वृत्त एवं उसके अवयव
अध्याय 'वृत्त एवं उसके अवयव' छात्रों को वृत्त की ज्यामिति से परिचित कराता है। इसमें वृत्त के केंद्र, त्रिज्या, व्यास, जीवा, चाप, लघुचाप, दीर्घचाप, वृत्तखंड और अर्धवृत्त जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाया गया है। छात्र सीखते हैं कि वृत्त के चाप द्वारा केंद्र और शेष वृत्तखंड पर बनाए गए कोणों के बीच क्या संबंध होता है, साथ ही वृत्त के केंद्र से जीवा पर डाले गए लंब के गुणों को भी समझते हैं। यह अध्याय ज्यामितीय आकृतियों की गहरी समझ विकसित करने और आगे की कक्षाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने में मदद करता है।
वृत्त एवं उसके अवयव
वृत्त एक समतल में स्थित उन सभी बिंदुओं का समूह है जो एक निश्चित बिंदु (केंद्र) से निश्चित दूरी (त्रिज्या) पर होते हैं।
- केंद्र (Center): वृत्त के ठीक बीच में स्थित वह निश्चित बिंदु जिससे वृत्त की परिधि पर स्थित सभी बिंदुओं की दूरी समान होती है। इसे प्रायः 'O' से दर्शाया जाता है।
- त्रिज्या (Radius): वृत्त के केंद्र से परिधि पर स्थित किसी भी बिंदु तक की दूरी। इसे 'r' से दर्शाया जाता है। एक वृत्त में अनंत त्रिज्याएँ हो सकती हैं और सभी की लंबाई समान होती है।
- व्यास (Diameter): वृत्त की परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला वह रेखाखंड जो वृत्त के केंद्र से होकर गुजरता है। यह वृत्त की सबसे लंबी जीवा होती है। व्यास त्रिज्या का दुगुना होता है (\(d = 2r\))।
- परिधि (Circumference): वृत्त की बाहरी सीमा या उसके चारों ओर की कुल लंबाई।
[IMAGE: components_of_a_circle_center_and_radius_fig41iii]
[IMAGE: center_radius_and_diameter_of_a_circle_fig1012]
वृत्त: समतल में उन सभी बिंदुओं का समूह जो एक निश्चित बिंदु (केंद्र) से समान दूरी पर होते हैं।
एक वृत्त में अनंत त्रिज्याएँ और अनंत व्यास होते हैं। सभी त्रिज्याएँ समान लंबाई की और सभी व्यास समान लंबाई के होते हैं।
जीवा और चाप की पहचान
जीवा (Chord)
- वृत्त की परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा कहलाता है।
- व्यास वृत्त की सबसे लंबी जीवा होती है।
- एक वृत्त में अनंत जीवाएँ खींची जा सकती हैं।
[IMAGE: chord_of_a_circle_fig51]
चाप (Arc)
- वृत्त की परिधि का एक टुकड़ा या भाग चाप कहलाता है।
- दो बिंदुओं के बीच के चाप को दर्शाने के लिए प्रायः तीन बिंदुओं का उपयोग किया जाता है (जैसे चाप AXB), ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह लघुचाप है या दीर्घचाप।
चाप के प्रकार:
- लघुचाप (Minor Arc): वह चाप जिसकी लंबाई अर्धवृत्त से कम होती है। इसे दो या तीन अक्षरों से दर्शाया जा सकता है (जैसे चाप AB या चाप AXB)।
- दीर्घचाप (Major Arc): वह चाप जिसकी लंबाई अर्धवृत्त से अधिक होती है। इसे हमेशा तीन अक्षरों से दर्शाया जाता है (जैसे चाप AYB)।
- अर्धवृत्तचाप (Semicircular Arc): वह चाप जिसकी लंबाई ठीक अर्धवृत्त के बराबर होती है। यह व्यास द्वारा वृत्त को दो बराबर भागों में बांटने पर बनता है।
[IMAGE: basic_components_of_a_circle_fig117v]
जीवा: वृत्त की परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड।
चाप: वृत्त की परिधि का एक सतत भाग।
लघुचाप और दीर्घचाप को पहचानने के लिए, केंद्र पर बने कोण का उपयोग करें। यदि केंद्र पर बना कोण \(180^\circ\) से कम है, तो वह लघुचाप है; यदि \(180^\circ\) से अधिक है, तो वह दीर्घचाप है।
चाप द्वारा केंद्र पर बने कोण
किसी चाप के अंत्य बिंदुओं को वृत्त के केंद्र से मिलाने पर केंद्र पर जो कोण बनता है, उसे उस चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण कहते हैं।
- चाप AB द्वारा केंद्र O पर बना कोण \(\angle AOB\) है।
- लघुचाप द्वारा केंद्र पर बना कोण हमेशा \(180^\circ\) से कम होता है।
- दीर्घचाप द्वारा केंद्र पर बना कोण हमेशा \(180^\circ\) से अधिक होता है (प्रतिवर्ती कोण)।
- अर्धवृत्तचाप द्वारा केंद्र पर बना कोण \(180^\circ\) होता है (एक सीधी रेखा)।
[IMAGE: angle_aob_fig1128ii]
एक पूर्ण वृत्त का केंद्रीय कोण \(360^\circ\) होता है।
चाप (वृत्तखण्ड) द्वारा वृत्त पर बनाया गया कोण
किसी चाप के अंत्य बिंदुओं को वृत्त की परिधि पर स्थित किसी अन्य बिंदु से मिलाने पर वृत्त की परिधि पर जो कोण बनता है, उसे उस चाप द्वारा वृत्त पर अंतरित कोण कहते हैं।
- चाप BXC द्वारा वृत्त पर बिंदु A पर बना कोण \(\angle BAC\) है।
- यह कोण वृत्त के शेष वृत्तखण्ड में बनता है।
[IMAGE: formation_of_an_angle_fig1118]
एक ही चाप द्वारा केंद्र पर बना कोण, शेष वृत्तखण्ड पर बने कोण का दुगुना होता है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रमेय है।
वृत्तखण्ड के कोणों के गुण
प्रमेय 1: एक ही वृत्तखण्ड में बने कोण
- एक ही वृत्तखण्ड में बने सभी कोण बराबर होते हैं।
- यदि चाप AB द्वारा वृत्त पर बिंदु P, Q, R पर कोण \(\angle APB\), \(\angle AQB\), \(\angle ARB\) बनते हैं, तो \(\angle APB = \angle AQB = \angle ARB\)।
[IMAGE: circle_with_points_and_chords_fig1128iii]
यह गुणधर्म विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब हमें किसी वृत्त में अज्ञात कोणों का मान ज्ञात करना हो।
यह प्रमेय बताता है कि यदि एक चाप वृत्त के किसी भी बिंदु पर कोण बनाता है, तो वह कोण उस चाप द्वारा वृत्त के उसी वृत्तखण्ड में बने किसी भी अन्य कोण के बराबर होगा।
अर्द्धवृत्त का कोण समकोण होता है
प्रमेय 2: अर्धवृत्त में बना कोण
- अर्धवृत्त में बना कोण हमेशा समकोण (\(90^\circ\)) होता है।
- यदि AB वृत्त का व्यास है, और C वृत्त की परिधि पर कोई बिंदु है, तो \(\angle ACB = 90^\circ\)।
उपपत्ति (Proof):
- व्यास AB वृत्त के केंद्र O पर \(180^\circ\) का कोण बनाता है (एक सीधी रेखा)।
- प्रमेय 3 के अनुसार, चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, शेष वृत्तखण्ड पर अंतरित कोण का दुगुना होता है।
- इसलिए, \(\angle ACB = \frac{1}{2} \times \text{केंद्र पर बना कोण} = \frac{1}{2} \times 180^\circ = 90^\circ\)।
[IMAGE: semicircle_with_protractor_fig39]
यह गुणधर्म चक्रीय चतुर्भुज और अन्य ज्यामितीय समस्याओं को हल करने में बहुत उपयोगी है।
वृत्त पर स्थित दो बिन्दुओं द्वारा लघु वृत्तखण्ड एवं संगत दीर्घ वृत्तखण्ड के कोण
प्रमेय 3: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोण
- यदि एक चतुर्भुज के चारों शीर्ष वृत्त की परिधि पर स्थित हों, तो उसे चक्रीय चतुर्भुज कहते हैं।
- चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग \(180^\circ\) होता है।
- यदि ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है, तो \(\angle A + \angle C = 180^\circ\) और \(\angle B + \angle D = 180^\circ\)।
उपपत्ति (Proof):
- चाप ADC द्वारा केंद्र पर \(\angle AOC\) (प्रतिवर्ती) और वृत्त पर \(\angle ABC\) बनता है।
- चाप ABC द्वारा केंद्र पर \(\angle AOC\) और वृत्त पर \(\angle ADC\) बनता है।
- \(\angle ABC = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिवर्ती } \angle AOC\) और \(\angle ADC = \frac{1}{2} \times \angle AOC\)।
- \(\angle ABC + \angle ADC = \frac{1}{2} (\text{प्रतिवर्ती } \angle AOC + \angle AOC) = \frac{1}{2} (360^\circ) = 180^\circ\)।
लघु वृत्तखण्ड और दीर्घ वृत्तखण्ड में बने कोणों का संबंध:
- एक जीवा वृत्त को दो वृत्तखण्डों में विभाजित करती है: लघु वृत्तखण्ड और दीर्घ वृत्तखण्ड।
- लघु वृत्तखण्ड में बना कोण अधिक कोण होता है।
- दीर्घ वृत्तखण्ड में बना कोण न्यून कोण होता है।
- लघु वृत्तखण्ड में बने कोण और संगत दीर्घ वृत्तखण्ड में बने कोण का योग \(180^\circ\) होता है।
- उदाहरण: यदि जीवा AC द्वारा लघु वृत्तखण्ड में \(\angle ABC\) और दीर्घ वृत्तखण्ड में \(\angle ADC\) बनता है, तो \(\angle ABC + \angle ADC = 180^\circ\)।
चक्रीय चतुर्भुज: वह चतुर्भुज जिसके चारों शीर्ष वृत्त की परिधि पर स्थित हों।
यह गुणधर्म चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के योग के बराबर है।
एक ही चाप का कोण और चाप द्वारा केन्द्र पर बनाये गये कोण में संबंध
प्रमेय 4: केंद्र पर कोण और परिधि पर कोण में संबंध
- किसी चाप द्वारा वृत्त के केंद्र पर अंतरित कोण, उसी चाप द्वारा शेष वृत्तखण्ड के किसी बिंदु पर अंतरित कोण का दुगुना होता है।
- यदि चाप AB द्वारा केंद्र O पर \(\angle AOB\) और शेष वृत्तखण्ड पर बिंदु P पर \(\angle APB\) बनता है, तो \(\angle AOB = 2 \times \angle APB\)।
उपपत्ति (Proof):
- त्रिभुज OAP में, OA = OP (वृत्त की त्रिज्याएँ)।
- इसलिए, \(\triangle OAP\) एक समद्विबाहु त्रिभुज है, और \(\angle OAP = \angle OPA\)।
- इसी प्रकार, त्रिभुज OBP में, OB = OP, इसलिए \(\angle OBP = \angle OPB\)।
- त्रिभुज OAP में, बाह्य कोण \(\angle AOX = \angle OAP + \angle OPA = 2 \angle OPA\)।
- त्रिभुज OBP में, बाह्य कोण \(\angle BOX = \angle OBP + \angle OPB = 2 \angle OPB\)।
- \(\angle AOB = \angle AOX + \angle BOX = 2 \angle OPA + 2 \angle OPB = 2 (\angle OPA + \angle OPB) = 2 \angle APB\)।
- (यह लघुचाप के लिए है। दीर्घचाप और अर्धवृत्तचाप के लिए भी इसी प्रकार सिद्ध किया जा सकता है।)
[IMAGE: cg_c8_maths_ch05_chapter_hero]
\(\angle \text{केंद्र} = 2 \times \angle \text{परिधि}\) यह सूत्र वृत्त से संबंधित कोणों की समस्याओं को हल करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
इस प्रमेय का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि दोनों कोण एक ही चाप द्वारा बनाए गए हैं।
समान चाप, संगत जीवा, चाप की अंशीय माप
समान चाप और संगत जीवाएँ
- समान चाप: एक ही वृत्त या सर्वांगसम वृत्तों में, यदि दो चापों की लंबाई समान हो, तो वे समान चाप कहलाते हैं।
- संगत जीवाएँ: समान चापों द्वारा बनाई गई जीवाएँ समान लंबाई की होती हैं।
- प्रमेय 5: एक ही वृत्त में (या सर्वांगसम वृत्तों में), समान चापों की संगत जीवाएँ बराबर होती हैं।
- विलोम: एक ही वृत्त में (या सर्वांगसम वृत्तों में), समान जीवाओं के संगत चाप बराबर होते हैं।
समान चाप और केंद्र पर कोण
- प्रमेय 6: एक ही वृत्त में (या सर्वांगसम वृत्तों में), समान चाप केंद्र पर समान कोण अंतरित करते हैं।
- यदि चाप AB और चाप CD समान हैं, तो \(\angle AOB = \angle COD\)।
- विलोम: एक ही वृत्त में (या सर्वांगसम वृत्तों में), यदि दो चाप केंद्र पर समान कोण अंतरित करते हैं, तो वे चाप समान होते हैं।
चाप की अंशीय माप (Angular Measure of an Arc)
- किसी चाप की अंशीय माप उस चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण के बराबर होती है।
- उदाहरण: यदि चाप AB केंद्र पर \(60^\circ\) का कोण बनाता है, तो चाप AB की अंशीय माप \(60^\circ\) है।
- पूर्ण वृत्त की अंशीय माप \(360^\circ\) होती है।
- अर्धवृत्त की अंशीय माप \(180^\circ\) होती है।
[IMAGE: dividing_a_circle_into_60_degree_parts_fig183]
समान चाप \(\iff\) समान जीवाएँ \(\iff\) केंद्र पर समान कोण। यह संबंध समस्याओं को हल करने में बहुत उपयोगी है।
वृत्त के केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब
प्रमेय 7: केंद्र से जीवा पर लंब
- वृत्त के केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है।
- यदि O वृत्त का केंद्र है और OM जीवा AB पर लंब है (अर्थात \(OM \perp AB\)), तो M जीवा AB का मध्य-बिंदु होगा, यानी \(AM = MB\)।
उपपत्ति (Proof):
- त्रिभुज OMA और त्रिभुज OMB पर विचार करें।
- OA = OB (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)।
- OM = OM (उभयनिष्ठ भुजा)।
- \(\angle OMA = \angle OMB = 90^\circ\) (दिया गया है कि OM लंब है)।
- अतः, \(\triangle OMA \cong \triangle OMB\) (RHS सर्वांगसमता नियम से)।
- सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं (CPCTC), इसलिए \(AM = MB\)।
[IMAGE: cg_c8_maths_ch05_chapter_hero]
यह प्रमेय जीवा की लंबाई ज्ञात करने और वृत्त के केंद्र की स्थिति निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।
जीवा के मध्यबिंदु को केंद्र से मिलाने वाली रेखा
प्रमेय 8: जीवा के मध्य-बिंदु को केंद्र से मिलाने वाली रेखा
- वृत्त की किसी जीवा के मध्य-बिंदु को केंद्र से मिलाने वाली रेखा जीवा पर लंब होती है।
- यदि O वृत्त का केंद्र है और M जीवा AB का मध्य-बिंदु है (अर्थात \(AM = MB\)), तो OM जीवा AB पर लंब होगा (अर्थात \(OM \perp AB\))।
उपपत्ति (Proof):
- त्रिभुज OMA और त्रिभुज OMB पर विचार करें।
- OA = OB (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)।
- OM = OM (उभयनिष्ठ भुजा)।
- AM = MB (दिया गया है कि M मध्य-बिंदु है)।
- अतः, \(\triangle OMA \cong \triangle OMB\) (SSS सर्वांगसमता नियम से)।
- सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं (CPCTC), इसलिए \(\angle OMA = \angle OMB\)।
- चूंकि \(\angle OMA + \angle OMB = 180^\circ\) (रैखिक युग्म), और \(\angle OMA = \angle OMB\), तो \(2 \angle OMA = 180^\circ\), जिससे \(\angle OMA = 90^\circ\)।
- अतः, \(OM \perp AB\)।
यह प्रमेय, प्रमेय 7 का विलोम है। दोनों प्रमेय एक-दूसरे के पूरक हैं और वृत्त की ज्यामिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ये दोनों प्रमेय (केंद्र से जीवा पर लंब और जीवा के मध्य-बिंदु को केंद्र से मिलाने वाली रेखा) एक-दूसरे के विलोम हैं और पाइथागोरस प्रमेय के साथ मिलकर कई समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं।