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धातुएँ और अधातुएँ
Chhattisgarh · Class 8 · 🔬 Science · Chapter 5

धातुएँ और अधातुएँ

धातुएँअधातुएँआघातवर्ध्यतातन्यतासंक्षारणमिश्रधातुएँ

यह अध्याय छात्रों को धातुओं और अधातुओं के मूलभूत गुणों से परिचित कराता है। इसमें उनकी चमक, कठोरता, आघातवर्ध्यता, तन्यता, ऊष्मा और विद्युत चालकता जैसे भौतिक गुणों के साथ-साथ ऑक्सीजन, जल और अम्लों के साथ उनकी रासायनिक अभिक्रियाओं पर भी प्रकाश डाला गया है। छात्र विस्थापन अभिक्रियाओं, उत्कृष्ट धातुओं, संक्षारण और मिश्र धातुओं के महत्व को भी सीखेंगे। यह अध्याय दैनिक जीवन में धातुओं और अधातुओं के विभिन्न उपयोगों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

तत्व

रसायन विज्ञान में, तत्व एक शुद्ध पदार्थ है जिसमें केवल एक ही प्रकार के परमाणु होते हैं। इन परमाणुओं में समान संख्या में प्रोटॉन होते हैं, जिसे परमाणु संख्या कहा जाता है।

  • रासायनिक अविभाज्यता: तत्वों को साधारण रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता।
  • उदाहरण: सोना, लोहा, ऑक्सीजन, कार्बन, हाइड्रोजन आदि।
  • वर्गीकरण: तत्वों को उनके गुणों के आधार पर मुख्य रूप से धातुओं और अधातुओं में वर्गीकृत किया जाता है।
  • प्रकृति में उपलब्धता:
  • प्रकृति में अधिकांश तत्व धातुएँ हैं (जैसे लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, सोना, चाँदी, टिन, लेड, जिंक)।
  • अधातुओं की संख्या बहुत कम है (जैसे कार्बन, गंधक, क्लोरीन, ब्रोमीन, ऑक्सीजन, हीलियम, आयोडीन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस)।

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महत्त्वपूर्ण

कुल 118 तत्वों की खोज की जा चुकी है। इनमें से कुछ प्राकृतिक हैं और कुछ मानव निर्मित।

तत्वों के गुण (भौतिक गुण)

धातुओं और अधातुओं को उनके भौतिक गुणों के आधार पर आसानी से पहचाना जा सकता है।

1. चमक (Lustre)

  • धातुएँ: चमकदार होती हैं। नई कटी हुई या रगड़ी हुई धातु की सतह चमकदार होती है। (जैसे सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा)।
  • अधातुएँ: सामान्यतः चमकहीन होती हैं। (अपवाद: आयोडीन चमकदार होती है, ग्रेफाइट में धात्विक चमक होती है)।

2. आघातवर्ध्यता (Malleability)

  • धातुएँ: आघातवर्ध्य होती हैं। इन्हें हथौड़े से पीटकर पतली चादरों में ढाला जा सकता है। (जैसे ऐलुमिनियम फॉयल, चाँदी का वर्क)।
  • अधातुएँ: भंगुर होती हैं। पीटने पर टुकड़ों में टूट जाती हैं। (जैसे कोयला, गंधक)।

3. तन्यता (Ductility)

  • धातुएँ: तन्य होती हैं। इन्हें खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है (10 ग्राम सोने से 2 किमी लंबा तार)।
  • अधातुएँ: तन्य नहीं होती हैं।

4. ऊष्मा चालकता (Heat Conductivity)

  • धातुएँ: ऊष्मा की सुचालक होती हैं। (जैसे ताँबा, ऐलुमिनियम)।
  • अधातुएँ: सामान्यतः ऊष्मा की कुचालक होती हैं।

5. विद्युत चालकता (Electrical Conductivity)

  • धातुएँ: विद्युत की सुचालक होती हैं। (जैसे ताँबा, लोहा)।
  • अधातुएँ: सामान्यतः विद्युत की कुचालक होती हैं। (अपवाद: ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक है)।

6. कठोरता (Hardness)

  • धातुएँ: प्रायः कठोर होती हैं। (अपवाद: सोडियम, पोटैशियम, लेड नरम होते हैं, इन्हें चाकू से काटा जा सकता है)।
  • अधातुएँ: प्रायः कठोर नहीं होती हैं। (अपवाद: हीरा (कार्बन का एक रूप) सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है)।

7. भौतिक अवस्था (Physical State)

  • धातुएँ: सामान्य ताप पर अधिकांश धातुएँ ठोस अवस्था में पाई जाती हैं। (अपवाद: पारा (मरकरी) द्रव अवस्था में पाया जाता है)।
  • अधातुएँ: ठोस, द्रव या गैसीय अवस्था में पाई जा सकती हैं। (जैसे कार्बन, गंधक ठोस; ब्रोमीन द्रव; ऑक्सीजन, नाइट्रोजन गैस)।

8. ध्वनिकता (Sonority)

  • धातुएँ: ध्वनिक होती हैं। कठोर सतह से टकराने पर बजने वाली ध्वनि उत्पन्न करती हैं (जैसे घंटियाँ)।
  • अधातुएँ: ध्वनिक नहीं होती हैं।

9. गलनांक और क्वथनांक (Melting and Boiling Point)

  • धातुएँ: सामान्यतः उच्च गलनांक और क्वथनांक होते हैं। (जैसे लोहे का गलनांक 1535°C)।
  • अधातुएँ: सामान्यतः कम गलनांक और क्वथनांक होते हैं। (जैसे सल्फर का गलनांक 119°C)।

सारांश तालिका: | गुणधर्म | धातुएँ | अधातुएँ | |---|---|---| | चमक | चमकदार | चमकहीन (अपवाद: आयोडीन, ग्रेफाइट) | | आघातवर्ध्यता | आघातवर्ध्य (चादरें बनाई जा सकती हैं) | भंगुर (पीटने पर टूट जाती हैं) | | तन्यता | तन्य (तार खींचे जा सकते हैं) | अतन्य | | ऊष्मा चालकता | सुचालक | कुचालक | | विद्युत चालकता | सुचालक | कुचालक (अपवाद: ग्रेफाइट) | | कठोरता | कठोर (अपवाद: Na, K, Pb नरम) | नरम (अपवाद: हीरा कठोर) | | भौतिक अवस्था (सामान्य ताप पर) | ठोस (अपवाद: पारा द्रव) | ठोस, द्रव या गैस | | ध्वनिकता | ध्वनिक | अध्वनिक | | गलनांक/क्वथनांक | उच्च | निम्न |

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याद रखें

ग्रेफाइट कार्बन का एक अपररूप है जो अधातु होते हुए भी विद्युत का सुचालक है।

🚧ग़लत धारणा

सभी धातुएँ कठोर नहीं होतीं। सोडियम और पोटैशियम इतनी नरम होती हैं कि उन्हें चाकू से काटा जा सकता है।

ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया

धातुएँ और अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अलग-अलग तरह से अभिक्रिया करती हैं।

1. धातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया

  • उत्पाद: अधिकांश धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
  • प्रकृति: ये धातु ऑक्साइड आमतौर पर क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
  • जल के साथ अभिक्रिया: धातु ऑक्साइड जल में घुलकर धातु हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं, जो क्षार होते हैं।
  • उदाहरण:
  • मैग्नीशियम का दहन:

\(2Mg + O_2 \rightarrow 2MgO\) (मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड)

  • मैग्नीशियम ऑक्साइड की जल से अभिक्रिया:

\(MgO + H_2O \rightarrow Mg(OH)_2\) (मैग्नीशियम ऑक्साइड + पानी → मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार))

  • विशेष बिंदु:
  • सोडियम जैसी अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ वायु और जल से तीव्रता से अभिक्रिया करती हैं, इसलिए उन्हें केरोसिन में डुबोकर रखा जाता है ताकि वे ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में न आएं।
  • सोना जैसी कम क्रियाशील धातुएँ वायु से आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं।

2. अधातुओं की ऑक्सीजन से अभिक्रिया

  • उत्पाद: अधातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके अधातु ऑक्साइड बनाती हैं।
  • प्रकृति: ये अधातु ऑक्साइड आमतौर पर अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
  • जल के साथ अभिक्रिया: अधातु ऑक्साइड जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं।
  • उदाहरण:
  • सल्फर का दहन:

\(S + O_2 \rightarrow SO_2\) (सल्फर + ऑक्सीजन → सल्फर डाइऑक्साइड)

  • सल्फर डाइऑक्साइड की जल से अभिक्रिया:

\(SO_2 + H_2O \rightarrow H_2SO_3\) (सल्फर डाइऑक्साइड + पानी → सल्फ्यूरस अम्ल)

क्रियाकलाप 4 का अवलोकन: | क्र. | विलयन | लाल लिटमस पर प्रभाव | नीले लिटमस पर प्रभाव | अम्लीयता / क्षारीयता | |---|---|---|---|---| | 1 | मैग्नीशियम के दहन से प्राप्त गैस का विलयन | कोई परिवर्तन नहीं | नीला लिटमस लाल हो जाता है | क्षारीय | | 2 | गंधक के दहन से प्राप्त गैस का विलयन | लाल लिटमस नीला हो जाता है | कोई परिवर्तन नहीं | अम्लीय |

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💡सुझाव

धातु ऑक्साइडों की प्रकृति क्षारीय होती है, जबकि अधातु ऑक्साइडों की प्रकृति अम्लीय होती है। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है जिसे याद रखना चाहिए।

जल के साथ अभिक्रिया

धातुएँ और अधातुएँ जल के साथ अलग-अलग तरह से अभिक्रिया करती हैं, जो उनकी क्रियाशीलता पर निर्भर करता है।

1. धातुओं की जल से अभिक्रिया

  • उत्पाद: धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
  • क्रियाशीलता में भिन्नता:
  • अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ: सोडियम (Na) और पोटैशियम (K) जैसी धातुएँ ठंडे जल से भी बहुत तीव्रता से अभिक्रिया करती हैं और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं। यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है, जिससे उत्पन्न हाइड्रोजन गैस में आग लग सकती है।

\(2Na (s) + 2H_2O (l) \rightarrow 2NaOH (aq) + H_2 (g) + ऊष्मा\) (सोडियम + पानी → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन)

  • मध्यम क्रियाशील धातुएँ: मैग्नीशियम (Mg) ठंडे जल से मंद अभिक्रिया करता है, लेकिन गर्म जल या भाप से तेजी से अभिक्रिया करके मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन बनाता है। लोहा (Fe) और जिंक (Zn) जैसी धातुएँ ठंडे या गर्म जल से अभिक्रिया नहीं करतीं, बल्कि भाप से अभिक्रिया करती हैं।

\(Mg (s) + 2H_2O (g) \rightarrow Mg(OH)_2 (aq) + H_2 (g)\) (मैग्नीशियम + जल (भाप) → मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन)

  • कम क्रियाशील धातुएँ: ताँबा (Cu), सोना (Au), चाँदी (Ag) जैसी धातुएँ जल से बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करतीं।

2. अधातुओं की जल से अभिक्रिया

  • अधातुएँ सामान्यतः जल के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं।
  • उदाहरण: फॉस्फोरस (P) जैसी कुछ अधातुओं को वायु के प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए पानी में रखा जाता है, क्योंकि वे वायु की ऑक्सीजन से तीव्रता से अभिक्रिया करती हैं।

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महत्त्वपूर्ण

सोडियम को केरोसिन में रखा जाता है क्योंकि यह वायु और जल दोनों से अत्यधिक क्रियाशील होता है।

अम्लों के साथ अभिक्रिया

धातुएँ और अधातुएँ अम्लों के साथ अलग-अलग तरह से अभिक्रिया करती हैं।

1. धातुओं की अम्लों से अभिक्रिया

  • उत्पाद: अधिकांश धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं। हाइड्रोजन गैस 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है।
  • क्रियाशीलता में भिन्नता:
  • क्रियाशील धातुएँ: मैग्नीशियम (Mg) और जिंक (Zn) जैसी धातुएँ तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं।

\(Mg (s) + 2HCl (aq) \rightarrow MgCl_2 (aq) + H_2 (g)\) (मैग्नीशियम + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन) \(Zn (s) + 2HCl (aq) \rightarrow ZnCl_2 (aq) + H_2 (g)\) (जिंक + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → जिंक क्लोराइड + हाइड्रोजन)

  • कम क्रियाशील धातुएँ: ताँबा (Cu) जैसी धातुएँ तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया नहीं करतीं। ये सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल या नाइट्रिक अम्ल जैसे प्रबल अम्लों से अभिक्रिया कर सकती हैं, लेकिन हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं करतीं।
  • खाद्य पदार्थों के साथ अभिक्रिया: अम्लीय खाद्य पदार्थ (जैसे अचार, दही, खट्टे फल) को धातु के बर्तनों में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि अम्ल धातु से अभिक्रिया करके विषैले पदार्थ बना सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

2. अधातुओं की अम्लों से अभिक्रिया

  • अधातुएँ सामान्यतः अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं।

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💡सुझाव

अम्ल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस का निकलना धातुओं का एक विशिष्ट गुण है। 'पॉप' ध्वनि हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति का परीक्षण है।

🚧ग़लत धारणा

अम्लीय खाद्य पदार्थों को धातु के बर्तनों में रखने से बचें, क्योंकि यह विषैले यौगिकों का निर्माण कर सकता है।

धातु का धातु द्वारा विस्थापन (सक्रियता श्रृंखला)

लवण के विलयन से धातु का विस्थापन
लवण के विलयन से धातु का विस्थापन

विस्थापन अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व एक कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देता है। धातुओं के संदर्भ में, एक अधिक सक्रिय धातु एक कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है।

1. विस्थापन अभिक्रिया के संकेत

  • विलयन के रंग में परिवर्तन।
  • धातु की सतह पर नई परत का जमना।
  • गैस के बुलबुले निकलना।
  • तापमान में परिवर्तन (ऊष्मा का उत्पन्न होना या अवशोषित होना)।

2. क्रियाकलाप 7 का अवलोकन (कॉपर सल्फेट विलयन में धातुओं का विस्थापन)

  • जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट (नीले रंग का) के विलयन में डाला जाता है:
  • विलयन का रंग नीले से हल्का हरा हो जाता है (फेरस सल्फेट बनने के कारण)।
  • लोहे की कील पर भूरे रंग की ताँबे की परत जम जाती है।

\(Fe (s) + CuSO_4 (aq) \rightarrow FeSO_4 (aq) + Cu (s)\) (लोहा + कॉपर सल्फेट → फेरस सल्फेट + ताँबा)

  • जिंक, मैग्नीशियम, ऐलुमिनियम भी कॉपर सल्फेट विलयन से ताँबे को विस्थापित करते हैं क्योंकि ये ताँबे से अधिक क्रियाशील हैं।
  • ताँबा कॉपर सल्फेट विलयन में कोई परिवर्तन नहीं दिखाता क्योंकि यह स्वयं कॉपर है।

3. सक्रियता श्रृंखला (Reactivity Series)

  • यह धातुओं की एक सूची है जिसमें उन्हें उनकी रासायनिक क्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
  • नियम: सक्रियता श्रृंखला में ऊपर स्थित धातु अपने से नीचे स्थित धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है।
  • उदाहरण सक्रियता श्रृंखला:

Li > K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au (लिथियम > पोटैशियम > सोडियम > कैल्शियम > मैग्नीशियम > ऐलुमिनियम > जिंक > लोहा > लेड > हाइड्रोजन > ताँबा > पारा > चाँदी > सोना)

  • महत्व:
  • यह हमें भविष्यवाणी करने में मदद करती है कि कौन सी धातु दूसरी धातु को विस्थापित करेगी।
  • यह धातुओं के वायु, जल और अम्लों से अभिक्रिया करने की प्रवृत्ति को भी दर्शाती है।
  • अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ (जैसे सोडियम) वायु और जल से तीव्रता से अभिक्रिया करती हैं, इसलिए उन्हें केरोसिन में रखा जाता है।
  • कम क्रियाशील धातुएँ (जैसे सोना) वायु, जल या अम्लों से आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं।

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महत्त्वपूर्ण

हाइड्रोजन को सक्रियता श्रृंखला में धातुओं के साथ रखा जाता है क्योंकि यह अम्लों से विस्थापित होने वाली गैस है, हालांकि यह एक अधातु है।

उत्कृष्ट धातुएँ और उनके गुण

उत्कृष्ट धातुएँ वे धातुएँ होती हैं जो बहुत कम क्रियाशील होती हैं। ये वायु, जल, अम्ल और क्षार जैसे रासायनिक अभिकर्मकों द्वारा आसानी से प्रभावित नहीं होती हैं।

  • उदाहरण: सोना (Au), चाँदी (Ag), प्लैटिनम (Pt)
  • गुण:
  • कम क्रियाशीलता: इनकी निष्क्रिय प्रकृति के कारण इनकी धात्विक चमक लंबे समय तक बनी रहती है।
  • संक्षारण प्रतिरोधी: ये संक्षारित नहीं होतीं, अर्थात इन पर जंग नहीं लगता या काली परत नहीं जमती।
  • आभूषणों में उपयोग: इनकी चमक, सुंदरता और निष्क्रियता के कारण इनका उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है।
  • शुद्ध सोना (24 कैरेट): 100% शुद्ध सोना बहुत नरम होता है, जिससे इसके आभूषण आसानी से नहीं बन पाते।
  • कैरेट: सोने की शुद्धता को कैरेट में व्यक्त किया जाता है।
  • 24 कैरेट सोना: शुद्ध सोना।
  • 22 कैरेट सोना: 22 भाग सोना और 2 भाग अन्य धातु (जैसे चाँदी या ताँबा) का मिश्रण। अन्य धातु मिलाने से सोना कठोर हो जाता है, जिससे आभूषण बनाना आसान होता है और वे अधिक टिकाऊ होते हैं।

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📖परिभाषा

उत्कृष्ट धातुएँ वे धातुएँ हैं जो रासायनिक रूप से बहुत निष्क्रिय होती हैं और आसानी से संक्षारित नहीं होतीं।

महत्त्वपूर्ण

आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का उपयोग किया जाता है, क्योंकि 24 कैरेट सोना बहुत नरम होता है।

संक्षारण और उसके बचाव के उपाय

संक्षारण के लिए आवश्यक शर्तें
संक्षारण के लिए आवश्यक शर्तें

संक्षारण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें धातुएँ अपने पर्यावरण (वायु, नमी, रसायन) के साथ अभिक्रिया करके धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं।

  • जंग लगना: लोहे का संक्षारण जंग लगना कहलाता है। इसमें लोहा ऑक्सीजन और नमी की उपस्थिति में आयरन ऑक्साइड (जंग) बनाता है, जो भूरी, परतदार परत होती है।

\(4Fe (s) + 3O_2 (g) + nH_2O (l) \rightarrow 2Fe_2O_3 \cdot nH_2O (s)\) (लोहा + ऑक्सीजन + जल → जलयोजित आयरन (III) ऑक्साइड (जंग))

  • अन्य उदाहरण:
  • ताँबे पर हरी परत का जमना (कॉपर कार्बोनेट)।
  • चाँदी पर काली परत का जमना (सिल्वर सल्फाइड)।

संक्षारण के लिए आवश्यक शर्तें (क्रियाकलाप 8)

  • लोहे में जंग लगने के लिए ऑक्सीजन (वायु) और जल (नमी) दोनों की उपस्थिति अनिवार्य है।
  • परखनली 1 (पानी + हवा): कील में जंग लगेगा।
  • परखनली 2 (उबला पानी - ऑक्सीजन रहित): कील में जंग नहीं लगेगा।
  • परखनली 3 (निर्जल कैल्सियम क्लोराइड - जल रहित): कील में जंग नहीं लगेगा।

संक्षारण से बचाव के उपाय

संक्षारण धातुओं को कमजोर करता है और उनके जीवनकाल को कम करता है। इसे रोकने के कई उपाय हैं:

  1. पेंट करना: धातु की सतह पर पेंट की एक सुरक्षात्मक परत चढ़ाना, जो उसे सीधे वायु और नमी के संपर्क में आने से रोकती है। (जैसे घरों में लोहे की वस्तुओं पर पेंट)।
  2. ग्रीस/तेल लगाना: धातु और पर्यावरण के बीच एक अवरोधक बनाना। (जैसे साइकिल की चेन में ग्रीस)।
  3. धातु की परत चढ़ाना (विद्युत लेपन/गैल्वनीकरण):
  • गैल्वनीकरण: लोहे पर जिंक (जस्ता) की पतली परत चढ़ाना। जिंक लोहे से अधिक क्रियाशील होता है और स्वयं संक्षारित होकर लोहे को बचाता है।
  • विद्युत लेपन: लोहे पर टिन या क्रोमियम जैसी धातुओं की परत चढ़ाना। क्रोमियम लेपन से स्टील के फर्नीचर को टिकाऊ और आकर्षक बनाया जाता है।
  1. मिश्रधातुओं का निर्माण: धातुओं को अन्य धातुओं या अधातुओं के साथ मिलाकर मिश्रधातु बनाना, जो शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं। (जैसे स्टेनलेस स्टील)।

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📖परिभाषा

संक्षारण वह प्रक्रिया है जिसमें धातुएँ अपने पर्यावरण के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके धीरे-धीरे नष्ट होती हैं। लोहे के संक्षारण को जंग लगना कहते हैं।

💡सुझाव

जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और नमी दोनों आवश्यक हैं। केवल एक की अनुपस्थिति में जंग नहीं लगेगा।

मिश्रधातुएँ और उनके उपयोग

मिश्रधातु दो या दो से अधिक धातुओं, या एक धातु और एक अधातु का समांगी मिश्रण होती हैं। इन्हें धातुओं के गुणों को बेहतर बनाने के लिए बनाया जाता है।

  • उद्देश्य: शुद्ध धातुओं की तुलना में मिश्रधातुएँ अक्सर अधिक कठोर, मजबूत और संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं। इनके गलनांक भी अक्सर कम होते हैं।
  • निर्माण: आवश्यकतानुसार धातुओं के अनुपात में परिवर्तन कर वांछित गुणों वाली मिश्रधातुओं का निर्माण किया जा सकता है।

प्रमुख मिश्रधातुएँ, उनके अवयव और उपयोग: | क्र. | मिश्रधातु | अवयव | उपयोग | |---|---|---|---| | 1. | इस्पात (स्टील) | लोहा, कार्बन | जहाज, पुल, रेल की पटरियाँ | | 2. | स्टेनलेस स्टील | लोहा, कार्बन, क्रोमियम, निकैल | बर्तन, शल्य चिकित्सा के उपकरण | | 3. | कांसा | ताँबा, टिन | मूर्तियाँ, सिक्के, पदक बनाने में | | 4. | पीतल | ताँबा, जिंक | बर्तन, मशीन के पुर्जे | | 5. | ड्यूरेलुमिन | ऐलुमिनियम, ताँबा, मैंगनीज, मैग्नीशियम | प्रेशर कुकर, वायुयान के विभिन्न भाग | | 6. | जर्मन सिल्वर | ताँबा, जिंक, निकैल | बर्तन बनाने में |

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📖परिभाषा

मिश्रधातु दो या दो से अधिक धातुओं या एक धातु और एक अधातु का समांगी मिश्रण है, जिसे बेहतर गुणों के लिए बनाया जाता है।

महत्त्वपूर्ण

स्टेनलेस स्टील लोहे, क्रोमियम और निकैल की मिश्रधातु है जो जंग प्रतिरोधी होती है।

धातुओं और अधातुओं के दैनिक जीवन में उपयोग

धातुएँ और अधातुएँ हमारे दैनिक जीवन और उद्योगों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

धातुओं के उपयोग

  • लेड (सीसा): साइकिल और मोटरसाइकिल में छर्रे (बॉल बेयरिंग) बनाने में, टांका लगाने वाले तारों (सोल्डर) में, और पानी के पाइप बनाने में (हालांकि अब स्वास्थ्य कारणों से कम उपयोग)।
  • टाइटेनियम: मशीनों के विभिन्न भाग, उपग्रह और रॉकेट बनाने में (इसकी मजबूती और हल्केपन के कारण)।
  • ऐलुमिनियम: पतली पन्नी (फॉयल) बनाने में (खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ, चॉकलेट पैक करने के लिए), सरल विद्युतदर्शी बनाने में।
  • सोना और चाँदी: आभूषण बनाने में (उनकी सुंदरता, चमक और निष्क्रियता के कारण), विद्युतदर्शी जैसे वैज्ञानिक उपकरणों में पतली पन्नी के रूप में।
  • लोहा: मकान, पुल, रेल लाइन, वाहन, मशीनें बनाने में (इसकी कठोरता और मजबूती के कारण)।
  • ताँबा: बिजली के तार, बर्तन बनाने में (इसकी उच्च विद्युत और ऊष्मा चालकता के कारण)।
  • जिंक: गैल्वनीकरण में (लोहे को जंग से बचाने के लिए)।

अधातुओं के उपयोग

  • क्लोरीन: जीवाणुनाशक के रूप में जल के शोधन में (पानी को पीने योग्य बनाने के लिए)।
  • आयोडीन: टिंक्चर आयोडीन में रोगाणुनाशक के रूप में (घावों को संक्रमण से बचाने के लिए)।
  • सल्फर: दवाइयाँ, बारूद, पटाखे बनाने में, सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में।
  • ऑक्सीजन: श्वसन के लिए, दहन प्रक्रियाओं में, अस्पतालों में जीवन रक्षक गैस के रूप में।
  • नाइट्रोजन: उर्वरक बनाने में, खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने में (निष्क्रिय वातावरण प्रदान करने के लिए)।
  • कार्बन (कोयला, ग्रेफाइट, हीरा):
  • कोयला: ईंधन के रूप में।
  • ग्रेफाइट: पेंसिल लेड, इलेक्ट्रोड, स्नेहक के रूप में।
  • हीरा: आभूषण, काटने और पीसने के औजारों में।

सारणी 5.6 (संक्षिप्त): | क्र. | धातु / अधातु | उपयोग | |---|---|---| | 1. | लोहा | मकान, पुल, मशीनें, रेल की पटरियाँ | | 2. | सोना और चाँदी | आभूषण, विद्युतदर्शी | | 3. | ताँबा और ऐलुमिनियम | बिजली के तार, बर्तन, पन्नी | | 4. | ऑक्सीजन | श्वसन, दहन | | 5. | जिंक | गैल्वनीकरण | | 6. | कार्बन (कोयला) | ईंधन |

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महत्त्वपूर्ण

क्लोरीन का उपयोग जल शोधन में जीवाणुनाशक के रूप में होता है।

लेड और मरकरी धातु के दुष्प्रभाव

लेड (सीसा) और मरकरी (पारा) जैसी भारी धातुएँ विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं, लेकिन इनके संपर्क में आने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। ये धातुएँ जीवों के शरीर में पहुँच कर अत्यंत विषैला प्रभाव उत्पन्न करती हैं।

1. लेड (सीसा) के दुष्प्रभाव

  • उपयोग: पेंट, बैटरी बनाने में, पेट्रोल जैसे पदार्थों के जलने से उत्पन्न धुएँ में भी पाया जाता है।
  • शरीर पर प्रभाव:
  • शरीर में पहुँचने पर लाल रक्त कणिकाओं, मस्तिष्क और यकृत को क्षतिग्रस्त करता है।
  • तंत्रिका तंत्र और गुर्दों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • सावधानी: अब इसके स्वास्थ्य प्रभावों के कारण कई अनुप्रयोगों में इसका उपयोग कम हो गया है।

2. मरकरी (पारा) के दुष्प्रभाव

  • उपयोग: यौगिकों का प्रयोग पेंट, कीटनाशी, कवकनाशी बनाने में किया जाता है।
  • शरीर पर प्रभाव:
  • प्रदूषित पानी या दूषित भोजन (जैसे मछलियाँ, सब्जियाँ) के सेवन से शरीर में पहुँचता है।
  • वृक्कों (किडनी) और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचाता है।
  • सावधानी: इन धातुओं का उपयोग सावधानी से और उचित सुरक्षा उपायों के साथ किया जाना चाहिए।

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⚠️सावधान

लेड और मरकरी दोनों ही भारी धातुएँ हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। इनके संपर्क से बचना चाहिए।

छत्तीसगढ़ का धातु शिल्प

छत्तीसगढ़ का धातु शिल्प
छत्तीसगढ़ का धातु शिल्प

छत्तीसगढ़ राज्य में धातु शिल्प की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा है, जो विभिन्न जनजातियों और समुदायों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित की गई है।

1. अघरिया जाति (राजनांदगांव)

  • प्राचीन काल से लौह अयस्क से लोहा अलग करने की विधि जानते थे।

2. लौह-शिल्पी (बस्तर)

  • अभी भी पारंपरिक रूप से लोहे की कलाकृतियों का निर्माण करते हैं।
  • नगरनार क्षेत्र में लौहशिल्प उन्नत है, जहाँ पशु-पक्षियों की खूबसूरत आकृतियाँ और कलात्मक दीप स्तंभ बनाए जाते हैं।

3. लोहार जाति (छत्तीसगढ़)

  • लोहे का चूल्हा, टंगिया, फरसा, कुदाल, फावड़ा, एकल, तीर, भाला, गाड़ी का पट्टा आदि बनाकर ग्रामीण जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

4. घड़वा जाति (बस्तर)

  • इनकी धातु शिल्प कला विश्व प्रसिद्ध है।
  • इनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियाँ देश-विदेश में सराही जाती हैं।

5. झारा जनजाति (रायगढ़ क्षेत्र)

  • झारा धातु शिल्प का निर्माण करती है।
  • मुख्य रूप से धातु की मूर्तियाँ, बर्तन, दीपक आदि बनाती है।

6. मलार जाति (सरगुजा)

  • मलार शिल्प का निर्माण करती है।
  • मुख्यतः बर्तन, चिमनी, अनाज नापने के पात्र बनाती है।
  • पशु-पक्षी, जंगली जानवर और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी तैयार करती है।

यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में धातुएँ केवल औद्योगिक उपयोग के लिए ही नहीं, बल्कि कला और संस्कृति का भी अभिन्न अंग हैं।

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महत्त्वपूर्ण

छत्तीसगढ़ की घड़वा जाति की धातु शिल्प कला अपनी विशिष्टता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

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