वास्तविक संख्याएँ
यह अध्याय वास्तविक संख्याओं की अवधारणा का परिचय देता है, जिसमें परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ शामिल हैं। छात्र प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं के बीच के संबंधों को समझते हैं। अध्याय में संख्या रेखा पर परिमेय और अपरिमेय संख्याओं को दर्शाना, दो परिमेय संख्याओं के बीच असंख्य परिमेय संख्याएँ खोजना, और वास्तविक संख्याओं के योग, व्यवकलन, गुणन और भाग जैसे गुणधर्मों की पड़ताल करना शामिल है। इसमें दशमलव प्रसार को परिमेय संख्या के रूप में व्यक्त करना और हर का परिमेयीकरण करना भी सिखाया गया है।
संख्याओं का वर्गीकरण
वास्तविक संख्याएँ विभिन्न प्रकार की संख्याओं का एक संग्रह हैं। इन्हें उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
- प्राकृत संख्याएँ (N):
- गिनती वाली संख्याएँ (1, 2, 3, ...)।
- सबसे छोटी प्राकृत संख्या 1 है।
- इन्हें धनात्मक पूर्णांक भी कहते हैं।
- पूर्ण संख्याएँ (W):
- प्राकृत संख्याओं में शून्य (0) शामिल करने पर प्राप्त संख्याएँ (0, 1, 2, 3, ...)।
- सबसे छोटी पूर्ण संख्या 0 है।
- पूर्णांक (Z):
- पूर्ण संख्याएँ और ऋणात्मक प्राकृत संख्याएँ (..., -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ...)।
- इनमें धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य शामिल होते हैं।
- परिमेय संख्याएँ (Q):
- वे संख्याएँ जिन्हें \(\frac{p}{q}\) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा \(q \neq 0\)।
- सभी प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ और पूर्णांक परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- उदाहरण: \(\frac{1}{2}, -\frac{3}{4}, 5, 0, -7\) आदि।
- अपरिमेय संख्याएँ:
- वे संख्याएँ जिन्हें \(\frac{p}{q}\) के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।
- इनका दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती होता है।
- उदाहरण: \(\sqrt{2}, \sqrt{3}, \pi\) आदि।
- वास्तविक संख्याएँ (R):
- सभी परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का संग्रह।
- संख्या रेखा पर प्रत्येक बिंदु एक वास्तविक संख्या को दर्शाता है।
संख्याओं के समुच्चय के बीच संबंध: \(N \subset W \subset Z \subset Q \subset R\) अपरिमेय संख्याएँ (I) वास्तविक संख्याओं का हिस्सा हैं, लेकिन परिमेय संख्याओं से अलग हैं। \(Q \cup I = R\) तथा \(Q \cap I = \emptyset\)
प्रत्येक प्राकृत संख्या एक पूर्ण संख्या होती है। प्रत्येक पूर्ण संख्या एक पूर्णांक होती है। प्रत्येक पूर्णांक एक परिमेय संख्या होती है।
परिमेय संख्याओं की परिभाषा
एक संख्या 'r' परिमेय संख्या कहलाती है यदि इसे \(\frac{p}{q}\) के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\)।
- उदाहरण:
- \(5 = \frac{5}{1}\)
- \(-3 = \frac{-3}{1}\)
- \(0 = \frac{0}{1}\)
- \(0.25 = \frac{25}{100} = \frac{1}{4}\)
परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर दर्शाना
- पूर्णांकों का निरूपण: संख्या रेखा पर 0, 1, -1, 2, -2 आदि को समान दूरी पर अंकित करना।
- भिन्न \(\frac{p}{q}\) का निरूपण:
- यदि \(q=3\) है, तो प्रत्येक इकाई (जैसे 0 से 1, 1 से 2) को 3 बराबर भागों में बाँटें।
- \(\frac{1}{3}\) को 0 से पहले भाग के अंत में, \(\frac{2}{3}\) को दूसरे भाग के अंत में और \(\frac{3}{3}\) (जो 1 है) को तीसरे भाग के अंत में दर्शाया जाता है।
- ऋणात्मक भिन्नों के लिए, 0 के बाईं ओर इसी प्रक्रिया का पालन करें।
तुल्य परिमेय संख्याएँ
- एक ही मान वाली विभिन्न भिन्नों को तुल्य परिमेय संख्याएँ कहते हैं।
- उदाहरण: \(\frac{1}{2}, \frac{2}{4}, \frac{3}{6}, \frac{4}{8}\) सभी तुल्य परिमेय संख्याएँ हैं और संख्या रेखा पर एक ही बिंदु पर स्थित होती हैं।
- किसी परिमेय संख्या के अंश और हर को एक ही गैर-शून्य पूर्णांक से गुणा या भाग करने पर तुल्य परिमेय संख्या प्राप्त होती है।
दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्याएँ
- महत्वपूर्ण तथ्य: किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं के बीच असंख्य परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- ज्ञात करने की विधि:
- औसत विधि (Mean Method):
- यदि a और b दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो \(\frac{a+b}{2}\) उनके बीच की एक परिमेय संख्या होगी।
- इस प्रक्रिया को दोहराकर और अधिक संख्याएँ ज्ञात की जा सकती हैं।
- उदाहरण: 1 और 2 के बीच एक परिमेय संख्या \(\frac{1+2}{2} = \frac{3}{2}\) है। अब 1 और \(\frac{3}{2}\) के बीच \(\frac{1+\frac{3}{2}}{2} = \frac{\frac{5}{2}}{2} = \frac{5}{4}\) है।
- समतुल्य भिन्न विधि:
- दी गई परिमेय संख्याओं को समान हर वाली समतुल्य भिन्नों में बदलें।
- यदि \(n\) परिमेय संख्याएँ ज्ञात करनी हैं, तो अंश और हर को \((n+1)\) से गुणा करें।
- उदाहरण: \(\frac{1}{3}\) और \(\frac{1}{2}\) के बीच 3 परिमेय संख्याएँ ज्ञात करें।
- \(\frac{1}{3} = \frac{1 \times 2}{3 \times 2} = \frac{2}{6}\)
- \(\frac{1}{2} = \frac{1 \times 3}{2 \times 3} = \frac{3}{6}\)
- अब \(n+1 = 3+1 = 4\) से गुणा करें:
- \(\frac{2}{6} = \frac{2 \times 4}{6 \times 4} = \frac{8}{24}\)
- \(\frac{3}{6} = \frac{3 \times 4}{6 \times 4} = \frac{12}{24}\)
- अब \(\frac{8}{24}\) और \(\frac{12}{24}\) के बीच की संख्याएँ: \(\frac{9}{24}, \frac{10}{24}, \frac{11}{24}\) हैं।
दो परिमेय संख्याओं के बीच की परिमेय संख्या: यदि a और b दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो \(a < \frac{a+b}{2} < b\)
अपरिमेय संख्याओं की परिभाषा
वे संख्याएँ जिन्हें \(\frac{p}{q}\) के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा \(q \neq 0\), अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं।
- मुख्य विशेषताएँ:
- इनका दशमलव प्रसार असांत (non-terminating) होता है।
- इनका दशमलव प्रसार अनावर्ती (non-repeating) होता है।
- अर्थात्, दशमलव के बाद के अंक न तो समाप्त होते हैं और न ही किसी निश्चित पैटर्न में दोहराते हैं।
- अपरिमेय संख्याओं के उदाहरण:
- वर्गमूल: वे संख्याएँ जो पूर्ण वर्ग नहीं हैं, उनका वर्गमूल अपरिमेय होता है।
- \(\sqrt{2} \approx 1.41421356...\)
- \(\sqrt{3} \approx 1.73205081...\)
- \(\sqrt{5} \approx 2.23606798...\)
- ध्यान दें: \(\sqrt{4}=2\) एक परिमेय संख्या है क्योंकि 4 एक पूर्ण वर्ग है।
- घनमूल: वे संख्याएँ जो पूर्ण घन नहीं हैं, उनका घनमूल अपरिमेय होता है।
- \(\sqrt[3]{2}, \sqrt[3]{7}\) आदि।
- पाई (\(\pi\)): वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात।
- \(\pi \approx 3.14159265...\)
- \(\pi\) एक अपरिमेय संख्या है, जबकि \(\frac{22}{7}\) इसका एक सन्निकट परिमेय मान है।
- कुछ विशेष दशमलव: \(0.10110111011110...\) (जहाँ 1 और 0 का पैटर्न बदलता रहता है)।
परिमेय और अपरिमेय संख्याओं में अंतर:
| विशेषता | परिमेय संख्याएँ (Q) | अपरिमेय संख्याएँ (I) | | :---------------- | :-------------------------------- | :------------------------------ | | रूप | \(\frac{p}{q}\) (p, q पूर्णांक, \(q \neq 0\)) | \(\frac{p}{q}\) के रूप में नहीं | | दशमलव प्रसार | सांत या असांत आवर्ती | असांत अनावर्ती | | उदाहरण | \(0.5, \frac{2}{3}, 7, -\frac{1}{4}\) | \(\sqrt{2}, \pi, 0.121121112...\) |
अपरिमेय संख्या: एक संख्या 's' अपरिमेय कहलाती है यदि इसे \(\frac{p}{q}\) के रूप में नहीं लिखा जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\)।
\(\pi\) एक अपरिमेय संख्या है, जबकि \(\frac{22}{7}\) इसका एक परिमेय सन्निकटन है।
संख्या रेखा पर अपरिमेय संख्याओं का निरूपण
हम पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके अपरिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित कर सकते हैं।
\(\sqrt{2}\) का संख्या रेखा पर निरूपण
- संख्या रेखा पर एक बिंदु O (शून्य) और एक बिंदु A (1 इकाई) अंकित करें।
- बिंदु A पर OA पर लंब AB खींचिए, जहाँ AB की लंबाई 1 इकाई हो। (अर्थात, \(AB \perp OA\) और \(AB=1\) इकाई)।
- O और B को मिलाएँ। त्रिभुज OAB एक समकोण त्रिभुज है।
- पाइथागोरस प्रमेय से, \(OB^2 = OA^2 + AB^2 = 1^2 + 1^2 = 1 + 1 = 2\)।
अतः, \(OB = \sqrt{2}\) इकाई।
- O को केंद्र मानकर और OB को त्रिज्या मानकर एक चाप खींचिए जो संख्या रेखा को बिंदु P पर काटे।
- बिंदु P, \(\sqrt{2}\) को निरूपित करता है।
\(\sqrt{3}\) का संख्या रेखा पर निरूपण
- पहले \(\sqrt{2}\) को संख्या रेखा पर निरूपित करें (बिंदु P)।
- बिंदु P पर OP पर लंब PC खींचिए, जहाँ PC की लंबाई 1 इकाई हो। (अर्थात, \(PC \perp OP\) और \(PC=1\) इकाई)।
- O और C को मिलाएँ। त्रिभुज OPC एक समकोण त्रिभुज है।
- पाइथागोरस प्रमेय से, \(OC^2 = OP^2 + PC^2 = (\sqrt{2})^2 + 1^2 = 2 + 1 = 3\)।
अतः, \(OC = \sqrt{3}\) इकाई।
- O को केंद्र मानकर और OC को त्रिज्या मानकर एक चाप खींचिए जो संख्या रेखा को बिंदु Q पर काटे।
- बिंदु Q, \(\sqrt{3}\) को निरूपित करता है।
सामान्यीकरण (Spiral Method): इस विधि को आगे बढ़ाकर \(\sqrt{n}\) (जहाँ n एक प्राकृत संख्या है) को संख्या रेखा पर निरूपित किया जा सकता है। प्रत्येक नए वर्गमूल के लिए, पिछले वर्गमूल की लंबाई पर 1 इकाई का लंब खींचा जाता है।
- \(\sqrt{4}\) (जो 2 है) को निरूपित करने के लिए, \(\sqrt{3}\) की लंबाई पर 1 इकाई का लंब खींचें।
पाइथागोरस प्रमेय: एक समकोण त्रिभुज में, कर्ण का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है। \(c^2 = a^2 + b^2\)
वास्तविक संख्याओं की परिभाषा
सभी परिमेय संख्याओं और सभी अपरिमेय संख्याओं के संग्रह को वास्तविक संख्याएँ कहते हैं।
- वास्तविक संख्याओं के समुच्चय को R से दर्शाया जाता है।
- संख्या रेखा की पूर्णता: जब हम सभी परिमेय और अपरिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर दर्शाते हैं, तो संख्या रेखा पर कोई बिंदु खाली नहीं रहता।
- प्रत्येक वास्तविक संख्या संख्या रेखा पर एक अद्वितीय बिंदु से मेल खाती है, और संख्या रेखा पर प्रत्येक बिंदु एक अद्वितीय वास्तविक संख्या से मेल खाता है।
- यह गुणधर्म वास्तविक संख्या रेखा की पूर्णता कहलाता है।
वास्तविक संख्याओं के उपसमुच्चय:
- प्राकृत संख्याएँ (N)
- पूर्ण संख्याएँ (W)
- पूर्णांक (Z)
- परिमेय संख्याएँ (Q)
- अपरिमेय संख्याएँ (I)
ये सभी वास्तविक संख्याओं के उपसमुच्चय हैं।
वास्तविक संख्याएँ: परिमेय संख्याओं और अपरिमेय संख्याओं के संग्रह को वास्तविक संख्याएँ कहते हैं।
वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ
वास्तविक संख्याओं (परिमेय और अपरिमेय) पर योग, घटाव, गुणा और भाग की संक्रियाएँ की जा सकती हैं।
परिमेय संख्याओं पर संक्रियाओं के गुणधर्म
- संवृत गुणधर्म (Closure Property):
- योग: दो परिमेय संख्याओं का योग हमेशा एक परिमेय संख्या होती है। (a + b = परिमेय)
- घटाव: दो परिमेय संख्याओं का घटाव हमेशा एक परिमेय संख्या होती है। (a - b = परिमेय)
- गुणा: दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा एक परिमेय संख्या होती है। (a \(\times\) b = परिमेय)
- भाग: दो परिमेय संख्याओं का भाग हमेशा एक परिमेय संख्या होती है, बशर्ते भाजक शून्य न हो। (a \(\div\) b = परिमेय, यदि \(b \neq 0\))
- यदि भाजक शून्य हो, तो परिणाम अपरिभाषित होता है।
- क्रमविनिमेय गुणधर्म (Commutative Property):
- योग: \(a + b = b + a\) (परिमेय संख्याओं के लिए)
- घटाव: \(a - b \neq b - a\) (परिमेय संख्याओं के लिए नहीं)
- गुणा: \(a \times b = b \times a\) (परिमेय संख्याओं के लिए)
- भाग: \(a \div b \neq b \div a\) (परिमेय संख्याओं के लिए नहीं)
- साहचर्य गुणधर्म (Associative Property):
- योग: \(a + (b + c) = (a + b) + c\) (परिमेय संख्याओं के लिए)
- घटाव: \(a - (b - c) \neq (a - b) - c\) (परिमेय संख्याओं के लिए नहीं)
- गुणा: \(a \times (b \times c) = (a \times b) \times c\) (परिमेय संख्याओं के लिए)
- भाग: \(a \div (b \div c) \neq (a \div b) \div c\) (परिमेय संख्याओं के लिए नहीं)
तत्समक और प्रतिलोम
- योज्य तत्समक (Additive Identity):
- शून्य (0) वह संख्या है जिसे किसी भी परिमेय संख्या में जोड़ने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
- \(a + 0 = 0 + a = a\)
- गुणात्मक तत्समक (Multiplicative Identity):
- एक (1) वह संख्या है जिसे किसी भी परिमेय संख्या से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
- \(a \times 1 = 1 \times a = a\)
- योज्य प्रतिलोम (Additive Inverse):
- किसी परिमेय संख्या 'a' का योज्य प्रतिलोम '-a' होता है, ताकि \(a + (-a) = 0\)।
- उदाहरण: 5 का योज्य प्रतिलोम -5 है।
- गुणात्मक प्रतिलोम (Multiplicative Inverse):
- किसी परिमेय संख्या 'a' (जहाँ \(a \neq 0\)) का गुणात्मक प्रतिलोम \(\frac{1}{a}\) होता है, ताकि \(a \times \frac{1}{a} = 1\)।
- इसे व्युत्क्रम भी कहते हैं।
- उदाहरण: 5 का गुणात्मक प्रतिलोम \(\frac{1}{5}\) है।
अपरिमेय संख्याओं पर संक्रियाएँ
- योग/घटाव:
- एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का योग या घटाव हमेशा एक अपरिमेय संख्या होती है।
- उदाहरण: \(2 + \sqrt{3}\), \(5 - \sqrt{2}\)
- दो अपरिमेय संख्याओं का योग या घटाव परिमेय या अपरिमेय हो सकता है।
- उदाहरण: \(\sqrt{2} + (-\sqrt{2}) = 0\) (परिमेय)
- \(\sqrt{2} + \sqrt{3}\) (अपरिमेय)
- गुणा/भाग:
- एक गैर-शून्य परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल या भागफल हमेशा एक अपरिमेय संख्या होती है।
- उदाहरण: \(2\sqrt{3}\), \(\frac{\sqrt{5}}{3}\)
- दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल या भागफल परिमेय या अपरिमेय हो सकता है।
- उदाहरण: \(\sqrt{2} \times \sqrt{2} = 2\) (परिमेय)
- \(\sqrt{2} \times \sqrt{3} = \sqrt{6}\) (अपरिमेय)
- \(\frac{\sqrt{8}}{\sqrt{2}} = \sqrt{4} = 2\) (परिमेय)
शून्य का योज्य तत्समक 0 ही होता है। 1 का गुणात्मक प्रतिलोम 1 ही होता है। (-1) का गुणात्मक प्रतिलोम (-1) ही होता है। 0 का कोई गुणात्मक प्रतिलोम नहीं होता है।
अपरिमेय संख्याओं की पहचान और बीजगणितीय सूत्र
अपरिमेय संख्याओं को पहचानने के लिए उनके दशमलव प्रसार को देखा जाता है (असांत अनावर्ती)। इसके अतिरिक्त, कुछ बीजगणितीय संक्रियाओं के परिणाम भी अपरिमेय हो सकते हैं।
अपरिमेय संख्याओं की पहचान
- योग/घटाव:
- परिमेय + अपरिमेय = अपरिमेय
- परिमेय - अपरिमेय = अपरिमेय
- अपरिमेय - परिमेय = अपरिमेय
- गुणा/भाग:
- गैर-शून्य परिमेय \(\times\) अपरिमेय = अपरिमेय
- गैर-शून्य परिमेय \(\div\) अपरिमेय = अपरिमेय
- अपरिमेय \(\div\) गैर-शून्य परिमेय = अपरिमेय
अपरिमेय संख्याओं से संबंधित बीजगणितीय सूत्र
मान लीजिए a, b, c, d धनात्मक वास्तविक संख्याएँ हैं।
- समान करणी वाले पद:
- \(a\sqrt{b} + c\sqrt{b} = (a+c)\sqrt{b}\)
- \(a\sqrt{b} - c\sqrt{b} = (a-c)\sqrt{b}\)
- करणी का गुणनफल:
- \(\sqrt{a}\sqrt{b} = \sqrt{ab}\)
- \(\sqrt{a}(\sqrt{b} + \sqrt{c}) = \sqrt{ab} + \sqrt{ac}\)
- करणी का भागफल:
- \(\frac{\sqrt{a}}{\sqrt{b}} = \sqrt{\frac{a}{b}}\) (जहाँ \(b \neq 0\))
- सर्वसमिकाएँ:
- \((\sqrt{a} + \sqrt{b})(\sqrt{a} - \sqrt{b}) = a - b\)
- \((a + \sqrt{b})(a - \sqrt{b}) = a^2 - b\)
- \((\sqrt{a} + \sqrt{b})(\sqrt{c} + \sqrt{d}) = \sqrt{ac} + \sqrt{ad} + \sqrt{bc} + \sqrt{bd}\)
- \((\sqrt{a} + \sqrt{b})^2 = a + b + 2\sqrt{ab}\)
- \((\sqrt{a} - \sqrt{b})^2 = a + b - 2\sqrt{ab}\)
उदाहरण:
- \(3\sqrt{2} + 5\sqrt{2} = (3+5)\sqrt{2} = 8\sqrt{2}\)
- \(\sqrt{3} \times \sqrt{7} = \sqrt{21}\)
- \((5 + \sqrt{3})(5 - \sqrt{3}) = 5^2 - (\sqrt{3})^2 = 25 - 3 = 22\)
- \((\sqrt{5} + \sqrt{2})^2 = 5 + 2 + 2\sqrt{5 \times 2} = 7 + 2\sqrt{10}\)
महत्वपूर्ण बीजगणितीय सर्वसमिकाएँ:
- \((\sqrt{a} + \sqrt{b})(\sqrt{a} - \sqrt{b}) = a - b\)
- \((a + \sqrt{b})(a - \sqrt{b}) = a^2 - b\)
- \((\sqrt{a} + \sqrt{b})^2 = a + b + 2\sqrt{ab}\)
अपरिमेय संख्याओं पर संक्रियाओं का अभ्यास
अपरिमेय संख्याओं पर संक्रियाएँ करते समय, हम समान करणी वाले पदों को एक साथ जोड़ या घटा सकते हैं, और गुणन व भाग के लिए करणी के नियमों का पालन करते हैं।
योग और घटाव
- केवल समान करणी वाले पदों को ही जोड़ा या घटाया जा सकता है।
- उदाहरण: \(a\sqrt{b} + c\sqrt{b} = (a+c)\sqrt{b}\)
उदाहरण 1: \(5\sqrt{3} + 2\sqrt{3}\)
- हल: \((5+2)\sqrt{3} = 7\sqrt{3}\)
उदाहरण 2: \(9\sqrt{3} + 7\sqrt{5} + 7\sqrt{3} - 5\sqrt{5}\)
- हल: \((9\sqrt{3} + 7\sqrt{3}) + (7\sqrt{5} - 5\sqrt{5})\)
\(= (9+7)\sqrt{3} + (7-5)\sqrt{5}\) \(= 16\sqrt{3} + 2\sqrt{5}\)
उदाहरण 3: \(3\sqrt{2} - 2\sqrt{3}\) को \(3\sqrt{3} - 2\sqrt{5}\) में से घटाओ।
- हल: \((3\sqrt{3} - 2\sqrt{5}) - (3\sqrt{2} - 2\sqrt{3})\)
\(= 3\sqrt{3} - 2\sqrt{5} - 3\sqrt{2} + 2\sqrt{3}\) \(= (3\sqrt{3} + 2\sqrt{3}) - 2\sqrt{5} - 3\sqrt{2}\) \(= (3+2)\sqrt{3} - 2\sqrt{5} - 3\sqrt{2}\) \(= 5\sqrt{3} - 2\sqrt{5} - 3\sqrt{2}\)
गुणा
- \(a\sqrt{b} \times c\sqrt{d} = (a \times c) \sqrt{b \times d}\)
उदाहरण 4: \(\sqrt{3} \times \sqrt{5}\)
- हल: \(\sqrt{3 \times 5} = \sqrt{15}\)
उदाहरण 5: \(2\sqrt{3} \times 7\sqrt{2}\)
- हल: \((2 \times 7) \sqrt{3 \times 2} = 14\sqrt{6}\)
उदाहरण 6: \((2 + \sqrt{5})(2 - \sqrt{5})\)
- हल: यह \((a+b)(a-b) = a^2 - b^2\) के रूप में है, जहाँ \(a=2\) और \(b=\sqrt{5}\)
\(= 2^2 - (\sqrt{5})^2 = 4 - 5 = -1\)
उदाहरण 7: \((\sqrt{7} + \sqrt{3})(\sqrt{2} + \sqrt{5})\)
- हल: \(\sqrt{7}\sqrt{2} + \sqrt{7}\sqrt{5} + \sqrt{3}\sqrt{2} + \sqrt{3}\sqrt{5}\)
\(= \sqrt{14} + \sqrt{35} + \sqrt{6} + \sqrt{15}\)
भाग
- \(\frac{a\sqrt{b}}{c\sqrt{d}} = \frac{a}{c} \sqrt{\frac{b}{d}}\) (जहाँ \(c \neq 0, d \neq 0\))
उदाहरण 8: \(\frac{6\sqrt{12}}{2\sqrt{3}}\) को सरल कीजिए।
- हल: \(\frac{6}{2} \sqrt{\frac{12}{3}} = 3\sqrt{4} = 3 \times 2 = 6\)
छात्र अक्सर \(\sqrt{a} + \sqrt{b}\) को \(\sqrt{a+b}\) लिख देते हैं, जो गलत है। उदाहरण: \(\sqrt{4} + \sqrt{9} = 2 + 3 = 5\), जबकि \(\sqrt{4+9} = \sqrt{13}\).
हर का परिमेयीकरण
हर का परिमेयीकरण (Rationalization) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी भिन्न के हर को अपरिमेय से परिमेय संख्या में बदला जाता है। यह आमतौर पर हर में वर्गमूल या अन्य करणी होने पर किया जाता है।
परिमेयीकरण की आवश्यकता
- जब हर में अपरिमेय संख्या होती है, तो गणनाएँ (जैसे भाग) करना मुश्किल हो जाता है।
- परिमेयीकरण से हर एक पूर्णांक बन जाता है, जिससे आगे की गणनाएँ आसान हो जाती हैं।
परिमेयीकरण कारक (Rationalizing Factor)
- यह वह पद होता है जिससे हर को गुणा करने पर वह परिमेय बन जाता है।
विभिन्न प्रकार के हरों का परिमेयीकरण:
- जब हर \(\sqrt{a}\) के रूप में हो:
- \(\frac{1}{\sqrt{a}}\) को परिमेय बनाने के लिए, अंश और हर को \(\sqrt{a}\) से गुणा करें।
- \(\frac{1}{\sqrt{a}} = \frac{1}{\sqrt{a}} \times \frac{\sqrt{a}}{\sqrt{a}} = \frac{\sqrt{a}}{a}\)
- उदाहरण: \(\frac{1}{\sqrt{2}} = \frac{1}{\sqrt{2}} \times \frac{\sqrt{2}}{\sqrt{2}} = \frac{\sqrt{2}}{2}\)
- जब हर \(a + \sqrt{b}\) या \(a - \sqrt{b}\) के रूप में हो:
- यहाँ, हम संयुग्मी (conjugate) का उपयोग करते हैं।
- \(a + \sqrt{b}\) का संयुग्मी \(a - \sqrt{b}\) है।
- \(a - \sqrt{b}\) का संयुग्मी \(a + \sqrt{b}\) है।
- संयुग्मी से गुणा करने पर \((a + \sqrt{b})(a - \sqrt{b}) = a^2 - b\) प्राप्त होता है, जो एक परिमेय संख्या है।
- उदाहरण: \(\frac{1}{4 - \sqrt{7}}\) के हर का परिमेयीकरण कीजिए।
- हल: \((4 - \sqrt{7})\) का संयुग्मी \((4 + \sqrt{7})\) है।
- \(\frac{1}{4 - \sqrt{7}} = \frac{1}{4 - \sqrt{7}} \times \frac{4 + \sqrt{7}}{4 + \sqrt{7}}\)
- \(= \frac{4 + \sqrt{7}}{4^2 - (\sqrt{7})^2} = \frac{4 + \sqrt{7}}{16 - 7} = \frac{4 + \sqrt{7}}{9}\)
- जब हर \(\sqrt{a} + \sqrt{b}\) या \(\sqrt{a} - \sqrt{b}\) के रूप में हो:
- यहाँ भी संयुग्मी का उपयोग करते हैं।
- \(\sqrt{a} + \sqrt{b}\) का संयुग्मी \(\sqrt{a} - \sqrt{b}\) है।
- \(\sqrt{a} - \sqrt{b}\) का संयुग्मी \(\sqrt{a} + \sqrt{b}\) है।
- संयुग्मी से गुणा करने पर \((\sqrt{a} + \sqrt{b})(\sqrt{a} - \sqrt{b}) = a - b\) प्राप्त होता है।
- उदाहरण: \(\frac{3 - \sqrt{2}}{3 + \sqrt{2}}\) के हर का परिमेयीकरण कीजिए।
- हल: \((3 + \sqrt{2})\) का संयुग्मी \((3 - \sqrt{2})\) है।
- \(\frac{3 - \sqrt{2}}{3 + \sqrt{2}} = \frac{3 - \sqrt{2}}{3 + \sqrt{2}} \times \frac{3 - \sqrt{2}}{3 - \sqrt{2}}\)
- \(= \frac{(3 - \sqrt{2})^2}{3^2 - (\sqrt{2})^2} = \frac{3^2 - 2 \times 3 \times \sqrt{2} + (\sqrt{2})^2}{9 - 2}\)
- \(= \frac{9 - 6\sqrt{2} + 2}{7} = \frac{11 - 6\sqrt{2}}{7}\)
हर का परिमेयीकरण करते समय, अंश और हर दोनों को परिमेयीकरण कारक से गुणा करना महत्वपूर्ण है ताकि भिन्न का मान अपरिवर्तित रहे।