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कचरा और उसका प्रबंधन
Chhattisgarh · Class 9 · 🔬 Science · Chapter 18

कचरा और उसका प्रबंधन

जैव निम्नीकृत कचराजैव अनिम्नीकृत कचराअपघटनकंपोस्टिंगपुनःचक्रण4R सिद्धांत

यह अध्याय छात्रों को कचरे के विभिन्न प्रकारों, जैसे जैव निम्नीकृत और जैव अनिम्नीकृत कचरा, से परिचित कराता है। यह कचरा प्रबंधन के महत्व और विभिन्न तरीकों जैसे कंपोस्टिंग, पुनःचक्रण (रीसाइक्लिंग) और '4R' सिद्धांत (Reduce, Refuse, Reuse, Recycle) पर प्रकाश डालता है। छात्र व्यक्तिगत, स्थानीय और शहरी स्तर पर कचरा प्रबंधन के सफल प्रयासों के उदाहरणों के माध्यम से सीखते हैं, जो उन्हें पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका को समझने में मदद करता है।

कचरे की परिभाषा और उसका सापेक्षिक स्वरूप

कचरा वह पदार्थ है जो हमारे लिए अनुपयोगी हो जाता है। इसका स्वरूप व्यक्ति और स्थिति के अनुसार बदलता रहता है।

  • कचरे का निर्धारण: किसी वस्तु का कचरा होना या न होना उसकी उपयोगिता पर निर्भर करता है
  • उदाहरण: पुराने समाचार-पत्र हमारे लिए कचरा हो सकते हैं, लेकिन कागज मिल के लिए वे कच्चा माल हैं।
  • टूटा-फूटा प्लास्टिक या गत्ता हमारे लिए कचरा है, पर कबाड़ी के लिए आय का स्रोत।
  • कचरे के स्रोत:
  • घरेलू कचरा: सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, प्लास्टिक, काँच, धातु, कागज आदि।
  • औद्योगिक कचरा: कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट।
  • चिकित्सालय कचरा: अस्पतालों से निकलने वाले संक्रमित पदार्थ, दवाइयाँ, सिरिंज आदि।
  • बाजार कचरा: दुकानों से निकलने वाले पैकेजिंग सामग्री, खराब उत्पाद।
  • अन्य संस्थान: स्कूलों, कार्यालयों आदि से निकलने वाला कागज, प्लास्टिक आदि।
  • कचरे की मात्रा: प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है, जिसका उचित प्रबंधन आवश्यक है।

कचरे का पृथक्करण

कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग करना (जैसे गीला और सूखा कचरा) प्रभावी प्रबंधन की पहली सीढ़ी है।

  • लाभ:
  • पुनःचक्रण (Recycling) आसान हो जाता है।
  • खाद बनाने की प्रक्रिया सरल हो जाती है।
  • लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होती है।
  • पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
महत्त्वपूर्ण

कचरे का सीधा संबंध वस्तु के उपयोगी या अनुपयोगी होने से जुड़ा होता है। जो एक के लिए अनुपयोगी है, वह दूसरे के लिए उपयोगी हो सकता है।

💡सुझाव

कचरे की परिभाषा और उसके सापेक्षिक स्वरूप पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। उदाहरणों के साथ समझाना महत्वपूर्ण है।

कचरे का वर्गीकरण: जैव निम्नीकृत और जैव अनिम्नीकृत

कचरे को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है, जो उनके अपघटन की क्षमता पर आधारित है।

1. जैव निम्नीकृत कचरा (Biodegradable Waste)

  • परिभाषा: वह कचरा जो सूक्ष्मजीवों (जैसे जीवाणु और कवक) द्वारा प्राकृतिक रूप से अपघटित होकर सरल पदार्थों में बदल जाता है।
  • प्रक्रिया: इस प्रक्रिया को अपघटन कहते हैं। इसमें जटिल कार्बनिक पदार्थ सरल पदार्थों में टूट जाते हैं।
  • उदाहरण:
  • सब्जियों और फलों के छिलके
  • बचा हुआ भोजन
  • पत्तियाँ, पौधों के अवशेष
  • कागज (कुछ हद तक)
  • गोबर
  • महत्व: इस प्रकार के कचरे का उपयोग खाद बनाने में किया जा सकता है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है।

2. जैव अनिम्नीकृत कचरा (Non-biodegradable Waste)

  • परिभाषा: वह कचरा जो सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से अपघटित नहीं होता और लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है।
  • प्रक्रिया: ये पदार्थ प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा विघटित नहीं होते या बहुत धीरे-धीरे होते हैं।
  • उदाहरण:
  • प्लास्टिक (पॉलीथिन, बोतलें)
  • काँच
  • धातु (लोहा, एल्यूमीनियम)
  • इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-कचरा)
  • सिंथेटिक कपड़े
  • समस्याएँ: ये पर्यावरण में जमा होकर गंभीर प्रदूषण फैलाते हैं, जैसे मृदा प्रदूषण, जल प्रदूषण और वन्यजीवों को नुकसान।
  • प्रबंधन: इनका प्रबंधन पुनःचक्रण (Recycling), पुनःउपयोग (Reuse) या सुरक्षित निपटान (जैसे लैंडफिल) द्वारा किया जाता है।

अपघटन की प्रक्रिया

  • सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, फफूंद) जैव निम्नीकृत कचरे पर क्रिया करते हैं।
  • ये जटिल कार्बनिक पदार्थों को तोड़कर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों में बदल देते हैं।
  • यह प्रक्रिया प्राकृतिक चक्रों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस लौटाती है।
📖परिभाषा

अपघटन (Decomposition): वह प्रक्रिया जिसमें सूक्ष्मजीव जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं।

🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर प्लास्टिक को जैव निम्नीकृत मान लेते हैं। याद रखें, प्लास्टिक जैव अनिम्नीकृत है और पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बना रहता है।

कचरा प्रबंधन के सिद्धांत (चार R)

कचरा प्रबंधन का लक्ष्य कचरे की मात्रा को कम करना और उसके हानिकारक प्रभावों को नियंत्रित करना है। इसके लिए चार 'R' सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण हैं।

1. Reduce (कचरा कम करें)

  • अर्थ: कचरे को उसके उत्पत्ति स्रोत पर ही कम करना। यह कचरा प्रबंधन का सबसे प्रभावी तरीका है।
  • कैसे करें:
  • कम पैकेजिंग वाले उत्पाद खरीदें।
  • अपनी कॉपी के हर पन्ने का उपयोग करें।
  • पुरानी किताबों को संभालकर रखें और दूसरों को पढ़ने के लिए दें।
  • आवश्यकता से अधिक खरीदारी न करें।

2. Refuse (मना करें)

  • अर्थ: उन चीजों को अस्वीकार करना जिनकी हमें आवश्यकता नहीं है या जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं।
  • कैसे करें:
  • प्लास्टिक थैलियों के उपयोग से मना करें और कपड़े या जूट के थैले का उपयोग करें।
  • डिस्पोजेबल वस्तुओं (जैसे प्लास्टिक कप, प्लेट) का उपयोग करने से बचें।
  • अनावश्यक प्रचार सामग्री (पम्फलेट) लेने से मना करें।

3. Reuse (पुनः उपयोग करें)

  • अर्थ: वस्तुओं को बार-बार उपयोग करना जब तक वे पूरी तरह से खराब न हो जाएँ।
  • कैसे करें:
  • प्लास्टिक, काँच की बोतलों और जारों का उपयोग पानी या अन्य सामान रखने के लिए करें।
  • पुराने कपड़ों का उपयोग पोंछा या अन्य कामों के लिए करें।
  • फर्नीचर या इलेक्ट्रॉनिक सामान को ठीक करवाकर दोबारा उपयोग करें।

4. Recycle (पुनःचक्रण करें)

  • अर्थ: कचरे को संसाधित करके नए उत्पाद बनाना। यह जैव अनिम्नीकृत कचरे के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
  • कैसे करें:
  • प्लास्टिक, काँच, धातु और कागज को अलग-अलग इकट्ठा करके पुनःचक्रण इकाइयों तक पहुँचाएँ।
  • रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे (सब्जी/फल के छिलके) को पशुओं को खिलाएँ या खाद बनाएँ।

कचरा प्रबंधन के अन्य तरीके

  • कंपोस्ट खाद बनाना:
  • जैव निम्नीकृत कचरे (सब्जी/फल के छिलके, पत्तियाँ, बचा भोजन) को गड्ढे में डालकर या कंपोस्ट बिन में सूक्ष्मजीवों की क्रिया से खाद में बदलना।
  • यह जैविक खाद (कंपोस्ट) कहलाती है, जो पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम) प्रदान करती है।
  • वर्मी कंपोस्टिंग: केंचुओं की सहायता से कंपोस्ट खाद बनाना। यह प्रक्रिया कचरे को तेजी से और अधिक गुणवत्ता वाली खाद में बदलती है।
  • भू-भरण (Landfills):
  • यह वह स्थान है जहाँ कचरे को जमीन में दबाया जाता है।
  • मुख्यतः जैव अनिम्नीकृत कचरे का निपटान यहाँ किया जाता है।
  • आधुनिक लैंडफिल में कचरे को परत-दर-परत दबाया जाता है और मिट्टी से ढका जाता है ताकि पर्यावरण पर कम से कम प्रभाव पड़े।
  • लैंडफिल से निकलने वाली मीथेन गैस का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
  • भस्मीकरण (Incineration):
  • कचरे को उच्च तापमान पर जलाना
  • यह कचरे की मात्रा को बहुत कम कर देता है और ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।
  • हालांकि, इससे वायु प्रदूषण (धुएँ और राख) का खतरा होता है, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक है।

सफल कचरा प्रबंधन के उदाहरण

  • सूरत शहर का उदाहरण: 1994 में प्लेग फैलने के बाद, शहर ने सख्त कचरा प्रबंधन योजना लागू की।
  • शहर को ज़ोन में बाँटा गया, प्रत्येक ज़ोन के लिए आयुक्त नियुक्त।
  • नागरिकों से शिकायतें प्राप्त करने और 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की व्यवस्था।
  • कचरा फैलाने पर जुर्माना।
  • परिणाम: 18 महीनों में शहर गंदगी मुक्त हो गया।
  • डोम्लूर (कर्नाटक) की महिलाओं का प्रयास:
  • घरेलू स्तर पर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने को सुनिश्चित किया।
  • सूखे कचरे को पुनःचक्रण इकाइयों तक पहुँचाया।
  • परिणाम: फेंके जाने वाले कचरे की मात्रा लगभग आधी हो गई।
  • श्रीनिवास (वेल्लोर, तमिलनाडु) का व्यक्तिगत प्रयास:
  • कचरे को 18-20 श्रेणियों में बाँटा (कागज, गत्ता, लोहा, प्लास्टिक आदि)।
  • जैव निम्नीकृत कचरे का उपयोग जानवरों को खिलाने, गोबर गैस बनाने, खाद बनाने में किया।
  • केंचुओं वाली खाद (वर्मी कंपोस्ट) बनाई।
  • गंदे पानी को तालाब में उपयोग कर मछली पालन, बतख पालन किया।
  • राख से साबुन और अंडे के छिलकों से पौधों के लिए कैल्शियम खाद बनाई।
  • परिणाम: वेल्लोर को कचरा मुक्त बनाया और 4 जिलों के 40 गाँवों तक विस्तार।

ये उदाहरण दर्शाते हैं कि सामुदायिक और व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास कचरा प्रबंधन में कितना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

💡सुझाव

चार R (Reduce, Refuse, Reuse, Recycle) पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। प्रत्येक 'R' को उदाहरणों के साथ समझाना महत्वपूर्ण है।

याद रखें

केंचुओं द्वारा कंपोस्ट बनाने की विधि (वर्मी कंपोस्टिंग):

  1. छायादार स्थान पर 15 सेमी मिट्टी, 10 सेमी घास, 15 सेमी गोबर की परतें बनाएँ।
  2. जल छिड़कें और उत्तम नस्ल के केंचुए छोड़ें।
  3. जूट की बोरी से ढकें और प्रतिदिन जल छिड़कें।
  4. 15 दिन बाद मिश्रण फैलाकर जैव निम्नीकृत कचरा मिलाएँ, फिर ढक दें।
  5. 20-30 दिनों में वर्मी कंपोस्ट तैयार हो जाती है।
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