कोण, रेखीय युग्म एवं तिर्यक रेखाएँ
यह अध्याय छात्रों को ज्यामिति के महत्वपूर्ण अवधारणाओं से परिचित कराता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कोणों और रेखाओं के बीच के संबंध शामिल हैं। आप आसन्न कोणों, रैखिक युग्मों, शीर्षाभिमुख कोणों, पूरक और संपूरक कोणों की पहचान करना और उनके गुणों को समझना सीखेंगे। इसके अतिरिक्त, अध्याय तिर्यक रेखाओं द्वारा बनने वाले कोणों जैसे संगत कोण, एकांतर कोण और अंतःकोणों पर भी प्रकाश डालता है, जो समानांतर रेखाओं के गुणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह ज्ञान आगे की ज्यामितीय अवधारणाओं के लिए एक मजबूत आधार बनाता है।
आसन्न कोण
आसन्न कोण (Adjacent Angles) वे कोण होते हैं जिनमें निम्नलिखित तीन शर्तें पूरी होती हैं:
- उभयनिष्ठ शीर्ष: दोनों कोणों का एक ही शीर्ष (vertex) होता है।
- उभयनिष्ठ भुजा: दोनों कोणों की एक उभयनिष्ठ भुजा (common arm) होती है।
- गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ: उभयनिष्ठ भुजा के अलावा, उनकी अन्य दो भुजाएँ (non-common arms) उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत दिशाओं में स्थित होती हैं।
उदाहरण: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t1_scene1] में, \(\angle COB\) और \(\angle BOA\) आसन्न कोण हैं क्योंकि उनका शीर्ष \(O\) उभयनिष्ठ है, भुजा \(OB\) उभयनिष्ठ है, और \(OC\) तथा \(OA\) भुजाएँ \(OB\) के विपरीत दिशाओं में हैं।
महत्वपूर्ण: यदि गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ उभयनिष्ठ भुजा के एक ही तरफ हों, तो कोण आसन्न नहीं होंगे। [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t1_scene3] में \(\angle IJK\) और \(\angle KJL\) आसन्न कोण हैं।
आसन्न कोण: दो कोणों को आसन्न कोण कहा जाता है यदि उनका एक उभयनिष्ठ शीर्ष हो, एक उभयनिष्ठ भुजा हो, और उनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत दिशाओं में हों।
रैखिक युग्म
रैखिक युग्म (Linear Pair) दो आसन्न कोणों का एक विशेष प्रकार है।
- ये हमेशा आसन्न कोण होते हैं।
- इनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सीधी रेखा बनाती हैं।
- इन दोनों कोणों का योग हमेशा 180 डिग्री \((180^\circ)\) होता है।
- इन्हें सरल रेखीय आसन्न कोण या रेखीय कोण भी कहते हैं।
उदाहरण: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t2_scene1] में, \(\angle क घ ग\) और \(\angle ख घ ग\) एक रैखिक युग्म बनाते हैं क्योंकि वे आसन्न हैं और उनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सीधी रेखा बनाती हैं। अतः, \(\angle क घ ग + \angle ख घ ग = 180^\circ\)।
रैखिक युग्म: दो आसन्न कोण जिनका योग \(180^\circ\) होता है और जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सीधी रेखा बनाती हैं।
एक सीधी रेखा पर बने सभी कोणों का योग \(180^\circ\) होता है।
शीर्षाभिमुख कोण
जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं, तो उन्हें प्रतिच्छेदी रेखाएँ कहते हैं। प्रतिच्छेदन बिंदु पर चार कोण बनते हैं।
- शीर्षाभिमुख कोण: दो प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बनने वाले कोणों के ऐसे युग्म जो एक-दूसरे के ठीक विपरीत स्थित होते हैं, शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं।
- इन कोणों का शीर्ष बिंदु एक ही होता है।
- इनकी भुजाएँ एक-दूसरे की विपरीत किरणें होती हैं।
उदाहरण: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t3_scene2] में, \(\angle AOD\) और \(\angle BOC\) शीर्षाभिमुख कोणों का एक युग्म हैं। इसी प्रकार, \(\angle AOC\) और \(\angle BOD\) दूसरा युग्म हैं।
शीर्षाभिमुख कोण: दो प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बनने वाले विपरीत कोण।
शीर्षाभिमुख कोणों का गुणधर्म
शीर्षाभिमुख कोणों का सबसे महत्वपूर्ण गुणधर्म यह है कि वे हमेशा माप में बराबर होते हैं।
- यदि दो रेखाएँ \(AB\) और \(CD\) बिंदु \(O\) पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो:
- \(\angle AOC = \angle BOD\)
- \(\angle AOD = \angle BOC\)
क्रियाकलाप से समझें: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t4_scene4] झाड़ू की दो सींकों को एक पिन से जोड़कर प्रतिच्छेदी रेखाओं का मॉडल बनाया जा सकता है। जब इन सींकों को घुमाया जाता है, तो उनके बीच बनने वाले सम्मुख कोणों (शीर्षाभिमुख कोणों) को मापने पर यह पाया जाता है कि वे हमेशा समान माप के होते हैं। यह प्रायोगिक रूप से शीर्षाभिमुख कोणों की समानता को सिद्ध करता है।
शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं।
पूरक कोण
पूरक कोण (Complementary Angles) वे दो कोण होते हैं जिनकी मापों का योग ठीक \(90^\circ\) (एक समकोण) होता है।
- यदि दो कोणों को एक साथ रखा जाए और वे मिलकर एक समकोण बनाते हों, तो वे एक-दूसरे के पूरक कोण कहलाते हैं।
- यदि एक कोण \(x\) है, तो उसका पूरक कोण \((90^\circ - x)\) होगा।
उदाहरण:
- यदि एक कोण \(40^\circ\) का है, तो उसका पूरक कोण \(50^\circ\) होगा, क्योंकि \(40^\circ + 50^\circ = 90^\circ\)।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t5_scene1] में \(\angle ABC + \angle CBD = 90^\circ\) है, इसलिए \(\angle ABC\) और \(\angle CBD\) परस्पर पूरक कोण हैं।
पूरक कोण: दो कोण जिनकी मापों का योग \(90^\circ\) होता है।
सम्पूरक कोण
सम्पूरक कोण (Supplementary Angles) वे दो कोण होते हैं जिनकी मापों का योग ठीक \(180^\circ\) (दो समकोण) होता है।
- यदि दो कोणों को एक साथ रखा जाए और वे मिलकर एक सरल रेखा बनाते हों, तो वे एक-दूसरे के संपूरक कोण कहलाते हैं।
- यदि एक कोण \(x\) है, तो उसका संपूरक कोण \((180^\circ - x)\) होगा।
उदाहरण:
- यदि एक कोण \(125^\circ\) का है, तो उसका संपूरक कोण \(55^\circ\) होगा, क्योंकि \(125^\circ + 55^\circ = 180^\circ\)。
- चित्र 12.19 में \(\angle क ख ग + \angle ग ख घ = 180^\circ\) है, इसलिए \(\angle क ख ग\) और \(\angle ग ख घ\) परस्पर संपूरक कोण हैं।
सम्पूरक कोण: दो कोण जिनकी मापों का योग \(180^\circ\) होता है।
पूरक और संपूरक कोणों के योग को अक्सर भ्रमित किया जाता है। याद रखें: Poorak (पूरक) = Pehla (पहला) = \(90^\circ\), Sampoorak (संपूरक) = Second (दूसरा) = \(180^\circ\) (या 'स' से 'सीधा' कोण = \(180^\circ\))।
तिर्यक रेखा
एक तिर्यक रेखा (Transversal) एक ऐसी रेखा होती है जो एक ही समतल में स्थित दो या दो से अधिक अन्य रेखाओं को कम से कम दो अलग-अलग बिंदुओं पर प्रतिच्छेदित करती है।
- ये रेखाएँ समांतर हो सकती हैं या नहीं भी हो सकती हैं।
- तिर्यक रेखा अन्य रेखाओं के साथ कोणों का एक अनूठा सेट बनाती है।
उदाहरण: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t7_scene2] में रेखा \(n\) रेखाओं \(l\) और \(m\) को अलग-अलग बिंदुओं \(P\) और \(Q\) पर काटती है, इसलिए \(n\) एक तिर्यक रेखा है।
तिर्यक रेखा: वह रेखा जो दो या दो से अधिक रेखाओं को अलग-अलग बिंदुओं पर काटती है।
तिर्यक रेखा और संगामी रेखाओं में अंतर
तिर्यक रेखा और संगामी रेखाओं के बीच मुख्य अंतर उनकी प्रतिच्छेदन शैली में है:
- तिर्यक रेखा: दो या दो से अधिक रेखाओं को अलग-अलग बिंदुओं पर काटती है। [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t8_scene1]
- संगामी रेखाएँ: तीन या तीन से अधिक रेखाएँ जो एक ही बिंदु से होकर गुजरती हैं। इस बिंदु को संगामी बिंदु कहते हैं। [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t8_scene2]
तुलना: | विशेषता | तिर्यक रेखा | संगामी रेखाएँ | |:-------------|:-------------------------------------------|:------------------------------------------| | रेखाओं की संख्या | 2 या अधिक | 3 या अधिक | | प्रतिच्छेदन बिंदु | अलग-अलग बिंदु | एक ही बिंदु | | उदाहरण | सड़क पर क्रॉसिंग, रेलवे ट्रैक पर क्रॉसिंग | त्रिभुज की माध्यिकाएँ, शीर्षलम्ब |
[IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t8_scene3] तिर्यक रेखा और संगामी रेखाओं में अंतर को दर्शाता है।
एक तिर्यक रेखा के लिए रेखाओं का समांतर होना आवश्यक नहीं है, लेकिन संगामी रेखाएँ हमेशा एक ही बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं।
तिर्यक रेखा द्वारा बने कोण: अन्तःकोण और बाह्य कोण
जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को काटती है, तो कुल 8 कोण बनते हैं। इन कोणों को उनकी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t10_scene1]
- अन्तःकोण (Interior Angles): वे कोण जो तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित की जा रही दो रेखाओं के 'अंदर' के क्षेत्र में बनते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t11_scene1] में, \(\angle 3, \angle 4, \angle 5\) और \(\angle 6\) अन्तःकोण हैं।
- बाह्य कोण (Exterior Angles): वे कोण जो तिर्यक रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित की जा रही दो रेखाओं के 'बाहर' के क्षेत्र में बनते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t11_scene3] में, \(\angle 1, \angle 2, \angle 7\) और \(\angle 8\) बाह्य कोण हैं।
चित्र 12.33 में रेखाएँ \(l\) और \(m\) को तिर्यक रेखा \(n\) काट रही है, जिससे \(8\) कोण बने हैं।
एक तिर्यक रेखा किन्हीं दो रेखाओं पर कुल 8 कोण बनाती है।
संगत कोण
संगत कोण (Corresponding Angles) वे कोण होते हैं जो तिर्यक रेखा के एक ही ओर स्थित होते हैं और दोनों रेखाओं के सापेक्ष एक ही स्थिति में होते हैं।
- ये कोण एक ही बिंदु पर नहीं बनते हैं।
- इनमें से एक बाह्य कोण होता है और एक अंतःकोण होता है।
युग्म: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t10_scene2] में, तिर्यक रेखा \(n\) द्वारा रेखाओं \(l\) और \(m\) को काटने पर बने संगत कोणों के युग्म:
- \(\angle 1\) और \(\angle 5\) (दोनों रेखाओं के ऊपर, तिर्यक रेखा के दाईं ओर)
- \(\angle 2\) और \(\angle 6\) (दोनों रेखाओं के नीचे, तिर्यक रेखा के दाईं ओर)
- \(\angle 4\) और \(\angle 8\) (दोनों रेखाओं के ऊपर, तिर्यक रेखा के बाईं ओर)
- \(\angle 3\) और \(\angle 7\) (दोनों रेखाओं के नीचे, तिर्यक रेखा के बाईं ओर)
विशेषता (समांतर रेखाओं के लिए): यदि रेखाएँ समांतर हों, तो संगत कोणों के प्रत्येक युग्म बराबर होते हैं।
संगत कोण: तिर्यक रेखा के एक ही ओर और दोनों रेखाओं के सापेक्ष एक ही स्थिति में बने कोण।
एकांतर कोण (अन्तः एवं बाह्य)
एकांतर कोण (Alternate Angles) वे कोण होते हैं जो तिर्यक रेखा के विपरीत दिशा में स्थित होते हैं और एक-दूसरे से सटे हुए नहीं होते हैं। इन्हें दो प्रकारों में बांटा गया है:
- एकांतर अन्तः कोण (Alternate Interior Angles):
- ये तिर्यक रेखा के विपरीत दिशा में और दो रेखाओं के अंदर की ओर स्थित होते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t11_scene2] में, \((\angle 3\) और \(\angle 6)\) तथा \((\angle 4\) और \(\angle 5)\) एकांतर अन्तः कोणों के युग्म हैं।
- एकांतर बाह्य कोण (Alternate Exterior Angles):
- ये तिर्यक रेखा के विपरीत दिशा में और दो रेखाओं के बाहर की ओर स्थित होते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t11_scene4] में, \((\angle 1\) और \(\angle 8)\) तथा \((\angle 2\) और \(\angle 7)\) एकांतर बाह्य कोणों के युग्म हैं।
विशेषता (समांतर रेखाओं के लिए): यदि रेखाएँ समांतर हों, तो एकांतर अन्तः कोणों के प्रत्येक युग्म और एकांतर बाह्य कोणों के प्रत्येक युग्म बराबर होते हैं।
एकांतर अन्तः कोण: तिर्यक रेखा के विपरीत ओर और रेखाओं के अंदर बने कोण। एकांतर बाह्य कोण: तिर्यक रेखा के विपरीत ओर और रेखाओं के बाहर बने कोण।
तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण
तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण (Consecutive Interior Angles / Co-interior Angles) वे कोण होते हैं जो तिर्यक रेखा के एक ही तरफ और दो रेखाओं के अंदर की ओर स्थित होते हैं।
- इन्हें 'सह-आंतरिक कोण' या 'क्रमागत अंतःकोण' भी कहते हैं।
- ये कोण एक ही बिंदु पर नहीं बनते हैं।
युग्म: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t12_scene3] में, तिर्यक रेखा \(n\) द्वारा रेखाओं \(l\) और \(m\) को काटने पर बने तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोणों के युग्म:
- \(\angle 3\) और \(\angle 5\) (तिर्यक रेखा के बाईं ओर)
- \(\angle 4\) और \(\angle 6\) (तिर्यक रेखा के दाईं ओर)
विशेषता (समांतर रेखाओं के लिए): यदि रेखाएँ समांतर हों, तो तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोणों का योग हमेशा \(180^\circ\) होता है (अर्थात् वे संपूरक होते हैं)।
तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण: तिर्यक रेखा के एक ही तरफ और रेखाओं के अंदर बने कोण।
समान्तर रेखाएँ
समान्तर रेखाएँ (Parallel Lines) वे रेखाएँ होती हैं जो एक ही समतल में स्थित होती हैं और जिन्हें कितना भी आगे बढ़ाने पर वे कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
- इन रेखाओं के बीच की लंबवत दूरी हमेशा समान रहती है।
- इन्हें \(||\) प्रतीक से दर्शाया जाता है, जैसे \(l \parallel m\) का अर्थ है रेखा \(l\) रेखा \(m\) के समांतर है।
उदाहरण: रेलवे ट्रैक की पटरियाँ, ब्लैकबोर्ड के विपरीत किनारे, इत्यादि।
समान्तर रेखाएँ: एक ही समतल में स्थित वे रेखाएँ जो कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं और जिनके बीच की लंबवत दूरी सदैव समान रहती है।
समान्तर रेखाओं को तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर बने कोणों के गुणधर्म
जब दो समांतर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा काटती है, तो बनने वाले कोणों में विशेष संबंध होते हैं। ये गुणधर्म ज्यामिति में बहुत महत्वपूर्ण हैं:
- संगत कोण युग्म: संगत कोणों के प्रत्येक युग्म बराबर होते हैं।
- उदाहरण: \(\angle 1 = \angle 5, \angle 2 = \angle 6, \angle 3 = \angle 7, \angle 4 = \angle 8\) (चित्र 12.40 के अनुसार)।
- एकांतर अन्तः कोण युग्म: एकांतर अन्तः कोणों के प्रत्येक युग्म बराबर होते हैं।
- उदाहरण: \(\angle 3 = \angle 6, \angle 4 = \angle 5\) (चित्र 12.45 के अनुसार)।
- एकांतर बाह्य कोण युग्म: एकांतर बाह्य कोणों के प्रत्येक युग्म बराबर होते हैं।
- उदाहरण: \(\angle 1 = \angle 8, \angle 2 = \angle 7\) (चित्र 12.45 के अनुसार)।
- तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण: तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अन्तःकोण संपूरक होते हैं (अर्थात् उनका योग \(180^\circ\) होता है)।
- उदाहरण: \(\angle 3 + \angle 5 = 180^\circ, \angle 4 + \angle 6 = 180^\circ\) (चित्र 12.45 के अनुसार)।
- शीर्षाभिमुख कोण: शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं।
- उदाहरण: \(\angle 1 = \angle 3, \angle 2 = \angle 4, \angle 5 = \angle 7, \angle 6 = \angle 8\) (चित्र 12.40 के अनुसार)।
- रैखिक युग्म: रैखिक युग्म बनाने वाले कोणों का योग हमेशा \(180^\circ\) होता है।
- उदाहरण: \(\angle 1 + \angle 2 = 180^\circ, \angle 1 + \angle 4 = 180^\circ\) आदि।
समांतर रेखाओं के गुणधर्म (तिर्यक रेखा द्वारा काटने पर):
- संगत कोण = बराबर
- एकांतर कोण = बराबर
- तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण = संपूरक (योग \(180^\circ\))
समान्तर रेखाओं की कसौटी
उपरोक्त गुणधर्मों का उपयोग यह जाँचने के लिए किया जा सकता है कि दो रेखाएँ समांतर हैं या नहीं। यदि दो रेखाओं को एक तिर्यक रेखा काटती है और निम्नलिखित में से कोई भी एक शर्त पूरी होती है, तो वे रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं:
- संगत कोणों की कसौटी: यदि संगत कोणों का एक युग्म बराबर हो, तो रेखाएँ समांतर होती हैं। [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t15_scene1]
- यदि \(\angle 1 = \angle 5\), तो \(l \parallel m\)।
- एकांतर अन्तः कोणों की कसौटी: यदि एकांतर अन्तः कोणों का एक युग्म बराबर हो, तो रेखाएँ समांतर होती हैं। [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t15_scene2]
- यदि \(\angle 3 = \angle 6\), तो \(l \parallel m\)।
- तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोणों की कसौटी: यदि तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोणों का योग \(180^\circ\) हो (अर्थात् वे संपूरक हों), तो रेखाएँ समांतर होती हैं। [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t15_scene3]
- यदि \(\angle 3 + \angle 5 = 180^\circ\), तो \(l \parallel m\)।
निष्कर्ष: इन कसौटियों का उपयोग करके हम अज्ञात कोणों का मान ज्ञात कर सकते हैं या रेखाओं की समांतरता सिद्ध कर सकते हैं।
समांतरता सिद्ध करने के लिए, केवल एक युग्म के कोणों की समानता या योग \(180^\circ\) पर्याप्त है।
समान्तर रेखाओं और तिर्यक रेखा पर आधारित प्रश्नों को हल करना
समांतर रेखाओं और तिर्यक रेखा से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए, हमें ऊपर बताए गए सभी कोण संबंधों का उपयोग करना होता है।
समस्या-समाधान के चरण:
- दिए गए कोणों को पहचानें: प्रश्न में कौन से कोण दिए गए हैं और कौन से ज्ञात करने हैं।
- रेखाओं की प्रकृति पहचानें: क्या रेखाएँ समांतर हैं? यदि हाँ, तो कौन से गुणधर्म लागू होंगे।
- कोण संबंधों का उपयोग करें:
- शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं।
- रैखिक युग्म का योग \(180^\circ\) होता है।
- यदि रेखाएँ समांतर हैं, तो:
- संगत कोण बराबर होते हैं।
- एकांतर कोण बराबर होते हैं।
- तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अन्तःकोण संपूरक होते हैं (योग \(180^\circ\))।
- समीकरण बनाएँ और हल करें: अज्ञात कोणों के मान ज्ञात करने के लिए इन संबंधों का उपयोग करके समीकरण बनाएँ।
उदाहरण: [IMAGE: cg_c7_maths_ch12_t16_scene1] में, यदि \(l \parallel m\) और \(\angle 1 = 60^\circ\), तो:
- \(\angle 3 = \angle 1 = 60^\circ\) (शीर्षाभिमुख कोण)
- \(\angle 5 = \angle 1 = 60^\circ\) (संगत कोण)
- \(\angle 7 = \angle 5 = 60^\circ\) (शीर्षाभिमुख कोण)
- \(\angle 2 = 180^\circ - \angle 1 = 180^\circ - 60^\circ = 120^\circ\) (रैखिक युग्म)
- \(\angle 4 = \angle 2 = 120^\circ\) (शीर्षाभिमुख कोण)
- \(\angle 6 = \angle 2 = 120^\circ\) (संगत कोण)
- \(\angle 8 = \angle 6 = 120^\circ\) (शीर्षाभिमुख कोण)
इस प्रकार, सभी कोणों का मान ज्ञात किया जा सकता है।
किसी भी ज्यामितीय समस्या को हल करते समय, सबसे पहले चित्र को ध्यान से देखें और सभी ज्ञात कोणों और रेखाओं को चिह्नित करें। फिर, लागू होने वाले गुणधर्मों की सूची बनाएँ।