कंकाल, जोड़ एवं पेशियाँ
अध्याय 'कंकाल, जोड़ एवं पेशियाँ' मानव शरीर की आंतरिक संरचना को समझने में मदद करता है। यह कंकाल प्रणाली, विभिन्न प्रकार की हड्डियों जैसे खोपड़ी, रीढ़ की हड्डी, पसलियां, कंधे और कूल्हे की हड्डियां, हाथों और पैरों की हड्डियों का परिचय देता है। छात्र उपास्थि के महत्व और शरीर में विभिन्न प्रकार के जोड़ों जैसे कंदुक-खल्लिका जोड़, कब्जा जोड़, सर्पी जोड़ और घूर्णन जोड़ के कार्यों को सीखते हैं। यह अध्याय मांसपेशियों की भूमिका और हड्डियों के साथ मिलकर गति कैसे उत्पन्न करते हैं, इसकी भी व्याख्या करता है। यह शरीर की गतिशीलता और आंतरिक अंगों की सुरक्षा के लिए इन प्रणालियों के महत्व पर प्रकाश डालता है।
कंकाल तंत्र का परिचय
मानव शरीर का आंतरिक ढाँचा जो हड्डियों से बना होता है, कंकाल कहलाता है।
- कार्य:
- शरीर को निश्चित आकार और सहारा प्रदान करता है।
- शरीर को हिलने-डुलने में मदद करता है।
- मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े जैसे कोमल आंतरिक अंगों की सुरक्षा करता है।
- रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है (अस्थि मज्जा में)।
- खनिजों (कैल्शियम, फास्फोरस) का भंडारण करता है।
- घटक:
- हड्डियाँ (अस्थियाँ)
- उपास्थियाँ (कार्टिलेज)
- जोड़ (संधियाँ)
- स्नायु (लिगामेंट्स) और कंडरा (टेंडन) (जो हड्डियों और पेशियों को जोड़ते हैं)।
वयस्क मानव कंकाल में 206 हड्डियाँ होती हैं, जबकि नवजात शिशु में लगभग 300 हड्डियाँ होती हैं जो बाद में जुड़कर कम हो जाती हैं।
अक्षीय कंकाल (Axial Skeleton)
अक्षीय कंकाल शरीर के केंद्रीय अक्ष का निर्माण करता है और इसमें मुख्य रूप से खोपड़ी, रीढ़ की हड्डी और पसलियाँ शामिल होती हैं। यह आंतरिक अंगों की सुरक्षा करता है।
2.1 खोपड़ी (Skull)
- यह अनेक हड्डियों के आपस में जुड़ने से बनी एक कठोर संरचना है।
- अंदर से खोखली होती है और एक गुहा बनाती है जिसमें मस्तिष्क सुरक्षित रहता है।
- मुख्य हड्डियाँ: कपाल (क्रेनियम), चेहरे की हड्डियाँ, निचले जबड़े की हड्डी (मैन्डिबल)।
- विशेषता: ऊपरी जबड़ा अचल होता है, जबकि निचला जबड़ा ही एकमात्र गतिमान हड्डी है जो हमें बोलने और भोजन चबाने में मदद करती है।
2.2 रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड - Vertebral Column)
- यह छोटी-छोटी छल्ले जैसी हड्डियों, जिन्हें कशेरुक (Vertebrae) कहते हैं, के मेल से बनी होती है।
- छोटे बच्चों में 33 कशेरुकाएँ होती हैं, जो वयस्कता में 26 हो जाती हैं (कुछ कशेरुकाएँ आपस में जुड़ जाती हैं)।
- कशेरुक दंड के बीच में एक खोखली नली होती है जिसमें मेरुरज्जु (Spinal Cord) सुरक्षित रहता है।
- कार्य: शरीर को सीधा खड़ा रखने में मदद करती है, लचीलापन प्रदान करती है जिससे हम झुक सकते हैं और मुड़ सकते हैं।
2.3 पसलियाँ (Ribs)
- ये पतली, चपटी और घुमावदार हड्डियाँ होती हैं जो छाती के क्षेत्र में पाई जाती हैं।
- ये पीछे की ओर मेरुदंड से और सामने की ओर वक्षास्थि (Sternum) नामक हड्डी से जुड़ी होती हैं।
- पसलियाँ मिलकर एक पिंजरे जैसी संरचना बनाती हैं जिसे वक्षगुहा (Rib Cage) कहते हैं।
- कार्य: हृदय और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा करती हैं।
यदि मेरुदंड एक ही लंबी हड्डी का बना होता, तो हम झुक नहीं पाते और शरीर में लचीलापन नहीं होता।
उपांगीय कंकाल (Appendicular Skeleton)
उपांगीय कंकाल में अंस मेखला (कंधे की हड्डियाँ), श्रोणी मेखला (कूल्हे की हड्डियाँ) और हाथ-पैरों की हड्डियाँ शामिल होती हैं। यह शरीर की गति के लिए महत्वपूर्ण है।
3.1 कंधे की हड्डियाँ (अंस मेखला - Pectoral Girdle)
- इसमें दो मुख्य हड्डियाँ होती हैं: स्कैपुला (कंधे का ब्लेड) और हसली (कॉलर बोन/क्लाविकल)।
- स्कैपुला पीठ पर त्रिकोणीय आकार की हड्डी होती है।
- हसली छाती के ऊपरी भाग में कंधे से गर्दन तक फैली हुई हड्डी है।
- कार्य: हाथों की हड्डियों को अक्षीय कंकाल से जोड़ती है और हाथों की गति में सहायता करती है।
3.2 हसली (Clavicle)
- यह एक लंबी, पतली हड्डी है जो कंधे को छाती से जोड़ती है।
- इसे कॉलर बोन भी कहते हैं।
- कंधे की गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
3.3 कूल्हे की हड्डी (श्रोणी मेखला - Pelvic Girdle)
- यह दो बड़ी, अनियमित आकार की हड्डियों से बनी होती है जो आपस में जुड़कर एक बेसिन जैसी संरचना बनाती हैं।
- प्रत्येक भाग तीन हड्डियों (इलियम, इस्कियम, प्यूबिस) से मिलकर बना होता है।
- कार्य:
- पैरों की हड्डियों को अक्षीय कंकाल से जोड़ती है।
- मूत्राशय, गर्भाशय और आंतों जैसे आंतरिक अंगों की सुरक्षा करती है।
- शरीर के ऊपरी हिस्से का भार वहन करती है।
3.4 हाथों की हड्डियाँ (Bones of the Hand)
- ऊपरी बांह: ह्यूमरस (एक हड्डी)।
- निचली बांह (कोहनी से कलाई तक): रेडियस और अल्ना (दो हड्डियाँ)।
- कलाई: कार्पल (छोटी-छोटी हड्डियाँ)।
- हथेली: मेटाकार्पल (हड्डियाँ)।
- अंगुलियाँ: फैलेंजेस (छोटी-छोटी हड्डियाँ)।
3.5 पैरों की हड्डियाँ (Bones of the Leg)
- जांघ: फीमर (शरीर की सबसे लंबी और मजबूत हड्डी)।
- घुटने: पटेला (घुटने की कटोरी)।
- निचली टांग (घुटने से टखने तक): टिबिया और फिबुला (दो हड्डियाँ)।
- टखना: टार्सल (छोटी-छोटी हड्डियाँ)।
- पैर का पंजा: मेटाटार्सल (हड्डियाँ)।
- पैर की अंगुलियाँ: फैलेंजेस (छोटी-छोटी हड्डियाँ)।
फीमर (जांघ की हड्डी) शरीर की सबसे लंबी और मजबूत हड्डी है। यह अक्सर एक-अंक के प्रश्न में पूछा जाता है।
उपास्थि (Cartilage)
उपास्थि एक प्रकार का लचीला संयोजी ऊतक है जो हड्डियों से कम कठोर होता है।
- विशेषताएँ:
- नरम और लचीली होती है।
- हड्डियों की तरह कठोर नहीं होती, लेकिन हड्डियों से अधिक लचीली होती है।
- स्थान:
- कान का बाहरी भाग
- नाक की नोक
- मेरुदंड के कशेरुकों के बीच (अंतरकशेरुकी डिस्क के रूप में)
- पसलियों और वक्षास्थि के बीच
- जोड़ों की सतहों पर (हड्डियों को आपस में रगड़ने से बचाती है)
- कार्य:
- हड्डियों को आपस में रगड़ने से होने वाले घर्षण को कम करती है।
- जोड़ों को चिकनाई प्रदान करती है।
- कुछ अंगों को लचीलापन और सहारा देती है।
छात्र अक्सर हड्डी और उपास्थि में भ्रमित होते हैं। याद रखें, हड्डी कठोर और अचल होती है (जोड़ों को छोड़कर), जबकि उपास्थि लचीली होती है।
संधियाँ (जोड़ - Joints)
वह स्थान जहाँ दो या दो से अधिक हड्डियाँ आपस में मिलती हैं, संधि या जोड़ कहलाता है। जोड़ हमें विभिन्न अंगों को हिलाने-डुलाने में मदद करते हैं।
- जोड़ों के प्रकार:
- कंदुक-खल्लिका जोड़ (Ball and Socket Joint):
- इसमें एक हड्डी का गोल सिरा दूसरी हड्डी की कपनुमा गुहा में फिट होता है।
- यह सभी दिशाओं में गति की अनुमति देता है (जैसे 360° घुमाना)।
- उदाहरण: कंधे का जोड़ (ह्यूमरस और अंस मेखला के बीच), कूल्हे का जोड़ (फीमर और श्रोणी मेखला के बीच)।
- कब्जा जोड़ (Hinge Joint):
- यह जोड़ केवल एक दिशा में गति की अनुमति देता है, जैसे दरवाजे का कब्जा।
- उदाहरण: कोहनी का जोड़, घुटने का जोड़, अंगुलियों और पैर की अंगुलियों के जोड़।
- सर्पी जोड़ (Gliding Joint):
- इसमें हड्डियाँ एक दूसरे पर सरकती हैं।
- यह सीमित गति की अनुमति देता है।
- उदाहरण: कलाई की हड्डियाँ (कार्पल), टखने की हड्डियाँ (टार्सल), मेरुदंड के कशेरुकों के बीच।
- घूर्णन जोड़ (Pivot Joint):
- इसमें एक हड्डी दूसरी हड्डी के चारों ओर घूमती है।
- उदाहरण: खोपड़ी और रीढ़ की पहली कशेरुक (एटलस) के बीच का जोड़, जो गर्दन को आगे-पीछे और दाएँ-बाएँ घुमाने में मदद करता है।
- अचल जोड़ (Fixed/Immovable Joint):
- इन जोड़ों में हड्डियाँ आपस में मजबूती से जुड़ी होती हैं और कोई गति नहीं होती।
- उदाहरण: खोपड़ी की हड्डियाँ।
जोड़ों पर उपास्थि की उपस्थिति हड्डियों को आपस में रगड़ने से होने वाले घर्षण को कम करती है, जिससे हड्डियाँ घिसती नहीं हैं।
पेशियाँ (Muscles)
पेशियाँ मांसल रचनाएँ होती हैं जो हड्डियों से जुड़ी होती हैं और शरीर की गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- विशेषताएँ:
- पेशियाँ संकुचित (छोटी) और शिथिल (लंबी) हो सकती हैं।
- पेशियाँ हमेशा जोड़ों में काम करती हैं – एक पेशी खींचती है, कभी धक्का नहीं देती।
- गति के लिए, आमतौर पर दो पेशियाँ मिलकर काम करती हैं: जब एक पेशी संकुचित होती है, तो दूसरी शिथिल होती है।
- कार्यप्रणाली:
- जब एक पेशी (जैसे बाइसेप्स) संकुचित होती है, तो वह हड्डी को अपनी ओर खींचती है, जिससे अंग मुड़ता है।
- उसी समय, विपरीत पेशी (जैसे ट्राइसेप्स) शिथिल हो जाती है, जिससे गति संभव होती है।
- जब अंग को सीधा करना होता है, तो बाइसेप्स शिथिल होती है और ट्राइसेप्स संकुचित होती है।
- यह संकुचन और शिथिलन की क्रिया ही हड्डियों में गति उत्पन्न करती है।
- पेशी तंत्र (Muscular System):
- हमारे शरीर के विभिन्न अंगों में पाई जाने वाली सभी पेशियाँ मिलकर पेशी तंत्र बनाती हैं।
- यह तंत्र कंकाल तंत्र के साथ मिलकर शरीर की सभी गतियों को नियंत्रित करता है।
- पेशियों द्वारा होने वाली कुछ क्रियाएँ:
- भोजन चबाना
- श्वास लेना व छोड़ना
- वजन उठाना
- मुट्ठी बांधना और खोलना
- पैर की अंगुली हिलाना
- पलकें झपकाना
- हृदय का धड़कना (हृदय पेशियाँ)
हड्डियाँ अपने आप गति नहीं कर सकतीं। उन्हें गति देने के लिए पेशियों की आवश्यकता होती है।