इकाई—कोशिका
अध्याय 'इकाई—कोशिका' छात्रों को जीवन की मूलभूत इकाई - कोशिका से परिचित कराता है। इसमें रॉबर्ट हुक द्वारा कोशिका की खोज, एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों का परिचय, कोशिका के विभिन्न आकार और प्रकार, तथा पादप और जंतु कोशिका की विस्तृत संरचना शामिल है। छात्र प्लाज्मा झिल्ली, कोशिका भित्ति, जीवद्रव्य, केन्द्रक और विभिन्न कोशिकांगों जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, राइबोसोम, गॉल्जीकाय, सेन्ट्रोसोम, रिक्तिकाएं और लवक के कार्यों को समझेंगे। यह अध्याय प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाओं के बीच अंतर को भी स्पष्ट करता है, जो जीव विज्ञान की नींव के लिए महत्वपूर्ण है।
कोशिका की खोज
जीव विज्ञान में कोशिका की खोज एक क्रांतिकारी घटना थी जिसने जीवों की मूलभूत संरचना को समझने का मार्ग प्रशस्त किया।
- रॉबर्ट हुक (1665):
- अपने स्वयं के बनाए सरल सूक्ष्मदर्शी का उपयोग किया।
- कॉर्क की पतली काट का अवलोकन किया।
- मधुमक्खी के छत्ते के समान छोटे-छोटे खाली कोष्ठ देखे।
- इन कोष्ठों को 'कोशिका' (Cell) नाम दिया, जिसका अर्थ लैटिन में 'छोटा कमरा' होता है।
- यह खोज जीव विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।
- कोशिका की परिभाषा:
- कोशिका जीवों के शरीर की रचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है।
- जिस प्रकार मकान ईंटों से बनता है, उसी प्रकार शरीर कोशिकाओं से बनता है।
महत्वपूर्ण खोजें और वैज्ञानिक:
- रॉबर्ट हुक (1665): कोशिका की खोज।
- एंटोन वॉन ल्यूवेनहॉक (1674): उन्नत सूक्ष्मदर्शी से जीवित कोशिकाओं (जैसे बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ) का अवलोकन किया।
- रॉबर्ट ब्राउन (1831): कोशिका के केन्द्रक की खोज।
- जे. परकिन्जे (1839): कोशिका के जीवित पदार्थ को जीवद्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) नाम दिया।
- शलाइडन और श्वान (1838-39): कोशिका सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार सभी जीव कोशिकाओं से बने होते हैं और कोशिका जीवन की मूल इकाई है।
- रुडोल्फ विर्चो (1855): बताया कि सभी कोशिकाएँ पूर्व-मौजूदा कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं (Omnis cellula e cellula)।
- इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (1940): इसकी खोज के बाद कोशिकांगों की विस्तृत संरचना को समझा जा सका।
कोशिका जीवन की मूलभूत संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है।
रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क में मृत कोशिकाओं की खोज की।
कोशिकाओं की विविधता: एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीव
कोशिकाएँ आकार, आकृति और संख्या में अत्यधिक विविध होती हैं, जो उनके विशिष्ट कार्यों के अनुकूलन को दर्शाती हैं।
- कोशिकाओं की आकृति और आकार में विविधता:
- अमीबा: अनियमित आकार, लगातार बदलता रहता है।
- प्याज की कोशिकाएँ: आयताकार।
- मानव गाल की कोशिकाएँ: चपटी।
- तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन्स): लंबी और शाखित, संदेशों के संवहन के लिए अनुकूलित। [IMAGE: nerve_cell_neuron_structure_and_impulse_transmission_fig915]
- लाल रक्त कोशिकाएँ: द्विअवतल, ऑक्सीजन परिवहन के लिए अनुकूलित। [IMAGE: red_blood_cells_comparison_fig186]
- पेशी कोशिकाएँ: लंबी और पतली, संकुचन के लिए अनुकूलित।
- कुछ कोशिकाएँ इतनी बड़ी होती हैं कि उन्हें बिना सूक्ष्मदर्शी के भी देखा जा सकता है, जैसे मुर्गी के अंडे का पीला भाग।
- जीवों का वर्गीकरण (कोशिका संख्या के आधार पर):
- एककोशिकीय जीव (Unicellular Organisms):
- केवल एक कोशिका से बने होते हैं।
- जीवन की सभी आवश्यक जैविक क्रियाएँ (पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, जनन) एक ही कोशिका में संपन्न होती हैं।
- उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम, जीवाणु, यीस्ट, क्लेमाइडोमोनास।
- ये स्वतंत्र रूप से जीवित रह सकते हैं।
- बहुकोशिकीय जीव (Multicellular Organisms):
- अनेक कोशिकाओं से बने होते हैं।
- विभिन्न कार्यों को करने के लिए कोशिकाएँ अलग-अलग समूहों (ऊतकों) में व्यवस्थित होती हैं।
- उदाहरण: मनुष्य, पौधे, जानवर, केंचुआ, मेंढक, गुलाब।
- इनमें कोशिकाओं का श्रम विभाजन होता है (प्रत्येक कोशिका समूह का विशिष्ट कार्य)।
- यदि बहुकोशिकीय जीव की एक कोशिका को अलग कर दिया जाए तो वह मर जाती है, क्योंकि वह स्वतंत्र रूप से जीवित रहने में सक्षम नहीं होती।
कोशिकाओं की आकृति और आकार उनके द्वारा किए जाने वाले विशिष्ट कार्यों के लिए अनुकूलित होते हैं।
कोशिका की सामान्य संरचना
यद्यपि कोशिकाएँ आकार और आकृति में भिन्न होती हैं, फिर भी उनकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है। एक सामान्य कोशिका के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
- बाह्य कोशिकीय आवरण
- जीवद्रव्य (प्रोटोप्लाज्म)
- कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)
- केन्द्रक (Nucleus)
- पादप कोशिका (Plant Cell):
- कोशिका भित्ति (Cell Wall) उपस्थित होती है।
- बड़ी केन्द्रीय रिक्तिका (Vacuole) होती है।
- हरितलवक (Chloroplast) उपस्थित होते हैं।
- निश्चित, आयताकार या चौकोर आकृति।
- [IMAGE: plant_cell_fig919]
- जंतु कोशिका (Animal Cell):
- कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।
- छोटी या अनुपस्थित रिक्तिकाएँ।
- हरितलवक अनुपस्थित होते हैं।
- अनियमित या गोलाकार आकृति।
- सेन्ट्रोसोम (Centrosome) उपस्थित होता है।
- [IMAGE: animal_cell_fig151]
कोशिकांग (Cell Organelles): ये कोशिकाद्रव्य में पाए जाने वाले विभिन्न सूक्ष्म संरचनाएँ हैं जो कोशिका के विभिन्न कार्यों को संपन्न करती हैं। प्रमुख कोशिकांगों में माइटोकॉन्ड्रिया, अन्तःप्रद्रव्यी जालिका, राइबोसोम, गॉल्जीकाय, सेन्ट्रोसोम, लवक और रिक्तिकाएँ शामिल हैं।
पादप कोशिका में कोशिका भित्ति और हरितलवक होते हैं, जो जंतु कोशिका में नहीं होते। जंतु कोशिका में सेन्ट्रोसोम होता है, जो पादप कोशिका में आमतौर पर नहीं होता।
बाह्य कोशिकीय आवरण: प्लाज्मा झिल्ली और कोशिका भित्ति
कोशिका का बाह्य आवरण उसे बाहरी वातावरण से अलग करता है और उसकी सुरक्षा करता है।
- प्लाज्मा झिल्ली (Plasma Membrane) / कोशिका झिल्ली (Cell Membrane):
- उपस्थिति: सभी पादप और जंतु कोशिकाओं में जीवद्रव्य के चारों ओर पाई जाने वाली पतली, लचीली झिल्ली।
- संरचना: प्रोटीन और वसा (लिपिड) से बनी होती है।
- प्रकृति: जीवित और अर्द्धपारगम्य (चयनात्मक पारगम्य) होती है, जिसका अर्थ है कि यह कुछ पदार्थों को ही कोशिका के अंदर या बाहर जाने देती है।
- कार्य:
- कोशिका का आकार बनाए रखने में सहायता करती है।
- कोशिका में विभिन्न अणुओं के आने व जाने पर नियंत्रण रखती है (चयनित पदार्थों का परिवहन)।
- कोशिका को सुरक्षा व सहारा प्रदान करती है।
- कोशिका भित्ति (Cell Wall):
- उपस्थिति: केवल पादप कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली के बाहर एक अतिरिक्त आवरण के रूप में पाई जाती है। जंतु कोशिकाओं में अनुपस्थित।
- संरचना: सेलुलोज की बनी होती है।
- प्रकृति: दृढ़, निर्जीव और पूर्णतः पारगम्य होती है।
- कार्य:
- कोशिका की बाहरी सीमा निर्धारित करती है।
- कोशिका को निश्चित आकृति प्रदान करती है।
- कोशिका को यांत्रिक आघात और संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती है।
- पादप कोशिका को स्फीति (turgidity) प्रदान करती है, जिससे पौधे सीधे खड़े रह पाते हैं।
अर्द्धपारगम्य झिल्ली: वह झिल्ली जो केवल विलायक के अणुओं को अपने से होकर गुजरने देती है, विलेय के अणुओं को नहीं।
कोशिका भित्ति पादप कोशिकाओं की एक विशिष्ट पहचान है।
जीवद्रव्य (प्रोटोप्लाज्म): कोशिकाद्रव्य और उसके अंगक
जीवद्रव्य कोशिका का वह जीवित पदार्थ है जिसमें सभी जैविक क्रियाएँ संपन्न होती हैं।
- जीवद्रव्य (Protoplasm):
- परिभाषा: प्रत्येक कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के अंदर पाया जाने वाला तरल, चिपचिपा पदार्थ।
- महत्व: हक्सले नामक वैज्ञानिक ने इसे जीवन का भौतिक आधार कहा है।
- घटक: इसमें खनिज, लवण, पानी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा पाए जाते हैं।
- दो मुख्य भाग:
- कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)
- केन्द्रक (Nucleus)
- कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm):
- परिभाषा: जीवद्रव्य का वह भाग जो प्लाज्मा झिल्ली और केन्द्रक के बीच होता है।
- संरचना: यह एक जेली जैसा पदार्थ है जिसमें विभिन्न कोशिकांग निलंबित रहते हैं।
- कार्य: कोशिका के कई महत्वपूर्ण उपापचयी क्रियाएँ यहीं होती हैं।
- कोशिकांग (Cell Organelles): कोशिकाद्रव्य में पाई जाने वाली विभिन्न सूक्ष्म संरचनाएँ जो विशिष्ट कार्य करती हैं।
- माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria):
- संरचना: दोहरी झिल्ली से बनी गोलाकार या छड़ाकार रचनाएँ, जिनकी आंतरिक झिल्ली में अंगुलियों के समान उभार (क्रिस्टी) होते हैं।
- कार्य: यहाँ भोज्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से ऊर्जा उत्पन्न होती है।
- उपनाम: कोशिका का ऊर्जागृह (Powerhouse of the cell)।
- अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum - ER):
- संरचना: प्लाज्मा झिल्ली व केन्द्रक के बीच शाखित, झिल्लीदार, अनियमित नलिकाओं का जाल। इन नलिकाओं में द्रव भरा होता है।
- कार्य:
- विभिन्न पदार्थों का परिवहन।
- कोशिका को यांत्रिक सहारा प्रदान करना।
- प्रोटीन संश्लेषण (खुरदरी ER) और लिपिड संश्लेषण (चिकनी ER) में भूमिका।
- राइबोसोम (Ribosomes):
- संरचना: अन्तःप्रद्रव्यी जालिका की झिल्लियों की सतह से सटे हुए या कोशिका द्रव्य में बिखरे हुए छोटे कण।
- कार्य: प्रोटीन का निर्माण करना।
- उपनाम: प्रोटीन फैक्ट्री।
- गॉल्जीकाय (Golgi Bodies / Golgi Apparatus):
- संरचना: जन्तु कोशिका में तश्तरीनुमा कोश कई परतों में दिखाई देते हैं (सिस्टर्नी)।
- कार्य: विभिन्न रासायनिक पदार्थों का स्त्राव, पैकेजिंग और परिवहन करना। लाइसोसोम का निर्माण।
- सेन्ट्रोसोम (Centrosome):
- उपस्थिति: मुख्य रूप से जंतु कोशिकाओं के केन्द्रक के पास पाया जाता है। पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के समय ही बनता है।
- संरचना: इसके मध्य में दो कण (सेन्ट्रियोल) पाए जाते हैं।
- कार्य: जंतु कोशिका के विभाजन में सहायता करना (तर्कु तंतुओं का निर्माण)।
जीवद्रव्य में ही सभी जैविक प्रक्रियाएँ संपन्न होती हैं।
माइटोकॉन्ड्रिया को 'ऊर्जागृह' और राइबोसोम को 'प्रोटीन फैक्ट्री' क्यों कहते हैं, यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है।
लवक (Plastids): प्रकार और कार्य
लवक केवल पादप कोशिकाओं में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण कोशिकांग हैं जो विभिन्न कार्यों में संलग्न होते हैं।
- उपस्थिति: केवल पादप कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य में बिखरी रहती हैं।
- आकृति: बिम्ब के आकार की, फीतेनुमा, गोलाकार या अण्डाकार रचनाएँ।
- प्रकार: लवक तीन प्रकार के होते हैं, उनके वर्णकों (पिगमेंट) के आधार पर:
- ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplasts):
- रंग: रंगहीन वर्णक।
- कार्य: खाद्य पदार्थ (जैसे स्टार्च, तेल, प्रोटीन) का संग्रह करते हैं। उदाहरण: आलू में स्टार्च का संग्रह।
- क्रोमोप्लास्ट (Chromoplasts):
- रंग: रंगीन वर्णक (लाल, पीले, नारंगी, बैंगनी)।
- कार्य: फूलों और फलों को आकर्षक रंग प्रदान करते हैं। ये रंग परागण (pollination) और बीज प्रकीर्णन (seed dispersal) में सहायक होते हैं। उदाहरण: टमाटर का लाल रंग, गाजर का नारंगी रंग।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplasts):
- रंग: हरे वर्णक (क्लोरोफिल के कारण)।
- कार्य: प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया में सहायक होते हैं। ये सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं, जिससे पौधों में भोजन का निर्माण होता है।
- उपस्थिति: पत्तियों और हरे तनों की कोशिकाओं में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- परिवर्तन: एक प्रकार का लवक दूसरे प्रकार में परिवर्तित हो सकता है। उदाहरण: हरे टमाटर का लाल होना (क्लोरोप्लास्ट का क्रोमोप्लास्ट में बदलना)।
क्लोरोप्लास्ट पादप कोशिकाओं में भोजन निर्माण का केंद्र है।
जंतु कोशिकाओं में लवक अनुपस्थित होते हैं। यह पादप और जंतु कोशिकाओं के बीच एक मुख्य अंतर है।
रिक्तिकाएँ (Vacuoles): पादप और जंतु कोशिकाओं में महत्व
रिक्तिकाएँ झिल्ली-बद्ध थैली जैसी संरचनाएँ होती हैं जो कोशिका के अंदर विभिन्न पदार्थों का भंडारण और अपशिष्ट निपटान करती हैं।
- पादप कोशिकाओं में रिक्तिकाएँ:
- आकार: आमतौर पर एक या दो बड़ी, गोल या अण्डाकार रचनाएँ।
- उपस्थिति: कोशिका के आयतन का 50% से 90% तक घेर सकती हैं।
- संरचना: एक झिल्ली (टोनोप्लास्ट) से घिरी रहती हैं।
- अंदर भरा पदार्थ: जलीय पदार्थ, कोशिका रस (cell sap), जिसमें पानी, शर्करा, अमीनो अम्ल, खनिज लवण और अपशिष्ट उत्पाद होते हैं।
- कार्य:
- कोशिका को स्फीति (turgidity) प्रदान करती हैं, जिससे कोशिका दृढ़ रहती है और पौधे सीधे खड़े रह पाते हैं।
- पानी, पोषक तत्वों और अपशिष्ट उत्पादों का भंडारण।
- कोशिका के आंतरिक वातावरण को स्थिर बनाए रखने में मदद करती हैं (समस्थापन)।
- जंतु कोशिकाओं में रिक्तिकाएँ:
- आकार: आमतौर पर छोटी और संख्या में अधिक होती हैं, या अनुपस्थित भी हो सकती हैं।
- कार्य:
- अस्थायी भंडारण (पानी, आयन, पोषक तत्व)।
- अपशिष्ट निपटान।
- कुछ एककोशिकीय जंतुओं (जैसे अमीबा) में संकुचनशील रिक्तिकाएँ (contractile vacuoles) परासरण नियमन और उत्सर्जन में मदद करती हैं।
पादप कोशिका में बड़ी केंद्रीय रिक्तिका कोशिका को यांत्रिक सहारा और स्फीति प्रदान करती है।
केन्द्रक (Nucleus): संरचना और कार्य
केन्द्रक कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो कोशिका की सभी जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
- खोज: 1831 में रॉबर्ट ब्राउन ने केन्द्रक की खोज की।
- उपस्थिति: यूकैरियॉटिक कोशिकाओं में पाया जाता है। प्रोकैरियॉटिक कोशिकाओं में सुस्पष्ट केन्द्रक अनुपस्थित होता है।
- आकृति: आमतौर पर गोलाकार या अण्डाकार।
- महत्व: इसे कोशिका का नियंत्रण कक्ष (Control Room of the Cell) कहा जाता है, क्योंकि यह कोशिका में होने वाली समस्त जैविक क्रियाओं पर नियंत्रण रखता है।
- केन्द्रक की संरचना (चित्र 7.7):
- केन्द्रक झिल्ली (Nuclear Membrane):
- केन्द्रक को घेरे हुए पतली, लचीली, अर्द्धपारगम्य झिल्ली।
- इसमें छोटे-छोटे छिद्र (केन्द्रक छिद्र) होते हैं जिनके द्वारा कोशिका द्रव्य व केन्द्रक के मध्य पदार्थों का आदान-प्रदान होता रहता है।
- केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm):
- केन्द्रक झिल्ली के अंदर भरा हुआ गाढ़ा, अर्द्धतरल द्रव्य।
- इसमें क्रोमेटिन जालिका और केन्द्रिका निलंबित रहते हैं।
- क्रोमेटिन जालिका (Chromatin Network):
- केन्द्रक द्रव्य में महीन धागों के जाल जैसी रचना।
- कोशिका विभाजन के समय ये धागे सिकुड़कर छोटे और मोटे तंतु जैसी रचनाओं में बदल जाते हैं, जिन्हें गुणसूत्र (Chromosomes) कहते हैं।
- केन्द्रिका (Nucleolus):
- केन्द्रक द्रव्य में पाई जाने वाली गोल या अण्डाकार रचना।
- कार्य: कोशिका विभाजन में सहायक होती है और राइबोसोम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
केन्द्रक कोशिका की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है, इसलिए इसे 'कोशिका का मस्तिष्क' भी कहा जाता है।
गुणसूत्र और आनुवंशिक पदार्थ
गुणसूत्र आनुवंशिक गुणों के वाहक होते हैं और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक सूचनाओं को ले जाते हैं।
- गुणसूत्र (Chromosomes):
- निर्माण: कोशिका विभाजन के समय क्रोमेटिन जाल के धागे सिकुड़कर गुणसूत्र बनाते हैं।
- संरचना: मुख्य रूप से प्रोटीन और डी.एन.ए. (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) से बने होते हैं।
- कार्य: आनुवंशिक गुणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाते हैं। डी.एन.ए. में आनुवंशिक जानकारी कूटबद्ध होती है।
- डी.एन.ए. (DNA):
- पूरा नाम: डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल।
- महत्व: यह आनुवंशिक सामग्री है जो सभी जीवित जीवों में पाई जाती है।
- संरचना: एक डबल हेलिक्स संरचना होती है।
- आनुवंशिकता: माता-पिता से संतानों में गुणों का संचरण आनुवंशिकता कहलाता है, और गुणसूत्र इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
गुणसूत्र: केन्द्रक में पाए जाने वाले धागे जैसी संरचनाएँ जो आनुवंशिक गुणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाती हैं।
डी.एन.ए. जीवन का ब्लूप्रिंट है।
प्रोकैरियॉटिक और यूकैरियॉटिक कोशिकाएँ
कोशिकाओं को उनकी आंतरिक संरचना की जटिलता के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: प्रोकैरियॉटिक और यूकैरियॉटिक।
- प्रोकैरियॉटिक कोशिकाएँ (Prokaryotic Cells):
- अर्थ: 'प्रो' का अर्थ 'पहले' और 'कैरियॉन' का अर्थ 'केन्द्रक' है, यानी 'आदिम केन्द्रक' वाली कोशिकाएँ।
- केन्द्रक: सुस्पष्ट केन्द्रक अनुपस्थित होता है। केन्द्रक झिल्ली नहीं पाई जाती।
- आनुवंशिक पदार्थ (DNA): कोशिका द्रव्य में बिखरा रहता है (न्यूक्लियोइड)।
- केन्द्रिका: अनुपस्थित।
- झिल्ली-बद्ध कोशिकांग: माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय, अन्तःप्रद्रव्यी जालिका, सेन्ट्रोसोम जैसे महत्वपूर्ण कोशिकांग अनुपस्थित होते हैं। राइबोसोम उपस्थित होते हैं, लेकिन छोटे होते हैं।
- आकार: आमतौर पर छोटे (1-10 \(\mu m\))।
- उदाहरण: जीवाणु (बैक्टीरिया), नील-हरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया)। [IMAGE: cg_c8_science_ch07_t11_scene2]
- यूकैरियॉटिक कोशिकाएँ (Eukaryotic Cells):
- अर्थ: 'यू' का अर्थ 'सत्य' और 'कैरियॉन' का अर्थ 'केन्द्रक' है, यानी 'सत्य केन्द्रक' वाली कोशिकाएँ।
- केन्द्रक: सुविकसित केन्द्रक उपस्थित होता है, जो केन्द्रक झिल्ली से घिरा होता है।
- आनुवंशिक पदार्थ (DNA): केन्द्रक के अंदर गुणसूत्रों के रूप में व्यवस्थित होता है।
- केन्द्रिका: उपस्थित।
- झिल्ली-बद्ध कोशिकांग: माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय, अन्तःप्रद्रव्यी जालिका, लाइसोसोम, रिक्तिकाएँ, हरितलवक (पादपों में) आदि सभी महत्वपूर्ण कोशिकांग उपस्थित होते हैं।
- आकार: आमतौर पर बड़े (10-100 \(\mu m\))।
- उदाहरण: अमीबा, केंचुआ, मेंढक, गाय, गुलाब, मनुष्य आदि अधिकांश जीव।
प्रोकैरियॉटिक और यूकैरियॉटिक कोशिकाओं में अंतर (सारांश): | विशेषता | प्रोकैरियॉटिक कोशिका | यूकैरियॉटिक कोशिका | |---|---|---| | केन्द्रक | अस्पष्ट, केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित | सुस्पष्ट, केन्द्रक झिल्ली उपस्थित | | आनुवंशिक पदार्थ | कोशिका द्रव्य में बिखरा (न्यूक्लियोइड) | केन्द्रक के अंदर गुणसूत्रों में | | केन्द्रिका | अनुपस्थित | उपस्थित | | झिल्ली-बद्ध कोशिकांग | अनुपस्थित (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय) | उपस्थित | | राइबोसोम | छोटे (70S प्रकार) | बड़े (80S प्रकार) | | कोशिका भित्ति | पेप्टिडोग्लाइकन की बनी (जीवाणु में) | सेलुलोज की बनी (पादप में), जंतु में अनुपस्थित | | आकार | छोटा (1-10 \(\mu m\)) | बड़ा (10-100 \(\mu m\)) | | उदाहरण | जीवाणु, नील-हरित शैवाल | पौधे, जंतु, कवक, प्रोटिस्ट |
प्रोकैरियॉटिक और यूकैरियॉटिक कोशिकाओं के बीच अंतर बोर्ड परीक्षाओं में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसे तालिका के रूप में याद करें।