सजीवों में पोषण
यह अध्याय सजीवों में पोषण की विभिन्न विधियों पर केंद्रित है, जिसमें पौधों और जंतुओं दोनों को शामिल किया गया है। छात्र प्रकाश संश्लेषण, परजीवी, मृतोपजीवी, सहजीवी और कीटभक्षी पौधों के बारे में सीखते हैं। जंतुओं में पोषण के अंतर्गत अमीबा, हाइड्रा, मेंढक और मनुष्य के पाचन तंत्र की विस्तृत जानकारी दी गई है, जिसमें दांतों के प्रकार और जुगाली करने वाले जंतुओं में पाचन की प्रक्रिया भी शामिल है। यह अध्याय पोषण के महत्व और विभिन्न जीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने के तरीकों को स्पष्ट करता है।
पौधों में स्वपोषण और प्रकाश संश्लेषण
पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसलिए उन्हें स्वपोषी कहते हैं। यह प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण कहलाती है।
प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया
- परिभाषा: हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल का उपयोग करके अपना भोजन (कार्बोहाइड्रेट) बनाने की प्रक्रिया।
- आवश्यक घटक:
- सूर्य का प्रकाश: ऊर्जा का स्रोत।
- क्लोरोफिल (पर्णहरित): पत्तियों में मौजूद हरा वर्णक जो सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): वायुमंडल से पत्तियों के छोटे छिद्रों (रंध्रों) द्वारा अवशोषित।
- जल (H₂O): जड़ों द्वारा मिट्टी से अवशोषित और पत्तियों तक पहुँचाया जाता है।
- उत्पाद:
- कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज): पौधों का भोजन, जो बाद में स्टार्च के रूप में संग्रहित होता है।
- ऑक्सीजन (O₂): उप-उत्पाद के रूप में वातावरण में मुक्त होती है।
रासायनिक समीकरण
$$ \text{कार्बन डाइऑक्साइड} + \text{जल} \xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल}} \text{कार्बोहाइड्रेट} + \text{ऑक्सीजन} $$
प्रकाश संश्लेषण का महत्व
- भोजन उत्पादन: पृथ्वी पर सभी जीवों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भोजन का स्रोत।
- ऑक्सीजन उत्पादन: वायुमंडल में ऑक्सीजन का संतुलन बनाए रखता है, जो श्वसन के लिए आवश्यक है।
पत्तियों में क्लोरोफिल और रंगीन पत्तियाँ
- क्लोरोफिल: पत्तियों को हरा रंग देता है और प्रकाश ऊर्जा को पकड़ने में मदद करता है।
- रंगीन पत्तियाँ: कुछ पत्तियों में लाल, भूरे या अन्य वर्णक होते हैं जो क्लोरोफिल के हरे रंग को ढक लेते हैं।
- महत्वपूर्ण: इन पत्तियों में भी क्लोरोफिल होता है और ये प्रकाश संश्लेषण करती हैं।
- पुष्टि: आयोडीन परीक्षण द्वारा स्टार्च की उपस्थिति की जाँच की जा सकती है (स्टार्च की उपस्थिति नीला-काला रंग देती है)।
क्रियाकलाप 1: प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन का उत्पादन
- उद्देश्य: यह दर्शाना कि प्रकाश संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन गैस निकलती है।
- सामग्री: हाइड्रिला का पौधा, बीकर, कीप, परखनली, जल, काला कपड़ा।
- विधि:
- हाइड्रिला पौधे को जल से भरे बीकर में रखें।
- कीप को उल्टा करके पौधे को ढकें, कीप की नली ऊपर की ओर हो।
- जल से भरी परखनली को कीप की नली पर उल्टा करके रखें।
- उपकरण को आधे घंटे के लिए सूर्य के प्रकाश में रखें।
- ऑक्सीजन के बुलबुले निकलेंगे और परखनली में जल का स्तर गिरेगा।
- इसी उपकरण को काले कपड़े से ढककर अंधेरे में रखें और अवलोकन करें।
- अवलोकन: प्रकाश में ऑक्सीजन के बुलबुले बनते हैं, अंधेरे में नहीं।
- निष्कर्ष: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक है और इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है।
क्रियाकलाप 2: रंगीन पत्तियों में स्टार्च की उपस्थिति
- उद्देश्य: यह दर्शाना कि रंगीन पत्तियों में भी प्रकाश संश्लेषण होता है।
- सामग्री: रंगीन पत्तियाँ, ड्रॉपर, परखनली, आयोडीन विलयन, जल।
- विधि:
- रंगीन पत्तियों को जल मिलाकर मसलें और रस एकत्रित करें।
- परखनली में पत्तियों के रस की 5-6 बूँदें लें।
- इसमें आयोडीन की 1-2 बूँदें मिलाएँ।
- अवलोकन: पत्तियों के रस का रंग गहरा नीला हो जाता है।
- निष्कर्ष: गहरा नीला रंग स्टार्च की उपस्थिति दर्शाता है, जिसका अर्थ है कि रंगीन पत्तियों में भी प्रकाश संश्लेषण होता है, भले ही उनका हरा रंग अन्य वर्णकों से ढका हो।
क्लोरोफिल पत्तियों में पाया जाने वाला हरा वर्णक है जो सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित करता है। यह प्रकाश संश्लेषण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रकाश संश्लेषण का समीकरण और उसके लिए आवश्यक घटक तथा उत्पाद अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसे अच्छी तरह याद रखें।
पौधों में पोषण के अन्य प्रकार
सभी पौधों में क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए वे अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। ऐसे पौधे पोषण के लिए अन्य विधियों पर निर्भर करते हैं। इन्हें परपोषी पौधे कहते हैं।
1. परजीवी पोषण (Parasitic Nutrition)
- परिभाषा: ऐसे पौधे जो अपने भोजन के लिए अन्य जीवित पौधों (पोषक) पर निर्भर रहते हैं।
- विशेषताएँ:
- पोषक पौधे से पोषक तत्व अवशोषित करने के लिए विशेष संरचनाएँ (चूषकांग) विकसित करते हैं।
- पोषक पौधे को नुकसान पहुँचाते हैं।
- प्रकार:
- पूर्ण परजीवी: क्लोरोफिल रहित होते हैं और पूरी तरह से पोषक पर निर्भर करते हैं।
- उदाहरण: अमरबेल (कस्कुटा) [IMAGE: cg_c7_science_ch09_chapter_hero]
- आंशिक परजीवी: क्लोरोफिल होता है और अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, लेकिन जल और खनिज लवण के लिए पोषक पर निर्भर करते हैं।
- उदाहरण: भांगरा (मिसलटो), बंडा (लोरन्थस)
2. मृतोपजीवी पोषण (Saprotrophic Nutrition)
- परिभाषा: ऐसे जीव जो अपना भोजन सड़े-गले, मृत कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं।
- विशेषताएँ:
- इनमें क्लोरोफिल नहीं होता।
- पाचक एंजाइमों को मृत पदार्थ पर स्रावित करते हैं और फिर पचे हुए पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं।
- उदाहरण: मशरूम (कुकुरमुत्ता) [IMAGE: cg_c7_science_ch09_chapter_hero], फफूंद (ब्रेड मोल्ड)।
3. कीटभक्षी पोषण (Insectivorous Nutrition)
- परिभाषा: ऐसे हरे पौधे जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, लेकिन नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए कीटों का भक्षण करते हैं।
- विशेषताएँ:
- दलदली क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होती है।
- कीटों को पकड़ने के लिए इनकी पत्तियाँ विशेष रूप से रूपांतरित होती हैं।
- उदाहरण: कलशपादप (पिचर प्लांट) [IMAGE: cg_c7_science_ch09_chapter_hero], ब्लैडरवर्ट, ड्रासेरा।
4. सहजीवी पोषण (Symbiotic Nutrition)
- परिभाषा: दो भिन्न प्रकार के जीवों का ऐसा संबंध जिसमें वे एक-दूसरे के साथ रहकर लाभान्वित होते हैं।
- विशेषताएँ:
- दोनों जीव एक-दूसरे को भोजन, आश्रय या अन्य आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
- उदाहरण:
- फलीदार पौधों की जड़ें और राइजोबियम जीवाणु:
- मटर, चना, मूंगफली जैसे दाल वाले पौधों की जड़ों में गांठें (ग्रंथिकाएँ) होती हैं।
- इन गांठों में राइजोबियम नामक जीवाणु रहते हैं।
- जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी नाइट्रोजन यौगिकों में बदलते हैं।
- पौधा जीवाणु को भोजन और आश्रय प्रदान करता है।
- लाइकेन: शैवाल और कवक का सहजीवी संबंध। शैवाल भोजन बनाता है और कवक आश्रय व जल प्रदान करता है।
परजीवी (Parasite): वह जीव जो अपने भोजन के लिए किसी अन्य जीवित जीव (पोषक) पर निर्भर रहता है और उसे नुकसान पहुँचाता है।
मृतोपजीवी (Saprotroph): वह जीव जो मृत और सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से अपना पोषण प्राप्त करता है।
सहजीवी (Symbiont): दो जीवों का ऐसा संबंध जिसमें वे एक-दूसरे के साथ रहकर परस्पर लाभान्वित होते हैं।
जंतुओं में पोषण और भोजन ग्रहण की विधियाँ
जंतु अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, वे भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए उन्हें परपोषी कहते हैं। जंतुओं में पोषण के मुख्य चरण हैं: अंतःग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण और बहिष्करण।
1. भोजन ग्रहण करने की विधियाँ
विभिन्न जंतुओं में भोजन ग्रहण करने के लिए अलग-अलग संरचनाएँ और विधियाँ होती हैं:
- अमीबा:
- एककोशिकीय जीव।
- अपने शरीर से कूटपाद (झूठे पैर) निकालकर भोजन के कणों को घेर लेता है।
- भोजन को खाद्य धानी में बंद करके पचाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch09_t3_scene2]
- हाइड्रा:
- बहुकोशिकीय जीव।
- शरीर पर स्पर्शक होते हैं जो शिकार को पकड़ने और मुंह तक ले जाने में मदद करते हैं। [IMAGE: cg_c7_science_ch09_t3_scene2]
- मेंढक:
- अपनी लंबी, चिपचिपी और तेजी से बाहर निकलने वाली जीभ का उपयोग करके कीड़ों को पकड़ता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch09_t3_scene3]
- तितली एवं मधुमक्खी:
- विशेष प्रकार की चूसने वाली नलिका (प्रोबोसिस) होती है, जिससे वे फूलों के अमृत को चूसते हैं। [IMAGE: cg_c7_science_ch09_t3_scene3]
- कशेरुकी जीव (मनुष्य, गाय, शेर आदि):
- भोजन ग्रहण करने के लिए सुविकसित जबड़े और विभिन्न प्रकार के दांत होते हैं।
- दांत भोजन को काटने, फाड़ने और पीसने में मदद करते हैं। [IMAGE: cg_c7_science_ch09_t3_scene4]
2. मनुष्य में भोजन का पाचन
मनुष्य में पाचन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई अंग और पाचक ग्रंथियाँ मिलकर कार्य करती हैं।
a) दांत और उनके कार्य
मनुष्य के मुख में चार प्रकार के दांत होते हैं, जो भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में मदद करते हैं:
| क्र. (S.No.) | दांत का नाम (Name of teeth) | दांतों की संख्या (ऊपरी जबड़े में) | दांतों की संख्या (निचले जबड़े में) | स्थिति (Position) | आकृति (Shape) | कार्य (Function) | |---|---|---|---|---|---|---| | 1. | कृंतक (Incisors) | चार | चार | सबसे आगे | छेनी के समान | काटना | | 2. | रदनक (Canines) | दो | दो | कृंतक के पीछे | नुकीला | चीरना, फाड़ना | | 3. | अग्र चर्वणक (Premolars) | चार | चार | रदनक के पीछे | चक्की के समान | पीसना | | 4. | चर्वणक (Molars) | छः | छः | सबसे पीछे | चक्की के समान | पीसना |
b) पाचन की प्रक्रिया के चरण
- अंतःग्रहण (Ingestion): भोजन को मुख द्वारा शरीर के अंदर लेना।
- पाचन (Digestion): भोजन के जटिल, अघुलनशील घटकों को सरल, घुलनशील पदार्थों में बदलना। यह पाचक एंजाइमों की मदद से होता है।
- मुख में पाचन:
- भोजन चबाने से छोटे टुकड़ों में टूटता है।
- लार में उपस्थित एमाइलेज एंजाइम मंड (स्टार्च) का पाचन शुरू करता है, जिससे वह शर्करा में बदल जाता है (यही कारण है कि रोटी देर तक चबाने पर मीठी लगती है)।
- आमाशय में पाचन:
- भोजन ग्रसनी और ग्रासनली से होता हुआ आमाशय में पहुँचता है।
- आमाशय में जठर रस (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और पेप्सिन एंजाइम) प्रोटीन का पाचन शुरू करते हैं।
- छोटी आंत में पाचन:
- यह पाचन का मुख्य स्थान है।
- यकृत से पित्त रस (वसा का पाचन), अग्न्याशय से अग्नाशयी रस (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा का पाचन) और छोटी आंत की दीवारों से आंतरीय रस (पूर्ण पाचन) भोजन में मिलते हैं।
- यहां भोजन के सभी जटिल घटक सरल अणुओं में टूट जाते हैं।
- अवशोषण (Absorption): पचे हुए भोजन के सरल अणुओं का छोटी आंत की दीवारों द्वारा रक्त में अवशोषित होना।
- स्वांगीकरण (Assimilation): अवशोषित पोषक तत्वों का रक्त द्वारा शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचना और उनका ऊर्जा, वृद्धि तथा मरम्मत के लिए उपयोग होना।
- बहिष्करण (Egestion): अपचित भोजन (अपशिष्ट पदार्थ) का शरीर से मलद्वार द्वारा बाहर निकालना।
c) मनुष्य का पाचन तंत्र [IMAGE: TODO: मनुष्य का पाचन तंत्र]
- मुख्य अंग: मुख, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, मलाशय, मलद्वार।
- सहायक ग्रंथियाँ: लार ग्रंथियाँ, यकृत, अग्न्याशय।
d) अमीबा में पाचन
- प्रकार: अंतः कोशिकीय पाचन (कोशिका के अंदर)।
- प्रक्रिया:
- कूटपाद से भोजन को घेरना।
- खाद्य धानी का निर्माण।
- खाद्य धानी में पाचक रस द्वारा भोजन का पाचन।
- पचे हुए भोजन का अवशोषण और स्वांगीकरण।
- अपचित भोजन का कोशिका से बाहर निकालना।
3. घास खाने वाले जंतुओं में पाचन (जुगाली करने वाले जंतु)
- उदाहरण: गाय, भैंस, भेड़, बकरी।
- विशेषताएँ: ये जंतु रूमिनेन्ट या रोमन्थी कहलाते हैं।
- पाचन प्रक्रिया:
- तेजी से निगलना: घास चरते समय ये जंतु घास को जल्दी-जल्दी निगलकर आमाशय के एक भाग रूमेन में भंडारित कर लेते हैं।
- आंशिक पाचन: रूमेन में भोजन का आंशिक पाचन होता है, जिसे जुगाल (कड) कहते हैं।
- जुगाली (रोमन्थन): आंशिक रूप से पचे हुए भोजन (जुगाल) को छोटे-छोटे पिंडकों के रूप में पुनः मुख में लाकर धीरे-धीरे चबाते हैं।
- सेलुलोज का पाचन: घास में प्रचुर मात्रा में सेलुलोज होता है। रूमेन में उपस्थित विशेष जीवाणु सेलुलोज का पाचन करते हैं।
- पूर्ण पाचन: चबाया हुआ भोजन फिर से निगलकर पाचन तंत्र के अन्य भागों से गुजरता है जहाँ उसका पूर्ण पाचन होता है।
- महत्वपूर्ण तथ्य: मनुष्य और अन्य कई जंतुओं में सेलुलोज पाचक जीवाणु नहीं होते, इसलिए वे सेलुलोज का पाचन नहीं कर पाते।
पाचन (Digestion): भोजन के जटिल, अघुलनशील घटकों को सरल, घुलनशील पदार्थों में बदलने की प्रक्रिया।
लार में उपस्थित एमाइलेज एंजाइम मंड (स्टार्च) का पाचन मुख में ही शुरू कर देता है।
छात्र अक्सर सोचते हैं कि रंगीन पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण नहीं होता। याद रखें, उनमें भी क्लोरोफिल होता है और प्रकाश संश्लेषण होता है।