संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक
यह अध्याय छात्रों को संश्लेषित रेशों और प्लास्टिक की दुनिया से परिचित कराता है। इसमें रेयॉन, नायलॉन, पॉलिएस्टर और ऐक्रिलिक जैसे विभिन्न प्रकार के संश्लेषित रेशों का वर्णन किया गया है, साथ ही उनके गुण और उपयोग भी बताए गए हैं। प्लास्टिक के प्रकार - थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग प्लास्टिक - उनके गुणों और दैनिक जीवन में उनके अनुप्रयोगों के साथ समझाए गए हैं। अध्याय पर्यावरण पर प्लास्टिक के प्रभाव और 4R सिद्धांत (कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनः चक्रित करें, पुनः प्राप्त करें) के माध्यम से इस समस्या के समाधान पर भी प्रकाश डालता है। यह छात्रों को इन सामग्रियों के महत्व और उनके जिम्मेदार उपयोग के बारे में सिखाता है।
संश्लेषित रेशे क्या हैं ?
संश्लेषित रेशे मानव निर्मित रेशे होते हैं जिन्हें रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा बनाया जाता है। ये छोटी-छोटी इकाइयों को जोड़कर बनाई गई लंबी श्रृंखलाएँ होती हैं।
- बहुलक (पॉलीमर):
- संश्लेषित रेशे छोटी-छोटी इकाइयों (एकलक) से मिलकर बनी एक बड़ी एकल इकाई होती है जिसे बहुलक कहते हैं।
- जिस प्रकार मोतियों की माला में कई मोती एक साथ पिरोए होते हैं, उसी प्रकार बहुलक में कई एकलक इकाइयाँ एक साथ जुड़ी होती हैं।
- एकलक (Monomer): बहुलक की सबसे छोटी, दोहराई जाने वाली इकाई।
- बहुलकीकरण (Polymerization): एकलक इकाइयों के जुड़कर बहुलक बनाने की प्रक्रिया।
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- प्राकृतिक बहुलक:
- प्रकृति में भी बहुलक पाए जाते हैं।
- उदाहरण:
- कपास: यह सेलुलोज नामक बहुलक है, जो बड़ी संख्या में ग्लूकोज इकाइयों से बनता है।
- रबर, रेशम, लकड़ी आदि भी प्राकृतिक बहुलक हैं।
- संश्लेषित रेशों की विशेषताएँ:
- ये मनुष्य द्वारा कारखानों में बनाए जाते हैं।
- इनका उपयोग वस्त्रों, रस्सियों और अन्य औद्योगिक उत्पादों में होता है।
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- संश्लेषित रेशों के सामान्य उदाहरण:
- रेयॉन
- नायलॉन
- पॉलिएस्टर (डेक्रॉन, टेरेलीन, PET)
- ऐक्रिलिक
- संश्लेषित रेशों के सामान्य गुण:
- अत्यधिक टिकाऊ।
- सिकुड़न नहीं आती।
- बहुत जल्दी सूख जाते हैं।
- इस्तरी करने की आवश्यकता नहीं पड़ती (अधिकांशतः)।
बहुलक (Polymer): अनेक छोटी-छोटी इकाइयों (एकलक) के बार-बार जुड़ने से बनी एक बड़ी इकाई।
कपास (सेलुलोज) और रबर जैसे प्राकृतिक पदार्थ भी बहुलक होते हैं।
संश्लेषित रेशों के प्रकार
संश्लेषित रेशों को उनकी रासायनिक संरचना और निर्माण प्रक्रिया के आधार पर कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
- रेयॉन (Rayon):
- इसे कृत्रिम रेशम भी कहते हैं।
- निर्माण: यह काष्ठ लुगदी (लकड़ी की लुगदी) के रासायनिक उपचार से प्राप्त मानव निर्मित रेशा है।
- गुण: रेशम के समान बुनावट, चमकदार, मुलायम। रेशम से सस्ता होता है।
- उपयोग:
- कपास के साथ मिलाकर चादरें बनाना।
- ऊन के साथ मिलाकर गलीचे बनाना।
- वस्त्र उद्योग में।
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- नायलॉन (Nylon):
- यह पहला पूर्ण रूप से संश्लेषित रेशा है।
- निर्माण: इसे बनाने में किसी भी प्राकृतिक कच्चे माल (पौधे या जंतु से प्राप्त) का उपयोग नहीं किया गया।
- गुण:
- बहुत मजबूत, हल्का, लचीला और चमकीला।
- धुलाई में आसान और जल्दी सूखता है।
- उच्च तन्यता शक्ति (खींचने पर टूटने की क्षमता)।
- उपयोग:
- पैराशूट, रस्सियाँ (चट्टानों पर चढ़ने वाली), मछली पकड़ने के जाल।
- मोजे, ब्रश, परदे, सीट बेल्ट।
- कपड़ों के निर्माण में अत्यधिक प्रचलित।
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- पॉलिएस्टर (Polyester):
- निर्माण: यह एस्टर नामक रासायनिक इकाइयों की पुनरावृति से बनता है। पॉलिएस्टर, एस्टर का बहुलक है।
- गुण:
- कपड़ों पर सिलवटें नहीं पड़तीं।
- सरलता से धुल जाते हैं।
- टिकाऊ और कम रखरखाव वाले।
- प्रकार:
- टेरीलीन: एक लोकप्रिय पॉलिएस्टर, जिसके बहुत महीन रेशे खींचे जा सकते हैं।
- PET (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट): एक प्रकार का पॉलिएस्टर।
- उपयोग (PET): बोतलें, बर्तन, फिल्म, तार और अन्य उपयोगी सामग्री बनाने में।
- मिश्रित रूप:
- पॉलिकॉट: पॉलिएस्टर + कपास का मिश्रण।
- पॉलिवूल: पॉलिएस्टर + ऊन का मिश्रण।
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- ऐक्रिलिक (Acrylic):
- गुण:
- प्राकृतिक ऊन के समान दिखता है और महसूस होता है।
- ऊन की तुलना में सस्ता होता है।
- अधिक टिकाऊ और विभिन्न रंगों में उपलब्ध।
- उपयोग:
- स्वेटर, शाल, कम्बल।
- अन्य गर्म वस्त्र।
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| विशेषताएँ | रेयॉन | नायलॉन | पॉलिएस्टर | ऐक्रिलिक | |---|---|---|---|---| | कच्चा माल | काष्ठ लुगदी | कोयला, जल, वायु (पेट्रोलियम उत्पाद) | पेट्रोलियम उत्पाद (एस्टर) | पेट्रोलियम उत्पाद | | दिखावट | रेशम जैसा | चमकदार | चमकदार | ऊन जैसा | | मजबूती | मध्यम | अत्यधिक मजबूत | मजबूत | मध्यम | | पानी सोखना | अच्छा | कम | कम | कम | | सूखने का समय | मध्यम | बहुत जल्दी | जल्दी | जल्दी | | सिलवटें | पड़ सकती हैं | नहीं पड़तीं | नहीं पड़तीं | नहीं पड़तीं | | कीमत | रेशम से सस्ता | सस्ता | सस्ता | ऊन से सस्ता | | विशेष गुण | कृत्रिम रेशम | पहला पूर्ण संश्लेषित रेशा, उच्च तन्यता शक्ति | सिलवट प्रतिरोधी | ऊन का विकल्प, गर्म | | उपयोग | चादरें, गलीचे, वस्त्र | पैराशूट, रस्सियाँ, मोजे, कपड़े | बोतलें, कपड़े, फिल्म, तार | स्वेटर, शाल, कम्बल |
नायलॉन की प्रबलता के कारण इसका उपयोग पैराशूट और चट्टानों पर चढ़ने वाली रस्सियों में किया जाता है। यह अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
PET बोतलें, बर्तन आदि बनाने में उपयोग होने वाला एक प्रकार का पॉलिएस्टर है।
संश्लेषित रेशों के गुणधर्म
संश्लेषित रेशों के कुछ विशिष्ट गुण उन्हें प्राकृतिक रेशों से अलग बनाते हैं और उनके उपयोगों को निर्धारित करते हैं।
- गर्म करने पर पिघलना:
- संश्लेषित रेशे (जैसे नायलॉन, पॉलिएस्टर) गर्म करने पर पिघल जाते हैं।
- यह इनका एक हानिकारक गुण है।
- खतरा: यदि इन कपड़ों में आग लग जाती है, तो वे पिघलकर पहनने वाले व्यक्ति के शरीर से चिपक सकते हैं, जिससे गंभीर जलन हो सकती है।
- सावधानी: रसोईघर या प्रयोगशाला में काम करते समय संश्लेषित रेशों से बने कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
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- कम जल अवशोषण और शीघ्र सूखना:
- संश्लेषित रेशे पानी कम सोखते हैं।
- इस कारण ये धोने के बाद जल्दी सूख जाते हैं।
- उपयोगिता: बारिश के मौसम के लिए उपयुक्त होते हैं और कपड़े धोने में सुविधा प्रदान करते हैं।
- क्रियाकलाप (जल अवशोषण):
- समान आकार के प्राकृतिक (सूती) और संश्लेषित (पॉलिएस्टर) कपड़े के दो टुकड़े लें।
- दोनों को अलग-अलग गिलासों में बराबर पानी में 5 मिनट के लिए भिगोएँ।
- कपड़ों को निकालकर धूप में फैलाएँ और गिलासों में बचे पानी की मात्रा की तुलना करें।
- अवलोकन: संश्लेषित कपड़े वाले गिलास में अधिक पानी बचेगा, और संश्लेषित कपड़ा जल्दी सूखेगा।
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- अन्य महत्वपूर्ण गुणधर्म:
- टिकाऊपन: ये प्राकृतिक रेशों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं।
- मजबूती: नायलॉन जैसे रेशे बहुत मजबूत होते हैं।
- लचीलापन: ये लचीले होते हैं, जिससे कपड़ों में सिलवटें नहीं पड़तीं।
- हल्के: वजन में हल्के होते हैं।
- कीमत: प्राकृतिक रेशों की तुलना में अक्सर सस्ते होते हैं।
- रखरखाव: इनका रखरखाव आसान होता है।
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| गुणधर्म | प्राकृतिक रेशे (कपास, ऊन) | संश्लेषित रेशे (नायलॉन, पॉलिएस्टर) | |---|---|---| | जल अवशोषण | अधिक | कम | | सूखने का समय | देर से | जल्दी | | गर्म करने पर | जलते हैं (राख बनाते हैं) | पिघल जाते हैं (शरीर से चिपक सकते हैं) | | टिकाऊपन | कम | अधिक | | मजबूती | विभिन्न (ऊन कमजोर, रेशम मजबूत) | अधिक (नायलॉन बहुत मजबूत) | | सिलवटें | आसानी से पड़ती हैं | नहीं पड़तीं | | कीमत | महंगी | सस्ती | | रखरखाव | अधिक | कम | | उदाहरण | सूती कपड़े, ऊनी स्वेटर | नायलॉन के मोजे, पॉलिएस्टर की शर्ट |
याद रखें, संश्लेषित रेशों का पिघलना एक हानिकारक गुण है, खासकर आग लगने की स्थिति में।
संश्लेषित रेशों के कम जल अवशोषण और शीघ्र सूखने के गुण पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
प्लास्टिक
प्लास्टिक भी संश्लेषित रेशों की तरह एक बहुलक है, जो हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है।
- प्लास्टिक की संरचना:
- प्लास्टिक भी छोटी-छोटी इकाइयों (एकलक) से मिलकर बना एक बहुलक है।
- इसकी इकाइयों की व्यवस्था दो प्रकार की हो सकती है:
- रेखीय व्यवस्था: इकाइयाँ एक सीधी रेखा में व्यवस्थित होती हैं। [IMAGE: TODO: रेखीय व्यवस्था का चित्र]
- तिर्यकबद्ध व्यवस्था: इकाइयाँ एक-दूसरे से आड़ी-तिरछी कड़ियों (cross-links) द्वारा जुड़ी होती हैं, जिससे एक जाल जैसी संरचना बनती है। [IMAGE: cross_linked_polymer_network_fig117]
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- प्लास्टिक के गुण और उपयोग:
- आकार देने में आसानी: प्लास्टिक को गर्म करके पिघलाया जा सकता है और फिर किसी भी साँचे में ढालकर मनचाहा आकार दिया जा सकता है।
- पुनः चक्रण: प्लास्टिक का पुनः चक्रण (recycling) हो सकता है।
- रंगना: इसे विभिन्न रंगों में रंगा जा सकता है।
- अन्य रूप: इसे बेलकर पतली चादरें बनाई जा सकती हैं या खींचकर तारें भी बनाई जा सकती हैं।
- उदाहरण: पॉलिथीन (पॉलि+एथीन) प्लास्टिक का एक सामान्य उदाहरण है, जिसका उपयोग थैलियाँ बनाने में होता है।
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- प्लास्टिक के प्रकार:
- थर्मोप्लास्टिक (Thermoplastics):
- वे प्लास्टिक जिन्हें गर्म करने पर आसानी से मुड़ा जा सकता है और विकृत किया जा सकता है।
- इन्हें बार-बार गर्म करके नरम किया जा सकता है और नए आकार में ढाला जा सकता है।
- ये पुनः चक्रण योग्य होते हैं।
- उदाहरण: पॉलिथीन, PVC (पॉलीविनाइल क्लोराइड)।
- उपयोग: खिलौने, कंघी, बर्तन, थैलियाँ, पानी की बोतलें।
- थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (Thermosetting Plastics):
- वे प्लास्टिक जिन्हें एक बार साँचे में ढाल दिया जाता है, तो इन्हें गर्म करके नरम नहीं किया जा सकता।
- ये गर्म करने पर स्थायी रूप से कठोर हो जाते हैं।
- ये पुनः चक्रण योग्य नहीं होते हैं।
- उदाहरण: बैकेलाइट, मेलामाइन।
- उपयोग:
- बैकेलाइट: ऊष्मा और विद्युत का कुचालक होता है। बिजली के स्विच, बर्तनों के हत्थे, टेलीफोन के उपकरण।
- मेलामाइन: आग का प्रतिरोधक है और अन्य प्लास्टिक की अपेक्षा ऊष्मा को सहने की अधिक क्षमता रखता है। फर्श की टाइलें, रसोई के बर्तन, अग्नि प्रतिरोधक कपड़े।
- टेफ्लॉन (Teflon):
- एक विशिष्ट प्लास्टिक जिस पर तेल और जल नहीं चिपकता।
- उपयोग: भोजन पकाने वाले पात्रों पर न चिपकने वाली परत (non-stick coating) लगाने में।
थर्मोप्लास्टिक: वह प्लास्टिक जो गर्म करने पर नरम हो जाता है और जिसे बार-बार ढाला जा सकता है।
थर्मोसेटिंग प्लास्टिक: वह प्लास्टिक जो एक बार गर्म करके ढालने के बाद स्थायी रूप से कठोर हो जाता है और जिसे फिर से नरम नहीं किया जा सकता।
मेलामाइन आग का प्रतिरोधक होता है, इसलिए इसका उपयोग अग्नि प्रतिरोधक कपड़े बनाने में किया जाता है।
प्लास्टिक के अभिलाक्षणिक गुण
प्लास्टिक के विशिष्ट गुण इसे विभिन्न उपयोगों के लिए अत्यधिक उपयुक्त बनाते हैं।
- प्लास्टिक अनअभिक्रियाशील है:
- प्लास्टिक जल और वायु से अभिक्रिया नहीं करता।
- यह आसानी से संक्षारित (जंग लगना) नहीं होता, जैसे धातुएँ होती हैं।
- उपयोगिता: विभिन्न प्रकार के पदार्थों (खाद्य सामग्री, पानी, तेल, रसायन) को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग किया जाता है।
- यह गुण इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाता है।
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- प्लास्टिक हल्का, प्रबल और टिकाऊ होता है:
- प्लास्टिक वजन में हल्का होता है।
- यह प्रबल (मजबूत) होता है, जिससे बनी वस्तुएँ जल्दी टूटती नहीं।
- यह टिकाऊ होता है और लंबे समय तक चलता है।
- उपयोगिता:
- कम भार और कम कीमत वाली वस्तुएँ बनाना।
- धातुओं की अपेक्षा हल्के होने के कारण वायुयानों और अंतरिक्षयानों जैसे विशेष अनुप्रयोगों में भी उपयोग।
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- प्लास्टिक कुचालक होता है:
- प्लास्टिक ऊष्मा (गर्मी) और विद्युत (बिजली) दोनों का कुचालक होता है।
- कुचालक वे पदार्थ होते हैं जो अपने अंदर से ऊष्मा या विद्युत को आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते।
- उपयोगिता:
- खाना बनाने वाले बर्तनों के हत्थे (हाथ जलने से बचाने के लिए)।
- बिजली के तारों पर कवर (बिजली के झटके से सुरक्षा के लिए)।
- बिजली के स्विच, प्लग, बोर्ड आदि।
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प्लास्टिक की अनअभिक्रियाशीलता इसे खाद्य पदार्थों और रसायनों के भंडारण के लिए एक आदर्श सामग्री बनाती है।
बिजली के स्विच और बर्तनों के हत्थे बनाने में प्लास्टिक के कुचालक गुण का उपयोग किया जाता है। यह एक सामान्य परीक्षा प्रश्न है।
प्लास्टिक और पर्यावरण
प्लास्टिक के व्यापक उपयोग से पर्यावरणीय प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन गया है।
- प्लास्टिक कचरे की समस्या:
- दैनिक जीवन में प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों, डिब्बों आदि का अत्यधिक उपयोग होता है।
- उपयोग के बाद ये वस्तुएँ कचरे के रूप में सार्वजनिक कूड़ेदानों, नालियों, सड़कों और मैदानों में जमा हो जाती हैं।
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- जैव निम्नीकरणीय और जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थ:
- जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable): वे पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं (जैसे सूक्ष्मजीवों की क्रिया) द्वारा आसानी से अपघटित हो जाते हैं।
- उदाहरण: पौधों के अवशेष, कागज, भोजन का कचरा।
- जैव अनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable): वे पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा सरलता से अपघटित नहीं होते और पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं।
- उदाहरण: प्लास्टिक, धातुएँ, काँच।
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- प्लास्टिक का पर्यावरण प्रदूषण:
- प्लास्टिक को प्राकृतिक रूप से अपघटित होने में सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं।
- यह पर्यावरण में लंबे समय तक बना रहता है, जिससे मिट्टी और जल प्रदूषण होता है।
- जब प्लास्टिक कचरे को जलाया जाता है, तो यह भारी मात्रा में विषैले धुएँ को उत्सर्जित करता है।
- यह विषैला धुआँ वायु प्रदूषण का कारण बनता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ (साँस लेने में कठिनाई, बीमारियाँ) हो सकती हैं।
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- प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और 4R सिद्धांत:
- कचरा पृथक्करण: ग्राम पंचायतें और नगरपालिकाएँ अक्सर कचरे को एकत्र करने के लिए दो अलग-अलग कूड़ेदान प्रदान करती हैं:
- नीला कूड़ेदान: पुनः उपयोग किए जा सकने वाले पदार्थ (प्लास्टिक, धातुएँ, काँच - जैव अनिम्नीकरणीय)।
- हरा कूड़ेदान: रसोई घर और अन्य पादप/जंतु अपशिष्ट (जैव निम्नीकरणीय)।
- समस्या का समाधान (4R सिद्धांत):
- उपयोग कम करिए (Reduce): प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें।
- पुनः उपयोग करिए (Reuse): प्लास्टिक की वस्तुओं का बार-बार उपयोग करें।
- पुनः चक्रित करिए (Recycle): प्लास्टिक कचरे को पुनः चक्रण के लिए भेजें।
- पुनः प्राप्त करिए (Recover): प्लास्टिक से ऊर्जा या अन्य उपयोगी पदार्थ पुनः प्राप्त करना।
- अन्य उपाय:
- यथासंभव कपास या जूट की बनी थैलियों का उपयोग करें।
- प्लास्टिक के उपयोग से बचें।
- अपशिष्ट को जैव निम्नीकरणीय और जैव अनिम्नीकरणीय में अलग करके निस्तारण करें।
- स्वयं में पर्यावरण के हित हेतु आदतें विकसित करें।
जैव निम्नीकरणीय: वे पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा आसानी से अपघटित हो जाते हैं।
जैव अनिम्नीकरणीय: वे पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा सरलता से अपघटित नहीं होते।
प्लास्टिक को अपघटित होने में सैकड़ों वर्ष लगते हैं, जो इसे एक गंभीर पर्यावरणीय खतरा बनाता है।
4R सिद्धांत: Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुनः उपयोग), Recycle (पुनः चक्रण), Recover (पुनः प्राप्त)। यह प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का आधार है।