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गति
Chhattisgarh · Class 9 · 🔬 Science · Chapter 4

गति

दूरी और विस्थापनचाल और वेगत्वरणगति के समीकरणएक समान वृत्तीय गति

अध्याय 'गति' भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है। यह हमें बताता है कि वस्तुएँ कैसे चलती हैं और हम उनकी गति का वर्णन कैसे कर सकते हैं। आप दूरी और विस्थापन के बीच अंतर सीखेंगे, चाल और वेग की अवधारणाओं को समझेंगे, और त्वरण की गणना करना सीखेंगे। इसके अतिरिक्त, आप गति के तीन समीकरणों का अध्ययन करेंगे जो एक समान त्वरित गति में वस्तुओं के व्यवहार का वर्णन करते हैं। यह अध्याय दैनिक जीवन में गति के विभिन्न उदाहरणों को समझने में मदद करता है।

गति और निर्देश बिंदु

गति क्या है?

  • जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो उसे गति में कहा जाता है।
  • गति एक सापेक्ष पद है। एक वस्तु एक व्यक्ति के लिए गतिशील हो सकती है, जबकि दूसरे के लिए स्थिर।
  • उदाहरण: ट्रेन में बैठे यात्री एक-दूसरे के सापेक्ष स्थिर होते हैं, लेकिन ट्रेन के बाहर खड़े व्यक्ति के लिए वे गतिशील होते हैं।

निर्देश बिंदु (Reference Point)

  • किसी वस्तु की गति का वर्णन करने के लिए हमें एक निर्देश बिंदु की आवश्यकता होती है।
  • निर्देश बिंदु वह स्थिर बिंदु होता है जिसके सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन को मापा जाता है।
  • इसे मूल बिंदु भी कहते हैं।
  • उदाहरण: किसी घर के सापेक्ष स्कूल की स्थिति, रेलवे स्टेशन के सापेक्ष ट्रेन की गति।

गति के प्रकार (सरलीकरण)

  • दैनिक जीवन में गतियाँ जटिल होती हैं (जैसे चलते व्यक्ति के हाथ-पैर की गति, वाहन के पुर्जों की गति)।
  • अध्ययन को सरल बनाने के लिए, हम वस्तु को एक बिंदु वस्तु मानते हैं।
  • यह बिंदु वस्तु वह होती है जहाँ वस्तु का संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित माना जाता है।
  • यह सरलीकरण तब मान्य होता है जब वस्तु द्वारा तय की गई दूरी उसके आकार की तुलना में बहुत अधिक हो।

सरल रैखिक गति के उदाहरण:

  • सीधी रेल की पटरी पर ट्रेन की गति।
  • ऊँचाई से गिराने पर पत्थर की गति।
  • सीधी सड़क पर चलती कार की गति।
📖परिभाषा

गति (Motion): समय के साथ किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन को गति कहते हैं।

📖परिभाषा

निर्देश बिंदु (Reference Point): वह स्थिर बिंदु जिसके सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति का वर्णन किया जाता है।

दूरी और विस्थापन

दूरी (Distance)

  • किसी वस्तु द्वारा तय किए गए मार्ग की कुल लंबाई को दूरी कहते हैं।
  • यह एक अदिश राशि है (केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं)।
  • दूरी हमेशा धनात्मक होती है या शून्य हो सकती है (यदि वस्तु गति न करे)। यह ऋणात्मक नहीं हो सकती।
  • दूरी तय किए गए पथ पर निर्भर करती है।
  • SI मात्रक: मीटर (m)। अन्य मात्रक: किलोमीटर (km), सेंटीमीटर (cm)।

विस्थापन (Displacement)

  • किसी वस्तु की प्रारंभिक स्थिति और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं।
  • यह एक सदिश राशि है (परिमाण और दिशा दोनों होते हैं)।
  • विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
  • शून्य विस्थापन: यदि वस्तु अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ जाती है, तो विस्थापन शून्य होता है, भले ही उसने कुछ दूरी तय की हो।
  • विस्थापन तय किए गए पथ पर निर्भर नहीं करता, केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है।
  • SI मात्रक: मीटर (m)।

दूरी और विस्थापन में अंतर:

| विशेषता | दूरी (Distance) | विस्थापन (Displacement) | |:------------|:--------------------------------------------------|:------------------------------------------------------| | परिभाषा | तय किए गए मार्ग की कुल लंबाई | प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी | | प्रकार | अदिश राशि (केवल परिमाण) | सदिश राशि (परिमाण और दिशा दोनों) | | मान | हमेशा धनात्मक या शून्य | धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है | | पथ निर्भरता| तय किए गए पथ पर निर्भर करती है | तय किए गए पथ पर निर्भर नहीं करती (केवल प्रारंभिक/अंतिम स्थिति) | | तुलना | दूरी \(\ge\) विस्थापन का परिमाण | विस्थापन का परिमाण \(\le\) दूरी |

उदाहरण:

  • एक व्यक्ति बिंदु O से A तक 50 km चलता है और फिर A से D तक 40 km वापस आता है।
  • तय की गई कुल दूरी: \(50 \text{ km} + 40 \text{ km} = 90 \text{ km}\)
  • विस्थापन: प्रारंभिक स्थिति O, अंतिम स्थिति D। यदि O से A 50 km है और D, O से 10 km दूर है, तो विस्थापन \(10 \text{ km}\) (O से D की ओर)।
  • यदि कोई वस्तु एक वृत्ताकार पथ पर एक पूरा चक्कर लगाती है:
  • दूरी: वृत्त की परिधि \((2\pi r)\)
  • विस्थापन: शून्य (क्योंकि प्रारंभिक और अंतिम बिंदु समान हैं)

अदिश और सदिश राशियाँ:

  • अदिश राशि (Scalar Quantity): वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण (मान) की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं।
  • उदाहरण: दूरी, चाल, द्रव्यमान, समय, तापमान, ऊर्जा।
  • सदिश राशि (Vector Quantity): वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है।
  • उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग।
महत्त्वपूर्ण

दूरी कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकती, जबकि विस्थापन ऋणात्मक हो सकता है (विपरीत दिशा को दर्शाता है) या शून्य भी हो सकता है।

चाल और वेग

चाल (Speed)

  • किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं।
  • सूत्र: \(\text{चाल} = \frac{\text{तय की गई दूरी}}{\text{लिया गया कुल समय}}

\)

  • यह एक अदिश राशि है (केवल परिमाण होता है)।
  • चाल हमेशा धनात्मक होती है।
  • SI मात्रक: मीटर/सेकंड (m/s)। अन्य मात्रक: किलोमीटर/घंटा (km/h).

औसत चाल (Average Speed)

  • किसी वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी और कुल समय अंतराल का अनुपात औसत चाल कहलाता है।
  • सूत्र: \(\text{औसत चाल} = \frac{\text{कुल तय की गई दूरी}}{\text{कुल समयांतराल}}

\)

  • औसत चाल वस्तु की क्षण-क्षण की चाल को नहीं दर्शाती, बल्कि पूरे यात्रा की औसत दर को बताती है।

वेग (Velocity)

  • किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में एक निश्चित दिशा में तय की गई दूरी (अर्थात विस्थापन) को वेग कहते हैं।
  • सूत्र: \(\text{वेग} = \frac{\text{विस्थापन}}{\text{समयांतराल}}

\)

  • यह एक सदिश राशि है (परिमाण और दिशा दोनों होते हैं)।
  • वेग धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
  • वेग की दिशा विस्थापन की दिशा में होती है।
  • SI मात्रक: मीटर/सेकंड (m/s)।

औसत वेग (Average Velocity)

  • किसी वस्तु का औसत वेग उसके कुल विस्थापन और कुल समय अंतराल का अनुपात होता है।
  • सूत्र: \(\text{औसत वेग} = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समयांतराल}}

\)

  • यदि वस्तु का वेग एक समान है, तो औसत वेग और तात्क्षणिक वेग समान होते हैं।
  • यदि वेग परिवर्तनशील है, तो औसत वेग प्रारंभिक और अंतिम वेग के औसत के बराबर हो सकता है, बशर्ते त्वरण स्थिर हो: \(\text{औसत वेग} = \frac{\text{प्रारंभिक वेग} + \text{अंतिम वेग}}{2} = \frac{u+v}{2}\)

चाल और वेग में अंतर:

| विशेषता | चाल (Speed) | वेग (Velocity) | |:------------|:--------------------------------------------------|:---------------------------------------------------| | परिभाषा | इकाई समय में तय की गई दूरी | इकाई समय में एक निश्चित दिशा में तय की गई दूरी (विस्थापन) | | प्रकार | अदिश राशि | सदिश राशि | | मान | हमेशा धनात्मक | धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है | | निर्भरता | तय की गई दूरी पर निर्भर | विस्थापन पर निर्भर | | समानता | एक समान गति में, चाल = वेग का परिमाण | एक समान गति में, वेग का परिमाण = चाल |

एक समान गति (Uniform Motion)

  • जब कोई वस्तु समान समय अंतराल में समान दूरी तय करती है, तो उसकी गति एक समान गति कहलाती है।
  • इस गति में वस्तु की चाल और वेग नियत रहते हैं।
  • उदाहरण: सीधी सड़क पर नियत चाल से चलती कार।

असमान गति (Non-Uniform Motion)

  • जब कोई वस्तु समान समय अंतराल में असमान दूरी तय करती है, तो उसकी गति असमान गति कहलाती है।
  • इस गति में वस्तु की चाल या वेग या दोनों परिवर्तनशील होते हैं।
  • उदाहरण: भीड़भाड़ वाली सड़क पर चलती कार, ऊपर से गिरता पत्थर (गुरुत्वाकर्षण के कारण वेग बढ़ता है)।
🧮सूत्र

चाल: \(v = \frac{s}{t}\) वेग: \(\vec{v} = \frac{\vec{s}}{t}\) औसत चाल: \(\text{औसत चाल} = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} \) औसत वेग: \(\text{औसत वेग} = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} \)

💡सुझाव

चाल और वेग के मात्रक समान होते हैं (m/s), लेकिन इनकी प्रकृति अलग-अलग होती है (अदिश बनाम सदिश)। यह अंतर अक्सर पूछा जाता है।

दूरी-समय ग्राफ और एक समान गति

दूरी-समय ग्राफ (Distance-Time Graph)

  • यह ग्राफ समय के साथ वस्तु द्वारा तय की गई दूरी में परिवर्तन को दर्शाता है।
  • X-अक्ष: समय (Time)
  • Y-अक्ष: दूरी (Distance)

दूरी-समय ग्राफ से जानकारी:

  1. एक समान गति (Uniform Motion):
  • दूरी-समय ग्राफ एक सीधी रेखा होता है जो मूल बिंदु से गुजरता है या किसी निश्चित दूरी से शुरू होता है।
  • ग्राफ की ढलान (slope) वस्तु की चाल को दर्शाती है।
  • अधिक ढलान का मतलब अधिक चाल
  • चाल की गणना: \(v = \frac{S_2 - S_1}{t_2 - t_1}\) (ग्राफ की ढलान)
  1. असमान गति (Non-Uniform Motion):
  • दूरी-समय ग्राफ एक वक्र रेखा होता है।
  • वक्र की ढलान लगातार बदलती रहती है, जिसका अर्थ है कि वस्तु की चाल बदल रही है।
  1. वस्तु का विराम अवस्था में होना (Object at Rest):
  • जब वस्तु विराम अवस्था में होती है, तो समय बीतने के साथ उसकी दूरी नहीं बदलती।
  • दूरी-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होता है।

दूरी-समय ग्राफ की ढलान (Slope of Distance-Time Graph):

  • दूरी-समय ग्राफ की ढलान वस्तु की चाल (Speed) को दर्शाती है।
  • ढलान \( = \frac{\text{Y-अक्ष पर परिवर्तन}}{\text{X-अक्ष पर परिवर्तन}} = \frac{\text{दूरी में परिवर्तन}}{\text{समय में परिवर्तन}} = \text{चाल}\)

वेग-समय ग्राफ (Velocity-Time Graph)

  • यह ग्राफ समय के साथ वस्तु के वेग में परिवर्तन को दर्शाता है।
  • X-अक्ष: समय (Time)
  • Y-अक्ष: वेग (Velocity)

वेग-समय ग्राफ से जानकारी:

  1. एक समान वेग (Uniform Velocity) / शून्य त्वरण:
  • वेग-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होता है।
  • इसका अर्थ है कि वस्तु का वेग नियत है और त्वरण शून्य है।
  1. एक समान त्वरण (Uniform Acceleration):
  • वेग-समय ग्राफ एक सीधी रेखा होता है जो समय अक्ष से एक निश्चित कोण पर झुकी होती है।
  • ग्राफ की ढलान वस्तु के त्वरण को दर्शाती है।
  • त्वरण की गणना: \(a = \frac{v_2 - v_1}{t_2 - t_1}\) (ग्राफ की ढलान)
  • ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन को दर्शाता है।
  1. असमान त्वरण (Non-Uniform Acceleration):
  • वेग-समय ग्राफ एक वक्र रेखा होता है।
  • वक्र की ढलान लगातार बदलती रहती है, जिसका अर्थ है कि वस्तु का त्वरण बदल रहा है।

वेग-समय ग्राफ की ढलान (Slope of Velocity-Time Graph):

  • वेग-समय ग्राफ की ढलान वस्तु के त्वरण (Acceleration) को दर्शाती है।
  • ढलान \( = \frac{\text{Y-अक्ष पर परिवर्तन}}{\text{X-अक्ष पर परिवर्तन}} = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{समय में परिवर्तन}} = \text{त्वरण}\)

वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल (Area under Velocity-Time Graph):

  • वेग-समय ग्राफ और समय अक्ष के बीच का क्षेत्रफल वस्तु द्वारा तय किया गया विस्थापन (या दूरी, यदि एक ही दिशा में गति हो) को दर्शाता है।
  • क्षेत्रफल \( = \text{वेग} \times \text{समय} = \frac{\text{विस्थापन}}{\text{समय}} \times \text{समय} = \text{विस्थापन}\)

त्वरण (Acceleration)

  • किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
  • सूत्र: \(\text{त्वरण} = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{समयांतराल}} = \frac{v-u}{t}\)
  • जहाँ \(u\) प्रारंभिक वेग, \(v\) अंतिम वेग और \(t\) समय है।
  • यह एक सदिश राशि है।
  • SI मात्रक: मीटर/सेकंड² (m/s²)।
  • धनात्मक त्वरण: जब वस्तु का वेग समय के साथ बढ़ता है।
  • ऋणात्मक त्वरण (मंदन/अवत्वरण): जब वस्तु का वेग समय के साथ घटता है। इसे \(-a\) से दर्शाते हैं।

एक समान त्वरण (Uniform Acceleration)

  • जब वस्तु का वेग समान समय अंतराल में समान मात्रा में बदलता है, तो त्वरण एक समान होता है।
  • उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण के अधीन मुक्त रूप से गिरती वस्तु की गति (वायु प्रतिरोध को नगण्य मानने पर)।

असमान त्वरण (Non-Uniform Acceleration)

  • जब वस्तु का वेग समान समय अंतराल में असमान मात्रा में बदलता है, तो त्वरण असमान होता है।
  • उदाहरण: भीड़भाड़ वाली सड़क पर चलती कार।
महत्त्वपूर्ण

दूरी-समय ग्राफ की ढलान = चाल। वेग-समय ग्राफ की ढलान = त्वरण। वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन।

🧮सूत्र

त्वरण: \(a = \frac{v-u}{t}\)

गति के समीकरण

गति के समीकरण (Equations of Motion)

  • ये समीकरण एक समान त्वरित गति में वस्तु के वेग, त्वरण, समय और तय की गई दूरी के बीच संबंध स्थापित करते हैं।
  • प्रारंभिक वेग: \(u\)
  • अंतिम वेग: \(v\)
  • त्वरण: \(a\)
  • समय: \(t\)
  • तय की गई दूरी/विस्थापन: \(s\)

गति का प्रथम समीकरण (वेग-समय संबंध):

  • सूत्र: \(v = u + at\)
  • यह समीकरण वस्तु के अंतिम वेग (v), प्रारंभिक वेग (u), त्वरण (a) और समय (t) के बीच संबंध बताता है।
  • व्युत्पत्ति (ग्राफ विधि से):
  • वेग-समय ग्राफ में, त्वरण \(a = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{समय में परिवर्तन}} = \frac{v-u}{t}\)
  • \(at = v-u\)
  • \(v = u + at\)

गति का द्वितीय समीकरण (स्थिति-समय संबंध):

  • सूत्र: \(s = ut + \frac{1}{2}at^2\)
  • यह समीकरण वस्तु द्वारा तय की गई दूरी (s), प्रारंभिक वेग (u), त्वरण (a) और समय (t) के बीच संबंध बताता है।
  • व्युत्पत्ति (ग्राफ विधि से):
  • वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन (s) को दर्शाता है।
  • यह क्षेत्रफल एक आयत और एक त्रिभुज के क्षेत्रफल के योग के बराबर होता है।
  • आयत का क्षेत्रफल \( = u \times t = ut\)
  • त्रिभुज का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई} = \frac{1}{2} \times t \times (v-u)\)
  • चूँकि \(v-u = at\) (प्रथम समीकरण से),
  • त्रिभुज का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times t \times at = \frac{1}{2}at^2\)
  • कुल विस्थापन \(s = ut + \frac{1}{2}at^2\)
  • \(s = ut + \frac{1}{2}at^2\)

गति का तृतीय समीकरण (स्थिति-वेग संबंध):

  • सूत्र: \(v^2 = u^2 + 2as\)
  • यह समीकरण वस्तु के अंतिम वेग (v), प्रारंभिक वेग (u), त्वरण (a) और तय की गई दूरी (s) के बीच संबंध बताता है।
  • व्युत्पत्ति (ग्राफ विधि से):
  • वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन (s) को दर्शाता है।
  • यह क्षेत्रफल एक समलंब चतुर्भुज के क्षेत्रफल के बराबर होता है।
  • समलंब का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times (\text{समांतर भुजाओं का योग}) \times \text{ऊँचाई}\)
  • \(s = \frac{1}{2} \times (u+v) \times t\)
  • प्रथम समीकरण से, \(t = \frac{v-u}{a}\)
  • \(s = \frac{1}{2} \times (u+v) \times \frac{(v-u)}{a}\)
  • \(s = \frac{v^2 - u^2}{2a}\)
  • \(v^2 - u^2 = 2as\) या \(v^2 = u^2 + 2as\)

गुरुत्वाकर्षण के अधीन गति के समीकरण:

  • जब वस्तु गुरुत्वाकर्षण के अधीन गति करती है (जैसे ऊपर से गिरना या ऊपर फेंकना), तो त्वरण \(a\) को गुरुत्वीय त्वरण \(g\) से बदल दिया जाता है।
  • मुक्त रूप से गिरती वस्तु: \(a = +g\) (लगभग \(9.8 \text{ m/s}^2\) या \(10 \text{ m/s}^2\))
  • ऊपर फेंकी गई वस्तु: \(a = -g\)
  • दूरी (s) को ऊँचाई (h) से बदल दिया जाता है।
  • \(v = u + gt\)
  • \(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\)
  • \(v^2 = u^2 + 2gh\)
🧮सूत्र

गति के तीन समीकरण:

  1. \(v = u + at\)
  2. \(s = ut + \frac{1}{2}at^2\)
  3. \(v^2 = u^2 + 2as\)
💡सुझाव

गति के तीनों समीकरणों की ग्राफ विधि से व्युत्पत्ति बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाती है। इन्हें अच्छी तरह से समझें और अभ्यास करें।

वृत्तीय गति

वृत्तीय गति (Circular Motion)

  • जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर गति करती है, तो उसकी गति को वृत्तीय गति कहते हैं।

एक समान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion)

  • जब कोई वस्तु एक वृत्ताकार पथ पर नियत चाल (constant speed) से गति करती है, तो उसकी गति को एक समान वृत्तीय गति कहते हैं।
  • इस गति में वस्तु की चाल नियत रहती है, लेकिन उसकी वेग की दिशा लगातार बदलती रहती है।
  • चूँकि वेग की दिशा लगातार बदल रही है, इसलिए वस्तु में त्वरण होता है। यह त्वरण केंद्र की ओर निर्देशित होता है, जिसे अभिकेंद्रीय त्वरण कहते हैं।
  • वेग की दिशा: वृत्ताकार पथ के हर बिंदु पर स्पर्शरेखीय (tangential) होती है।
  • चाल की गणना: यदि वस्तु \(r\) त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर \(t\) समय में एक चक्कर पूरा करती है, तो तय की गई दूरी वृत्त की परिधि \((2\pi r)\) के बराबर होगी।
  • \(\text{चाल } v = \frac{\text{दूरी}}{\text{समय}} = \frac{2\pi r}{t}\)

वृत्तीय गति में वेग परिवर्तन की स्थितियाँ:

  1. वेग के परिमाण में परिवर्तन, दिशा नियत: (सरल रेखीय त्वरित गति)
  2. वेग का परिमाण नियत, दिशा में परिवर्तन: (एक समान वृत्तीय गति)
  3. वेग के परिमाण और दिशा दोनों में परिवर्तन: (असमान वृत्तीय गति, जैसे वृत्तीय पथ पर बढ़ती चाल से दौड़ना)

एक समान वृत्तीय गति के उदाहरण:

  • पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर गति (लगभग)।
  • चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर गति (लगभग)।
  • घड़ी की सुइयों की नोक की गति।
  • एक डोरी से बंधे पत्थर को घुमाना।
  • एक समान चाल से घूमते पंखे के ब्लेड पर किसी बिंदु की गति।
महत्त्वपूर्ण

एक समान वृत्तीय गति में चाल नियत रहती है, लेकिन वेग लगातार बदलता रहता है क्योंकि गति की दिशा हर पल बदलती है। इसलिए, एक समान वृत्तीय गति एक त्वरित गति का उदाहरण है।

🧮सूत्र

एक समान वृत्तीय गति में चाल: \(v = \frac{2\pi r}{t}\)

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