HomeChhattisgarhClass 7Maths › अध्याय तीन
अध्याय तीन
Chhattisgarh · Class 7 · 🧮 Maths · Chapter 3

अध्याय तीन

त्रिभुज के कोणों का योगसम्मुख कोण और भुजाएँत्रिभुज की माध्यिकाएँत्रिभुज के शीर्षलम्बकेंद्रक और लंबकेंद्र

यह अध्याय त्रिभुजों के मूल गुणों पर केंद्रित है, जिसमें उनकी भुजाओं और कोणों के बीच संबंध शामिल हैं। छात्र सीखते हैं कि त्रिभुज के तीनों आंतरिक कोणों का योग 180° होता है। इसमें समद्विबाहु और समबाहु त्रिभुजों के विशेष गुणों पर भी चर्चा की गई है। अध्याय माध्यिकाओं और शीर्षलम्बों की अवधारणाओं का परिचय देता है, यह बताता है कि उन्हें कैसे बनाया जाए और उनके प्रतिच्छेदन बिंदु (केंद्रक और लंबकेंद्र) का क्या महत्व है। यह छात्रों को ज्यामितीय निर्माण और तार्किक सोच विकसित करने में मदद करता है।

त्रिभुज की मूल अवधारणा और कोण योग गुण

त्रिभुज ABC के घटक
त्रिभुज ABC के घटक
त्रिभुज का कोण योग गुण
त्रिभुज का कोण योग गुण
त्रिभुज के प्रकारों का दोहराव
त्रिभुज के प्रकारों का दोहराव

त्रिभुज एक तीन भुजाओं वाली बंद आकृति है जिसमें तीन शीर्ष, तीन भुजाएँ और तीन कोण होते हैं।

  • त्रिभुज के घटक:
  • शीर्ष: A, B, C
  • भुजाएँ: AB, BC, CA
  • कोण: \(\angle A, \angle B, \angle C\)
  • कोण योग गुण (Angle Sum Property):
  • किसी भी त्रिभुज के तीनों आंतरिक कोणों का योग हमेशा 180° होता है
  • सूत्र: \(\angle A + \angle B + \angle C = 180^\circ\)
  • त्रिभुज के प्रकार (पिछली कक्षाओं का दोहराव):
  • भुजाओं के आधार पर:
  • समबाहु त्रिभुज: तीनों भुजाएँ बराबर। तीनों कोण 60°।
  • समद्विबाहु त्रिभुज: दो भुजाएँ बराबर। बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर।
  • विषमबाहु त्रिभुज: तीनों भुजाएँ असमान। तीनों कोण असमान।
  • कोणों के आधार पर:
  • न्यूनकोण त्रिभुज: सभी कोण 90° से कम।
  • समकोण त्रिभुज: एक कोण 90°।
  • अधिककोण त्रिभुज: एक कोण 90° से अधिक।
महत्त्वपूर्ण

त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।

📖परिभाषा

सम्मुख कोण: किसी भुजा के सामने वाला कोण। सम्मुख भुजा: किसी कोण के सामने वाली भुजा।

भुजाओं और कोणों के बीच संबंध

सबसे बड़ी भुजा के सम्मुख सबसे बड़ा कोण
सबसे बड़ी भुजा के सम्मुख सबसे बड़ा कोण
सबसे छोटी भुजा के सम्मुख सबसे छोटा कोण
सबसे छोटी भुजा के सम्मुख सबसे छोटा कोण
समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण
समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण
समबाहु त्रिभुज में भुजाओं और कोणों का संबंध
समबाहु त्रिभुज में भुजाओं और कोणों का संबंध

त्रिभुज में भुजाओं और उनके सम्मुख कोणों के बीच गहरा संबंध होता है।

  • सबसे बड़ी भुजा और सबसे बड़ा कोण:
  • किसी त्रिभुज में, सबसे बड़ी भुजा के सम्मुख कोण सबसे बड़ा होता है
  • इसका विलोम भी सत्य है: सबसे बड़े कोण के सम्मुख भुजा सबसे लंबी होती है
  • सबसे छोटी भुजा और सबसे छोटा कोण:
  • किसी त्रिभुज में, सबसे छोटी भुजा के सम्मुख कोण सबसे छोटा होता है
  • इसका विलोम भी सत्य है: सबसे छोटे कोण के सम्मुख भुजा सबसे छोटी होती है
  • समद्विबाहु त्रिभुज में संबंध:
  • यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाएँ बराबर हों, तो उनके सम्मुख कोण भी बराबर होते हैं
  • यदि किसी त्रिभुज के दो कोण बराबर हों, तो उनके सम्मुख भुजाएँ भी बराबर होती हैं
  • समबाहु त्रिभुज में संबंध:
  • समबाहु त्रिभुज की तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं।
  • इसलिए, इसके तीनों कोण भी बराबर होते हैं (प्रत्येक 60° का)।
  • इसका विलोम भी सत्य है: यदि किसी त्रिभुज के तीनों कोण बराबर हों, तो वह समबाहु त्रिभुज होता है।
💡सुझाव

यह गुणधर्म त्रिभुज की अज्ञात भुजाओं या कोणों को ज्ञात करने में बहुत उपयोगी है। प्रश्नों में अक्सर इसका उपयोग होता है।

त्रिभुज के कोणों पर आधारित प्रश्न

समद्विबाहु त्रिभुज के कोणों की गणना
समद्विबाहु त्रिभुज के कोणों की गणना
समबाहु त्रिभुज के कोण
समबाहु त्रिभुज के कोण
चर वाले कोणों का मान ज्ञात करना
चर वाले कोणों का मान ज्ञात करना

त्रिभुज के कोणों से संबंधित प्रश्नों को हल करने के लिए कोण योग गुण (180°) और भुजा-कोण संबंधों का उपयोग किया जाता है।

  • समद्विबाहु त्रिभुज के कोण:
  • यदि एक कोण दिया हो, तो शेष दो बराबर कोणों को \(x\) मानकर समीकरण बनाएं।
  • उदाहरण: यदि शीर्ष कोण \(80^\circ\) है, तो \(x + x + 80^\circ = 180^\circ \Rightarrow 2x = 100^\circ \Rightarrow x = 50^\circ\)।
  • समबाहु त्रिभुज के कोण:
  • सभी कोण बराबर होते हैं।
  • प्रत्येक कोण \(180^\circ / 3 = 60^\circ\) होता है।
  • अज्ञात कोणों का मान ज्ञात करना (चर के रूप में):
  • यदि कोणों को चर (जैसे \(y, 3y, 5y\)) के रूप में दिया गया हो।
  • सभी कोणों को जोड़कर \(180^\circ\) के बराबर रखें।
  • समीकरण हल करके चर का मान ज्ञात करें।
  • चर का मान प्रत्येक कोण में रखकर वास्तविक माप निकालें।
  • उदाहरण: \(y + 3y + 5y = 180^\circ \Rightarrow 9y = 180^\circ \Rightarrow y = 20^\circ\)।
  • कोण: \(20^\circ, 3 \times 20^\circ = 60^\circ, 5 \times 20^\circ = 100^\circ\)।
💡सुझाव

कोणों को चर के रूप में देने वाले प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। हल करते समय सभी कोणों का योग 180° के बराबर रखना न भूलें।

त्रिभुज की माध्यिकाएँ और उनका निर्माण

माध्यिका की परिभाषा
माध्यिका की परिभाषा
कागज मोड़कर मध्य-बिंदु ज्ञात करना
कागज मोड़कर मध्य-बिंदु ज्ञात करना
परकार से रेखाखंड का मध्य-बिंदु बनाना
परकार से रेखाखंड का मध्य-बिंदु बनाना

माध्यिका त्रिभुज के महत्वपूर्ण रेखाखंडों में से एक है।

  • माध्यिका की परिभाषा:
  • त्रिभुज की माध्यिका वह रेखाखंड है जो किसी शीर्ष को उसकी सम्मुख भुजा के मध्य-बिंदु से जोड़ता है
  • प्रत्येक त्रिभुज में तीन माध्यिकाएँ होती हैं (प्रत्येक शीर्ष से एक)।
  • माध्यिकाएँ हमेशा त्रिभुज के अंदर स्थित होती हैं।
  • मध्य-बिंदु ज्ञात करने की विधियाँ:
  • कागज मोड़कर:
  1. त्रिभुज की किसी भुजा के दोनों शीर्षों को एक साथ मिलाकर कागज को मोड़ें।
  2. बनी हुई क्रीज उस भुजा का मध्य-बिंदु दर्शाएगी।
  • परकार से (लंब समद्विभाजक विधि):
  1. रेखाखंड AB का मध्य-बिंदु ज्ञात करने के लिए, परकार को AB की लंबाई के आधे से अधिक खोलें।
  2. बिंदु A पर परकार रखकर AB के ऊपर और नीचे चाप खींचें।
  3. उसी माप से बिंदु B पर परकार रखकर पहले वाले चापों को काटते हुए दूसरे चाप खींचें।
  4. इन चापों के कटान बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा (लंब समद्विभाजक) AB को जिस बिंदु पर काटती है, वही उसका मध्य-बिंदु होता है।
📖परिभाषा

माध्यिका: शीर्ष से सम्मुख भुजा के मध्य-बिंदु को मिलाने वाला रेखाखंड।

याद रखें

माध्यिकाएँ त्रिभुज को दो बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभाजित करती हैं

केन्द्रक और माध्यिकाओं के गुण

माध्यिकाओं का संगामी बिंदु: केन्द्रक
माध्यिकाओं का संगामी बिंदु: केन्द्रक
केन्द्रक का माध्यिका को विभाजित करने का अनुपात
केन्द्रक का माध्यिका को विभाजित करने का अनुपात
विशेष त्रिभुजों में माध्यिकाओं के गुण
विशेष त्रिभुजों में माध्यिकाओं के गुण

माध्यिकाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु और उनके विशेष गुण।

  • माध्यिकाओं की संगामिता:
  • त्रिभुज की तीनों माध्यिकाएँ हमेशा एक ही बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं
  • इस गुण को माध्यिकाओं की संगामिता कहते हैं।
  • केन्द्रक (Centroid):
  • जिस बिंदु पर तीनों माध्यिकाएँ प्रतिच्छेद करती हैं, उसे त्रिभुज का केन्द्रक कहते हैं।
  • केन्द्रक हमेशा त्रिभुज के आंतरिक भाग में स्थित होता है।
  • केन्द्रक त्रिभुज का द्रव्यमान केंद्र होता है।
  • केन्द्रक का माध्यिका को विभाजित करने का अनुपात:
  • केन्द्रक प्रत्येक माध्यिका को शीर्ष से सम्मुख भुजा के मध्य-बिंदु की ओर 2:1 के अनुपात में विभाजित करता है
  • उदाहरण: यदि AD एक माध्यिका है और G केन्द्रक है, तो \(AG : GD = 2 : 1\)।
  • विशेष त्रिभुजों में माध्यिकाओं के गुण:
  • समबाहु त्रिभुज:
  • तीनों माध्यिकाएँ लंबाई में समान होती हैं।
  • प्रत्येक माध्यिका अपनी सम्मुख भुजा पर लंब होती है।
  • समद्विबाहु त्रिभुज:
  • समान भुजाओं से खींची गई माध्यिकाएँ लंबाई में बराबर होती हैं।
🧮सूत्र

केन्द्रक का अनुपात: शीर्ष से केन्द्रक तक की दूरी : केन्द्रक से मध्य-बिंदु तक की दूरी = 2 : 1

💡सुझाव

केन्द्रक से संबंधित अनुपात वाले प्रश्न अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछे जाते हैं। इसे अच्छे से समझें।

रेखाखण्ड पर लम्ब की रचना

लम्ब की रचना की स्थितियाँ
लम्ब की रचना की स्थितियाँ
जब बिन्दु रेखाखण्ड पर स्थित हो
जब बिन्दु रेखाखण्ड पर स्थित हो
जब बिन्दु रेखाखण्ड के बाहर स्थित हो
जब बिन्दु रेखाखण्ड के बाहर स्थित हो

किसी रेखाखंड पर लंब खींचने की दो मुख्य स्थितियाँ होती हैं, जिनके लिए अलग-अलग रचना चरण होते हैं।

  • स्थिति 1: जब बिंदु रेखाखंड पर स्थित हो
  1. एक रेखाखंड AB खींचें और उस पर एक बिंदु P चिह्नित करें।
  2. P को केंद्र मानकर, किसी भी त्रिज्या का एक चाप खींचें जो AB को दो बिंदुओं Q और R पर काटे।
  3. Q और R को केंद्र मानकर, QR के आधे से अधिक त्रिज्या के दो चाप खींचें जो एक-दूसरे को रेखाखंड के ऊपर (या नीचे) बिंदु M पर काटें।
  4. M और P को मिलाएँ। रेखाखंड MP, AB पर लंब होगा (\(MP \perp AB\))।
  • स्थिति 2: जब बिंदु रेखाखंड के बाहर स्थित हो
  1. एक रेखाखंड AB खींचें और उसके बाहर एक बिंदु P चिह्नित करें।
  2. P को केंद्र मानकर, एक चाप खींचें जो रेखाखंड AB को दो बिंदुओं Q और R पर काटे। (त्रिज्या इतनी हो कि चाप AB को काटे)
  3. Q और R को केंद्र मानकर, QR के आधे से अधिक त्रिज्या के दो चाप खींचें जो एक-दूसरे को रेखाखंड के दूसरी ओर (P के विपरीत) बिंदु S पर काटें।
  4. P और S को मिलाएँ। रेखाखंड PS, AB को जिस बिंदु M पर काटता है, वही लंब बिंदु होगा (\(PM \perp AB\))।
याद रखें

लंब खींचने की प्रक्रिया में परकार और रूलर का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।

त्रिभुज के शीर्षलम्ब और लम्बकेन्द्र

शीर्षलम्ब की परिभाषा
शीर्षलम्ब की परिभाषा
शीर्षलम्बों का संगामी बिंदु
शीर्षलम्बों का संगामी बिंदु
लम्बकेन्द्र क्या है?
लम्बकेन्द्र क्या है?
त्रिभुज के प्रकार और लम्बकेन्द्र की स्थिति
त्रिभुज के प्रकार और लम्बकेन्द्र की स्थिति

शीर्षलंब त्रिभुज के शीर्ष से सम्मुख भुजा पर खींचा गया लंब होता है।

  • शीर्षलम्ब की परिभाषा:
  • त्रिभुज का शीर्षलम्ब वह रेखाखंड है जो त्रिभुज के किसी शीर्ष से उसकी सम्मुख भुजा पर लंबवत होता है
  • यह शीर्ष से सम्मुख भुजा तक की सबसे छोटी दूरी होती है।
  • प्रत्येक त्रिभुज में तीन शीर्षलंब होते हैं।
  • शीर्षलम्बों की संगामिता:
  • त्रिभुज के तीनों शीर्षलंब हमेशा एक ही बिंदु पर प्रतिच्छेद करते हैं
  • इस गुण को शीर्षलंबों की संगामिता कहते हैं।
  • लम्बकेन्द्र (Orthocenter):
  • जिस बिंदु पर तीनों शीर्षलंब एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करते हैं, उसे त्रिभुज का लम्बकेन्द्र कहते हैं।
  • त्रिभुज के प्रकार और लम्बकेन्द्र की स्थिति:
  • न्यूनकोण त्रिभुज: लम्बकेन्द्र त्रिभुज के अंदर स्थित होता है।
  • समकोण त्रिभुज: लम्बकेन्द्र समकोण बनाने वाले शीर्ष पर स्थित होता है।
  • अधिककोण त्रिभुज: लम्बकेन्द्र त्रिभुज के बाहर स्थित होता है।
  • शीर्षलंब की रचना के चरण (उदाहरण A से BC पर):
  1. A को केंद्र मानकर एक चाप लगाएँ जो भुजा BC को दो बिंदुओं पर काटे।
  2. इन दोनों बिंदुओं को केंद्र मानकर, आधे से अधिक त्रिज्या के दो चाप लगाएँ जो एक-दूसरे को बिंदु D पर काटें।
  3. A और D को मिलाएँ। रेखाखंड AD, भुजा BC पर लंब होगा।
📖परिभाषा

शीर्षलम्ब: शीर्ष से सम्मुख भुजा पर खींचा गया लंब। लम्बकेन्द्र: तीनों शीर्षलंबों का प्रतिच्छेदन बिंदु।

महत्त्वपूर्ण

लम्बकेन्द्र की स्थिति त्रिभुज के प्रकार पर निर्भर करती है (अंदर, शीर्ष पर, या बाहर)।

Ask SAAVI — Free