रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
यह अध्याय छात्रों को रासायनिक अभिक्रियाओं और समीकरणों की मूल अवधारणाओं से परिचित कराता है। इसमें रासायनिक परिवर्तनों की पहचान करना, रासायनिक समीकरणों को लिखना और संतुलित करना, और विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं जैसे संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन, ऑक्सीकरण और अपचयन को समझना शामिल है। यह अध्याय दैनिक जीवन में रासायनिक अभिक्रियाओं के महत्व पर भी प्रकाश डालता है।
रासायनिक अभिक्रियाएँ
जब कोई पदार्थ रासायनिक परिवर्तन से गुजरता है, तो हम कहते हैं कि एक रासायनिक अभिक्रिया हुई है। रासायनिक अभिक्रियाओं में पदार्थ की प्रकृति और पहचान बदल जाती है और नए पदार्थ बनते हैं।
रासायनिक अभिक्रियाओं के लक्षण:
- अवस्था में परिवर्तन: ठोस से द्रव, द्रव से गैस, आदि।
- रंग में परिवर्तन: जैसे लोहे पर जंग लगना (भूरा-लाल)।
- गैस का उत्सर्जन: अभिक्रिया के दौरान गैस का निकलना।
- तापमान में परिवर्तन: अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (ऊष्मा निकलना) या ऊष्माशोषी (ऊष्मा अवशोषित होना) हो सकती है।
- अवक्षेप का बनना: अभिक्रिया के दौरान अविलेय ठोस का बनना।
दैनिक जीवन में रासायनिक अभिक्रियाओं के उदाहरण:
- दूध से दही बनना
- कोयले का जलना
- भोजन का पकना
- लोहे पर जंग लगना
- श्वसन
- भोजन का पाचन
क्रियाकलाप 1: मैग्नीशियम रिबन का दहन
- अवलोकन: मैग्नीशियम रिबन चमकदार सफेद लौ के साथ जलता है और सफेद चूर्ण (मैग्नीशियम ऑक्साइड) में बदल जाता है।
- अभिक्रिया: मैग्नीशियम (Mg) वायु में उपस्थित ऑक्सीजन (O₂) से क्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) बनाता है।
- रासायनिक समीकरण (शब्द): मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड
- लिटमस परीक्षण: मैग्नीशियम ऑक्साइड का जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है, जो लाल लिटमस को नीला कर देता है।
क्रियाकलाप 2: सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड की अभिक्रिया
- अवलोकन: सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के विलयनों को मिलाने पर सफेद रंग का अविलेय पदार्थ (अवक्षेप) बनता है।
- अभिक्रिया: सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) बेरियम क्लोराइड (BaCl₂) से क्रिया करके बेरियम सल्फेट (BaSO₄) का अवक्षेप और सोडियम क्लोराइड (NaCl) बनाता है।
- अवक्षेप: बेरियम सल्फेट (BaSO₄) का सफेद अवक्षेप।
क्रियाकलाप 3: जिंक और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया
- अवलोकन: जिंक के दानों के आस-पास गैस के बुलबुले निकलते हैं और क्वथन नली गर्म हो जाती है।
- अभिक्रिया: जिंक (Zn) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से क्रिया करके जिंक क्लोराइड (ZnCl₂) और हाइड्रोजन गैस (H₂) बनाता है।
- गैस परीक्षण: जलती माचिस की तीली ले जाने पर 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है, जो हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति दर्शाती है।
- तापमान परिवर्तन: अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है, जिससे तापमान में वृद्धि होती है।
रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं, बल्कि परमाणुओं के आपसी बंध टूटते और जुड़ते हैं, जिससे नए पदार्थों का निर्माण होता है।
रासायनिक समीकरण और शब्द समीकरण
रासायनिक समीकरण: रासायनिक अभिक्रियाओं को संक्षिप्त रूप में दर्शाने का तरीका।
शब्द समीकरण:
- किसी रासायनिक अभिक्रिया का वर्णन वाक्य के रूप में बहुत लंबा हो जाता है।
- इसे संक्षिप्त रूप में शब्द समीकरण के रूप में लिखा जाता है।
- संरचना: अभिकारक → उत्पाद
- अभिकारक: वे पदार्थ जिनमें रासायनिक परिवर्तन होता है। इन्हें तीर के निशान के बाईं ओर लिखा जाता है।
- उत्पाद: अभिक्रिया के फलस्वरूप बनने वाले नए पदार्थ। इन्हें तीर के निशान के दाईं ओर लिखा जाता है।
- तीर का निशान (→): अभिकारकों के उत्पादों में परिवर्तन को दर्शाता है।
- योग चिह्न (+): यदि अभिकारक या उत्पाद एक से अधिक हों, तो उनके बीच योग चिह्न (+) लगाया जाता है।
उदाहरण: मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड (अभिकारक) (उत्पाद)
अभिकारक (Reactants): वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं और रासायनिक परिवर्तन से गुजरते हैं।
उत्पाद (Products): वे नए पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनते हैं।
रासायनिक समीकरण लिखना और संतुलन की आवश्यकता
रासायनिक समीकरण लिखना:
- शब्दों की जगह रासायनिक सूत्र लिखकर रासायनिक समीकरण को अधिक संक्षिप्त और उपयोगी बनाया जा सकता है।
- उदाहरण: Mg + O₂ → MgO
असंतुलित समीकरण:
- यदि तीर के निशान के बाईं (अभिकारक) तथा दाईं (उत्पाद) ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान नहीं हो, तो समीकरण असंतुलित होता है।
- उदाहरण: Mg + O₂ → MgO (यहाँ ऑक्सीजन के परमाणु बाईं ओर 2 और दाईं ओर 1 हैं, अतः यह असंतुलित है।)
रासायनिक समीकरण को संतुलित करने की आवश्यकता:
- यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम पर आधारित है।
- द्रव्यमान संरक्षण का नियम: किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में पदार्थ का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश।
- इसका अर्थ है कि अभिक्रिया के दौरान परमाणु न तो बनते हैं और न ही नष्ट होते हैं।
- अतः, किसी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।
- दूसरे शब्दों में, रासायनिक अभिक्रिया के पहले और बाद में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।
- इसलिए, समीकरण को संतुलित करना आवश्यक है।
रासायनिक समीकरण का संतुलन द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन सुनिश्चित करता है।
रासायनिक समीकरण को संतुलित करना
रासायनिक समीकरण को संतुलित करने की विधि को अनुमान विधि (Hit and Trial Method) कहते हैं। इसमें सबसे छोटी पूर्णांक संख्या से संतुलन आरंभ कर आवश्यकतानुसार गुणांक का उपयोग करके समीकरण को संतुलित किया जाता है।
संतुलन के चरण (उदाहरण: H₂ + O₂ → H₂O):
चरण 1: सूत्र के चारों ओर बॉक्स बनाना
- संतुलित करने के लिए सबसे पहले प्रत्येक सूत्र के चारों ओर बॉक्स बना लें।
- महत्वपूर्ण: समीकरण को संतुलित करते समय बॉक्स के अंदर कुछ भी परिवर्तन नहीं करना है।
- H₂ + O₂ → H₂O (असंतुलित समीकरण)
- [H₂] + [O₂] → [H₂O] (बॉक्स के साथ)
चरण 2: परमाणुओं की संख्या की सूची बनाना
- असंतुलित समीकरण में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या की सूची बनाएं।
| तत्व | अभिकारकों के परमाणुओं की संख्या (बाईं ओर) | उत्पादों के परमाणुओं की संख्या (दाईं ओर) | |---|---|---| | H | 2 | 2 | | O | 2 | 1 |
चरण 3: सबसे अधिक परमाणुओं वाले तत्व को संतुलित करना
- उस यौगिक से शुरू करें जिसमें सबसे अधिक परमाणु हों, चाहे वह अभिकारक हो या उत्पाद।
- इस उदाहरण में, ऑक्सीजन के परमाणु असंतुलित हैं (बाईं ओर 2, दाईं ओर 1)।
- ऑक्सीजन को संतुलित करने के लिए उत्पाद (H₂O) को 2 से गुणा करें।
- याद रखें: आप सूत्र को नहीं बदल सकते (जैसे H₂O₂ नहीं लिख सकते), केवल गुणांक लगा सकते हैं।
- [H₂] + [O₂] → 2[H₂O]
चरण 4: आंशिक रूप से संतुलित समीकरण के अन्य तत्वों को संतुलित करना
- अब हाइड्रोजन परमाणु असंतुलित हो गए हैं (उत्पाद में 2 × 2 = 4)।
- अभिकारक में हाइड्रोजन को संतुलित करने के लिए [H₂] को 2 से गुणा करें।
- 2[H₂] + [O₂] → 2[H₂O]
चरण 5: अंतिम जाँच
- समीकरण के दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या की तुलना करें।
| तत्व | अभिकारकों के परमाणुओं की संख्या (बाईं ओर) | उत्पादों के परमाणुओं की संख्या (दाईं ओर) | |---|---|---| | H | 2 × 2 = 4 | 2 × 2 = 4 | | O | 2 | 2 |
- दोनों ओर परमाणुओं की संख्या समान है, अतः समीकरण संतुलित है।
- संतुलित समीकरण: 2H₂ + O₂ → 2H₂O
एक और उदाहरण: N₂ + H₂ → NH₃ (अमोनिया का निर्माण)
चरण 1: [N₂] + [H₂] → [NH₃]
चरण 2: परमाणुओं की संख्या की सूची
| तत्व | अभिकारकों के परमाणुओं की संख्या (बाईं ओर) | उत्पादों के परमाणुओं की संख्या (दाईं ओर) | |---|---|---| | N | 2 | 1 | | H | 2 | 3 |
चरण 3: नाइट्रोजन को संतुलित करें (NH₃ को 2 से गुणा करें)
- [N₂] + [H₂] → 2[NH₃]
चरण 4: हाइड्रोजन को संतुलित करें (उत्पाद में 2 × 3 = 6 हाइड्रोजन हैं, तो अभिकारक में H₂ को 3 से गुणा करें)
- [N₂] + 3[H₂] → 2[NH₃]
चरण 5: अंतिम जाँच
| तत्व | अभिकारकों के परमाणुओं की संख्या (बाईं ओर) | उत्पादों के परमाणुओं की संख्या (दाईं ओर) | |---|---|---| | N | 2 | 2 | | H | 3 × 2 = 6 | 2 × 3 = 6 |
- संतुलित समीकरण: N₂ + 3H₂ → 2NH₃
समीकरण संतुलित करते समय, कभी भी रासायनिक सूत्र के अंदर के परमाणुओं की संख्या को न बदलें (जैसे H₂O को H₂O₂ न करें)। केवल सूत्र के सामने गुणांक (coefficient) लगाएं।
संयोजन अभिक्रिया
ऐसी अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
- कैल्सियम ऑक्साइड (बिना बुझा चूना) और जल की अभिक्रिया:
- CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + ऊष्मा
- (कैल्सियम ऑक्साइड + जल → बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड))
- यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है, इसमें बड़ी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- बुझे हुए चूने का उपयोग दीवारों की सफेदी करने में होता है।
- कोयले का दहन:
- C(s) + O₂(g) → CO₂(g)
- (कार्बन + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड)
- हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से जल का निर्माण:
- 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)
- (हाइड्रोजन + ऑक्सीजन → जल)
- मैग्नीशियम रिबन का दहन (क्रियाकलाप 1):
- 2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s)
- (मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड)
संक्षेप में: A + B → AB
संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं।
वियोजन अभिक्रिया
ऐसी अभिक्रिया जिसमें एकल अभिकारक टूटकर दो या अधिक उत्पादों में बदल जाता है, उसे वियोजन अभिक्रिया कहते हैं। यह संयोजन अभिक्रिया के विपरीत है।
वियोजन अभिक्रियाओं को संपन्न कराने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है (ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत के रूप में)। इसलिए ये अभिक्रियाएँ प्रायः ऊष्माशोषी होती हैं।
वियोजन के प्रकार:
- ऊष्मीय वियोजन (Thermal Decomposition): जब वियोजन क्रिया ऊष्मा के द्वारा संपन्न होती है।
- उदाहरण: कैल्सियम कार्बोनेट का वियोजन (चूना पत्थर का चूना बनाना)
- CaCO₃(s) $\xrightarrow{\text{ऊष्मा}}$ CaO(s) + CO₂(g)
- (कैल्सियम कार्बोनेट → कैल्सियम ऑक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड)
- उदाहरण: लेड नाइट्रेट का ऊष्मीय वियोजन (क्रियाकलाप 8)
- 2Pb(NO₃)₂(s) $\xrightarrow{\text{ऊष्मा}}$ 2PbO(s) + 4NO₂(g) + O₂(g)
- (लेड नाइट्रेट → लेड ऑक्साइड + नाइट्रोजन डाइऑक्साइड + ऑक्सीजन)
- यहाँ भूरे रंग की नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।
- उदाहरण: सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट का वियोजन (क्रियाकलाप 5)
- 2NaHCO₃(s) $\xrightarrow{\text{ऊष्मा}}$ Na₂CO₃(s) + H₂O(l) + CO₂(g)
- (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट → सोडियम कार्बोनेट + जल + कार्बन डाइऑक्साइड)
- उत्सर्जित CO₂ गैस जलती माचिस की तीली को बुझा देती है।
- विद्युत अपघटन (Electrolytic Decomposition): जब वियोजन क्रिया विद्युत धारा प्रवाहित करने पर होती है।
- उदाहरण: जल का विद्युत अपघटन
- 2H₂O(l) $\xrightarrow{\text{विद्युत}}$ 2H₂(g) + O₂(g)
- (जल → हाइड्रोजन + ऑक्सीजन)
- प्रकाशीय वियोजन (Photolytic Decomposition): जब वियोजन क्रिया प्रकाश की उपस्थिति में होती है।
- उदाहरण: सिल्वर क्लोराइड का प्रकाशीय वियोजन (क्रियाकलाप 9)
- 2AgCl(s) $\xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}}$ 2Ag(s) + Cl₂(g)
- (सिल्वर क्लोराइड → सिल्वर + क्लोरीन)
- श्वेत रंग का सिल्वर क्लोराइड सूर्य के प्रकाश में धूसर (grey) रंग का हो जाता है।
- उदाहरण: सिल्वर ब्रोमाइड का प्रकाशीय वियोजन
- 2AgBr(s) $\xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}}$ 2Ag(s) + Br₂(g)
- इस अभिक्रिया का उपयोग श्याम-श्वेत फोटोग्राफी में होता है।
संक्षेप में: AB → A + B
वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पादों में विभाजित हो जाता है।
वियोजन अभिक्रियाएँ ऊष्माशोषी होती हैं क्योंकि इन्हें संपन्न होने के लिए ऊर्जा (ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत) की आवश्यकता होती है।
विस्थापन अभिक्रिया
वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व, कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देता है, उसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
क्रियाकलाप 6: लोहे की कील और कॉपर सल्फेट विलयन की अभिक्रिया
- अवलोकन:
- कॉपर सल्फेट विलयन का नीला रंग फीका पड़ जाता है।
- लोहे की कील का रंग भूरा हो जाता है (कॉपर जमा होने के कारण)।
- अभिक्रिया:
- Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
- (आयरन + कॉपर सल्फेट → आयरन सल्फेट + कॉपर)
- व्याख्या: आयरन (Fe) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील है, इसलिए आयरन ने कॉपर को उसके सल्फेट विलयन से विस्थापित कर दिया। आयरन सल्फेट का विलयन हल्का हरा होता है, जिससे नीले रंग का फीका पड़ना दिखता है।
अन्य उदाहरण:
- लेड और कॉपर क्लोराइड की अभिक्रिया:
- Pb(s) + CuCl₂(aq) → PbCl₂(aq) + Cu(s)
- (लेड + कॉपर क्लोराइड → लेड क्लोराइड + कॉपर)
- लेड (Pb) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील है।
- जिंक और सिल्वर नाइट्रेट की अभिक्रिया:
- Zn(s) + 2AgNO₃(aq) → Zn(NO₃)₂(aq) + 2Ag(s)
- (जिंक + सिल्वर नाइट्रेट → जिंक नाइट्रेट + सिल्वर)
- जिंक (Zn) सिल्वर (Ag) से अधिक क्रियाशील है।
- जिंक और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया (क्रियाकलाप 3):
- Zn(s) + 2HCl(aq) → ZnCl₂(aq) + H₂(g)
- (जिंक + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → जिंक क्लोराइड + हाइड्रोजन)
- जिंक (Zn) हाइड्रोजन (H) से अधिक क्रियाशील है, इसलिए जिंक ने हाइड्रोजन को अम्ल से विस्थापित कर दिया।
संक्षेप में: A + BC → AC + B (जहाँ A, B से अधिक क्रियाशील है)
विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व, कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है।
तत्वों की क्रियाशीलता श्रेणी (Activity Series) यह निर्धारित करती है कि कौन सा तत्व दूसरे को विस्थापित कर सकता है। अधिक क्रियाशील तत्व ऊपर होते हैं।
द्विविस्थापन अभिक्रिया
वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है और उनमें से एक विपरीत आयनों का युग्म विलयन से अलग हो जाता है (अवक्षेप के रूप में), उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ कहते हैं।
विशेषताएं:
- दो यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान।
- अक्सर अवक्षेप का निर्माण होता है (अवक्षेपण अभिक्रिया)।
- कभी-कभी जल या गैस का निर्माण भी होता है।
उदाहरण:
- सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड की अभिक्रिया (क्रियाकलाप 2):
- Na₂SO₄(aq) + BaCl₂(aq) → BaSO₄(s)↓ + 2NaCl(aq)
- (सोडियम सल्फेट + बेरियम क्लोराइड → बेरियम सल्फेट (अवक्षेप) + सोडियम क्लोराइड)
- यहाँ Ba²⁺ आयन SO₄²⁻ आयन के साथ मिलकर BaSO₄ का सफेद अवक्षेप बनाते हैं। Na⁺ और Cl⁻ आयन मिलकर NaCl बनाते हैं जो विलयन में रहता है।
- यह एक अवक्षेपण अभिक्रिया है।
- लेड नाइट्रेट और पोटैशियम आयोडाइड की अभिक्रिया:
- Pb(NO₃)₂(aq) + 2KI(aq) → PbI₂(s)↓ + 2KNO₃(aq)
- (लेड नाइट्रेट + पोटैशियम आयोडाइड → लेड आयोडाइड (पीला अवक्षेप) + पोटैशियम नाइट्रेट)
- यह भी एक अवक्षेपण अभिक्रिया है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया (उदासीनीकरण):
- NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l)
- (सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → सोडियम क्लोराइड + जल)
- यहाँ H⁺ आयन और OH⁻ आयन मिलकर पानी बनाते हैं, और Na⁺ और Cl⁻ आयन मिलकर सोडियम क्लोराइड बनाते हैं।
- यह एक उदासीनीकरण अभिक्रिया है (अम्ल और क्षार की अभिक्रिया)।
संक्षेप में: AB + CD → AD + CB
द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, जिससे नए उत्पाद बनते हैं, जिनमें से एक प्रायः अवक्षेप होता है।
अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें दो विलयनों को मिलाने पर एक अविलेय ठोस (अवक्षेप) बनता है।
उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction): अम्ल और क्षार के बीच की अभिक्रिया जो लवण और जल बनाती है। यह एक प्रकार की द्विविस्थापन अभिक्रिया है।
ऑक्सीकरण और अपचयन अभिक्रियाएँ (ऑक्सीजन/हाइड्रोजन के आधार पर)
ये अभिक्रियाएँ अक्सर साथ-साथ होती हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रियाएँ (Redox Reactions) भी कहते हैं।
ऑक्सीकरण (Oxidation):
- जब किसी पदार्थ द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है।
- या जब किसी पदार्थ द्वारा हाइड्रोजन का त्याग किया जाता है।
अपचयन (Reduction):
- जब किसी पदार्थ द्वारा ऑक्सीजन का त्याग किया जाता है (या ऑक्सीजन की कमी होती है)।
- या जब किसी पदार्थ द्वारा हाइड्रोजन ग्रहण की जाती है।
क्रियाकलाप 7: कॉपर का ऑक्सीकरण और अपचयन
- कॉपर का ऑक्सीकरण:
- अवलोकन: कॉपर चूर्ण को गर्म करने पर उसकी सतह पर काली परत चढ़ जाती है।
- अभिक्रिया: 2Cu(s) + O₂(g) $\xrightarrow{\text{ऊष्मा}}$ 2CuO(s)
- (कॉपर + ऑक्सीजन → कॉपर ऑक्साइड)
- यहाँ कॉपर ऑक्सीजन ग्रहण कर रहा है, अतः कॉपर का ऑक्सीकरण हो रहा है।
- कॉपर ऑक्साइड का अपचयन:
- अवलोकन: यदि इस गर्म कॉपर ऑक्साइड के ऊपर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाए, तो काली परत भूरे रंग की हो जाती है।
- अभिक्रिया: CuO(s) + H₂(g) $\xrightarrow{\text{ऊष्मा}}$ Cu(s) + H₂O(l)
- (कॉपर ऑक्साइड + हाइड्रोजन → कॉपर + जल)
- यहाँ कॉपर ऑक्साइड ऑक्सीजन खो रहा है, अतः कॉपर ऑक्साइड का अपचयन हो रहा है।
- हाइड्रोजन ऑक्सीजन ग्रहण कर रहा है, अतः हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण हो रहा है।
- यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है क्योंकि ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों साथ-साथ हो रहे हैं।
रेडॉक्स अभिक्रिया के अन्य उदाहरण:
- जिंक ऑक्साइड और कार्बन की अभिक्रिया:
- ZnO(s) + C(s) $\xrightarrow{\text{ऊष्मा}}$ Zn(s) + CO(g)
- यहाँ ZnO का Zn में अपचयन हो रहा है (ऑक्सीजन का त्याग)।
- C का CO में ऑक्सीकरण हो रहा है (ऑक्सीजन का ग्रहण)।
- मैंगनीज डाइऑक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया:
- MnO₂(s) + 4HCl(aq) → MnCl₂(aq) + 2H₂O(l) + Cl₂(g)
- यहाँ MnO₂ का MnCl₂ में अपचयन हो रहा है (ऑक्सीजन का त्याग)।
- HCl का H₂O में ऑक्सीकरण हो रहा है (हाइड्रोजन का त्याग और ऑक्सीजन का ग्रहण)।
ऑक्सीकारक और अपचायक:
- ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent): वह पदार्थ जो ऑक्सीकरण के लिए ऑक्सीजन देता है या हाइड्रोजन लेता है (स्वयं अपचयित होता है)।
- उपरोक्त उदाहरण में CuO और MnO₂ ऑक्सीकारक हैं।
- अपचायक (Reducing Agent): वह पदार्थ जो अपचयन के लिए हाइड्रोजन देता है या ऑक्सीजन लेता है (स्वयं ऑक्सीकृत होता है)।
- उपरोक्त उदाहरण में H₂ और C अपचायक हैं।
ऑक्सीकरण (Oxidation): ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का निकलना।
अपचयन (Reduction): ऑक्सीजन का निकलना या हाइड्रोजन का जुड़ना।
रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं।
इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के आधार पर ऑक्सीकरण-अपचयन
ऑक्सीकरण और अपचयन को इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण के आधार पर भी परिभाषित किया जा सकता है। यह परिभाषा अधिक व्यापक है।
ऑक्सीकरण (Oxidation):
- जब कोई पदार्थ इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
- उदाहरण: Mg → Mg²⁺ + 2e⁻ (मैग्नीशियम इलेक्ट्रॉन त्यागकर ऑक्सीकृत होता है)
अपचयन (Reduction):
- जब कोई पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है।
- उदाहरण: O₂ + 4e⁻ → 2O²⁻ (ऑक्सीजन इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर अपचयित होता है)
रेडॉक्स अभिक्रिया (इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के आधार पर):
- उदाहरण: मैग्नीशियम का ऑक्सीजन में दहन (क्रियाकलाप 1)
- 2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s)
- ऑक्सीकरण (Mg): 2Mg → 2Mg²⁺ + 4e⁻
- अपचयन (O₂): O₂ + 4e⁻ → 2O²⁻
- यहां मैग्नीशियम इलेक्ट्रॉन त्यागकर ऑक्सीकृत हो रहा है, और ऑक्सीजन इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर अपचयित हो रहा है। दोनों प्रक्रियाएं साथ-साथ हो रही हैं, इसलिए यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन के आधार पर): इलेक्ट्रॉन का त्याग।
अपचयन (इलेक्ट्रॉन के आधार पर): इलेक्ट्रॉन का ग्रहण।
इलेक्ट्रॉन त्यागना = ऑक्सीकरण (L.E.O. - Loss of Electrons is Oxidation) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना = अपचयन (G.E.R. - Gain of Electrons is Reduction)
ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ
ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ (Exothermic Reactions):
- वे अभिक्रियाएँ जिनमें उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा का उत्सर्जन होता है।
- अभिक्रिया मिश्रण का तापमान बढ़ जाता है।
- समीकरण में ऊष्मा को उत्पादों की ओर (+) चिह्न के साथ दर्शाया जाता है।
- उदाहरण:
- प्राकृतिक गैस का दहन:
- CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(l) + ऊष्मा
- कैल्सियम ऑक्साइड और जल की अभिक्रिया (क्रियाकलाप 4):
- CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + ऊष्मा
- श्वसन:
- C₆H₁₂O₆(aq) + 6O₂(g) → 6CO₂(g) + 6H₂O(l) + ऊर्जा (ऊष्मा)
- हरी सब्जियों से खाद बनना (अपघटन): यह भी एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है।
- मैग्नीशियम रिबन का दहन (क्रियाकलाप 1): यह भी ऊष्माक्षेपी है।
- जिंक और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया (क्रियाकलाप 3): यह भी ऊष्माक्षेपी है।
ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ (Endothermic Reactions):
- वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों को उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए ऊष्मा का अवशोषण होता है।
- अभिक्रिया मिश्रण का तापमान घट जाता है।
- समीकरण में ऊष्मा को अभिकारकों की ओर (+) चिह्न के साथ या उत्पादों की ओर (-) चिह्न के साथ दर्शाया जाता है।
- उदाहरण:
- लेड नाइट्रेट का ऊष्मीय वियोजन (क्रियाकलाप 8):
- 2Pb(NO₃)₂(s) $\xrightarrow{\text{ऊष्मा}}$ 2PbO(s) + 4NO₂(g) + O₂(g)
- सिल्वर क्लोराइड का प्रकाशीय वियोजन (क्रियाकलाप 9):
- 2AgCl(s) $\xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश}}$ 2Ag(s) + Cl₂(g)
- बेरियम हाइड्रॉक्साइड और अमोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया:
- Ba(OH)₂(aq) + 2NH₄Cl(aq) → BaCl₂(aq) + 2NH₃(g) + 2H₂O(l) - ऊष्मा (तापमान में कमी आती है)
- नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण:
- N₂(g) + O₂(g) → 2NO(g) - ऊष्मा
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा का उत्सर्जन होता है।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction): वह अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा का अवशोषण होता है।
रासायनिक समीकरण को अधिक सूचनात्मक बनाना
रासायनिक समीकरणों को अधिक उपयोगी बनाने के लिए उनमें अतिरिक्त जानकारी जोड़ी जा सकती है।
- भौतिक अवस्था को अभिव्यक्त करना:
- पदार्थों की भौतिक अवस्था को उनके सूत्रों के साथ दर्शाया जाता है:
- ठोस (solid) के लिए (s)
- द्रव (liquid) के लिए (l)
- गैस (gas) के लिए (g)
- जलीय विलयन (aqueous solution) के लिए (aq)
- उदाहरण: 2Pb(NO₃)₂(s) $\xrightarrow{\text{ताप}}$ 2PbO(s) + 4NO₂(g) + O₂(g)
- ऊष्मा में परिवर्तन को अभिव्यक्त करना:
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में: उत्पन्न हुई ऊष्मा की मात्रा (Q) को उत्पादों की ओर (+) चिह्न के साथ।
- उदाहरण: C(s) + O₂(g) → CO₂(g) + Q (ऊष्मा)
- ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं में: अवशोषित हुई ऊष्मा की मात्रा को उत्पादों की ओर (-) चिह्न के साथ या अभिकारकों की ओर (+) चिह्न के साथ।
- उदाहरण: N₂(g) + O₂(g) → 2NO(g) - Q (ऊष्मा)
- गैस के निकलने को अभिव्यक्त करना:
- यदि अभिक्रिया में कोई गैस मुक्त हो रही है, तो इसे ऊर्ध्व तीर (↑) निशान से अभिव्यक्त किया जाता है।
- उदाहरण: Zn(s) + H₂SO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + H₂↑
- अवक्षेप के बनने को अभिव्यक्त करना:
- यदि किसी रासायनिक अभिक्रिया में कोई अवक्षेप बन रहा हो, तो उसे नीचे की ओर तीर (↓) से अभिव्यक्त करते हैं।
- उदाहरण: AgNO₃(aq) + NaCl(aq) → AgCl(s)↓ + NaNO₃(aq)
- विभिन्न परिस्थितियों को अभिव्यक्त करना:
- कभी-कभी रासायनिक अभिक्रियाओं की परिस्थितियाँ जैसे ताप, दाब, उत्प्रेरक आदि को तीर के निशान के ऊपर या नीचे लिखकर दर्शाया जाता है।
- उदाहरण (प्रकाश संश्लेषण):
- 6CO₂(g) + 6H₂O(l) $\xrightarrow{\text{सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल}}$ C₆H₁₂O₆(aq) + 6O₂(g)
- उदाहरण (प्रकाशीय वियोजन):
- 2AgCl(s) $\xrightarrow{\text{सूर्य प्रकाश}}$ 2Ag(s) + Cl₂(g)
रासायनिक समीकरण को सूचनात्मक बनाने के लिए विभिन्न संकेतों (s, l, g, aq, ↑, ↓, ऊष्मा, ताप, उत्प्रेरक) का सही उपयोग करना सीखें। यह बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।