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आँकड़ा प्रबंधन व विश्लेषण
Chhattisgarh · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 16

आँकड़ा प्रबंधन व विश्लेषण

आँकड़ों का संग्रहणबारंबारता सारणीसमावेशी और अपवर्जी वर्गआयत चित्रआवृत्ति बहुभुजसंचयी आवृत्ति वक्र

यह अध्याय छात्रों को आँकड़ों के संग्रहण, प्रस्तुतीकरण और विश्लेषण के मूलभूत सिद्धांतों से परिचित कराता है। इसमें बारंबारता सारणी, वर्गीकृत बारंबारता सारणी (समावेशी और अपवर्जी), आयत चित्र, आवृत्ति बहुभुज और संचयी आवृत्ति वक्र (ओजाइव) जैसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाया गया है। छात्र सीखते हैं कि कैसे विभिन्न प्रकार के आँकड़ों को व्यवस्थित और ग्राफिक रूप से प्रस्तुत किया जाए, और उनसे निष्कर्ष कैसे निकाले जाएं। यह अध्याय दैनिक जीवन में आँकड़ों के महत्व और निर्णय लेने में उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डालता है।

आँकड़ों का संग्रहण और प्रारंभिक प्रस्तुतीकरण

आँकड़े वे तथ्य या संख्याएँ होती हैं जिन्हें किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए एकत्र किया जाता है।

  • आँकड़ों का संग्रहण: आँकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया।
  • प्राथमिक आँकड़े: वे आँकड़े जो अन्वेषक द्वारा स्वयं एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए एकत्र किए जाते हैं। उदाहरण: अपनी कक्षा के छात्रों के पसंदीदा खेल की जानकारी।
  • द्वितीयक आँकड़े: वे आँकड़े जो पहले से ही किसी और द्वारा एकत्र किए जा चुके हैं और अन्वेषक उनका उपयोग करता है। उदाहरण: समाचार पत्र या सरकारी रिपोर्ट से जनसंख्या के आँकड़े।
  • आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण: एकत्र किए गए आँकड़ों को व्यवस्थित और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना।
  • अव्यवस्थित आँकड़े (Raw Data): आँकड़े उनके मूल, असंगठित रूप में।
  • व्यवस्थित आँकड़े: आँकड़ों को किसी क्रम या सारणी में व्यवस्थित करना।
  • मिलान चिह्न (Tally Marks): बड़ी संख्या में प्रेक्षणों की बारंबारता को आसानी से गिनने के लिए उपयोग किए जाने वाले चिह्न।
  • प्रत्येक प्रेक्षण के लिए एक ऊर्ध्वाधर रेखा खींची जाती है।
  • हर चौथे चिह्न के बाद पाँचवाँ चिह्न पहले चार चिह्नों को काटते हुए बनाया जाता है (\\(\\cancel{IIII}\\) या \\(\\text{HH}\\)). यह पाँच के समूह बनाने में मदद करता है।
  • बारंबारता (Frequency): किसी विशेष प्रेक्षण या वर्ग अंतराल में आने वाले प्रेक्षणों की संख्या।
  • बारंबारता सारणी (Frequency Table): एक सारणी जो विभिन्न प्रेक्षणों या वर्ग अंतरालों की बारंबारता को दर्शाती है।

उदाहरण: कक्षा में छात्रों के रक्त समूह के आँकड़े एकत्र करना और उन्हें मिलान चिह्नों का उपयोग करके सारणीबद्ध करना।

महत्त्वपूर्ण

आँकड़ों का महत्व: आँकड़े हमें जानकारी को व्यवस्थित करने, समझने और उससे निष्कर्ष निकालने में मदद करते हैं, जिससे बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।

आँकड़ों को आरोही व अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना

जब आँकड़ों की संख्या बहुत अधिक न हो, तो उन्हें आरोही (बढ़ते) या अवरोही (घटते) क्रम में व्यवस्थित करके कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। यह अव्यवस्थित आँकड़ों को समझने का एक सरल तरीका है।

  • आरोही क्रम (Ascending Order): आँकड़ों को सबसे छोटे मान से सबसे बड़े मान तक व्यवस्थित करना।
  • उदाहरण: 18, 22, 35, 36, 41, 42, 45, 54, 56, 63, 71, 77, 80, 82, 99
  • अवरोही क्रम (Descending Order): आँकड़ों को सबसे बड़े मान से सबसे छोटे मान तक व्यवस्थित करना।
  • उदाहरण: 99, 82, 80, 77, 71, 63, 56, 54, 45, 42, 41, 36, 35, 22, 18

लाभ: इस व्यवस्था से सबसे छोटा मान (न्यूनतम) और सबसे बड़ा मान (अधिकतम) आसानी से पहचाना जा सकता है।

  • परास (Range): आँकड़ों के अधिकतम मान और न्यूनतम मान के बीच का अंतर।
  • सूत्र: \( ext{परास} = ext{अधिकतम मान} - ext{न्यूनतम मान} \)
  • उदाहरण: यदि अधिकतम अंक 99 और न्यूनतम अंक 18 हैं, तो परास \( = 99 - 18 = 81 \) होगा।

निष्कर्ष निकालना: आरोही/अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने के बाद, हम आसानी से बता सकते हैं:

  • सबसे अधिक बार आने वाला मान (बहुलक)।
  • मध्य में आने वाला मान (माध्यिका)।
  • किस सीमा में अधिकांश आँकड़े आते हैं।
💡सुझाव

छोटे डेटा सेट के लिए उपयोगी: आरोही/अवरोही क्रम केवल तभी प्रभावी होता है जब डेटा सेट छोटा हो। बड़े डेटा सेट के लिए वर्गीकृत बारंबारता सारणी अधिक उपयुक्त होती है।

बारंबारता बंटन सारणी का निर्माण

जब आँकड़ों की संख्या बहुत अधिक होती है और उनके न्यूनतम व अधिकतम मान में अंतर भी अधिक होता है, तो व्यक्तिगत बारंबारता सारणी बहुत बड़ी हो जाती है। ऐसी स्थिति में, हम आँकड़ों को समूहों या वर्गों में व्यवस्थित करते हैं, जिसे वर्गीकृत बारंबारता सारणी कहते हैं।

वर्गीकृत बारंबारता सारणी के घटक:

  1. वर्ग अंतराल (Class Interval): आँकड़ों को जिन समूहों में बांटा जाता है। उदाहरण: 0-10, 10-20।
  2. वर्ग की निम्न सीमा (Lower Class Limit): वर्ग अंतराल का सबसे छोटा मान। उदाहरण: वर्ग 10-20 में, 10 निम्न सीमा है।
  3. वर्ग की उच्च सीमा (Upper Class Limit): वर्ग अंतराल का सबसे बड़ा मान। उदाहरण: वर्ग 10-20 में, 20 उच्च सीमा है।
  4. वर्ग का आकार/चौड़ाई (Class Size/Width): वर्ग अंतराल की उच्च सीमा और निम्न सीमा का अंतर।
  • समावेशी वर्ग में: \( ext{उच्च सीमा} - ext{निम्न सीमा} + 1 \)
  • अपवर्जी वर्ग में: \( ext{उच्च सीमा} - ext{निम्न सीमा} \)
  1. वर्गांक/मध्य-बिंदु (Class Mark/Midpoint): वर्ग अंतराल की निम्न सीमा और उच्च सीमा का औसत।
  • सूत्र: \( ext{वर्गांक} = \frac{ ext{निम्न सीमा} + ext{उच्च सीमा}}{2} \)

वर्गीकृत बारंबारता सारणी के प्रकार:

  1. समावेशी वर्ग (Inclusive Class):
  • इस प्रकार के वर्ग अंतराल में, निम्न सीमा और उच्च सीमा दोनों उसी वर्ग में शामिल होती हैं
  • एक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा से अलग होती है (उनके बीच अंतर होता है)।
  • उदाहरण: 1-5, 6-10, 11-15। यहाँ 5 पहले वर्ग में शामिल है, और 6 अगले वर्ग में शुरू होता है।
  • समस्या: यदि कोई मान दो वर्गों के बीच के अंतर में आता है (जैसे 5.5), तो उसे किस वर्ग में रखा जाए, यह स्पष्ट नहीं होता।
  1. अपवर्जी वर्ग (Exclusive Class):
  • इस प्रकार के वर्ग अंतराल में, निम्न सीमा वर्ग में शामिल होती है, लेकिन उच्च सीमा अगले वर्ग में शामिल होती है
  • एक वर्ग की उच्च सीमा ही अगले वर्ग की निम्न सीमा होती है।
  • उदाहरण: 0-10, 10-20, 20-30। यहाँ 10 पहले वर्ग में शामिल नहीं है, बल्कि अगले वर्ग (10-20) में शामिल है।
  • लाभ: यह दशमलव मानों को आसानी से वर्गीकृत करने की अनुमति देता है और ग्राफिकल निरूपण (जैसे आयत चित्र) के लिए अधिक उपयुक्त है।

समावेशी वर्गों को अपवर्जी वर्गों में बदलना:

  • जब समावेशी वर्ग को अपवर्जी वर्ग में बदलना होता है, तो हम एक समायोजन कारक (Adjustment Factor) का उपयोग करते हैं।
  • समायोजन कारक \( = \frac{ ext{एक वर्ग की उच्च सीमा} - ext{अगले वर्ग की निम्न सीमा}}{2} \)
  • प्रक्रिया:
  1. समायोजन कारक ज्ञात करें।
  2. प्रत्येक वर्ग की निम्न सीमा से समायोजन कारक घटाएँ।
  3. प्रत्येक वर्ग की उच्च सीमा में समायोजन कारक जोड़ें।

उदाहरण: समावेशी वर्ग 1-5, 6-10 को अपवर्जी में बदलना।

  • समायोजन कारक \( = \frac{6-5}{2} = \frac{1}{2} = 0.5 \)
  • नए वर्ग:
  • \( (1 - 0.5) - (5 + 0.5) \Rightarrow 0.5 - 5.5 \)
  • \( (6 - 0.5) - (10 + 0.5) \Rightarrow 5.5 - 10.5 \)
  • आदि।
🧮सूत्र

वर्गांक (मध्य-बिंदु) सूत्र: \( \text{वर्गांक} = \frac{\text{वर्ग की निम्न सीमा} + \text{वर्ग की उच्च सीमा}}{2} \)

💡सुझाव

आयत चित्र और आवृत्ति बहुभुज बनाने के लिए हमेशा अपवर्जी वर्ग अंतराल का उपयोग करें। यदि डेटा समावेशी वर्ग में दिया गया है, तो उसे पहले अपवर्जी वर्ग में बदलें।

आयत चित्र (Histogram)

आयत चित्र वर्गीकृत सतत आँकड़ों का एक आलेखीय निरूपण है। यह बारंबारता बंटन को आयतों की एक श्रृंखला के रूप में दर्शाता है।

आयत चित्र की विशेषताएँ:

  • X-अक्ष: वर्ग अंतरालों (स्वतंत्र चर) को दर्शाता है।
  • Y-अक्ष: बारंबारताओं (आश्रित चर) को दर्शाता है।
  • आयतों का जुड़ाव: आयत एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं क्योंकि वर्ग अंतराल सतत होते हैं (कोई अंतराल नहीं)।
  • आयतों की चौड़ाई: वर्ग अंतराल के आकार के समानुपाती होती है।
  • आयतों की ऊँचाई: संगत वर्ग अंतराल की बारंबारता के समानुपाती होती है।
  • क्षेत्रफल: प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल उसके संगत वर्ग अंतराल की बारंबारता के समानुपाती होता है।

आयत चित्र बनाने के चरण (समान वर्ग अंतराल के लिए):

  1. अक्ष बनाएँ: एक ग्राफ पेपर पर X-अक्ष (क्षैतिज) और Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर) खींचें।
  2. X-अक्ष पर वर्ग अंतराल: X-अक्ष पर वर्ग अंतरालों को चिह्नित करें। यदि वर्ग 0 से शुरू नहीं होते हैं, तो मूल बिंदु और पहले वर्ग के बीच एक किंक (Kink) या ज़िग-ज़ैग रेखा का उपयोग करें।
  3. Y-अक्ष पर बारंबारता: Y-अक्ष पर बारंबारताओं को चिह्नित करें, एक उपयुक्त पैमाना चुनें।
  4. आयत बनाएँ: प्रत्येक वर्ग अंतराल के ऊपर, उसकी संगत बारंबारता के बराबर ऊँचाई का एक आयत बनाएँ। आयतों की चौड़ाई वर्ग अंतराल के बराबर होगी।

असमान वर्ग अंतराल के लिए आयत चित्र:

जब वर्ग अंतराल असमान होते हैं, तो आयतों की ऊँचाई को समायोजित करना पड़ता है ताकि क्षेत्रफल बारंबारता के समानुपाती रहे।

  • समायोजित बारंबारता (Adjusted Frequency) या बारंबारता घनत्व (Frequency Density) का उपयोग करें।
  • सूत्र: \( ext{आयत की ऊँचाई} = \frac{ ext{वर्ग की बारंबारता}}{ ext{वर्ग की चौड़ाई}} \times ext{न्यूनतम वर्ग चौड़ाई} \)
  • चरण:
  1. सभी वर्ग अंतरालों की चौड़ाई ज्ञात करें।
  2. सबसे छोटी वर्ग चौड़ाई पहचानें।
  3. प्रत्येक वर्ग के लिए समायोजित बारंबारता की गणना करें।
  4. X-अक्ष पर वर्ग अंतराल और Y-अक्ष पर समायोजित बारंबारता का उपयोग करके आयत चित्र बनाएँ।

आयत चित्र से बहुलक का निर्धारण (Graphical Method to Locate Mode):

  1. दिए गए आँकड़ों से आयत चित्र बनाएँ।
  2. सबसे अधिक ऊँचाई वाले आयत को बहुलक वर्ग का आयत मानें।
  3. बहुलक वर्ग के आयत के ऊपरी बाएँ कोने को उसके अगले आयत के ऊपरी बाएँ कोने से मिलाएँ।
  4. बहुलक वर्ग के आयत के ऊपरी दाएँ कोने को उससे पहले आयत के ऊपरी दाएँ कोने से मिलाएँ।
  5. ये दोनों रेखाएँ जिस बिंदु पर कटती हैं, उस बिंदु से X-अक्ष पर एक लंब खींचें।
  6. यह लंब X-अक्ष को जिस बिंदु पर काटता है, वह बहुलक का मान होता है।
🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर असमान वर्ग अंतरालों के लिए आयत चित्र बनाते समय बारंबारता को समायोजित करना भूल जाते हैं, जिससे गलत ग्राफ बनता है। हमेशा न्यूनतम वर्ग चौड़ाई का उपयोग करके समायोजित बारंबारता की गणना करें।

आवृत्ति बहुभुज (Frequency Polygon)

आवृत्ति बहुभुज वर्गीकृत बारंबारता बंटन का एक और आलेखीय निरूपण है। यह एक बहुभुज होता है जो वर्ग अंतरालों के मध्य-बिंदुओं को उनकी संगत बारंबारताओं के साथ जोड़कर बनाया जाता है।

आवृत्ति बहुभुज बनाने की विधियाँ:

  1. आयत चित्र की सहायता से (Using Histogram):
  • चरण 1: दिए गए आँकड़ों का आयत चित्र बनाएँ।
  • चरण 2: प्रत्येक आयत के ऊपरी भुजा के मध्य-बिंदुओं को चिह्नित करें।
  • चरण 3: इन मध्य-बिंदुओं को एक सीधी रेखा से जोड़ें।
  • चरण 4: बहुभुज को X-अक्ष पर बंद करने के लिए, पहले वर्ग अंतराल से पहले एक काल्पनिक वर्ग अंतराल और अंतिम वर्ग अंतराल के बाद एक काल्पनिक वर्ग अंतराल की कल्पना करें (दोनों की बारंबारता शून्य)। इनके मध्य-बिंदुओं को पहले और अंतिम चिह्नित मध्य-बिंदुओं से जोड़ें।
  1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method):
  • चरण 1: प्रत्येक वर्ग अंतराल का मध्य-बिंदु (वर्गांक) ज्ञात करें।
  • सूत्र: \( ext{मध्य-बिंदु} = \frac{ ext{निम्न सीमा} + ext{उच्च सीमा}}{2} \)
  • चरण 2: X-अक्ष पर मध्य-बिंदुओं को और Y-अक्ष पर संगत बारंबारताओं को चिह्नित करें।
  • चरण 3: ग्राफ पर \( ( ext{मध्य-बिंदु}, ext{बारंबारता}) \) के रूप में बिंदु प्लॉट करें।
  • चरण 4: इन बिंदुओं को एक सीधी रेखा से जोड़ें।
  • चरण 5: बहुभुज को X-अक्ष पर बंद करने के लिए, पहले वर्ग अंतराल से पहले एक काल्पनिक वर्ग अंतराल और अंतिम वर्ग अंतराल के बाद एक काल्पनिक वर्ग अंतराल के मध्य-बिंदुओं को X-अक्ष पर चिह्नित करें और उन्हें पहले और अंतिम प्लॉट किए गए बिंदुओं से जोड़ें।

आवृत्ति बहुभुज के उपयोग:

  • यह आँकड़ों में मूल्य वृद्धि और गिरावट का स्पष्ट संकेत देता है।
  • दो या दो से अधिक बारंबारता बंटनों की तुलना करने के लिए उपयोगी है।
  • किसी भी मान के लिए आवृत्ति का अनुमान लगाने में मदद करता है।

आयत चित्र और आवृत्ति बहुभुज में अंतर:

| विशेषता | आयत चित्र | आवृत्ति बहुभुज | |:----------------|:----------------------------------------|:---------------------------------------------| | निरूपण | आयतों द्वारा बारंबारता प्रदर्शित करता है। | बिंदुओं को जोड़कर बहुभुज के रूप में बारंबारता प्रदर्शित करता है। | | डेटा प्रकार | सतत वर्गीकृत आँकड़ों के लिए। | सतत वर्गीकृत आँकड़ों के लिए। | | वर्ग अंतराल | समान या असमान हो सकते हैं (समायोजन के साथ)। | आमतौर पर समान वर्ग चौड़ाई के लिए बनाया जाता है। | | आयतों का जुड़ाव | आयत एक-दूसरे से सटे होते हैं। | मध्य-बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ होती हैं। | | बहुलक निर्धारण | ग्राफिक रूप से बहुलक ज्ञात किया जा सकता है। | बहुलक सीधे ज्ञात नहीं किया जा सकता। | | क्षेत्रफल | आयत चित्र का क्षेत्रफल कुल बारंबारता के समानुपाती होता है। | आवृत्ति बहुभुज का क्षेत्रफल आयत चित्र के क्षेत्रफल के बराबर होता है। | | उपयोग | बारंबारता वितरण का दृश्य प्रतिनिधित्व। | मूल्य वृद्धि/गिरावट और तुलना के लिए। |

याद रखें

आवृत्ति बहुभुज का क्षेत्रफल: यह हमेशा संगत आयत चित्र के क्षेत्रफल के बराबर होता है। यह एक महत्वपूर्ण गुणधर्म है।

संचयी आवृत्ति वक्र (तोरण) (Ogive or Cumulative Frequency Curve)

संचयी आवृत्ति वक्र, जिसे ओजाइव (Ogive) भी कहते हैं, एक ग्राफिकल निरूपण है जो संचयी बारंबारता बंटन को दर्शाता है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि किसी दिए गए मान से 'कम' या 'अधिक' कितने प्रेक्षण हैं।

संचयी बारंबारता (Cumulative Frequency):

  • किसी वर्ग की संचयी बारंबारता उस वर्ग की बारंबारता और उससे पहले के सभी वर्गों की बारंबारताओं का योग होती है।

संचयी आवृत्ति वक्र बनाने की विधियाँ:

  1. "से कम" विधि (Less Than Method):
  • चरण 1: एक "से कम" संचयी बारंबारता सारणी बनाएँ। इसमें प्रत्येक वर्ग की उच्च सीमा के संगत संचयी बारंबारता लिखी जाती है।
  • उदाहरण: "10 से कम", "20 से कम" आदि।
  • चरण 2: X-अक्ष पर वर्ग अंतरालों की उच्च सीमाओं को चिह्नित करें।
  • चरण 3: Y-अक्ष पर संगत संचयी बारंबारताओं को चिह्नित करें।
  • चरण 4: ग्राफ पर \( ( ext{उच्च सीमा}, ext{संचयी बारंबारता}) \) के रूप में बिंदु प्लॉट करें।
  • चरण 5: इन बिंदुओं को एक सीधी रेखा या चिकने वक्र से जोड़ें। यह वक्र हमेशा बाएँ से दाएँ ऊपर की ओर बढ़ता है।
  1. "से अधिक" विधि (More Than Method):
  • चरण 1: एक "से अधिक" संचयी बारंबारता सारणी बनाएँ। इसमें प्रत्येक वर्ग की निम्न सीमा के संगत संचयी बारंबारता लिखी जाती है।
  • उदाहरण: "0 से अधिक", "10 से अधिक" आदि।
  • चरण 2: X-अक्ष पर वर्ग अंतरालों की निम्न सीमाओं को चिह्नित करें।
  • चरण 3: Y-अक्ष पर संगत संचयी बारंबारताओं को चिह्नित करें।
  • चरण 4: ग्राफ पर \( ( ext{निम्न सीमा}, ext{संचयी बारंबारता}) \) के रूप में बिंदु प्लॉट करें।
  • चरण 5: इन बिंदुओं को एक सीधी रेखा या चिकने वक्र से जोड़ें। यह वक्र हमेशा बाएँ से दाएँ नीचे की ओर घटता है।

संचयी आवृत्ति वक्र का महत्व:

  • माध्यिका (Median) का निर्धारण: दोनों "से कम" और "से अधिक" ओजाइव जिस बिंदु पर एक-दूसरे को काटते हैं, उस बिंदु से X-अक्ष पर खींचा गया लंब माध्यिका का मान देता है।
  • चतुर्थक (Quartiles) और शतमक (Percentiles) का निर्धारण: ओजाइव का उपयोग करके विभिन्न चतुर्थक और शतमक ज्ञात किए जा सकते हैं।
  • तुलनात्मक अध्ययन: विभिन्न डेटा सेट के संचयी वितरण की तुलना करने के लिए उपयोगी।
  • किसी दिए गए मान से कम या अधिक प्रेक्षणों की संख्या ज्ञात करना।
💡सुझाव

माध्यिका ज्ञात करना: परीक्षा में अक्सर संचयी आवृत्ति वक्र का उपयोग करके माध्यिका ज्ञात करने के लिए कहा जाता है। इसके लिए दोनों "से कम" और "से अधिक" वक्र एक ही ग्राफ पर बनाए जाते हैं।

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