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संख्याओं में भी है खेल
Chhattisgarh · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 6

संख्याओं में भी है खेल

संख्याओं का व्यापक रूपअक्षरों के लिए अंकों का मान ज्ञात करनाविभाज्यता के नियम (2, 3, 5, 6, 7, 9, 11)संख्या पहेलियाँस्थानीय मान

यह अध्याय संख्याओं के साथ खेलने और उनके गुणों को समझने पर केंद्रित है। इसमें संख्याओं को व्यापक रूप में लिखना सिखाया गया है, जैसे दो अंकों की संख्या AB को 10A+B और तीन अंकों की संख्या ABC को 100A+10B+C। छात्र संख्या पहेलियों को हल करना सीखते हैं जहाँ अक्षरों को अंकों से बदलना होता है। अध्याय में 2, 3, 5, 6, 7, 9 और 11 जैसे विभिन्न भाजकों के लिए विभाज्यता के नियम भी विस्तार से बताए गए हैं। यह छात्रों को संख्या प्रणाली की गहरी समझ विकसित करने में मदद करता है और उन्हें तार्किक सोच कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

अक्षरों से संख्याएँ बनाना और उनका स्थानीय मान

इस अध्याय में हम संख्याओं के साथ खेलेंगे, जहाँ अंक अक्षरों द्वारा दर्शाए गए हैं। हमें इन अक्षरों के मान ज्ञात करने होंगे।

  • अंकों का मान: प्रत्येक अक्षर 0 से 9 तक के किसी एक अंक को दर्शाता है।
  • स्थानीय मान:
  • एक अंक की संख्या (जैसे A): A का मान 0 से 9 तक कोई भी अंक हो सकता है।
  • दो अंकों की संख्या (जैसे PQ):
  • Q इकाई के स्थान पर है।
  • P दहाई के स्थान पर है।
  • संख्या का विस्तारित रूप = \(10P + Q\)
  • महत्वपूर्ण: P कभी 0 नहीं हो सकता, क्योंकि यह दहाई का अंक है।
  • तीन अंकों की संख्या (जैसे ABC):
  • C इकाई के स्थान पर है।
  • B दहाई के स्थान पर है।
  • A सैकड़े के स्थान पर है।
  • संख्या का विस्तारित रूप = \(100A + 10B + C\)
  • महत्वपूर्ण: A कभी 0 नहीं हो सकता, क्योंकि यह सैकड़े का अंक है।
  • उदाहरण:
  • संख्या ML का विस्तारित रूप = \(10M + L\)
  • संख्या XYZ का विस्तारित रूप = \(100X + 10Y + Z\)

याद रखें:

  • किसी भी संख्या का पहला अंक (सबसे बाईं ओर का अंक) शून्य नहीं हो सकता।
  • प्रत्येक अक्षर एक अद्वितीय अंक का प्रतिनिधित्व करता है, जब तक कि अन्यथा न कहा गया हो।
महत्त्वपूर्ण

अक्षरों का मान:

  • एक अक्षर हमेशा एक ही अंक को दर्शाता है।
  • एक ही प्रश्न में अलग-अलग अक्षर अलग-अलग अंकों को दर्शाते हैं।
  • किसी संख्या का पहला अंक (सबसे बाईं ओर का अंक) कभी भी शून्य नहीं हो सकता।

जोड़ संक्रिया में अज्ञात अंक ज्ञात करना

जोड़ संक्रिया में अज्ञात अंकों को ज्ञात करने के लिए, हम इकाई के अंक से शुरू करते हुए, स्थानीय मान और हासिल (कैरी) के नियमों का उपयोग करते हैं।

  • चरण-दर-चरण विधि:
  1. इकाई का स्थान: सबसे पहले इकाई के स्थान पर अंकों के जोड़ पर विचार करें। इससे अक्सर एक या अधिक अज्ञात अंकों का मान ज्ञात हो जाता है या उनके लिए संभावित मानों की सीमा मिल जाती है।
  2. हासिल (कैरी): यदि इकाई के अंकों का जोड़ 9 से अधिक है, तो हासिल को दहाई के स्थान पर ले जाएँ।
  3. दहाई का स्थान: दहाई के स्थान पर अंकों के जोड़ (हासिल सहित) पर विचार करें।
  4. आगे बढ़ें: इसी तरह सैकड़े और अन्य स्थानों के लिए प्रक्रिया दोहराएँ।
  5. जाँच: प्राप्त मानों को मूल जोड़ में रखकर उत्तर की जाँच करें।
  • उदाहरण:

` P P

  • P

----- QP `

  • इकाई का स्थान: \(P + P + P = 3P\)। परिणाम का इकाई अंक P है।
  • संभावित मान: यदि \(3P\) का इकाई अंक P है, तो \(3P\) के मान \(0, 10, 20, 30\) आदि हो सकते हैं।
  • यदि \(3P = 0\), तो \(P=0\)।
  • यदि \(3P = 10 + P\), तो \(2P = 10 \implies P=5\)।
  • यदि \(3P = 20 + P\), तो \(2P = 20 \implies P=10\) (संभव नहीं, क्योंकि P एक अंक है)।
  • तो, P के संभावित मान 0 या 5 हैं।
  • दहाई का स्थान: \(3P = 10Q + P\) (विस्तारित रूप से)।
  • \(2P = 10Q \implies P = 5Q\)
  • यदि \(P=0\), तो \(0 = 5Q \implies Q=0\)। लेकिन Q और P अलग-अलग अक्षर होने चाहिए (या प्रश्न में स्पष्ट किया गया हो)। यदि P=0, Q=0, तो \(0+0+0=00\) जो कि \(0\) है। यह एक वैध हल हो सकता है यदि Q=0, P=0 मान्य हो।
  • यदि \(P=5\), तो \(5 = 5Q \implies Q=1\)।
  • जाँच: यदि \(P=5, Q=1\)

` 5 5

  • 5

----- 15 ` यह सही है। तो \(P=5, Q=1\) हल है।

💡सुझाव

जोड़ के सवालों में हमेशा इकाई के अंक से शुरू करें। हासिल (कैरी) को ध्यान में रखना न भूलें। संभावित मानों को सीमित करने के लिए तार्किक अनुमानों का उपयोग करें।

घटाव संक्रिया में अज्ञात अंक ज्ञात करना

घटाव संक्रिया में अज्ञात अंकों को ज्ञात करने के लिए भी हम स्थानीय मान और उधार (बोरो) के नियमों का उपयोग करते हैं।

  • चरण-दर-चरण विधि:
  1. इकाई का स्थान: इकाई के स्थान से घटाना शुरू करें। यदि ऊपर वाला अंक छोटा है, तो दहाई के स्थान से उधार लें।
  2. उधार (बोरो): जब आप उधार लेते हैं, तो दहाई के स्थान पर अंक 1 कम हो जाता है, और इकाई के स्थान पर अंक में 10 जुड़ जाता है।
  3. दहाई का स्थान: दहाई के स्थान पर घटाना करें, उधार को ध्यान में रखते हुए।
  4. आगे बढ़ें: इसी तरह सैकड़े और अन्य स्थानों के लिए प्रक्रिया दोहराएँ।
  5. जाँच: प्राप्त मानों को मूल घटाव में रखकर उत्तर की जाँच करें।
  • उदाहरण: \(PQ - QP = 27\)
  • विस्तारित रूप में लिखें:

\((10P + Q) - (10Q + P) = 27\)

  • कोष्ठक खोलें:

\(10P + Q - 10Q - P = 27\)

  • समान पदों को संयोजित करें:

\(9P - 9Q = 27\)

  • 9 से भाग दें:

\(P - Q = 3\)

  • अब P और Q के संभावित मान ज्ञात करें (याद रखें P, Q अंक हैं और P \(\neq\) 0):
  • यदि \(P=9\), तो \(Q=6\) (\(9-6=3\))
  • यदि \(P=8\), तो \(Q=5\) (\(8-5=3\))
  • यदि \(P=7\), तो \(Q=4\) (\(7-4=3\))
  • यदि \(P=6\), तो \(Q=3\) (\(6-3=3\))
  • यदि \(P=5\), तो \(Q=2\) (\(5-2=3\))
  • यदि \(P=4\), तो \(Q=1\) (\(4-1=3\))
  • यदि \(P=3\), तो \(Q=0\) (\(3-0=3\))
  • इस प्रकार P और Q के 7 विभिन्न मान संभव हैं।
  • तीन अंकों की संख्या का उदाहरण: \(5Y1 - 23Y = 325\)
  • विस्तारित रूप में लिखें:

\((500 + 10Y + 1) - (200 + 30 + Y) = 325\)

  • सरल करें:

\(501 + 10Y - 230 - Y = 325\) \(271 + 9Y = 325\)

  • \(9Y = 325 - 271\)

\(9Y = 54\)

  • \(Y = \frac{54}{9}\)

\(Y = 6\)

  • जाँच: \(561 - 236 = 325\) (सही है)।
🚧ग़लत धारणा

घटाव में उधार लेने पर दहाई या सैकड़े के अंक को कम करना भूल जाना एक आम गलती है। हमेशा ध्यान रखें कि उधार लेने पर बाईं ओर का अंक 1 कम हो जाता है।

गुणा और भाग संक्रिया में अज्ञात अंक ज्ञात करना

गुणा और भाग संक्रियाओं में अज्ञात अंकों को ज्ञात करना थोड़ा अधिक जटिल हो सकता है, लेकिन हम अभी भी स्थानीय मान और तार्किक अनुमानों का उपयोग करते हैं।

  • गुणा संक्रिया:
  1. इकाई का स्थान: गुणनफल के इकाई अंक पर ध्यान दें। यह अक्सर अज्ञात अंकों के लिए कुछ संभावित मानों को सीमित कर देता है।
  2. हासिल (कैरी): गुणा में हासिल को अगले स्थान पर जोड़ना न भूलें।
  3. विस्तारित रूप: संख्याओं को उनके विस्तारित रूप में लिखकर समीकरण बनाना अक्सर सहायक होता है।
  4. तार्किक अनुमान: अंकों के संभावित मानों (0-9) का उपयोग करके अनुमान लगाएँ और जाँच करें।
  • उदाहरण 1:

` AB x AB ----- ACC `

  • \((10A + B) \times (10A + B) = 100A + 10C + C\)
  • \((10A + B)^2 = 100A + 11C\)
  • हम जानते हैं कि \(B^2\) का इकाई अंक C होगा।
  • \(A\) का मान 1 होना चाहिए, क्योंकि \(10A + B\) दो अंकों की संख्या है और \((10A+B)^2\) तीन अंकों की संख्या है जिसका पहला अंक A है। यदि \(A=2\), तो \(20^2 = 400\), जो \(ACC\) के रूप में नहीं हो सकता (पहला अंक 4 होगा, A=2)। यदि \(A=1\), तो \(10+B\) का वर्ग \(100+11C\) होगा।
  • यदि \(A=1\):

\((10 + B)^2 = 100 + 11C\) \(100 + 20B + B^2 = 100 + 11C\) \(20B + B^2 = 11C\)

  • हम जानते हैं कि \(B^2\) का इकाई अंक C है।
  • यदि \(B=1\), \(20(1) + 1^2 = 21\). \(11C = 21\) (C पूर्णांक नहीं)।
  • यदि \(B=2\), \(20(2) + 2^2 = 40 + 4 = 44\). \(11C = 44 \implies C=4\). यह सही है।
  • तो, \(A=1, B=2, C=4\)।
  • जाँच: \(12 \times 12 = 144\) (सही है)।
  • उदाहरण 2:

` MN x 3 ----- LMN `

  • इकाई का स्थान: \(3 \times N\) का इकाई अंक N है। यह तभी संभव है जब \(N=0\) या \(N=5\)।
  • स्थिति 1: यदि \(N=5\)
  • \(3 \times 5 = 15\)। इकाई अंक 5 है, हासिल 1 है।
  • दहाई का स्थान: \(3 \times M + 1\) (हासिल) का इकाई अंक M है।
  • संभावित मान: \(3M+1\) का इकाई अंक M हो।
  • यदि \(M=1\), \(3(1)+1 = 4 \neq 1\)
  • यदि \(M=2\), \(3(2)+1 = 7 \neq 2\)
  • यदि \(M=3\), \(3(3)+1 = 10 \neq 3\)
  • यदि \(M=4\), \(3(4)+1 = 13 \neq 4\)
  • यदि \(M=5\), \(3(5)+1 = 16 \neq 5\)
  • यदि \(M=6\), \(3(6)+1 = 19 \neq 6\)
  • यदि \(M=7\), \(3(7)+1 = 22 \neq 7\)
  • यदि \(M=8\), \(3(8)+1 = 25 \neq 8\)
  • यदि \(M=9\), \(3(9)+1 = 28 \neq 9\)
  • कोई भी M का मान काम नहीं करता। अतः \(N=5\) संभव नहीं है।
  • स्थिति 2: यदि \(N=0\)
  • \(3 \times 0 = 0\)। इकाई अंक 0 है, हासिल 0 है।
  • दहाई का स्थान: \(3 \times M + 0\) (हासिल) का इकाई अंक M है।
  • \(3M\) का इकाई अंक M हो। यह तभी संभव है जब \(M=0\) या \(M=5\)।
  • यदि \(M=0\), तो \(MN = 00\), जो दो अंकों की संख्या नहीं है। (M पहला अंक है, 0 नहीं हो सकता)।
  • यदि \(M=5\), तो \(3 \times 5 = 15\)। इकाई अंक 5 है, हासिल 1 है।
  • तो, \(M=5, N=0\)।
  • सैकड़े का स्थान: हासिल 1 है, तो \(L=1\)।
  • हल: \(L=1, M=5, N=0\)।
  • जाँच: \(50 \times 3 = 150\) (सही है)।
  • भाग संक्रिया:
  • भाग के सवालों में, आप अक्सर इसे गुणा के रूप में बदलकर हल कर सकते हैं।
  • उदाहरण: \(73M \div 8 = 9N\) को \(73M = 8 \times 9N\) के रूप में लिखा जा सकता है।
  • फिर गुणा के नियमों का उपयोग करके हल करें।

याद रखें: धैर्य रखें और व्यवस्थित तरीके से संभावित मानों की जाँच करें।

याद रखें

गुणा और भाग में, अंकों के संभावित मानों (0-9) को एक-एक करके आज़माना और तार्किक रूप से अमान्य विकल्पों को हटाना एक प्रभावी रणनीति है।

तीन अंकों की संख्या पहेली

यह खंड एक रोचक संख्या पहेली पर केंद्रित है जो संख्याओं के विस्तारित रूप के महत्व को दर्शाती है।

  • पहेली का नियम:
  1. कोई भी तीन अलग-अलग अंक (शून्य को छोड़कर) चुनें: मान लीजिए \(a, b, c\)।
  2. इन अंकों से बनने वाली सभी दो अंकों की संख्याएँ लिखें। (जैसे \(ab, ac, ba, bc, ca, cb\))
  3. इन सभी दो अंकों की संख्याओं का योग करें।
  4. इस योग को 22 से भाग दें।
  5. भागफल चुने गए अंकों का योग (\(a+b+c\)) होगा।
  • यह कैसे काम करता है? (उपपत्ति):
  • चुने गए तीन अंक \(a, b, c\) हैं।
  • इनसे बनने वाली दो अंकों की संख्याएँ और उनके विस्तारित रूप:
  • \(ab = 10a + b\)
  • \(ac = 10a + c\)
  • \(ba = 10b + a\)
  • \(bc = 10b + c\)
  • \(ca = 10c + a\)
  • \(cb = 10c + b\)
  • इन सभी संख्याओं का योग:

\((10a + b) + (10a + c) + (10b + a) + (10b + c) + (10c + a) + (10c + b)\) \(= (10a + 10a + a + a) + (b + b + 10b + 10b) + (c + c + 10c + 10c)\) \(= 22a + 22b + 22c\) \(= 22(a + b + c)\)

  • चूँकि योग \(22(a+b+c)\) है, यह स्पष्ट रूप से 22 का गुणज है।
  • जब इस योग को 22 से भाग दिया जाता है, तो भागफल \(\frac{22(a+b+c)}{22} = a+b+c\) होता है, जो कि चुने गए अंकों का योग है।
  • निष्कर्ष: यह पहेली संख्याओं के विस्तारित रूप और बीजगणितीय सरलीकरण का एक सुंदर उदाहरण है।
🧮सूत्र

इस पहेली का रहस्य यह है कि सभी संभावित दो अंकों की संख्याओं का योग हमेशा \(22 \times (अंकों का योग)\) के बराबर होता है।

अंकों के पलटने पर संख्याओं के गुणधर्म

संख्याओं के अंकों को पलटने पर कुछ रोचक गुणधर्म सामने आते हैं।

  • दो अंकों की संख्या:
  • एक दो अंकों की संख्या \(AB\) लें, जिसका विस्तारित रूप \(10A + B\) है।
  • अंकों को पलटने पर बनी संख्या \(BA\) होगी, जिसका विस्तारित रूप \(10B + A\) है।
  • योग: दोनों संख्याओं का योग:

\((10A + B) + (10B + A) = 11A + 11B = 11(A + B)\)

  • निष्कर्ष: दो अंकों की संख्या और उसके अंकों को पलटने पर बनी संख्या का योग हमेशा 11 से विभाज्य होता है। भागफल अंकों का योग \((A+B)\) होता है।
  • अंतर: दोनों संख्याओं का अंतर (बड़ी संख्या में से छोटी घटाने पर):
  • यदि \(A > B\): \((10A + B) - (10B + A) = 9A - 9B = 9(A - B)\)
  • यदि \(B > A\): \((10B + A) - (10A + B) = 9B - 9A = 9(B - A)\)
  • निष्कर्ष: दो अंकों की संख्या और उसके अंकों को पलटने पर बनी संख्या का अंतर हमेशा 9 से विभाज्य होता है। भागफल अंकों के अंतर \(|A-B|\) के बराबर होता है।
  • तीन अंकों की संख्या:
  • एक तीन अंकों की संख्या \(ABC\) लें, जिसका विस्तारित रूप \(100A + 10B + C\) है।
  • अंकों को उल्टे क्रम में रखने पर बनी संख्या \(CBA\) होगी, जिसका विस्तारित रूप \(100C + 10B + A\) है।
  • अंतर: बड़ी संख्या में से छोटी संख्या घटाने पर (मान लीजिए \(A > C\)):

\((100A + 10B + C) - (100C + 10B + A)\) \(= 99A - 99C = 99(A - C)\)

  • निष्कर्ष: तीन अंकों की संख्या और उसके अंकों को पलटने पर बनी संख्या का अंतर हमेशा 99 से विभाज्य होता है। भागफल पहले और अंतिम अंक के अंतर \(|A-C|\) के बराबर होता है।
  • सोचें और चर्चा करें:
  • क्या 99 का गुणज होना हमेशा सत्य है? हाँ, क्योंकि बीजगणितीय उपपत्ति हमेशा मान्य होती है।
  • यह गुणधर्म हमें संख्याओं के पैटर्न को समझने में मदद करता है।
महत्त्वपूर्ण

अंक पलटने के गुणधर्म:

  • दो अंकों की संख्या और पलटी हुई संख्या का योग \(11(A+B)\) होता है।
  • दो अंकों की संख्या और पलटी हुई संख्या का अंतर \(9|A-B|\) होता है।
  • तीन अंकों की संख्या और पलटी हुई संख्या का अंतर \(99|A-C|\) होता है।

विभिन्न संख्याओं से विभाज्यता के नियम

विभाज्यता के नियम हमें बिना भाग किए यह जानने में मदद करते हैं कि कोई संख्या किसी दूसरी संख्या से पूर्णतः विभाज्य है या नहीं।

1. 10 से विभाज्यता

  • नियम: कोई संख्या 10 से विभाज्य होती है यदि उसका इकाई का अंक 0 हो।
  • उपपत्ति:
  • किसी भी संख्या \(...cba\) को विस्तारित रूप में \(... + 100c + 10b + a\) लिखा जा सकता है।
  • यहाँ \(100c\) और \(10b\) जैसे पद 10 से विभाज्य हैं (क्योंकि उनमें 10 का गुणज है)।
  • इसलिए, पूरी संख्या 10 से तभी विभाज्य होगी जब शेष \(a\) (इकाई का अंक) भी 10 से विभाज्य हो, जो तभी संभव है जब \(a=0\)।
  • उदाहरण: 340, 9560, 800 (विभाज्य); 345, 9561 (विभाज्य नहीं)।

2. 5 से विभाज्यता

  • नियम: कोई संख्या 5 से विभाज्य होती है यदि उसका इकाई का अंक 0 या 5 हो।
  • उपपत्ति:
  • संख्या \(...cba\) का विस्तारित रूप \(... + 100c + 10b + a\) है।
  • \(100c\) और \(10b\) जैसे पद 10 से विभाज्य हैं, और चूंकि \(10 = 5 \times 2\), ये पद 5 से भी विभाज्य होंगे।
  • इसलिए, पूरी संख्या 5 से तभी विभाज्य होगी जब \(a\) (इकाई का अंक) भी 5 से विभाज्य हो, जो तभी संभव है जब \(a=0\) या \(a=5\)।
  • उदाहरण: 205, 800 (विभाज्य); 316, 311 (विभाज्य नहीं)।

3. 2 से विभाज्यता

  • नियम: कोई संख्या 2 से विभाज्य होती है यदि उसका इकाई का अंक 0, 2, 4, 6, या 8 (यानी सम संख्या) हो।
  • उपपत्ति:
  • संख्या \(...cba\) का विस्तारित रूप \(... + 100c + 10b + a\) है।
  • \(100c\) और \(10b\) जैसे पद 10 से विभाज्य हैं, और चूंकि \(10 = 2 \times 5\), ये पद 2 से भी विभाज्य होंगे।
  • इसलिए, पूरी संख्या 2 से तभी विभाज्य होगी जब \(a\) (इकाई का अंक) भी 2 से विभाज्य हो, जो तभी संभव है जब \(a\) एक सम अंक हो।
  • उदाहरण: 316, 9560, 800, 7936 (विभाज्य); 205, 311 (विभाज्य नहीं)।

4. 9 और 3 से विभाज्यता

  • नियम (9 से): कोई संख्या 9 से विभाज्य होती है यदि उसके अंकों का योग 9 से विभाज्य हो।
  • नियम (3 से): कोई संख्या 3 से विभाज्य होती है यदि उसके अंकों का योग 3 से विभाज्य हो।
  • उपपत्ति (उदाहरण 4 अंकों की संख्या \(abcd\) के लिए):
  • \(1000a + 100b + 10c + d\)
  • \(= (999a + a) + (99b + b) + (9c + c) + d\)
  • \(= (999a + 99b + 9c) + (a + b + c + d)\)
  • \(= 9(111a + 11b + c) + (a + b + c + d)\)
  • यहाँ, \(9(111a + 11b + c)\) वाला भाग हमेशा 9 (और इसलिए 3) से विभाज्य होता है।
  • इसलिए, पूरी संख्या 9 (या 3) से तभी विभाज्य होगी जब \((a + b + c + d)\) (अंकों का योग) भी 9 (या 3) से विभाज्य हो।
  • उदाहरण:
  • संख्या 3429: अंकों का योग \(3+4+2+9 = 18\)। 18, 9 और 3 दोनों से विभाज्य है, अतः 3429 भी 9 और 3 दोनों से विभाज्य है।
  • संख्या 3579: अंकों का योग \(3+5+7+9 = 24\)। 24, 3 से विभाज्य है लेकिन 9 से नहीं, अतः 3579, 3 से विभाज्य है लेकिन 9 से नहीं।

5. 6 से विभाज्यता

  • नियम: कोई संख्या 6 से विभाज्य होती है यदि वह 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो।
  • कारण: क्योंकि 6 के अभाज्य गुणनखंड \(2 \times 3\) हैं।
  • जाँच विधि:
  1. जाँचें कि संख्या का इकाई अंक सम है (0, 2, 4, 6, 8)। यदि नहीं, तो 6 से विभाज्य नहीं है।
  2. जाँचें कि संख्या के अंकों का योग 3 से विभाज्य है। यदि नहीं, तो 6 से विभाज्य नहीं है।
  3. यदि दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तो संख्या 6 से विभाज्य है।
  • उदाहरण: संख्या 1248
  • इकाई अंक 8 (सम) है, अतः 2 से विभाज्य है।
  • अंकों का योग \(1+2+4+8 = 15\)। 15, 3 से विभाज्य है, अतः 3 से विभाज्य है।
  • चूँकि 1248, 2 और 3 दोनों से विभाज्य है, अतः यह 6 से भी विभाज्य है।

6. 7 से विभाज्यता

  • 7 से विभाज्यता के कई नियम हैं। यहाँ दो मुख्य नियम दिए गए हैं:
  • नियम 1 (3 अंकों की संख्या \(abc\) के लिए):
  • संख्या \(abc\) 7 से विभाज्य होगी यदि \((2a + 3b + c)\) 7 से विभाज्य हो।
  • उपपत्ति: \(100a + 10b + c = 98a + 7b + (2a + 3b + c) = 7(14a + b) + (2a + 3b + c)\)
  • चूंकि \(7(14a + b)\) हमेशा 7 से विभाज्य होता है, तो \(abc\) तभी 7 से विभाज्य होगा जब \((2a + 3b + c)\) भी 7 से विभाज्य हो।
  • उदाहरण: 672 के लिए, \(a=6, b=7, c=2\)

\(2(6) + 3(7) + 2 = 12 + 21 + 2 = 35\) चूंकि 35, 7 से विभाज्य है, अतः 672 भी 7 से विभाज्य है।

  • नियम 2 (बड़ी संख्याओं के लिए):
  • संख्या के इकाई अंक का दोगुना करें।
  • इस दोगुने मान को शेष संख्या (इकाई अंक को छोड़कर) में से घटाएँ।
  • यदि परिणाम 7 से विभाज्य है (या 0 है), तो मूल संख्या 7 से विभाज्य है। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जा सकता है जब तक एक छोटी संख्या न मिल जाए जिसकी 7 से विभाज्यता आसानी से जाँची जा सके।
  • उदाहरण: 364847 के लिए:
  1. इकाई अंक 7, दोगुना = 14। शेष संख्या = 36484। \(36484 - 14 = 36470\)
  2. इकाई अंक 0, दोगुना = 0। शेष संख्या = 3647। \(3647 - 0 = 3647\)
  3. इकाई अंक 7, दोगुना = 14। शेष संख्या = 364। \(364 - 14 = 350\)
  4. इकाई अंक 0, दोगुना = 0। शेष संख्या = 35। \(35 - 0 = 35\)

चूंकि 35, 7 से विभाज्य है (\(35 = 7 \times 5\)), अतः 364847 भी 7 से विभाज्य है।

7. 11 से विभाज्यता

  • नियम: कोई संख्या 11 से विभाज्य होती है यदि उसके विषम स्थानों पर स्थित अंकों के योग और सम स्थानों पर स्थित अंकों के योग का अंतर 0 हो या 11 से विभाज्य हो। (दाएँ से बाएँ गिनना शुरू करें, इकाई का स्थान विषम स्थान है)।
  • उपपत्ति (उदाहरण 4 अंकों की संख्या \(abcd\) के लिए):
  • \(1000a + 100b + 10c + d\)
  • इसे \(11(91a + 9b + c) - (a - b + c - d)\) के रूप में लिखा जा सकता है।
  • यहाँ \(11(91a + 9b + c)\) हमेशा 11 से विभाज्य होता है।
  • इसलिए, पूरी संख्या 11 से तभी विभाज्य होगी जब \((a - b + c - d)\) 0 हो या 11 से विभाज्य हो।
  • \((a - b + c - d)\) को \((a+c) - (b+d)\) के रूप में भी लिखा जा सकता है, जो विषम स्थानों के अंकों का योग (d, b) और सम स्थानों के अंकों का योग (c, a) का अंतर है। (यहाँ a,b,c,d को क्रमशः हजारवें, सौवें, दहाई और इकाई के अंक के रूप में लिया गया है। विषम स्थान: d, b; सम स्थान: c, a)।
  • उदाहरण: संख्या 124575 के लिए:
  • विषम स्थानों के अंक (दाएँ से): 5 (इकाई), 5 (सैकड़ा), 2 (दस हजार)
  • विषम स्थानों के अंकों का योग = \(5 + 5 + 2 = 12\)
  • सम स्थानों के अंक (दाएँ से): 7 (दहाई), 4 (हजार), 1 (लाख)
  • सम स्थानों के अंकों का योग = \(7 + 4 + 1 = 12\)
  • अंतर = \(12 - 12 = 0\)
  • चूंकि अंतर 0 है, अतः 124575, 11 से विभाज्य है।
  • महत्वपूर्ण: इन नियमों को याद रखना और अभ्यास करना परीक्षा के लिए बहुत उपयोगी है।
💡सुझाव

विभाज्यता नियमों का सारांश:

  • 2: इकाई अंक सम (0, 2, 4, 6, 8)
  • 3: अंकों का योग 3 से विभाज्य
  • 5: इकाई अंक 0 या 5
  • 6: 2 और 3 दोनों से विभाज्य
  • 7: इकाई अंक का दोगुना करके शेष संख्या से घटाएँ, परिणाम 7 से विभाज्य हो।
  • 9: अंकों का योग 9 से विभाज्य
  • 10: इकाई अंक 0
  • 11: विषम स्थान के अंकों के योग और सम स्थान के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज हो।
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