विद्युत धारा और इसके प्रभाव
यह अध्याय विद्युत धारा और उसके विभिन्न प्रभावों जैसे ऊष्मीय और चुंबकीय प्रभावों का परिचय देता है। छात्र विद्युत परिपथ के अवयवों, सुचालक और हीन चालक पदार्थों, विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के अनुप्रयोगों (जैसे बल्ब, हीटर) और चुंबकीय प्रभाव (जैसे विद्युत घंटी, विद्युत चुंबक) के बारे में सीखते हैं। इसमें सुरक्षा फ्यूज और विद्युत धारा के खतरों तथा उनसे बचने के उपायों पर भी चर्चा की गई है।
विद्युत परिपथ के अवयव और उनके प्रतीक
विद्युत परिपथ विद्युत धारा के प्रवाह के लिए एक बंद और पूर्ण मार्ग होता है।
- विद्युत परिपथ के आवश्यक अवयव:
- विद्युत धारा का स्रोत: जैसे सेल या बैटरी।
- उपकरण: जिसे विद्युत की आवश्यकता हो, जैसे बल्ब।
- संयोजक तार: जो सुचालक पदार्थ (जैसे ताँबा) के बने हों।
- कुंजी या स्विच: जिसके द्वारा परिपथ को खोला या बंद किया जा सके।
- विद्युत परिपथ के अवयवों के प्रतीक:
- विद्युत परिपथों को सरल बनाने के लिए विभिन्न अवयवों के लिए मानक प्रतीकों का उपयोग किया जाता है।
- विद्युत सेल:
- प्रतीक में एक लंबी रेखा और एक छोटी, मोटी समांतर रेखा होती है।
- लंबी रेखा धन टर्मिनल (+) को और छोटी, मोटी रेखा ऋण टर्मिनल (-) को दर्शाती है।
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- बैटरी:
- दो या दो से अधिक सेलों का संयोजन।
- एक सेल के धन टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से संयोजित किया जाता है।
- इससे कुल वोल्टेज बढ़ता है।
- उपयोग: टॉर्च, ट्रांजिस्टर, रेडियो, खिलौने, टी.वी. रिमोट कंट्रोल, दीवार घड़ी आदि।
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- बल्ब:
\( \text{⊙} \)या\( \text{X} \) - स्विच (खुला):
\( \text{---o / o---} \) - स्विच (बंद):
\( \text{---o--o---} \) - तार:
\( \text{-----} \)
- खुला और बंद परिपथ:
- खुला परिपथ: जब विद्युत धारा के प्रवाह का मार्ग कहीं से टूटा हुआ हो (जैसे स्विच 'ऑफ' स्थिति में)। इसमें विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती।
- बंद परिपथ: जब विद्युत धारा के प्रवाह का मार्ग पूर्ण और अबाधित हो (जैसे स्विच 'ऑन' स्थिति में)। इसमें विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
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- परिपथ आरेख: प्रतीकों का उपयोग करके बनाए गए परिपथ के चित्र।
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बैटरी संयोजन: बैटरी बनाने के लिए, एक सेल के धन टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है।
विद्युत धारा केवल बंद परिपथ में ही प्रवाहित होती है।
विद्युत सुचालक और हीन चालक
- विद्युत सुचालक (Conductors):
- वे पदार्थ जो अपने में से विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित होने देते हैं।
- इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जो आवेश के प्रवाह में मदद करते हैं।
- उदाहरण: सभी धातुएँ (ताँबा, एल्यूमीनियम, लोहा), मिश्र धातुएँ, ग्रेफाइट, नमक का घोल, नींबू का रस मिला पानी।
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- विद्युत हीन चालक (Insulators/Bad Conductors):
- वे पदार्थ जो अपने में से विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते हैं।
- इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं, जिससे आवेश का प्रवाह बाधित होता है।
- उदाहरण: अधातुएँ (ग्रेफाइट के अलावा), लकड़ी, काँच, प्लास्टिक, रबर, शुष्क वायु, नारियल का तेल।
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- सुचालक/हीन चालक का परीक्षण:
- एक साधारण परिपथ (सेल, बल्ब, तार) का उपयोग करके परीक्षण किया जा सकता है।
- जिस पदार्थ का परीक्षण करना हो, उसे परिपथ के दो खुले सिरों के बीच रखा जाता है।
- यदि बल्ब जलता है, तो पदार्थ सुचालक है; यदि नहीं जलता, तो हीन चालक है।
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- दैनिक जीवन में उपयोग:
- विद्युत उपकरणों के हैंडल (जैसे विद्युत प्रेस) बैकेलाइट या लकड़ी जैसे हीन चालक पदार्थों के बनाए जाते हैं ताकि विद्युत शॉक से बचा जा सके।
- गर्म होने वाले हिस्से (जैसे हीटर का तार) सुचालक धातुओं के बनाए जाते हैं।
| स.क्र. | पदार्थ | बल्ब जला या नहीं | विद्युत सुचालक / विद्युत हीन चालक | |---|---|---|---| | 1. | माचिस की तीली | नहीं | हीन चालक | | 2. | प्लास्टिक | नहीं | हीन चालक | | 3. | रबर | नहीं | हीन चालक | | 4. | कागज | नहीं | हीन चालक | | 5. | पेंसिल का ग्रेफाइट | हाँ | सुचालक | | 6. | नल का पानी | हाँ (कम चमक) | सुचालक (कमजोर) | | 7. | नारियल का तेल | नहीं | हीन चालक | | 8. | नींबू का रस मिला पानी | हाँ | सुचालक | | 9. | नमक का जल में घोल | हाँ | सुचालक |
अक्सर छात्र सोचते हैं कि सभी अधातुएँ हीन चालक होती हैं। याद रखें, ग्रेफाइट एक अधातु होने के बावजूद विद्युत का सुचालक है।
विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव
- विद्युत धारा के मुख्य प्रभाव:
- ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect): जब विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो चालक गर्म हो जाता है।
- चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect): विद्युत धारा अपने आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
- रासायनिक प्रभाव (Chemical Effect): विद्युत धारा रासायनिक परिवर्तन लाती है (उच्च कक्षाओं में पढ़ेंगे)।
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- ऊष्मीय प्रभाव क्या है?
- जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसकी ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा में परिवर्तित हो जाता है, जिससे वह पदार्थ गर्म हो जाता है।
- इसका मुख्य कारण चालक का प्रतिरोध (Resistance) है।
- प्रतिरोध: यह चालक का वह गुण है जो विद्युत धारा के प्रवाह में अवरोध उत्पन्न करता है।
- जब इलेक्ट्रॉन चालक में से गुजरते हैं, तो वे चालक के परमाणुओं से टकराते हैं, जिससे गतिज ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा ऊर्जा में बदल जाता है।
- प्रतिरोध को विद्युत परिपथ में
\( \Omega \)(ओम) संकेत से प्रदर्शित किया जाता है। - [IMAGE: cg_c7_science_ch21_t3_scene2]
- उत्पन्न ऊष्मा को प्रभावित करने वाले कारक:
- विद्युत धारा का परिमाण: जितनी अधिक विद्युत धारा (सेलों की संख्या) होगी, उतनी ही अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी।
- तार के पदार्थ का प्रकार:
- उच्च प्रतिरोध वाले पदार्थ (जैसे नाइक्रोम) अधिक ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
- कम प्रतिरोध वाले पदार्थ (जैसे ताँबा) कम ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
- समय: जितनी अधिक देर तक विद्युत धारा प्रवाहित की जाएगी, उतनी ही अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी।
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- प्रदर्शन:
- एक बैटरी, कुंजी और पतले चालक तार (जैसे ताँबे या नाइक्रोम का तार) का परिपथ बनाकर ऊष्मीय प्रभाव देखा जा सकता है।
- कुंजी बंद करने पर तार गर्म हो जाता है। नाइक्रोम का तार ताँबे की तुलना में अधिक गर्म होता है।
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प्रतिरोध (Resistance): किसी चालक का वह गुण जो उसमें से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करता है।
विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव को जूल तापन प्रभाव भी कहते हैं।
विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के अनुप्रयोग
- विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का उपयोग कई घरेलू और औद्योगिक उपकरणों में होता है।
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- विद्युत बल्ब:
- इसमें टंग्स्टेन धातु का एक पतला फिलामेंट होता है।
- टंग्स्टेन का गलनांक बहुत उच्च होता है, जिससे यह अत्यधिक गर्म होने पर भी पिघलता नहीं है।
- जब विद्युत धारा फिलामेंट से गुजरती है, तो यह ऊष्मीय प्रभाव के कारण श्वेत-तप्त (white-hot) होकर प्रकाश उत्सर्जित करता है।
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- विद्युत हीटर, विद्युत प्रेस, पानी गर्म करने वाले उपकरण:
- इनमें नाइक्रोम (निकेल और क्रोमियम की मिश्रधातु) के तार का उपयोग तापन अवयव (Heating Element) के रूप में किया जाता है।
- नाइक्रोम में उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक होता है।
- विद्युत धारा प्रवाहित होने पर यह बिना पिघले अत्यधिक गर्म होकर लाल-तप्त हो जाता है और ऊष्मा उत्पन्न करता है।
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- अन्य अनुप्रयोग:
- सोल्डरिंग आयरन
- विद्युत टोस्टर
- विद्युत चूल्हे
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विद्युत बल्ब का फिलामेंट टंग्स्टेन का बना होता है, जबकि हीटर का तापन अवयव नाइक्रोम का। दोनों का गलनांक उच्च होता है।
सुरक्षा फ्यूज
- विद्युत परिपथ में खतरा:
- जब परिपथ में आवश्यकता से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उपकरण जलकर खराब हो सकते हैं।
- लघुपथन (Short Circuit): जब धन और ऋण तार आपस में जुड़ जाते हैं, तो परिपथ में अचानक अत्यधिक धारा प्रवाहित होती है।
- इससे परिपथ का तापमान बहुत बढ़ जाता है, चिंगारी निकलती है और आग लगने का खतरा पैदा हो जाता है, जिससे जान-माल की हानि हो सकती है।
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- सुरक्षा फ्यूज क्या है?
- फ्यूज एक सुरक्षा युक्ति है जो विद्युत परिपथ को अत्यधिक विद्युत धारा से होने वाले नुकसान से बचाती है।
- यह जिंक, लेड और टिन की मिश्रधातु का एक पतला तार होता है।
- इसका गलनांक (पिघलने का तापमान) बहुत कम होता है।
- इसे काँच की नली के अंदर या चीनी मिट्टी के विद्युत रोधी आधार (कट आउट) में लगाकर परिपथ में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।
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- फ्यूज का कार्य सिद्धांत:
- जब परिपथ में अत्यधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है (जैसे लघुपथन या ओवरलोडिंग के कारण)।
- विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के कारण फ्यूज तार गर्म हो जाता है।
- चूँकि इसका गलनांक कम होता है, यह गर्म होकर पिघल जाता है और टूट जाता है।
- फ्यूज तार के टूटने से विद्युत परिपथ अपूर्ण (खुला) हो जाता है और विद्युत धारा का प्रवाह रुक जाता है।
- इस प्रकार, महंगे उपकरण और घर आग लगने जैसी दुर्घटनाओं से बच जाते हैं।
- महत्व: फ्यूज हमारे घरों और विद्युत उपकरणों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।
फ्यूज तार का गलनांक कम क्यों होता है? ताकि अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर यह जल्दी पिघलकर परिपथ को तोड़ दे और उपकरणों को बचा सके। यह एक महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न है।
विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव और विद्युत चुंबक
- चुंबकीय प्रभाव की खोज:
- सन् 1820 में डेनमार्क के भौतिक वैज्ञानिक एच.सी. ओर्स्टेड ने खोजा कि जब किसी चालक तार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
- उन्होंने चुंबकीय सुई के पास धारावाही तार रखकर देखा कि सुई घूम जाती है, जिससे यह सिद्ध हुआ।
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- विद्युत चुंबक (Electromagnet):
- जब किसी नरम लोहे के टुकड़े पर विद्युतरोधी ताँबे के तार को कुंडली के रूप में लपेटा जाता है और उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह लोहे का टुकड़ा चुंबक की तरह व्यवहार करने लगता है। इसे विद्युत चुंबक कहते हैं।
- जैसे ही विद्युत धारा बंद की जाती है, इसका चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। इसलिए इसे अस्थायी चुंबक भी कहते हैं।
- विद्युत चुंबक की शक्ति को बढ़ाना:
- कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाकर।
- प्रवाहित विद्युत धारा का परिमाण बढ़ाकर।
- कुंडली के अंदर नरम लोहे की क्रोड रखकर।
- [IMAGE: 21.8 क,ख]
- [IMAGE: 21.8 ग,घ]
- विद्युत चुंबकों के उपयोग:
- विद्युत घंटी, टेलीफोन और लाउडस्पीकर में।
- क्रेन में लोहे की भारी वस्तुओं को उठाने हेतु।
- कचरे से लोहा अलग करने में।
- विद्युत मोटर, विद्युत ट्रेन, विद्युतजनित्र (जनरेटर) इत्यादि में।
- चिकित्सा में, आँखों से चुंबकीय पदार्थ के छोटे कणों को निकालने के लिए।
विद्युत चुंबक एक अस्थायी चुंबक होता है, जिसका चुंबकत्व विद्युत धारा प्रवाहित होने तक ही रहता है।
विद्युत घंटी की कार्यप्रणाली
- विद्युत घंटी विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर आधारित एक उपकरण है।
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- विद्युत घंटी के मुख्य भाग:
- विद्युत चुंबक (M): तार की कुंडली जिस पर विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
- नरम लोहे की आर्मेचर पट्टी (A): विद्युत चुंबक द्वारा आकर्षित होने वाली पट्टी।
- हथौड़ा (H): आर्मेचर से जुड़ा, जो घंटी से टकराता है।
- धातु की कटोरी (B): जिससे हथौड़ा टकराकर ध्वनि उत्पन्न करता है।
- स्प्रिंग (C): आर्मेचर को उसकी प्रारंभिक स्थिति में वापस लाने में मदद करता है।
- संपर्क पेंच (S): आर्मेचर से संपर्क बनाने और तोड़ने वाला पेंच।
- पेंच P और Q: विद्युत धारा के स्रोत से कुंडली को जोड़ने वाले टर्मिनल।
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- कार्यप्रणाली (बजने की प्रक्रिया):
- परिपथ पूरा होना: जब पुश बटन दबाया जाता है, तो विद्युत परिपथ पूरा हो जाता है।
- विद्युत चुंबक सक्रिय: विद्युत धारा विद्युत चुंबक (M) की कुंडली से प्रवाहित होती है, जिससे वह चुंबकित हो जाता है।
- आर्मेचर का आकर्षण: विद्युत चुंबक नरम लोहे की आर्मेचर पट्टी (A) को अपनी ओर आकर्षित करता है।
- ध्वनि उत्पन्न: आर्मेचर के साथ जुड़ा हथौड़ा (H) धातु की कटोरी (B) से टकराता है, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
- परिपथ का टूटना: आर्मेचर के आकर्षित होने पर, यह संपर्क पेंच (S) से अपना संपर्क खो देता है, जिससे विद्युत परिपथ टूट जाता है।
- चुंबकत्व समाप्त: परिपथ टूटने से विद्युत चुंबक (M) का चुंबकत्व समाप्त हो जाता है और वह आर्मेचर को छोड़ देता है।
- प्रारंभिक स्थिति में वापसी: स्प्रिंग (C) के कारण आर्मेचर अपनी प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाता है, जिससे वह फिर से संपर्क पेंच (S) को छूता है।
- चक्र की पुनरावृत्ति: इससे परिपथ फिर से पूरा हो जाता है और यह चक्र लगातार चलता रहता है, जिससे घंटी बार-बार बजती है।
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- पुश बटन का महत्व:
- विद्युत घंटियों में साधारण कुंजी के बजाय पुश बटन का उपयोग किया जाता है।
- पुश बटन केवल तब तक परिपथ को पूरा रखता है जब तक उसे दबाकर रखा जाता है।
- दबाव हटते ही परिपथ टूट जाता है और घंटी बजना बंद हो जाती है, जिससे उपयोगकर्ता को घंटी के संचालन पर तात्कालिक नियंत्रण मिलता है।
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विद्युत घंटी का नामांकित चित्र बनाना और उसकी कार्यप्रणाली समझाना बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाने वाला प्रश्न है।
विद्युत धारा से सुरक्षा के उपाय
- विद्युत धारा के खतरे:
- विद्युत धारा बहुत उपयोगी है, लेकिन असावधानी से उपयोग करने पर खतरनाक हो सकती है।
- विद्युत शॉक/झटका: खुले तारों को छूने, ढीले कनेक्शन या क्षतिग्रस्त विद्युतरोधी पर्त वाले उपकरणों का उपयोग करने से लगता है।
- यह शरीर की कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है और गंभीर चोट या मृत्यु का कारण बन सकता है।
- लघुपथन (Short Circuit): अत्यधिक धारा से चिंगारी और आग लगने का खतरा।
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- सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय:
- सही कनेक्शन: विद्युत परिपथ में सभी स्विच, प्लग और संबंधन अच्छी तरह से कसे हुए होने चाहिए। ढीले कनेक्शन चिंगारी और ओवरहीटिंग का कारण बन सकते हैं।
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- तारों की सुरक्षा: संयोजक तार की विद्युतरोधी पर्त यदि निकल गई हो, तो उसे तुरंत विद्युतरोधी टेप से लपेटकर ढंक देना चाहिए या तार बदल देना चाहिए।
- सही फ्यूज: फ्यूज तार उपयुक्त क्षमता और कम गलनांक वाले पदार्थ के बने हों। पुराने या गलत क्षमता वाले फ्यूज का उपयोग न करें।
- भू-संपर्कन (Earthing): रेफ्रिजरेटर, हीटर जैसे उच्च शक्ति वाले विद्युत उपकरणों को भू-संपर्कित तार से अवश्य जोड़ना चाहिए। यह उपकरण में किसी भी विद्युत रिसाव की स्थिति में धारा को सीधे पृथ्वी में प्रवाहित कर देता है, जिससे शॉक से बचाव होता है।
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- मरम्मत करते समय सावधानी:
- विद्युत परिपथ या उपकरणों की मरम्मत करते समय मुख्य स्विच (मेन स्विच) बंद कर देना चाहिए।
- रबर के दस्ताने और जूते जैसे विद्युतरोधी उपकरण पहनकर कार्य करना चाहिए।
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- दुर्घटना की स्थिति में:
- परिपथ में आग लगने या अन्य किसी दुर्घटना के होने पर, परिपथ का मुख्य स्विच तुरंत बंद कर देना चाहिए।
- विद्युत शॉक लगे व्यक्ति को बचाना:
- यदि कोई व्यक्ति विद्युत तार से चिपक जाए, तो उसे नंगे हाथों से न छुड़ाएँ।
- तुरंत मुख्य स्विच बंद करें। यदि संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, रबर की वस्तु, प्लास्टिक की छड़ी या किसी अन्य विद्युत हीन चालक (कुचालक) पदार्थ की सहायता से व्यक्ति को तार से अलग करें।
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हमेशा याद रखें, पानी विद्युत का सुचालक है। गीले हाथों से विद्युत उपकरणों को न छुएँ।
विद्युत सुरक्षा के उपाय अक्सर लघु उत्तरीय प्रश्नों में पूछे जाते हैं। कम से कम 3-4 उपाय याद रखें।