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रासायनिक आबंधन
Chhattisgarh · Class 9 · 🔬 Science · Chapter 8

रासायनिक आबंधन

आयनिक बंधसहसंयोजक बंधसंयोजकताइलेक्ट्रॉन स्थानांतरणइलेक्ट्रॉन साझाकरणअष्टक नियम

यह अध्याय रासायनिक आबंधन के मूल सिद्धांतों का परिचय देता है, जिसमें आयनिक और सहसंयोजक बंधों के निर्माण की प्रक्रिया शामिल है। छात्र सोडियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे विभिन्न यौगिकों के उदाहरणों के माध्यम से इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण और इलेक्ट्रॉन साझाकरण की अवधारणाओं को समझते हैं। अध्याय संयोजकता की परिभाषा और आयनिक व सहसंयोजक यौगिकों के गुणों, जैसे घुलनशीलता, गलनांक, क्वथनांक और विद्युत चालकता पर भी प्रकाश डालता है। यह छात्रों को रासायनिक प्रतिक्रियाओं और यौगिकों के स्थायित्व को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

रासायनिक आबंधन की आवश्यकता और अष्टक नियम

परमाणुओं के बीच रासायनिक आबंधन तब होता है जब वे स्थिरता प्राप्त करने के लिए एक-दूसरे से जुड़ते हैं। यह स्थिरता आमतौर पर अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने से आती है।

  • अक्रिय गैस विन्यास (अष्टक नियम):
  • अधिकांश तत्वों के परमाणु अपने बाह्यतम कक्ष (संयोजी कक्ष) में आठ इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
  • यह विन्यास अक्रिय गैसों (जैसे नियॉन, आर्गन) के समान होता है, जो रासायनिक रूप से अत्यधिक स्थिर होती हैं।
  • अपवाद: हाइड्रोजन और हीलियम जैसे छोटे परमाणु अपने बाह्यतम कक्ष में दो इलेक्ट्रॉन (हीलियम विन्यास) प्राप्त करके स्थिरता प्राप्त करते हैं।
  • स्थिरता प्राप्त करने के तरीके:
  • इलेक्ट्रॉनों का त्याग: परमाणु अपने बाह्यतम कक्ष से इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनायन बनाते हैं। (मुख्यतः धातुएँ)
  • इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण: परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाते हैं। (मुख्यतः अधातुएँ)
  • इलेक्ट्रॉनों का साझा: परमाणु इलेक्ट्रॉनों का साझा करके सहसंयोजक बंध बनाते हैं। (मुख्यतः अधातुएँ)
  • संयोजी इलेक्ट्रॉन:
  • किसी परमाणु के बाह्यतम कक्ष में उपस्थित इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं।
  • ये इलेक्ट्रॉन ही रासायनिक आबंधन में भाग लेते हैं।
  • उदाहरण:
  • सोडियम (परमाणु संख्या 11): इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1। यह एक इलेक्ट्रॉन त्याग कर नियॉन (2, 8) जैसा विन्यास प्राप्त कर सकता है।
  • क्लोरीन (परमाणु संख्या 17): इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7। यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर आर्गन (2, 8, 8) जैसा विन्यास प्राप्त कर सकता है।
📖परिभाषा

अष्टक नियम: रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु अपने बाह्यतम कोश में आठ इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखते हैं ताकि वे अक्रिय गैसों के समान स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त कर सकें।

महत्त्वपूर्ण

हाइड्रोजन और हीलियम जैसे छोटे परमाणुओं के लिए, स्थिरता द्विक नियम (बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन) द्वारा प्राप्त होती है।

आयनिक बंध का निर्माण (सोडियम क्लोराइड)

आयनिक बंध का निर्माण इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से होता है, जिससे विपरीत आवेशित आयन बनते हैं जो स्थिरवैद्युत आकर्षण बल द्वारा एक साथ बंधे रहते हैं।

  • सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण:
  1. सोडियम परमाणु (Na):
  • परमाणु संख्या = 11
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 1
  • स्थिरता प्राप्त करने के लिए, सोडियम परमाणु अपने बाह्यतम कक्ष से एक इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
  • Na (2, 8, 1) $\rightarrow$ Na$^+$ (2, 8) + e$^-$ (नियॉन विन्यास)
  • सोडियम परमाणु एक धनायन (Na$^+$) में बदल जाता है।
  1. क्लोरीन परमाणु (Cl):
  • परमाणु संख्या = 17
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 7
  • स्थिरता प्राप्त करने के लिए, क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है।
  • Cl (2, 8, 7) + e$^-$ $\rightarrow$ Cl$^-$ (2, 8, 8) (आर्गन विन्यास)
  • क्लोरीन परमाणु एक ऋणायन (Cl$^-$) में बदल जाता है, जिसे क्लोराइड आयन कहते हैं।
  1. आयनिक बंध का बनना:
  • उत्पन्न Na$^+$ धनायन और Cl$^-$ ऋणायन विपरीत आवेशित होते हैं।
  • ये आयन एक-दूसरे को प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल से आकर्षित करते हैं।
  • इस आकर्षण बल के कारण Na$^+$ और Cl$^-$ आयन मिलकर सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण करते हैं।
  • यह बंध वैद्युत संयोजक बंध या आयनिक बंध कहलाता है।
  • NaCl की संरचना:
  • सोडियम क्लोराइड अणु के रूप में नहीं पाया जाता है।
  • यह विपरीत आवेशित आयनों (Na$^+$ और Cl$^-$) का एक त्रिविमीय क्रिस्टल जालक होता है।
  • इस जालक में, प्रत्येक Na$^+$ आयन कई Cl$^-$ आयनों से घिरा होता है, और प्रत्येक Cl$^-$ आयन कई Na$^+$ आयनों से घिरा होता है।
  • क्रिस्टल में Na$^+$ आयनों की संख्या Cl$^-$ आयनों की संख्या के बराबर होती है, जिससे यौगिक विद्युत उदासीन होता है।
📖परिभाषा

आयनिक बंध: वह रासायनिक बंध जो एक परमाणु से दूसरे परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनता है, जिसके परिणामस्वरूप विपरीत आवेशित आयनों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल उत्पन्न होता है।

याद रखें

आयनिक बंध मुख्य रूप से धातुओं (जो इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं) और अधातुओं (जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं) के बीच बनते हैं।

आयन, आयनिक यौगिक और लुइस प्रतीक

  • आयन:
  • एक परमाणु या परमाणुओं का समूह जिस पर शुद्ध विद्युत आवेश होता है, आयन कहलाता है।
  • धनायन (Cation): जब एक परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागता है, तो उस पर धनात्मक आवेश आ जाता है। (उदा. Na$^+$, Mg$^{2+}$)
  • ऋणायन (Anion): जब एक परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो उस पर ऋणात्मक आवेश आ जाता है। (उदा. Cl$^-$, O$^{2-}$)
  • आयन पर आवेश त्यागे गए या ग्रहण किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होता है।
  • आयनिक यौगिक (वैद्युत संयोजक यौगिक):
  • वे यौगिक जो आयनिक बंध द्वारा बनते हैं, आयनिक यौगिक कहलाते हैं।
  • ये यौगिक धनायनों और ऋणायनों से मिलकर बने होते हैं।
  • उदाहरण: NaCl, MgCl$_2$, CaO।
  • लुइस प्रतीक (इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना):
  • अमेरिकी रसायनज्ञ गिलबर्ट न्यूटन लुइस ने संयोजी इलेक्ट्रॉनों को दर्शाने के लिए इस विधि का उपयोग किया।
  • इसमें तत्व के प्रतीक के चारों ओर बिंदुओं (या क्रॉस) द्वारा बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण:
  • सोडियम (Na): 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन $ ightarrow$ Na·
  • मैग्नीशियम (Mg): 2 संयोजी इलेक्ट्रॉन $ ightarrow$ :Mg
  • क्लोरीन (Cl): 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन $ ightarrow$ :Cl·
  • ऑक्सीजन (O): 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन $ ightarrow$ :O··
  • लुइस प्रतीक का महत्व:
  • यह रासायनिक आबंधन में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या को सरलता से समझने में मदद करता है।
  • यह दर्शाता है कि परमाणु अष्टक पूरा करने के लिए कितने इलेक्ट्रॉन त्यागेंगे, ग्रहण करेंगे या साझा करेंगे।
📖परिभाषा

लुइस प्रतीक: किसी तत्व के प्रतीक के चारों ओर बिंदुओं द्वारा उसके बाह्यतम कोश में उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रॉनों को दर्शाने का तरीका।

महत्त्वपूर्ण

परमाणु विद्युत उदासीन होते हैं क्योंकि उनमें प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या बराबर होती है। आयन बनने पर यह संतुलन बिगड़ जाता है।

विभिन्न आयनिक यौगिकों का निर्माण

आयनिक बंध का निर्माण विभिन्न धातुओं और अधातुओं के बीच होता है, जहाँ धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागती हैं और अधातुएँ ग्रहण करती हैं।

  • मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl$_2$) का निर्माण:
  • मैग्नीशियम (Mg): परमाणु संख्या 12, विन्यास 2, 8, 2।
  • Mg अपने बाह्यतम कक्ष से दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर Mg$^{2+}$ आयन (2, 8) बनाता है।
  • क्लोरीन (Cl): परमाणु संख्या 17, विन्यास 2, 8, 7।
  • Cl को अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
  • बंध निर्माण: Mg द्वारा त्यागे गए दो इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने के लिए दो क्लोरीन परमाणुओं की आवश्यकता होती है। प्रत्येक Cl परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cl$^-$ आयन (2, 8, 8) बनाता है।
  • Mg$^{2+}$ और दो Cl$^-$ आयन मिलकर MgCl$_2$ बनाते हैं।
  • कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) का निर्माण:
  • कैल्सियम (Ca): परमाणु संख्या 20, विन्यास 2, 8, 8, 2।
  • Ca अपने बाह्यतम कक्ष से दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर Ca$^{2+}$ आयन (2, 8, 8) बनाता है।
  • ऑक्सीजन (O): परमाणु संख्या 8, विन्यास 2, 6।
  • O को अष्टक पूरा करने के लिए दो इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
  • बंध निर्माण: Ca द्वारा त्यागे गए दो इलेक्ट्रॉनों को एक O परमाणु ग्रहण करता है, जिससे O$^{2-}$ आयन (2, 8) बनता है।
  • Ca$^{2+}$ और O$^{2-}$ आयन मिलकर CaO बनाते हैं।
  • ऐलुमिनियम क्लोराइड (AlCl$_3$) का निर्माण:
  • ऐलुमिनियम (Al): परमाणु संख्या 13, विन्यास 2, 8, 3।
  • Al अपने बाह्यतम कक्ष से तीन इलेक्ट्रॉन त्यागकर Al$^{3+}$ आयन (2, 8) बनाता है।
  • क्लोरीन (Cl): परमाणु संख्या 17, विन्यास 2, 8, 7।
  • Cl को अष्टक पूरा करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
  • बंध निर्माण: Al द्वारा त्यागे गए तीन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने के लिए तीन क्लोरीन परमाणुओं की आवश्यकता होती है। प्रत्येक Cl परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cl$^-$ आयन (2, 8, 8) बनाता है।
  • Al$^{3+}$ और तीन Cl$^-$ आयन मिलकर AlCl$_3$ बनाते हैं।
  • सोडियम ऑक्साइड (Na$_2$O) का निर्माण:
  • सोडियम (Na): परमाणु संख्या 11, विन्यास 2, 8, 1।
  • Na अपने बाह्यतम कक्ष से एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na$^+$ आयन (2, 8) बनाता है।
  • ऑक्सीजन (O): परमाणु संख्या 8, विन्यास 2, 6।
  • O को अष्टक पूरा करने के लिए दो इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
  • बंध निर्माण: O द्वारा दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के लिए दो सोडियम परमाणुओं की आवश्यकता होती है। प्रत्येक Na परमाणु एक इलेक्ट्रॉन त्यागता है।
  • दो Na$^+$ और एक O$^{2-}$ आयन मिलकर Na$_2$O बनाते हैं।
याद रखें

आयनिक बंध में, इलेक्ट्रॉन त्यागने वाले परमाणु धातु होते हैं और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाले परमाणु अधातु होते हैं।

संयोजकता की परिभाषा और निर्धारण

संयोजकता किसी तत्व के परमाणु की रासायनिक बंध बनाने की क्षमता को दर्शाती है। यह अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए त्यागे गए, ग्रहण किए गए या साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।

  • संयोजकता का निर्धारण (आयनिक बंध के संदर्भ में):
  • इलेक्ट्रॉन त्यागने वाले परमाणु (धातुएँ): संयोजकता त्यागे गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
  • सोडियम (Na): 1 इलेक्ट्रॉन त्यागता है $ ightarrow$ संयोजकता = 1
  • कैल्सियम (Ca): 2 इलेक्ट्रॉन त्यागता है $ ightarrow$ संयोजकता = 2
  • ऐलुमिनियम (Al): 3 इलेक्ट्रॉन त्यागता है $ ightarrow$ संयोजकता = 3
  • इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाले परमाणु (अधातुएँ): संयोजकता ग्रहण किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है। (यह बाह्यतम कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन पूरा करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है।)
  • क्लोरीन (Cl): 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (8-7=1) $ ightarrow$ संयोजकता = 1
  • ऑक्सीजन (O): 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (8-6=2) $ ightarrow$ संयोजकता = 2
  • संयोजकता और अक्रिय गैस विन्यास:
  • संयोजकता सीधे तौर पर परमाणु की अक्रिय गैस विन्यास (अष्टक या द्विक) प्राप्त करने की प्रवृत्ति से संबंधित है।
  • परमाणु उतने ही इलेक्ट्रॉन त्यागते, ग्रहण करते या साझा करते हैं, जितने से वे सबसे निकटतम अक्रिय गैस के समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त कर सकें।
  • धातु और अधातु की पहचान (आयनिक बंध निर्माण में):
  • जो तत्व इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं, वे धातु कहलाते हैं।
  • जो तत्व इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं, वे अधातु कहलाते हैं।
📖परिभाषा

संयोजकता: किसी तत्व के परमाणु की अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए जितने इलेक्ट्रॉन त्यागने, ग्रहण करने या साझा करने की क्षमता होती है, वह उसकी संयोजकता कहलाती है।

💡सुझाव

संयोजकता का निर्धारण करते समय हमेशा निकटतम अक्रिय गैस विन्यास को ध्यान में रखें। उदाहरण के लिए, सोडियम 7 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की बजाय 1 इलेक्ट्रॉन त्यागना पसंद करता है क्योंकि यह अधिक ऊर्जावान रूप से अनुकूल है।

सहसंयोजक बंध की अवधारणा

सहसंयोजक बंध का निर्माण इलेक्ट्रॉनों के साझे से होता है, जहाँ दोनों परमाणु साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों पर समान अधिकार रखते हैं और इस प्रकार अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करते हैं।

  • कार्बन की विशेष स्थिति:
  • कार्बन (परमाणु संख्या 6): इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4।
  • कार्बन के लिए 4 इलेक्ट्रॉन त्यागकर C$^{4+}$ आयन बनाना या 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर C$^{4-}$ आयन बनाना ऊर्जावान रूप से बहुत कठिन है।
  • अतः कार्बन इलेक्ट्रॉनों का साझा करके बंध बनाता है।
  • साझे का अर्थ:
  • जब दो परमाणु अपने बाह्यतम कक्ष के इलेक्ट्रॉनों को एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं, तो वे साझा किए गए इलेक्ट्रॉन दोनों परमाणुओं के अष्टक (या द्विक) को पूरा करने में गिने जाते हैं।
  • यह साझेदारी दोनों परमाणुओं को स्थिरता प्रदान करती है।
  • सहसंयोजक बंध के उदाहरण:
  • कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl$_4$):
  • कार्बन को 4 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • प्रत्येक क्लोरीन को 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • एक कार्बन परमाणु अपने 4 इलेक्ट्रॉनों को 4 क्लोरीन परमाणुओं के साथ साझा करता है। प्रत्येक क्लोरीन परमाणु कार्बन के एक इलेक्ट्रॉन के साथ अपने एक इलेक्ट्रॉन का साझा करता है।
  • इससे कार्बन और प्रत्येक क्लोरीन का अष्टक पूरा हो जाता है।
  • मेथैन (CH$_4$):
  • कार्बन को 4 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • प्रत्येक हाइड्रोजन को 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है (द्विक पूरा करने के लिए)।
  • एक कार्बन परमाणु अपने 4 इलेक्ट्रॉनों को 4 हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है। प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु कार्बन के एक इलेक्ट्रॉन के साथ अपने एक इलेक्ट्रॉन का साझा करता है।
  • इससे कार्बन का अष्टक और प्रत्येक हाइड्रोजन का द्विक पूरा हो जाता है।
  • सहसंयोजक यौगिक:
  • वे यौगिक जिनमें परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के साझे से बंध बनते हैं, सहसंयोजक यौगिक कहलाते हैं।
  • ये यौगिक आमतौर पर अणुओं के रूप में मौजूद होते हैं।
  • उदाहरण: CH$_4$, CO$_2$, H$_2$O, NH$_3$, H$_2$, O$_2$, N$_2$।
📖परिभाषा

सहसंयोजक बंध: वह रासायनिक बंध जो दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के साझे से बनता है, जिससे दोनों परमाणु अपने बाह्यतम कोश में अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करते हैं।

महत्त्वपूर्ण

सहसंयोजक बंध मुख्य रूप से अधातुओं के बीच बनते हैं।

विभिन्न सहसंयोजक यौगिकों का निर्माण

सहसंयोजक बंध विभिन्न प्रकार के परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के साझे से बनते हैं, जिससे एकल, द्विबंध या त्रिबंध का निर्माण हो सकता है।

  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO$_2$) का निर्माण:
  • कार्बन को 4 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • प्रत्येक ऑक्सीजन को 2 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • एक कार्बन परमाणु अपने 4 इलेक्ट्रॉनों को दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ साझा करता है। प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु कार्बन के 2 इलेक्ट्रॉनों के साथ अपने 2 इलेक्ट्रॉनों का साझा करता है।
  • इससे कार्बन और दोनों ऑक्सीजन परमाणुओं का अष्टक पूरा हो जाता है।
  • कार्बन और प्रत्येक ऑक्सीजन के बीच द्विबंध बनता है।
  • जल (H$_2$O) का निर्माण:
  • ऑक्सीजन को 2 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • प्रत्येक हाइड्रोजन को 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • एक ऑक्सीजन परमाणु अपने 2 इलेक्ट्रॉनों को दो हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है। प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु ऑक्सीजन के एक इलेक्ट्रॉन के साथ अपने एक इलेक्ट्रॉन का साझा करता है।
  • इससे ऑक्सीजन का अष्टक और दोनों हाइड्रोजन का द्विक पूरा हो जाता है।
  • ऑक्सीजन और प्रत्येक हाइड्रोजन के बीच एकल बंध बनता है।
  • अमोनिया (NH$_3$) का निर्माण:
  • नाइट्रोजन (परमाणु संख्या 7, विन्यास 2, 5) को 3 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • प्रत्येक हाइड्रोजन को 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • एक नाइट्रोजन परमाणु अपने 3 इलेक्ट्रॉनों को तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है। प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु नाइट्रोजन के एक इलेक्ट्रॉन के साथ अपने एक इलेक्ट्रॉन का साझा करता है।
  • इससे नाइट्रोजन का अष्टक और तीनों हाइड्रोजन का द्विक पूरा हो जाता है।
  • नाइट्रोजन और प्रत्येक हाइड्रोजन के बीच एकल बंध बनता है।
  • हाइड्रोजन अणु (H$_2$) का निर्माण:
  • प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु को 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • दो हाइड्रोजन परमाणु अपने एक-एक इलेक्ट्रॉन का साझा करते हैं।
  • इससे दोनों हाइड्रोजन परमाणुओं का द्विक पूरा हो जाता है।
  • दोनों हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच एकल बंध बनता है।
  • ऑक्सीजन अणु (O$_2$) का निर्माण:
  • प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु को 2 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • दो ऑक्सीजन परमाणु अपने दो-दो इलेक्ट्रॉनों का साझा करते हैं।
  • इससे दोनों ऑक्सीजन परमाणुओं का अष्टक पूरा हो जाता है।
  • दोनों ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच द्विबंध बनता है।
  • नाइट्रोजन अणु (N$_2$) का निर्माण:
  • प्रत्येक नाइट्रोजन परमाणु को 3 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।
  • दो नाइट्रोजन परमाणु अपने तीन-तीन इलेक्ट्रॉनों का साझा करते हैं।
  • इससे दोनों नाइट्रोजन परमाणुओं का अष्टक पूरा हो जाता है।
  • दोनों नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच त्रिबंध बनता है।
याद रखें

सहसंयोजक बंधों में, साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर एकल, द्विबंध या त्रिबंध बनते हैं।

एकल, द्विबंध और त्रिबंध

सहसंयोजक बंधों को साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

  • एकल बंध (-):
  • जब दो परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन का साझा करते हैं, तो उनके बीच एक इलेक्ट्रॉन युग्म बनता है।
  • इसे एक एकल बंध कहते हैं और इसे एक सीधी रेखा (-) से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: H-H (हाइड्रोजन), Cl-Cl (क्लोरीन), C-H (मेथैन), O-H (जल), N-H (अमोनिया)।
  • द्विबंध (=):
  • जब दो परमाणु दो-दो इलेक्ट्रॉनों का साझा करते हैं, तो उनके बीच दो इलेक्ट्रॉन युग्म बनते हैं।
  • इसे एक द्विबंध कहते हैं और इसे दो सीधी रेखाओं (=) से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: O=O (ऑक्सीजन), C=O (कार्बन डाइऑक्साइड), C=C (एथीन, H$_2$C=CH$_2$)।
  • त्रिबंध (≡):
  • जब दो परमाणु तीन-तीन इलेक्ट्रॉनों का साझा करते हैं, तो उनके बीच तीन इलेक्ट्रॉन युग्म बनते हैं।
  • इसे एक त्रिबंध कहते हैं और इसे तीन सीधी रेखाओं (≡) से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: N≡N (नाइट्रोजन), C≡C (एथाइन, HC≡CH)।
  • बंधों की शक्ति:
  • त्रिबंध > द्विबंध > एकल बंध (बंध की शक्ति और लंबाई के संदर्भ में)।
  • जितने अधिक इलेक्ट्रॉन साझा होते हैं, बंध उतना ही मजबूत और छोटा होता है।
💡सुझाव

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाते समय, सुनिश्चित करें कि प्रत्येक परमाणु का अष्टक (या हाइड्रोजन के लिए द्विक) पूरा हो रहा हो। साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्मों को दोनों परमाणुओं के लिए गिना जाता है।

संयोजकता का सहसंयोजक बंध के संदर्भ में

सहसंयोजक बंध के संदर्भ में, संयोजकता को अष्टक पूरा करने के लिए साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

  • कार्बन की संयोजकता:
  • कार्बन के बाह्यतम कक्ष में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • यह अष्टक पूरा करने के लिए 4 इलेक्ट्रॉनों का साझा करता है।
  • अतः कार्बन की संयोजकता 4 है। (उदाहरण: CH$_4$, CCl$_4$)
  • ऑक्सीजन की संयोजकता (सहसंयोजक यौगिकों में):
  • ऑक्सीजन के बाह्यतम कक्ष में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • यह अष्टक पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों का साझा करता है।
  • अतः ऑक्सीजन की संयोजकता 2 है। (उदाहरण: H$_2$O, CO$_2$)
  • हाइड्रोजन की संयोजकता:
  • हाइड्रोजन के बाह्यतम कक्ष में 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
  • यह द्विक पूरा करने के लिए 1 इलेक्ट्रॉन का साझा करता है।
  • अतः हाइड्रोजन की संयोजकता 1 है। (उदाहरण: H$_2$, CH$_4$, H$_2$O)
  • नाइट्रोजन की संयोजकता:
  • नाइट्रोजन के बाह्यतम कक्ष में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • यह अष्टक पूरा करने के लिए 3 इलेक्ट्रॉनों का साझा करता है।
  • अतः नाइट्रोजन की संयोजकता 3 है। (उदाहरण: NH$_3$, N$_2$)
  • संयोजकता की व्यापक परिभाषा:
  • किसी तत्व की संयोजकता वह संख्या है जो यह दर्शाती है कि वह परमाणु अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए कितने इलेक्ट्रॉन त्यागता, ग्रहण करता है, या साझा करने के लिए उपलब्ध कराता है।
  • यह अवधारणा आयनिक और सहसंयोजक दोनों प्रकार के बंधों पर लागू होती है।
📖परिभाषा

संयोजकता (सहसंयोजक संदर्भ में): किसी परमाणु द्वारा अष्टक (या द्विक) पूरा करने के लिए साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या।

🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर आयनिक और सहसंयोजक बंधों में संयोजकता की परिभाषा को लेकर भ्रमित होते हैं। याद रखें, दोनों ही मामलों में लक्ष्य अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करना है, बस तरीका अलग है (स्थानांतरण बनाम साझा)।

आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म

आयनिक और सहसंयोजक यौगिकों के बंधों की प्रकृति में अंतर के कारण उनके भौतिक और रासायनिक गुणों में महत्वपूर्ण भिन्नताएँ होती हैं।

  • आयनिक यौगिकों के गुणधर्म:
  1. भौतिक अवस्था: सामान्यतः ठोस और क्रिस्टलीय होते हैं। (उदाहरण: NaCl)
  2. गलनांक और क्वथनांक: उच्च होते हैं।
  • कारण: आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  1. घुलनशीलता: सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं, लेकिन कार्बनिक विलायकों (जैसे पेट्रोल, ईथर) में अघुलनशील होते हैं।
  • कारण: जल एक ध्रुवीय विलायक है जो आयनों को घेरकर उन्हें अलग कर देता है।
  1. विद्युत चालकता:
  • ठोस अवस्था में: कुचालक होते हैं, क्योंकि आयन गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते।
  • पिघली हुई अवस्था (गलित अवस्था) या जलीय विलयन में: सुचालक होते हैं, क्योंकि आयन स्वतंत्र रूप से गति करने के लिए उपलब्ध होते हैं।
  1. कठोरता और भंगुरता: कठोर होते हैं लेकिन भंगुर (टूटने वाले) होते हैं।
  • कारण: आयनों की नियमित व्यवस्था में व्यवधान आने पर समान आवेश वाले आयन एक-दूसरे के पास आ जाते हैं, जिससे प्रतिकर्षण होता है और क्रिस्टल टूट जाता है।
  • सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म:
  1. भौतिक अवस्था: सामान्यतः गैस, द्रव या नरम ठोस होते हैं। (उदाहरण: CH$_4$ गैस, H$_2$O द्रव, शक्कर ठोस)
  2. गलनांक और क्वथनांक: आयनिक यौगिकों की तुलना में प्रायः कम होते हैं।
  • कारण: अणुओं के बीच दुर्बल अंतरा-आणविक बल होते हैं, जिन्हें तोड़ने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  1. घुलनशीलता: सामान्यतः जल में अघुलनशील होते हैं, लेकिन कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं।
  • अपवाद: कुछ सहसंयोजक यौगिक (जैसे शक्कर, ग्लूकोज) जल में घुलनशील होते हैं क्योंकि वे जल के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं।
  1. विद्युत चालकता: सामान्यतः कुचालक होते हैं।
  • कारण: इनमें कोई मुक्त आयन या इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं जो विद्युत का वहन कर सकें।
  1. कठोरता: आमतौर पर नरम होते हैं।
  • विद्युत चालकता का परीक्षण (क्रियाकलाप):
  • एक परिपथ (बैटरी, बल्ब, स्विच, ग्रेफाइट छड़ें) का उपयोग करके विभिन्न विलयनों (नमक, कैल्सियम क्लोराइड, शक्कर, ग्लूकोज) की चालकता का परीक्षण किया जा सकता है।
  • अवलोकन:
  • नमक (NaCl) और कैल्सियम क्लोराइड (CaCl$_2$) के विलयन में बल्ब जलता है $ ightarrow$ ये आयनिक यौगिक हैं और आयनित अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं।
  • शक्कर और ग्लूकोज के विलयन में बल्ब नहीं जलता $ ightarrow$ ये सहसंयोजक यौगिक हैं और आयनित नहीं होते, इसलिए विद्युत के कुचालक होते हैं।
💡सुझाव

आयनिक और सहसंयोजक यौगिकों के गुणों में अंतर बोर्ड परीक्षाओं में एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। तुलनात्मक तालिका के रूप में याद रखना सबसे अच्छा है।

याद रखें

विद्युत चालकता के लिए मुक्त आयनों या मुक्त इलेक्ट्रॉनों का होना आवश्यक है। आयनिक यौगिकों में आयन होते हैं, लेकिन ठोस अवस्था में वे स्थिर होते हैं।

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