अध्याय दो
अध्याय 2 'परिमेय संख्याएँ' छात्रों को प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं और पूर्णांकों के बाद परिमेय संख्याओं की अवधारणा से परिचित कराता है। इसमें परिमेय संख्याओं को p/q के रूप में लिखना, जहाँ q ≠ 0, तुल्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना, परिमेय संख्याओं को सरलतम रूप में व्यक्त करना और संख्या रेखा पर उनका निरूपण करना सिखाया जाता है। यह अध्याय छात्रों को परिमेय संख्याओं की तुलना करना और उन्हें आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना भी सिखाता है, जो गणितीय समझ के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनाता है।
परिमेय संख्याएँ: परिभाषा और पहचान
परिमेय संख्याएँ गणित की एक महत्वपूर्ण अवधारणा हैं जो भिन्नों और पूर्णांकों को एक साथ लाती हैं।
- परिभाषा: एक संख्या जिसे \(\frac{p}{q}\) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\), एक परिमेय संख्या कहलाती है।
- \(p\) को अंश (Numerator) और \(q\) को हर (Denominator) कहते हैं।
- उदाहरण: \(\frac{3}{4}\), \(\frac{-5}{7}\), \(\frac{2}{1}\) (जो 2 के बराबर है), \(\frac{0}{1}\) (जो 0 के बराबर है) सभी परिमेय संख्याएँ हैं।
- महत्वपूर्ण बिंदु:
- सभी प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ और पूर्णांक परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- किसी भी संख्या को शून्य (0) से भाग नहीं दिया जा सकता। इसलिए, यदि \(q = 0\) है, तो वह परिमेय संख्या नहीं होगी।
- परिमेय संख्याओं के समूह को \(Q\) से दर्शाया जाता है।
प्राकृत संख्याएँ (N): \(\{1, 2, 3, ...\}\) पूर्ण संख्याएँ (W): \(\{0, 1, 2, 3, ...\}\) पूर्णांक (I या Z): \(\{..., -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ...\}\)
इन सभी संख्याओं को \(\frac{p}{q}\) के रूप में लिखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, 5 को \(\frac{5}{1}\) के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ 5 और 1 पूर्णांक हैं और \(1 \neq 0\)।
परिमेय संख्या (Rational Number): एक संख्या जिसे \(\frac{p}{q}\) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\)।
शून्य (0) एक परिमेय संख्या है क्योंकि इसे \(\frac{0}{1}\), \(\frac{0}{2}\) आदि के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ अंश 0 है और हर एक गैर-शून्य पूर्णांक है।
याद रखें कि हर \(q\) कभी भी शून्य नहीं हो सकता। यदि हर शून्य है, तो संख्या अपरिभाषित होती है और वह परिमेय संख्या नहीं होती।
पूर्णांकों का परिमेय संख्या के रूप में निरूपण
प्रत्येक पूर्णांक को एक परिमेय संख्या के रूप में लिखा जा सकता है।
- कैसे? किसी भी पूर्णांक \(x\) को \(\frac{x}{1}\) के रूप में लिखा जा सकता है।
- उदाहरण के लिए, पूर्णांक 4 को \(\frac{4}{1}\) के रूप में लिखा जा सकता है।
- पूर्णांक -7 को \(\frac{-7}{1}\) के रूप में लिखा जा सकता है।
- पूर्णांक 0 को \(\frac{0}{1}\) के रूप में लिखा जा सकता है।
- तुल्य रूप: एक ही पूर्णांक को कई तुल्य परिमेय संख्याओं के रूप में भी लिखा जा सकता है।
- जैसे, 4 को \(\frac{4}{1}\), \(\frac{8}{2}\), \(\frac{12}{3}\) आदि के रूप में लिखा जा सकता है। इन सभी का मान 4 ही है।
- इसी प्रकार, -7 को \(\frac{-7}{1}\), \(\frac{-14}{2}\), \(\frac{-21}{3}\) आदि के रूप में लिखा जा सकता है।
क्रियाकलाप - 1 (संक्षेप): दी गई सारणी में पूर्णांकों को अंश और हर मानकर परिमेय संख्याएँ बनाना।
| क्र.सं. | पूर्णांक | अंश | हर | परिमेय संख्या | अंश | हर | परिमेय संख्या | |---|---|---|---|---|---|---|---| | 1 | 2 एवं 3 | 2 | 3 | 2/3 | 3 | 2 | 3/2 | | 2 | – 5 एवं 7 | -5 | 7 | -5/7 | 7 | -5 | 7/-5 | | 3 | 4 एवं –8 | 4 | -8 | 4/-8 | -8 | 4 | -8/4 | | 4 | – 7 एवं – 9 | -7 | -9 | -7/-9 | -9 | -7 | -9/-7 | | 5 | 1 एवं 6 | 1 | 6 | 1/6 | 6 | 1 | 6/1 |
प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या है, लेकिन प्रत्येक परिमेय संख्या एक पूर्णांक नहीं होती। उदाहरण के लिए, \(\frac{1}{2}\) एक परिमेय संख्या है, लेकिन पूर्णांक नहीं है।
तुल्य परिमेय संख्याएँ
तुल्य परिमेय संख्याएँ वे होती हैं जिनका मान समान होता है, भले ही उनके अंश और हर अलग-अलग हों।
- परिभाषा: दो परिमेय संख्याएँ तुल्य कहलाती हैं यदि वे संख्या रेखा पर एक ही बिंदु को निरूपित करती हैं।
- कैसे प्राप्त करें:
- गुणा करके: किसी परिमेय संख्या के अंश और हर को एक ही गैर-शून्य पूर्णांक से गुणा करने पर तुल्य परिमेय संख्या प्राप्त होती है।
- उदाहरण: \(\frac{1}{2}\) की तुल्य संख्याएँ: \(\frac{1 \times 2}{2 \times 2} = \frac{2}{4}\), \(\frac{1 \times 3}{2 \times 3} = \frac{3}{6}\), \(\frac{1 \times 4}{2 \times 4} = \frac{4}{8}\) आदि।
- ऋणात्मक भिन्नों के लिए भी यही नियम लागू होता है: \(\frac{-1}{2}\) की तुल्य संख्याएँ: \(\frac{-1 \times 2}{2 \times 2} = \frac{-2}{4}\), \(\frac{-1 \times 3}{2 \times 3} = \frac{-3}{6}\) आदि।
- भाग देकर: किसी परिमेय संख्या के अंश और हर को उनके उभयनिष्ठ गुणनखंड (गैर-शून्य) से भाग देने पर भी तुल्य परिमेय संख्या प्राप्त होती है।
- उदाहरण: \(\frac{28}{35}\) के अंश और हर को 7 से भाग देने पर \(\frac{28 \div 7}{35 \div 7} = \frac{4}{5}\) प्राप्त होता है। \(\frac{28}{35}\) और \(\frac{4}{5}\) तुल्य परिमेय संख्याएँ हैं।
क्रियाकलाप - 2 (संक्षेप): दी गई सारणी में तुल्य परिमेय संख्याएँ लिखना।
| क्रमांक | परिमेय संख्या | तुल्य परिमेय संख्या | |---|---|---| | 1. | 2/5 | 4/10, 6/15, 8/20, 10/25 | | 2. | -3/7 | -6/14, -9/21, -12/28, -15/35 | | 3. | 8/-11 | 16/-22, 24/-33, 32/-44, 40/-55 | | 4. | -7/9 | -14/18, -21/27, -28/36, -35/45 | | 5. | -6/15 | -2/5, -12/30, -18/45, -24/60 |
निष्कर्ष: एक परिमेय संख्या की अनंत तुल्य परिमेय संख्याएँ हो सकती हैं।
तुल्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करते समय, अंश और हर दोनों को एक ही गैर-शून्य पूर्णांक से गुणा या भाग करना आवश्यक है।
परिमेय संख्या का सरलतम रूप
एक परिमेय संख्या अपने सरलतम रूप में तब कहलाती है जब उसके अंश और हर में 1 के अतिरिक्त कोई अन्य उभयनिष्ठ गुणनखंड न हो। इसे 'मानक रूप' भी कहते हैं।
- कैसे प्राप्त करें:
- अंश और हर के सभी गुणनखंड ज्ञात करें।
- अंश और हर के सबसे बड़े उभयनिष्ठ गुणनखंड (HCF) को ज्ञात करें।
- अंश और हर दोनों को इस HCF से भाग दें।
- उदाहरण: \(\frac{28}{35}\) का सरलतम रूप ज्ञात करना।
- 28 के गुणनखंड: 1, 2, 4, 7, 14, 28
- 35 के गुणनखंड: 1, 5, 7, 35
- सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड (HCF) = 7
- \(\frac{28 \div 7}{35 \div 7} = \frac{4}{5}\)
- अतः, \(\frac{4}{5}\) ही \(\frac{28}{35}\) का सरलतम रूप है।
- ऋणात्मक परिमेय संख्याओं का सरलतम रूप:
- यदि हर ऋणात्मक है, तो उसे धनात्मक बनाने के लिए अंश और हर दोनों को -1 से गुणा करें।
- उदाहरण: \(\frac{15}{-25}\) को सरलतम रूप में लिखें।
- पहले हर को धनात्मक करें: \(\frac{15 \times (-1)}{-25 \times (-1)} = \frac{-15}{25}\)
- -15 और 25 का HCF = 5
- \(\frac{-15 \div 5}{25 \div 5} = \frac{-3}{5}\)
क्रियाकलाप - 3 (संक्षेप): सारणी में दी गई परिमेय संख्याओं को सरलतम रूप में लिखना।
| क्र.सं. | परिमेय संख्या | अंश के गुणनखंड | हर के गुणनखंड | सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड | अंश ÷ उभयनिष्ठ गुणनखंड | हर ÷ उभयनिष्ठ गुणनखंड | सरलतम रूप | |---|---|---|---|---|---|---|---| | 1. | 45/54 | 1,3,5,9,15,45 | 1,2,3,6,9,18,27,54 | 9 | 45÷9=5 | 54÷9=6 | 5/6 | | 2. | 56/76 | 1,2,4,7,8,14,28,56 | 1,2,4,19,38,76 | 4 | 56÷4=14 | 76÷4=19 | 14/19 | | 3. | 18/36 | 1,2,3,6,9,18 | 1,2,3,4,6,9,12,18,36 | 18 | 18÷18=1 | 36÷18=2 | 1/2 | | 4. | 27/81 | 1,3,9,27 | 1,3,9,27,81 | 27 | 27÷27=1 | 81÷27=3 | 1/3 | | 5. | -63/85 | 1,3,7,9,21,63 | 1,5,17,85 | 1 | -63÷1=-63 | 85÷1=85 | -63/85 |
टीप: परिमेय संख्या को तुल्य परिमेय संख्या में बदलने के लिए अंश व हर में समान संख्या से गुणा या भाग करते हैं।
सरलतम रूप (Simplest Form): एक परिमेय संख्या \(\frac{p}{q}\) सरलतम रूप में होती है यदि \(p\) और \(q\) में 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड न हो।
सरलतम रूप में लिखने से पहले, यदि हर ऋणात्मक है तो उसे धनात्मक बनाना हमेशा अच्छा अभ्यास होता है। उदाहरण के लिए, \(\frac{a}{-b}\) को \(\frac{-a}{b}\) के रूप में लिखें।
संख्या रेखा पर परिमेय संख्याओं का निरूपण
संख्या रेखा पर परिमेय संख्याओं को निरूपित करना पूर्णांकों और भिन्नों को निरूपित करने के समान है।
- मूल सिद्धांत:
- धनात्मक परिमेय संख्याएँ शून्य के दायीं ओर स्थित होती हैं।
- ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ शून्य के बायीं ओर स्थित होती हैं।
- निरूपण के चरण:
- एक संख्या रेखा खींचें और उस पर 0, 1, -1 आदि पूर्णांकों को चिह्नित करें।
- यदि परिमेय संख्या \(\frac{p}{q}\) है:
- यदि \(q=1\): यह एक पूर्णांक है, इसे सीधे संख्या रेखा पर चिह्नित करें।
- यदि \(q \neq 1\):
- यदि संख्या धनात्मक है, तो 0 और 1 (या 1 और 2, आदि) के बीच के अंतराल को हर \(q\) के बराबर भागों में विभाजित करें। अंश \(p\) के अनुसार उचित भाग को चिह्नित करें।
- यदि संख्या ऋणात्मक है, तो 0 और -1 (या -1 और -2, आदि) के बीच के अंतराल को हर \(q\) के बराबर भागों में विभाजित करें। अंश \(p\) के अनुसार उचित भाग को चिह्नित करें।
- मिश्र परिमेय संख्याएँ: यदि परिमेय संख्या एक मिश्र भिन्न के रूप में है (जैसे \(-1\frac{5}{7}\)), तो पहले इसे अनुचित भिन्न में बदलें (जैसे \(\frac{-12}{7}\))। फिर, यह देखें कि यह किन दो पूर्णांकों के बीच आती है (जैसे -2 और -1 के बीच)। उस अंतराल को हर के बराबर भागों में विभाजित करें और उचित बिंदु को चिह्नित करें।
- उदाहरण:
- \(\frac{1}{4}\) को निरूपित करना: 0 और 1 के बीच के भाग को 4 बराबर भागों में बाँटें। पहले भाग को \(\frac{1}{4}\) चिह्नित करें।
- \(\frac{-5}{7}\) को निरूपित करना: 0 और -1 के बीच के भाग को 7 बराबर भागों में बाँटें। शून्य से बायीं ओर पाँचवें भाग को \(\frac{-5}{7}\) चिह्नित करें।
- \(\frac{-12}{7}\) को निरूपित करना: यह \(-1\frac{5}{7}\) के बराबर है, जिसका अर्थ है -1 से और आगे \(\frac{5}{7}\) भाग। -1 और -2 के बीच के भाग को 7 बराबर भागों में बाँटें। -1 से बायीं ओर पाँचवें भाग को \(\frac{-12}{7}\) चिह्नित करें।
टीप: यदि परिमेय संख्या का हर ऋणात्मक है (जैसे \(\frac{p}{-q}\)), तो उसे \(\frac{-p}{q}\) के रूप में बदलकर निरूपित करें। उदाहरण के लिए, \(\frac{3}{-4}\) को \(\frac{-3}{4}\) के रूप में निरूपित करें।
संख्या रेखा पर निरूपण करते समय, इकाई अंतराल (जैसे 0 से 1 या -1 से 0) को हर के बराबर भागों में विभाजित करना और फिर अंश के अनुसार बिंदु चिह्नित करना महत्वपूर्ण है।
परिमेय संख्याओं की तुलना
दो या दो से अधिक परिमेय संख्याओं की तुलना करने के लिए यह निर्धारित किया जाता है कि कौन सी संख्या बड़ी है, कौन सी छोटी है, या क्या वे बराबर हैं।
- चरण-दर-चरण विधि:
- हर को धनात्मक बनाना: यदि किसी परिमेय संख्या का हर ऋणात्मक है, तो अंश और हर दोनों को -1 से गुणा करके हर को धनात्मक बनाएँ। उदाहरण: \(\frac{3}{-4} = \frac{-3}{4}\)।
- हरों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) ज्ञात करना: दी गई परिमेय संख्याओं के हरों का LCM ज्ञात करें।
- समान हर वाली तुल्य संख्याएँ बनाना: प्रत्येक परिमेय संख्या को उसके LCM को हर के रूप में लेकर तुल्य परिमेय संख्या में बदलें। इसके लिए, अंश और हर दोनों को एक ही संख्या से गुणा करें ताकि हर LCM के बराबर हो जाए।
- अंशों की तुलना करना: अब, जिन परिमेय संख्याओं के हर समान हैं, उनके अंशों की तुलना करें। जिस परिमेय संख्या का अंश बड़ा होगा, वह संख्या बड़ी होगी।
- विशेष स्थितियाँ:
- धनात्मक और ऋणात्मक परिमेय संख्या: एक धनात्मक परिमेय संख्या हमेशा एक ऋणात्मक परिमेय संख्या से बड़ी होती है। (उदाहरण: \(\frac{1}{2} > \frac{-3}{4}\))
- शून्य से तुलना: धनात्मक परिमेय संख्याएँ शून्य से बड़ी होती हैं, और ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ शून्य से छोटी होती हैं।
- समान हर: यदि हर समान हैं, तो बड़े अंश वाली संख्या बड़ी होती है। (उदाहरण: \(\frac{5}{7} > \frac{3}{7}\))
- समान अंश: यदि अंश समान हैं, तो छोटे धनात्मक हर वाली संख्या बड़ी होती है। (उदाहरण: \(\frac{3}{5} > \frac{3}{7}\))। ऋणात्मक अंश के लिए, छोटे हर वाली संख्या छोटी होती है (उदाहरण: \(\frac{-3}{5} < \frac{-3}{7}\))।
- आरोही और अवरोही क्रम:
- आरोही क्रम (बढ़ता क्रम): संख्याओं को सबसे छोटी से सबसे बड़ी तक व्यवस्थित करना।
- अवरोही क्रम (घटता क्रम): संख्याओं को सबसे बड़ी से सबसे छोटी तक व्यवस्थित करना।
- इन क्रमों में व्यवस्थित करने के लिए भी उपरोक्त तुलना विधि का ही उपयोग किया जाता है।
उदाहरण 1: \(\frac{-5}{8}\) और \(\frac{-3}{4}\) की तुलना कीजिए।
- हर 8 और 4 का LCM = 8
- \(\frac{-5}{8} = \frac{-5 \times 1}{8 \times 1} = \frac{-5}{8}\)
- \(\frac{-3}{4} = \frac{-3 \times 2}{4 \times 2} = \frac{-6}{8}\)
- चूंकि -5 > -6, अतः \(\frac{-5}{8} > \frac{-6}{8}\) या \(\frac{-5}{8} > \frac{-3}{4}\)।
उदाहरण 2: \(\frac{-4}{7}\) और \(\frac{5}{-3}\) में से कौन सी परिमेय संख्या छोटी है?
- पहले \(\frac{5}{-3}\) को \(\frac{-5}{3}\) में बदलें।
- अब \(\frac{-4}{7}\) और \(\frac{-5}{3}\) की तुलना करें।
- हर 7 और 3 का LCM = 21
- \(\frac{-4}{7} = \frac{-4 \times 3}{7 \times 3} = \frac{-12}{21}\)
- \(\frac{-5}{3} = \frac{-5 \times 7}{3 \times 7} = \frac{-35}{21}\)
- चूंकि -35 < -12, अतः \(\frac{-35}{21} < \frac{-12}{21}\) या \(\frac{5}{-3} < \frac{-4}{7}\)।
- इसलिए, \(\frac{5}{-3}\) छोटी संख्या है।
उदाहरण 3: \(\frac{3}{4}, \frac{-7}{8}, \frac{13}{-24}, \frac{-5}{-12}\) को अवरोही क्रम में लिखिए।
- पहले हर को धनात्मक करें: \(\frac{13}{-24} = \frac{-13}{24}\) और \(\frac{-5}{-12} = \frac{5}{12}\)
- संख्याएँ अब हैं: \(\frac{3}{4}, \frac{-7}{8}, \frac{-13}{24}, \frac{5}{12}\)
- हर 4, 8, 24, 12 का LCM = 24
- तुल्य संख्याएँ: \(\frac{3 \times 6}{4 \times 6} = \frac{18}{24}\)
\(\frac{-7 \times 3}{8 \times 3} = \frac{-21}{24}\) \(\frac{-13 \times 1}{24 \times 1} = \frac{-13}{24}\) \(\frac{5 \times 2}{12 \times 2} = \frac{10}{24}\)
- अंशों की तुलना: 18 > 10 > -13 > -21
- अवरोही क्रम: \(\frac{18}{24} > \frac{10}{24} > \frac{-13}{24} > \frac{-21}{24}\)
- मूल संख्याओं का अवरोही क्रम: \(\frac{3}{4} > \frac{-5}{-12} > \frac{13}{-24} > \frac{-7}{8}\)
ऋणात्मक संख्याओं की तुलना करते समय अक्सर गलती होती है। याद रखें, ऋणात्मक संख्याओं में, जो संख्या संख्यात्मक रूप से बड़ी दिखती है, वह वास्तव में छोटी होती है। उदाहरण के लिए, -5 < -2।
परिमेय संख्याओं की तुलना करने या उन्हें क्रम में व्यवस्थित करने के लिए समान हर बनाना सबसे विश्वसनीय तरीका है।