HomeChhattisgarhClass 9Science › बल एवं गति के नियम
बल एवं गति के नियम
Chhattisgarh · Class 9 · 🔬 Science · Chapter 5

बल एवं गति के नियम

जड़त्वन्यूटन के गति के नियमसंवेगसंवेग संरक्षणसंतुलित और असंतुलित बल

यह अध्याय बल और गति के नियमों की गहरी समझ प्रदान करता है। छात्र जड़त्व, द्रव्यमान, संतुलित और असंतुलित बल, न्यूटन के गति के तीनों नियम (जड़त्व का नियम, संवेग का नियम, क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) और संवेग संरक्षण के सिद्धांत के बारे में सीखते हैं। यह अध्याय दैनिक जीवन में इन अवधारणाओं के अनुप्रयोगों को भी समझाता है, जैसे कि चलती बस में ब्रेक लगाने पर व्यक्ति का आगे झुकना या रॉकेट का उड़ना। यह भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

जड़त्व की अवधारणा

जड़त्व (Inertia)

  • जड़त्व वस्तु का वह गुण है जिसके कारण वह अपनी विराम अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है।
  • यह वस्तु की स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि वह अपनी वर्तमान अवस्था को बनाए रखना चाहती है।
  • जड़त्व वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है। जितना अधिक द्रव्यमान, उतना अधिक जड़त्व।

जड़त्व के प्रकार:

  1. विराम का जड़त्व:
  • वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विराम अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है।
  • उदाहरण:
  • बस के अचानक चलने पर यात्री का पीछे की ओर झुकना।
  • कंबल को छड़ी से पीटने पर धूल के कणों का झड़ना।
  • पेड़ को हिलाने पर फलों का नीचे गिरना।
  1. गति का जड़त्व:
  • वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है।
  • उदाहरण:
  • चलती बस के अचानक ब्रेक लगाने पर यात्री का आगे की ओर झुकना।
  • चलती रेलगाड़ी में उछलने पर उसी स्थान पर वापस आना।
  • तेज गति से दौड़ते घोड़े के अचानक रुकने पर सवार का आगे गिरना।
  1. दिशा का जड़त्व:
  • वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी गति की दिशा में परिवर्तन का विरोध करती है।
  • उदाहरण:
  • कार के अचानक मुड़ने पर यात्री का एक ओर झुकना।
  • पत्थर को धागे से घुमाते समय धागा टूटने पर पत्थर का स्पर्शरेखीय दिशा में जाना।
महत्त्वपूर्ण

गैलीलियो ने बताया कि यदि किसी वस्तु पर कोई बाह्य अवरोधक बल (जैसे घर्षण) न लगे, तो वह वस्तु नियत वेग से लगातार गति करती रहेगी। यह जड़त्व की अवधारणा का आधार है।

जड़त्व और द्रव्यमान

जड़त्व और द्रव्यमान का संबंध

  • द्रव्यमान वस्तु के जड़त्व की माप है।
  • जिस वस्तु का द्रव्यमान अधिक होता है, उसका जड़त्व भी अधिक होता है।
  • अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु की अवस्था (विराम या गति) में परिवर्तन करने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है।

उदाहरण:

  • एक खाली बोतल को गिराना भरी बोतल की अपेक्षा आसान होता है क्योंकि खाली बोतल का द्रव्यमान कम होता है, अतः उसका जड़त्व भी कम होता है।
  • एक साइकिल पर अकेले व्यक्ति को रोकना आसान होता है, जबकि दो व्यक्तियों के साथ साइकिल को रोकना कठिन होता है, क्योंकि दो व्यक्तियों के साथ साइकिल का कुल द्रव्यमान बढ़ जाता है, जिससे उसका जड़त्व भी बढ़ जाता है।
  • SI पद्धति में द्रव्यमान का मात्रक किलोग्राम (kg) है।
📖परिभाषा

द्रव्यमान (Mass): किसी वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं। यह वस्तु के जड़त्व का एक माप है।

संतुलित और असंतुलित बल

बल (Force)

  • बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की विराम अवस्था या गति की अवस्था में परिवर्तन करता है या करने का प्रयास करता है।
  • बल के कारण वस्तु की गति की दिशा या चाल बदल सकती है।

नेट बल (Net Force)

  • किसी वस्तु पर कार्य कर रहे सभी बलों का सदिश योग नेट बल कहलाता है।
  • नेट बल वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी बल होता है।

संतुलित बल (Balanced Forces)

  • जब किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का नेट बल शून्य होता है, तो ऐसे बलों को संतुलित बल कहते हैं।
  • संतुलित बल वस्तु की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं लाते हैं।
  • यदि वस्तु विराम अवस्था में है, तो वह विराम में ही रहेगी।
  • यदि वस्तु एकसमान वेग से गति कर रही है, तो वह उसी वेग से गति करती रहेगी।
  • उदाहरण:
  • रस्साकशी में दोनों टीमें समान बल लगाएँ और रस्सी न हिले।
  • मेज पर रखी पुस्तक पर गुरुत्वाकर्षण बल और मेज का अभिलंब बल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।

असंतुलित बल (Unbalanced Forces)

  • जब किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का नेट बल शून्य नहीं होता है, तो ऐसे बलों को असंतुलित बल कहते हैं।
  • असंतुलित बल वस्तु की अवस्था में परिवर्तन लाते हैं।
  • विराम अवस्था में रखी वस्तु को गति प्रदान कर सकते हैं।
  • गतिमान वस्तु की चाल या दिशा बदल सकते हैं।
  • गतिमान वस्तु को रोक सकते हैं।
  • गति उत्पन्न करने के लिए हमेशा असंतुलित बल की आवश्यकता होती है।

संतुलित और असंतुलित बल में अंतर:

| विशेषता | संतुलित बल | असंतुलित बल | |:------------|:----------------------------------------------|:------------------------------------------------| | नेट बल | शून्य | शून्य नहीं | | अवस्था पर प्रभाव | कोई परिवर्तन नहीं (विराम या एकसमान गति) | अवस्था में परिवर्तन (गति या दिशा में बदलाव) | | गति उत्पन्न | नहीं | हाँ | | उदाहरण | रस्साकशी में गतिहीन रस्सी | फुटबॉल को किक मारना |

याद रखें

किसी वस्तु पर लगने वाले बल को सदिश राशि माना जाता है, क्योंकि इसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।

न्यूटन की गति का प्रथम नियम

न्यूटन की गति का प्रथम नियम (Newton's First Law of Motion)

  • कथन: "प्रत्येक वस्तु अपनी स्थिर अवस्था या समान गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्यरत न हो।"
  • यह नियम वस्तु के जड़त्व को परिभाषित करता है। इसलिए इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं।
  • मुख्य बिंदु:
  • कोई भी वस्तु अपनी अवस्था (विराम या एकसमान गति) को स्वयं नहीं बदल सकती।
  • अवस्था में परिवर्तन के लिए हमेशा एक असंतुलित बाह्य बल की आवश्यकता होती है।
  • यह नियम बल की गुणात्मक परिभाषा देता है।

दैनिक जीवन में उदाहरण:

  1. कंबल को छड़ी से पीटने पर धूल के कणों का झड़ना: कंबल को पीटने पर कंबल गति में आता है, लेकिन धूल के कण जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही बने रहना चाहते हैं और कंबल से अलग होकर गिर जाते हैं।
  2. पेड़ को हिलाने पर फलों का नीचे गिरना: पेड़ को हिलाने पर पेड़ गति में आता है, लेकिन फल जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही बने रहना चाहते हैं और पेड़ से टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
  3. चलती बस के अचानक रुकने पर यात्री का आगे झुकना: यात्री का शरीर बस के साथ गति में होता है। बस के रुकने पर शरीर का निचला हिस्सा रुक जाता है, लेकिन ऊपरी हिस्सा गति के जड़त्व के कारण आगे की ओर गतिमान रहना चाहता है, जिससे यात्री आगे झुक जाता है।
  4. खड़ी बस के अचानक चलने पर यात्री का पीछे झुकना: यात्री का शरीर विराम अवस्था में होता है। बस के चलने पर शरीर का निचला हिस्सा गति में आता है, लेकिन ऊपरी हिस्सा विराम के जड़त्व के कारण विराम अवस्था में ही बने रहना चाहता है, जिससे यात्री पीछे झुक जाता है।
💡सुझाव

न्यूटन के प्रथम नियम को 'जड़त्व का नियम' भी कहते हैं। इसके उदाहरण अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

संवेग की अवधारणा

संवेग (Momentum)

  • किसी वस्तु के द्रव्यमान (m) और वेग (v) के गुणनफल को संवेग (p) कहते हैं।
  • संवेग वस्तु में निहित गति की मात्रा का माप है।
  • सूत्र: \(p = mv\)
  • विशेषताएँ:
  • संवेग एक सदिश राशि है (इसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं)।
  • संवेग की दिशा वही होती है जो वस्तु के वेग की दिशा होती है।
  • SI मात्रक: किलोग्राम-मीटर प्रति सेकंड (kg.m/s) या न्यूटन-सेकंड (N.s)।

संवेग का महत्व:

  • किसी वस्तु द्वारा उत्पन्न प्रभाव उसके द्रव्यमान और वेग दोनों पर निर्भर करता है।
  • अधिक द्रव्यमान या अधिक वेग वाली वस्तु का संवेग अधिक होता है, और वह अधिक प्रभाव उत्पन्न करती है।
  • उदाहरण:
  • एक छोटी गोली (कम द्रव्यमान) भी अधिक वेग के कारण बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
  • एक भारी ट्रक (अधिक द्रव्यमान) कम वेग पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

संवेग में परिवर्तन और बल:

  • किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन केवल बल के परिमाण पर ही नहीं, बल्कि उस समय पर भी निर्भर करता है जितने समय तक बल लगता है।
  • संवेग में परिवर्तन लाने में बल का मान और बल के कार्य करने का समय दोनों महत्वपूर्ण होते हैं।
  • यदि बल कम समय के लिए लगता है, तो संवेग में बड़ा परिवर्तन लाने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होगी।
  • यदि बल अधिक समय के लिए लगता है, तो संवेग में समान परिवर्तन लाने के लिए कम बल की आवश्यकता होगी।
📖परिभाषा

संवेग (Momentum): किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं। \(p = mv\)

🧮सूत्र

संवेग \(p = mv\) जहाँ:

  • \(p\) = संवेग
  • \(m\) = द्रव्यमान
  • \(v\) = वेग

न्यूटन की गति का द्वितीय नियम

न्यूटन की गति का द्वितीय नियम (Newton's Second Law of Motion)

  • कथन: "किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए असंतुलित बल के समानुपाती होती है और बल की दिशा में होती है।"
  • यह नियम बल की मात्रात्मक परिभाषा देता है।

गणितीय सूत्र का व्युत्पन्न (Derivation of Mathematical Formula):

  1. माना किसी वस्तु का द्रव्यमान \(m\) है।
  2. प्रारंभिक वेग \(u\) और \(t\) समय के बाद अंतिम वेग \(v\) हो जाता है।
  3. प्रारंभिक संवेग \(p_1 = mu\)
  4. अंतिम संवेग \(p_2 = mv\)
  5. संवेग में परिवर्तन \(\Delta p = p_2 - p_1 = mv - mu = m(v-u)\)
  6. संवेग परिवर्तन की दर \(\frac{\Delta p}{\Delta t} = \frac{m(v-u)}{t}\)
  7. न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, लगाया गया बल \(F\) संवेग परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है:

\(F \propto \frac{m(v-u)}{t}\)

  1. हम जानते हैं कि त्वरण \(a = \frac{v-u}{t}\)
  2. अतः, \(F \propto ma\)
  3. समानुपाती स्थिरांक \(K\) का उपयोग करने पर: \(F = Kma\)
  4. यदि \(K=1\) लिया जाए, तो \(F = ma\)

द्वितीय नियम के मुख्य बिंदु:

  • बल (F) = द्रव्यमान (m) \(\times\) त्वरण (a)
  • बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
  • 1 न्यूटन वह बल है जो 1 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु में \(1 \text{ m/s}^2\) का त्वरण उत्पन्न करता है।
  • \(1 \text{ N} = 1 \text{ kg} \cdot \text{m/s}^2\)
  • यह नियम दर्शाता है कि बल केवल गति उत्पन्न नहीं करता, बल्कि गति में परिवर्तन (त्वरण) भी उत्पन्न करता है।

दैनिक जीवन में अनुप्रयोग:

  1. क्रिकेट खिलाड़ी का गेंद पकड़ते समय हाथ पीछे खींचना:
  • गेंद का संवेग शून्य करने के लिए बल लगाना पड़ता है।
  • हाथ पीछे खींचने से गेंद के संवेग परिवर्तन का समय बढ़ जाता है (\(\Delta t\) बढ़ता है)।
  • चूंकि \(F \propto \frac{\Delta p}{\Delta t}\), \(\Delta t\) बढ़ने से बल \(F\) का मान कम हो जाता है, जिससे खिलाड़ी को चोट कम लगती है।
  1. ऊंचाई से कूदते समय कच्चे फर्श या भूसे के ढेर पर कम चोट लगना:
  • कच्चे फर्श या भूसे के ढेर पर गिरने से रुकने का समय बढ़ जाता है।
  • संवेग परिवर्तन का समय बढ़ने से शरीर पर लगने वाला बल कम हो जाता है, जिससे चोट कम लगती है।
  1. कराटे खिलाड़ी द्वारा ईंट तोड़ना:
  • खिलाड़ी बहुत कम समय में ईंट पर बहुत अधिक बल लगाता है।
  • संवेग परिवर्तन का समय कम होने से बल का मान बहुत अधिक हो जाता है, जिससे ईंट टूट जाती है।
🧮सूत्र

न्यूटन का द्वितीय नियम: \(F = ma\) जहाँ:

  • \(F\) = बल (न्यूटन, N)
  • \(m\) = द्रव्यमान (किलोग्राम, kg)
  • \(a\) = त्वरण (मीटर प्रति सेकंड वर्ग, \(\text{m/s}^2\))
महत्त्वपूर्ण

यदि नेट असंतुलित बल शून्य हो, तो संवेग स्थिर (अपरिवर्तित) रहेगा, शून्य नहीं होगा। संवेग शून्य तभी होगा जब वस्तु का वेग शून्य हो।

न्यूटन की गति का तृतीय नियम

न्यूटन की गति का तृतीय नियम (Newton's Third Law of Motion)

  • कथन: "प्रत्येक क्रिया की सदैव बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।"
  • मुख्य बिंदु:
  • क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
  • ये बल एक ही समय पर लगते हैं।
  • क्रिया और प्रतिक्रिया बल परिमाण में बराबर होते हैं लेकिन दिशा में विपरीत होते हैं।
  • चूंकि ये बल अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त नहीं करते हैं।
  • \(F_{AB} = -F_{BA}\) (वस्तु A द्वारा B पर लगाया गया बल, वस्तु B द्वारा A पर लगाए गए बल के बराबर और विपरीत होता है।)

दैनिक जीवन में उदाहरण:

  1. चलना: हम अपने पैरों से जमीन को पीछे की ओर धकेलते हैं (क्रिया), और जमीन हमें आगे की ओर धकेलती है (प्रतिक्रिया), जिससे हम चल पाते हैं।
  2. नाव खेना: नाविक चप्पू से पानी को पीछे धकेलता है (क्रिया), और पानी नाव को आगे की ओर धकेलता है (प्रतिक्रिया)।
  3. बंदूक से गोली चलाना: बंदूक गोली पर आगे की ओर बल लगाती है (क्रिया), और गोली बंदूक पर पीछे की ओर समान बल लगाती है (प्रतिक्रिया), जिससे बंदूक पीछे हटती है (प्रतीप)।
  4. रॉकेट का प्रक्षेपण: रॉकेट नीचे की ओर गर्म गैसें अत्यधिक वेग से उत्सर्जित करता है (क्रिया), और गैसें रॉकेट पर ऊपर की ओर समान प्रतिक्रिया बल लगाती हैं, जिससे रॉकेट ऊपर उठता है।
  5. स्प्रिंग तुला का प्रयोग: जब दो स्प्रिंग तुलाओं को एक-दूसरे से जोड़कर खींचा जाता है, तो दोनों तुलाएँ समान पाठ्यांक दर्शाती हैं, जो क्रिया-प्रतिक्रिया बल को दर्शाता है।

महत्वपूर्ण अवलोकन:

  • यद्यपि क्रिया और प्रतिक्रिया बल परिमाण में समान होते हैं, फिर भी वे समान त्वरण उत्पन्न नहीं करते हैं।
  • इसका कारण यह है कि वे अलग-अलग द्रव्यमान वाली वस्तुओं पर कार्य करते हैं (\(a = F/m\))।
  • उदाहरण के लिए, जब हम जमीन पर चलते हैं, तो हम जमीन पर बल लगाते हैं, लेकिन जमीन का द्रव्यमान बहुत अधिक होने के कारण उसमें नगण्य त्वरण उत्पन्न होता है, जबकि हमारे शरीर का द्रव्यमान कम होने के कारण हमें आगे की ओर त्वरण मिलता है।

न्यूटन के नियमों का संबंध:

  • प्रथम नियम: बल की गुणात्मक परिभाषा (जड़त्व)।
  • द्वितीय नियम: बल की मात्रात्मक परिभाषा (\(F=ma\))।
  • तृतीय नियम: बलों की प्रकृति (क्रिया-प्रतिक्रिया)।
  • प्रथम नियम और द्वितीय नियम एक ही वस्तु पर लागू होते हैं, जबकि तृतीय नियम दो परस्पर क्रिया कर रही वस्तुओं पर लागू होता है।
🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर सोचते हैं कि क्रिया और प्रतिक्रिया बल एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं क्योंकि वे बराबर और विपरीत होते हैं। यह गलत है क्योंकि वे अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।

संवेग संरक्षण का नियम

संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum)

  • कथन: "यदि दो या दो से अधिक वस्तुओं के निकाय पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य नहीं कर रहा हो, तो उस निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है (अपरिवर्तित रहता है)।"
  • इसका अर्थ है कि टक्कर से पहले और टक्कर के बाद निकाय का कुल संवेग समान रहता है।

गणितीय व्युत्पत्ति (Mathematical Derivation):

  1. माना दो वस्तुएँ A और B हैं, जिनके द्रव्यमान क्रमशः \(m_A\) और \(m_B\) हैं।
  2. टक्कर से पहले उनके प्रारंभिक वेग क्रमशः \(u_A\) और \(u_B\) हैं।
  3. टक्कर के बाद उनके अंतिम वेग क्रमशः \(v_A\) और \(v_B\) हैं।
  4. टक्कर के दौरान, वस्तु A द्वारा B पर लगाया गया बल \(F_{AB}\) और वस्तु B द्वारा A पर लगाया गया बल \(F_{BA}\) है।
  5. न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार: \(F_{AB} = -F_{BA}\)
  6. न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, बल संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
  • \(F_{AB} = m_A a_A = m_A \frac{(v_A - u_A)}{t}\)
  • \(F_{BA} = m_B a_B = m_B \frac{(v_B - u_B)}{t}\)
  1. समीकरण \(F_{AB} = -F_{BA}\) में मान रखने पर:

\(m_A \frac{(v_A - u_A)}{t} = -m_B \frac{(v_B - u_B)}{t}\)

  1. \(t\) को दोनों तरफ से निरस्त करने पर:

\(m_A (v_A - u_A) = -m_B (v_B - u_B)\) \(m_A v_A - m_A u_A = -m_B v_B + m_B u_B\)

  1. पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:

\(m_A u_A + m_B u_B = m_A v_A + m_B v_B\)

  • यह समीकरण दर्शाता है कि टक्कर से पहले का कुल संवेग (\(m_A u_A + m_B u_B\)) टक्कर के बाद के कुल संवेग (\(m_A v_A + m_B v_B\)) के बराबर होता है।

संवेग संरक्षण के नियम के अनुप्रयोग:

  1. बंदूक से गोली चलाना:
  • गोली चलाने से पहले, बंदूक और गोली दोनों विराम अवस्था में होते हैं, इसलिए कुल संवेग शून्य होता है।
  • गोली चलाने के बाद, गोली आगे की ओर गति करती है और बंदूक पीछे की ओर प्रतीप करती है।
  • गोली का आगे का संवेग बंदूक के पीछे के संवेग के बराबर और विपरीत होता है, जिससे कुल संवेग शून्य रहता है।
  • \(m_{गोली} v_{गोली} + m_{बंदूक} v_{बंदूक} = 0\)
  1. रॉकेट नोदन:
  • रॉकेट से गैसों का तेजी से बाहर निकलना (क्रिया) रॉकेट को विपरीत दिशा में धकेलता है (प्रतिक्रिया), जिससे रॉकेट का संवेग संरक्षित रहता है।
  1. जेट इंजन: इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
  2. टक्कर और विस्फोट: सभी प्रकार की टक्करों और विस्फोटों में यदि कोई बाह्य बल न हो तो कुल संवेग संरक्षित रहता है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • संवेग संरक्षण का नियम न्यूटन के गति के दूसरे और तीसरे नियम का सीधा परिणाम है।
  • यह नियम तब लागू होता है जब निकाय पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य नहीं करता है।
🧮सूत्र

संवेग संरक्षण का नियम: \(m_1 u_1 + m_2 u_2 = m_1 v_1 + m_2 v_2\) जहाँ:

  • \(m_1, m_2\) = वस्तुओं के द्रव्यमान
  • \(u_1, u_2\) = टक्कर से पहले के वेग
  • \(v_1, v_2\) = टक्कर के बाद के वेग
याद रखें

संवेग संरक्षण का नियम तब लागू होता है जब निकाय पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य न कर रहा हो। आंतरिक बल (जैसे टक्कर के दौरान) निकाय के कुल संवेग को नहीं बदलते हैं।

Ask SAAVI — Free