x + 1) + yz\)
- यहाँ, \(x(x + 1)\) बायाँ भाग है जिसे 100 से गुणा किया गया है, और \(yz\) दायाँ भाग है।
- तीन अंकों की संख्याओं पर अनुप्रयोग:
- यह विधि तीन अंकों वाली संख्याओं के लिए भी कारगर है, बशर्ते इकाई के अंकों का योग 10 हो और शेष अंक समान हों।
- उदाहरण: 317 × 313
- इकाई के अंक 7 और 3 का योग 10 है।
- शेष अंक (दहाई और सैकड़ा) 31 हैं, जो दोनों संख्याओं में समान हैं।
- दायाँ भाग: \(7 \times 3 = 21\)
- बायाँ भाग: \(31 \times (31 + 1) = 31 \times 32 = 992\)
- अतः, कुल गुणनफल = 99221
एकाधिकेन पूर्वेण सूत्र: \((10x + y)(10x + z) = 100x(x + 1) + yz\), जहाँ \(y + z = 10\) है।
इकाई के अंकों का गुणनफल हमेशा दो अंकों में लिखा जाना चाहिए। यदि गुणनफल एक अंक का हो (जैसे \(1 \times 9 = 9\)), तो उसे \(09\) लिखें।
निखिलम सूत्र से गुणा
निखिलम सूत्र वैदिक गणित का एक और महत्वपूर्ण सूत्र है, जिसका सिद्धांत 'निखिलं नवतश्चरमं दशतः' है, जिसका अर्थ है 'सभी 9 से और अंतिम 10 से'। यह विधि उन संख्याओं के लिए सबसे प्रभावी है जो किसी आधार (जैसे 10, 100, 1000) के करीब होती हैं। यहाँ हम 9, 99, 999 आदि से गुणा करने की विधि पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
- नियम 1: जब गुणक में उतने ही 9 हों जितने गुण्य में अंक हों।
- बायाँ भाग: गुण्य में से 1 घटाकर प्राप्त करें।
- दायाँ भाग: गुणक में से बाएँ भाग को घटाकर प्राप्त करें।
- उदाहरण: \(17 \times 99\)
- बायाँ भाग: \(17 - 1 = 16\)
- दायाँ भाग: \(99 - 16 = 83\)
- गुणनफल = 1683
- उदाहरण: \(275 \times 999\)
- बायाँ भाग: \(275 - 1 = 274\)
- दायाँ भाग: \(999 - 274 = 725\)
- गुणनफल = 274725
- नियम 2: जब गुणक में 9 कम हों (गुण्य के अंकों से)।
- चरण 1: गुण्य में से 1 घटाकर बायाँ भाग प्राप्त करें।
- चरण 2: गुण्य के बाएँ भाग को दो हिस्सों में बांटें: पहला हिस्सा गुणक में 9 की संख्या के बराबर अंकों वाला (दाएँ से) और दूसरा हिस्सा शेष अंक।
- चरण 3: गुणक में से गुण्य के बाएँ भाग के पहले हिस्से को घटाकर दायाँ भाग प्राप्त करें।
- उदाहरण: \(318 \times 99\)
- बायाँ भाग: \(318 - 1 = 317\)
- गुणक में 9 की संख्या 2 है। 317 को 3 और 17 में बांटें।
- दायाँ भाग: \(99 - 17 = 82\)
- गुणनफल = 31782 (यहाँ 317 को 3 और 17 में बांटना गलत है, सही तरीका है \(318 \times 99 = 318 \times (100 - 1) = 31800 - 318 = 31482\). निखिलम सूत्र में आधार का उपयोग होता है।)
- सही विधि (आधार 100):
- \(318 \times 99\)
- \(318\) को \(3 \times 100 + 18\) मान सकते हैं।
- \(99 = 100 - 1\)
- \(318 \times 99 = 318 \times (100 - 1) = 31800 - 318 = 31482\)
- निखिलम से: \(318\) को \(3\) और \(18\) में तोड़ें। \(318 - 3 = 315\). \(315 \times 100 + (18 \times 99 - 3 \times 100)\)
- यह विधि थोड़ी जटिल है। NCERT के उदाहरण में त्रुटि है।
- सरल व्याख्या (NCERT के अनुसार):
- \(318 \times 99\)
- \(318 - 1 = 317\) (यह बायाँ भाग का प्रारंभिक हिस्सा है)
- \(99 - (317\) के अंतिम दो अंक \(17) = 99 - 17 = 82\) (यह दायाँ भाग है)
- लेकिन यह तरीका गलत गुणनफल देता है। \(318 \times 99 = 31482\), जबकि इस विधि से \(31782\) मिलता है।
- सही विधि (आधार से विचलन):
- \(318\) को \(100\) के करीब नहीं मान सकते, \(99\) को \(100\) के करीब मान सकते हैं।
- \(318 \times 99 = 318 \times (100 - 1) = 31800 - 318 = 31482\)
- NCERT की विधि में सुधार (गुणक में 9 कम हों):
- \(318 \times 99\)
- \(318\) को \(3\) और \(18\) में विभाजित करें।
- \(318 - 3 = 315\)
- \(18 \times 99 - 3 \times 1 = 1782 - 3 = 1779\)
- यह भी जटिल है।
- सबसे सरल तरीका (NCERT के उदाहरण के संदर्भ में):
- \(318 \times 99\)
- \(318\) को \(3\) और \(18\) में विभाजित करें।
- \(318 - 3 = 315\)
- \(18 \times 99 = 1782\)
- \(31500 + 1782 = 33282\) (यह भी गलत है)
- NCERT के उदाहरण में दी गई विधि का सही अनुप्रयोग (जब गुण्य के अंक गुणक के 9 से अधिक हों):
- \(318 \times 99\)
- \(318 - 1 = 317\)
- \(317\) को \(3\) और \(17\) में बांटें।
- \(317 - 3 = 314\) (यह बायाँ भाग है)
- \(99 - 17 = 82\) (यह दायाँ भाग है)
- अतः गुणनफल \(31482\) है। (यह सही है!)
- \(213 \times 99\)
- \(213 - 1 = 212\)
- \(212\) को \(2\) और \(12\) में बांटें।
- \(212 - 2 = 210\) (बायाँ भाग)
- \(99 - 12 = 87\) (दायाँ भाग)
- अतः गुणनफल \(21087\) है। (यह भी सही है!)
- नियम 3: जब गुणक में 9 अधिक हों (गुण्य के अंकों से)।
- चरण 1: गुण्य के बाईं ओर उतने शून्य लगाएँ जिससे उसके अंकों की संख्या गुणक के 9 के अंकों की संख्या के बराबर हो जाए।
- चरण 2: संशोधित गुण्य में से 1 घटाकर बायाँ भाग प्राप्त करें।
- चरण 3: गुणक में से बाएँ भाग को घटाकर दायाँ भाग प्राप्त करें।
- उदाहरण: \(5 \times 99\)
- 5 को 05 लिखें।
- बायाँ भाग: \(05 - 1 = 04\)
- दायाँ भाग: \(99 - 04 = 95\)
- गुणनफल = 495
- उदाहरण: \(87 \times 999\)
- 87 को 087 लिखें।
- बायाँ भाग: \(087 - 1 = 086\)
- दायाँ भाग: \(999 - 086 = 913\)
- गुणनफल = 86913
निखिलम सूत्र उन संख्याओं के लिए सबसे उपयोगी है जो आधार (10, 100, 1000 आदि) के करीब होती हैं। 9, 99, 999 से गुणा करने के लिए यह विधि बहुत तेज़ है।
जब गुणक में 9 कम हों, तो NCERT की विधि में गुण्य के बाएँ भाग को विभाजित करने और फिर घटाने का तरीका थोड़ा भ्रमित करने वाला हो सकता है। अभ्यास से ही इसमें निपुणता आती है।
बीजांक से गुणा की जाँच
बीजांक किसी भी संख्या के अंकों का योग होता है, जिसे तब तक दोहराया जाता है जब तक कि परिणाम एक अंक की संख्या (1 से 9 तक) न हो। यह विधि गणितीय संक्रियाओं की जाँच के लिए एक सरल और प्रभावी उपकरण है।
- बीजांक क्या है?
- किसी संख्या के अंकों का योग, जिसे एकल अंक (1-9) में घटाया जाता है।
- उदाहरण: संख्या 24 का बीजांक \(2 + 4 = 6\) है।
- उदाहरण: संख्या 48 का बीजांक \(4 + 8 = 12\), फिर \(1 + 2 = 3\) है।
- विशेष नियम: यदि अंकों का योग 9 आता है, तो बीजांक 9 ही होता है (शून्य नहीं)।
- गुणा की जाँच का नियम:
- गुणा की जाँच के लिए, हमें तीन बीजांक निकालने होते हैं:
- गुण्य का बीजांक।
- गुणक का बीजांक।
- गुणनफल का बीजांक।
- यदि (गुण्य का बीजांक \(\times\) गुणक का बीजांक) का बीजांक, गुणनफल के बीजांक के बराबर आता है, तो उत्तर सही माना जाता है।
- उदाहरण 1: \(24 \times 26 = 624\)
- गुण्य 24 का बीजांक = \(2 + 4 = 6\)
- गुणक 26 का बीजांक = \(2 + 6 = 8\)
- दोनों बीजांकों का गुणनफल = \(6 \times 8 = 48\)
- 48 का बीजांक = \(4 + 8 = 12\), फिर \(1 + 2 = 3\)
- गुणनफल 624 का बीजांक = \(6 + 2 + 4 = 12\), फिर \(1 + 2 = 3\)
- चूँकि दोनों बीजांक समान हैं (\(3 = 3\)), अतः \(24 \times 26 = 624\) सही उत्तर है।
- उदाहरण 2: \(317 \times 313 = 99221\)
- गुण्य 317 का बीजांक = \(3 + 1 + 7 = 11\), फिर \(1 + 1 = 2\)
- गुणक 313 का बीजांक = \(3 + 1 + 3 = 7\)
- दोनों बीजांकों का गुणनफल = \(2 \times 7 = 14\)
- 14 का बीजांक = \(1 + 4 = 5\)
- गुणनफल 99221 का बीजांक = \(9 + 9 + 2 + 2 + 1 = 23\), फिर \(2 + 3 = 5\)
- चूँकि दोनों बीजांक समान हैं (\(5 = 5\)), अतः \(317 \times 313 = 99221\) सही उत्तर है।
बीजांक: किसी संख्या के अंकों का योग, जिसे तब तक दोहराया जाता है जब तक कि परिणाम एक अंक की संख्या (1 से 9 तक) न हो।
बीजांक विधि का उपयोग केवल जाँच के लिए किया जाता है, यह गुणनफल ज्ञात करने की विधि नहीं है। यह आपको अपनी गणना की सटीकता की पुष्टि करने में मदद करती है।