ऊर्जा के स्रोत
यह अध्याय छात्रों को ऊर्जा के विभिन्न रूपों और उनके स्रोतों से परिचित कराता है। इसमें जल विद्युत, ज्वारीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, तापीय ऊर्जा, नाभिकीय ऊर्जा, जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बायोगैस) और सौर ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोतों की विस्तृत जानकारी दी गई है। छात्र सीखेंगे कि ये ऊर्जा स्रोत कैसे कार्य करते हैं, उनके लाभ और हानियाँ क्या हैं, और नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बीच अंतर को समझेंगे। यह अध्याय ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डालता है।
ऊर्जा (Energy)
ऊर्जा की आवश्यकता और रूप
- ऊर्जा वह क्षमता है जिससे कोई कार्य किया जा सकता है।
- हमारे शरीर को जीवित रहने और दैनिक गतिविधियों (चलना, दौड़ना, उठाना) के लिए ऊर्जा की निरंतर आवश्यकता होती है।
- यह ऊर्जा हमें भोजन से प्राप्त होती है, जो शरीर में रासायनिक ऊर्जा के रूप में संग्रहित होती है।
- मशीनों और सभी सजीवों को भी कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
ऊर्जा के विभिन्न रूप
- रासायनिक ऊर्जा: भोजन, ईंधन, बैटरी में संग्रहित।
- विद्युत ऊर्जा: बिजली के उपकरणों को चलाती है।
- ध्वनि ऊर्जा: कंपन से उत्पन्न होती है।
- प्रकाश ऊर्जा: सूर्य, बल्ब, आग से निकलती है।
- ऊष्मीय ऊर्जा: गर्मी के रूप में (आग, हीटर)।
ऊर्जा का रूपांतरण और संरक्षण
- ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित किया जा सकता है।
- उदाहरण:
- टॉर्च: रासायनिक ऊर्जा (बैटरी) → विद्युत ऊर्जा → प्रकाश ऊर्जा + ऊष्मीय ऊर्जा।
- पंखे: विद्युत ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा।
- दैनिक जीवन में उपयोग: खाना बनाना, वाहन चलाना, बिजली पैदा करना।
ऊर्जा के बिना कोई भी गतिविधि संभव नहीं है।
ऊर्जा वह क्षमता है जिससे कार्य किया जा सकता है। यह विभिन्न रूपों में मौजूद होती है और एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है।
जल विद्युत ऊर्जा (Hydroelectrical Energy)
जल विद्युत ऊर्जा क्या है?
- जल विद्युत ऊर्जा बहते या गिरते पानी की गतिज ऊर्जा का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करती है।
- यह ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत है क्योंकि यह पानी के प्राकृतिक जलचक्र पर निर्भर करती है।
जल विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया
- पानी का संग्रह: एक ऊँचाई पर बाँध बनाकर पानी को रोका जाता है (जलाशय)।
- पानी का प्रवाह: नियंत्रित तरीके से पानी को बाँध से टरबाइन की ओर छोड़ा जाता है।
- टरबाइन का घूमना: पानी की गतिज ऊर्जा टरबाइन के ब्लेडों को घुमाती है।
- विद्युत उत्पादन: टरबाइन एक शाफ्ट के माध्यम से जनरेटर से जुड़ा होता है। जनरेटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- वितरण: उत्पन्न विद्युत ऊर्जा को ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से घरों और उद्योगों तक पहुँचाया जाता है।
लाभ
- नवीकरणीय स्रोत: पानी का प्राकृतिक जलचक्र इसे लगातार उपलब्ध कराता है।
- कम परिचालन लागत: एक बार संयंत्र स्थापित होने के बाद, बिजली उत्पादन की लागत कम होती है।
- प्रदूषण रहित: जीवाश्म ईंधन के विपरीत, यह वायु प्रदूषण या ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करता।
- बहुउद्देशीय: बाँधों का उपयोग बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए भी किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में जल विद्युत
- छत्तीसगढ़ में जल विद्युत उत्पादन हेतु हसदेव बाँगो तथा गंगरेल बाँध परियोजनाएँ क्रियाशील हैं।
जल विद्युत ऊर्जा बहते या गिरते पानी की गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया है।
जल विद्युत एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy)
ज्वारीय ऊर्जा क्या है?
- ज्वार-भाटा: समुद्र में चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होने वाले जल स्तर के आवधिक उतार-चढ़ाव।
- ज्वार: समुद्र का जल स्तर बढ़ता है।
- भाटा: समुद्र का जल स्तर गिरता है।
- इस गतिशील जल में निहित गतिज ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है।
- यह भी ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत है।
ज्वारीय विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया
- बाँध निर्माण: समुद्र की खाड़ी के मुहाने पर एक विशेष प्रकार का बाँध बनाया जाता है जिसमें बड़े-बड़े द्वार होते हैं।
- ज्वार के समय उत्पादन:
- जब ज्वार आता है, जल स्तर बढ़ता है और द्वार खुल जाते हैं।
- समुद्र का पानी तेजी से बाँध के अंदर आता है।
- पानी का यह प्रवाह टरबाइनों को घुमाता है, जो जनरेटर से जुड़ी होती हैं और विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती हैं।
- भाटा के समय उत्पादन:
- जब भाटा आता है, जल स्तर गिर जाता है।
- बाँध में जमा हुआ पानी ऊँचे स्तर से नीचे के स्तर की ओर तेजी से बाहर निकलता है।
- पानी का यह बहिर्प्रवाह भी टरबाइनों को घुमाता है, जिससे विद्युत ऊर्जा का उत्पादन होता है।
भारत में ज्वारीय ऊर्जा के क्षेत्र
- भारत में ज्वारीय ऊर्जा के उत्पादन की महत्वपूर्ण क्षमता है।
- प्रमुख संभावित क्षेत्र:
- गुजरात में कच्छ की खाड़ी।
- पश्चिम बंगाल के सुंदरबन सहित पूर्वी समुद्र तटीय क्षेत्र।
- इन क्षेत्रों में उच्च ज्वार-भाटा रेंज विद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है।
ज्वारीय ऊर्जा संयंत्र ज्वार और भाटा दोनों ही स्थितियों में विद्युत उत्पादन कर सकते हैं, जिससे यह अधिक कुशल बनती है।
पवन ऊर्जा (Wind Energy)
पवन ऊर्जा क्या है?
- तेज बहती हवा में निहित गतिज ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं।
- प्राचीन काल से ही हवा की शक्ति का उपयोग पाल नौकाओं और पवन चक्कियों में किया जाता रहा है।
- यह ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत है।
पवन ऊर्जा से विद्युत उत्पादन
- पवन चक्कियाँ (विंड मिल): जिन स्थानों पर हवा की गति और दिशा लगभग स्थिर रहती है, वहाँ बड़ी-बड़ी पवन चक्कियाँ स्थापित की जाती हैं।
- ब्लेडों का घूमना: हवा के बल से पवन चक्की के बड़े-बड़े ब्लेड घूमते हैं।
- विद्युत उत्पादन: यह घूर्णन गति एक जनरेटर (विद्युत जनित्र) तक पहुँचती है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- उपयोग: उत्पन्न विद्युत ऊर्जा का उपयोग घरों और उद्योगों में किया जाता है।
विंड फार्म
- विंड फार्म ऐसे बड़े क्षेत्र होते हैं जहाँ विद्युत उत्पादन के लिए कई पवन चक्कियों को एक साथ स्थापित किया जाता है।
भारत में पवन ऊर्जा के क्षेत्र
- भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन के लिए उपयुक्त क्षेत्र:
- गुजरात
- राजस्थान
- पश्चिमी मध्य प्रदेश
- दक्षिणी तमिलनाडु
- समुद्र तटीय क्षेत्र
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के द्वीप
- कर्नाटक के कुछ भाग
- इन क्षेत्रों में वर्ष भर तेज और स्थिर हवाएँ चलती हैं, जो पवन चक्कियों को कुशलतापूर्वक चलाने के लिए आवश्यक हैं।
पवन ऊर्जा बहती हवा की गतिज ऊर्जा का उपयोग करके विद्युत उत्पादन करने की प्रक्रिया है।
पवन ऊर्जा भी एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
तापीय ऊर्जा (Steam Energy)
तापीय ऊर्जा क्या है?
- तापीय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो ईंधन को जलाकर ऊष्मा के रूप में प्राप्त की जाती है।
- इस ऊष्मीय ऊर्जा का उपयोग पानी को गर्म करके भाप बनाने और फिर विद्युत उत्पन्न करने में किया जाता है।
ताप विद्युतगृह में विद्युत उत्पादन
- ईंधन का दहन: ताप विद्युतगृह में, कोयला (या अन्य जीवाश्म ईंधन) को प्राथमिक ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इसे बायलर नामक विशाल भट्टियों में जलाया जाता है, जिससे अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- भाप का निर्माण: इस ऊष्मा का उपयोग पानी को गर्म करके उच्च दबाव वाली भाप बनाने के लिए किया जाता है।
- टरबाइन का घूमना: यह भाप, उच्च गति और दबाव के साथ, टरबाइन के ब्लेडों से टकराती है और उन्हें घुमाती है।
- विद्युत उत्पादन: टरबाइन एक जनित्र (जनरेटर) से जुड़ा होता है। जब टरबाइन घूमता है, तो जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- ऊर्जा रूपांतरण: इस प्रकार, तापीय ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा और फिर विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
छत्तीसगढ़ में ताप विद्युतगृह
- छत्तीसगढ़ राज्य भारत में कोयला उत्पादन के प्रमुख राज्यों में से एक है।
- इस प्रचुर कोयला संसाधन का उपयोग करके, कोरबा जिले में कई बड़े ताप विद्युतगृह स्थापित किए गए हैं।
- ये विद्युतगृह न केवल छत्तीसगढ़ की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
भाप की शक्ति का प्रदर्शन
- चाय की केतली में पानी गर्म करने पर भाप निकलती है।
- यह भाप अपने अंदर बहुत अधिक ऊष्मीय ऊर्जा समाहित रखती है।
- उच्च दबाव वाली भाप जब चकरी के पंखों से टकराती है, तो वह पंखों को घुमा देती है, यह दर्शाता है कि भाप में गतिज ऊर्जा होती है जिसे यांत्रिक कार्य में बदला जा सकता है।
ताप विद्युतगृह ऐसे संयंत्र हैं जहाँ कोयला जैसे ईंधन को जलाकर ऊष्मा उत्पन्न की जाती है, जिससे भाप बनती है और टरबाइन घुमाकर बिजली पैदा की जाती है।
ताप विद्युतगृह में कोयला जलाने से वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है।
नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)
नाभिकीय ऊर्जा क्या है?
- नाभिकीय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो परमाणु के नाभिक में संग्रहित होती है।
- यह ऊर्जा आइंस्टीन के प्रसिद्ध समीकरण \(E=mc^2\) के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ द्रव्यमान का एक छोटा-सा हिस्सा भी बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा में परिवर्तित हो सकता है।
नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया
- विखंडन: एक भारी परमाणु का नाभिक (जैसे यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239) न्यूट्रॉन द्वारा टकराने पर दो या दो से अधिक छोटे नाभिकों में टूट जाता है।
- ऊर्जा मुक्ति: इस प्रक्रिया में, द्रव्यमान का एक छोटा-सा हिस्सा ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।
- श्रृंखला अभिक्रिया: साथ ही कुछ और न्यूट्रॉन भी मुक्त होते हैं। ये मुक्त न्यूट्रॉन अन्य भारी नाभिकों से टकराकर एक श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction) शुरू कर सकते हैं, जिससे लगातार ऊर्जा का उत्पादन होता रहता है।
नाभिकीय रिएक्टर में विद्युत उत्पादन
- नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया: नाभिकीय रिएक्टर वे विशेष संयंत्र होते हैं जहाँ नाभिकीय विखंडन की नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया कराई जाती है।
- ऊष्मा उत्पादन: इस अभिक्रिया से उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा का उपयोग पानी को भाप में बदलने के लिए किया जाता है।
- विद्युत उत्पादन: यह भाप टर्बाइनों को घुमाती है, जिससे जनरेटर चलते हैं और विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
भारत में नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र
- भारत नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
- प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र:
- तारापुर (भारत का पूर्णतः स्वदेशी नाभिकीय रिएक्टर)
- कलपक्कम
- कोटा
- नरोरा
सुरक्षा और चुनौतियाँ
- नाभिकीय रिएक्टरों में सुरक्षा के कड़े उपाय होते हैं ताकि रेडियोधर्मी पदार्थों का रिसाव न हो।
- रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित निपटान एक बड़ी चुनौती है।
नाभिकीय ऊर्जा परमाणु के नाभिक में संग्रहित ऊर्जा है, जो विखंडन या संलयन से मुक्त होती है।
नाभिकीय ऊर्जा से अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है, लेकिन इसके साथ रेडियोधर्मी कचरे के निपटान की चुनौती भी जुड़ी है।
जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels)
ईंधन क्या हैं?
- ईंधन: वे पदार्थ जो जलने पर ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा देते हैं।
- उदाहरण: कोयला, लकड़ी, रसोई गैस (एल.पी.जी.), पेट्रोल, डीजल, किरोसिन।
जीवाश्म ईंधन का निर्माण
- परिभाषा: जीवाश्म ईंधन वे ईंधन हैं जो लाखों वर्षों पहले पृथ्वी के नीचे दबे हुए मृत पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के अवशेषों से बनते हैं।
- प्रक्रिया:
- प्राचीन पेड़-पौधे और समुद्री जीव पृथ्वी के अंदर दब गए।
- उन पर मिट्टी और चट्टानों की परतें जमा होती गईं।
- अत्यधिक दाब और उच्च तापमान के कारण, वायु की अनुपस्थिति में, ये जैविक पदार्थ धीरे-धीरे रासायनिक रूप से परिवर्तित होकर जीवाश्म ईंधन में बदल गए।
- इस प्रक्रिया में लाखों वर्ष लगते हैं।
- जीवाश्म: मृत जन्तुओं और वृक्षों की उन संरचनाओं के लिए उपयोग होता है जिन्हें प्रकृति ने हजारों वर्षों से सुरक्षित रखा है।
जीवाश्म ईंधन के प्रकार
1. कोयला
- मुख्य रूप से मृत पेड़-पौधों के अवशेषों से बनता है।
- जलाने पर ऊष्मा और प्रकाश ऊर्जा देता है।
- ताप विद्युतगृहों में विद्युत उत्पादन के लिए उपयोग होता है।
2. पेट्रोलियम
- मुख्य रूप से मृत समुद्री जीवों के अवशेषों से बनता है।
- जमीन के अंदर चट्टानों के बीच दबा हुआ होता है।
- निष्कर्षण: कुआँ खोद कर पंपों के माध्यम से निकाला जाता है।
- परिशोधन (रिफाइनिंग): जमीन से निकाले गए द्रव पेट्रोलियम को सीधे उपयोग नहीं किया जाता। इसे परिष्करण शाला (रिफायनरी) में भेजा जाता है, जहाँ इसे पृथक करने की प्रक्रिया में बहुत से उपयोगी पदार्थ प्राप्त होते हैं।
- पेट्रोलियम के उत्पाद: पेट्रोल, डीजल, किरोसिन, तथा पेट्रोलियम गैस (LPG)।
3. प्राकृतिक गैस
- पेट्रोलियम द्रव जिन कुओं से प्राप्त होता है, उनमें प्राकृतिक गैस भी होती है।
- मुख्य घटक: मुख्यतः मीथेन गैस होती है।
- गुण: आसानी से जल कर ऊष्मा प्रदान करती है।
- उपयोग:
- सी.एन.जी. (Compressed Natural Gas): इस गैस को संपीडित कर वाहन चलाने में उपयोग किया जाता है। यह सामान्य वाहनों की तुलना में अत्यंत न्यून वायु प्रदूषण करती है।
- घरों में ईंधन के रूप में।
4. रसोई गैस (एल.पी.जी. - Liquified Petroleum Gas)
- यह पेट्रोलियम गैस का द्रवित रूप है।
- मुख्य घटक: मुख्यतः ब्यूटेन पाई जाती है। इसमें प्रोपेन तथा एथेन भी होती हैं। ये सभी हाइड्रोकार्बन गैसें हैं।
- भंडारण: इसे द्रवित करके सिलेण्डरों में भर दिया जाता है।
- सुरक्षा: एल.पी.जी. एक गंधहीन गैस है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से इसमें एक तीव्र गंध वाली गैस (जैसे एथिल मर्कैप्टन) मिलाई जाती है, जिससे गैस रिसने पर पता चल जाता है।
बायो गैस (Biogas)
- उत्पादन: पशुओं के गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों को पानी के साथ मिलाकर एक घोल बनाया जाता है। इस घोल को एक वायुरोधी टैंक (बायो गैस डाइजेस्टर) में डाला जाता है। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में, बैक्टीरिया जैविक पदार्थों को तोड़ते हैं।
- घटक: मुख्य रूप से मीथेन (लगभग 50-75%) और कार्बन डाइऑक्साइड (लगभग 25-50%) गैसें उत्पन्न होती हैं।
- उपयोग:
- एल.पी.जी. की तरह भोजन पकाने में।
- प्रकाश उत्पन्न करने में।
- गैस निकलने के बाद बचा अपशिष्ट पदार्थ (स्लरी) खाद की तरह उपयोग में लाया जाता है।
- इसके उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता।
- लाभ: नवीकरणीय, पर्यावरण-अनुकूल, वायु प्रदूषण कम करता है, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकता है, अपशिष्ट प्रबंधन में सहायक।
बायो डीजल
- नवीनतम ऊर्जा स्रोत जो तेजी से अपनाया जा रहा है।
- रतनजोत नामक पौधे के बीजों से निकाला गया तेल है।
- इसे पेट्रोल तथा डीजल के साथ मिलाकर भी उपयोग किया जा सकता है।
- छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल प्राधिकरण द्वारा रतनजोत का रोपण कर बायो डीजल प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जीवाश्म ईंधन लाखों वर्षों में मृत पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के अवशेषों से बने ईंधन हैं (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस)।
जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय स्रोत हैं क्योंकि इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं और ये सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।
सी.एन.जी. और एल.पी.जी. के मुख्य घटकों (मीथेन और ब्यूटेन) को याद रखें।
सौर ऊर्जा (Solar Energy)
सौर ऊर्जा क्या है?
- सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा जो प्रकाश और ऊष्मा के रूप में होती है, सौर ऊर्जा कहलाती है।
- यह ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत है जो कभी समाप्त नहीं होता।
ऊष्मा अवशोषण का सिद्धांत
- काली सतहें ऊष्मा की अच्छी अवशोषक होती हैं। जब सूर्य का प्रकाश काली सतह पर पड़ता है, तो वह प्रकाश ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित करके अवशोषित कर लेती है।
- काँच का ढक्कन या ऊष्मारोधी सामग्री का उपयोग अवशोषित ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकने के लिए किया जाता है, जिससे अंदर का तापमान बढ़ सके।
सौर ऊर्जा के अनुप्रयोग
1. सोलर कुकर
- बनावट:
- धातु का एक बड़ा डिब्बा जिसकी भीतरी दीवारें काले रंग की होती हैं (ऊष्मा अवशोषण के लिए)।
- ऊपरी ढक्कन पर एक समतल दर्पण लगा होता है जो सूर्य के प्रकाश को डिब्बे के भीतरी हिस्से में केंद्रित करता है।
- डिब्बे के ऊपर एक काँच का ढक्कन होता है जो अंदर की ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकता है (ग्रीनहाउस प्रभाव)।
- डिब्बे के अंदर धातु के बर्तन रखे होते हैं, जिनकी बाहरी सतह भी काले रंग की होती है।
- कार्यप्रणाली: सूर्य का प्रकाश दर्पण से परावर्तित होकर डिब्बे के अंदर केंद्रित होता है। काली सतहें ऊष्मा को अवशोषित करती हैं, और काँच का ढक्कन ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकता है, जिससे डिब्बे के अंदर का तापमान बढ़ जाता है और भोजन पक जाता है।
2. सौर जल ऊष्मक (Solar Water Heater)
- बनावट:
- एक ऊष्मारोधी बॉक्स जिसमें तांबे की लंबी, काली रंग की नलियाँ लगी होती हैं।
- तांबे की नलियाँ ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं और काला रंग ऊष्मा का अच्छा अवशोषक होता है।
- कार्यप्रणाली: जब पानी इन नलियों से गुजरता है, तो काली सतह सूर्य की ऊष्मा को अवशोषित करती है और पानी गर्म हो जाता है। गर्म पानी को फिर एक संग्रह टंकी में जमा कर लिया जाता है। ठंडा पानी नलियों में प्रवेश करता रहता है, जिससे लगातार गर्म पानी उपलब्ध होता है।
3. सौर सेल (Solar Cell)
- बनावट: सौर सेल सिलिकॉन के बने होते हैं।
- कार्यप्रणाली: ये सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करते हैं (प्रकाश-विद्युत प्रभाव)।
- उपयोग:
- घरों और उद्योगों में बिजली उत्पादन।
- सौर बैटरी में ऊर्जा संग्रह (वाहन और मशीनें चलाने के लिए)।
- सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहन और उपकरण।
सौर ऊर्जा के लाभ
- नवीकरणीय: कभी समाप्त न होने वाला स्रोत।
- पर्यावरण-अनुकूल: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है, वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटता है।
- विकेंद्रीकृत: दूरदराज के क्षेत्रों में भी बिजली उपलब्ध करा सकता है।
सोलर कुकर और सौर जल ऊष्मक दोनों ही काली सतहों द्वारा ऊष्मा अवशोषण और काँच के ढक्कन द्वारा ऊष्मा को अंदर रोकने के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
सौर सेल सिलिकॉन के बने होते हैं और सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं।
ऊर्जा का प्रमुख स्रोत कौन?
सूर्य: ऊर्जा का प्रमुख स्रोत
- पृथ्वी पर अधिकांश ऊर्जा स्रोत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य की ऊर्जा से ही उत्पन्न होते हैं।
- उदाहरण:
- पौधे: प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अपना भोजन बनाते हैं। बायोडीजल भी इसी प्रक्रिया का परिणाम है।
- जल चक्र: सूर्य की ऊष्मा से पृथ्वी पर स्थित जल वाष्पीकृत होकर बादल बनाता है। बादलों से वर्षा होती है, नदियों को जल मिलता है, जिसका उपयोग जल विद्युत उत्पादन में होता है।
- पवन ऊर्जा: सूर्य की ऊर्जा से पृथ्वी के जल तथा स्थल भाग असमान रूप से गर्म होते हैं, जिससे वातावरण में संवहनी धाराएं उत्पन्न होती हैं, जिन्हें पवन कहते हैं।
- जीवाश्म ईंधन: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस मृत पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के अवशेष हैं, जो लाखों वर्ष पहले सूर्य की ऊर्जा का ही बदला हुआ रूप थे।
- इस प्रकार, सूर्य ही हमारे लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का अंतिम स्रोत है, क्योंकि लगभग सभी ऊर्जा स्रोत (नवीकरणीय और अनवीकरणीय) अंततः सूर्य से ही अपनी ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
ऊर्जा संरक्षण और संतुलित उपयोग
ऊर्जा की बढ़ती खपत
- आधुनिक जीवनशैली में ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ रही है।
- उदाहरण:
- घरों में: बल्ब, ट्यूबलाइट, पंखे, फ्रिज, कूलर, एयर कंडीशनर।
- शहरों में: सड़कों पर प्रकाश व्यवस्था।
- परिवहन में: कार, बस, ट्रेन, हवाई जहाज (जीवाश्म ईंधन)।
- कृषि में: पंप, ट्रैक्टर और अन्य मशीनें।
- उद्योगों में: उत्पादन प्रक्रिया के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा।
- विभिन्न ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा भी हमारी बढ़ती आवश्यकताओं के लिए कम पड़ती जा रही है।
ऊर्जा बचाने के उपाय
- वाहन:
- नियमित रखरखाव और सही टायर दबाव।
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें या पैदल चलें।
- अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें।
- बिजली:
- उपकरणों का उपयोग न होने पर उन्हें बंद कर दें।
- ऊर्जा-कुशल उपकरणों (जैसे सीएफएल/एलईडी बल्ब) का उपयोग करें।
- खाना पकाने:
- प्रेशर कुकर का उपयोग करें।
- बर्तनों को ढककर पकाएँ।
- सौर ऊर्जा का उपयोग करें (सोलर कुकर)।
- सामान्य:
- ऊर्जा के अपव्यय को रोकें।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दें।
नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
| विशेषताएँ | नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत | अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत | |---|---|---| | उपलब्धता | प्रकृति में असीमित मात्रा में उपलब्ध या लगातार बनते रहते हैं। | सीमित मात्रा में उपलब्ध, बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। | | समाप्ति | समाप्त नहीं होते। | एक बार उपयोग होने के बाद समाप्त हो सकते हैं। | | पर्यावरण प्रभाव | प्रदूषण रहित या बहुत कम प्रदूषण। | वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं। | | उदाहरण | सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा। | कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, नाभिकीय ऊर्जा (यूरेनियम)। |
उपलब्ध ऊर्जा का संतुलित उपयोग करना आवश्यक है ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी ऊर्जा उपलब्ध रहे।
नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बीच अंतर और उनके उदाहरण बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं।
ऊर्जा संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।