सीबीएसई कक्षा 9

हिंदी

10

कुल अध्याय

2

भाषाएँ उपलब्ध

अध्याय

1

दो बैलों की कथा

★ SAAVI इसे ऐसे पढ़ाती है:
💡 उदाहरण

अरे! तुम्हें याद है, जब तुम्हारी और तुम्हारे दोस्त की किसी एक की शिकायत टीचर से होती है — और दूसरा दोस्त भी उसके साथ खड़ा हो जाता है, भले ही उसे पता हो कि डांट पड़ेगी? या घर में जैसे तुम और तुम्हारी दीदी/भैया जब एक-दूसरे के लिए मम्मी-पापा से झूठ बोलकर बचाते हो? — बस कुछ ऐसी ही गहरी दोस्ती थी हीरा और मोती के बीच! सोचे ज़रा — ऐसी पक्की दोस्ती में सबसे ज़रूरी चीज़ क्या होती है?

⚠️ गलतफहमी

❌ कई बच्चे सोचते हैं कि जानवर सिर्फ़ खाने-पीने और सोने के बारे में सोचते हैं, और उनमें इंसानों जैसी भावनाएँ नहीं होतीं।

✅ पर ये बिल्कुल गलत है! — इस कहानी में भी तुमने देखा होगा कि हीरा और मोती को एक-दूसरे की चिंता थी, उन्हें आज़ादी प्यारी थी, और ज़ुल्म सहना उन्हें गवारा नहीं था। वे दर्द महसूस करते हैं, खुशी भी और दोस्ती भी — बस हमें उनकी 'भाषा' समझनी आनी चाहिए। तुम्हें क्या लगता है, हम जानवरों की भावनाओं को कैसे समझ सकते हैं, जब वे बोल नहीं पाते?

🔬 गतिविधि

एक काम करो — अपने आस-पास किसी पालतू जानवर (जैसे कुत्ता या बिल्ली) या किसी आवारा जानवर (जैसे गली की गाय या चिड़िया) को कुछ देर के लिए ध्यान से देखो। उनकी हरकतों को, आवाज़ों को समझने की कोशिश करो — वे क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं, क्या वे भूखे हैं या खुश हैं? तुम्हें क्या लगता है, अगली बार जब तुम उन्हें देखो, तो तुम उनके लिए क्या बेहतर कर सकते हो?

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2

ल्हासा की ओर

★ SAAVI इसे ऐसे पढ़ाती है:
💡 उदाहरण

Dekho — kabhi socha hai, humare dada-dadi ke zamane mein jab log door ke mandir ya gaon jaate the, toh kitni mushkil hoti thi? Roads nahi the, gaadiyaan nahi thi, aur kai baar toh sirf paidal hi jaana padta tha. Lhāsā kī Or chapter mein bhi kuch aisa hi hai — Rahul Sankrityayan ji ko Tibbat (Tibet) jaane ke liye kitne papad belne pade, kabhi ek fakir ke bhesh mein, toh kabhi ek bhadra vyakti ke roop mein. Socho zara, agar tumhe bina internet, bina phone ke kisi anjaan jagah jaana pade, toh tum kya-kya tayari karoge aur kaisa bhesh badloge?

⚠️ गलतफहमी

❌ Aksar bachche sochte hain ki Lhāsā kī Or toh bas ek yātrā kī kahānī hai — ghūmne-phirne ki bāt.

✅ Lekin, sach yeh hai ki yeh chapter humein us samay ke Tibbat (Tibet) ke samāaj, log, unki sanskriti aur us mushkil yātrā ke baare mein kitni gehri jaankari deta hai, jo aaj se bilkul alag thi. Yah sirf ghūmna nahin, balki ek aitihāsik aur sāmaajik dastaavez hai.

🔬 गतिविधि

Ek kaam karo — apne ghar ke aas-paas ke ilake ko aise dekho jaise tum kisi anjaan jagah par ho. Apni mummy-papa ya dada-dadi se poocho ki jab woh tumhari umar ke the, toh unke liye sabse mushkil yatra kaun si thi aur unhone kya-kya dekha tha.

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3

उपभोक्तावाद की संस्कृति

4

साँवले सपनों की याद

5

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

6

प्रेमचंद के फटे जूते

7

मेरे बचपन के दिन

8

एक कुत्ता और एक मैना

9

साखियाँ एवं सबद

10

वाख

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सीबीएसई कक्षा 9 · हिंदी

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