सजीवों में गति एवं प्रचलन
यह अध्याय सजीवों में होने वाली विभिन्न प्रकार की गतियों और प्रचलन की अवधारणा को विस्तार से समझाता है। इसमें पौधों में गुरुत्वानुवर्तन, प्रकाशानुवर्तन, जलानुवर्तन और स्पर्शानुवर्तन जैसी गतियों का वर्णन किया गया है। साथ ही, अमीबा, यूग्लीना, पैरामीशियम जैसे सूक्ष्मजीवों से लेकर केंचुआ, मछली, साँप, पक्षी और स्तनधारियों तक विभिन्न जंतुओं में प्रचलन के तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह अध्याय छात्रों को सजीवों के अनुकूलन और अस्तित्व के लिए गति के महत्व को समझने में मदद करता है।
पौधों में अनुवर्तन गतियाँ
पौधे सामान्यतः स्थिर होते हैं, लेकिन उनके विभिन्न अंग बाहरी उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया करते हुए गति प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार की गति को अनुवर्तन (ट्रॉपिज्म) कहते हैं। यह गति उद्दीपन की दिशा में (धनात्मक) या उसके विपरीत (ऋणात्मक) हो सकती है।
- अनुवर्तन के प्रकार:
- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): प्रकाश के प्रति पौधों के अंगों की अनुक्रिया।
- धनात्मक प्रकाशानुवर्तन: तना और पत्तियाँ प्रकाश की ओर बढ़ती हैं। (जैसे, सूर्यमुखी का सूर्य की ओर मुड़ना)
- ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन: जड़ें प्रकाश से दूर बढ़ती हैं।
- गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism): गुरुत्वाकर्षण बल के प्रति पौधों के अंगों की अनुक्रिया।
- धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन: जड़ें गुरुत्वाकर्षण की दिशा में, यानी नीचे की ओर बढ़ती हैं।
- ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन: तना गुरुत्वाकर्षण के विपरीत, यानी ऊपर की ओर बढ़ता है।
- जलानुवर्तन (Hydrotropism): जल के प्रति पौधों के अंगों की अनुक्रिया।
- जड़ें जल स्रोत की ओर बढ़ती हैं। यह पौधों को पानी खोजने में मदद करता है।
- स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism): स्पर्श के प्रति पौधों के अंगों की अनुक्रिया।
- प्रतान (tendrils) किसी सहारे के संपर्क में आने पर उसके चारों ओर लिपट जाते हैं। (जैसे, मटर, कुम्हड़ा, लौकी की बेलें)
- अनुवर्तन का महत्व:
- पौधों को सही दिशा में बढ़ने में मदद करता है।
- प्रकाश, जल और पोषक तत्वों तक पहुँच सुनिश्चित करता है।
- पौधों को सहारा प्रदान करता है।
[IMAGE: cg_c7_science_ch18_t1_scene3] प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्वानुवर्तन को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch18_t1_scene4] जलानुवर्तन और स्पर्शानुवर्तन को दर्शाता है।
अनुवर्तन (Tropism): पौधों के अंगों की वह वृद्धि-संबंधी गति जो किसी बाहरी उद्दीपन की दिशा में या उसके विपरीत होती है।
पौधों में होने वाली ये गतियाँ वृद्धि-प्रेरित होती हैं, अर्थात ये कोशिकाओं की वृद्धि या फैलाव के कारण होती हैं।
पौधों में कंपानुकुंचन गति
कंपानुकुंचन गति (Nastic Movement) पौधों की वह गति है जो बाहरी उद्दीपन (जैसे स्पर्श, कंपन या तापमान) के प्रति अनुक्रिया में होती है, लेकिन इस गति की दिशा उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती। यह अनुवर्तन से भिन्न है, जहाँ गति की दिशा उद्दीपन की दिशा से संबंधित होती है।
- छुई-मुई (Mimosa pudica) का उदाहरण:
- छुई-मुई के पौधे की पत्तियों को स्पर्श करने पर वे तुरंत सिकुड़ जाती हैं या बंद हो जाती हैं।
- यह गति पत्तियों के आधार पर स्थित पल्वीनस (Pulvinus) नामक संरचना की कोशिकाओं में जल के दाब (टर्गर प्रेशर) में परिवर्तन के कारण होती है।
- स्पर्श करने पर, पल्वीनस की कुछ कोशिकाएँ तेजी से जल खो देती हैं, जिससे वे सिकुड़ जाती हैं और पत्तियाँ बंद हो जाती हैं।
- कुछ समय बाद, जल का दाब सामान्य होने पर पत्तियाँ फिर से खुल जाती हैं।
- स्पर्शानुवर्तन (Thigmonasty):
- यह कंपानुकुंचन गति का एक विशेष प्रकार है जो स्पर्श के उद्दीपन से होता है।
- बेल वाले पौधों में प्रतान का किसी सहारे से लिपट जाना भी स्पर्शानुवर्तन का एक उदाहरण है, लेकिन यह वृद्धि-प्रेरित होता है, जबकि छुई-मुई की गति वृद्धि-स्वतंत्र होती है।
[IMAGE: cg_c7_science_ch18_t1_scene5] छुई-मुई की कंपानुकुंचन गति को दर्शाता है।
कंपानुकुंचन गति (Nastic Movement): पौधों की वह गति जिसकी दिशा बाहरी उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती।
अनुवर्तन और कंपानुकुंचन गति में अंतर
| विशेषता | अनुवर्तन | कंपानुकुंचन गति | |---|---|---| | उद्दीपन की दिशा | गति उद्दीपन की दिशा पर निर्भर करती है | गति उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती | | उदाहरण | प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन | छुई-मुई की पत्तियों का सिकुड़ना | | प्रकृति | वृद्धि-प्रेरित (आमतौर पर) | वृद्धि-स्वतंत्र (आमतौर पर) | | उदाहरण | तने का प्रकाश की ओर बढ़ना | छुई-मुई की पत्तियों का बंद होना |
प्रचलन की परिभाषा और सूक्ष्मजीवों में प्रचलन
प्रचलन (Locomotion) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई जीव एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करता है। यह जीवों के लिए भोजन ढूंढने, शिकारियों से बचने, साथी खोजने और सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- सूक्ष्मजीवों में प्रचलन: एककोशिकीय जीव विभिन्न संरचनाओं का उपयोग करके प्रचलन करते हैं।
- अमीबा (Amoeba):
- प्रचलन के लिए पादाभ (Pseudopodia) का उपयोग करता है।
- पादाभ कोशिकाद्रव्य के फैलने और सिकुड़ने से बनते हैं।
- ये अस्थायी संरचनाएँ होती हैं जो अमीबा को आगे बढ़ने और भोजन पकड़ने में मदद करती हैं।
- इस गति को अमीबीय गति कहते हैं।
- यूग्लीना (Euglena):
- प्रचलन के लिए कशाभिका (Flagellum) नामक संरचना का उपयोग करता है।
- कशाभिका एक लंबी, पतली, धागे जैसी संरचना होती है जो कोशिका के एक सिरे से निकलती है।
- यह कशाभिका पानी में लहरदार गति करती है, जिससे यूग्लीना को आगे बढ़ने और तैरने में सहायता मिलती है।
- पैरामीशियम (Paramecium):
- प्रचलन के लिए सीलिया (Cilia) का उपयोग करता है।
- सीलिया कोशिका की सतह पर मौजूद छोटे, बाल जैसी संरचनाएँ होती हैं।
- ये सीलिया एक समन्वित तरीके से गति करते हैं, जिससे पैरामीशियम पानी में तैरता है और भोजन को अपने मुख की ओर धकेलता है।
[IMAGE: cg_c7_science_ch18_t3_scene2] अमीबा में पादाभ द्वारा प्रचलन को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch18_t3_scene3] यूग्लीना में कशाभिका द्वारा प्रचलन को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch18_t3_scene4] पैरामीशियम में सीलिया द्वारा प्रचलन को दर्शाता है।
प्रचलन (Locomotion): जीवों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने की प्रक्रिया।
प्रचलन, गति का ही एक प्रकार है, लेकिन सभी गतियाँ प्रचलन नहीं होतीं। जैसे, पौधे गति करते हैं लेकिन प्रचलन नहीं करते (एक स्थान से दूसरे स्थान नहीं जाते)।
केंचुए में प्रचलन
केंचुआ एक अकशेरुकी जीव है जो अपने शरीर की पेशियों के क्रमिक संकुचन और शिथिलन द्वारा रेंगता है। इसके शरीर में हड्डियाँ नहीं होतीं, लेकिन मजबूत पेशियाँ होती हैं।
- केंचुए की शारीरिक संरचना:
- केंचुए का शरीर अनेक खंडों में बँटा होता है।
- प्रत्येक खंड में वृत्ताकार (circular) और अनुदैर्ध्य (longitudinal) पेशियाँ होती हैं।
- शरीर के निचले भाग पर छोटे-छोटे, कठोर बाल जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें शूक (Setae) कहते हैं, जो जमीन पर पकड़ बनाने में मदद करती हैं।
- प्रचलन की प्रक्रिया:
- अग्रभाग का विस्तार: केंचुआ अपने शरीर के अग्रभाग की वृत्ताकार पेशियों को संकुचित करता है। इससे अग्रभाग पतला और लंबा हो जाता है और आगे की ओर बढ़ता है। इस समय, अग्रभाग के शूक जमीन पर पकड़ बनाते हैं।
- पश्चभाग का संकुचन: शरीर का पिछला भाग अनुदैर्ध्य पेशियों को संकुचित करता है, जिससे वह छोटा और मोटा हो जाता है और आगे की ओर खिंचता है। इस समय, पिछले भाग के शूक जमीन से अपनी पकड़ छोड़ देते हैं।
- लहरदार गति: यह संकुचन और शिथिलन की प्रक्रिया शरीर के अग्रभाग से पश्चभाग की ओर एक लहर के रूप में चलती है।
- पकड़ बनाना और छोड़ना: शूक जमीन पर पकड़ बनाने और छोड़ने में मदद करते हैं, जिससे केंचुआ आगे बढ़ता है।
- विशेषता:
- केंचुए की गति धीमी लेकिन लगातार होती है।
- यह गति मिट्टी को ढीला करने और उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है।
[IMAGE: cg_c7_science_ch18_t4_scene2] केंचुए में प्रचलन की प्रक्रिया को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch18_t4_scene3] पेशियों के संकुचन और शिथिलन को दर्शाता है।
केंचुए में प्रचलन के लिए हड्डियों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह केवल पेशियों के समन्वय से होता है।
केंचुए में प्रचलन की प्रक्रिया को चित्र सहित समझाने का अभ्यास करें। यह अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
जंतुओं में प्रचलन के सामान्य तरीके (कीट और मछली)
विभिन्न जंतुओं में उनके आवास और शारीरिक संरचना के अनुसार प्रचलन के अलग-अलग तरीके होते हैं।
- कीटों में प्रचलन:
- उड़ना: अधिकांश कीटों में उड़ने के लिए पंख होते हैं।
- पंख विशेष पेशियों से जुड़े होते हैं जो इनके संकुचन और शिथिलन से पंखों को गति प्रदान करती हैं।
- उदाहरण: घरेलू मक्खी, मच्छर, तितली।
- चलना/रेंगना: कुछ कीटों में चलने के लिए पैर भी होते हैं।
- उदाहरण: चींटी, कॉकरोच (चलने और उड़ने दोनों)।
- कीटों के पंख और पैर दोनों ही प्रचलन में सहायक होते हैं, जिससे वे भोजन, साथी और सुरक्षा के लिए गति कर पाते हैं।
- मछली में प्रचलन:
- मछली जलीय वातावरण में रहती है और मुख्य रूप से तैरने के माध्यम से प्रचलन करती है।
- धारा रेखीय शरीर: मछली का शरीर धारा रेखीय (Streamlined) होता है, जो पानी में प्रतिरोध को कम करता है और उसे आसानी से तैरने में मदद करता है।
- पूँछ: मछली अपनी पेशीयुक्त पूँछ (Caudal fin) को अगल-बगल हिलाकर आगे बढ़ती है। पूँछ एक पतवार की तरह काम करती है।
- पंख (Fins):
- अन्य पंख (जैसे पेक्टोरल, पेल्विक, पृष्ठीय और गुदा पंख) संतुलन बनाए रखने और दिशा बदलने में सहायक होते हैं।
- ये पंख मछली को पानी में ऊपर-नीचे जाने और रुकने में भी मदद करते हैं।
- मछली की पेशियाँ शरीर के दोनों ओर बारी-बारी से संकुचित होती हैं, जिससे शरीर में S-आकार की लहर उत्पन्न होती है जो उसे आगे धकेलती है।
[IMAGE: cg_c7_science_ch18_t5_scene2] कीटों में प्रचलन को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch18_t5_scene3] मछली में प्रचलन को दर्शाता है।
मछली का धारा रेखीय शरीर पानी में घर्षण को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
विभिन्न जंतुओं के प्रचलन अंगों और तरीकों को तुलनात्मक रूप से याद रखें। यह बहुविकल्पीय प्रश्नों में उपयोगी होता है।
सरीसृपों और पक्षियों में प्रचलन
जंतु जगत में प्रचलन के तरीके बहुत विविध होते हैं, जो उनके पर्यावरण और जीवनशैली के अनुकूल होते हैं।
- सरीसृपों में प्रचलन:
- साँप:
- साँप में पैर नहीं होते। वे अपनी लचीली रीढ़ की हड्डी और शक्तिशाली पेशियों के संकुचन और शिथिलन से रेंगते हैं।
- इनके शरीर में पार्श्वीय तरंग गति (sideways undulating movement) होती है, जिससे वे जमीन पर धकेलते हुए आगे बढ़ते हैं।
- साँप की त्वचा पर मौजूद शल्क (scales) जमीन पर पकड़ बनाने में मदद करते हैं।
- छिपकली:
- छिपकली के चार पैर होते हैं, जो उन्हें चलने और दौड़ने में मदद करते हैं।
- इनके पैरों में विशेष प्रकार के गद्दियाँ (Pads) होते हैं, जो उन्हें चिकनी सतहों, जैसे दीवारों और छतों पर भी मजबूत पकड़ बनाने में सक्षम बनाते हैं।
- पक्षियों में प्रचलन:
- उड़ना: अधिकांश पक्षी उड़ने में सक्षम होते हैं।
- इनके अग्रपाद पंखों में रूपांतरित हो जाते हैं।
- इनकी हड्डियाँ खोखली और हल्की होती हैं, जो उड़ान के लिए अनुकूलित होती हैं।
- पंखों से जुड़ी शक्तिशाली छाती की पेशियाँ (pectoral muscles) होती हैं, जो पंखों को ऊपर और नीचे करने के लिए आवश्यक बल प्रदान करती हैं।
- पक्षी अपने पंखों को ऊपर-नीचे करके हवा में उठते हैं और आगे बढ़ते हैं।
- चलना/फुदकना: पक्षी जमीन पर अपने पैरों की सहायता से चलते या फुदकते भी हैं।
- उड़ने में असमर्थ पक्षी:
- कुछ पक्षी, जैसे कीवी और शुतुरमुर्ग, उड़ नहीं सकते।
- इनमें उड़ने के लिए आवश्यक शक्तिशाली छाती की पेशियाँ और अनुकूलित पंख नहीं होते।
- ये मुख्य रूप से अपने पैरों का उपयोग चलने और दौड़ने के लिए करते हैं।
[IMAGE: cg_c7_science_ch18_t6_scene2] सरीसृपों में प्रचलन को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch18_t6_scene4] उड़ने में असमर्थ पक्षियों को दर्शाता है।
पक्षियों की खोखली हड्डियाँ उनके शरीर के वजन को कम करती हैं, जो उड़ान के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
उड़ने वाले स्तनधारी और मानव में गति
प्रचलन केवल पक्षियों या कीटों तक ही सीमित नहीं है; स्तनधारियों में भी उड़ने की क्षमता पाई जाती है, और मानव में गति एक जटिल तंत्र का परिणाम है।
- चमगादड़ (Bat):
- चमगादड़ एक उड़ने वाला स्तनधारी है, जो इसे अन्य स्तनधारियों से अलग बनाता है।
- इसके पंख अग्रपाद (आगे के पैर) और पश्चपाद (पीछे के पैर) के बीच फैली त्वचा की एक झिल्ली से बने होते हैं।
- यह झिल्ली एक पंख जैसी संरचना बनाती है, जो चमगादड़ को हवा में उड़ने और ग्लाइड करने में सक्षम बनाती है।
- चमगादड़ रात में सक्रिय होते हैं और प्रतिध्वनि स्थान निर्धारण (Echolocation) का उपयोग करके शिकार करते हैं और नेविगेट करते हैं।
- मानव शरीर में गति:
- मानव शरीर में गति कंकाल तंत्र (Skeletal System) और पेशी तंत्र (Muscular System) के समन्वय से होती है।
- कंकाल तंत्र:
- हड्डियों का एक ढाँचा प्रदान करता है जो शरीर को सहारा देता है और अंगों की सुरक्षा करता है।
- हड्डियाँ जोड़ों (Joints) पर एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं, जिससे गति संभव होती है।
- पेशी तंत्र:
- पेशियाँ हड्डियों से कंडरा (Tendons) नामक मजबूत तंतुओं द्वारा जुड़ी होती हैं।
- पेशियों का कार्य:
- पेशियाँ केवल संकुचित (contract) हो सकती हैं, शिथिल (relax) होने पर वे अपनी सामान्य लंबाई में लौट आती हैं।
- किसी हड्डी को गति देने के लिए, एक पेशी संकुचित होती है और हड्डी को खींचती है।
- हड्डी को वापस अपनी मूल स्थिति में लाने के लिए, एक विरोधी पेशी संकुचित होती है। इसलिए, अधिकांश गतियों के लिए पेशियों के जोड़े में काम करना आवश्यक है (एक खींचती है, दूसरी शिथिल होती है)।
- आंतरिक अंगों की गति: हृदय, फेफड़े, आमाशय और आँतों जैसे आंतरिक अंगों की पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं और अपने आप कार्य करती हैं, जिससे शरीर के अंदरूनी कार्य सुचारू रूप से चलते रहते हैं।
[IMAGE: cg_c7_science_ch18_t7_scene4] चमगादड़ को उड़ते हुए दर्शाता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch18_t7_scene5] मानव शरीर में गति के लिए कंकाल और पेशी तंत्र के समन्वय को दर्शाता है।
मानव शरीर में गति के लिए पेशियों को हमेशा जोड़े में काम करना पड़ता है क्योंकि पेशियाँ केवल खींच सकती हैं, धक्का नहीं दे सकतीं।
कंडरा (Tendon): मजबूत, रेशेदार संयोजी ऊतक जो पेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं।