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परिमेय संख्याओं पर संक्रियाएं
Chhattisgarh · Class 8 · 🧮 Maths · Chapter 18

परिमेय संख्याओं पर संक्रियाएं

परिमेय संख्याओं का योग और घटावपरिमेय संख्याओं का गुणा और भागयोज्य और गुणात्मक प्रतिलोमपरिमेय संख्याओं के गुणधर्म (क्रम विनिमेय, साहचर्य, वितरण)दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना

अध्याय 'परिमेय संख्याओं पर संक्रियाएं' कक्षा 8 के छात्रों को परिमेय संख्याओं के मूलभूत संचालन जैसे जोड़, घटाव, गुणा और भाग से परिचित कराता है। छात्र क्रम विनिमेयता, साहचर्यता और वितरण जैसे गुणों को सीखते हैं, साथ ही योज्य और गुणात्मक प्रतिलोम की अवधारणाओं को भी समझते हैं। यह अध्याय दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ खोजने के तरीकों पर भी प्रकाश डालता है, जो छात्रों को संख्या प्रणाली की गहरी समझ विकसित करने में मदद करता है। यह विषय बीजगणित और उच्च गणितीय अवधारणाओं के लिए आधार तैयार करता है।

घटाना संक्रिया में क्रम विनिमेय नियम

परिमेय संख्याओं के घटाने की संक्रिया में क्रम विनिमेय नियम लागू नहीं होता है।

  • यदि \(a\) और \(b\) दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो \(a - b \neq b - a\) होता है।
  • यह योग और गुणन संक्रियाओं से भिन्न है, जहाँ क्रम विनिमेय नियम लागू होता है।

उदाहरण:

  • \(5/12 - 6/13\)
  • \(12\) और \(13\) का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) \(156\) है।
  • \((5 \times 13) / (12 \times 13) - (6 \times 12) / (13 \times 12) = 65/156 - 72/156 = (65 - 72) / 156 = -7/156\)
  • \(6/13 - 5/12\)
  • \((6 \times 12) / (13 \times 12) - (5 \times 13) / (12 \times 13) = 72/156 - 65/156 = (72 - 65) / 156 = 7/156\)
  • चूंकि \(-7/156 \neq 7/156\), अतः यह नियम घटाने में लागू नहीं होता।

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महत्त्वपूर्ण

क्रम विनिमेय नियम (घटाना): दो परिमेय संख्याओं \(a\) और \(b\) के लिए, \(a - b \neq b - a\) (जब तक \(a=b\) न हो)।

परिमेय संख्याओं का गुणा

परिमेय संख्याओं का गुणा करते समय, हम उनके अंशों को आपस में गुणा करते हैं और उनके हरों को आपस में गुणा करते हैं

  • यदि \(p/q\) और \(r/s\) दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो उनका गुणनफल \((p \times r) / (q \times s)\) होगा।
  • प्राप्त गुणनफल को हमेशा उसके सरलतम रूप में लिखना चाहिए।
  • दो से अधिक परिमेय संख्याओं के गुणनफल के लिए भी यही नियम लागू होता है: सभी अंशों का गुणा और सभी हरों का गुणा।
  • \((p/q) \times (r/s) \times (u/v) \times (w/z) = (p \times r \times u \times w) / (q \times s \times v \times z)\)

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🧮सूत्र

परिमेय संख्याओं का गुणा: \((p/q) \times (r/s) = (p \times r) / (q \times s)\)

परिमेय संख्याओं में गुणा के कुछ गुण

परिमेय संख्याओं के गुणा में निम्नलिखित गुणधर्म लागू होते हैं:

  1. संवरक नियम (Closure Property):
  • दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा एक परिमेय संख्या ही होता है।
  • यदि \(p/q\) और \(r/s\) दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो \((p/q) \times (r/s)\) भी एक परिमेय संख्या होगी।
  • यह गुण परिमेय संख्याओं के समुच्चय में गुणा की संक्रिया को 'संवरक' बनाता है।
  1. क्रम विनिमेय नियम (Commutative Property):
  • दो परिमेय संख्याओं को किसी भी क्रम में गुणा करने पर गुणनफल समान रहता है।
  • यदि \(p/q\) और \(r/s\) दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो \((p/q) \times (r/s) = (r/s) \times (p/q)\) होगा।
  • यह गुण पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं में भी सत्य है।
  1. साहचर्य नियम (Associative Property):
  • तीन या अधिक परिमेय संख्याओं को गुणा करते समय, समूहीकरण का क्रम बदलने पर गुणनफल अपरिवर्तित रहता है।
  • यदि \(x, y, z\) तीन परिमेय संख्याएँ हैं, तो \((x \times y) \times z = x \times (y \times z)\) होता है।

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याद रखें

गुणा के गुणधर्म:

  • संवरक: \(p/q \times r/s\) हमेशा परिमेय संख्या।
  • क्रम विनिमेय: \(p/q \times r/s = r/s \times p/q\)
  • साहचर्य: \((x \times y) \times z = x \times (y \times z)\)

वितरण नियम

वितरण नियम एक मौलिक बीजगणितीय गुण है जो बताता है कि गुणा की संक्रिया जोड़ या घटाव की संक्रिया पर कैसे वितरित होती है।

  • गुणा का योग पर वितरण: \(a \times (b + c) = (a \times b) + (a \times c)\)
  • गुणा का घटाव पर वितरण: \(a \times (b - c) = (a \times b) - (a \times c)\)

यह नियम परिमेय संख्याओं के लिए भी मान्य है।

सत्यापन प्रक्रिया:

  1. एक परिमेय संख्या \(a/b\) और दो अन्य परिमेय संख्याएँ \(c/d\) और \(e/f\) लें।
  2. \(a/b \times (c/d + e/f)\) की गणना करें (बायाँ पक्ष)।
  3. \((a/b \times c/d) + (a/b \times e/f)\) की गणना करें (दायाँ पक्ष)।
  4. यदि दोनों परिणाम समान आते हैं, तो वितरण नियम परिमेय संख्याओं के लिए सत्य है।

यह नियम गणितीय गणनाओं को सरल बनाने और व्यंजकों को हल करने में बहुत उपयोगी है।

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🧮सूत्र

वितरण नियम:

  • \(x \times (y + z) = x \times y + x \times z\)
  • \(x \times (y - z) = x \times y - x \times z\)

परिमेय संख्या में शून्य का गुणा

शून्य एक परिमेय संख्या है क्योंकि इसे \(p/q\) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\) (जैसे \(0/1, 0/2, 0/-5\) आदि)।

नियम:

  • किसी भी परिमेय संख्या को शून्य से गुणा करने पर गुणनफल हमेशा शून्य प्राप्त होता है।
  • यह गुण सभी प्रकार की संख्याओं (पूर्णांक, पूर्ण संख्या, प्राकृत संख्या) पर लागू होता है।

उदाहरण:

  • \(5 \times 0 = 0\)
  • \(-10 \times 0 = 0\)
  • \(1/2 \times 0 = 0\)
  • \(-27/84 \times 0 = 0\)

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महत्त्वपूर्ण

शून्य का गुणन गुण: किसी भी परिमेय संख्या \(x\) के लिए, \(x \times 0 = 0 \times x = 0\) होता है।

गुणन तत्समक

गुणन तत्समक वह परिमेय संख्या है जिसे किसी भी परिमेय संख्या से गुणा करने पर गुणनफल वही परिमेय संख्या रहती है।

  • परिमेय संख्याओं के लिए, संख्या 1 गुणन तत्समक है।
  • इसे \(1/1, 2/2, -3/-3\) आदि विभिन्न रूपों में व्यक्त किया जा सकता है, लेकिन इसका मान हमेशा \(1\) ही रहता है।

उदाहरण:

  • \((p/q) \times 1 = p/q\)
  • \((5/7) \times 1 = 5/7\)
  • \((-3/4) \times 1 = -3/4\)

महत्व:

  • गुणन तत्समक का उपयोग भिन्नों को उनके समतुल्य रूप में बदलने के लिए किया जाता है (जैसे \(1/2\) को \(2/4\) में बदलने के लिए \(2/2\) से गुणा करना)।
  • यह गणितीय संक्रियाओं में एक आधारभूत भूमिका निभाता है।

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📖परिभाषा

गुणन तत्समक (Multiplicative Identity): वह संख्या जिसे किसी भी परिमेय संख्या से गुणा करने पर गुणनफल वही परिमेय संख्या रहती है। परिमेय संख्याओं के लिए यह 1 है।

गुणन प्रतिलोम

जब दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल 1 (गुणन तत्समक) के बराबर होता है, तो वे दोनों संख्याएँ एक-दूसरे की गुणन प्रतिलोम (Multiplicative Inverse) कहलाती हैं। इसे व्युत्क्रम (Reciprocal) भी कहते हैं।

गुणन प्रतिलोम ज्ञात करना:

  • यदि एक परिमेय संख्या \(p/q\) है, तो उसका गुणन प्रतिलोम \(q/p\) होगा, बशर्ते \(p \neq 0\) और \(q \neq 0\)।
  • किसी परिमेय संख्या \(p/q\) का गुणन प्रतिलोम ज्ञात करने के लिए, हम उसके अंश और हर को आपस में बदल देते हैं।

उदाहरण:

  • \(2/3\) का गुणन प्रतिलोम \(3/2\) है, क्योंकि \((2/3) \times (3/2) = 1\)
  • \(4/3 \times 3/4 = 1\)
  • \(-27/53 \times 53/-27 = 1\)

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • शून्य (0) का कोई गुणन प्रतिलोम नहीं होता, क्योंकि किसी भी संख्या को \(0\) से गुणा करने पर गुणनफल कभी \(1\) नहीं हो सकता।
  • किसी भी संख्या का गुणन प्रतिलोम तभी संभव है जब वह संख्या स्वयं शून्य न हो।

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📖परिभाषा

गुणन प्रतिलोम (Multiplicative Inverse): वह संख्या जिसे दी गई परिमेय संख्या से गुणा करने पर गुणनफल 1 प्राप्त होता है। \(p/q\) का गुणन प्रतिलोम \(q/p\) है (जहाँ \(p, q \neq 0\))।

🚧ग़लत धारणा

शून्य का गुणन प्रतिलोम नहीं होता। \(0/1\) का व्युत्क्रम \(1/0\) होगा, जो अपरिभाषित है।

परिमेय संख्याओं का भाग

परिमेय संख्याओं के भाग को हल करने के लिए, हम भाग की प्रक्रिया को गुणा की प्रक्रिया में बदल देते हैं।

नियम:

  • किसी संख्या को दूसरी संख्या से भाग देना वास्तव में पहली संख्या को दूसरी संख्या के गुणन प्रतिलोम से गुणा करने जैसा होता है।
  • यदि \(x/y\) में \(a/b\) से भाग देना है, तो इसे \(x/y \times (a/b\) का गुणन प्रतिलोम) के रूप में लिखकर हल किया जा सकता है।
  • \((x/y) \div (a/b) = (x/y) \times (b/a) = (x \times b) / (y \times a)\)

उदाहरण:

  • \(4 \div 4 = 4 \times 1/4 = 1\)
  • \(3 \div 4 = 3 \times (4\) का गुणन प्रतिलोम) \(= 3 \times 1/4 = 3/4\)

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • यह विधि सभी परिमेय संख्याओं पर लागू होती है, सिवाय शून्य के, क्योंकि शून्य का कोई गुणन प्रतिलोम नहीं होता। इसलिए, किसी भी संख्या को शून्य से भाग नहीं दिया जा सकता।

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🧮सूत्र

परिमेय संख्याओं का भाग: \((x/y) \div (a/b) = (x/y) \times (b/a)\)

🚧ग़लत धारणा

शून्य से भाग देना अपरिभाषित है। \(x \div 0\) संभव नहीं है।

आखिर कितनी संख्याएँ हैं

दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं।

पूर्णांकों से भिन्न:

  • दो पूर्णांकों के बीच निश्चित संख्या में पूर्णांक होते हैं (जैसे \(-15\) और \(8\) के बीच \(-14, -13, ..., 7\))।
  • लेकिन परिमेय संख्याओं के मामले में, स्थिति अलग होती है।

परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने की विधियाँ:

  1. सम हर विधि:
  • दी गई परिमेय संख्याओं के हरों को समान करें (लघुत्तम समापवर्त्य लेकर)।
  • यदि अंशों के बीच पर्याप्त अंतर नहीं है, तो अंश और हर दोनों को एक बड़ी संख्या से गुणा करके समतुल्य भिन्न प्राप्त करें।
  • उदाहरण: \(2/3\) और \(3/5\) के बीच संख्याएँ ज्ञात करना।
  • \(2/3 = 10/15\) और \(3/5 = 9/15\)। यहाँ सीधे कोई पूर्णांक नहीं।
  • पुनः: \(2/3 = 2/3 \times 20/20 = 40/60\) और \(3/5 = 3/5 \times 12/12 = 36/60\)।
  • अब इनके बीच \(37/60, 38/60, 39/60\) हैं।
  • जितनी अधिक संख्याएँ चाहिए, उतने बड़े गुणक से गुणा करें।
  1. माध्य विधि (Mean Method):
  • दो परिमेय संख्याओं \(a\) और \(b\) के बीच एक परिमेय संख्या ज्ञात करने के लिए, उनके योग को \(2\) से भाग दें: \((a+b)/2\)।
  • यह संख्या हमेशा \(a\) और \(b\) के ठीक बीच में होती है।
  • इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराकर आप जितनी चाहें उतनी परिमेय संख्याएँ ज्ञात कर सकते हैं।
  • उदाहरण: \(1/8\) और \(1/2\) के बीच पहली संख्या \((1/8 + 1/2)/2 = (5/8)/2 = 5/16\)।
  • फिर \(1/8\) और \(5/16\) के बीच, तथा \(5/16\) और \(1/2\) के बीच संख्याएँ ज्ञात करें।

निष्कर्ष:

  • किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं।
  • यह गुण परिमेय संख्याओं को वास्तविक संख्या रेखा पर 'सघन' बनाता है।

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महत्त्वपूर्ण

अनंत परिमेय संख्याएँ: किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं।

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