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सजीवों में प्रजनन
Chhattisgarh · Class 7 · 🔬 Science · Chapter 20

सजीवों में प्रजनन

प्रजननलैंगिक प्रजननअलैंगिक प्रजननपरागणनिषेचनअंडज

यह अध्याय सजीवों में प्रजनन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाता है। इसमें पौधों और जंतुओं दोनों में होने वाले लैंगिक और अलैंगिक प्रजनन के विभिन्न तरीकों का वर्णन किया गया है। छात्र फूल की संरचना, परागण, निषेचन, बीज और फल के विकास के बारे में जानेंगे। साथ ही, जंतुओं में आंतरिक और बाह्य निषेचन, अंडज और जरायुज जंतुओं के बीच अंतर, और अमीबा व हाइड्रा जैसे जीवों में अलैंगिक प्रजनन के तरीकों को भी समझेंगे। यह अध्याय जीवन चक्र और प्रजातियों के अस्तित्व के लिए प्रजनन के महत्व पर प्रकाश डालता है।

प्रजनन की अवधारणा

प्रजनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान नए जीव उत्पन्न करते हैं। यह पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता के लिए आवश्यक है।

  • महत्व:
  • जाति की निरंतरता बनाए रखना।
  • पुरानी पीढ़ियों के स्थान पर नई पीढ़ियों का निर्माण।
  • पर्यावरण के अनुकूलन में सहायता।
  • प्रजनन के प्रकार:
  • अलैंगिक प्रजनन: इसमें केवल एक जनक शामिल होता है और युग्मकों का संलयन नहीं होता। उत्पन्न संतान आनुवंशिक रूप से जनक के समान होती है।
  • लैंगिक प्रजनन: इसमें दो जनक (नर और मादा) शामिल होते हैं और युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) का संलयन होता है। उत्पन्न संतान आनुवंशिक रूप से दोनों जनकों का मिश्रण होती है।
📖परिभाषा

प्रजनन (Reproduction): जीवों द्वारा अपने समान नए जीव उत्पन्न करने की प्रक्रिया को प्रजनन कहते हैं।

महत्त्वपूर्ण

सभी सजीवों में प्रजनन की क्षमता होती है। यह जीवन का एक मूलभूत लक्षण है।

पौधों में प्रजनन

पौधों में प्रजनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: लैंगिक प्रजनन और अलैंगिक प्रजनन।

2.1 लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction)

  • मुख्य अंग: फूल (पुष्प) पौधे का जनन अंग है।
  • फूल के भाग:
  • बाह्यदल (Calyx): हरे रंग की पत्ती जैसी संरचनाएँ जो कली अवस्था में फूल की रक्षा करती हैं।
  • दल (Corolla): रंगीन पंखुड़ियाँ जो परागणकों को आकर्षित करती हैं।
  • पुंकेसर (Androecium): नर प्रजनन अंग।
  • परागकोष (Anther): इसमें परागकण (नर जनन इकाई) बनते हैं।
  • पुतंतु (Filament): परागकोष को सहारा देता है।
  • स्त्रीकेसर (Gynoecium): मादा प्रजनन अंग।
  • वर्तिकाग्र (Stigma): चिपचिपा भाग जो परागकणों को ग्रहण करता है।
  • वर्तिका (Style): एक नली जो वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ती है।
  • अंडाशय (Ovary): इसमें बीजांड (Ovules) होते हैं, जिनमें अंडाणु (Egg/मादा जनन इकाई) होते हैं।
  • फूलों के प्रकार (पुंकेसर और स्त्रीकेसर की उपस्थिति के आधार पर):
  • द्विलिंगी फूल (Bisexual Flower): ऐसे फूल जिनमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों एक ही फूल में पाए जाते हैं।
  • उदाहरण: गुड़हल, सरसों।
  • एकलिंगी फूल (Unisexual Flower): ऐसे फूल जिनमें केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर पाया जाता है।
  • उदाहरण: पपीता, मक्का, लौकी, कुम्हड़ा।
  • नर फूल: केवल पुंकेसर होता है।
  • मादा फूल: केवल स्त्रीकेसर होता है।

2.1.1 परागण (Pollination)

  • परिभाषा: परागकणों का परागकोष से निकलकर वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण कहते हैं।
  • प्रकार:
  • स्व-परागण (Self-pollination): जब परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर या उसी पौधे के किसी अन्य फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
  • पर-परागण (Cross-pollination): जब परागकण एक फूल से दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
  • परागण के माध्यम: हवा, जल, कीट (मधुमक्खी, तितली), पक्षी, अन्य जंतु।

2.1.2 निषेचन (Fertilization)

  • प्रक्रिया:
  1. वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद, परागकण अंकुरित होते हैं और एक पतली नली बनाते हैं जिसे परागनाल (Pollen tube) कहते हैं।
  2. परागनाल वर्तिका से होते हुए अंडाशय तक पहुँचती है और बीजांड में प्रवेश करती है।
  3. परागनाल के माध्यम से नर जनन इकाई (परागकण से) बीजांड में मौजूद मादा जनन इकाई (अंडाणु) से मिलती है।
  4. नर और मादा जनन इकाईयों के इस मिलन को निषेचन कहते हैं।
  • निषेचन के बाद परिवर्तन:
  • निषेचित अंडाणु युग्मनज (Zygote) कहलाता है।
  • युग्मनज विकसित होकर भ्रूण (Embryo) में बदल जाता है।
  • बीजांड बीज (Seed) में बदल जाता है।
  • अंडाशय फल (Fruit) में विकसित हो जाता है।
  • परिणाम: बीज से नए पौधे उत्पन्न होते हैं।

2.2 अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction)

  • परिभाषा: इस विधि में बीज के अलावा पौधे के किसी अन्य भाग (तना, पत्ती, जड़) से नया पौधा उत्पन्न होता है। इसमें केवल एक जनक शामिल होता है।
  • लाभ: कम समय में अधिक पौधे उगाए जा सकते हैं, उन पौधों के लिए उपयोगी जिनमें बीज देर से बनते हैं या नहीं बनते।
  • विधियाँ:
  • कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation):
  • तने द्वारा:
  • भूमिगत तना (Underground Stem): आलू (आँख/पर्वसंधि से), अदरक, हल्दी, जिमीकंद, लहसुन (कलिकाओं से)।
  • वायवीय तना (Aerial Stem): गन्ना (पर्वसंधियों से), गुलाब (कलम/कटिंग द्वारा)।
  • जड़ द्वारा: शकरकंद, डहेलिया।
  • पत्ती द्वारा: अजूबा (पत्थरचट्टा) की पत्ती के किनारों पर उपस्थित पत्र कलिकाओं से।
  • उदाहरण:
  • आलू की आँखें (पर्वसंधियाँ) पर्याप्त नमी, ताप और वायु मिलने पर अंकुरित होकर नया पौधा बनाती हैं।
  • गुलाब के तने की कलम को मिट्टी में लगाने पर नया पौधा उगता है।
  • गन्ने के पर्वसंधि वाले टुकड़ों को बोने पर नए पौधे उगते हैं।

| लक्षण | अंडाशय | फल | |:------------|:-------------------|:-------------------| | आकार | छोटा / बड़ा | छोटा / बड़ा | | आकृति | लंबा / गोल | लंबा / गोल | | सतह | चिकनी / रोमयुक्त | चिकनी / रोमयुक्त | | दीवार | एक समान / चपटी धारीदार | एक समान / चपटी धारीदार |

निष्कर्ष: फल अंडाशय से और बीज बीजांड से बनते हैं।

💡सुझाव

फूल के विभिन्न भागों (बाह्यदल, दल, पुंकेसर, स्त्रीकेसर) और उनके कार्यों को याद रखें। द्विलिंगी और एकलिंगी फूलों के उदाहरण महत्वपूर्ण हैं।

📖परिभाषा

परागकण (Pollen Grains): परागकोष में बनने वाली सूक्ष्म संरचनाएँ जो नर जनन इकाई होती हैं।

📖परिभाषा

अंडाणु (Ovum): बीजांड में बनने वाली मादा जनन इकाई।

याद रखें

शक्कर के घोल में परागकणों को रखने पर परागनाल बनती है क्योंकि शक्कर का घोल वर्तिकाग्र द्वारा स्रावित मीठे पदार्थ का अनुकरण करता है, जो परागकणों के अंकुरण को प्रेरित करता है।

जंतुओं में प्रजनन

जंतुओं में भी प्रजनन लैंगिक और अलैंगिक दोनों विधियों से होता है।

3.1 लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction)

  • नर जनन अंग:
  • वृषण (Testis): प्रमुख नर जनन अंग।
  • शुक्राणु (Sperm): वृषण में बनते हैं। ये नर युग्मक (Male Gamete) होते हैं।
  • विशेषताएँ: छोटे, गतिशील।
  • मादा जनन अंग:
  • अंडाशय (Ovary): प्रमुख मादा जनन अंग।
  • अंडाणु (Ovum/Egg): अंडाशय में बनते हैं। ये मादा युग्मक (Female Gamete) होते हैं।
  • विशेषताएँ: शुक्राणु की तुलना में बड़े, अचल, गोल या अंडाकार।

3.1.1 निषेचन (Fertilization)

  • परिभाषा: नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) के मिलन की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं।
  • प्रकार:
  • आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization): जब अंडाणु का निषेचन मादा शरीर के भीतर होता है।
  • उदाहरण: मनुष्य, गाय, बिल्ली, छिपकली, पक्षी।
  • पक्षी और छिपकली के अंडे निषेचित अंडाणु होते हैं।
  • बाह्य निषेचन (External Fertilization): जब अंडाणु का निषेचन मादा शरीर के बाहर (आमतौर पर जल में) होता है।
  • उदाहरण: मछली, मेंढक (उभयचर)।
  • प्रक्रिया: मादा मेंढक पानी में अंडे छोड़ती है, और नर शुक्राणुओं को उन पर छोड़ता है। शुक्राणु और अंडाणु पानी में मिलते हैं।

3.1.2 परिवर्धन (Development)

  • युग्मनज (Zygote): निषेचन के बाद बना एकल कोशिका।
  • भ्रूण (Embryo): युग्मनज में बार-बार कोशिका विभाजन और वृद्धि से भ्रूण बनता है।
  • शिशु (Infant): भ्रूण में धीरे-धीरे सभी अंग बनते जाते हैं, जिससे यह छोटे जीव या शिशु में बदल जाता है।
  • परिवर्धन/विकास: युग्मनज से शिशु बनने की पूरी प्रक्रिया।

3.1.3 जंतुओं के प्रकार (जन्म देने के आधार पर)

  • जरायुज (Viviparous): ऐसे जंतु जो पूर्ण विकसित शिशु को जन्म देते हैं। भ्रूण का परिवर्धन मादा के गर्भाशय में होता है।
  • उदाहरण: मनुष्य, गाय, बिल्ली, कुत्ते।
  • अंडज (Oviparous): ऐसे जंतु जो अंडे देते हैं और अंडे से बच्चे उत्पन्न होते हैं।
  • उदाहरण: कीट, मछली, मेंढक, सर्प, पक्षी।

3.1.4 कायांतरण (Metamorphosis)

  • कुछ अंडज जंतुओं में अंडे से निकला शिशु अपने जनक के समान नहीं होता। वह कई अवस्थाओं से गुजरकर वयस्क बनता है। इस प्रक्रिया को कायांतरण कहते हैं।
  • उदाहरण: मक्खी, मच्छर (अंडा → इल्ली → शंखी (प्यूपा) → पूर्ण विकसित जीव)।

3.2 अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction)

  • कुछ सूक्ष्म जंतुओं और निम्न वर्ग के जंतुओं में अलैंगिक प्रजनन होता है।
  • विधियाँ:
  • विखंडन (Fission):
  • परिभाषा: जब जीव का शरीर दो या अधिक भागों में बंट जाता है और प्रत्येक भाग एक नए जीव में बदल जाता है।
  • उदाहरण: अमीबा (पर्याप्त भोजन मिलने पर)।
  • पुनर्जनन (Regeneration):
  • परिभाषा: जब किसी जीव का शरीर दुर्घटनावश एक से अधिक भागों में बंट जाता है और प्रत्येक भाग एक नए जीव के रूप में विकसित हो जाता है। यह अंगों की मरम्मत से भिन्न है।
  • उदाहरण: हाइड्रा, प्लेनेरिया। (छिपकली की पूंछ का फिर से बनना अंगों की मरम्मत है, पूरा जीव नहीं बनता।)
  • मुकुलन/कलिकायन (Budding):
  • परिभाषा: जीव के शरीर पर एक छोटा सा उभार (कलिका/मुकुल) बनता है, जो विकसित होकर मुख्य शरीर से अलग हो जाता है और एक नए जीव में बदल जाता है।
  • उदाहरण: हाइड्रा, यीस्ट।

| लक्षण | नर जनन अंग (वृषण) | मादा जनन अंग (अंडाशय) | |:--------------|:-------------------|:---------------------| | बनने वाले युग्मक | शुक्राणु | अंडाणु | | युग्मक का आकार | छोटा | बड़ा | | युग्मक की गतिशीलता | गतिशील | अचल | | संख्या | अधिक | कम |

📖परिभाषा

युग्मक (Gamete): लैंगिक प्रजनन में भाग लेने वाली जनन कोशिकाएँ (शुक्राणु और अंडाणु)।

🚧ग़लत धारणा

पुनर्जनन और अंगों की मरम्मत में अंतर समझें। पुनर्जनन में पूरे जीव का निर्माण होता है, जबकि अंगों की मरम्मत में केवल क्षतिग्रस्त अंग ठीक होता है।

💡सुझाव

आंतरिक और बाह्य निषेचन के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है। अंडज और जरायुज जंतुओं के बीच अंतर भी अक्सर पूछा जाता है।

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