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चतुर्भुज की रचना
Chhattisgarh · Class 8 · 🧮 Maths · Chapter 11

चतुर्भुज की रचना

चतुर्भुज की रचना की शर्तेंचार भुजाएँ और एक विकर्णतीन भुजाएँ और दो विकर्णचार भुजाएँ और एक कोणतीन भुजाएँ और दो अंतर्निहित कोणदो आसन्न भुजाएँ और तीन कोण

अध्याय 'चतुर्भुज की रचना' छात्रों को विभिन्न स्थितियों में चतुर्भुज बनाने की कला सिखाता है। इसमें चार भुजाओं और एक विकर्ण, तीन भुजाओं और दो विकर्णों, चार भुजाओं और एक कोण, तीन भुजाओं और दो अंतर्निहित कोणों, तथा दो आसन्न भुजाओं और तीन कोणों के दिए होने पर चतुर्भुज की रचना करना शामिल है। यह अध्याय समांतर चतुर्भुज और समचतुर्भुज जैसे विशेष प्रकार के चतुर्भुजों की रचना पर भी प्रकाश डालता है, जिससे छात्रों को ज्यामितीय आकृतियों की गहरी समझ विकसित होती है।

चतुर्भुज की रचना की शर्तें

एक सामान्य चतुर्भुज ABCD
एक सामान्य चतुर्भुज ABCD

चतुर्भुज की रचना के लिए कुछ निश्चित शर्तें होती हैं। यदि ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो चतुर्भुज बनाना असंभव होता है।

  • न्यूनतम अवयव: एक विशिष्ट चतुर्भुज की रचना के लिए कम से कम पाँच अवयवों की माप ज्ञात होना आवश्यक है। इन पाँच अवयवों में अधिकतम तीन कोण हो सकते हैं।
  • भुजाओं का संबंध:
  • किसी भी चतुर्भुज की किन्हीं तीन भुजाओं का योग चौथी भुजा से अधिक होना चाहिए।
  • उदाहरण के लिए, यदि भुजाएँ a, b, c, d हैं, तो:
  • a + b + c > d
  • a + b + d > c
  • a + c + d > b
  • b + c + d > a
  • यदि यह शर्त पूरी नहीं होती, तो चतुर्भुज नहीं बन सकता।
  • कोणों का योग: चतुर्भुज के चारों अंतःकोणों का योग 360° होता है।
  • कच्चा चित्र: रचना शुरू करने से पहले कच्चा चित्र (Rough Sketch) बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि कौन सी भुजाएँ और कोण कहाँ स्थित हैं और रचना का क्रम क्या होगा। [IMAGE: rough_sketch_for_quadrilateral_construction]

उदाहरण: यदि भुजाएँ 3 सेमी, 4 सेमी, 5 सेमी और 13 सेमी हों, तो क्या चतुर्भुज बन सकता है?

  • 3 + 4 + 5 = 12 सेमी
  • 12 सेमी < 13 सेमी (चौथी भुजा)
  • अतः, इन मापों से चतुर्भुज बनाना संभव नहीं है।
महत्त्वपूर्ण

एक चतुर्भुज की रचना के लिए कम से कम 5 अवयव (भुजाएँ या कोण) आवश्यक होते हैं।

याद रखें

चतुर्भुज की किन्हीं भी तीन भुजाओं का योग हमेशा चौथी भुजा से अधिक होना चाहिए।

विशिष्ट चतुर्भुज की रचना के लिए आवश्यक अवयव

चतुर्भुज की रचना के लिए न्यूनतम पाँच अवयवों की आवश्यकता होती है। ये अवयव विभिन्न संयोजनों में हो सकते हैं, जिससे एक अद्वितीय चतुर्भुज की रचना संभव होती है।

  • चार भुजाएँ और एक विकर्ण: यह सबसे सामान्य स्थिति है। विकर्ण चतुर्भुज को दो त्रिभुजों में विभाजित करता है, जिससे रचना आसान हो जाती है।
  • [IMAGE: construction_of_quadrilateral_diagonal_ac_fig1114i]
  • तीन भुजाएँ और दो विकर्ण: इस स्थिति में भी विकर्णों की सहायता से त्रिभुजों की रचना करके चतुर्भुज बनाया जाता है।
  • चार भुजाएँ और एक कोण: एक कोण के ज्ञात होने से दो आसन्न भुजाओं की स्थिति निश्चित हो जाती है।
  • तीन भुजाएँ और दो अंतर्गत कोण: दो अंतर्गत कोणों से भुजाओं की दिशाएँ निर्धारित होती हैं।
  • दो आसन्न भुजाएँ और तीन कोण: इस स्थिति में, चतुर्भुज के कोणों के योग (360°) का उपयोग करके चौथा कोण ज्ञात किया जा सकता है, यदि आवश्यक हो।

महत्वपूर्ण अवलोकन:

  • यदि केवल चार भुजाएँ दी गई हों, तो एक अद्वितीय चतुर्भुज की रचना नहीं की जा सकती। [IMAGE: multiple_quadrilaterals_possible_fig1116]
  • लकड़ी की पट्टियों के क्रियाकलाप से स्पष्ट होता है कि चार भुजाओं से कई आकृतियाँ बन सकती हैं जब तक कि एक विकर्ण या कोण स्थिर न किया जाए।
  • यदि चतुर्भुज की एक भुजा और चार कोण दिए हों, तब भी एक अद्वितीय चतुर्भुज की रचना नहीं की जा सकती।
🚧ग़लत धारणा

केवल चार भुजाएँ दिए होने पर एक अद्वितीय चतुर्भुज की रचना नहीं की जा सकती। इसके लिए कम से कम एक विकर्ण या एक कोण की आवश्यकता होती है।

चाप का उपयोग और महत्व

चाप का उपयोग कर बिंदु C का निर्धारण
चाप का उपयोग कर बिंदु C का निर्धारण

ज्यामितीय रचनाओं में चाप (Arc) काटना एक मूलभूत और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह हमें दिए गए बिंदुओं से निश्चित दूरी पर तीसरे बिंदु को सटीक रूप से निर्धारित करने में मदद करता है।

  • एक बिंदु से चाप: यदि हमें किसी बिंदु A से 3 सेमी की दूरी पर एक बिंदु C ज्ञात करना है, तो हम A को केंद्र मानकर 3 सेमी त्रिज्या का एक चाप खींचते हैं। इस चाप पर स्थित प्रत्येक बिंदु A से 3 सेमी की दूरी पर होगा।
  • यह अवधारणा वृत्त की त्रिज्या के गुण पर आधारित है, जहाँ वृत्त के केंद्र से उसकी परिधि पर स्थित प्रत्येक बिंदु की दूरी समान होती है।
  • दो बिंदुओं से चाप: जब हमें दो ज्ञात बिंदुओं (मान लीजिए A और B) से निश्चित दूरियों (मान लीजिए \(r_1\) और \(r_2\)) पर एक तीसरा बिंदु C ज्ञात करना होता है, तो हम चापों का उपयोग करते हैं।
  1. A को केंद्र मानकर \(r_1\) त्रिज्या का एक चाप खींचते हैं।
  2. B को केंद्र मानकर \(r_2\) त्रिज्या का दूसरा चाप खींचते हैं।
  3. दोनों चाप जहाँ एक-दूसरे को काटते हैं, वही हमारा वांछित बिंदु C होता है।
  • [IMAGE: determining_point_c_using_arcs_fig83]
  • त्रिभुज की रचना में उपयोग: चाप का उपयोग अक्सर त्रिभुज की रचना में किया जाता है, जहाँ दो भुजाओं और उनके बीच के कोण या तीनों भुजाओं के ज्ञात होने पर तीसरा शीर्ष ज्ञात किया जाता है।
  • [IMAGE: constructing_a_triangle_from_given_sides_fig1112i]
  • [IMAGE: constructing_a_vertex_using_arcs_fig1112v]
  • चतुर्भुज की रचना में उपयोग: चतुर्भुज को दो त्रिभुजों में विभाजित करके, चापों का उपयोग करके अज्ञात शीर्षों को ज्ञात किया जाता है।
💡सुझाव

रचना के प्रत्येक चरण में परकार (compass) का सही उपयोग और चापों को स्पष्ट रूप से काटना महत्वपूर्ण है।

केस I: चार भुजाएँ व एक विकर्ण दिया हो

चतुर्भुज की रचना: प्रारंभिक चरण (आधार और कोण)
चतुर्भुज की रचना: प्रारंभिक चरण (आधार और कोण)

जब चतुर्भुज की चार भुजाएँ और एक विकर्ण दिया गया हो, तो रचना को दो त्रिभुजों में विभाजित करके किया जाता है।

रचना के चरण (उदाहरण 1 के आधार पर): चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 5 सेमी, BC = 4 सेमी, CD = 4.5 सेमी, AD = 3.5 सेमी और AC = 6 सेमी।

  1. कच्चा चित्र बनाएँ: दी गई मापों के साथ एक कच्चा चित्र बनाएँ। [IMAGE: rough_sketch_for_quadrilateral_construction]
  2. आधार रेखाखंड खींचें: AB = 5 सेमी का एक रेखाखंड खींचें।
  3. पहला त्रिभुज (\(\triangle ABC\)) बनाएँ:
  • A को केंद्र मानकर, AC = 6 सेमी त्रिज्या का एक चाप ऊपर की ओर काटें।
  • B को केंद्र मानकर, BC = 4 सेमी त्रिज्या का एक चाप पहले वाले चाप को काटें। कटान बिंदु को C नामांकित करें।
  • A को C से और B को C से मिलाएँ। इस प्रकार \(\triangle ABC\) प्राप्त होगा।
  1. दूसरा त्रिभुज (\(\triangle ADC\)) बनाएँ:
  • A को केंद्र मानकर, AD = 3.5 सेमी त्रिज्या का एक चाप काटें।
  • C को केंद्र मानकर, CD = 4.5 सेमी त्रिज्या का एक चाप पहले वाले चाप को काटें। कटान बिंदु को D नामांकित करें।
  • A को D से और C को D से मिलाएँ।
  1. चतुर्भुज पूर्ण करें: इस प्रकार अभीष्ट चतुर्भुज ABCD प्राप्त होगा।

उदाहरण 3 (समांतर चतुर्भुज): समांतर चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 3.5 सेमी, BC = 5 सेमी और विकर्ण AC = 8 सेमी।

  • गुणधर्म: समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। अतः, AD = BC = 5 सेमी और CD = AB = 3.5 सेमी।
  • अब यह स्थिति 'चार भुजाएँ और एक विकर्ण' जैसी हो गई है। AB, BC, CD, AD और विकर्ण AC ज्ञात हैं। उपरोक्त विधि का पालन करें।
💡सुझाव

समांतर चतुर्भुज, समचतुर्भुज जैसे विशेष चतुर्भुजों की रचना करते समय, उनके गुणधर्मों का उपयोग करें। जैसे, समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।

केस II: तीन भुजाएँ व दो विकर्ण दिये हों

जब चतुर्भुज की तीन भुजाएँ और दो विकर्ण दिए गए हों, तो रचना में भी त्रिभुजों का निर्माण मुख्य होता है।

रचना के चरण (उदाहरण 4 के आधार पर): चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 4 सेमी, AD = 3.5 सेमी, DC = 5 सेमी, विकर्ण AC = 7 सेमी और BD = 6 सेमी।

  1. कच्चा चित्र बनाएँ: दी गई मापों के साथ एक कच्चा चित्र बनाएँ।
  2. आधार रेखाखंड खींचें: AB = 4 सेमी का एक रेखाखंड खींचें।
  3. पहला त्रिभुज (\(\triangle ABD\)) बनाएँ:
  • B को केंद्र मानकर, BD = 6 सेमी त्रिज्या का एक चाप काटें।
  • A को केंद्र मानकर, AD = 3.5 सेमी त्रिज्या का एक चाप पहले वाले चाप को काटें। कटान बिंदु को D नामांकित करें।
  • D को A से और D को B से मिलाएँ। इस प्रकार \(\triangle ABD\) प्राप्त होगा।
  1. दूसरा त्रिभुज (\(\triangle ADC\) या \(\triangle BDC\)) बनाएँ:
  • D को केंद्र मानकर, DC = 5 सेमी त्रिज्या का एक चाप काटें।
  • A को केंद्र मानकर, AC = 7 सेमी त्रिज्या का एक चाप पहले वाले चाप को काटें। कटान बिंदु को C नामांकित करें।
  • C को B से, C को D से और C को A से मिलाएँ।
  1. चतुर्भुज पूर्ण करें: इस प्रकार अभीष्ट चतुर्भुज ABCD प्राप्त होगा।
याद रखें

इस स्थिति में, दोनों विकर्णों का उपयोग करके दो त्रिभुजों की रचना की जाती है, जो चतुर्भुज को पूरा करते हैं।

केस III: चार भुजाएँ व एक कोण दिया हो

चाँदे का उपयोग
चाँदे का उपयोग

जब चतुर्भुज की चार भुजाएँ और एक कोण दिया गया हो, तो कोण की सहायता से भुजाओं की दिशा निर्धारित की जाती है।

रचना के चरण (उदाहरण 5 के आधार पर): चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 4.5 सेमी, BC = 3.5 सेमी, CD = 3.8 सेमी, AD = 4 सेमी और \(\angle A = 57^\circ\) हो।

  1. कच्चा चित्र बनाएँ: दी गई मापों के साथ एक कच्चा चित्र बनाएँ।
  2. आधार रेखाखंड खींचें: AB = 4.5 सेमी का एक रेखाखंड खींचें।
  3. कोण बनाएँ: बिंदु A पर चाँदे की सहायता से \(\angle BAX = 57^\circ\) का कोण बनाएँ।
  4. तीसरा शीर्ष (D) ज्ञात करें: परकार की सहायता से 4 सेमी त्रिज्या का चाप लेकर बिंदु A से किरण AX पर काटें। कटान बिंदु को D नामांकित करें।
  5. चौथा शीर्ष (C) ज्ञात करें:
  • बिंदु D को केंद्र मानकर, CD = 3.8 सेमी त्रिज्या का एक चाप काटें।
  • बिंदु B को केंद्र मानकर, BC = 3.5 सेमी त्रिज्या का एक चाप पहले वाले चाप को काटें। कटान बिंदु को C नामांकित करें।
  1. चतुर्भुज पूर्ण करें: बिंदु C को बिंदु B से और बिंदु C को बिंदु D से मिलाएँ। इस प्रकार अभीष्ट चतुर्भुज ABCD प्राप्त होगा।

उदाहरण 6 (समांतर चतुर्भुज): समांतर चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 5 सेमी, BC = 4 सेमी तथा \(\angle B = 110^\circ\) हो।

  • गुणधर्म: समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। अतः, CD = AB = 5 सेमी और AD = BC = 4 सेमी।
  • अब यह स्थिति 'चार भुजाएँ और एक कोण' जैसी हो गई है। AB, BC, CD, AD और \(\angle B\) ज्ञात हैं। उपरोक्त विधि का पालन करें।
महत्त्वपूर्ण

कोण की रचना के लिए चाँदे (Protractor) का उपयोग किया जाता है। कोण बनाते समय उसकी दिशा और माप का विशेष ध्यान रखें।

केस IV: तीन भुजाएँ व दो अंतर्गत कोण दिये हों

जब चतुर्भुज की तीन भुजाएँ और दो अंतर्गत कोण दिए गए हों, तो रचना में कोणों का उपयोग करके भुजाओं की स्थिति निर्धारित की जाती है।

रचना के चरण (उदाहरण 7 के आधार पर): चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 3.6 सेमी, BC = 4 सेमी, CD = 4.5 सेमी, \(\angle B = 60^\circ\) व \(\angle C = 90^\circ\) हो।

  1. कच्चा चित्र बनाएँ: दी गई मापों के साथ एक कच्चा चित्र बनाएँ।
  2. आधार रेखाखंड खींचें: AB = 3.6 सेमी का एक रेखाखंड खींचें।
  3. पहला कोण बनाएँ: बिंदु B पर परकार की सहायता से \(\angle ABX = 60^\circ\) का कोण बनाएँ।
  4. तीसरा शीर्ष (C) ज्ञात करें: किरण BX पर बिंदु B से 4 सेमी त्रिज्या का चाप काटें। कटान बिंदु को C नामांकित करें।
  5. दूसरा कोण बनाएँ: बिंदु C पर परकार की सहायता से \(\angle BCY = 90^\circ\) का कोण बनाएँ।
  6. चौथा शीर्ष (D) ज्ञात करें: किरण CY पर बिंदु C से 4.5 सेमी त्रिज्या का चाप काटें। कटान बिंदु को D नामांकित करें।
  7. चतुर्भुज पूर्ण करें: बिंदु D को बिंदु A से मिलाएँ। इस प्रकार अभीष्ट चतुर्भुज ABCD प्राप्त होगा।
याद रखें

इस स्थिति में, दो कोणों के बीच की भुजा (BC) को पहले बनाना सहायक होता है, या फिर एक भुजा (AB) और उसके एक सिरे पर कोण (\(\angle B\)) बनाकर आगे बढ़ें।

केस V: दो आसन्न भुजाएँ व तीन कोण दिये हों

दो आसन्न भुजाओं और तीन कोणों से चतुर्भुज की रचना
दो आसन्न भुजाओं और तीन कोणों से चतुर्भुज की रचना

जब चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाएँ और तीन कोण दिए गए हों, तो रचना में कोणों के योग गुणधर्म का उपयोग किया जा सकता है, यदि आवश्यक हो।

रचना के चरण (उदाहरण 8 के आधार पर): चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 5 सेमी, BC = 4.5 सेमी, \(\angle A = 65^\circ\), \(\angle B = 120^\circ\) और \(\angle C = 75^\circ\) हो।

  1. कच्चा चित्र बनाएँ: दी गई मापों के साथ एक कच्चा चित्र बनाएँ।
  2. आधार रेखाखंड खींचें: AB = 5 सेमी का एक रेखाखंड खींचें।
  3. पहला कोण बनाएँ: बिंदु A पर चाँदे की सहायता से \(\angle BAX = 65^\circ\) बनाएँ।
  4. दूसरा कोण बनाएँ: बिंदु B पर परकार अथवा चाँदे की सहायता से \(\angle ABY = 120^\circ\) बनाएँ।
  5. तीसरा शीर्ष (C) ज्ञात करें: बिंदु B को केंद्र मानकर किरण BY पर 4.5 सेमी त्रिज्या का चाप काटें। कटान बिंदु को C नामांकित करें।
  6. तीसरा कोण बनाएँ: बिंदु C पर परकार की सहायता से \(\angle BCZ = 75^\circ\) बनाते हुए किरण CZ खींचें।
  7. चौथा शीर्ष (D) ज्ञात करें: किरण CZ, किरण AX को जिस बिंदु पर काटती है, उसे D नामांकित करें।
  8. चतुर्भुज पूर्ण करें: इस प्रकार प्राप्त चतुर्भुज ABCD वांछित चतुर्भुज है।

उदाहरण 9 (चौथा कोण ज्ञात करना): चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 4 सेमी, BC = 3.6 सेमी, \(\angle A = 60^\circ\), \(\angle C = 90^\circ\) और \(\angle D = 100^\circ\) हो।

  • चौथा कोण ज्ञात करें: चतुर्भुज के चारों कोणों का योग 360° होता है।
  • \(\angle B = 360^\circ - (\angle A + \angle C + \angle D)\)
  • \(\angle B = 360^\circ - (60^\circ + 90^\circ + 100^\circ)\)
  • \(\angle B = 360^\circ - 250^\circ = 110^\circ\)
  • अब हमें दो आसन्न भुजाएँ (AB, BC) और तीन कोण (\(\angle A, \angle B, \angle C\)) ज्ञात हैं। उपरोक्त विधि का पालन करें।
महत्त्वपूर्ण

यदि तीन कोण दिए गए हों, तो चतुर्भुज के कोणों के योग के गुणधर्म (360°) का उपयोग करके चौथा कोण ज्ञात किया जा सकता है।

केस VI: विशेष प्रकार के चतुर्भुज की रचना

विभिन्न प्रकार के चतुर्भुज
विभिन्न प्रकार के चतुर्भुज

विशेष प्रकार के चतुर्भुजों की रचना करते समय, उनके विशिष्ट गुणधर्मों का उपयोग किया जाता है।

A. समांतर चतुर्भुज की रचना (एक भुजा व दोनों विकर्ण दिये हों)

  • गुणधर्म: समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
  • उदाहरण 10: समांतर चतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ AB = 5 सेमी, AC = 5.6 सेमी तथा BD = 7.6 सेमी।
  1. विकर्णों के आधे भाग: विकर्णों के प्रतिच्छेदन बिंदु O पर, \(OA = OC = AC/2 = 5.6/2 = 2.8\) सेमी और \(OB = OD = BD/2 = 7.6/2 = 3.8\) सेमी।
  2. आधार रेखाखंड खींचें: AB = 5 सेमी का एक रेखाखंड खींचें।
  3. प्रतिच्छेदन बिंदु O ज्ञात करें:
  • A को केंद्र मानकर, 2.8 सेमी त्रिज्या का चाप काटें।
  • B को केंद्र मानकर, 3.8 सेमी त्रिज्या का चाप पहले वाले चाप को काटें। कटान बिंदु को O नामांकित करें।
  1. किरणें खींचें: बिंदु A और B को O से मिलाते हुए क्रमशः X और Y तक बढ़ाएँ।
  2. शेष शीर्ष (C, D) ज्ञात करें:
  • O को केंद्र मानकर, OX पर 2.8 सेमी त्रिज्या का चाप काटें (यह C होगा)।
  • O को केंद्र मानकर, OY पर 3.8 सेमी त्रिज्या का चाप काटें (यह D होगा)।
  1. चतुर्भुज पूर्ण करें: C को B से, D को A से और C को D से मिलाएँ।

B. समचतुर्भुज की रचना (दोनों विकर्ण दिये हों)

  • गुणधर्म: समचतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
  • उदाहरण 11: समचतुर्भुज ABCD की रचना, जहाँ विकर्ण AC = 6 सेमी तथा BD = 8 सेमी हों।
  1. पहला विकर्ण खींचें: AC = 6 सेमी का रेखाखंड खींचें।
  2. लंब समद्विभाजक खींचें: रेखाखंड AC का लंब समद्विभाजक XY खींचें। यह AC को बिंदु O पर काटता है। यह O विकर्णों का प्रतिच्छेदन बिंदु है।
  3. शेष शीर्ष (B, D) ज्ञात करें:
  • O को केंद्र मानकर, \(BD/2 = 8/2 = 4\) सेमी त्रिज्या का चाप लंब समद्विभाजक पर ऊपर और नीचे दोनों तरफ काटें। कटान बिंदुओं को क्रमशः B और D नामांकित करें।
  1. चतुर्भुज पूर्ण करें: बिंदु B और D को बिंदु A और C दोनों से मिलाएँ।

अन्य विशेष चतुर्भुज:

  • वर्ग: सभी भुजाएँ बराबर, सभी कोण 90°, विकर्ण बराबर और समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
  • आयत: सम्मुख भुजाएँ बराबर, सभी कोण 90°, विकर्ण बराबर और समद्विभाजित करते हैं।
महत्त्वपूर्ण

विशेष चतुर्भुजों की रचना करते समय, उनके सभी गुणधर्मों को याद रखना और उनका सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

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