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अम्ल, क्षारक एवं लवण
Chhattisgarh · Class 7 · 🔬 Science · Chapter 4

अम्ल, क्षारक एवं लवण

अम्लक्षारकलवणसूचकउदासीनीकरणप्राकृतिक अम्ल

यह अध्याय छात्रों को अम्ल, क्षारक और लवण की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराता है। इसमें विभिन्न प्रकार के सूचकों (जैसे लिटमस, गुड़हल का फूल, मिथाइल ऑरेंज, फिनॉलफ्थेलीन) का उपयोग करके इन पदार्थों की पहचान करना सिखाया जाता है। छात्र प्राकृतिक अम्लों के स्रोतों और खनिज अम्लों के उपयोगों के बारे में सीखते हैं। क्षारों के गुण और उपयोग भी समझाए गए हैं। उदासीनीकरण अभिक्रिया और लवणों के निर्माण तथा उनके दैनिक जीवन में उपयोगों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह अध्याय छात्रों को रसायन विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों को समझने में मदद करता है।

पदार्थों की अम्लीय, क्षारीय और उदासीन प्रकृति की पहचान

हल्दी का जादू: एक प्राकृतिक सूचक
हल्दी का जादू: एक प्राकृतिक सूचक
लिटमस पेपर: प्रकृति का रंगीन पैमाना
लिटमस पेपर: प्रकृति का रंगीन पैमाना
अम्लीय, क्षारीय और उदासीन पदार्थ
अम्लीय, क्षारीय और उदासीन पदार्थ
विभिन्न पदार्थों का परीक्षण
विभिन्न पदार्थों का परीक्षण

हमारे दैनिक जीवन में कई ऐसे पदार्थ हैं जिनका स्वाद खट्टा, कड़वा या बेस्वाद होता है। इन स्वादों के आधार पर हम पदार्थों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में बाँट सकते हैं: अम्लीय, क्षारीय और उदासीन

  • अम्लीय पदार्थ:
  • स्वाद में खट्टे होते हैं।
  • नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं।
  • उदाहरण: नींबू का रस, इमली का रस, सिरका।
  • क्षारीय पदार्थ:
  • स्वाद में कड़वे होते हैं।
  • छूने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं।
  • लाल लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं।
  • उदाहरण: कपड़े धोने का सोडा, खाने का सोडा, साबुन का घोल।
  • उदासीन पदार्थ:
  • न तो खट्टे होते हैं और न ही कड़वे।
  • लिटमस पेपर के रंग में कोई परिवर्तन नहीं करते।
  • उदाहरण: शक्कर का विलयन, नमक का विलयन, शुद्ध जल।

हल्दी का सूचक के रूप में उपयोग:

  • हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है।
  • अम्लीय या उदासीन पदार्थों के साथ हल्दी का रंग पीला रहता है।
  • क्षारीय पदार्थों (जैसे साबुन) के संपर्क में आने पर हल्दी का रंग लाल-भूरा हो जाता है।
  • यदि लाल-भूरे हल्दी के दाग पर नींबू का रस (अम्लीय) डाला जाए, तो रंग वापस पीला हो जाता है, जो उदासीनीकरण को दर्शाता है।

लिटमस पेपर का उपयोग:

  • लिटमस पेपर लाइकेन नामक पौधे से प्राप्त होता है।
  • यह सबसे सामान्य रूप से उपयोग किया जाने वाला प्राकृतिक सूचक है।
  • दो प्रकार के होते हैं: नीला लिटमस और लाल लिटमस
  • अम्ल: नीले लिटमस को लाल करते हैं।
  • क्षारक: लाल लिटमस को नीला करते हैं।
  • उदासीन: लिटमस पेपर पर कोई प्रभाव नहीं डालते।

क्रियाकलाप 1 (हल्दी परीक्षण):

  1. हल्दी का गाढ़ा घोल बनाएँ।
  2. सफेद कपड़े पर हल्दी के घोल की कुछ बूँदें डालें।
  3. उस स्थान पर साबुन रगड़ें: हल्दी का पीला रंग लाल-भूरा हो जाएगा।
  4. इस लाल-भूरे दाग पर नींबू का रस डालें: रंग पुनः पीला हो जाएगा।
  • निष्कर्ष: साबुन क्षारीय है, नींबू का रस अम्लीय है, और ये एक-दूसरे के प्रभाव को उदासीन करते हैं।

क्रियाकलाप 2 (लिटमस परीक्षण):

  1. विभिन्न पदार्थों (नींबू का रस, कपड़े धोने का सोडा, शक्कर, नमक आदि) के जलीय विलयन बनाएँ।
  2. प्रत्येक विलयन की एक-एक बूँद नीले और लाल लिटमस पेपर पर डालें।
  3. रंग परिवर्तन नोट करें।
  • अवलोकन:
  • नींबू का रस, इमली का रस: नीले लिटमस को लाल करते हैं (अम्लीय)।
  • कपड़े धोने का सोडा, खाने का सोडा: लाल लिटमस को नीला करते हैं (क्षारीय)।
  • शक्कर का विलयन, नमक का विलयन: लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं (उदासीन)।
महत्त्वपूर्ण

अम्ल, क्षारक और उदासीन पदार्थों की पहचान उनके स्वाद और लिटमस पेपर पर उनके प्रभाव से की जा सकती है।

📖परिभाषा

सूचक (Indicator): ऐसे पदार्थ जो किसी विलयन की अम्लीयता या क्षारीयता को दर्शाने के लिए रंग परिवर्तन का उपयोग करते हैं।

अम्ल-क्षार सूचक और उनके रंग परिवर्तन

सूचक क्या होते हैं?
सूचक क्या होते हैं?
लिटमस के अतिरिक्त अन्य सूचक
लिटमस के अतिरिक्त अन्य सूचक
मिथाइल ऑरेंज का रंग परिवर्तन
मिथाइल ऑरेंज का रंग परिवर्तन
फिनॉलफ्थेलीन का रंग परिवर्तन
फिनॉलफ्थेलीन का रंग परिवर्तन

सूचक वे पदार्थ होते हैं जो अम्लीय या क्षारीय माध्यम में अपना रंग बदल लेते हैं। ये स्वयं अम्ल या क्षार नहीं होते, बल्कि केवल माध्यम की प्रकृति के अनुसार रंग बदलते हैं।

प्राकृतिक सूचक:

  • लिटमस:
  • अम्लीय विलयन में लाल
  • क्षारीय विलयन में नीला
  • उदासीन विलयन में कोई परिवर्तन नहीं
  • हल्दी:
  • अम्लीय/उदासीन विलयन में पीला
  • क्षारीय विलयन में लाल-भूरा
  • गुड़हल का फूल (चाइना रोज़):
  • गुड़हल की पंखुड़ियों का अर्क एक प्रभावी प्राकृतिक सूचक है।
  • अम्लीय विलयन को गहरा गुलाबी (मेजेन्टा) कर देता है।
  • क्षारीय विलयन को हरा कर देता है।
  • उदासीन विलयन में कोई परिवर्तन नहीं

कृत्रिम (संश्लेषित) सूचक:

  • प्रयोगशालाओं में उपयोग किए जाने वाले मानव निर्मित सूचक।
  • मिथाइल ऑरेंज:
  • अम्लीय विलयन में लाल/नारंगी
  • क्षारीय विलयन में पीला
  • उदासीन विलयन में नारंगी
  • फिनॉलफ्थेलीन:
  • अम्लीय विलयन में रंगहीन
  • क्षारीय विलयन में गुलाबी
  • उदासीन विलयन में रंगहीन

सूचकों का महत्व:

  • रासायनिक प्रयोगशालाओं में पदार्थों की प्रकृति जानने के लिए।
  • अनुमापन (Titration) जैसी रासायनिक प्रक्रियाओं में अंतिम बिंदु (End-point) का पता लगाने के लिए।
  • दैनिक जीवन में विभिन्न पदार्थों की जांच के लिए।

क्रियाकलाप 3 (गुड़हल के फूल का सूचक):

  1. गुड़हल की पंखुड़ियों को गर्म पानी में भिगोकर रंगीन अर्क (सूचक विलयन) बनाएँ।
  2. इस सूचक की बूँदें विभिन्न परीक्षण विलयनों (खाने का सोडा, नींबू का रस, चूना, शक्कर, इमली का रस, कपड़े धोने का सोडा) में डालें।
  3. अवलोकन:
  • नींबू का रस, इमली का रस: सूचक को गहरा गुलाबी कर देंगे (अम्लीय)।
  • खाने का सोडा, चूना, कपड़े धोने का सोडा: सूचक को हरा कर देंगे (क्षारीय)।
  • शक्कर: सूचक पर कोई प्रभाव नहीं (उदासीन)।
याद रखें

विभिन्न सूचकों के रंग परिवर्तन को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। एक तालिका बनाकर याद करें।

🔑मुख्य बिंदु

| सूचक | अम्लीय माध्यम | क्षारीय माध्यम | उदासीन माध्यम | |:--------------|:--------------|:---------------|:--------------| | लिटमस | लाल | नीला | कोई परिवर्तन | | हल्दी | पीला | लाल-भूरा | पीला | | गुड़हल | गहरा गुलाबी | हरा | कोई परिवर्तन | | मिथाइल ऑरेंज | लाल/नारंगी | पीला | नारंगी | | फिनॉलफ्थेलीन | रंगहीन | गुलाबी | रंगहीन |

अम्ल: परिभाषा, प्रकार और गुण

अम्ल क्या होते हैं?
अम्ल क्या होते हैं?
प्राकृतिक अम्ल और उनके स्रोत
प्राकृतिक अम्ल और उनके स्रोत
अम्लों के गुण: धातुओं से अभिक्रिया
अम्लों के गुण: धातुओं से अभिक्रिया

अम्ल (Acids):

  • 'अम्ल' शब्द लैटिन भाषा के 'एसिडस' (acidus) से आया है, जिसका अर्थ खट्टा होता है।
  • ये स्वाद में खट्टे होते हैं।
  • नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं।
  • जल में घुलने पर हाइड्रोजन आयन (H$^+$) उत्पन्न करते हैं।

अम्लों के प्रकार:

  1. प्राकृतिक अम्ल (Organic Acids):
  • जीवित प्राणियों और पौधों में स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं
  • ये कमजोर अम्ल होते हैं।
  • उदाहरण:
  • साइट्रिक अम्ल (नींबू, संतरा)
  • मैलिक अम्ल (सेब)
  • फॉर्मिक अम्ल (चींटी का डंक)
  • लैक्टिक अम्ल (दही)
  • एसिटिक अम्ल (सिरका)
  • टार्टरिक अम्ल (इमली)
  • ऑक्सेलिक अम्ल (टमाटर)
  1. खनिज अम्ल (Mineral Acids):
  • भूमि से प्राप्त खनिजों से बनाए जाते हैं।
  • ये प्रबल अम्ल होते हैं और अत्यधिक संक्षारक (corrosive) होते हैं।
  • उदाहरण:
  • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
  • सल्फ्यूरिक अम्ल (H$_2$SO$_4$)
  • नाइट्रिक अम्ल (HNO$_3$)

सांद्र और तनु अम्ल:

  • सांद्र अम्ल (Concentrated Acid): वह अम्ल जिसमें पानी की मात्रा कम हो।
  • तनु अम्ल (Dilute Acid): वह अम्ल जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो।

अम्लों के गुण:

  1. स्वाद: खट्टे होते हैं।
  2. लिटमस पर प्रभाव: नीले लिटमस को लाल करते हैं।
  3. धातुओं से अभिक्रिया:
  • अम्ल धातुओं के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H$_2$) उत्पन्न करते हैं।
  • उदाहरण: जिंक (Zn) की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से अभिक्रिया:

\(Zn_{(s)} + 2HCl_{(aq)} \rightarrow ZnCl_{2(aq)} + H_{2(g)}\)

  • उत्पन्न हाइड्रोजन गैस जलती हुई माचिस की तीली के पास ले जाने पर 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है।
  • महत्वपूर्ण: अम्लों को धातु के पात्रों में नहीं रखा जाता क्योंकि वे धातुओं से अभिक्रिया करके हानिकारक पदार्थ बना सकते हैं और पात्र को संक्षारित कर सकते हैं।
  1. धातु कार्बोनेटों और बाइकार्बोनेटों से अभिक्रिया:
  • अम्ल धातु कार्बोनेटों और बाइकार्बोनेटों के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO$_2$) उत्पन्न करते हैं।
  • उदाहरण: संगमरमर (कैल्शियम कार्बोनेट, CaCO$_3$) की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से अभिक्रिया:

\(CaCO_{3(s)} + 2HCl_{(aq)} \rightarrow CaCl_{2(aq)} + H_2O_{(l)} + CO_{2(g)}\)

  • इस गुण का उपयोग अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।

अम्लों के उपयोग:

  • सल्फ्यूरिक अम्ल (H$_2$SO$_4$): उर्वरक (अमोनियम सल्फेट, सुपर फॉस्फेट), कार-बैटरी (बैटरी अम्ल), अग्निशामक यंत्र।
  • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): नमक का शुद्धीकरण, चीनी मिट्टी के बर्तन/टाइल की सफाई।
  • नाइट्रिक अम्ल (HNO$_3$): उर्वरक (अमोनियम नाइट्रेट), सोने-चाँदी के गहनों की सफाई।

संक्षारण (Corrosion):

  • धातुओं की सतह का नम हवा या अम्ल के संपर्क में आने पर मलिन पड़ना या खराब होना
  • उदाहरण: लोहे पर जंग लगना (आयरन ऑक्साइड, Fe$_2$O$_3$ का बनना)।
  • \(Fe_{(s)} + O_{2(g)} + H_2O_{(l)} \rightarrow Fe_2O_{3(s)}\) (जंग)
  • जंग लगने के लिए आवश्यक: ऑक्सीजन और जल (या जलवाष्प)।
  • संक्षारण से बचाव:
  • पेंट या ग्रीस की परत चढ़ाना।
  • यशद-लेपन (गैल्वेनाइजेशन): लोहे पर क्रोमियम या जस्ता (जिंक) जैसी धातु की परत चढ़ाना।
🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर प्राकृतिक और खनिज अम्लों के बीच अंतर भूल जाते हैं। याद रखें, प्राकृतिक अम्ल कमजोर होते हैं और खाने योग्य हो सकते हैं, जबकि खनिज अम्ल प्रबल और खतरनाक होते हैं।

महत्त्वपूर्ण

अम्ल धातुओं से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस और कार्बोनेटों/बाइकार्बोनेटों से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करते हैं।

क्षारक: परिभाषा, गुण और प्रकार

क्षारक क्या होते हैं?
क्षारक क्या होते हैं?
क्षारकों के सामान्य गुण
क्षारकों के सामान्य गुण
क्षार: जल में विलेय क्षारक
क्षार: जल में विलेय क्षारक
धातुओं के ऑक्साइड की क्षारीय प्रकृति
धातुओं के ऑक्साइड की क्षारीय प्रकृति

क्षारक (Bases):

  • 'क्षार' शब्द अरबी के 'ऐलकली' (alkali) से आया है, जिसका अर्थ राख होता है।
  • ये स्वाद में कड़वे होते हैं।
  • छूने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं।
  • लाल लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं।
  • जल में घुलने पर हाइड्रॉक्सिल आयन (OH$^- $) उत्पन्न करते हैं।

क्षार (Alkalis):

  • जल में विलेय (घुलनशील) क्षारकों को क्षार कहते हैं।
  • सभी क्षार क्षारक होते हैं, लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते (क्योंकि सभी क्षारक जल में विलेय नहीं होते)।
  • उदाहरण: सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH), कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Ca(OH)$_2$)।

क्षारकों के गुण:

  1. स्वाद: कड़वे होते हैं।
  2. स्पर्श: चिकने लगते हैं।
  3. लिटमस पर प्रभाव: लाल लिटमस को नीला करते हैं।
  4. धातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति:
  • अधिकांश धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
  • जब ये धात्विक ऑक्साइड जल में घुलते हैं, तो वे हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं, जो क्षारक होते हैं।
  • उदाहरण: मैग्नीशियम (Mg) को जलाने पर मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) बनता है।

\(2Mg_{(s)} + O_{2(g)} \rightarrow 2MgO_{(s)}\)

  • यह मैग्नीशियम ऑक्साइड जल में विलेय होकर मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Mg(OH)$_2$) बनाता है, जो एक क्षारक है।

\(MgO_{(s)} + H_2O_{(l)} \rightarrow Mg(OH)_{2(aq)}\)

  • मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड लाल लिटमस को नीला कर देता है।

क्षारों के उपयोग:

  • साबुन, दवाई, कागज, विरंजक चूर्ण आदि के निर्माण में।
  • भूमि और पानी की अम्लीयता को कम करने में।
  • पेट की अम्लीयता (acidity) को दूर करने के लिए प्रति-अम्ल (antacids) के रूप में (जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया)।
📖परिभाषा

क्षार (Alkali): वे क्षारक जो जल में पूर्णतः विलेय होते हैं। सभी क्षार क्षारक होते हैं, लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते।

महत्त्वपूर्ण

धातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय होते हैं।

लवण और उदासीनीकरण अभिक्रिया

लवण की परिभाषा
लवण की परिभाषा
अम्ल और क्षार की अभिक्रिया
अम्ल और क्षार की अभिक्रिया
सोडियम क्लोराइड का निर्माण
सोडियम क्लोराइड का निर्माण
लवण का व्यापक अर्थ
लवण का व्यापक अर्थ

उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction):

  • वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अम्ल और एक क्षार आपस में अभिक्रिया करके लवण और पानी बनाते हैं।
  • इस अभिक्रिया में अम्ल और क्षार दोनों के गुण समाप्त हो जाते हैं
  • यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, जिसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है।
  • सामान्य समीकरण:

\(अम्ल + क्षारक \rightarrow लवण + पानी + ऊष्मा\)

  • उदाहरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) की अभिक्रिया:

\(NaOH_{(aq)} + HCl_{(aq)} \rightarrow NaCl_{(aq)} + H_2O_{(l)} + ऊष्मा\)

  • यहाँ, सोडियम क्लोराइड (NaCl) एक लवण है और H$_2$O पानी है।

लवण (Salts):

  • लवण वे रासायनिक यौगिक हैं जो अम्ल और क्षार के उदासीनीकरण अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनते हैं।
  • 'लवण' शब्द केवल सामान्य नमक (सोडियम क्लोराइड) के लिए नहीं, बल्कि इस श्रेणी के सभी यौगिकों के लिए उपयोग होता है।

लवणों के प्रकार (लिटमस पर प्रभाव के आधार पर):

  1. अम्लीय लवण:
  • प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार से बनते हैं।
  • नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं।
  • उदाहरण: कॉपर सल्फेट (CuSO$_4$)।
  1. क्षारीय लवण:
  • दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बनते हैं।
  • लाल लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं।
  • उदाहरण: सोडियम कार्बोनेट (Na$_2$CO$_3$)।
  1. उदासीन लवण:
  • प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार (या दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षार) से बनते हैं।
  • लिटमस पेपर पर कोई प्रभाव नहीं डालते।
  • उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl)।

उदासीनीकरण के दैनिक जीवन में उदाहरण:

  1. चींटी के डंक का उपचार:
  • चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल होता है, जिससे जलन होती है।
  • इस पर खाने का सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट, क्षारीय) या कैलामाइन विलयन (जिंक कार्बोनेट, क्षारीय) लगाने से अम्ल उदासीन हो जाता है और जलन कम होती है।
  1. मृदा उपचार:
  • पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए मृदा का उदासीन होना आवश्यक है।
  • अम्लीय मृदा: बुझा चूना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, क्षारीय) या बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड, क्षारीय) डालकर उदासीन किया जाता है।
  • क्षारीय मृदा: जैव पदार्थ (खाद) मिलाए जाते हैं, जो अम्ल मुक्त कर मृदा को उदासीन करते हैं।
  1. अपच (Indigestion):
  • हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल होता है जो भोजन पचाने में सहायक है।
  • अम्ल की अधिकता से अपच और खट्टी डकारें आती हैं।
  • इसके उपचार के लिए प्रति-अम्ल (Antacids) जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, क्षारीय) का उपयोग किया जाता है, जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करता है।
  1. कारखानों का अपशिष्ट:
  • अनेक कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट अम्लीय होता है, जो जल निकायों में मिलकर जलीय जीवों को हानि पहुँचा सकता है।
  • इसे क्षारीय पदार्थों से उदासीन करके ही नदियों में छोड़ा जाना चाहिए।

लवणों के उपयोग:

  • सामान्य नमक (सोडियम क्लोराइड, NaCl): खाद्य पदार्थ का आवश्यक अंग, अचार और मछली जैसे खाद्य पदार्थों के संरक्षण में।
  • कपड़े धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट, Na$_2$CO$_3$): कपड़े धोने और सफाई में।
  • खाने का सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट, NaHCO$_3$): केक, सोडा वाटर, शीतल पेय बनाने में, पेट की अम्लीयता दूर करने में (प्रति-अम्ल)।
  • शरीर में लवण: कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, सोडियम और पोटैशियम के क्लोराइड, आयोडाइड, सल्फेट, बाइकार्बोनेट, फॉस्फेट जैसे लवण शरीर के लिए आवश्यक हैं।
  • पसीना आने पर ये लवण शरीर से निकल जाते हैं, जिससे पसीना नमकीन होता है।
  • निर्जलीकरण (Dehydration) होने पर (जैसे पेचिश, अतिसार में) शरीर से पानी और लवण निकल जाते हैं। इस स्थिति में मुखीय पुनर्जलयोजन (Oral Rehydration Solution - ORS) का उपयोग किया जाता है, जिसमें लवण और शक्कर होते हैं, ताकि शरीर में जल और लवण का स्तर सामान्य हो सके।
📖परिभाषा

उदासीनीकरण: अम्ल और क्षार की परस्पर क्रिया से लवण और पानी बनने की प्रक्रिया, जिसमें दोनों के गुण समाप्त हो जाते हैं।

💡सुझाव

उदासीनीकरण अभिक्रिया का समीकरण और दैनिक जीवन में इसके उदाहरण अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं। इन्हें अच्छी तरह से तैयार करें।

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