समीकरण
अध्याय 'समीकरण' छात्रों को एक चर वाले रैखिक समीकरणों की अवधारणा और उन्हें हल करने के विभिन्न तरीकों से परिचित कराता है। इसमें समीकरणों के दोनों पक्षों में समान संख्या जोड़ने, घटाने, गुणा करने या भाग देने के नियमों को समझाया गया है। छात्र शाब्दिक समस्याओं को बीजगणितीय समीकरणों में बदलना और वज्रगुणन विधि का उपयोग करना सीखते हैं। यह अध्याय छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं को गणितीय रूप से हल करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
अनुपात पर आधारित समीकरण
अनुपात पर आधारित समीकरणों में, दी गई राशियों के बीच के संबंध को एक अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है। अज्ञात राशि को चर (जैसे x) मानकर समीकरण बनाया जाता है और फिर उसे हल किया जाता है।
- चरण-दर-चरण विधि:
- चर मानना: समस्या में दी गई अज्ञात राशियों को चर (जैसे x) के पदों में व्यक्त करें। यदि अनुपात दिया गया है, तो संख्याओं को
axऔरbxके रूप में मानें। - समीकरण बनाना: प्रश्न में दी गई शर्तों के अनुसार एक रैखिक समीकरण स्थापित करें।
- समीकरण हल करना:
- चर वाले पदों को एक तरफ और अचर पदों को दूसरी तरफ पक्षांतरित करें।
- आवश्यकतानुसार वज्रगुणन (cross-multiplication) का उपयोग करें, खासकर जब समीकरण भिन्नात्मक रूप में हो।
- चर का मान ज्ञात करें।
- जाँच करना: प्राप्त मानों को मूल समस्या में रखकर जाँच करें कि वे सभी शर्तों को संतुष्ट करते हैं या नहीं।
- उदाहरण: यदि दो संख्याओं का अनुपात
3:5है, तो संख्याओं को3xऔर5xमान सकते हैं। - महत्व: अनुपात समीकरणों का उपयोग विभिन्न वास्तविक जीवन की समस्याओं जैसे मिश्रण, आयु, लाभ-हानि, और ज्यामिति में किया जाता है।
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अनुपात संबंधी समस्याओं में, हमेशा संख्याओं को ax और bx के रूप में मानें, न कि केवल a और b। इससे अनुपात में परिवर्तन होने पर सही समीकरण बनता है।
कई बार छात्र अनुपात को सीधे संख्याओं के रूप में मान लेते हैं (जैसे 3 और 5)। इससे गलत उत्तर आता है। हमेशा एक सामान्य गुणक x का उपयोग करें।
परिमेय संख्या पर आधारित समीकरण
परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q ≠ 0। इन समस्याओं में अंश और हर से संबंधित शर्तें दी जाती हैं।
- समस्या को समझना:
- अंश और हर के बीच संबंध को पहचानें।
- अंश या हर में किए गए परिवर्तनों को ध्यान से पढ़ें।
- परिवर्तन के बाद बनने वाली नई परिमेय संख्या को समझें।
- हल करने की विधि:
- चर मानना: अंश को
xमानें। फिर हर कोxके पदों में व्यक्त करें। - मूल परिमेय संख्या: मूल परिमेय संख्या को
x / (x + k)के रूप में लिखें। - परिवर्तन लागू करना: प्रश्न में दिए गए अनुसार अंश और हर में परिवर्तन करें। उदाहरण के लिए, 'अंश में 6 जोड़ना' का अर्थ
x + 6है, और 'हर में 3 घटाना' का अर्थ(x + 4) - 3है। - नई परिमेय संख्या: परिवर्तित अंश और हर से नई परिमेय संख्या बनाएँ।
- समीकरण बनाना: नई परिमेय संख्या को दिए गए मान के बराबर रखकर समीकरण बनाएँ।
- वज्रगुणन: समीकरण को हल करने के लिए वज्रगुणन विधि का उपयोग करें।
- यदि समीकरण
(a/b) = (c/d)के रूप में है, तोad = bc।
- चर का मान ज्ञात करना:
xका मान ज्ञात करें। - मूल परिमेय संख्या ज्ञात करना:
xका मान मूल परिमेय संख्या के व्यंजक में रखकर अंतिम उत्तर ज्ञात करें। - जाँच: प्राप्त परिमेय संख्या की जाँच करें कि वह सभी शर्तों को पूरा करती है या नहीं।
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अंश और हर में परिवर्तन करते समय पूरे अंश या हर पर संक्रिया लागू करना भूल जाते हैं। उदाहरण के लिए, हर (x+4) में से 3 घटाने पर x+4-3 होता है, न कि x+4-3 के बजाय केवल x-3।
वज्रगुणन विधि: यदि \(\frac{A}{B} = \frac{C}{D}\) है, तो \(A \times D = B \times C\)
दो अंकीय संख्या पर आधारित समीकरण
दो अंकीय संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जिनमें इकाई और दहाई के अंक होते हैं। इन समस्याओं में अंकों के योग, अंकों को पलटने से बनी नई संख्या आदि से संबंधित शर्तें दी जाती हैं।
- स्थानीय मान का सिद्धांत:
- यदि इकाई का अंक
yहै और दहाई का अंकxहै, तो संख्या को10x + yके रूप में व्यक्त किया जाता है। - उदाहरण: संख्या 57 में, दहाई का अंक 5 और इकाई का अंक 7 है। इसे
10 \times 5 + 7 = 57लिखा जा सकता है।
- अंकों को पलटने पर:
- यदि मूल संख्या
10x + yहै, तो अंकों को पलटने पर नई संख्या10y + xबनती है।
- हल करने की विधि:
- चर मानना: इकाई के अंक को
xमानें। - दहाई का अंक ज्ञात करना: प्रश्न में दी गई शर्तों (जैसे अंकों का योग) का उपयोग करके दहाई के अंक को
xके पदों में व्यक्त करें। उदाहरण के लिए, यदि अंकों का योग 12 है और इकाई का अंकxहै, तो दहाई का अंक12 - xहोगा। - मूल संख्या बनाना: स्थानीय मान के सिद्धांत का उपयोग करके मूल संख्या का व्यंजक बनाएँ:
10 \times (दहाई का अंक) + (इकाई का अंक)। - नई संख्या बनाना: अंकों को पलटने के बाद बनी नई संख्या का व्यंजक बनाएँ:
10 \times (नया दहाई का अंक) + (नया इकाई का अंक)। - समीकरण बनाना: प्रश्न में दी गई शर्त (जैसे 'नई संख्या मूल संख्या से 18 अधिक है') का उपयोग करके एक रैखिक समीकरण बनाएँ।
- समीकरण हल करना: समीकरण को हल करके
xका मान ज्ञात करें। - मूल संख्या ज्ञात करना:
xका मान मूल संख्या के व्यंजक में रखकर अंतिम उत्तर ज्ञात करें। - जाँच: प्राप्त संख्या की जाँच करें कि वह सभी शर्तों को पूरा करती है या नहीं।
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दो अंकीय संख्या का प्रतिनिधित्व: यदि इकाई का अंक y और दहाई का अंक x है, तो संख्या \(10x + y\) होती है।
छात्र अक्सर इकाई और दहाई के अंकों को केवल x और y मान लेते हैं, लेकिन संख्या को 10x + y के रूप में व्यक्त करना भूल जाते हैं। दहाई के अंक को 10 से गुणा करना आवश्यक है।
आयु संबंधी समीकरण
आयु संबंधी समस्याओं में व्यक्तियों की वर्तमान आयु, कुछ वर्षों बाद की आयु या कुछ वर्षों पहले की आयु के बीच संबंध दिए होते हैं।
- आयु संबंधी संबंध:
- यदि किसी व्यक्ति की वर्तमान आयु
xवर्ष है: nवर्ष बाद उसकी आयु =x + nवर्ष होगी।nवर्ष पहले उसकी आयु =x - nवर्ष थी।
- हल करने की विधि:
- चर मानना: आमतौर पर, सबसे कम आयु वाले व्यक्ति की वर्तमान आयु को
xमानें। - अन्य व्यक्तियों की आयु व्यक्त करना: प्रश्न में दी गई शर्तों का उपयोग करके अन्य व्यक्तियों की वर्तमान आयु को
xके पदों में व्यक्त करें। - भविष्य या अतीत की आयु: यदि प्रश्न में भविष्य या अतीत की आयु का उल्लेख है, तो तदनुसार
(x + n)या(x - n)के रूप में आयु के व्यंजक बनाएँ। - समीकरण बनाना: प्रश्न में दी गई आयु के अनुपात या योग जैसी शर्तों का उपयोग करके एक रैखिक समीकरण बनाएँ।
- समीकरण हल करना: समीकरण को हल करके
xका मान ज्ञात करें। - सभी व्यक्तियों की आयु ज्ञात करना:
xका मान अन्य व्यक्तियों की आयु के व्यंजकों में रखकर उनकी आयु ज्ञात करें। - जाँच: प्राप्त आयु की जाँच करें कि वे सभी शर्तों को पूरा करती हैं या नहीं।
- उदाहरण: यदि पिता की वर्तमान आयु पुत्र की आयु से 20 वर्ष अधिक है और पुत्र की वर्तमान आयु
xहै, तो पिता की वर्तमान आयुx + 20होगी।
आयु संबंधी समस्याओं में वर्तमान आयु को आधार मानना सबसे आसान होता है। फिर भविष्य या अतीत की आयु को वर्तमान आयु के संदर्भ में व्यक्त करें।
भविष्य की आयु में n जोड़ने और अतीत की आयु में n घटाने में गलती करना। ध्यान रखें कि यह परिवर्तन सभी संबंधित व्यक्तियों की आयु पर लागू होता है।