घर्षण
अध्याय 'घर्षण' बल के एक महत्वपूर्ण प्रकार, घर्षण बल की अवधारणा का परिचय देता है। छात्र सीखते हैं कि घर्षण कैसे उत्पन्न होता है, इसे कौन से कारक प्रभावित करते हैं, और यह दैनिक जीवन में कैसे उपयोगी और हानिकारक दोनों है। इसमें स्थैतिक, सर्पी और लोटनिक घर्षण के प्रकारों के साथ-साथ घर्षण को बढ़ाने और घटाने के तरीकों पर भी चर्चा की गई है। तरल घर्षण और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बारे में भी जानकारी दी गई है।
घर्षण बल
घर्षण बल एक ऐसा बल है जो दो संपर्क में आई हुई सतहों के बीच की सापेक्ष गति का विरोध करता है।
- परिभाषा: जब कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु की सतह पर गति करती है या गति करने का प्रयास करती है, तो संपर्क सतहों के बीच एक बल उत्पन्न होता है जो गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है। इसी बल को घर्षण बल कहते हैं।
- दिशा: घर्षण बल हमेशा वस्तु की गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है।
- उदाहरण: यदि पुस्तक को दाईं ओर धकेला जाए, तो घर्षण बल बाईं ओर लगेगा।
- प्रभाव: यह बल गतिमान वस्तु की चाल को धीमा कर देता है या उसे रोक देता है।
- उदाहरण: फर्श पर लुढ़कती गेंद का रुक जाना, ब्रेक लगाने पर साइकिल का धीमा होना।
- कारण: घर्षण का मुख्य कारण संपर्क में आने वाले पृष्ठों की अनियमितताएँ हैं। सूक्ष्म स्तर पर, कोई भी सतह पूरी तरह से चिकनी नहीं होती। इन अनियमितताओं के आपस में फँसने (अंतःबंधन) के कारण घर्षण उत्पन्न होता है।
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घर्षण बल (Frictional Force): वह बल जो दो संपर्क सतहों के बीच सापेक्ष गति का विरोध करता है और हमेशा गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है।
क्या घर्षण बल संपर्क बल है ?
- संपर्क बल: वे बल जो तभी कार्य करते हैं जब दो वस्तुएँ एक-दूसरे के भौतिक संपर्क में हों।
- उदाहरण: पेशीय बल (मांसपेशियों द्वारा लगाया गया बल), घर्षण बल।
- घर्षण बल एक संपर्क बल है:
- घर्षण बल तभी उत्पन्न होता है जब दो सतहें एक-दूसरे के सीधे संपर्क में हों।
- यह संपर्क में आने वाली सतहों के बीच ही कार्य करता है।
- क्रियाकलाप 1 का निष्कर्ष: पुस्तक और मेज के बीच घर्षण बल तभी लगता है जब वे एक-दूसरे को छूते हैं।
- असंपर्क बल: वे बल जो वस्तुओं के संपर्क में आए बिना भी कार्य करते हैं।
- उदाहरण:
- चुंबकीय बल: चुंबक द्वारा लोहे पर लगाया गया बल।
- स्थिरवैद्युत बल: आवेशित वस्तु द्वारा दूसरी आवेशित या अनावेशित वस्तु पर लगाया गया बल।
- गुरुत्वाकर्षण बल: पृथ्वी द्वारा वस्तुओं पर लगाया गया आकर्षण बल।
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घर्षण बल एक संपर्क बल है। यह तभी कार्य करता है जब दो सतहें एक-दूसरे के सीधे संपर्क में हों।
घर्षण को प्रभावित करने वाले कारक
घर्षण बल मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करता है:
- संपर्क में आने वाले पृष्ठों की प्रकृति (चिकनापन या खुरदुरापन):
- कारण: सभी सतहों पर सूक्ष्म अनियमितताएँ होती हैं। ये अनियमितताएँ एक-दूसरे में फँस जाती हैं, जिससे गति का विरोध होता है।
- खुरदुरे पृष्ठ: अधिक अनियमितताएँ होती हैं, इसलिए अधिक घर्षण उत्पन्न होता है।
- चिकने पृष्ठ: कम अनियमितताएँ होती हैं, इसलिए कम घर्षण उत्पन्न होता है।
- क्रियाकलाप 2 का निष्कर्ष: पेंसिल सेल चिकने फर्श पर अधिक दूरी तय करता है, जबकि खुरदुरे कपड़े या रेत पर कम दूरी तय करता है। यह दर्शाता है कि सतह जितनी खुरदरी होगी, घर्षण उतना ही अधिक होगा।
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- [IMAGE: cg_c8_science_ch14_chapter_hero] (चित्र में सतहों की अनियमितताएँ देखें)
- वस्तुओं को एक-दूसरे के साथ दबाने का बल (अभिलंब बल):
- जब दो पृष्ठों को बलपूर्वक दबाया जाता है, तो उनकी अनियमितताएँ और गहराई तक एक-दूसरे में फँस जाती हैं।
- इससे अंतःबंधन बढ़ जाता है और घर्षण बल में वृद्धि होती है।
- उदाहरण: किसी चटाई को बिना व्यक्ति के खींचना आसान होता है, जबकि व्यक्ति के बैठे होने पर खींचना कठिन होता है क्योंकि व्यक्ति का भार चटाई और फर्श के बीच दबाने वाले बल को बढ़ा देता है।
घर्षण के प्रकार
- स्थैतिक घर्षण (Static Friction):
- यह घर्षण तब कार्य करता है जब कोई वस्तु विराम अवस्था में हो और उस पर गति उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा हो।
- यह वह अधिकतम घर्षण बल है जिसे वस्तु गति आरंभ करने से पहले अनुभव करती है।
- किसी रुकी हुई वस्तु को गति में लाने के लिए इस घर्षण पर काबू पाना पड़ता है।
- सर्पी घर्षण (Sliding Friction):
- यह घर्षण तब कार्य करता है जब कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु की सतह पर फिसलती है।
- सर्पी घर्षण का मान स्थैतिक घर्षण से कम होता है।
- कारण: जब कोई वस्तु फिसलती है, तो संपर्क बिंदुओं को एक-दूसरे में पूरी तरह से फँसने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
- निष्कर्ष: किसी रुकी हुई भारी वस्तु को गति में लाना (स्थैतिक घर्षण पर काबू पाना) उसे गतिशील अवस्था में सरकाने (सर्पी घर्षण पर काबू पाना) से अधिक कठिन होता है।
- लोटनिक घर्षण (Rolling Friction):
- यह घर्षण तब कार्य करता है जब कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु की सतह पर लुढ़कती है।
- लोटनिक घर्षण का मान सर्पी घर्षण से बहुत कम होता है।
- उदाहरण: पहिए, बॉल बेयरिंग।
- यह घर्षण को काफी कम कर देता है, जिससे भारी वस्तुओं को स्थानांतरित करना आसान हो जाता है।
| घर्षण का प्रकार | परिभाषा | उदाहरण | मान | |:---------------|:-------|:-------|:----| | स्थैतिक घर्षण | जब वस्तु विराम में हो और गति करने का प्रयास कर रही हो | किसी भारी बक्से को खिसकाना शुरू करना | अधिकतम | | सर्पी घर्षण | जब वस्तु किसी सतह पर फिसल रही हो | बक्से को खिसकाते रहना | स्थैतिक से कम | | लोटनिक घर्षण | जब वस्तु किसी सतह पर लुढ़क रही हो | पहिए, बॉल बेयरिंग | सबसे कम |
क्रम: स्थैतिक घर्षण > सर्पी घर्षण > लोटनिक घर्षण
घर्षण को प्रभावित करने वाले कारक (सतहों की प्रकृति और दबाने का बल) और घर्षण के तीनों प्रकारों (स्थैतिक, सर्पी, लोटनिक) के बीच का अंतर बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। इन्हें उदाहरणों सहित याद रखें।
घर्षणः हानिकारक किंतु आवश्यक
घर्षण हमारे दैनिक जीवन में मित्र और शत्रु दोनों की भूमिका निभाता है।
घर्षण के लाभ (आवश्यकताएँ):
घर्षण के बिना हमारा जीवन असंभव हो जाएगा। यह कई महत्वपूर्ण कार्यों में सहायक है:
- चलना और दौड़ना: हमारे पैरों और जमीन के बीच घर्षण के कारण ही हम चल पाते हैं, दौड़ पाते हैं और फिसलते नहीं हैं।
- वाहन की गति:
- टायरों और सड़क के बीच घर्षण के कारण ही वाहन गति आरंभ कर पाते हैं, रुक पाते हैं और दिशा बदल पाते हैं।
- ब्रेक लगाने पर घर्षण के कारण ही वाहन रुकते हैं।
- लिखना: पेन/पेंसिल और कागज के बीच घर्षण के कारण ही हम लिख पाते हैं। चॉक और ब्लैकबोर्ड के बीच घर्षण से चॉक के कण ब्लैकबोर्ड पर चिपकते हैं।
- वस्तुओं को पकड़ना: घर्षण के कारण ही हम वस्तुओं को आसानी से पकड़ पाते हैं (जैसे कुल्हड़ को पकड़ना आसान है क्योंकि वह खुरदुरा होता है)।
- माचिस जलाना: माचिस की तीली को रगड़ने पर घर्षण से उत्पन्न ऊष्मा के कारण ही वह आग पकड़ती है।
- गाँठ बाँधना: धागे में गाँठ बाँधने या दीवार में कील ठोकने के लिए घर्षण आवश्यक है।
- निर्माण कार्य: इमारतों का निर्माण घर्षण के बिना संभव नहीं है।
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घर्षण की हानियाँ:
घर्षण के कुछ हानिकारक प्रभाव भी होते हैं, जिनसे ऊर्जा की बर्बादी और टूट-फूट होती है:
- घिसावट (Wear and Tear): घर्षण के कारण वस्तुओं की सतहें घिस जाती हैं।
- उदाहरण: जूतों के सोल, वाहनों के टायर, मशीनों के पुर्जे (पेंच, बॉल बेयरिंग), सीढ़ियाँ आदि घिसकर खराब हो जाते हैं।
- ऊष्मा का उत्पादन (Heat Generation): घर्षण से ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- उदाहरण: हथेलियों को रगड़ने पर गर्म होना, माचिस की तीली का जलना।
- मशीनों में घर्षण से उत्पन्न ऊष्मा के कारण ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है, जिससे मशीन की दक्षता कम हो जाती है और पुर्जे खराब हो सकते हैं।
- ऊर्जा की हानि: गति बनाए रखने के लिए घर्षण बल के विरुद्ध लगातार कार्य करना पड़ता है, जिससे ऊर्जा का क्षय होता है।
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घर्षण के बिना हम चल नहीं सकते, लिख नहीं सकते, और वाहन चल नहीं सकते। लेकिन यह मशीनों में घिसावट और ऊर्जा की बर्बादी का कारण भी बनता है।
घर्षण को बढ़ाने व घटाने के तरीके
आवश्यकतानुसार घर्षण को बढ़ाया या घटाया जा सकता है।
घर्षण बढ़ाने के तरीके:
जब हमें अधिक पकड़ या नियंत्रण की आवश्यकता होती है, तो घर्षण बढ़ाया जाता है।
- सतहों को खुरदुरा बनाना:
- जूतों के सोल और टायरों में खाँचे: ये खाँचे सड़क या फर्श पर बेहतर पकड़ प्रदान करते हैं, जिससे फिसलने का खतरा कम होता है।
- उदाहरण: कारों, ट्रकों और बुलडोजरों के टायर खाँचेदार होते हैं।
- ब्रेक प्रणाली:
- साइकिल और स्वचालित वाहनों में ब्रेक पैड का उपयोग किया जाता है। ब्रेक लीवर दबाने पर पैड रिम या डिस्क से रगड़ खाते हैं, जिससे घर्षण उत्पन्न होता है और गति रुक जाती है।
- खुरदुरे पदार्थ का उपयोग:
- कबड्डी खिलाड़ी: अपनी हथेलियों पर मिट्टी रगड़ते हैं ताकि प्रतिद्वंद्वी को मजबूती से पकड़ सकें।
- जिमनैस्ट: अच्छी पकड़ बनाने के लिए हथेलियों पर खुरदुरा पदार्थ लगाते हैं।
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घर्षण घटाने के तरीके:
जब गति को सहज बनाना हो या ऊर्जा की बर्बादी कम करनी हो, तो घर्षण घटाया जाता है।
- स्नेहक (Lubricants) का उपयोग:
- परिभाषा: वे पदार्थ जो घर्षण को कम करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, स्नेहक कहलाते हैं।
- उदाहरण: तेल, ग्रीज, ग्रेफाइट।
- कार्यप्रणाली: जब स्नेहक को मशीनों के गतिशील पुर्जों के बीच लगाया जाता है, तो यह एक पतली परत बना देता है। यह परत गतिशील पृष्ठों को सीधे एक-दूसरे के संपर्क में आने से रोकती है। इससे सतहों की अनियमितताओं का अंतःबंधन कम हो जाता है, गति सहज हो जाती है और घिसावट भी कम होती है।
- उदाहरण: दरवाजों के कब्जों में तेल डालना, साइकिल और मोटर के गतिशील भागों में ग्रीज का उपयोग।
- पाउडर का उपयोग:
- उदाहरण: कैरम बोर्ड पर महीन पाउडर छिड़कना घर्षण को कम करता है, जिससे गोटियाँ आसानी से फिसलती हैं।
- पहियों या रोलरों का उपयोग:
- पहिए सर्पी घर्षण को लोटनिक घर्षण में बदल देते हैं, जो बहुत कम होता है।
- उदाहरण: अटैचियों और भारी सामानों में पहिए लगाना।
- बॉल बेयरिंग का उपयोग:
- बॉल बेयरिंग में छोटी-छोटी धातु की गेंदें होती हैं जो पुर्जों के बीच लुढ़कती हैं।
- यह सर्पी घर्षण को लोटनिक घर्षण में परिवर्तित करके घर्षण को काफी कम कर देता है।
- उदाहरण: छत के पंखों, साइकिलों और कारों में।
- वायु की गद्दी (Air Cushion): कुछ विशेष मशीनों में घर्षण कम करने के लिए तेल के बजाय गतिशील पुर्जों के बीच वायु की गद्दी का उपयोग किया जाता है।
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महत्वपूर्ण तथ्य: घर्षण को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि कोई भी सतह पूर्णतः चिकनी नहीं होती। सूक्ष्म स्तर पर हमेशा कुछ अनियमितताएँ मौजूद रहती हैं।
स्नेहक (Lubricants): वे पदार्थ (जैसे तेल, ग्रीज, ग्रेफाइट) जो मशीनों के गतिशील भागों के बीच घर्षण को कम करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
क्या पहिए घर्षण कम कर देते हैं?
- लोटनिक गति (Rolling Motion): जब कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु की सतह पर लुढ़कती है, तो उसकी गति को लोटनिक गति कहते हैं।
- लोटनिक घर्षण (Rolling Friction): लोटनिक गति के प्रतिरोध को लोटनिक घर्षण कहते हैं।
- लोटनिक घर्षण का महत्व:
- लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण से बहुत कम होता है।
- यह घर्षण को काफी कम कर देता है, जिससे भारी वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना आसान हो जाता है।
- उदाहरण: अटैचियों, सूटकेसों और अन्य भारी सामानों पर लगे पहिए या रोलर। रोलर लगी अटैची को खींचना बिना रोलर वाली अटैची को खींचने से आसान होता है।
- बॉल बेयरिंग (Ball Bearings):
- ये छोटी-छोटी धातु की गेंदें होती हैं जो मशीनों के गतिशील पुर्जों (जैसे छत के पंखों, साइकिलों की धुरी और नाभि के बीच) के बीच लगाई जाती हैं।
- बॉल बेयरिंग सर्पी घर्षण को लोटनिक घर्षण में बदल देते हैं, जिससे घर्षण कम हो जाता है और गति सुचारू होती है।
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लोटनिक घर्षण सबसे कम होता है (स्थैतिक > सर्पी > लोटनिक)। यही कारण है कि पहिए और बॉल बेयरिंग घर्षण को कम करने में अत्यधिक प्रभावी होते हैं।
तरल घर्षण
- तरल (Fluids): विज्ञान में, गैसों और द्रवों को सामूहिक रूप से तरल कहा जाता है।
- तरल घर्षण (Fluid Friction) या कर्षण (Drag):
- जब कोई वस्तु किसी तरल (जैसे हवा या पानी) में गति करती है, तो तरल उस वस्तु पर एक घर्षण बल लगाता है।
- इस घर्षण बल को कर्षण (Drag) भी कहते हैं।
- यह बल वस्तु की गति का विरोध करता है।
- कर्षण को प्रभावित करने वाले कारक:
- वस्तु की तरल के सापेक्ष गति: जितनी तेजी से वस्तु तरल में गति करती है, कर्षण उतना ही अधिक होता है।
- वस्तु की आकृति (Shape): वस्तु का आकार कर्षण को बहुत प्रभावित करता है।
- तरल की प्रकृति: तरल जितना गाढ़ा (श्यान) होगा, कर्षण उतना ही अधिक होगा (जैसे पानी की तुलना में शहद में अधिक कर्षण)।
- कर्षण को कम करना क्यों आवश्यक है?
- जब वस्तुएँ तरल में गति करती हैं, तो उन्हें कर्षण बल पर काबू पाना होता है। इस प्रक्रिया में ऊर्जा का क्षय होता है।
- ऊर्जा के इस नुकसान को कम करने के लिए, तरल घर्षण को कम से कम किया जाता है।
- सुव्यवस्थित (Streamlined) आकृति:
- तरल घर्षण को कम करने के लिए गतिमान वस्तुओं (जैसे हवाई जहाज, नाव, जहाज, कार) को विशेष सुव्यवस्थित आकृति दी जाती है।
- यह आकृति तरल को वस्तु के चारों ओर आसानी से बहने देती है, जिससे कर्षण बल कम हो जाता है और ऊर्जा की बचत होती है।
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हवाई जहाज और नावों को 'सुव्यवस्थित' (streamlined) आकार दिया जाता है ताकि तरल घर्षण (कर्षण) को कम किया जा सके और ईंधन की बचत हो।
भूकंपः एक प्राकृतिक परिघटना
- प्राकृतिक आपदाएँ: वे घटनाएँ जो प्रकृति में स्वयं घटित होती हैं और मानव जीवन तथा संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचा सकती हैं।
- उदाहरण: बाढ़, सूखा, तड़ित, भूकंप, आग, तूफान, चक्रवात।
- भूकंप क्या है?
- भूकंप पृथ्वी की सतह पर होने वाला कंपन या झटका है।
- यह पृथ्वी की भूपर्पटी (सबसे बाहरी परत) के भीतर गहराई में होने वाली गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होता है।
- बड़े भूकंप इमारतों, पुलों, बांधों को क्षति पहुँचा सकते हैं और भूस्खलन व सुनामी का कारण बन सकते हैं।
- भूकंप क्यों आते हैं?
- टेक्टोनिक प्लेटें: पृथ्वी की भूपर्पटी कई विशाल टुकड़ों में विभाजित है जिन्हें टेक्टोनिक प्लेटें कहते हैं। ये प्लेटें पृथ्वी के पिघले हुए आंतरिक भाग पर धीरे-धीरे गति करती रहती हैं।
- प्लेटों की गति: जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, रगड़ खाती हैं, या एक-दूसरे के नीचे खिसक जाती हैं, तो भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।
- यह ऊर्जा तरंगों के रूप में पृथ्वी में फैलती है, जिससे सतह पर कंपन होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।
- अन्य कारण (कम सामान्य): ज्वालामुखी फटना, उल्कापिंड का टकराना, भूमिगत नाभिकीय विस्फोट।
- भूकंप की शक्ति का मापन: भूकंप की शक्ति के परिमाण को रिक्टर पैमाने पर व्यक्त किया जाता है।
- रिक्टर पैमाने पर 7 से अधिक परिमाण वाले भूकंप अधिक विनाशकारी होते हैं।
- भूकंप से बचाव (सुरक्षा उपाय):
- यदि घर में हैं:
- किसी मजबूत मेज या पलंग के नीचे लेट जाएं और उसे कसकर पकड़ लें।
- दीवारों, खिड़कियों और भारी फर्नीचर से दूर रहें जो गिर सकते हैं।
- अपने सिर को तकिए या हाथों से बचाएं।
- यदि घर से बाहर हैं:
- भवनों, वृक्षों, विद्युत के तारों और खंभों से दूर किसी खुली जगह पर जमीन पर लेट जाएं।
- जब तक कंपन बंद न हो जाए, वहीं रहें।
- यदि किसी वाहन में हैं:
- वाहन से बाहर न निकलें।
- ड्राइवर से कहें कि धीरे-धीरे वाहन को किसी खुले स्थान पर ले चले और कंपन रुकने तक वहीं रुके रहें।
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भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण आते हैं। रिक्टर पैमाना इसकी तीव्रता मापता है। भूकंप के दौरान सुरक्षित रहने के लिए उचित बचाव उपायों का पालन करना महत्वपूर्ण है।