बल एवं गति के नियम
यह अध्याय 'बल एवं गति के नियम' छात्रों को भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों से परिचित कराता है। इसमें बल की परिभाषा, जड़त्व का सिद्धांत, न्यूटन के गति के तीनों नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया, संवेग परिवर्तन की दर) और संवेग संरक्षण का नियम शामिल हैं। छात्र सीखेंगे कि बल किसी वस्तु की गति की अवस्था को कैसे बदलता है, संवेग की गणना कैसे की जाती है, और रॉकेट नोदन जैसे वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों को समझेंगे। यह अध्याय छात्रों को गति और बल के बीच के संबंध को समझने में मदद करता है, जो आगे की भौतिकी के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
बल की अवधारणा
बल एक बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की:
- विराम अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन करता है।
- परिवर्तन करने का प्रयास करता है।
बल के प्रभाव:
- किसी स्थिर वस्तु को गतिमान कर सकता है।
- किसी गतिमान वस्तु की चाल या दिशा बदल सकता है।
- किसी गतिमान वस्तु को रोक सकता है।
- वस्तु का आकार या आकृति बदल सकता है।
बल के प्रकार:
- संतुलित बल:
- जब किसी वस्तु पर लगे सभी बलों का परिणामी बल शून्य हो।
- वस्तु की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता (विराम में है तो विराम में रहेगी, गति में है तो उसी वेग से चलती रहेगी)।
- उदाहरण: रस्साकशी में दोनों टीमें बराबर बल लगाएँ।
- असंतुलित बल:
- जब किसी वस्तु पर लगे सभी बलों का परिणामी बल शून्य नहीं हो।
- वस्तु की अवस्था में परिवर्तन होता है (विराम से गति में आती है, गति से विराम में आती है, या वेग/दिशा बदलती है)।
- उदाहरण: रस्साकशी में एक टीम अधिक बल लगाए।
बल की इकाई:
- SI इकाई: न्यूटन (N)।
- CGS इकाई: डाइन।
- \(1 \text{ N} = 10^5 \text{ डाइन}\)
बल एक सदिश राशि है। इसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।
बल (Force): वह धक्का या खिंचाव जो किसी वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन करता है या करने का प्रयास करता है।
किसी वस्तु की गति की अवस्था में परिवर्तन करने के लिए असंतुलित बल का होना आवश्यक है।
गति का प्रथम नियम और जड़त्व
गति का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम):
- प्रत्येक वस्तु अपनी विराम अवस्था में या एक सीधी रेखा में एकसमान गति की अवस्था में बनी रहती है, जब तक कि उस पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य न करे।
- इसे गैलीलियो का जड़त्व का नियम भी कहते हैं।
जड़त्व (Inertia):
- किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विराम या गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है।
- जड़त्व वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
- जिस वस्तु का द्रव्यमान अधिक होता है, उसका जड़त्व भी अधिक होता है।
जड़त्व के प्रकार:
- विराम का जड़त्व:
- वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विराम अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है।
- उदाहरण:
- बस के अचानक चलने पर यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं।
- पेड़ की डाली हिलाने पर फल नीचे गिरते हैं।
- कंबल को छड़ी से पीटने पर धूल के कण बाहर निकलते हैं।
- गति का जड़त्व:
- वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है।
- उदाहरण:
- चलती बस के अचानक रुकने पर यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं।
- दौड़ता हुआ व्यक्ति अचानक रुकने पर आगे की ओर गिर सकता है।
- गाड़ी की छत पर रखा सामान अचानक ब्रेक लगाने पर आगे गिर सकता है, इसलिए उसे रस्सी से बांधा जाता है।
- दिशा का जड़त्व:
- वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी गति की दिशा में परिवर्तन का विरोध करती है।
- उदाहरण:
- तीव्र मोड़ पर गाड़ी मुड़ते समय यात्री बाहर की ओर धकेले जाते हैं।
द्रव्यमान और जड़त्व:
- द्रव्यमान जड़त्व की माप है।
- अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु का जड़त्व अधिक होता है, और उसे गति देने या रोकने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण: एक ट्रक का जड़त्व एक कार से अधिक होता है।
जड़त्व (Inertia): किसी वस्तु का वह प्राकृतिक गुण जो उसकी विराम या गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करता है।
जड़त्व के उदाहरणों को याद रखें, ये अक्सर छोटे उत्तर वाले प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
संवेग की परिभाषा और मात्रक
संवेग (Momentum):
- किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग का गुणनफल उसका संवेग कहलाता है।
- संवेग एक सदिश राशि है। इसकी दिशा वही होती है जो वस्तु के वेग की दिशा होती है।
- सूत्र: \(p = mv\)
- \(p\) = संवेग
- \(m\) = वस्तु का द्रव्यमान
- \(v\) = वस्तु का वेग
संवेग का मात्रक:
- SI मात्रक: किलोग्राम-मीटर प्रति सेकंड (kg m/s)।
- यह द्रव्यमान (kg) और वेग (m/s) के मात्रकों का गुणनफल है।
संवेग का महत्व:
- संवेग हमें बताता है कि किसी वस्तु को रोकने के लिए कितना बल आवश्यक होगा।
- अधिक द्रव्यमान या अधिक वेग वाली वस्तु का संवेग अधिक होता है, और उसे रोकने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण:
- एक छोटी गोली का वेग अधिक होने पर उसका संवेग बहुत अधिक होता है, जिससे वह अधिक क्षति पहुँचा सकती है।
- एक धीमी गति से चलती हुई बड़ी ट्रेन का संवेग भी बहुत अधिक होता है।
संवेग का सूत्र: \(p = mv\) जहाँ, \(p\) = संवेग, \(m\) = द्रव्यमान, \(v\) = वेग।
संवेग की दिशा हमेशा वस्तु के वेग की दिशा में होती है।
गति का द्वितीय नियम और बल का मात्रक
गति का द्वितीय नियम:
- किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर आरोपित असंतुलित बल के समानुपाती होती है, और यह परिवर्तन बल की दिशा में होता है।
- गणितीय रूप से: \(F \propto \frac{\Delta p}{\Delta t}\)
- जहाँ \(\Delta p\) संवेग में परिवर्तन और \(\Delta t\) समय अंतराल है।
द्वितीय नियम का गणितीय सूत्र (बल का सूत्र):
- माना किसी वस्तु का द्रव्यमान \(m\) है।
- प्रारंभिक वेग \(u\) और अंतिम वेग \(v\) है।
- प्रारंभिक संवेग \(p_1 = mu\)
- अंतिम संवेग \(p_2 = mv\)
- संवेग में परिवर्तन \(\Delta p = p_2 - p_1 = mv - mu = m(v-u)\)
- संवेग परिवर्तन की दर \(\frac{\Delta p}{\Delta t} = \frac{m(v-u)}{t}\)
- चूँकि \(a = \frac{v-u}{t}\) (त्वरण), अतः संवेग परिवर्तन की दर \(ma\) है।
- गति के द्वितीय नियम से: \(F \propto ma\)
- समानुपाती स्थिरांक को 1 मानने पर: \(F = ma\)
बल का SI मात्रक (न्यूटन):
- जब \(m = 1\) kg और \(a = 1\) m/s² हो, तो \(F = 1\) N।
- एक न्यूटन वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 m/s² का त्वरण उत्पन्न करता है।
- \(1 \text{ N} = 1 \text{ kg} \cdot \text{m/s}^2\)
द्वितीय नियम के अनुप्रयोग:
- क्रिकेट खिलाड़ी गेंद को कैच करते समय अपने हाथों को पीछे खींचते हैं। इससे गेंद के संवेग परिवर्तन का समय बढ़ जाता है, जिससे हाथों पर लगने वाला बल कम हो जाता है और चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।
- ऊँची कूद वाले खिलाड़ी गद्दे या बालू के ढेर पर कूदते हैं ताकि गिरने पर संवेग परिवर्तन का समय बढ़ जाए और चोट न लगे।
- वाहनों में शॉक एब्जॉर्बर (झटका अवशोषक) लगाए जाते हैं।
बल का सूत्र: \(F = ma\) जहाँ, \(F\) = बल, \(m\) = द्रव्यमान, \(a\) = त्वरण।
गति का द्वितीय नियम बल को मापने का तरीका प्रदान करता है।
गति का तृतीय नियम
गति का तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम):
- प्रत्येक क्रिया के लिए, हमेशा एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
- क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
- ये बल कभी भी एक ही वस्तु पर कार्य नहीं करते, इसलिए ये एक-दूसरे को रद्द नहीं करते।
तृतीय नियम के अनुप्रयोग:
- चलना: हम जमीन पर पीछे की ओर बल लगाते हैं (क्रिया), और जमीन हम पर आगे की ओर बल लगाती है (प्रतिक्रिया), जिससे हम आगे बढ़ते हैं।
- तैरना: तैराक पानी को पीछे धकेलता है (क्रिया), और पानी तैराक को आगे धकेलता है (प्रतिक्रिया)।
- बंदूक का प्रतिक्षेप (recoil): जब गोली बंदूक से आगे निकलती है (क्रिया), तो बंदूक पीछे की ओर धक्का देती है (प्रतिक्रिया)।
- रॉकेट का प्रक्षेपण: रॉकेट नीचे की ओर गर्म गैसें छोड़ता है (क्रिया), और गैसें रॉकेट को ऊपर की ओर धकेलती हैं (प्रतिक्रिया)।
- नाव से कूदना: जब कोई व्यक्ति नाव से किनारे पर कूदता है (क्रिया), तो नाव पीछे की ओर हटती है (प्रतिक्रिया)।
क्रिया और प्रतिक्रिया बल की विशेषताएँ:
- ये हमेशा युग्मों में होते हैं।
- इनका परिमाण समान होता है।
- इनकी दिशा विपरीत होती है।
- ये दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम: जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है (क्रिया), तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर समान परिमाण का और विपरीत दिशा में बल लगाती है (प्रतिक्रिया)।
छात्र अक्सर सोचते हैं कि क्रिया और प्रतिक्रिया बल एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं। याद रखें, वे अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को रद्द नहीं करते।
संवेग संरक्षण का नियम और अनुप्रयोग
संवेग संरक्षण का नियम:
- यदि दो या दो से अधिक वस्तुओं के निकाय पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य नहीं कर रहा हो, तो निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।
- अर्थात्, टक्कर से पहले का कुल संवेग = टक्कर के बाद का कुल संवेग।
गणितीय सत्यापन:
- माना दो वस्तुएँ A और B हैं, जिनके द्रव्यमान क्रमशः \(m_A\) और \(m_B\) हैं।
- टक्कर से पहले उनके प्रारंभिक वेग क्रमशः \(u_A\) और \(u_B\) हैं।
- टक्कर के बाद उनके अंतिम वेग क्रमशः \(v_A\) और \(v_B\) हैं।
- टक्कर के दौरान, वस्तु A द्वारा B पर लगाया गया बल \(F_{AB}\) और वस्तु B द्वारा A पर लगाया गया बल \(F_{BA}\) है।
- न्यूटन के तृतीय नियम से: \(F_{AB} = -F_{BA}\)
- न्यूटन के द्वितीय नियम से: \(F = ma = m \frac{(v-u)}{t}\)
- अतः, \(m_A \frac{(v_A - u_A)}{t} = -m_B \frac{(v_B - u_B)}{t}\)
- \(m_A (v_A - u_A) = -m_B (v_B - u_B)\)
- \(m_A v_A - m_A u_A = -m_B v_B + m_B u_B\)
- पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर: \(m_A u_A + m_B u_B = m_A v_A + m_B v_B\)
- यह समीकरण दर्शाता है कि टक्कर से पहले का कुल संवेग, टक्कर के बाद के कुल संवेग के बराबर होता है।
संवेग संरक्षण के नियम के अनुप्रयोग:
- बंदूक का प्रतिक्षेप: गोली चलाने पर बंदूक का पीछे हटना।
- प्रारंभ में (गोली चलाने से पहले), बंदूक और गोली दोनों विराम में होते हैं, इसलिए कुल संवेग शून्य होता है।
- गोली चलाने के बाद, गोली आगे बढ़ती है (धनात्मक संवेग), और बंदूक पीछे हटती है (ऋणात्मक संवेग)। कुल संवेग अभी भी शून्य रहता है।
- \(m_{बंदूक} \cdot v_{बंदूक} + m_{गोली} \cdot v_{गोली} = 0\)
- रॉकेट का प्रक्षेपण: रॉकेट से गैसों का निकलना और रॉकेट का ऊपर जाना।
- नाव से किनारे पर कूदना: व्यक्ति के कूदने पर नाव का पीछे हटना।
- टकराव (Collision): दो वस्तुओं के टकराने पर उनके संवेग का पुनर्वितरण होता है, लेकिन कुल संवेग संरक्षित रहता है।
संवेग संरक्षण का नियम: \(m_A u_A + m_B u_B = m_A v_A + m_B v_B\) जहाँ, \(m\) = द्रव्यमान, \(u\) = प्रारंभिक वेग, \(v\) = अंतिम वेग।
संवेग संरक्षण का नियम न्यूटन के द्वितीय और तृतीय नियम दोनों का परिणाम है।