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राशियों की तुलना
Chhattisgarh · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 7

राशियों की तुलना

अनुपातप्रतिशतबट्टाबिक्री करसाधारण ब्याजचक्रवृद्धि ब्याज

अध्याय 'राशियों की तुलना' छात्रों को दो या दो से अधिक राशियों की तुलना करने के विभिन्न तरीकों से परिचित कराता है। इसमें अनुपात और समानुपात की अवधारणाओं को समझाया गया है, जिसके बाद प्रतिशत की विस्तृत चर्चा की गई है। छात्र बट्टा, बिक्री कर, साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज जैसे वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों को सीखते हैं। यह अध्याय दैनिक जीवन में वित्तीय गणनाओं और तुलनात्मक विश्लेषण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

अनुपात और समानुपात की अवधारणा

राशियों की तुलना गणित का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम अक्सर दो या दो से अधिक राशियों की तुलना करते हैं। तुलना के मुख्य तरीके हैं:

  • अंतर द्वारा तुलना: यह बताता है कि एक राशि दूसरी से कितनी अधिक या कम है।
  • भाग द्वारा तुलना (अनुपात): यह बताता है कि एक राशि दूसरी राशि का कितना गुना है या कौन सा भाग है।

अनुपात (Ratio)

  • दो समान प्रकार की राशियों की तुलना भाग विधि से करना अनुपात कहलाता है।
  • अनुपात को a : b या a/b के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ b ≠ 0
  • अनुपात की कोई इकाई नहीं होती क्योंकि यह समान इकाइयों वाली राशियों का भागफल होता है।
  • अनुपात को हमेशा सरलतम रूप में व्यक्त किया जाता है।

उदाहरण: यदि एक कक्षा में 20 लड़के और 30 लड़कियाँ हैं, तो लड़कों और लड़कियों की संख्या का अनुपात 20 : 30 या 2 : 3 है।

समानुपात (Proportion)

  • जब दो अनुपात बराबर होते हैं, तो वे समानुपात में कहलाते हैं।
  • यदि a : b और c : d दो अनुपात समान हैं, तो हम लिखते हैं a : b :: c : d या a/b = c/d
  • इसमें a और d को बाह्य पद (Extremes) और b और c को मध्य पद (Means) कहते हैं।
  • समानुपात का महत्वपूर्ण गुणधर्म है: बाह्य पदों का गुणनफल = मध्य पदों का गुणनफल (ad = bc)

उदाहरण: यदि 2 : 3 और 4 : 6 समानुपात में हैं, तो 2/3 = 4/6। यहाँ 2 × 6 = 12 और 3 × 4 = 12

अनुलोम समानुपात (Direct Proportion)

  • यदि एक राशि के बढ़ने पर दूसरी राशि भी उसी अनुपात में बढ़ती है, या एक राशि के घटने पर दूसरी राशि भी उसी अनुपात में घटती है, तो वे अनुलोम समानुपात में होती हैं।
  • उदाहरण: खरीदी गई वस्तुओं की संख्या और उनका कुल मूल्य।

प्रतिलोम समानुपात (Inverse Proportion)

  • यदि एक राशि के बढ़ने पर दूसरी राशि उसी अनुपात में घटती है, या एक राशि के घटने पर दूसरी राशि उसी अनुपात में बढ़ती है, तो वे प्रतिलोम समानुपात में होती हैं।
  • उदाहरण: किसी कार्य को करने वाले व्यक्तियों की संख्या और कार्य पूरा करने में लगने वाला समय।
महत्त्वपूर्ण

अनुपात हमेशा समान इकाइयों वाली राशियों के बीच होता है। यदि इकाइयाँ भिन्न हैं, तो पहले उन्हें समान इकाई में बदलें।

🧮सूत्र

समानुपात का नियम: यदि \(a:b::c:d\) तो \(a \times d = b \times c\)

प्रतिशत की अवधारणा और गणना

प्रतिशत (Percentage) क्या है?

  • प्रतिशत का अर्थ है 'प्रति सौ' या 'सौ में से'।
  • यह राशियों की तुलना का एक और तरीका है, जहाँ हम किसी भी राशि को 100 के आधार पर व्यक्त करते हैं।
  • इसे '%' चिह्न से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: 25% का अर्थ है 100 में से 25 या \(25/100\).

प्रतिशत में बदलना

  • भिन्न को प्रतिशत में बदलना: भिन्न को 100 से गुणा करें।
  • उदाहरण: \(1/4 = (1/4) \times 100\% = 25\%\)
  • दशमलव को प्रतिशत में बदलना: दशमलव को 100 से गुणा करें।
  • उदाहरण: \(0.75 = 0.75 \times 100\% = 75\%\)

प्रतिशत से भिन्न/दशमलव में बदलना

  • प्रतिशत को भिन्न में बदलना: प्रतिशत को 100 से भाग दें।
  • उदाहरण: \(40\% = 40/100 = 2/5\)
  • प्रतिशत को दशमलव में बदलना: प्रतिशत को 100 से भाग दें।
  • उदाहरण: \(65\% = 65/100 = 0.65\)

प्रतिशत वृद्धि या कमी

  • प्रतिशत वृद्धि: \( (\text{अंतिम मान} - \text{प्रारंभिक मान}) / \text{प्रारंभिक मान} \times 100\% \)
  • प्रतिशत कमी: \( (\text{प्रारंभिक मान} - \text{अंतिम मान}) / \text{प्रारंभिक मान} \times 100\% \)

उदाहरण: यदि किसी वस्तु का मूल्य 50 रुपये से बढ़कर 60 रुपये हो जाता है, तो प्रतिशत वृद्धि है: \( (60 - 50) / 50 \times 100\% = (10/50) \times 100\% = 20\% \)

याद रखें

प्रतिशत का उपयोग विभिन्न राशियों की तुलना को आसान बनाता है, खासकर जब कुल राशियाँ अलग-अलग हों।

💡सुझाव

प्रतिशत गणना में आधार राशि (जिसके संदर्भ में प्रतिशत निकाला जा रहा है) को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।

बट्टा और बिक्री कर की गणना

बट्टा (Discount)

  • बट्टा या छूट वह राशि है जो किसी वस्तु के अंकित मूल्य (Marked Price - MP) पर दी जाती है।
  • यह ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए दिया जाता है।
  • बट्टा = अंकित मूल्य - विक्रय मूल्य (Selling Price - SP)
  • बट्टा प्रतिशत हमेशा अंकित मूल्य पर ही ज्ञात किया जाता है।
  • बट्टा प्रतिशत \( = (\text{बट्टा} / \text{अंकित मूल्य}) \times 100\% \)
  • विक्रय मूल्य \( = \text{अंकित मूल्य} - \text{बट्टा} \)
  • या, विक्रय मूल्य \( = \text{अंकित मूल्य} \times (100 - \text{बट्टा प्रतिशत}) / 100 \)

उदाहरण: एक वस्तु का अंकित मूल्य 500 रुपये है और इस पर 10% बट्टा दिया जाता है।

  • बट्टा = \(10\% \text{ का } 500 = (10/100) \times 500 = 50\) रुपये।
  • विक्रय मूल्य = \(500 - 50 = 450\) रुपये।

बिक्री कर (Sales Tax) / मूल्य वर्धित कर (VAT) / वस्तु एवं सेवा कर (GST)

  • बिक्री कर वह कर है जो सरकार द्वारा किसी वस्तु या सेवा की बिक्री पर लगाया जाता है।
  • यह कर वस्तु के विक्रय मूल्य पर जोड़ा जाता है
  • बिक्री कर की राशि \( = (\text{विक्रय मूल्य} \times \text{कर की दर}) / 100 \)
  • ग्राहक द्वारा भुगतान की गई कुल राशि \( = \text{विक्रय मूल्य} + \text{बिक्री कर} \)

उदाहरण: एक वस्तु का विक्रय मूल्य 1000 रुपये है और बिक्री कर 5% है।

  • बिक्री कर = \(5\% \text{ का } 1000 = (5/100) \times 1000 = 50\) रुपये।
  • कुल भुगतान = \(1000 + 50 = 1050\) रुपये।

बट्टा और बिक्री कर में अंतर: बट्टा अंकित मूल्य से घटाया जाता है, जबकि बिक्री कर विक्रय मूल्य में जोड़ा जाता है।

🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर बट्टा प्रतिशत की गणना विक्रय मूल्य पर कर देते हैं, जबकि यह हमेशा अंकित मूल्य पर होता है। बिक्री कर विक्रय मूल्य पर लगता है।

🧮सूत्र

बट्टा प्रतिशत: \( \frac{\text{बट्टा}}{\text{अंकित मूल्य}} \times 100 \% \) कुल भुगतान (कर सहित): \( \text{विक्रय मूल्य} \times (1 + \frac{\text{कर दर}}{100}) \)

ब्याज की अवधारणा और प्रकार

ब्याज (Interest) क्या है?

  • ब्याज वह अतिरिक्त धन है जो किसी उधार ली गई या दी गई राशि (मूलधन) के उपयोग के बदले चुकाया जाता है या प्राप्त किया जाता है।
  • यह मूलधन, ब्याज दर और समय पर निर्भर करता है।

ब्याज के प्रकार

  1. साधारण ब्याज (Simple Interest - SI)
  • साधारण ब्याज की गणना हमेशा मूलधन (Principal - P) पर की जाती है।
  • ब्याज की राशि प्रत्येक वर्ष समान रहती है।
  • सूत्र: \( SI = (P \times R \times T) / 100 \)
  • जहाँ, \(P\) = मूलधन, \(R\) = वार्षिक ब्याज दर (प्रतिशत में), \(T\) = समय (वर्षों में)।
  • मिश्रधन (Amount - A) = मूलधन + साधारण ब्याज \( = P + SI \)

उदाहरण: 10,000 रुपये पर 2 वर्ष के लिए 5% वार्षिक दर से साधारण ब्याज।

  • \(SI = (10000 \times 5 \times 2) / 100 = 1000\) रुपये।
  • मिश्रधन = \(10000 + 1000 = 11000\) रुपये।
  1. चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest - CI)
  • चक्रवृद्धि ब्याज में, ब्याज की गणना मूलधन और पिछले वर्षों के संचित ब्याज दोनों पर की जाती है।
  • ब्याज पर ब्याज लगता है, जिससे कुल ब्याज की राशि साधारण ब्याज से अधिक होती है।
  • यह अधिक यथार्थवादी होता है और बैंकों द्वारा ऋण व जमा पर उपयोग किया जाता है।
  • सूत्र: \( A = P(1 + R/100)^n \)
  • जहाँ, \(A\) = मिश्रधन, \(P\) = मूलधन, \(R\) = वार्षिक ब्याज दर, \(n\) = समय (वर्षों में)।
  • चक्रवृद्धि ब्याज (CI) = मिश्रधन - मूलधन \( = A - P \)

उदाहरण: 10,000 रुपये पर 2 वर्ष के लिए 5% वार्षिक दर से चक्रवृद्धि ब्याज।

  • वर्ष 1 का ब्याज = \( (10000 \times 5 \times 1) / 100 = 500\) रुपये।
  • वर्ष 1 के अंत में मिश्रधन = \(10000 + 500 = 10500\) रुपये।
  • वर्ष 2 के लिए मूलधन = 10500 रुपये।
  • वर्ष 2 का ब्याज = \( (10500 \times 5 \times 1) / 100 = 525\) रुपये।
  • वर्ष 2 के अंत में मिश्रधन = \(10500 + 525 = 11025\) रुपये।
  • कुल चक्रवृद्धि ब्याज = \(11025 - 10000 = 1025\) रुपये।
  • सूत्र से: \( A = 10000(1 + 5/100)^2 = 10000(1.05)^2 = 10000 \times 1.1025 = 11025\) रुपये।
  • \(CI = 11025 - 10000 = 1025\) रुपये।

साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज में अंतर

| विशेषता | साधारण ब्याज | चक्रवृद्धि ब्याज | |:-----------|:---------------------------------------------|:-----------------------------------------------------| | गणना आधार | हमेशा मूलधन पर | मूलधन और संचित ब्याज दोनों पर | | ब्याज राशि | प्रत्येक अवधि में समान | प्रत्येक अवधि में बढ़ती जाती है | | कुल राशि | कम | अधिक | | उपयोग | अल्पकालिक ऋण, कुछ सरल गणनाएँ | बैंक ऋण, जमा, निवेश, जनसंख्या वृद्धि आदि |

🧮सूत्र

साधारण ब्याज: \( SI = \frac{P \times R \times T}{100} \) चक्रवृद्धि मिश्रधन: \( A = P(1 + \frac{R}{100})^n \) चक्रवृद्धि ब्याज: \( CI = A - P \)

महत्त्वपूर्ण

एक वर्ष के लिए साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज समान होते हैं। अंतर दूसरे वर्ष से शुरू होता है।

चक्रवृद्धि ब्याज की गणना सूत्र

चक्रवृद्धि ब्याज की गणना विभिन्न अवधियों के लिए की जा सकती है, जैसे वार्षिक, अर्द्धवार्षिक या तिमाही। इससे ब्याज की दर और समय में परिवर्तन होता है।

1. वार्षिक संयोजन (Annually Compounded)

  • यह सबसे सामान्य स्थिति है जहाँ ब्याज की गणना प्रति वर्ष की जाती है।
  • सूत्र: \( A = P(1 + R/100)^n \)
  • \(P\) = मूलधन
  • \(R\) = वार्षिक ब्याज दर
  • \(n\) = वर्षों की संख्या

2. अर्द्धवार्षिक संयोजन (Half-Yearly Compounded)

  • जब ब्याज हर छह महीने में संयोजित होता है।
  • एक वर्ष में 2 अर्द्धवार्षिक अवधियाँ होती हैं।
  • ब्याज दर: वार्षिक दर की आधी हो जाती है (\(R/2\)).
  • समय: वर्षों की संख्या को 2 से गुणा किया जाता है (\(2n\) अर्द्धवार्षिक अवधियाँ)।
  • सूत्र: \( A = P(1 + (R/2)/100)^{2n} \) या \( A = P(1 + R/200)^{2n} \)

3. तिमाही संयोजन (Quarterly Compounded)

  • जब ब्याज हर तीन महीने में संयोजित होता है।
  • एक वर्ष में 4 तिमाही अवधियाँ होती हैं।
  • ब्याज दर: वार्षिक दर की एक चौथाई हो जाती है (\(R/4\)).
  • समय: वर्षों की संख्या को 4 से गुणा किया जाता है (\(4n\) तिमाही अवधियाँ)।
  • सूत्र: \( A = P(1 + (R/4)/100)^{4n} \) या \( A = P(1 + R/400)^{4n} \)

4. मासिक संयोजन (Monthly Compounded)

  • जब ब्याज हर महीने में संयोजित होता है।
  • एक वर्ष में 12 मासिक अवधियाँ होती हैं।
  • ब्याज दर: वार्षिक दर की बारहवीं हो जाती है (\(R/12\)).
  • समय: वर्षों की संख्या को 12 से गुणा किया जाता है (\(12n\) मासिक अवधियाँ)।
  • सूत्र: \( A = P(1 + (R/12)/100)^{12n} \) या \( A = P(1 + R/1200)^{12n} \)

विभिन्न दरों पर चक्रवृद्धि ब्याज

  • यदि ब्याज की दर लगातार वर्षों में अलग-अलग हो (जैसे पहले वर्ष \(R_1\%\), दूसरे वर्ष \(R_2\%\), तीसरे वर्ष \(R_3\%\)), तो मिश्रधन की गणना इस प्रकार की जाती है:
  • सूत्र: \( A = P(1 + R_1/100)(1 + R_2/100)(1 + R_3/100) \)

सारांश तालिका:

| संयोजन अवधि | ब्याज दर (R) में परिवर्तन | समय (n) में परिवर्तन | मिश्रधन सूत्र | |:------------|:--------------------------|:--------------------|:-----------------------------------------------------| | वार्षिक | \(R\) | \(n\) | \(A = P(1 + R/100)^n\) | | अर्द्धवार्षिक | \(R/2\) | \(2n\) | \(A = P(1 + R/200)^{2n}\) | | तिमाही | \(R/4\) | \(4n\) | \(A = P(1 + R/400)^{4n}\) | | मासिक | \(R/12\) | \(12n\) | \(A = P(1 + R/1200)^{12n}\) |

💡सुझाव

संयोजन अवधि के अनुसार ब्याज दर और समय को सही ढंग से समायोजित करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। अक्सर छात्र इसमें गलती करते हैं।

🧮सूत्र

साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज का अंतर (2 वर्ष के लिए): \( CI - SI = P(R/100)^2 \) साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज का अंतर (3 वर्ष के लिए): \( CI - SI = P(R/100)^2 (3 + R/100) \)

चक्रवृद्धि ब्याज के सूत्र के अनुप्रयोग

चक्रवृद्धि ब्याज का सूत्र केवल धन के लेन-देन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग कई अन्य वास्तविक जीवन की स्थितियों में भी किया जाता है जहाँ वृद्धि या कमी एक निश्चित दर पर होती है।

1. जनसंख्या वृद्धि या ह्रास (कमी)

  • जनसंख्या वृद्धि होने पर: \( \text{अंतिम जनसंख्या} = \text{वर्तमान जनसंख्या} \times (1 + \text{वृद्धि दर}/100)^{\text{समय}} \)
  • जनसंख्या में कमी होने पर: \( \text{अंतिम जनसंख्या} = \text{वर्तमान जनसंख्या} \times (1 - \text{कमी दर}/100)^{\text{समय}} \)

2. किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि या अवमूल्यन (Depreciation)

  • कीमत में वृद्धि होने पर: \( \text{अंतिम मूल्य} = \text{वर्तमान मूल्य} \times (1 + \text{वृद्धि दर}/100)^{\text{समय}} \)
  • अवमूल्यन (कीमत में कमी) होने पर: \( \text{अंतिम मूल्य} = \text{वर्तमान मूल्य} \times (1 - \text{अवमूल्यन दर}/100)^{\text{समय}} \)

3. विभिन्न दरों पर वृद्धि या कमी

  • यदि वृद्धि/कमी दर अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग हो, तो उसी प्रकार गणना की जाती है जैसे विभिन्न ब्याज दरों के लिए चक्रवृद्धि मिश्रधन की गणना की जाती है।
  • सूत्र: \( \text{अंतिम मान} = \text{प्रारंभिक मान} \times (1 \pm R_1/100)(1 \pm R_2/100)(1 \pm R_3/100) \)
  • जहाँ \(+\) वृद्धि के लिए और \(-\) कमी के लिए है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • इन सभी अनुप्रयोगों में, 'समय' को 'अवधियों की संख्या' के रूप में समझा जाता है।
  • 'दर' प्रति अवधि की दर होती है।
  • यह सूत्र तभी लागू होता है जब वृद्धि या कमी एक निश्चित प्रतिशत दर पर हो।
🧮सूत्र

जनसंख्या वृद्धि: \( P_n = P_0(1 + R/100)^n \) जनसंख्या कमी/अवमूल्यन: \( P_n = P_0(1 - R/100)^n \)

याद रखें

वृद्धि के लिए \((1 + R/100)\) और कमी/अवमूल्यन के लिए \((1 - R/100)\) का उपयोग करें। यह छोटी सी गलती पूरे उत्तर को बदल सकती है।

किश्त योजना और भुगतान की अवधारणा

किश्त योजना एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ ग्राहक किसी वस्तु का पूरा भुगतान एक बार में न करके, उसे नकद भुगतान (Down Payment) और फिर निश्चित मासिक/त्रैमासिक/अर्द्धवार्षिक किश्तों में चुकाता है।

किश्त योजना के घटक

  1. नकद मूल्य (Cash Price): वस्तु का वास्तविक मूल्य यदि उसे एक बार में नकद खरीदा जाए।
  2. तत्काल नकद भुगतान (Down Payment): वस्तु खरीदते समय ग्राहक द्वारा तुरंत भुगतान की गई राशि।
  3. शेष राशि (Balance Amount): नकद मूल्य में से तत्काल नकद भुगतान घटाने के बाद बची हुई राशि। इस पर ब्याज लगता है।
  4. किश्त राशि (Installment Amount): प्रत्येक निश्चित अवधि में ग्राहक द्वारा भुगतान की जाने वाली समान राशि। इसमें मूलधन का हिस्सा और ब्याज दोनों शामिल होते हैं।
  5. किश्तों की संख्या (Number of Installments): कुल किश्तों की संख्या।
  6. ब्याज (Interest): शेष राशि पर विक्रेता द्वारा लिया गया अतिरिक्त शुल्क।

किश्त योजना में ब्याज की दर ज्ञात करना

  • जब नकद मूल्य, तत्काल नकद भुगतान, किश्त राशि और किश्तों की संख्या दी गई हो, तो ब्याज की दर ज्ञात की जा सकती है।
  • यह आमतौर पर साधारण ब्याज के सिद्धांत पर आधारित होता है यदि अवधि कम हो।
  • कुल भुगतान (किश्त योजना में) = तत्काल नकद भुगतान + (प्रत्येक किश्त राशि \( \times \) किश्तों की संख्या)
  • कुल ब्याज = कुल भुगतान (किश्त योजना में) - नकद मूल्य
  • इस कुल ब्याज को शेष राशि पर साधारण ब्याज मानकर दर ज्ञात की जाती है।

किश्त की राशि ज्ञात करना

  • जब नकद मूल्य, तत्काल नकद भुगतान, ब्याज दर और किश्तों की संख्या दी गई हो, तो प्रत्येक किश्त की राशि ज्ञात की जा सकती है।
  • पहले शेष राशि पर ब्याज की गणना की जाती है।
  • फिर (शेष राशि + ब्याज) को किश्तों की संख्या से भाग देकर प्रत्येक किश्त की राशि निकाली जाती है।

नकद मूल्य ज्ञात करना

  • जब तत्काल नकद भुगतान, किश्त राशि, किश्तों की संख्या और ब्याज दर दी गई हो, तो वस्तु का नकद मूल्य ज्ञात किया जा सकता है।
  • यह थोड़ा जटिल हो सकता है क्योंकि इसमें किश्तों में शामिल ब्याज को अलग करना होता है।
  • कुल भुगतान (किश्त योजना में) = तत्काल नकद भुगतान + (प्रत्येक किश्त राशि \( \times \) किश्तों की संख्या)
  • यदि ब्याज दर दी गई है, तो किश्तों में शामिल ब्याज को हटाकर नकद मूल्य निकाला जाता है।

चक्रवृद्धि ब्याज युक्त किश्त योजनाएँ

  • यदि किश्तें एक वर्ष से अधिक समय तक दी जाती हैं या ब्याज अर्द्धवार्षिक/तिमाही संयोजित होता है, तो चक्रवृद्धि ब्याज के सूत्र का उपयोग किया जाता है।
  • यह गणना अधिक जटिल होती है और इसमें चक्रवृद्धि ब्याज के मिश्रधन सूत्र का उपयोग करके किश्त राशि या नकद मूल्य ज्ञात किया जाता है।

उदाहरण: एक वस्तु का नकद मूल्य 1000 रुपये है। 200 रुपये तत्काल नकद भुगतान और 2 मासिक किश्तों में 450 रुपये प्रति किश्त पर उपलब्ध है।

  • कुल भुगतान = \(200 + (2 \times 450) = 200 + 900 = 1100\) रुपये।
  • कुल ब्याज = \(1100 - 1000 = 100\) रुपये।
  • शेष राशि जिस पर ब्याज लगा = \(1000 - 200 = 800\) रुपये।
  • अब इस 100 रुपये ब्याज को 800 रुपये पर 2 महीने के लिए साधारण ब्याज मानकर दर ज्ञात की जा सकती है।
महत्त्वपूर्ण

किश्त योजना में हमेशा नकद मूल्य से अधिक भुगतान करना पड़ता है क्योंकि इसमें ब्याज शामिल होता है।

💡सुझाव

किश्त योजना के प्रश्नों में, यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि ब्याज साधारण है या चक्रवृद्धि, और संयोजन अवधि क्या है।

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